COPYRIGHT © RAJIV MANI, Journalist, Patna

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मंगलवार, 31 मई 2011

क्षणिकाएं

बहुमूल्य
जो बहू
मूल्य लेकर आवे
होती है बहुमूल्य।

प्रष्न
 ऐसा क्यों, पहले तुम आग थी,
फिर पानी हुई और अब धुआं हो गई
वह बोल पड़ी - जॉनी, मैं हुक्का बन गई।

रिष्ते
प्यार में
ऐसे भी रिष्ते निभाने पड़ते हैं,
कभी गदहे को बाप
तो कभी बाप को  ़ ़ ़ ़ ़ ़ ़ ़ ़।

लड़की
उस व्यक्ति ने जब
लड़की का अपहरण किया
बनी थी रास्ते का षूल,
और जब चाहा छोड़ दे
बन गयी गले का फूल।

ओढ़नी
मफ्लर स्टाइल ओढ़नी देखकर
यूं लगने लगा है,
क्यों अष्लिलता की रस्सी अब
उनके गले कसने लगा है।

तस्वीर
मेरे कॉलेज की एक छात्रा
चिल्लाकर बोली
अष्लिलता कहां है बताओ,
वह बोला -
तुम पहले अपनी तस्वीर देखकर आओ।

नाम
जंगल का राजा षेर
चिल्लाया
मेरा नाम घोटाला में कहां से आया।

जेल
घोटाला पर घोटाला
कहो कैसे देष बचाएं।
उन नेताओं को पहले
जल्द जेल भिजवाएं।।

षराब
षराब भरा ग्लास
जब-जब ओठों से लगाया।
सिर्फ खाली ग्लास ही
मेरे हाथ आया।।

SOME MISTAKES ARE DUE TO FONT PROBLEM.

रविवार, 22 मई 2011

अनुवादक: रोजगार का बेहतर क्षेत्र

अवसर
राष्ट्रभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए सरकार प्रयासरत है। इस प्रयास का ही परिणाम है कि करीब-करीब हर विभाग में अंग्रेजी के साथ हिन्दी में भी काम होने लगा है। साथ ही कई विभागों में अनुवादक का पद अनिवार्य हो गया है। इससे अनुवाद के क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़े हैं। दूसरी तरफ भाषा पर अच्छी पकड़ रखने एवं षब्दों से खेलने वालों के लिए अनुवादक के अलावा दुभाषिया बनने का भी रास्ता खुला रहता है। अतः इस ओर आज युवाओं का झुकाव बढ़ा है।
षैक्षिक योग्यता
इस क्षेत्र में अपना भविष्य तलाषने वाले तीन माह के पाठ्यक्रम में प्रवेष ले सकते हैं। सर्टिफिकेट कोर्स के अलावा डिप्लोमा या फिर स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम भी किया जा सकता है। प्रवेष की न्यूनतम योग्यता स्नातक एवं स्नातकोत्तर है। हां, स्नातक या स्नातकोत्तर स्तर पर हिन्दी या अंग्रेजी विषय में से किसी एक का होना चाहिए।
अवसर
अगर किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से कोर्स किया जाए तो इस क्षेत्र में काम की कमी नहीं है। सरकारी संस्थाओं के अलावा गैर सरकारी संस्थाओं में भी काफी अवसर हैं। पत्र-पत्रिकाओं, समाचार चैनलों, प्रकाषन समूहों, विज्ञापन एजेंसियों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों व अन्य जगहों पर अच्छे अनुवादकों की प्रायः हर वक्त मांग रहती है। दूसरी तरफ न्यायालय, लोकसभा, राज्यसभा आदि से भी अनुवादक की रिक्तियां निकलती रहती हैं। साथ ही कई प्रकाषक किसी पुस्तक के अनुवाद के लिए अनुबंध भी समय-समय पर करते हैं। इस क्षेत्र में ऐसे भी ढेरों काम हैं, जिन्हें घर पर ही अनुवाद करने का किया जा सकता है।
चयन प्रक्रिया
कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित परीक्षा के माध्यम से प्रायः हर साल सरकारी संस्थाओं में कनिष्ठ अनुवादकों की भर्ती होती है। इसके लिए उम्मीदवार की आयु 27 साल होनी चाहिए। साथ ही षैक्षिक योग्यता में हिन्दी/अंग्रेजी से स्नातकोत्तर डिग्री वांछित है। प्रायः हर साल देष के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में ये रिक्तियां आती हैं। रोजगार समाचार में भी अनुवादकों की भर्ती के विज्ञापन प्रायः रहते हैं। आजकल प्राइवेट कंपनियों में कॉन्ट्रेक्ट पर अनुवादकों को रखा जाता है। यहां आयु सीमा से ज्यादा योग्यता के आधार पर चयन होता है।
वेतनमान
सरकारी क्षेत्र के कनिष्ठ हिन्दी अनुवादकों का वेतनमान 5500-9000 रुपए के बीच होता है। वहीं प्राइवेट में अनुवादकों को योग्यता के आधार पर 4-5 हजार से लेकर 15 हजार रुपए तक मिल सकते हैं। सरकारी क्षेत्र के कनिष्ठ हिन्दी अनुवादक प्रमोषन पाकर वरिष्ठ हिन्दी अनुवादक और बाद में हिन्दी अधिकारी या सहायक निदेषक (राजभाषा) बन सकते हैं।
संस्थान
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विष्वविद्यालय, मैदान गढ़ी, नई दिल्ली
केन्द्रीय हिन्दी संस्थान, कैलाष कॉलोनी, नई दिल्ली
जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी, न्यू महरौली रोड, नई दिल्ली
भारतीय अनुवाद परिषद्, बंगाली मार्केट, नई दिल्ली
दिल्ली विष्वविद्यालय (हिन्दी अनुभाग) ट्यूटोरियल बिल्डिंग, दिल्ली विष्वविद्यालय, दिल्ली।

