COPYRIGHT © RAJIV MANI, Journalist, Patna

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सोमवार, 21 अगस्त 2017

पत्रकार साहब

Poonam Tan
 कहानी / पूनम टांक 
सुधा अपने कमरे में बिस्तर पर औंधी पड़ी एक पत्रिका के पन्ने पलट रही थी। उसके बालों की एक लट लगातार उसके सुर्ख गालों से खेल रही थी। रेडियो पर पुराना गाना बज रहा था। सुधा पत्रिका देखने के साथ ही गीत भी गुनगुना रही थी ... ‘कहीं किसी रोज यूं भी होता हमारी हालत तुम्हारी होती, जो रात हमने गुजारी मरके वो रात तुमने गुजारी होती।
अचानक ही सुधा बोल उठी, वाह! आज भी विविध भारती पर कितने अच्छे गाने आते हंै, जो सीधे मन पर असर करते हैं। वास्तव में किसी की भी मनःस्थिति को समझना कितना मुश्किल है। या यों कह लें कि वर्तमान में मनुष्य सिर्फ अपने दुःख में दुखी और सुख में सुखी रहना चाहता है, उसे किसी और की दुःख परेशानियों से कोई सरोकार ही कहां है। 
सुधा मन ही मन यही सब सोचते हुये पत्रिका देख रही थी, तभी उसकी नज़र शेखर की तस्वीर पर पड़ी। शेखर को देखते ही सुधा के चेहरे पर एक ही पल में अनगिनत भाव मंडराने लगें। शेखर जो सुधा के बहुत अच्छे मित्र हैं, अब शेखर के मन की तो वही जाने, किन्तु सुधा तो हमेशा से ही उन्हें अपना मित्र हो मानती आयी है।
सुधा और शेखर की जान पहचान भी बडे़ अजीब ढंग से हुई थी। उस दिन भी जब सुधा ने अपना लैपटाॅप आॅन किया, तो उसमें कुछ नोटिफिकेशन और फे्रंडरिक्वेस्ट पड़ी थीं। सुधा ने जब चेक किया, तो उसमें एक नाम ऐसा था, जिससे वह खुद तो परिचित ना थी, लेकिन उसके कुछ घनिष्ठ लोग थें, जो उस नाम से जुड़े थे। उसने उत्सुकतावश उस व्यक्ति की प्रोफाइल चेक की। उसका नाम शेखर कपूर था, जो एक जाने-माने अखबार में सब एडिटर थे। सुधा ने रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर ली। कुछ दिनों के बाद सुधा के मैसेंजर पर पत्रकार साहब का एक संदेश आया, जो कि परिचय जानने के उद्देश्य से किया गया था। सुधा ने बिना कुछ सोच-विचार के अपना पूर्ण परिचय उन्हें दे दिया। बस यहीं से उनकी वार्तालाप शुरू हो गयी। 
शुरू में तो शेखर रोज सिर्फ गुडमार्निंग और गुड़ नाइट का मैसेज करते थे और सुधा मुस्करा कर उसका जवाब दे देती थी, परन्तु धीरे-धीरे कब शेखर उसके अन्तर्मन में प्रवेश कर गये, उसे पता ही ना चला। अब तो उसकी पूरी दुनिया ही शेखर बन गये। शेखर की व्यस्तता के बारे में सुधा बखूबी जानती थी, परन्तु फिर भी उनके मैसेज का इन्तजार करती रहती। शेखर सुधा से न तो कभी मिले थे और ना ही फोन से बात हुयी थी, बस आॅनलाइन चैटिंग ही हो जाती थी। 
एकबार तो इन्तजार इतना लम्बा हो गया कि सुधा का दिन-रात काटना मुश्किल हो गया। करीब एक महीने के बाद शेखर ने मैसेज किया ... ‘‘सुधा कैसी हो?’’
सुधा का तो सब्र का बांध टूट पड़ा, वह फूट-फूट कर रोने लगी। न जाने शेखर से यह कैसा जुड़ाव था, जिसे सुधा ना तो खुद समझ पा रही थी और न ही उन्हें समझा पा रही थी। उस दिन तो शेखर भी बहुत घबरा गये थे। सुधा ने बहुत देर बाद खुद को सम्भालते हुये कहा - ‘‘देखिये पत्रकार साहब, मुझे आपसे कुछ नहीं चाहिए, बस आप सही सलामत हैं, ये मैसेज मुझे रोज करते रहिये।’’
‘‘जैसा आप कहें मैम।’’
फिर उन्होंने माहौल को थोड़ा हल्का बनाने के लिए हंसते हुये कहा ... ‘‘अरे भाई हम पत्रकार लोगों के विषय में जानकर क्या करियेगा, हमारी अपनी तो कोई जिन्दगी होती ही नहीं, बस समाज सेवा ही हमारा मूल कर्तव्य है, आज यहां तो कल वहां, हमसे दिल लगाकर कुछ हासिल न होगा।’’
सुधा खामोश हो गयी। शेखर थोड़ी देर बार फिर बोले ... ‘‘सुधी कहीं सच में तो हमसे दिल नहीं लगा बैठी ना?’’
सुधा हंसते हुये बोली ... ‘‘पत्रकार साहब, अभी हमारे इतने भी बुरे दिन नहीं आये हैं।’’ ... और दोनों हंसने लगंे। लेकिन सच्चाई तो यही थी कि अब शेखर सुधा की आदत बन चुके थे।
एकबार अचानक ही शेखर को किसी बडे़ प्रोजेक्ट के सिलसिलें मे बाहर जाना था। उन्होनंे उस दिन पहली बार सुधा को फोन किया। फोन बहुत जल्दबाजी में किया गया था। वे हड़बड़ाते से बोले - ‘‘हेलो सुधा, मुझे कुछ दिनों के लिए बाहर जाना है, इसलिए अब बात ना हो पायेगी, और बिना सुधा की बात सुने उन्होंने फोन काट दिया।’’
बस उस दिन से सुधा इंतजार करने लगी, कब दिन महीनों में और महीने सालों में बदल गये, पता ही ना चला। सुधा की शादी अमृत से हो गयी। शेखर अब बस उसकी यादों में ही थे, जिसका वास्तविकता से दूर-दूर तक कोई लेना देना ना था।
सुधा अपने वैवाहिक जीवन में बहुत खुश थी, लेकिन उसके अन्तर्मन में कुछ दबा था, जिसे वह किसी के भी साथ सांझा न कर सकी। अचानक मिनी दौड़ती हुयी आयी और सुधा को झंझोड़ते हुये बोली - ‘‘मम्मा, आज आप मुझे स्कूल से लेने क्यूं नहीं आयीं?’’ 
तब सुधा की नींद टूटी व मिनी को बहलाते हुये हकलाकर बोली, ‘‘ओ ओ साॅरी बेटा, आज काम करते-करते देर हो गयी’’।
मिनी ने पत्रिका के खुले पन्ने पर छपी तस्वीर को देखते हुये पूछा - ‘‘मम्मा, ये अंकल कौन हैं? जिन्हें गिफ्ट मिल रहा है’’। 
‘‘बेटा ये कपूर अंकल हैं और उन्हें गिफ्ट नहीं पुरस्कार मिल रहा है’’।
पत्रकारों को बस अपने काम के अलावा कुछ याद ही कहां होता है, वे तो वहीं रूक गये, लेकिन वक्त कहां रूका, वह तो आगे बहुत आगे निकल गया। शेखर का प्रोजेक्ट तो पूरा हो गया, किन्तु सुधा के अन्दर अभी भी कुछ अधूरा-सा रह गया जो कभी पूरा नहीं हो सकता।
सुधा अपने में ही बोले जा रही थी और मिनी कब की खेलने चली गयी थी। 
पूनम टांक इलाहाबाद की रहने वाली हैं और इनकी कहानियां विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी है।
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बुधवार, 26 जुलाई 2017

राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद का प्रोफाइल

सार्वजनिक जीवन और समाज में समतावाद तथा अखण्डता के पैरोकार रहे वकील, दिग्गज राजनीतिक प्रतिनिधि श्री रामनाथ कोविंद का जन्म 01 अक्टूबर, 1945 को उत्तर प्रदेश में कानपुर के निकट परौंख में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री मैकूलाल और माता का नाम श्रीमती कलावती था।
25 जुलाई, 2017 को भारत के 14वें राष्ट्रपति का कार्यभार ग्रहण करने से पहले श्री कोविंद ने 16 अगस्त, 2015 से 20 जून, 2017 तक बिहार के 36वें राज्यपाल के रूप में अपनी सेवा दी ।
शैक्षिक योग्यता और व्यावसायिक पृष्ठभूमि : श्री कोविंद ने अपनी स्कूली शिक्षा कानपुर में ग्रहण की और कानपुर विश्वविद्यालय से बी.कॉम तथा एलएलबी की डिग्री हासिल की। 1971 में उन्होंने दिल्ली बार काउंसिल के साथ एक वकील के रूप में नामांकन किया। श्री कोविंद 1977 से लेकर 1979 तक दिल्ली उच्च न्यायालय में केन्द्र सरकार के वकील रहे तथा 1980 से 1993 तक उच्चतम न्यायालय में केन्द्र सरकार के वकील रहे। 1978 में वे उच्चतम न्यायालय के ‘एडवोकेट-ऑन-रिकार्ड’ बने। 1993 तक उन्होंने कुल 16 साल तक दिल्ली उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में वकालत की।
संसदीय और सार्वजनिक जीवन : श्री कोविंद को अप्रैल, 1994 में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा का सदस्य चुना गया। उन्होंने लगातार दो बार राज्यसभा के सदस्य के रूप में मार्च, 2006 तक कार्य किया। श्री कोविंद ने विभिन्न संसदीय समितियों जैसे अनुसूचित जाति / जनजाति कल्याण संबंधी संसदीय समिति, गृह मामलों की संसदीय समिति, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस पर संसदीय समिति, सामाजिक न्याय और अधिकारिता संबंधी संसदीय समिति और कानून और न्याय संबंधी संसदीय समितियों में सेवा की। वह राज्यसभा हाउस कमेटी के चेयरमैन भी रहे। श्री कोविंद बी.आर. अम्बेडकर विश्वविद्यालय के प्रबंधन बोर्ड के सदस्य तथा भारतीय प्रबंधन संस्थान कोलकाता के बोर्ड ऑफ गवर्नस के सदस्य भी रहे। वह संयुक्त राष्ट्र में गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य भी रहे और अक्टूबर, 2002 में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया।
इन पदों पर किया कार्य :
2015-17 : बिहार के राज्यपाल
1994-2006 : उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य
1971-75 और 1981 : महासचिव, अखिल भारतीय कोली समाज
1977-79 : दिल्ली उच्च न्यायालय में केंद्र सरकार के वकील
1982-84 : सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के अधिवक्ता।
व्यक्तिगत विवरण : श्री कोविंद का विवाह 30 मई, 1974 को श्रीमती सविता कोविंद से हुई। श्री कोविंद के पुत्र का नाम प्रशांत कुमार और पुत्री का नाम सुश्री स्वाति है। पढ़ने-लिखने के शौकिन राष्ट्रपति कोविंद को राजनीतिक और सामाजिक परिवर्तनों, कानून और इतिहास तथा धर्म संबंधी किताबें पढ़ने में गहरी दिलचस्पी है। अपने लम्बे सार्वजनिक जीवन के दौरान श्री कोविंद ने कई देशों की यात्रा की है। संसद सदस्य के रूप में उन्होंने थाईलैंड, नेपाल, पाकिस्तान, सिंगापुर, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, फ्रांस, ब्रिटेन और संयुक्त राज्य अमेरिका का दौरा भी किया है।
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22 राज्यों में चुंगी (चेक पोस्ट) समाप्त

