COPYRIGHT © RAJIV MANI, Journalist, Patna

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शनिवार, 8 अक्तूबर 2011

केष सज्जा: हसीनों की पहली पसंद

घर-आंगन

PRIYA KUMARI
व्यक्तित्व को आकर्षक बनाने में बालों की अहम भूमिका होती है। बाल सजाने-संवारने का ढंग अलग-अलग हो सकता है। चेहरे की कटिंग पर यह निर्भर करता है कि किसी चेहरे के बालों को किस ढंग से संवारा जाए। अगर चेहरे के हिसाब से बालों को सजाया जाए, तो यह किसी भी व्यक्ति को अपनी ओर आकर्षित किए बिना नहीं रह सकता। यही कारण है कि बालों के आकर्षक अंदाज ने सदा से ही कवियों-गीतकारों को भी अपनी ओर खींचा है।
महिलाएं अपने बालों को लेकर जितनी चिन्तित दिखती हैं, बालों की विभिन्न समस्याओं से वे उतनी परेषान भी रहती हैं। चेहरे की कटिंग गोल, अंडाकार, लंबा या अन्य तरह की हो सकती है। बाल रुखे, तैलीय एवं साधारण होते हैं। ऐसे में बालों को चेहरे के हिसाब से कैसे सेट करवाया जाए, आदि प्रष्न मन में आते रहते हैं। और हां, फैषन के जमाने में कैान सा स्टाइल आजकल लोग ज्यादा पसंद कर रहे हैं, इन सब बातों को लेकर मथापच्ची ज्यादा ही होती है। ये सवाल चंद दिनों के नहीं हैं। ‘साधना कट’ स्टाइल हम यूं ही नहीं भूल सकते और न ही कवियों-गीतकारांे के सम्मोहन को। यही वजह है कि किसी सुन्दर युवती को देख आज भी युवा “न झटको जुल्फ से पानी, ये मोती टूट जायेंगे” गुनगुनाने से बाज नहीं आते।
इन सबके बावजूद यह संभव है कि आपके बालों को भी एक खास अंदाज की जरूरत हो, ताकि आप भी भीड़ भरे माहौल में प्रषंसा पा सकें। इसके लिए जरूरत है बालों को सही देखभाल की और साथ ही, अपने चेहरे के मुताबिक बालों को उचित रूप देने की। तो फिर कहना ही क्या! आप भी बन सकती हैं हसीन। तो पेष है बालों की सही देखभाल एवं चेहरे की जरूरत के हिसाब से कुछ स्टाइलों पर टिप्स:

घने, काले, चमकदार एवं मुलायम बालों के लिए पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, खनिज व विटामिन युक्त भोजन लेना चाहिए।
हल्के हाथ से बालों पर प्रतिदिन फिराने से बाल सुन्दर एवं चमकदार बनते हैं। हल्के स्पर्ष के द्वारा बालों को आकर्षक बनाने का यह आसान तरीका है। इससे सीर का रक्त संचार ठीक रहता है एवं बालों को उचित पोषक तत्व मिल जाता है।
रात में सोने से पहले बालों को खोलकर कुछ देर धीरे-धीरे कंघी से झाड़ने के बाद हल्के रूप से गूंथना चाहिए। इससे बालों का व्यायाम हो जाता है। साथ ही आवष्यक मात्रा में ऑक्सीजन की पूर्ति भी हो जाती है।
बालों को धोने के लिए किसी एक षैम्पू का चयन कर लें। जब अच्छी तरह आष्वस्त हो जाएं कि षैम्पू आपके बालों को नुकसान नहीं पहुंचा रहा है, तो फिर उसे बदले नहीं।
गर्मी में बालों को सप्ताह में दो बार एवं ठंढ में एक बार सुविधानुसार धोया जा सकता है।
खुष्क बेजान बालों के लिए जैतून का तेल प्रयोग करना अच्छा रहता है। खुष्क बेजान बालों को साबुन से न धोकर षैम्पू अथवा ऑवला, रीठा, षिकाकाई के चूर्ण को फूलाकर धोया जा सकता है।
मानसिक तनाव एवं पेट की बीमारियों का स्पष्ट प्रभाव बालों पर पड़ता है। अतः इससे निजात पाना आवष्यक है।
रूसी, असमय बालों का सफेद होना एवं बालों का झड़ना एक आम परेषानी है। किसी चिकित्सक का परामर्ष लेना उचित होगा।
हेयर ड्रायर अथवा स्प्रे का प्रयोग अधिक करने से बाल झड़ने का डर बना रहता है। अतः किसी विषेष मौके पर ही इसका प्रयोग करना चहिए।
बालों को साफ रखकर रूसी से बचा जा सकता है।
आवष्यक हो तभी सफेद बालों को रंगे। साथ ही सस्ते खिजाबों का प्रयोग न करना ही ठीक है, क्योंकि इससे बचे हुए काले बाल भी सफेद हो जायेंगे और त्वचा के लिए भी यह हानिकारक होगा।
प्राकृतिक बाल ज्यादा सुन्दर होता है। अतः चेहरे के अनुरूप ही इन्हें सेट करवायें।
लड़कियों के बीच आजकल पोषाक में पैंट-षर्ट, टी-षर्ट एवं जीन्स का प्रचलन बढ़ा है। ऐसे में छोटे बाल उन पर ज्यादा अच्छे लगेंगे। साथ ही बालों को संभालने-संवारने मंे परेषानी नहीं होगी।
नाटे कद की लड़कियां अगर छोटा बाल रखेंगी, तो वह कुछ लंबी दिखेंगी। इसी तरह लंबी लड़कियां लंबे बाल से सामान्य कद की लगेंगी। लंबी गर्दन को बालों से ढकने से सौंदर्य में चार चांद लगा जाता है।
चौड़े ललाट को भी सुन्दर बनाया जा सकता है। आगे के कुछ बालों को लटकाकर आधे ललाट के पास से ‘साधना कट’ काट दें तथा षेष बालों को गर्दन तक रहने दें। इससे लंबा चेहरा भी खिल उठेगा।
छोटी उम्र की लड़कियों को ‘व्वॉय कट’ कटवाया जा सकता है। धंुधराले बाल युक्त ‘व्वॉय कट’ छोटी उम्र की लड़कियों को ज्यादा भाता है।
अगर बाल घने हों एवं झड़ते नहीं हों, तो यह बहुत अच्छी बात है। ऐसे में घने-मोटे बालों में दो चोटी की जा सकती है। घर में चोटी खुली रखें। बाहर निकलते वक्त इसे गोलाकार रुप देकर जुड़े की तरह का सेप बना क्लिप लगा लें। इससे बाल भी संवरा रहेगा और देखने में भी अच्छा लगेगा।
लंबे-घने बालों को तीन या चार स्टेप कटिंग कर भी सजाया जा सकता है। ललाट के आगे के बालों को भौ तक काटे, फिर बीच में बालों को गर्दन या कंधे तक और षेष बालों को नीचे से काटकर गोल कर लें। ऐसे स्टाइल वाले बालों को अलग सेे सजाने-संवारने की जरूरत नहीं। सिर्फ बाल साफ एवं खुला रखें।
नव युवतियों के बीच कंधे तक कटे खुले बाल रखने का प्रचलन आजकल ज्यादा है। वास्तव में यह स्टाइल हर किसी को अपनी ओर खीचता है।
सीधे बाल ज्यादा अच्छे लगते हैं। कुछ लोग इन बालों को घुंघराला करवा लेते हैं। अब यह फैषन ‘आउट डेटेड’ हो गया है। सीधे बाल ही अब ज्यादा पसंद किये जाते हैं। इसमें किसी तरह का छेड़छाड़ करना ठीक नहीं।
नौकरी-पेषा वाली महिलाओं को बालों पर विषेष ध्यान देने की जरूरत होती है। अगर बाल लंबे हैं, तो वे जूड़ा बनाकर अथवा रोल कर बालों को संवार सकती हैं। अगर बाल छोटे हैं तो इन्हें क्लिप लगाकर अथवा किसी अन्य तरीके से भी संवारा जा सकता है।
नाटे कद की कामकाजी महीलाएं गर्दन अथवा कंधे तक बालों को रखें तो ज्यादा अच्छा दिखेगा और यह उनके लिए आरामदेह भी रहेगा।
कुछ कामकाजी महिलाएं खुले बाल रखना ज्यादा पसंद करती हैं। ये खुले-लहराते बाल पुरुषों को भी अच्छे लगते हैं। साथ ही यह स्टाइल सेक्स अपील भी करता है। ऐसे में आज के बदले हुए माहौल में यह ध्यान रखना जरूरी है कि खुले-लहराते बाल आपके परिवेष में फीट बैठता है या नहीं।
कुछ प्रदेषों में बाल को सजाने-संवारने में गजरा एवं फूल का प्रयोग किया जाता है। षादी-विवाह अथवा किसी विषेष अवसर पर यह हर कहीं दिखाई देता है। फूलों के बिना तो दुल्हन की सजावट ही अधुरी है। यह सबको खूब भाता है।

