COPYRIGHT © RAJIV MANI, Journalist, Patna

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शुक्रवार, 4 मई 2018

आज की नारी की आवाज मुखर करती है ‘सलोनी’

पुस्तक समीक्षा : विनोद कुमार विक्की
आज की नारी दोराहे पर खड़ी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। भारत ही नहीं लगभग सभी देशों में प्रारंभ से ही स्त्रियों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं रही। पुरुषप्रधान समाज ने स्वनिर्मित प्रथा, परंपरा, शारीरक अक्षमता आदि के बहाने उसे कभी अपने समकक्ष खड़े होने का अवसर ही नहीं दिया। यद्यपि स्त्रियों को जब भी अवसर मिला, उन्होंने अपनी उपयोगिता सिद्ध कर बता दिया कि वे पुरुषों से किसी भी मामले में कम नहीं हैं। 
स्त्री मनोविज्ञान पर आधारित नये पल्लव समूह, पटना द्वारा हालिया प्रकाशित ‘सलोनी’ निश्चय ही सराहनीय एवं संग्रहणीय पुस्तक है, जिसमें कविता, कहानी, लघुकथा, आलेख आदि के माध्यम से स्त्री केंद्रित विषयों यथा- कन्या भ्रूण-हत्या, विधवा पुनर्विवाह, दहेज, लिंगभेद, विभिन्न क्षेत्रों में व्याप्त कुप्रथा, परंपरा, बाल यौन शोषण, वेश्यावृत्ति, एसिड अटैक, फैशन, स्व-रोजगार, परिवार नियोजन, घरेलू एवं कामकाजी महिलाओं की समस्याओं एवं समाधान को यथोचित रूप से उभारने का प्रयास किया गया है। 
नए पल्लव समूह के प्रबंध संपादक राजीव मणि जी साहित्य संपादन क्षेत्र में बिलकुल नया नाम है किंतु कम समय में उत्कृष्ट व बेहतर संपादन के कारण अब वे किसी परिचय के मोहताज नहीं है। उनके अथक प्रयास से स्त्री मनोविज्ञान पर आधारित पुस्तक ‘सलोनी’ के संपादन की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ के नवोदित महिला साहित्यकार दीप्ति रेखा पंडा एवं डाॅ. प्रदीप शर्मा को सौंपी गई। दीप्ति जी के संपादन एवं डाॅ. प्रदीप शर्मा के सह संपादन में स्त्री मनोविज्ञान पर आधारित बेहतरीन रचनाओं का शाहकार है सलोनी’। इस पुस्तक में देशभर के प्रख्यात एवं नवोदित 32 रचनाकारों की रचनाएँ शामिल की गई हैं, जिसके तहत नारी मनोविज्ञान को समझते हुए रचनाओं को शामिल किया गया है।
संपादकीय में युवा संपादक दीप्ति रेखा जब यह लिखती हैं, ‘‘आज इस धरती पर ईश्वर की सर्वोत्तम कृति मनुष्य की जो भी स्थिति है, वह इससे कहीं बेहतर होती, यदि उसके विकास में आधी आबादी अर्थात् स्त्री जाति की संपूर्ण सहभागिता रही होती।...... इस धरती पर कहीं भी कोई सुरक्षित जगह बची नहीं। माँ का गर्भ भी उनके लिए खतरे से खाली नहीं। किसी तरह पैदा हो भी गई, तो इस धरती के गिद्धों के बीच कदम-कदम पर अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए संघर्ष करती स्त्री किसी तरह अपने मुकाम तक पहुँचने की कोशिश कर रही है।’’ तब ऐसा बिलकुल भी नहीं लगता, कि यह उनकी पहली संपादित पुस्तक है।
ज्यों-ज्यों हम ‘सलोनी’ के पन्ने पलटते जाते हैं, त्यों-त्यों हमें पुस्तक की रचनाओं में नारी जीवन की विभिन्न पहलुओं की झलक दिखती जाती है। इस पुस्तक में प्रो. डाॅ. सुधा सिन्हा, डाॅ. शैलेन्द्र सिंह, डाॅ. दीक्षा चैबे, डाॅ. सरला सिंह, पूनम आनंद, रविरश्मि अनुभूति, सपना मिश्रा, शंभूशरण सत्यार्थी, आकांक्षा यादव, सपना मिश्रा जैसे सुप्रसिद्ध साहित्यकारों के साथ-साथ राहुल प्रसाद, दीपक कुमार, स्निग्धा सिंन्हा रूद्रा, राजकुमार इंद्रेश, कुमारी सरोज बाला, बिनोद कुमार रजक जैसे नवोदित बाल रचनाकारों़ की स्तरीय रचनाओं का संकलन किया गया है। 