 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) 1 जुलाई, 2017 से लागू किया गया है। इसके लागू होते ही भारत में 22 राज्यों के सभी चुंगी (चेक पोस्ट) समाप्त कर दिये गये हैं।
विवरण इस प्रकार हैं : आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, गुजरात, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, सिक्किम, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गोवा, हरियाणा, झारखंड, ओडिशा, पुडुचेरी, राजस्थान, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड।
राज्य जहां चुंगियों (चेक पोस्ट) को समाप्त करने की प्रक्रिया जारी है : असम, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, नागालैंड, पंजाब, मिजोरम, त्रिपुरा।

जेल बंदियों के लिए वेब एप्लीकेशन लांच 

नई दिल्ली : राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) को जेल में कैद बंदियों को कानूनी सहायता प्रदान करने की जिम्मेदारी दी गई है। 28 जून, 2017 को भारतीय विधि संस्थान में आयोजित सम्मेलन में एनएएलएसए ने जेल बंदियों को निःशुल्क कानूनी सेवाएं देने के लिए वेब एप्लीकेशन लांच और एनआईसी के माध्यम से विकसित कानूनी सेवा प्रबंधन प्रणाली लांच किया। वेब एप्लीकेशन के माध्यम से राज्य कानूनी सेवा प्राधिकार तथा जिला कानूनी सेवा प्राधिकार अपने / अपने क्षेत्राधिकार के जेलों में प्रत्येक बंदी के लिए डाटा भरेंगे, ताकि अदालत में वकील के जरिये उनका प्रतिनिधित्व किया जा सके। यह साफ्टवेयर अपनी रिपोर्ट में कैदियों की कुल संख्या, बिना वकील वाले कैदियों की कुल संख्या, कानूनी सेवा अधिवक्ताओं द्वारा प्रतिनिधित्व किए गए बंदियों की संख्या और अपने निजी वकीलों द्वारा प्रतिनिधित्व कैदियों की संख्या का पता लग जायेगा।
सभी सूचनाएं राज्यवार, जिलेवार, और प्रत्येक जेल के संबंध में उपलब्ध होंगी। रिपोर्ट में कैदी के बंद रहने की अवधि की जानकारी मिलेगी और इससे यह सूचना प्राप्त होगी कि अपराध प्रक्रिया संहिता के सेक्शन 436 (ए) के तहत बंदी जमानत का पात्र है या नहीं। यह वेब एप्लीकेशन कानूनी सेवा प्रणाली को और पारदर्शी बनाएगा और कहीं से भी सभी सक्षम पदाधिकारी कैदियों को दी जाने वाली कानूनी सहायता की अनुमति पर नजर रख सकेंगे, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि अदालत में पेशी के पहले दिन से सभी बंदियों का प्रतिनिधित्व प्राप्त है।
वेब एप्लीकेशन उच्चतम न्यायलय के न्यायाधीश और एनएएलएसए के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा ने लांच किया। इस अवसर पर 18 राज्यों के कानूनी सेवा प्राधिकार के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ सदस्य सचिव शामिल हुए। वेब एप्लीकेशन लांच होने के बाद एनआईसीपीटी ने ओरियेंटेशन सत्र का आयोजन किया।
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गुरुवार, 29 जून 2017