यह फीचर पूर्व में दो राष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाषित हो चुका है।

शुक्रवार, 7 अक्तूबर 2011

बारूद के ढेर पर पार्लर

 समाज

बिहार के ब्यूटी पार्लर एवं मसाज सेंटर आजकल चर्चा का विषय बने हुए हैं। ब्यूटी पार्लर और मसाज सेंटरों की एक नई तस्वीर उभरकर लोगों के सामने आई हैै। यह है लोगों को खुबसूरत बनाने या मसाज करने का कम और वेष्यावृत्ति का ज्यादा। प्रमाण है सिर्फ एक दिन में विभिन्न ब्यूटी पार्लरों और मसाज सेंटरों से कुल 18 युवतियों एवं 6 युवकों का जिष्म का खेल खेलते रंगे हाथ गिरफ्तार किया जाना। सुन्दर बनने-बनाने वाले ये लोग जब पुलिस की गिरफ्त में आ गए और पुलिस इन्हें पकड़कर ले जाने लगी, तो ये इस काबिल भी नहीं रहे कि खुद का चेहरा भी दिखा सकें। नतीजा यह कि जिसे जो मिला, उसी से अपना मंुह ढक लिया। सड़क पर भरी भीड़ यह सब देखती रही। धटना पिछले कुछ माह की है।
राजधानी की हृदयस्थली गांधी मैदान के आसपास के क्षेत्रों के ब्यूटी पार्लरों एवं मसाज सेंटरों में ये छापे मारे गए थे। एक्जीबिषन रोड स्थित आईना, रीजेंसी, पर्ल, सनीष, ईगल व न्यू डाकबंगला रोड स्थित ब्यूटी एण्ड ब्यूटी जेंट्स पार्लर से इन युवक-युवतियों के अलावा कंडोम, दर्जनों ब्लू फिल्मों की सीडी, कई आपŸिाजनक सामान व अन्य कागजातों की बरामदगी हुई।
यह कोई पहली धटना नहीं। पिछले दिनों कई छापे पड़े हैं। दर्जनों युवक-युवतियां पुलिस के हत्थे चढ़ चुके हैं। गौरतलब है कि अधिकांष मामलों में छापे से पहले ही ब्यूटी पार्लर व मसाज सेंटर के मालिक पुलिस के पहंुचने से पहले ही फरार हो गए। पकड़े गए तो सिर्फ इन अड्डों पर काम करने वाले कर्मचारी एवं जिष्म का खेल खेलते युवक-युवतियां।
एक मुख्य बात यह भी है कि इस तरह केे सभी पार्लर राजधानी के भीड़-भाड़ व वीआइपी क्षेत्रों में ही हैं। चाहे ये क्षेत्र व्यावसायिक हों या आवासीय। एक्जीविषन रोड, फ्रेजर रोड, श्री कृष्णापुरी, पुनाईचक, न्यू डाकबंगला, बोरिंग रोड इन्हीं क्षेत्रों में से हैं।
कुछ ही माह बीते हैं, राजधानी के गांधी मैदान थाना, डाकबंगला, बोरिंग रोड स्थित विभिन्न पार्लरों में छापा मारकर पुलिस ने 6 पुरुष व करीब एक दर्जन महिलाओं को गिरफ्तार किया। ये छापे खूबसूरत, ब्यूटी, पाकिजा, ब्लीच, रीलेक्स, सीलर, रीगन ब्यूटी पार्लरों में मारे गये। इनमें अधिकांष ब्यूटी पार्लरों में पहले भी छापेमारी हुई है और कई युवक-युवतियां पकड़ी जा चुकी हैं। इन छापेमारी में भी किसी पार्लर संचालक की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। सभी भाग निकलने में कामयाब रहें।