सिंधु कुमारी ने ‘साहित्य में स्त्री चेतना और विमर्श’ कुसुम संतोष विश्वकर्मा ने ‘विभारानी की कहानियों में चित्रित स्त्री-पृरुष सम्बन्ध’, डाॅ. संगीता पांडेय ने ‘आज के परिदृश्य में नारी’, बिंदु त्रिपाठी ने ‘राजनीति में महिलाएँ’ डाॅ. स्नेहलता ने हिंदी उपन्यासों में घरेलू हिंसा’ तथा डाॅ. चंद्रप्रभा मिश्रा ने ‘आधुनिक नारी की चुनौतियाँ’ शीर्षक आलेख में नारी जीवन की विभिन्न पहलुओं को तर्कपूर्ण ढंग से उभारा गया है। प्रो. डाॅ. सुधा सिन्हा की ‘तीन तलाक: एक गुस्ताख हकीकत’ पाठकों का सोचने पर विवश कर देती है।   
नवोदित युवा साहित्यकार राहुल प्रसाद ने ‘नारी एक, रूप अनेक’ शीर्षक की लम्बी कविता में देश के समस्त नारी रत्नों का स्मरण कराया है वहीं डाॅ. कुमारी रश्मि प्रियदर्शिनी ने ‘कौन कहता है कि मैं झांसी की रानी नहीं’ कविता में आधुनिक नारी की असीम क्षमता की हँुकार भर दी है। कृष्णचंद्र महादेविया जी ने अपनी लघुकथाओं के माध्यम से देश के विभिन्न क्षेत्रों में व्याप्त नारी के शोषण सम्बंधी कुप्रथाओं को बहुत ही आकर्षक ढंग से उभारा है वहीं राजू गजभिए की लघुकथाएँ भी पुरुषांे के द्वारा महिलाओं के शोषण को उजागर करती हैं। आकांक्षा यादव की लघुकथाओं में आज की प्रगतिशील नारी के चरित्र को बखूबी उभारा गया है। 
डाॅ. प्रदीप शर्मा ने प्रेरक व्यक्तित्व के अंतर्गत रायपुर की नगरमाता बिन्नीबाई सोनकर की दानवीरता का वर्णन बहुत ही आकर्षक ढंग से किया है, जिन्होंने गली-गली घूमते हुए सब्जी बेचकर कमाई हुई अपनी जीवन भर की पूँजी, जो पंद्रह लाख से भी अधिक थी, वह स्कूल और अस्पताल खोलने के लिए दान कर दी। पूनम टांक ने ‘प्रेम के इंद्रधनुषी रंग’ में प्रेम की विस्तृत व्याख्या की है। अरूणिमा सकसेना ने ‘भाभी’ नामक कहानी में विधवा पुनर्विवाह का समर्थन किया है। सपना मिश्रा ने ‘क्या कसूर था‘ कहानी में ‘एसिड अटैक’ और उससे उपजी पीड़ा को बखूबी उभारा है। दीपक कुमार और डाॅ. दीक्षा चैबे की कहानियों में नारी मन के अंतद्र्वन्द्व को बहुत ही खूबसूरत ढंग से प्रस्तुत किया गया है। दिल्ली की प्रख्यात वास्तुविद आशा दिनकर ने जहाँ कई उपयोगी वास्तु टिप्स दिए हैं, वहीं नीतू गुप्ता ने महिलाओं के लिए उपयोगी सौंदर्य टिप्स बताए हैं। कुमारी सरोजबाला जी का आलेख ‘अगर आपकी बेटी का हो ब्वाय फ्रेंड, तो समझदारी से लें काम’ अभिभावकों को नए सिरे से सोचने पर विवश कर देती है।
कुल मिलाकर सलोनी में शामिल तमाम रचनाकारों की उम्दा रचनाएँ पठनीय और संग्रहणीय हंै। 
तनय प्रकाशन से प्रकाशित आकर्षक चित्रों से सुसज्जित कुल 160 पेज वाली आई.एस.बी.एन. संख्या प्राप्त सलोनी की कीमत मात्र दो सौ रूपए है।
विनोद कुमार विक्की
द्वारा - श्री ओमप्रकाश गुप्ता
सुमित किराना स्टोर
पो - महेशखूंट बाजार, जिला - खगड़िया
851213 (बिहार) 
9113473167
vinodvicky5382@gmail.com 