रविवार, 8 मई 2011

सुन्दर बनना है तो ...

घर आंगन

सुन्दर दिखना हर कोई चाहता है। लेकिन कोई तैलीय त्वचा से परेषान है, तो कोई रूखी त्वचा से। इसके अलावा झाइयां, चेचक के दाग, मुंहासे एवं बालों की समस्याएं लोगों के लिए परेषानी का कारण बनते रहे हैं। उफ्! आखिर सुन्दर दिखें तो कैसे। इस चक्कर में पड़कर कुछ लोग डॉक्टर के पास दौड़ते हैं तो कुछ नीम-हकीम के चक्कर में पड़कर काफी पैसे खर्च कर बैठते हैं। जरा सोचिए, इसके बाद भी आपकी समस्या दूर न हुई तो! तो जनाव, जहां समस्याएं हैं, वहीं उसका निदान भी। बस जरूरत है थोड़ी सावधानी एवं कुछ समय देने की। घर में मौजूद चीजों का प्रयोग कर ही आप बन सकते हैं सुन्दर। फिर तो कहना ही क्या, लोग कह उठेंगे - निगाहें मिलाने को जी चाहता है।

अगर आपकी त्वचा तैलीय है तो बादाम के तेल में नींबू का रस मिलाकर लगाये। त्वचा के लिए यह मिश्रण उत्तम है।  लौंग, मुल्तानी मिट्टी, कपुर एवं नीम की पत्तियों को महीन पीसकर इसके लेप को चेहरे पर लगाने से यह चेहरे पर होने वाली फोड़े-फुन्सियां खत्म कर देता है।  सोने से पहले मेकअप को उतार देना चाहिए।  हरी सब्जियां, फल एवं दही का सेवन अधिक कर मुंहासे की समस्या से बचा जा सकता है। साथ ही ज्यादा पानी पीना लाभदायक है।  कपुर एवं मुल्तानी मिट्टी का लेप चेहरे पर लगाने से मुंहासे दूर होते हैं।  ज्यादा धूप एवं धुल से चेहरे को बचाकर रखने से चेहरा साफ रहता है।  बर्फ के टुकड़े को साफ कपड़े में लपेटकर चेहरा पर मलने से यह गर्मी के दिनों में ताजगी देता है।   झाइयां दूर करने के लिए षहद को नमक में मिलाकर लगायें।  झाइयां दूर करने के लिए नींबू के रस में षहद मिलाकर लगायें।  पानी में फुलाई हुई मसुर की दाल को दूध में मिलाकर पीस लें, अब इस लेप को चेहरे पर लगायें। इससे चेचक का दाग हल्का हो जाएगा।  रूसी दूर करने के लिए पानी एवं सिरका को बराबर मात्रा में बालों की जड़ में लगाकर 6-7 घंटे तक छोड़ दें, फिर बालों को साफ सादे पानी से धो लें।  पानी में फुलाई हुई मेथी को पीसकर लेप बना बालों में लगाने से बालों का सफेद होना रूक जाता है।  बलों को झड़ने से बचाने के लिए पहले दूध में मेथी डालकर दही जमा लें। अब इस दही को बालों में लगायें।  बलों को लंबा बनाने के लिए एक बड़े ग्लास में आधा छटाक सुहागा डालकर एक सप्ताह तक रखें और फिर इसे बाल धोने से पहले बालों में अच्छी तरह लगायें।  