राजधानी के अलावा छोटे षहर में भी यह धंधा काफी फला-फूला है। मधुबनी के नजदीक लालटेन पट्टी क्षेत्र में भी एक ऐसे ही रैकेट का भंडाफोड़ पिछले दो मार्च को हुआ जिसमें 6 महिला समेत 8 लड़कों को पुलिस पकड़ने में कामयाब रही।
इधर, पिछले कुछ माह पूर्व पटना जिले के देहात क्षेत्र में किराये के मकान में रह रही दो युवतियों, पूजा और बेबी (काल्पनिक नाम), को ऐसे ही मामले में पकड़ा गया। पुलिस के अनुसार, पुनाईचक निवासी एक प्रोपर्टी डीलर सिंटू यादव इन युवतियों से धंधा करवाता था। सिंटू अपनी पत्नी के साथ मिलकर यह नेटवर्क चला रहा था और इससे पहले भी वह 6 लड़कियों को विभिन्न दलालों के हाथों बेच चुका था। पुनाईचक इलाके में पार्लर की आड़ में 2 महिलाओं को देह व्यापार में लिप्त होने के आरोप में पकड़ा जा चुका है।
इससे दो महीने पहले भी राजधानी के कोतवाली थाने से महज कुछ ही दूरी पर एक व्यावसायिक भवन स्थित जेंट्स पार्लर से पुलिस ने कई लड़कियों के साथ युवकों को अष्लील हरकतों में लिप्त रंगेहाथ गिरफ्तार किया था। वहीं ग्रामीण क्षेत्र से अगवा कर लायी गयी रिंकी (काल्पनिक नाम) को बोरिंग रोड स्थित एक पुलिस अधिकारी के फ्लैट से गिरफ्तार किया गया।
जिस्मफरोषी से लेकर अपराध तक के इस खेल में अगर पीसी जा रही हैं तो सिर्फ भोली-भाली लड़कियां। पूजा, काल्पनिक नाम, की बात सुनें, तो एक युवक उसे प्रेम जाल मंे फंसाकर षादी करने की बात कह घर से श्गा ले गया। फिर उसे एक दलाल के हाथ बेच दिया। दलाल ने उसे एक ब्यूटी पार्लर में काम पर रखवा दिया। उसके साथ बलात्कार किया और फिर दूसरे के साथ भी हमबिस्तर होने पर मजबूर कर दिया। पूजा कहती है कि घर से भागने के कारण मैं घर वापस लैटने की स्थिति में भी नहीं। वहीं रिंकी बताती है कि आर्थिक तंगी ने उसे पार्लर में काम करने को मजबूर किया। और यहीं वह षारीरिक षोषन का षिकार होकर बाद में इस धंधे को अपनाने को मजबूर हुई।
बताया जाता है कि इन पार्लरों में काम करने आयी लड़कियों को जिष्म सौंपने के एवज में रुपए के चंद टुकड़ों से ही संतोष करना पड़ता है। वहीं पार्लर मालिक या संचालक इन वेष्याओं की कमाई का पूरा पैसा अकेले ही मार लेता है। कहने को तो पार्लरों में 50 से 200 रुपए सिर्फ सेविंग के लिए जाते हैं। मसाज के नाम पर 300 रुपए तक सिर्फ स्पर्ष सुख प्राप्त करने की फीस। सच्चाई यह है कि यहां जिष्म की कोई फीस तय नहीं है। जैसा मनचला फंसा और जैसी लड़की पर फिदा हुआ, उसी हिसाब से रकम वसूले जाते हैं। पार्लर मालिकों के अनुसार, इस धंधे में खतरा तो है, लेकिन उससे कहीं ज्यादा फायदा है। यही वजह है कि यह धंधा रूकने का नाम नहीं ले रहा है।