सोमवार, 30 अप्रैल 2018

‘पापा मैं घर पर ही पढ़ लूंगी’ का विमोचन

45 किताबों के मशहूर लेखक-कथाकार डाॅ. लालजी प्रसाद सिंह की पुस्तक ‘पापा मैं घर पर ही पढ़ लूंगी’ का लोकार्पण अनोखे अंदाज में पिछले दिनों किया गया। बैलगाड़ी पर चढ़कर महंत हनुमान शरण काॅलेज के प्राचार्य डाॅ. बिमल नारायण आर्य ने पुस्तक का लोकार्पण किया। फिर दानापुर बस पड़ाव से कारगिल चैक तक बैलगाड़ी, कार-बसों और बाजे-गाजे के साथ मार्च किया गया। इस मार्च में प्रो. पूजा सिंह, प्रो. संजय ठाकुर, प्रो. रंजना कुमारी थी।

सोमवार, 21 अगस्त 2017

पत्रकार साहब

Poonam Tan
 कहानी / पूनम टांक 
सुधा अपने कमरे में बिस्तर पर औंधी पड़ी एक पत्रिका के पन्ने पलट रही थी। उसके बालों की एक लट लगातार उसके सुर्ख गालों से खेल रही थी। रेडियो पर पुराना गाना बज रहा था। सुधा पत्रिका देखने के साथ ही गीत भी गुनगुना रही थी ... ‘कहीं किसी रोज यूं भी होता हमारी हालत तुम्हारी होती, जो रात हमने गुजारी मरके वो रात तुमने गुजारी होती।
अचानक ही सुधा बोल उठी, वाह! आज भी विविध भारती पर कितने अच्छे गाने आते हंै, जो सीधे मन पर असर करते हैं। वास्तव में किसी की भी मनःस्थिति को समझना कितना मुश्किल है। या यों कह लें कि वर्तमान में मनुष्य सिर्फ अपने दुःख में दुखी और सुख में सुखी रहना चाहता है, उसे किसी और की दुःख परेशानियों से कोई सरोकार ही कहां है। 
सुधा मन ही मन यही सब सोचते हुये पत्रिका देख रही थी, तभी उसकी नज़र शेखर की तस्वीर पर पड़ी। शेखर को देखते ही सुधा के चेहरे पर एक ही पल में अनगिनत भाव मंडराने लगें। शेखर जो सुधा के बहुत अच्छे मित्र हैं, अब शेखर के मन की तो वही जाने, किन्तु सुधा तो हमेशा से ही उन्हें अपना मित्र हो मानती आयी है।
सुधा और शेखर की जान पहचान भी बडे़ अजीब ढंग से हुई थी। उस दिन भी जब सुधा ने अपना लैपटाॅप आॅन किया, तो उसमें कुछ नोटिफिकेशन और फे्रंडरिक्वेस्ट पड़ी थीं। सुधा ने जब चेक किया, तो उसमें एक नाम ऐसा था, जिससे वह खुद तो परिचित ना थी, लेकिन उसके कुछ घनिष्ठ लोग थें, जो उस नाम से जुड़े थे। उसने उत्सुकतावश उस व्यक्ति की प्रोफाइल चेक की। उसका नाम शेखर कपूर था, जो एक जाने-माने अखबार में सब एडिटर थे। सुधा ने रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर ली। कुछ दिनों के बाद सुधा के मैसेंजर पर पत्रकार साहब का एक संदेश आया, जो कि परिचय जानने के उद्देश्य से किया गया था। सुधा ने बिना कुछ सोच-विचार के अपना पूर्ण परिचय उन्हें दे दिया। बस यहीं से उनकी वार्तालाप शुरू हो गयी। 
शुरू में तो शेखर रोज सिर्फ गुडमार्निंग और गुड़ नाइट का मैसेज करते थे और सुधा मुस्करा कर उसका जवाब दे देती थी, परन्तु धीरे-धीरे कब शेखर उसके अन्तर्मन में प्रवेश कर गये, उसे पता ही ना चला। अब तो उसकी पूरी दुनिया ही शेखर बन गये। शेखर की व्यस्तता के बारे में सुधा बखूबी जानती थी, परन्तु फिर भी उनके मैसेज का इन्तजार करती रहती। शेखर सुधा से न तो कभी मिले थे और ना ही फोन से बात हुयी थी, बस आॅनलाइन चैटिंग ही हो जाती थी। 
एकबार तो इन्तजार इतना लम्बा हो गया कि सुधा का दिन-रात काटना मुश्किल हो गया। करीब एक महीने के बाद शेखर ने मैसेज किया ... ‘‘सुधा कैसी हो?’’
सुधा का तो सब्र का बांध टूट पड़ा, वह फूट-फूट कर रोने लगी। न जाने शेखर से यह कैसा जुड़ाव था, जिसे सुधा ना तो खुद समझ पा रही थी और न ही उन्हें समझा पा रही थी। उस दिन तो शेखर भी बहुत घबरा गये थे। सुधा ने बहुत देर बाद खुद को सम्भालते हुये कहा - ‘‘देखिये पत्रकार साहब, मुझे आपसे कुछ नहीं चाहिए, बस आप सही सलामत हैं, ये मैसेज मुझे रोज करते रहिये।’’
‘‘जैसा आप कहें मैम।’’
फिर उन्होंने माहौल को थोड़ा हल्का बनाने के लिए हंसते हुये कहा ... ‘‘अरे भाई हम पत्रकार लोगों के विषय में जानकर क्या करियेगा, हमारी अपनी तो कोई जिन्दगी होती ही नहीं, बस समाज सेवा ही हमारा मूल कर्तव्य है, आज यहां तो कल वहां, हमसे दिल लगाकर कुछ हासिल न होगा।’’
सुधा खामोश हो गयी। शेखर थोड़ी देर बार फिर बोले ... ‘‘सुधी कहीं सच में तो हमसे दिल नहीं लगा बैठी ना?’’
सुधा हंसते हुये बोली ... ‘‘पत्रकार साहब, अभी हमारे इतने भी बुरे दिन नहीं आये हैं।’’ ... और दोनों हंसने लगंे। लेकिन सच्चाई तो यही थी कि अब शेखर सुधा की आदत बन चुके थे।
एकबार अचानक ही शेखर को किसी बडे़ प्रोजेक्ट के सिलसिलें मे बाहर जाना था। उन्होनंे उस दिन पहली बार सुधा को फोन किया। फोन बहुत जल्दबाजी में किया गया था। वे हड़बड़ाते से बोले - ‘‘हेलो सुधा, मुझे कुछ दिनों के लिए बाहर जाना है, इसलिए अब बात ना हो पायेगी, और बिना सुधा की बात सुने उन्होंने फोन काट दिया।’’
बस उस दिन से सुधा इंतजार करने लगी, कब दिन महीनों में और महीने सालों में बदल गये, पता ही ना चला। सुधा की शादी अमृत से हो गयी। शेखर अब बस उसकी यादों में ही थे, जिसका वास्तविकता से दूर-दूर तक कोई लेना देना ना था।
सुधा अपने वैवाहिक जीवन में बहुत खुश थी, लेकिन उसके अन्तर्मन में कुछ दबा था, जिसे वह किसी के भी साथ सांझा न कर सकी। अचानक मिनी दौड़ती हुयी आयी और सुधा को झंझोड़ते हुये बोली - ‘‘मम्मा, आज आप मुझे स्कूल से लेने क्यूं नहीं आयीं?’’ 
तब सुधा की नींद टूटी व मिनी को बहलाते हुये हकलाकर बोली, ‘‘ओ ओ साॅरी बेटा, आज काम करते-करते देर हो गयी’’।
मिनी ने पत्रिका के खुले पन्ने पर छपी तस्वीर को देखते हुये पूछा - ‘‘मम्मा, ये अंकल कौन हैं? जिन्हें गिफ्ट मिल रहा है’’। 
‘‘बेटा ये कपूर अंकल हैं और उन्हें गिफ्ट नहीं पुरस्कार मिल रहा है’’।
पत्रकारों को बस अपने काम के अलावा कुछ याद ही कहां होता है, वे तो वहीं रूक गये, लेकिन वक्त कहां रूका, वह तो आगे बहुत आगे निकल गया। शेखर का प्रोजेक्ट तो पूरा हो गया, किन्तु सुधा के अन्दर अभी भी कुछ अधूरा-सा रह गया जो कभी पूरा नहीं हो सकता।
सुधा अपने में ही बोले जा रही थी और मिनी कब की खेलने चली गयी थी। 
पूनम टांक इलाहाबाद की रहने वाली हैं और इनकी कहानियां विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी है।
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बुधवार, 26 जुलाई 2017

राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद का प्रोफाइल

सार्वजनिक जीवन और समाज में समतावाद तथा अखण्डता के पैरोकार रहे वकील, दिग्गज राजनीतिक प्रतिनिधि श्री रामनाथ कोविंद का जन्म 01 अक्टूबर, 1945 को उत्तर प्रदेश में कानपुर के निकट परौंख में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री मैकूलाल और माता का नाम श्रीमती कलावती था।
25 जुलाई, 2017 को भारत के 14वें राष्ट्रपति का कार्यभार ग्रहण करने से पहले श्री कोविंद ने 16 अगस्त, 2015 से 20 जून, 2017 तक बिहार के 36वें राज्यपाल के रूप में अपनी सेवा दी ।
शैक्षिक योग्यता और व्यावसायिक पृष्ठभूमि : श्री कोविंद ने अपनी स्कूली शिक्षा कानपुर में ग्रहण की और कानपुर विश्वविद्यालय से बी.कॉम तथा एलएलबी की डिग्री हासिल की। 1971 में उन्होंने दिल्ली बार काउंसिल के साथ एक वकील के रूप में नामांकन किया। श्री कोविंद 1977 से लेकर 1979 तक दिल्ली उच्च न्यायालय में केन्द्र सरकार के वकील रहे तथा 1980 से 1993 तक उच्चतम न्यायालय में केन्द्र सरकार के वकील रहे। 1978 में वे उच्चतम न्यायालय के ‘एडवोकेट-ऑन-रिकार्ड’ बने। 1993 तक उन्होंने कुल 16 साल तक दिल्ली उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में वकालत की।
संसदीय और सार्वजनिक जीवन : श्री कोविंद को अप्रैल, 1994 में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा का सदस्य चुना गया। उन्होंने लगातार दो बार राज्यसभा के सदस्य के रूप में मार्च, 2006 तक कार्य किया। श्री कोविंद ने विभिन्न संसदीय समितियों जैसे अनुसूचित जाति / जनजाति कल्याण संबंधी संसदीय समिति, गृह मामलों की संसदीय समिति, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस पर संसदीय समिति, सामाजिक न्याय और अधिकारिता संबंधी संसदीय समिति और कानून और न्याय संबंधी संसदीय समितियों में सेवा की। वह राज्यसभा हाउस कमेटी के चेयरमैन भी रहे। श्री कोविंद बी.आर. अम्बेडकर विश्वविद्यालय के प्रबंधन बोर्ड के सदस्य तथा भारतीय प्रबंधन संस्थान कोलकाता के बोर्ड ऑफ गवर्नस के सदस्य भी रहे। वह संयुक्त राष्ट्र में गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य भी रहे और अक्टूबर, 2002 में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया।
इन पदों पर किया कार्य :
2015-17 : बिहार के राज्यपाल
1994-2006 : उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य
1971-75 और 1981 : महासचिव, अखिल भारतीय कोली समाज
1977-79 : दिल्ली उच्च न्यायालय में केंद्र सरकार के वकील
1982-84 : सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के अधिवक्ता।
व्यक्तिगत विवरण : श्री कोविंद का विवाह 30 मई, 1974 को श्रीमती सविता कोविंद से हुई। श्री कोविंद के पुत्र का नाम प्रशांत कुमार और पुत्री का नाम सुश्री स्वाति है। पढ़ने-लिखने के शौकिन राष्ट्रपति कोविंद को राजनीतिक और सामाजिक परिवर्तनों, कानून और इतिहास तथा धर्म संबंधी किताबें पढ़ने में गहरी दिलचस्पी है। अपने लम्बे सार्वजनिक जीवन के दौरान श्री कोविंद ने कई देशों की यात्रा की है। संसद सदस्य के रूप में उन्होंने थाईलैंड, नेपाल, पाकिस्तान, सिंगापुर, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, फ्रांस, ब्रिटेन और संयुक्त राज्य अमेरिका का दौरा भी किया है।
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22 राज्यों में चुंगी (चेक पोस्ट) समाप्त

 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) 1 जुलाई, 2017 से लागू किया गया है। इसके लागू होते ही भारत में 22 राज्यों के सभी चुंगी (चेक पोस्ट) समाप्त कर दिये गये हैं।
विवरण इस प्रकार हैं : आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, गुजरात, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, सिक्किम, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गोवा, हरियाणा, झारखंड, ओडिशा, पुडुचेरी, राजस्थान, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड।
राज्य जहां चुंगियों (चेक पोस्ट) को समाप्त करने की प्रक्रिया जारी है : असम, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, नागालैंड, पंजाब, मिजोरम, त्रिपुरा।