बिहार लीची उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य

  • बिहार में 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल से लगभग 300 हजार मीट्रिक टन लीची का उत्पादन
  • भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र एवं राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र के वैज्ञानिकों ने लीची को उपचारित कर तथा कम तापमान पर 60 दिनों तक भंडारित कर रखने में सफलता पायी
नई दिल्ली : केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि केन्द्र सरकार का मुख्य उद्देश्य लीची के विकास एवं उत्पादन बढ़ाने के लिए शोध करके नई-नई किस्मों एवं तकनीकों का विकास करना तथा लीची संबंधी जानकारी को प्रसार विभाग को उपलब्ध कराना है। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने यह बात मुसाहारी, मुजफ्फरपुर, बिहार में लीची प्रसंस्करण संयंत्र के उद्घाटन और सह प्रशिक्षण के अवसर पर कही।
राधा मोहन सिंह ने कहा कि बिहार लीची उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य है। अभी बिहार में 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल से लगभग 300 हजार मीट्रिक टन लीची का उत्पादन हो रहा है। बिहार का देश के लीची के क्षेत्रफल एवं उत्पादन में लगभग 40 प्रतिशत का योगदान है। लीची के महत्व को देखते हुए 6 जून, 2001 को यहां राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र की स्थापना की गयी।
श्री सिंह ने कहा कि बिहार के कुल क्षेत्रफल एवं उत्पादन में मुजफ्फरपुर जिले का योगदान बहुत अच्छा है, परन्तु लीची उत्पादकता जो अभी लगभग 8.0 टन की है, उसे बढ़ाने की जरूरत है। इस दिशा में सभी सरकारी संस्थानों, सहकारी समितियों एवं किसानों को आगे आना होगा। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि यह खुशी की बात है कि भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र एवं राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र के वैज्ञानिकों ने लीची फल को उपचारित करके तथा कम तापमान पर 60 दिनों तक भंडारित करके रखने में सफलता पायी हैं। इसका एक प्रसंस्करण संयंत्र भी विकसित किया गया है। श्री सिंह ने कहा कि यह तकनीक निश्चित रूप से लीची उत्पादकों एवं व्यापारियों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी। श्री सिंह ने कहा कि इस तकनीक को प्रभावशाली बनाने के लिए उत्पादकों को अच्छी गुणवत्ता के फल का उत्पादन करना होगा, जिसके लिए राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र, मुजफ्फरपुर ने अनेक तकनीकों का विकास किया है। राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र, मुजफ्फरपुर प्रत्येक वर्ष लगभग 35-40 हजार पौधे देश के विभिन्न संस्थानों व राज्यों को उपलब्ध करा रहा है। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र, आईसीएआर के अन्य संस्थानों तथा राज्यों के कृषि विश्वविद्यालयों एवं केन्द्र तथा राज्य सरकारों के विकास प्रतिष्ठानों जैसे - राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड, एपीडा, राष्ट्रीय बागवानी मिशन आदि के साथ मिलकर कार्य कर रहा है।
श्री सिंह ने कहा कि हमारे वैज्ञानिक दिन-रात मेहनत करके उन्नत किस्मों और कृषि क्रियाओं का विकास कर रहे हैं, जिसे राज्य सरकार एवं कृषि विज्ञान केन्द्रों और अन्य संस्थाओं द्वारा आम जनता तक पहुंचाने की जरूरत है। अपने सीमित संसाधनों के माध्यम से केन्द्र ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् की फाॅरमर्स फस्र्ट परियोजना का क्रियान्वयन पूर्वी चंपारण जिले में किया है, जिसमें 8 गांव (मेहसी प्रखंड - उझिलपुर, बखरी नजिर, दामोदरपुर गांव, चकिया प्रखंड - खैरवा, रामगढ़वा, विषनुपरा ओझा टोला - वैशहा एवं चिंतमानपुर - मलाही टोला गांव) के 1,000 किसान परिवार अनेक तकनीकों का लाभ ले रहे हैं। परिषद की यह एक अनोखी पहल है, जिसमें किसानों द्वारा ही उन्नत तकनीक का परीक्षण किया जा रहा है। इसे और अधिक लोगों तक पहुंचाने की जरूरत है। ‘मेरा गांव-मेरा गौरव’ कार्यक्रम के माध्यम से भी वैज्ञानिक अपनी तकनीकों को कुछ गांवों तक पहुंचाने में सफल रहे हैं। केन्द्र ने सायल हेल्थ कार्ड की योजना भी शुरू की है, जिसके माध्यम से किसानों के बागों का परीक्षण करके उन्हें उचित सलाह दी जा रही है। बिहार ही नहीं, देश के कई क्षेत्र हैं जहां लीची की सफल बागवानी हो सकती है। अतः इन क्षेत्रों में भी शोध को बढ़ावा देने की जरूरत है। श्री सिंह ने इस अवसर पर सभी वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों को बधाई दी और उम्मीद जताई कि इस संयंत्र का भरपूर उपयोग करके बिहार एवं देश के लीची किसानों, उत्पादकों एवं व्यापारियों को आमदनी बढ़ाने में मदद की जा सकेगी।
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भारत दुग्ध उत्पादन में प्रथम

  • राष्ट्रीय गोकुल मिशन की तरह ‘गिर गाय अभ्यारण्य’ को मंजूरी
  • सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने को प्रतिबद्ध
नई दिल्ली : केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि भारत सरकार द्वारा पशुपालन के क्षेत्र में गुजरात में अनेक नई पहल की गई हैं। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत गोकुल ग्राम की तर्ज पर ‘गिर गाय अभ्यारण्य’  स्थापित करने की मंजूरी दी गई है। यह धर्मपुर, पोरबंदर में स्थापित किया जाएगा। पशुधन बीमा कवरेज में जहां पहले 2 दुधारू पशुओं को शामिल किया गया था, वहीं अब इसमें 5 दुधारू पशुओं और 50 छोटे जानवरों को शामिल किया गया है। यह योजना राज्य के सभी जिलों में लागू कर दी गई है, जबकि इससे पहले इसमें 15 जिले ही शामिल थे। वर्ष 2014-16 के दौरान राज्य में लगभग 26,000 पशुओं का बीमा किया गया। पशु-चिकित्सा शिक्षा में चिकित्सकों की कमी को पूरा करने के लिए जूनागढ़ में एक कॉलेज स्थापित किया गया है। कृषि मंत्री ने यह बात कामधेनु विश्वविद्यालय, साबरकांठा, गुजरात में पॉली-टेक्नीक के उद्घाटन के अवसर पर कही।
कृषि मंत्री ने कहा कि यह बड़े गर्व का विषय है कि देश दुग्ध उत्पादन में प्रथम स्थान पर है। वर्ष 2015-16 में दुग्ध उत्पादन की वृद्धि दर 6.28 प्रतिशत रही है, जिससे कुल उत्पादन 156 मिलियन टन तक पहुंच गया है। इससे भारत में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता औसतन 337 ग्राम प्रतिदिन हो गई है, जबकि विश्वस्तर पर यह औसतन 229 ग्राम ही है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2011-14 के मुकाबले वर्ष 2014-17 में दुग्ध उत्पादन वृद्धि 16.9 प्रतिशत हुई है।
उन्होंने कहा कि ज्यों-ज्यों शहरी एवं ग्रामीण परिवारों का जीवन स्तर बढ़ता जा रहा है, त्यों-त्यों पशुजन्य प्रोटीन की मांग भी बढ़ती जा रही है। इसलिए यह आवश्यक है कि हम पशुधन, मुर्गी एवं मछली उत्पादन की निरन्तर वृद्धि की ओर प्रयत्नशील हों, जिससे देश का प्रत्येक नागरिक सुपोषित और स्वस्थ रहे। इसलिए पशु-चिकित्सकों का यह कर्तव्य है कि वे पशुजन्य प्रोटीन की उपलब्धता को अधिकाधिक बढ़ाकर देश को स्वस्थ बनाने में योगदान दें।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसलिए किसानों की आय को दोगुना करने के भारत सरकार के संकल्प में पशु-चिकित्सा क्षेत्र की महती भूमिका है। पशु स्वस्थ रहेगा, तो उसकी उत्पादकता बढ़ेगी, जिससे स्वतः ही किसान की आय बढ़ेगी और राष्ट्र आर्थिक खुशहाली के मार्ग पर आगे बढ़ेगा।
कृषि मंत्री ने कहा कि भारत में पशुधन की संख्या विश्व में सबसे ज्यादा 512.05 मिलियन है, जिसमें 199.1 मिलियन गोपशु, 105.3 मिलियन भैंस, 71.6 मिलियन भेड़ और 140.5 मिलियन बकरी हैं। बकरियों की संख्या के मामले में भारत का विश्व में दूसरा स्थान है और भारत की पशु संख्या में इसकी लगभग 25 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। भारतीय पोल्ट्री इंडस्ट्री भी विश्व के दूसरे सबसे बड़े बाजार के रूप में उभर रही है, जिसमें 63 बिलियन अण्डा और 649 मिलियन पोल्ट्री मीट उत्पादन शामिल है। भारत की समुद्रीय एवं फिश इंडस्ट्री लगभग 7 प्रतिशत की यौगिक वार्षिक वृद्धि दर के साथ आगे बढ़ रही है। कुल मिलाकर, भारतीय पशुधन सेक्टर तेज गति से आगे बढ़ रहा है और ग्लोबल बाजार में एक प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में उभर रहा है।
कृषि मंत्री ने कहा कि भारत सरकार का विशेष जोर है कि विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों में शिक्षा की गुणवत्ता अंतर्राष्ट्रीय स्तर की हो। इस दिशा में आईसीएआर की पांचवीं डीन समिति की रिपोर्ट को अनुमोदित कर दिया गया है। स्टूडेन्ट और आर्या जैसी योजनाएं स्कॉलरशिप के साथ प्रारंभ की गई है। छात्रों की स्कॉलरशिप को भी बढ़ाया गया है। उन्होंने आखिर में कहा कि राष्ट्र की समृद्धि के लिए देश की कृषि की प्रगति और किसान को खुशहाल बनाने के लिए एकसाथ मिलकर प्रयास करने की जरूरत है। कृषि आगे बढ़ेगी, किसान खुशहाल होगा, तो निश्चित रूप से राष्ट्र आगे बढ़ेगा।
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पद्म पुरस्कार के नामांकन की आखिरी तिथि 15 सितंबर