पुलिस से बच निकलने का एक उपाय खोज निकाला है पार्लर मालिकों ने। यह धंधा पुराने को नये रूप में पेष करने का है। मतलब चलंत वाहनों में मषाज का धंधा! खर्च की बात करें तो तीन से 500 रुपए अतिरिक्त। दरअसल इस नए तरीके में गाड़ी में ही सारी सुविधाएं मौजूद रहती हैं जो पार्लर में होते हैं और इस तरह चलती गाड़ी में जिष्म का खेल श्ी चलता रहता है। सू़़त्र के अनुसार, यह सुविधा सुबह 11 बजे से रात्रि 10ः30 बजे तक ग्राहक को दी जा रही है।
इस खेल में खिलाड़ियों का पुलिस जितना पीछा कर रही है, उससे कहीं बहुत आगे खिलाड़ी दौड़ लगा रहे हैं। अभी हाल ही में पुलिस ने इन ब्यूटी पार्लर एवं मसाज सेंटरों के लिए कुछ नियम बनाये हैं। इस नये नियम के तहत, पार्लर से केबिन को हटाना है। साथ ही दरवाजे पर काला षीषा का प्रयोग नहीं किया जा सकेगा तथा पार्लर खुलने एवं बंद करने का समय भी निर्धारित किया गया है। दूसरी तरफ कर्मचारियों (लड़की एवं लड़का) के नाम-पते एवं फोन नम्बर स्थानीय थाना में दर्ज कराने होंगे। इन सब के बावजूद यहां पुलिस के बनाये नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं। प्रमाण में छापे के दौरान ये जो पकड़े जा रहे हैं। यह खेल हुस्न के ख्ेाल से भी ज्यादा धातक और गंभीर है। अब यहीं से बिहार के ज्यादा अपराधी अपना नेटवर्क चलाने लगे हैं। एक बांह में एक खूबसूरत-सी लड़की और दूसरे हाथ मेें पकड़े मोबाइल से रंगदारी या अपराध की योजना! सबसे रोचक यह कि इससे जहां पार्लर मालिकों की आमदनी बढ़ी है, वहीं मुसिबतें भी। और इसमें सबसे ज्यादा पीस रही हैं कमसीन लड़कियां।
दरअसल अपराधी इन लड़कियों को प्रेम जाल में फंसाकर इनका भरपूर इस्तेमाल कर रहे हैं। कई बार ऐसा भी हो रहा है कि किसी खास सुन्दर एवं तेज-तर्रार लड़की पर एक से ज्यादा अपराधी मर मिटने का खेल खेलने लगते हैं। अपराधियों को लगता है कि यह लड़की ज्यादा विष्वसनीय और उसके काम की है। ऐसे में गैंगवार से लेकर पार्लरों पर हमले तक की घटना हो चुकी है। पुलिस के अनुसार, राजधानी के सुमन ब्यूटी पार्लर, वैलिक्स ब्यूटी पार्लर, ड्रीम ब्यूटी पार्लर, रिलेक्स ब्यूटी पार्लर में पिछले दिनों बमबारी की घटनाएं एवं कई अपराधियों का यहां पकड़ा जाना इस बात को प्रमाणित करता है। ऐसे में इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता है कि बिहार के ब्यूटी पार्लर या मसाज सेंटर आज पूर्ण रूप से बारूद के ढेर पर चल रहे हैं।