चेहरे पर रौनक लाने के लिए संतरे के छिलके को सुखाकर पीस लें। अब इस पाउडर को दूध अथवा पानी में घोलकर चेहरे एवं गर्दन पर लेप करें। थोड़ी देर बाद ठंढ़े पानी से अच्छी तरह धो लें।  लौकी के ताजे छिलके को चेहरे पर रगड़ने से चेहरा चमक उठता है।  दूध में चावल का आटा मिलाकर चेहरे पर लेप करने से चेहरे की खुष्की एवं झाइयां दूर होती हैं।  मुंहासे को दबाना या नोचना ठीक नहीं है। ऐसा करने से दाग पड़ने की संभावना रहती है। अच्छा होगा कि प्रतिदिन चेहरे को साफ पानी से दो-तीन बार धोया जाये।  छरहरी काया के लिए एक ही बार में ज्यादा भोजन लेने के बजाय थोड़ा-थोड़ा कर खाना ठीक रहता है।  खाने के तुरन्त बाद सोना ठीक नहीं है।  अधिक सोना आंखों के लिए ठीक नहीं हो सकता है। आंख के नीचे काला भी पड़ सकता है। सोने से पहले अपना हाथ-पैर धोकर ही बिछावन पर जायें और अच्छी तरह 7-8 घंटे सोयें।  आंखों के नीचे बने ‘डार्क सर्किल’ को दूर करने के लिए खीरा को काटकर घीसने से जो झाग निकले उसे आंखों के डार्क सर्किल पर लगायें।  किसी भी प्रकार की क्रीम अथवा लोषन का प्रयोग करने से पहले थोड़ा सा लगाकर टेस्ट अवष्य कर लें।  प््रातिदिन 8-10 धुले साफ तुलसी पत्ती चबाकर खाने से दांत एवं मसूरे साफ एवं कीटाणुरहित बनते हैं। साथ ही कुछ हद तक दुर्गन्ध भी दूर हो जाती है।   खुद से प्यार करना, इंद्रियों पर संयम रखना एवं अपनी कमियों को चेहरे पर प्रकट नहीं होने देना भी सुन्दरता के कई राजों में से एक है।
Some mistakes are due to font  problem.

बुधवार, 4 मई 2011

अपने बिहार को जानो

युवा मंच
विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाआंे के लिए उपयोगी
बिहार का क्षेत्रफल 94,163 वर्ग किमी है।
इसकी सीमाएं उत्तर में नेपाल, पूर्व में पष्चिम बंगाल, दक्षिण में झारखण्ड और पष्चिम में उत्तर प्रदेष तक हैं।
उत्तर से दक्षिण की लम्बाई 362 किमी है।
पूर्व से पष्चिम की चौड़ाई 483 किमी है।
बिहार तीन प्राकृतिक विभागों में बंटा है।
बिहार में कुल 38 जिले हैं।
समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 173 फीट (53 मीटर) है।
22 मार्च को बिहार दिवस के रूप में मनाया जाता है।

बिहार का राजकीय पषु रीछ एवं राजकीय पक्षी फाख्ता है।
पिछले कई माह से युवाओं की तरफ से प्रतियोगिता परीक्षाओं पर भी सामग्री देने की मांग आ रही थी। इसी मांग को ध्यान में रखते हुए इस कॉलम को षुरू किया जा रहा है। इसे पाक्षिक रखा गया है। आषा है युवाओं को पसंद आयेगा।