जेल बंदियों के लिए वेब एप्लीकेशन लांच 

नई दिल्ली : राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) को जेल में कैद बंदियों को कानूनी सहायता प्रदान करने की जिम्मेदारी दी गई है। 28 जून, 2017 को भारतीय विधि संस्थान में आयोजित सम्मेलन में एनएएलएसए ने जेल बंदियों को निःशुल्क कानूनी सेवाएं देने के लिए वेब एप्लीकेशन लांच और एनआईसी के माध्यम से विकसित कानूनी सेवा प्रबंधन प्रणाली लांच किया। वेब एप्लीकेशन के माध्यम से राज्य कानूनी सेवा प्राधिकार तथा जिला कानूनी सेवा प्राधिकार अपने / अपने क्षेत्राधिकार के जेलों में प्रत्येक बंदी के लिए डाटा भरेंगे, ताकि अदालत में वकील के जरिये उनका प्रतिनिधित्व किया जा सके। यह साफ्टवेयर अपनी रिपोर्ट में कैदियों की कुल संख्या, बिना वकील वाले कैदियों की कुल संख्या, कानूनी सेवा अधिवक्ताओं द्वारा प्रतिनिधित्व किए गए बंदियों की संख्या और अपने निजी वकीलों द्वारा प्रतिनिधित्व कैदियों की संख्या का पता लग जायेगा।
सभी सूचनाएं राज्यवार, जिलेवार, और प्रत्येक जेल के संबंध में उपलब्ध होंगी। रिपोर्ट में कैदी के बंद रहने की अवधि की जानकारी मिलेगी और इससे यह सूचना प्राप्त होगी कि अपराध प्रक्रिया संहिता के सेक्शन 436 (ए) के तहत बंदी जमानत का पात्र है या नहीं। यह वेब एप्लीकेशन कानूनी सेवा प्रणाली को और पारदर्शी बनाएगा और कहीं से भी सभी सक्षम पदाधिकारी कैदियों को दी जाने वाली कानूनी सहायता की अनुमति पर नजर रख सकेंगे, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि अदालत में पेशी के पहले दिन से सभी बंदियों का प्रतिनिधित्व प्राप्त है।
वेब एप्लीकेशन उच्चतम न्यायलय के न्यायाधीश और एनएएलएसए के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा ने लांच किया। इस अवसर पर 18 राज्यों के कानूनी सेवा प्राधिकार के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ सदस्य सचिव शामिल हुए। वेब एप्लीकेशन लांच होने के बाद एनआईसीपीटी ने ओरियेंटेशन सत्र का आयोजन किया।
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गुरुवार, 29 जून 2017

बिहार लीची उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य

  • बिहार में 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल से लगभग 300 हजार मीट्रिक टन लीची का उत्पादन
  • भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र एवं राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र के वैज्ञानिकों ने लीची को उपचारित कर तथा कम तापमान पर 60 दिनों तक भंडारित कर रखने में सफलता पायी
नई दिल्ली : केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि केन्द्र सरकार का मुख्य उद्देश्य लीची के विकास एवं उत्पादन बढ़ाने के लिए शोध करके नई-नई किस्मों एवं तकनीकों का विकास करना तथा लीची संबंधी जानकारी को प्रसार विभाग को उपलब्ध कराना है। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने यह बात मुसाहारी, मुजफ्फरपुर, बिहार में लीची प्रसंस्करण संयंत्र के उद्घाटन और सह प्रशिक्षण के अवसर पर कही।
राधा मोहन सिंह ने कहा कि बिहार लीची उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य है। अभी बिहार में 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल से लगभग 300 हजार मीट्रिक टन लीची का उत्पादन हो रहा है। बिहार का देश के लीची के क्षेत्रफल एवं उत्पादन में लगभग 40 प्रतिशत का योगदान है। लीची के महत्व को देखते हुए 6 जून, 2001 को यहां राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र की स्थापना की गयी।
श्री सिंह ने कहा कि बिहार के कुल क्षेत्रफल एवं उत्पादन में मुजफ्फरपुर जिले का योगदान बहुत अच्छा है, परन्तु लीची उत्पादकता जो अभी लगभग 8.0 टन की है, उसे बढ़ाने की जरूरत है। इस दिशा में सभी सरकारी संस्थानों, सहकारी समितियों एवं किसानों को आगे आना होगा। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि यह खुशी की बात है कि भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र एवं राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र के वैज्ञानिकों ने लीची फल को उपचारित करके तथा कम तापमान पर 60 दिनों तक भंडारित करके रखने में सफलता पायी हैं। इसका एक प्रसंस्करण संयंत्र भी विकसित किया गया है। श्री सिंह ने कहा कि यह तकनीक निश्चित रूप से लीची उत्पादकों एवं व्यापारियों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी। श्री सिंह ने कहा कि इस तकनीक को प्रभावशाली बनाने के लिए उत्पादकों को अच्छी गुणवत्ता के फल का उत्पादन करना होगा, जिसके लिए राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र, मुजफ्फरपुर ने अनेक तकनीकों का विकास किया है। राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र, मुजफ्फरपुर प्रत्येक वर्ष लगभग 35-40 हजार पौधे देश के विभिन्न संस्थानों व राज्यों को उपलब्ध करा रहा है। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र, आईसीएआर के अन्य संस्थानों तथा राज्यों के कृषि विश्वविद्यालयों एवं केन्द्र तथा राज्य सरकारों के विकास प्रतिष्ठानों जैसे - राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड, एपीडा, राष्ट्रीय बागवानी मिशन आदि के साथ मिलकर कार्य कर रहा है।
श्री सिंह ने कहा कि हमारे वैज्ञानिक दिन-रात मेहनत करके उन्नत किस्मों और कृषि क्रियाओं का विकास कर रहे हैं, जिसे राज्य सरकार एवं कृषि विज्ञान केन्द्रों और अन्य संस्थाओं द्वारा आम जनता तक पहुंचाने की जरूरत है। अपने सीमित संसाधनों के माध्यम से केन्द्र ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् की फाॅरमर्स फस्र्ट परियोजना का क्रियान्वयन पूर्वी चंपारण जिले में किया है, जिसमें 8 गांव (मेहसी प्रखंड - उझिलपुर, बखरी नजिर, दामोदरपुर गांव, चकिया प्रखंड - खैरवा, रामगढ़वा, विषनुपरा ओझा टोला - वैशहा एवं चिंतमानपुर - मलाही टोला गांव) के 1,000 किसान परिवार अनेक तकनीकों का लाभ ले रहे हैं। परिषद की यह एक अनोखी पहल है, जिसमें किसानों द्वारा ही उन्नत तकनीक का परीक्षण किया जा रहा है। इसे और अधिक लोगों तक पहुंचाने की जरूरत है। ‘मेरा गांव-मेरा गौरव’ कार्यक्रम के माध्यम से भी वैज्ञानिक अपनी तकनीकों को कुछ गांवों तक पहुंचाने में सफल रहे हैं। केन्द्र ने सायल हेल्थ कार्ड की योजना भी शुरू की है, जिसके माध्यम से किसानों के बागों का परीक्षण करके उन्हें उचित सलाह दी जा रही है। बिहार ही नहीं, देश के कई क्षेत्र हैं जहां लीची की सफल बागवानी हो सकती है। अतः इन क्षेत्रों में भी शोध को बढ़ावा देने की जरूरत है। श्री सिंह ने इस अवसर पर सभी वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों को बधाई दी और उम्मीद जताई कि इस संयंत्र का भरपूर उपयोग करके बिहार एवं देश के लीची किसानों, उत्पादकों एवं व्यापारियों को आमदनी बढ़ाने में मदद की जा सकेगी।
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भारत दुग्ध उत्पादन में प्रथम