DURGA POOJA - 2

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KURJI MORE, PATNA

DURGA POOJA

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KURJI MORE, PATNA

शनिवार, 1 अक्तूबर 2011

‘सामाजिक प्रेम एक गुलामी’

बहस /  दूसरी किस्त

आपकी नजर में प्यार को किस रूप में लोग लेते हैं

प्यार को समाज में अच्छे.बुरे सब रूपों में लिया जाता है। लोग एक तरह के हैं नहीं अनेक तरह के हैं।  इसलिए प्यार के प्रति उनकी दृष्टियाँ भिन्न भिन्न हैं। प्यार को सिरे से खारिज करने वाला आदमी शायद एक भी न मिले। सिर्फ प्यार के स्वरूप को लेकर मतभेद   है। प्यार का एक रूप वर्ग विशेष को पसंद है तो दूसरे वर्ग को वह बिलकुल नापसंद है। इसलिए यहाँ पर संक्षेप में प्यार के विविध रूपों को रखना चाहूँगा।

जितने भी प्रकार के प्रेम हैं उन्हें दो रूपों में वर्गीकृत किया जा सकता है। प्रेम का एक रूप वह है जो आपके भीतर उतरता है और पूरी तरह आप पर कब्जा जमा लेता है। उस अवस्था में आप प्यार के वश में होते हैंए आपका प्यार पर कोई वश नहीं होता। प्यार जैसे आपको नचाता हैए नाचते हैंए जिधर ले जाता हैए जाते हैं। प्यार आपका मालिक हैए आप उसके सेवक हैं। मेरी नजर में ऐसा प्रेम ही वास्तविक और सर्वश्रेष्ठ है। मीराए कबीरए तुलसीए नानकए दादू इत्यादि के प्रेम इसी श्रेणी के शिखर हैं। लैला.मजनूए शीरी.फरहाद आदि जोड़ियाँ भी जुनूनी हैं। अंतर इतना है कि इन जोड़ियों के पास प्रेम विरह तक सिमटा रह गया और वह विस्तार नहीं पा सका। वह संभवतः आत्मा की गहराई तक उतरते उतरते रह गया।
पहले प्रकार के प्रेम को आप परमात्मा के द्वारा बनाया हुआ प्रेमए प्राकृतिक प्रेमए नैसर्गिक प्रेमए स्वाभाविक प्रेमए स्वच्छन्द प्रेम आदि कह सकते हैं। स्वच्छंद शब्द बहुत प्यारा है। इसका माने है अपनी लय मेंए अपने छंद में जीना। यह स्वतन्त्र शब्द से भी ज्यादा सुंदर है। स्वतंत्र का अर्थ है अपने तंत्र में अर्थात् अपने शासन में जीना। छंद आंतरिक चीज हैए तंत्र बहुत कुछ बाह्य है। शासन अपना ही क्यों न होए है तो शासन ही न! दुर्भाग्य से स्वच्छन्द शब्द ष्मनमानीष् के अर्थ में प्रचलित होकर अपनी अर्थवत्ता से बहुत दूर चला गया है।
प्राकृतिक प्रेम या स्वच्छन्द प्रेम के अनंत रूप हैं। चूँकि हर मनुष्य की प्रकृति अलग.अलग होती हैए इसलिए प्राकृतिक प्रेम भी उसकी प्रकृति के अनुसार अलग अलग होता है। समाज में इस श्रेणी के प्रेमियों की संख्या दुर्लभ है। इस तरह के प्रेम में बड़ी ताकत होती है। वह समाज को दूर दूर तक लंबे समय तक प्रभावित करता है। जब तक ऐसे प्रेमी जिंदा रहते हैंए तब तक प्रभाव छोड़ते रहते हैं। उनके मरने के बाद धीरे धीरे प्रभाव क्षीण पड़ता है और समाप्त हो जाता है। जब ऐसा प्रेम प्रभावशून्य होकर जीवन से बाहर हो जाता हैए तब हम उसकी पूजा शुरू कर देते हैं। उन्हें मंदिर में स्थापित कर देते हैं। कृष्ण और राधा की हम पूजा करते हैंए लेकिन वास्तविक जीवन में कृष्ण और राधा दिखाई पड़े तो उन्हें जिंदा जला देते हैं ! इस तरह की पूजा कर्मकांड बनकर निरर्थक हो जाती है और बहुत बार हानिकारक भी होती है।