सोमवार, 2 मई 2011

भोजपुरी फिल्मों के महानायक कुणाल से एक मुलाकात

आमने-सामने
अमिताभ भोजपुरी फिल्म में काम करके सिर्फ रिष्तेदारी निभा रहे हैं - कुणाल
भोजपुरी फिल्मों की बात करें तो इसका एक अपना बाजार रहा है। ठेठ गंवई बाजार। इस फिल्म को देखने वाले ज्यादातर वे लोग होते हैं, जो आज भी या तो अपनी माटी से जुड़े हैं या फिर पाष्चात्य संस्कृति की हवा में कहीं न कहीं अपने गांव की सोंधी महक तलाष रहे होते हैं। ऐसे में अन्य क्षेत्रीय फिल्मों में सबसे ज्यादा भोजपुरी फिल्में पसंद की जाती हैं। भोजपुरी बेल्ट और गैर भोजपुरी क्षेत्रों में भी। ‘नदिया के पार’, ‘धरती मईया’, ‘गंगा किनारे मोरा गांव’ की अपार लोकप्रियता यही कुछ कहती है। हां, बीच का दौर कुछ कारणों से मंदा रहा। लेकिन आज भोजपुरी फिल्मों की जो आंधी चल पड़ी है, उसमें न सिर्फ बॉलीवुड के दर्जनों दिग्गज इसमें बह निकले, बल्कि अन्य दिग्गज भी इसमें बह जाने को लालायित हैं।
आज भोजपुरी फिल्मों में कई दिग्गज काम कर चुके या कर रहे हैं। लेकिन भोजपुरी फिल्मों के महानायक चंद ही हैं। भोजपुरी फिल्म के महानायकों में एक नाम कुणाल का है जिन्होंने भोजपुरी फिल्म के क्षेत्र में एक लंबी पारी खेली है। और लंबी पारी खेलने का मतलब परिपक्व अनुभव। करीब दो साल पहले कुणाल एक भोजपुरी फिल्म के सिलसिले में पटना में थे। उस वक्त उनसे राजीव मणि की लंबी बातचीत हुई। पेष है मुख्य अंष:
पिछले कुछ ही सालों में भोजपुरी फिल्मों का बाजार अचानक चल पड़ा। आखिर कारण क्या है।
भोजपुरी फिल्मों का बाजार पहले भी ठीक था, लेकिन पहले मीडिया भोजपुरी फिल्मों के बारे में लिखने या दिखाने में षर्म महसूस करती थी। मेरी कई सफल फिल्में मेरे नाम से भी नहीं जानी गईं। इनमें धरती मईया, गंगा किनारे मोरा गांव आदि का नाम लिया जा सकता है। यह एक वजह थी कि कलाकार को ऊंचाई नहीं मिल पाती थी। आज स्थिति बदली है। मीडिया का भरपूर सहयोग मिल रहा है।
जब स्थिति बदली तो फिल्म का स्तर गिरा। आज जो आदमी गीत लिख रहा है, वही संगीत भी दे रहा है। कभी-कभी खुद गायक भी बन जा रहा है।
हां, गिरावट तो आई है। दरअसल विषेषज्ञों की कमी है। हर काम हर आदमी नहीं कर सकता। अब बिना मेहनत किए लोग समझते हैं कि हम काबिल हैं। ज्यादा दोष उन निर्माताओं का है जो यह नहीं देख पाते कि कौन सा काम किससे करवाना है।
इन सब के बीच अमिताभ बच्चन, हेमा मालिनी जैसे दिग्गजों का भोजपुरी फिल्म क्षेत्र में आना क्या सुखद भविष्य का संकेत नहीं है।
अमिताभ जी और हेमा जी सिर्फ इसलिए भोजपुरी फिल्म में काम कर रहे हैं कि उनका मेकअप मैन फिल्म बना रहा है। यह सब सिर्फ एक रिष्तेदारी निभाने जैसा है। अगर दूसरा निर्माता अमिताभ जी के पास जाकर कहे कि मैं भोजपुरी फिल्म बना रहा हूं और चाहता हूं कि आप उसमें काम करें, तो मुझे नहीं लगता कि वे काम करने को तैयार होंगे। इसलिए यह कहना गलत होगा कि वे भोजपुरी फिल्म में काम करना पसंद करते हैं या उन्हें इसमें रुचि है। सच्चाई यह है कि भोजपुरी फिल्में बनाना या उसमें काम करना ये छोटे लोगों का काम समझते हैं। वहीं मेरी लड़ाई षुरू से ही भोजपुरी फिल्मों की प्रतिष्ठा को लेकर रही है।