 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : पद्म पुरस्कार 2018 के लिए नामांकन की प्रक्रिया 1 मई, 2017 से शुरू है। पद्म पुरस्कार 2018 के लिए नामांकन प्राप्त करने की अंतिम तिथि 15 सितंबर, 2017 है। पद्म पुरस्कार के लिए नामांकन / सिफारिशें केवल गृह मंत्रालय द्वारा डिजाइन किए गए पद्म पोर्टल पर, जो www.padmaawards.gov.in पर उपलब्ध हैं, ऑनलाइन ही प्राप्त की जायेंगी। पद्म पोर्टल पर सभी पिछले पुरस्कार विजेताओं का विवरण भी उपलब्ध है। 15 सितंबर, 2017 के बाद प्राप्त नामांकनों पर विचार नहीं किया जाएगा। 

स्वीडन ने स्मार्ट सिटी के विकास में रुचि दिखायी

नई दिल्ली : देश में स्मार्ट सिटी के विकास की पहल में अपनी दिलचस्पी व्यक्त करते हुए स्वीडन ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के अतिरिक्त सतत व हरित सार्वजनिक परिवहन को प्रोत्साहित करने के लिए अपनी विशेषज्ञता और तकनीक को अमल में लाने के लिए एक संयुक्त कार्य योजना का सुझाव दिया है।
स्वीडन की यूरोपीय मामले एवं व्यापार मंत्री एन लिंडे ने शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू से भेंट की और स्मार्ट सिटी के विकास संबंधी मुद्दों को लेकर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 में भारत और स्वीडन ने सतत शहरी विकास के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे और स्मार्ट सिटी अभियान ने इस समझौता ज्ञापन को एक मूर्तरूप देने के लिए एक अवसर प्रदान किया है।
नई दिल्ली में स्वीडन की मंत्री ने कहा कि अपशिष्ट प्रबंधन, शहरी परिवहन समाधान, वायु को स्वच्छ करने, स्मार्ट पार्किंग प्रणाली, वास्तविक समय सूचना प्रणाली, कमांड एवं कंट्रोल सिस्टम इत्यादि के क्षेत्र में उनका देश वैश्विक नेता है। ये क्षेत्र भारत की स्मार्ट सिटी परियोजना का अभिन्न अंग हैं। इसके बाद उन्होंने कहा कि स्वीडन की कंपनी स्कैनिया जल्द ही नागपुर में 55 इथोनॉल बसों का परिचालन शुरू करेगी।
श्री नायडू ने इस बात को रेखांकित करते हुए कि स्मार्ट सिटी अभियान से भारतीय और विदेशी दोनों कंपनियों के लिए निवेश के अत्यधिक अवसर पैदा होंगे, कहा कि चयनित स्मार्ट सिटीज के लिए स्वीडन की तकनीक से लाभान्वित होना बहुत अच्छा होगा, खासतौर पर सार्वजनिक परिवहन और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में। उन्होंने स्वीडन की मंत्री को सुझाव दिया कि वह स्वीडन की कंपनियों को संबंधित शहरों में स्मार्ट सिटी योजना के कार्यान्वयन में भागीदारी के लिए साथ आने की सलाह दें।
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केशरी नाथ बने बिहार के राज्यपाल