  • राष्ट्रीय गोकुल मिशन की तरह ‘गिर गाय अभ्यारण्य’ को मंजूरी
  • सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने को प्रतिबद्ध
नई दिल्ली : केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि भारत सरकार द्वारा पशुपालन के क्षेत्र में गुजरात में अनेक नई पहल की गई हैं। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत गोकुल ग्राम की तर्ज पर ‘गिर गाय अभ्यारण्य’  स्थापित करने की मंजूरी दी गई है। यह धर्मपुर, पोरबंदर में स्थापित किया जाएगा। पशुधन बीमा कवरेज में जहां पहले 2 दुधारू पशुओं को शामिल किया गया था, वहीं अब इसमें 5 दुधारू पशुओं और 50 छोटे जानवरों को शामिल किया गया है। यह योजना राज्य के सभी जिलों में लागू कर दी गई है, जबकि इससे पहले इसमें 15 जिले ही शामिल थे। वर्ष 2014-16 के दौरान राज्य में लगभग 26,000 पशुओं का बीमा किया गया। पशु-चिकित्सा शिक्षा में चिकित्सकों की कमी को पूरा करने के लिए जूनागढ़ में एक कॉलेज स्थापित किया गया है। कृषि मंत्री ने यह बात कामधेनु विश्वविद्यालय, साबरकांठा, गुजरात में पॉली-टेक्नीक के उद्घाटन के अवसर पर कही।
कृषि मंत्री ने कहा कि यह बड़े गर्व का विषय है कि देश दुग्ध उत्पादन में प्रथम स्थान पर है। वर्ष 2015-16 में दुग्ध उत्पादन की वृद्धि दर 6.28 प्रतिशत रही है, जिससे कुल उत्पादन 156 मिलियन टन तक पहुंच गया है। इससे भारत में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता औसतन 337 ग्राम प्रतिदिन हो गई है, जबकि विश्वस्तर पर यह औसतन 229 ग्राम ही है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2011-14 के मुकाबले वर्ष 2014-17 में दुग्ध उत्पादन वृद्धि 16.9 प्रतिशत हुई है।
उन्होंने कहा कि ज्यों-ज्यों शहरी एवं ग्रामीण परिवारों का जीवन स्तर बढ़ता जा रहा है, त्यों-त्यों पशुजन्य प्रोटीन की मांग भी बढ़ती जा रही है। इसलिए यह आवश्यक है कि हम पशुधन, मुर्गी एवं मछली उत्पादन की निरन्तर वृद्धि की ओर प्रयत्नशील हों, जिससे देश का प्रत्येक नागरिक सुपोषित और स्वस्थ रहे। इसलिए पशु-चिकित्सकों का यह कर्तव्य है कि वे पशुजन्य प्रोटीन की उपलब्धता को अधिकाधिक बढ़ाकर देश को स्वस्थ बनाने में योगदान दें।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसलिए किसानों की आय को दोगुना करने के भारत सरकार के संकल्प में पशु-चिकित्सा क्षेत्र की महती भूमिका है। पशु स्वस्थ रहेगा, तो उसकी उत्पादकता बढ़ेगी, जिससे स्वतः ही किसान की आय बढ़ेगी और राष्ट्र आर्थिक खुशहाली के मार्ग पर आगे बढ़ेगा।
कृषि मंत्री ने कहा कि भारत में पशुधन की संख्या विश्व में सबसे ज्यादा 512.05 मिलियन है, जिसमें 199.1 मिलियन गोपशु, 105.3 मिलियन भैंस, 71.6 मिलियन भेड़ और 140.5 मिलियन बकरी हैं। बकरियों की संख्या के मामले में भारत का विश्व में दूसरा स्थान है और भारत की पशु संख्या में इसकी लगभग 25 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। भारतीय पोल्ट्री इंडस्ट्री भी विश्व के दूसरे सबसे बड़े बाजार के रूप में उभर रही है, जिसमें 63 बिलियन अण्डा और 649 मिलियन पोल्ट्री मीट उत्पादन शामिल है। भारत की समुद्रीय एवं फिश इंडस्ट्री लगभग 7 प्रतिशत की यौगिक वार्षिक वृद्धि दर के साथ आगे बढ़ रही है। कुल मिलाकर, भारतीय पशुधन सेक्टर तेज गति से आगे बढ़ रहा है और ग्लोबल बाजार में एक प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में उभर रहा है।
कृषि मंत्री ने कहा कि भारत सरकार का विशेष जोर है कि विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों में शिक्षा की गुणवत्ता अंतर्राष्ट्रीय स्तर की हो। इस दिशा में आईसीएआर की पांचवीं डीन समिति की रिपोर्ट को अनुमोदित कर दिया गया है। स्टूडेन्ट और आर्या जैसी योजनाएं स्कॉलरशिप के साथ प्रारंभ की गई है। छात्रों की स्कॉलरशिप को भी बढ़ाया गया है। उन्होंने आखिर में कहा कि राष्ट्र की समृद्धि के लिए देश की कृषि की प्रगति और किसान को खुशहाल बनाने के लिए एकसाथ मिलकर प्रयास करने की जरूरत है। कृषि आगे बढ़ेगी, किसान खुशहाल होगा, तो निश्चित रूप से राष्ट्र आगे बढ़ेगा।
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पद्म पुरस्कार के नामांकन की आखिरी तिथि 15 सितंबर