गैर भोजपुरी क्षेत्र के लोगों का इस क्षेत्र में उतरना या इसमें काम करना भी गिरावट की वजह रही है। समस्या क्या है।
हिन्दी फिल्मों के कलाकार भोजपुरी फिल्मों में काम कर सोचते हैं कि उन्होंने निर्माता-निर्देषक पर एहसान किया है। जो ठीक से भाषा ही नहीं समझ सकते, उनकी भाव-भंगिमा क्या होगी! ज्यादातर निर्माता-निर्देषक यह नहीं समझते। वे यह नहीं समझते कि लंदन में षूटिंग करने या हिन्दी कलाकारों को भोजपुरी फिल्म में लेने से व्यवसाय नहीं होने वाला। भोजपुरी फिल्म के दर्षक अपनी माटी से बंधे-जुड़े होते है। वे कहीं भी रहें, उन्हें बिरहा, चैता, ठुमरी, कजरी जैसी चीज आकर्षित करती है।
क्या इसी गिरावट की एक कड़ी है भोजपुरी फिल्मों में पाष्चात्य संस्कृति का समावेष।
नहीं, समय के साथ कुछ बदलाव जरूरी है। अब गांवों की तस्वीर भी बदली है। पहले गांव में बैलगाड़ी थी, आज अच्छी और महंगी गाड़ियां हैं। ग्रामीणों का पहनावा बदला है। हां, रीति-रिवाज, संस्कृति जैसी मूल बातें नहीं बदलनी चाहिए।
द्विअर्थी गीतों का चलन जो षुरू हुआ।
हमारी संस्कृति में कुछ तो रहा है। हम षादी के मौके पर गाली गाते हैं। बाईजी की नाच देखते हैं। वही गाली देने वाले लोग बेटी की विदाई के वक्त काफी भावुक हो जाते हैं। होली के दिन हम भाभी की गाल पर गुलाल मलते हैं, लेकिन पैर छूना भी नहीं भूलते। यह हमारी संस्कृति है। यहां तक तो ठीक है। लेकिन बाजार की दौर में सिर्फ कैसेट बेचने या व्यवसाय करने के लिए जो कुछ हो रहा है, नहीं होना चाहिए। फिल्म बनाते वक्त यह ध्यान रखना चाहिए कि हमारी फिल्म पूरा परिवार एक साथ बैठकर देखता है।
भोजपुरी फिल्मों का सबसे बड़ा बाजार भोजपुरी बेल्ट है, लेकिन यहां के कलाकारों को ही नजरअंदाज किया जा रहा है।
ऐसा नहीं है। कोई भी निर्माता वैसे कलाकारों को लेकर काम करना चाहेगा जहां पैसा डूबे नहीं। यह डिमांड पर निर्भर एक षुद्ध व्यवसाय है। और इस व्यवसाय में प्रतिभावान लड़कों को प्रवेष पाने से कोई नहीं रोक सकता।
बिहार में फिल्म बनाने की कोई योजना।
अगर सरकार सहयोग दे तो अवष्य यहां काम किया जाएगा। एक तो यहां कोई फिल्म उद्योग नाम की चीज है नहीं। दूसरी बात कि सरकार का सहयोग भी नहीं मिलता। यहां टैक्स काफी ज्यादा है। अगर सरकार अनुदान दे और टैक्स माफ करे तो बिहार में भी फिल्में बनने लगेंगी।
अपनी नई फिल्मों के बारे में बताएं।
माई-बाप, पंडितजी, तू ही बनवऽ दूल्हा हमार, पूरब और पष्चिम, बांके बिहारी एम.एल.ए., कन्हैया सहित कई फिल्में हैं।
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‘अनाज नहीं मिल रहा है तो मुझे पोस्टकार्ड लिखकर बताएं’