पटना : भारतीय स्वतंत्रता-प्राप्ति के पश्चात् बिहार के 37वें महामहिम राज्यपाल के रूप में केशरी नाथ त्रिपाठी ने शपथ ली। इसके पूर्व भी पश्चिम बंगाल राज्य के राज्यपाल श्री त्रिपाठी ने बिहार के राज्यपाल के कृत्यों के निर्वहन हेतु शपथ ली थी और इनका कार्यकाल 27 नवम्बर, 2014 से प्रारंभ होकर 15 अगस्त, 2015 तक रहा था।
राज्यपाल ने हिन्दी भाषा में शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव, बिहार विधान सभा के अध्यक्ष विजय कुमार चैधरी, बिहार विधान परिषद् के उप-सभापति हारूण रषीद, बिहार विधान परिषद् मंे नेता-प्रतिपक्ष, बिहार विधान सभा में नेता-प्रतिपक्ष, बिहार सरकार के कई मंत्रीगण, न्यायाधीषगण, बिहार विधानमंडल के कई सदस्यगण, विभिन्न आयोगांे, समितियांे, बोर्डों, निगमों, प्राधिकारों आदि के अध्यक्ष/उपाध्यक्ष, राज्य सरकार के वरीय प्रशासनिक अधिकारीगण, विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक दलों के प्रतिनिधिगण एवं अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।
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1 जुलाई से जीएसटी लागू

 संक्षिप्त खबरें 
जम्मू कश्मीर को छोड़ सभी राज्यों व संघ शासित प्रदेशों ने राज्य जीएसटी अधिनियम को मंजूरी दी
नई दिल्ली : जम्मू कश्मीर को छोड़कर सभी राज्यों/संघ शासित प्रदेशों ने राज्य वस्तु और सेवा कर (एसजीएसटी) अधिनियम को मंजूरी दे दी है। केरल ने जीएसटी अधिनियम को मंजूरी देते हुए एक अध्यादेश जारी किया, जबकि पश्चिम बंगाल इस संबंध में 15 जून, 2017 को एक अध्यादेश जारी कर चुका है। अब केवल जम्मू कश्मीर राज्य बचा है, जिसे राज्य जीएसटी अधिनियम को पारित करना है। अतः 30 राज्यों/संघ शासित प्रदेशों सहित लगभग समूचा देश 1 जुलाई, 2017 से सुचारू तरीके से जीएसटी लागू करने के लिए तैयार है।
जीएसटी लागू होने के बाद आम आदमी के दैनिक उपयोग वाली उपभोक्ता वस्तुएं सस्ती हो जाएंगी। जीएसटी कानून के प्रभावी हो जाने के बाद निम्नलिखित वस्तुओं पर जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) शून्य दर के साथ लागू होगा। 
निम्नलिखित वस्तुएं आम आदमी को सस्ती मिलेंगी :
  • खाद्यान्न एवं आटा
  • मोटे अनाज
  • दालें
  • आटा
  • मैदा
  • बेसन

पंजीकृत ट्रेडमार्क वाली वस्तुओं को छोड़कर जिनके मामले में जीएसटी 5 फीसदी की दर से लगेगा।
  • ताजा दूध
  • ताजा सब्जियां एवं ताजे फल
  • मुरमुरा (मूरी)
  • सामान्य नमक
  • पशु चारा
  • कार्बनिक खाद
  • जलावन लकड़ी
  • कच्चा रेशम, कच्चा ऊन, जूट
  • हस्त संचालित कृषि उपकरण।

पटना सहित 30 और शहर स्मार्ट सिटी घोषित

नई दिल्ली : केन्द्र सरकार ने स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किए जाने के लिए 30 और शहरों का चयन किया है। इन्हें मिलाकर 25 जून, 2015 को घोषित स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत शहरों की कुल संख्या 90 हो गई है।
नए शहरों के नामों की घोषणा शहरी रूपांतरण के बारे में आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यशाला में आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने की। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत अभी 40 शहर और शामिल किए जाने थे, जिनके लिए 45 शहरों से प्रस्ताव प्राप्त हुए, लेकिन केवल 30 का चयन किया गया, क्योंकि इस मिशन की घोषणा करते समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने निर्देश दिया था कि नागरिकों की आकांक्षाओं के अनुरूप सुविधाएं जुटाने के लिए यह सुनिश्चित किया जायेगा कि केवल व्यवहार्य और साध्य योजनाएं इसमें शामिल की जाएं।
श्री नायडू ने बताया कि घोषित 30 शहरों की स्मार्ट सिटी योजना के लिए रु. 46,879 करोड़ के व्यय का प्रस्ताव है। उन्होंने बताया कि शेष 10 स्लॉटों के लिए 20 शहरों के बीच प्रतिस्पर्धा है। श्री नायडू ने बताया कि स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किए जाने के कार्यक्रम के अंतर्गत शहरों का चयन सही वक्त पर किया जा रहा है और शेष शहर खाली स्लॉटों के लिए शीघ्र ही अपनी संशोधित स्मार्ट सिटी योजनाएं प्रस्तुत करेंगे।