हिन्दी के स्वच्छंद कवि घनानंद की एक पंक्ति याद आ रही है.
ष्लोग हैं लागि कबित्त बनावतए मोहि तौ मेरे कबित्त बनावतष्

लोग सायास कविता बनाते हैंए लेकिन मुझे तो मेरी कविता ही बनाती है। यानी कविता अपने आप बनती हैए मैं नहीं बनाता। कविता जब स्वतः उतरती है तो उसकी खुशबू कुछ और होती हैए लेकिन जब बनायी जाती हैए तो वह बात नहीं रह जाती। ऐसे ही प्रेम जब स्वयं उतरता हैए तो स्वर्गीय सुगंध से युक्त होता हैए लेकिन जब उसे निर्मित किया जाता हैए तो वह दोयम दर्जे का होता है।
दूसरे प्रकार का प्रेम सामाजिक है। वह मनुष्य निर्मित प्रेम है। समाज उसकी मर्यादा तय करता है और एक खास सीमा में प्रेम को चलाने की इजाजत देता है। पटना के पास दानापुर कंटोनमेंट के अंदर से जो सड़क गुजरती हैए उसकी गति सीमा निर्धारित है। वहाँ सैनिकों का पहरा रहता है। किसी ने नियम तोड़ा कि डंडा बरसाए गाड़ी जप्तएकानूनी कार्रवाई शुरू! सामाजिक प्रेम को भी इसी तरह एक खास गति सीमा में चलाने की इजाजत है। इसे विवाह के अंतर्गत चलाने की आज्ञा है। विवाह मालिक हैए प्रेम उसका नौकर। कहा जाता है कि इससे समाज सुचारु रूप से चलता है! विवाह के बाहर का प्यार अनैतिक माना जाता है!
विवाह के मुख्यतः दो रूप हैं . पहला अरेंज मैरिज और दूसरा लव मैरिज। लव मैरिज को प्राकृतिक प्रेम के अंतर्गत मुझे रखना चाहिए थाए लेकिन नहीं रख रहा हूँय क्योंकि वह ज्यादातर पुरानी रूढ़ियों के अनुसार ही चलता है और विवाह में बदलकर तो अरेंज मैरिज जैसा ही हो जाता है। वह प्रेम अपनी मर्यादा के अनुसार नहींए समाज की मर्यादा के अनुसार चलने लगता हैए इसलिए स्वच्छंदता समाप्त हो जाती है। जिस प्रेम की मर्यादा प्रेम के भीतर से निकले वह स्वच्छंद प्रेम और जिसकी मर्यादा समाज निर्धारित करेए वह सामाजिक प्रेम। साफ शब्दों में कहूँ तो अपने छंद में ;लयद्ध में जीना स्वच्छंद प्रेम है और समाज के अनुसार जीना सामाजिक प्रेम है। सामाजिक प्रेम एक प्रकार की गुलामी है।
अरेंज मैरिज के भी अनेक रूप हैं। मैंने अपने बालपन में अरेंज मैरिज का एक दिलचस्प रूप देखा था। देखा कि नवविवाहित पति महोदय सबकी नजरों से बचते हुए चुपके से रात के अंधेरे में पत्नी.कक्ष में पहुँचते हैं। कुछ देर प्यार करते हैं। उसके बाद आहिस्ते दबे पाँव निकलकर पुनः दरवाजे पर जाकर सो जाते हैं। घर का कोई व्यक्ति पति को पत्नी के साथ रात में भी न देखे तो बड़ी सराहना होती थी। बुजुर्ग लोग अगर पति को सोते वक्त दरवाजे पर देखें और जगते वक्त भी वहीं पायंेए तो बड़े खुश होते थे। ऐसे दंपत्ति की इस ष्शालीनता और मर्यादित आचरणष् की सराहना होती थी। प्रेम का यह रूप अब लुप्त हो चुका है। आज का कट्टरपंथी भी इसे स्वीकार नहीं करेगा।