 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : पद्म पुरस्कार 2018 के लिए नामांकन की प्रक्रिया 1 मई, 2017 से शुरू है। पद्म पुरस्कार 2018 के लिए नामांकन प्राप्त करने की अंतिम तिथि 15 सितंबर, 2017 है। पद्म पुरस्कार के लिए नामांकन / सिफारिशें केवल गृह मंत्रालय द्वारा डिजाइन किए गए पद्म पोर्टल पर, जो www.padmaawards.gov.in पर उपलब्ध हैं, ऑनलाइन ही प्राप्त की जायेंगी। पद्म पोर्टल पर सभी पिछले पुरस्कार विजेताओं का विवरण भी उपलब्ध है। 15 सितंबर, 2017 के बाद प्राप्त नामांकनों पर विचार नहीं किया जाएगा। 

स्वीडन ने स्मार्ट सिटी के विकास में रुचि दिखायी

नई दिल्ली : देश में स्मार्ट सिटी के विकास की पहल में अपनी दिलचस्पी व्यक्त करते हुए स्वीडन ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के अतिरिक्त सतत व हरित सार्वजनिक परिवहन को प्रोत्साहित करने के लिए अपनी विशेषज्ञता और तकनीक को अमल में लाने के लिए एक संयुक्त कार्य योजना का सुझाव दिया है।
स्वीडन की यूरोपीय मामले एवं व्यापार मंत्री एन लिंडे ने शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू से भेंट की और स्मार्ट सिटी के विकास संबंधी मुद्दों को लेकर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 में भारत और स्वीडन ने सतत शहरी विकास के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे और स्मार्ट सिटी अभियान ने इस समझौता ज्ञापन को एक मूर्तरूप देने के लिए एक अवसर प्रदान किया है।
नई दिल्ली में स्वीडन की मंत्री ने कहा कि अपशिष्ट प्रबंधन, शहरी परिवहन समाधान, वायु को स्वच्छ करने, स्मार्ट पार्किंग प्रणाली, वास्तविक समय सूचना प्रणाली, कमांड एवं कंट्रोल सिस्टम इत्यादि के क्षेत्र में उनका देश वैश्विक नेता है। ये क्षेत्र भारत की स्मार्ट सिटी परियोजना का अभिन्न अंग हैं। इसके बाद उन्होंने कहा कि स्वीडन की कंपनी स्कैनिया जल्द ही नागपुर में 55 इथोनॉल बसों का परिचालन शुरू करेगी।
श्री नायडू ने इस बात को रेखांकित करते हुए कि स्मार्ट सिटी अभियान से भारतीय और विदेशी दोनों कंपनियों के लिए निवेश के अत्यधिक अवसर पैदा होंगे, कहा कि चयनित स्मार्ट सिटीज के लिए स्वीडन की तकनीक से लाभान्वित होना बहुत अच्छा होगा, खासतौर पर सार्वजनिक परिवहन और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में। उन्होंने स्वीडन की मंत्री को सुझाव दिया कि वह स्वीडन की कंपनियों को संबंधित शहरों में स्मार्ट सिटी योजना के कार्यान्वयन में भागीदारी के लिए साथ आने की सलाह दें।
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केशरी नाथ बने बिहार के राज्यपाल

पटना : भारतीय स्वतंत्रता-प्राप्ति के पश्चात् बिहार के 37वें महामहिम राज्यपाल के रूप में केशरी नाथ त्रिपाठी ने शपथ ली। इसके पूर्व भी पश्चिम बंगाल राज्य के राज्यपाल श्री त्रिपाठी ने बिहार के राज्यपाल के कृत्यों के निर्वहन हेतु शपथ ली थी और इनका कार्यकाल 27 नवम्बर, 2014 से प्रारंभ होकर 15 अगस्त, 2015 तक रहा था।
राज्यपाल ने हिन्दी भाषा में शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव, बिहार विधान सभा के अध्यक्ष विजय कुमार चैधरी, बिहार विधान परिषद् के उप-सभापति हारूण रषीद, बिहार विधान परिषद् मंे नेता-प्रतिपक्ष, बिहार विधान सभा में नेता-प्रतिपक्ष, बिहार सरकार के कई मंत्रीगण, न्यायाधीषगण, बिहार विधानमंडल के कई सदस्यगण, विभिन्न आयोगांे, समितियांे, बोर्डों, निगमों, प्राधिकारों आदि के अध्यक्ष/उपाध्यक्ष, राज्य सरकार के वरीय प्रशासनिक अधिकारीगण, विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक दलों के प्रतिनिधिगण एवं अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।
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1 जुलाई से जीएसटी लागू