केंद्र द्वारा हिंदी थोपने का कोई विचार नहीं 

नई दिल्ली : मीडिया के एक वर्ग में यह खबर आई थी कि केंद्र सरकार हिंदी थोपने की कोशिश कर रही है। इस संबंध में गृह मंत्रालय के आधिकारिक भाषा विभाग द्वारा जारी प्रस्ताव का उल्लेख करते हुए यह दावा किया गया था कि हिंदी जानने वाले संसद सदस्यों और मंत्रियों के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे हिंदी में ही अपने भाषण और बयान जारी करें।
उल्लेखनीय है कि 1976 में आधिकारिक भाषा पर संसद समिति का गठन किया गया था और वह तभी से काम कर रही है। इस समिति ने अपनी रिपोर्ट के 9 भाग सौंप दिए हैं। समिति की रिपोर्ट के 9वें भाग को 2 जून, 2011 में राष्ट्रपति को सौंपा गया था। समिति के तत्कालीन अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ने 117 अनुमोदन किये थे। चूंकि समिति के सुझावों पर राज्य सरकारों और केंद्र सरकार के मंत्रालयों व विभागों की राय आमंत्रित की जानी थी, इसलिए राष्ट्रपति द्वारा सुझावों पर विचार करने और उन्हें स्वीकार करने के पूर्व समय लगा था।
अनुमोदन नंबर 105 इस प्रकार है - ‘माननीय राष्ट्रपति और सभी मंत्रियों सहित समस्त विशिष्टजनों, खासतौर से जो हिंदी पढ़ने और बोलने में सक्षम हैं, उनसे आग्रह किया जाता है कि वे अपने भाषण/बयान केवल हिंदी में ही दें।’
केंद्र सरकार ने उपरोक्त अनुमोदन को स्वीकार करते हुए 31 मार्च, 2017 को एक प्रस्ताव जारी किया था। समिति का अनुमोदन बिलकुल स्पष्ट है। वह आग्रह के रूप में है, न की आदेश/निर्देश के रूप में। उपरोक्त अनुमोदन आधिकारिक भाषा हिंदी के संबंध में संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप है। इसके अलावा अनुमोदन प्रोत्साहन एवं प्रेरणा के जरिये आधिकारिक भाषा के उन्नयन पर आधारित है, जो सरकार की नीति के अनुपालन में है।
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रविवार, 23 अप्रैल 2017

नव काव्यांजलि एक निर्भीक अभिव्यक्ति

समीक्षक : बसंत कुमार राय
 पुस्तक समीक्षा 
राजीव मणि द्वारा संपादित ‘नव-काव्यांजलि’ में ‘अपनी बात’ कहते हुए संपादक की यह उक्ति अच्छी लगी कि संग्रह में मौजूद गलतियों की जवाबदेही उन पर है, लेकिन खूबियों का श्रेय कवियों को जाता है। प्रश्न उठता है कि किस प्रकार की गलतियों के लिए वे दायित्व ले रहे हैं? क्या इनमें रचनागत त्रुटियाँ भी शामिल है? यदि हाँ, तो कमियों के बचाव के लिए उनका पक्ष अनूठा है।
 किसी भी कविता में कविता इस बात पर निर्भर करती है कि कवि वस्तु को किस तरह देखता है, क्योंकि वस्तु की भौतिक सत्ता कविता में गौण हो जाती है। ऐसे में कवि अपनी अंतर्दृष्टि के सहारे उसे संरचनागत विस्तार देता है। यहीं वह प्रस्थान बिंदु भी है, जहाँ से कवि अपनी निजता का अतिक्रमण भी करता चलता है। वस्तु की सर्वस्वीकार्यता प्रस्तुत करने की यह प्रक्रिया कवि की अवलोकन क्षमता, संवेदना की गहराई, रचने के लिए शिल्प के चुनाव के विवके पर बहुत ज्यादा निर्भर करती है। यहाँ रचना के अबूझ बन जाने का खतरा रहता है, जिससे आधुनिक कविता बुरी तरह पीड़ित है, लेकिन पाठक रचना को छोड़ रचनाकार (कवि) का नाम देखकर वाह-वाह कर देते हैं।
Nav Kavyanjali
ऐसा भी होता है कि वस्तु का विन्यासगत विस्तार करते-करते कवि स्थूल विवरणों के सहारे अपने कत्र्तव्य की इतिश्री समझ लेता है। तब कविता निश्प्राण हो जाती है। यह एक बड़ी कमजोरी है, जिसको देखते हुए प्रकाशक कविता की पुस्तक छापने से घबराते हैं। यह संग्रह इस कमजोरी से मुक्त नहीं है, लेकिन संपादक कुछ अच्छी रचनाओं को सामने रखकर ‘नव काव्यांजलि’ प्रकाशित करने के लिए निश्चितरूपेण प्रशंसा के पात्र हैं। 
संग्रह की कुछ कविताओं में जीवन का मर्म, उसकी पेंददगियां, उसमें निहित प्रेम और करूणा, ईष्र्या-द्वेष, आशा-आकांक्षा, भ्रम और छल, संघर्ष, हिंसा और प्रतिहिंसा का विद्रूप खुलकर सामने आया है। दरअसल में काव्य रचना की चारित्रिक खूबियां हैं कि वह अपनी बनावट में लोकतांत्रिक हैं। राजनीतिक लोकतंत्र की अवधारणा से परे रचनागत लोकतांत्रिकता कविता की विशिष्ट पहचना है। यह तब भी कविता में थी, जब धरती पर लोकतंत्र नहीं था। कुम्भन दास की यह उक्ति-भक्तन को कहां सीकरी सो काम, स्वयं में एक पुख्ता प्रमाण है। ऐसे तो भक्ति आंदोलन का सूत्रपात ही लोकोन्मुखी प्रवृत्तियों के कारण लोकभाषाओं में हुआ। इसलिए न्यायसंगत मान्यता के तहत कविता संपूर्ण चराचर की निर्भीक अभिव्यक्ति है। मुझे खुशी हुई कि इस संग्रह में ज्यादातर कवियों की चिन्ता में आमजन सहित नदी, पेड, चिड़ियाँ, पहाड़ आदि शामिल हैं। 
सृष्टि का स्वरूप ही काव्यमय है। कोई भी कविता इस सत्य के अनुरूप ही शलाध्य हो सकती है। कहना न होगा कि मनुष्य ने काव्यमयता को बिगाड़ने की भरपूर कोशिश की है। यह कोशिश लगातार जारी है। कविता ऐसी कोशिश के खिलाफ किस तरह खड़ी है, यह उसकी सबसे बड़ी चुनौती है। संग्रहित कवियों से यह उम्मीद की जाती है कि इस आसन्न चुनौती से वे मुंह न मोड़ेंगें।
समीक्षक : बसंत कुमार राय