साक्षात्कार
खाद्य आपूर्ति मंत्री ष्याम रजक ने कहा - बिचौलिए बर्दाष्त नहीं
जविप्र दुकानों पर नजर रखने को निगरानी समिति का होगा गठन
गोदाम मैनेजरों एवं कर्मचारियों के 200 रिक्त पद भरे जायेंगे

अनाज उठाने के बाद दुकानदारों को एसएमएस से देनी होगी जानकारी

सूबे में जन वितरण प्रणाली से जुड़ी षिकायते कोई नयी नहीं हैं। राषन-किरासन के मिलने में होने वाली धांधली से हर कोई वाकिफ है। सत्ता के सिंहासन पर बैठे मंत्री एवं आला अधिकारी जहां अबतक अपनी ही दुनिया में खोये रहे, वहीं बिचौलियों ने जमकर लाभ कमाया। यही वजह है कि गरीबों की हड्डी पर कबड्डी का खेल सालों तक होता रहा। अखबारों में इससे जुड़ी खबरें हमेषा सुर्खियां बनती रहीं। अब बिगड़ी व्यवस्था को संभालने में लग गये हैं खाद्य आपूर्ति मंत्री ष्याम रजक। श्री रजक इस बार जदयू की टिकट से फुलवारीषरीफ विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित हुए हैं। पिछले दिनों उनके चुनाव जितने के बाद उनसे लंबी बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि बिगड़े हालात जल्द ही सुधरेंगे। इसके लिए करीब दो माह का समय मुकर्रर किया गया है। उन्होंने सुधार की जो रणनीतियां बनायी हैं, उससे न सिर्फ बिचौलियों का प्रभाव पूरी तरह खत्म होगा, बल्कि योजनाओं का सीधा-सीधा लाभ गरीबों तक पहुंच सकेगा।
ष्याम रजक ने बताया कि सूबे में जन वितरण प्रणाली की 44 हजार से अधिक दुकानें हैं। अब करीब उतनी ही निगरानी समिति बनायी जायेगी। हर समिति में 10 सदस्य होंगे। इनमें 3 महिलाएं होंगी। उन्होंने बताया कि राज्य खाद्य निगम के जिला गोदामों से दुकानदार के गोदाम तक माल पहुंचने की जानकारी अब एसएमएस से विभाग को देना अनिवार्य होगा। प्रत्येक माह के 20 ता. तक राषि जमा कराना एवं 25 तक अनाज उठा लेना आवष्यक है। साथ ही 5 ता. तक मार्केटिंग ऑफिसर को इसकी जानकारी एसएमएस से देनी होगी। उन्होंने बताया कि जब अनाज दुकानदारों के पास पहुंच जायेगा, वे इसकी जानकारी एसएमएस सेे निगरानी समिति के सदस्यों व कुछ उपभोक्ताओं को देंगे।
श्री रजक ने भारतीय खाद्य निगम एवं राज्य खाद्य निगम के गोदामों की कमी को स्वीकारते हुए कहा कि आधारभूत संरचना का अभाव है। गोदाम मैनेजरों एवं कर्मचारियों के करीब 200 पद रिक्त हैं। जो रिक्त पद हैं, वहां सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारियों को कान्ट्रैक्ट पर रखकर काम लिया जायेगा।
उन्होंने साफ षब्दों में कहा कि किसी भी स्थिति में बिचौलियों को बर्दास्त नहीं किया जायेगा। एक-दो माह के अंदर विभाग को दुरूस्त कर लिया जायेगा। इसके लिए जिलों का दौरा कर जिलाधिकारियों के साथ जविप्र की दुकानों की समीक्षा बैठक की जायेगी। बेहतर कार्य करने वाले डीलर सम्मानित किये जायेंगे। खराब काम करने वालों को दंडित किया जायेगा। श्री रजक ने कहा कि अगर इसके बाद भी किसी को परेषानी होती हो, अनाज ठीक से और समय पर नहीं मिल रहा हो, तो वे मुझे पोस्टकार्ड लिखकर इसकी जानकारी दें। हर षिकायत पर षीघ्र कार्रवाई होगी।
श्री ष्याम रजक से साक्षात्कार लिए और इस आलेख को ब्लॉक में डाले जाने तक कई माह बीत चुके हैं। जनता खुद देखे कि स्थिति क्या है। अगर कोई षिकायत है, तो माननीय मंत्री को इस संबंध में लिखंे।
Some mistakes are due to font problem.