 संक्षिप्त खबरें 
जम्मू कश्मीर को छोड़ सभी राज्यों व संघ शासित प्रदेशों ने राज्य जीएसटी अधिनियम को मंजूरी दी
नई दिल्ली : जम्मू कश्मीर को छोड़कर सभी राज्यों/संघ शासित प्रदेशों ने राज्य वस्तु और सेवा कर (एसजीएसटी) अधिनियम को मंजूरी दे दी है। केरल ने जीएसटी अधिनियम को मंजूरी देते हुए एक अध्यादेश जारी किया, जबकि पश्चिम बंगाल इस संबंध में 15 जून, 2017 को एक अध्यादेश जारी कर चुका है। अब केवल जम्मू कश्मीर राज्य बचा है, जिसे राज्य जीएसटी अधिनियम को पारित करना है। अतः 30 राज्यों/संघ शासित प्रदेशों सहित लगभग समूचा देश 1 जुलाई, 2017 से सुचारू तरीके से जीएसटी लागू करने के लिए तैयार है।
जीएसटी लागू होने के बाद आम आदमी के दैनिक उपयोग वाली उपभोक्ता वस्तुएं सस्ती हो जाएंगी। जीएसटी कानून के प्रभावी हो जाने के बाद निम्नलिखित वस्तुओं पर जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) शून्य दर के साथ लागू होगा। 
निम्नलिखित वस्तुएं आम आदमी को सस्ती मिलेंगी :
  • खाद्यान्न एवं आटा
  • मोटे अनाज
  • दालें
  • आटा
  • मैदा
  • बेसन

पंजीकृत ट्रेडमार्क वाली वस्तुओं को छोड़कर जिनके मामले में जीएसटी 5 फीसदी की दर से लगेगा।
  • ताजा दूध
  • ताजा सब्जियां एवं ताजे फल
  • मुरमुरा (मूरी)
  • सामान्य नमक
  • पशु चारा
  • कार्बनिक खाद
  • जलावन लकड़ी
  • कच्चा रेशम, कच्चा ऊन, जूट
  • हस्त संचालित कृषि उपकरण।

पटना सहित 30 और शहर स्मार्ट सिटी घोषित

नई दिल्ली : केन्द्र सरकार ने स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किए जाने के लिए 30 और शहरों का चयन किया है। इन्हें मिलाकर 25 जून, 2015 को घोषित स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत शहरों की कुल संख्या 90 हो गई है।
नए शहरों के नामों की घोषणा शहरी रूपांतरण के बारे में आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यशाला में आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने की। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत अभी 40 शहर और शामिल किए जाने थे, जिनके लिए 45 शहरों से प्रस्ताव प्राप्त हुए, लेकिन केवल 30 का चयन किया गया, क्योंकि इस मिशन की घोषणा करते समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने निर्देश दिया था कि नागरिकों की आकांक्षाओं के अनुरूप सुविधाएं जुटाने के लिए यह सुनिश्चित किया जायेगा कि केवल व्यवहार्य और साध्य योजनाएं इसमें शामिल की जाएं।
श्री नायडू ने बताया कि घोषित 30 शहरों की स्मार्ट सिटी योजना के लिए रु. 46,879 करोड़ के व्यय का प्रस्ताव है। उन्होंने बताया कि शेष 10 स्लॉटों के लिए 20 शहरों के बीच प्रतिस्पर्धा है। श्री नायडू ने बताया कि स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किए जाने के कार्यक्रम के अंतर्गत शहरों का चयन सही वक्त पर किया जा रहा है और शेष शहर खाली स्लॉटों के लिए शीघ्र ही अपनी संशोधित स्मार्ट सिटी योजनाएं प्रस्तुत करेंगे।

केंद्र द्वारा हिंदी थोपने का कोई विचार नहीं 

नई दिल्ली : मीडिया के एक वर्ग में यह खबर आई थी कि केंद्र सरकार हिंदी थोपने की कोशिश कर रही है। इस संबंध में गृह मंत्रालय के आधिकारिक भाषा विभाग द्वारा जारी प्रस्ताव का उल्लेख करते हुए यह दावा किया गया था कि हिंदी जानने वाले संसद सदस्यों और मंत्रियों के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे हिंदी में ही अपने भाषण और बयान जारी करें।
उल्लेखनीय है कि 1976 में आधिकारिक भाषा पर संसद समिति का गठन किया गया था और वह तभी से काम कर रही है। इस समिति ने अपनी रिपोर्ट के 9 भाग सौंप दिए हैं। समिति की रिपोर्ट के 9वें भाग को 2 जून, 2011 में राष्ट्रपति को सौंपा गया था। समिति के तत्कालीन अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ने 117 अनुमोदन किये थे। चूंकि समिति के सुझावों पर राज्य सरकारों और केंद्र सरकार के मंत्रालयों व विभागों की राय आमंत्रित की जानी थी, इसलिए राष्ट्रपति द्वारा सुझावों पर विचार करने और उन्हें स्वीकार करने के पूर्व समय लगा था।
अनुमोदन नंबर 105 इस प्रकार है - ‘माननीय राष्ट्रपति और सभी मंत्रियों सहित समस्त विशिष्टजनों, खासतौर से जो हिंदी पढ़ने और बोलने में सक्षम हैं, उनसे आग्रह किया जाता है कि वे अपने भाषण/बयान केवल हिंदी में ही दें।’
केंद्र सरकार ने उपरोक्त अनुमोदन को स्वीकार करते हुए 31 मार्च, 2017 को एक प्रस्ताव जारी किया था। समिति का अनुमोदन बिलकुल स्पष्ट है। वह आग्रह के रूप में है, न की आदेश/निर्देश के रूप में। उपरोक्त अनुमोदन आधिकारिक भाषा हिंदी के संबंध में संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप है। इसके अलावा अनुमोदन प्रोत्साहन एवं प्रेरणा के जरिये आधिकारिक भाषा के उन्नयन पर आधारित है, जो सरकार की नीति के अनुपालन में है।
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