‘कॉल ड्रॉप्स की समस्या घर के भीतर अधिक’

 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : ग्राहकों से सीधी प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए दूरसंचार विभाग ने 23 दिसंबर, 2016 को दिल्ली, मुंबई, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र और गोवा में एक इंटेग्रेटिड वॉयस रिस्पांस सिस्टम (आईवीआरएस) प्रणाली की शुरूआत की है, जिसका 12 जनवरी, 2017 को पंजाब और मणिपुर के अलावा अन्य राज्यों में विस्तार किया गया है। पंजाब और मणिपुर में आईवीआरएस प्रणाली की शुरूआत 16 मार्च, 2017 को हुई। इस प्रणाली के माध्यम से ग्राहकों को शॉर्ट कोड 1955 से आईवीआरएस कॉल प्राप्त होती हैं और कॉल ड्रॉप्स की समस्या के बारे में कुछ प्रश्न पूछे जाते हैं। ग्राहक इसी शॉर्ट कोड 1955 पर टोल फ्री एसएमएस भी भेज सकते हैं, जिसमें उनके उस शहर, नगर, गांव का नाम का उल्लेख हो, जहां वे अक्सर कॉल ड्रॉप्स की समस्या से ग्रस्त हैं।
आईवीआरएस प्रणाली की 23 दिसम्बर, 2016 को शुरूआत से लेकर 28 फरवरी, 2017 तक पूरे देश में सभी टीपीएस के ग्राहकों को 16,61,640 सफल आउटबाउंड कॉल की गई हैं। लगभग 2,20,935 ग्राहकों ने सर्वेक्षण में भाग लिया, जिनमें से लगभग 1,38,072 (62.5ः) ग्राहकों ने कॉल ड्रॉप्स की सूचना दी है। इस प्रतिक्रिया से यह पता चला है कि कॉल ड्राप्स की समस्या घर के अंदर अधिक गंभीर है। इस प्रतिक्रिया को समयबद्ध तरीके से कार्रवाई करने के लिए प्रति सप्ताह दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के साथ साझा किया जाता है। टीएसपी ने दूर संचार विभाग द्वारा भेजे गए आईवीआरएस फीडबैक डाटा का उपयोग करने के लिए एक विस्तृत तंत्र स्थापित किया है।
टीएसपी, हर पखवाड़े, दूर संचार विभाग कार्यबल को कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत कर रहा है। 15-28 फरवरी, 2017 के पखवाड़े के लिए, टीएसपी द्वारा 43,403 फीडबैक मामले जांच हेतु लिए। कॉल ड्रॉप्स समस्या के बारे में अतिरिक्त जानकारी के लिए ग्राहकों को टेलीफोन कॉल और एसएमएस करने के बाद 7,210 मामलों की समाधान हेतु पहचान की गई। इस पखवाड़े के दौरान 2467 मामलों को ऑप्टिमाइजेशन, हार्डवेयर / बिजली की समस्याओं के समाधान, क्षेत्र के दौरे आदि के माध्यम से सुलझाया गया और सकल आधार पर आईवीआरएस की शुरूआत से लेकर अभी तक इस पहल के दौरान 9328 मामलों को इस पहल के माध्यम से हल किया गया है।
इसके अलावा, 5529 मामले कॉल ड्रॉप समस्या से संबंधित नहीं थे, लेकिन वे डेटा, रोमिंग, बिलिंग, एमएनपी, मोबाइल डिवाइस आदि की समस्या से जुड़े थे। ऐसे मामलों की टीएसपी ने आवश्यक कार्रवाई करने के लिए पहचान की। टीएसपी ने आने वाले समय में लगभग 603 नई साइटें / बूस्टर लगाने की योजना बनाई गई है। दूर संचार कार्यबल आईओआरएस प्रणाली से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए एक महीने में एक बार टीएसपी के साथ बैठक कर रहा है। मंत्री महोदय का कार्यालय, आईवीआरएस प्रणाली के परिचालन के बारे में नियमित समीक्षाओं का भी आयोजन कर रहा है।

सरकार ने सभी वाहनों से बत्तियां हटाने का फैसला किया 

नई दिल्ली : देश में स्वस्थ लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक और ऐतिहासिक कदम उठाया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में देश में सभी श्रेणियों के वाहनों के ऊपर लगी सभी तरह की बत्तियां हटाने का फैसला किया। सरकार का स्पष्ट मानना है कि वाहनों पर लगी बत्तियां वीआईपी संस्कृति का प्रतीक मानी जाती हैं और लोकतांत्रिक देश में इसका कोई स्थान नहीं है। उनका कुछ भी औचित्य नहीं है। हालांकि आपातकालीन और राहत सेवाओं, एम्बुलेंस, अग्नि शमन सेवा आदि से संबंधित वाहनों पर बत्तियों लगाने की अनुमति होगी। इस फैसले को ध्यान में रखते हुए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय कानून में आवश्यक प्रावधान करेगा।

2100 करोड़ रुपये की सीवेज उपचार परियोजनाओं को मंजूरी

नई दिल्ली : नमामी गंगे कार्यक्रम को एक बड़े प्रोत्साहन के रूप में, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने 2154.28 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत के साथ 26 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। यह राशि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड एवं दिल्ली राज्यों में प्रति दिन 188 मिलियन लीटर (एमएलडी) (लगभग) की नई सीवेज उपचार क्षमता के सृजन, वर्तमान एसटीपी क्षमता के 596 एमएलडी का पुनर्वास, वर्तमान एसटीपी क्षमता के 30 एमएलडी का उन्नयन, अवरोधन एवं डायवर्जन कार्यों तथा 145.05 किलोमीटर सीवरेज नेटवर्क पर खर्च की जाएगी।
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