शुरू में अरेंज मैरिज में लड़की को विवाह पूर्व देखना प्रतिष्ठा के विरुद्ध बात थीए आज भी हैए लेकिन धीेरे.धीरे यह बंधन टूट रहा है। कहीं कहीं इनगेजमेंट के बाद लड़का लड़की फोन पर परिवार की इजाजत से और कहीं इजाजत के बिना ही खूब बतियाते हैं। कभी कभी हॉल में सिनेमा भी देख लेते हैंए पार्क मेंए घर में या जहाँ तहाँ मिल भी लेते हैं। प्रेम विवाह का जितना विरोध पहले थाए वह हल्का हुआ है। मैंने तो एक वज्र रूढ़िवादी को भी प्रेम विवाह स्वीकारते देखा। पिछले पचास वर्षों पर नजर डालें तो यह स्पष्ट हो रहा है कि प्रेम की स्वीकृति की दिशा में समाज ने थोड़ी यात्रा की हैए जो स्वाभाविक भी है। लेकिन इस मंथर गति से समाज को विकसित होने में सैकड़ों वर्ष लग जायेंगे। इसलिए समाज को एक प्रेम क्रांति और सेक्स क्रांति की जरूरत है। अगर विवेक के साथ इस क्रांति का स्वागत नहीं किया गयाए तो अनेक विकृतियाँं आती रहेंगी। जिस शहर को सरकार किसी योजना के तहत तत्परतापूर्वक नहीं बसाती हैए वहाँ बेतरतीब ढंग से लोग बस जाते हैं और तमाम परेशानियों का सामना करते हैं। वैसे ही अगर समाज सुविचारित ढंग से सेक्स.रूपांतरण की योजना तैयार नहीं करता है तो यह बेतरतीब ढंग से चलता रहेगा। इससे कुंठाएँ पैदा होती रहेंगीए अपराध बढ़ते रहेंगेए हिंसा फैलती रहेगी।
तो भाईए समाज में प्रेम को अनेक रूपों में देखा जाता है। यह देखनेवालों की शिक्षाए संस्कार और विवेक पर निर्भर करता है। विवेकशील व्यक्ति प्रेम के मामले में बहुत उदार हैं। सुशिक्षित और सुसंस्कृत व्यक्ति प्रेम को बड़ी ऊँची नजर से देखते हैं। जो पढ़े लिखे नहीं हैंए लेकिन सरल हृदय के हैंए वे भी चाहे ग्रामीण हों या शहरीय प्रेम को बहुत आदर देते हैं। मैंने सिर्फ कुटिल हृदय कुसंस्कारी और कुशिक्षित कट्टरपंथियों को जीवंत प्रेम के विरुद्ध आग उगलते देखा है। वे अवांछित मर्यादाओं के भीतर दम तोड़ते प्रेम को अपने संस्कार के मेल में पाते हैं। अपनी इच्छा के विरुद्ध प्रेम करने वालों के प्रति वे बड़े असहिष्णु होते हैं। उनकी प्रभाव छाया में पलने वाले मूढ़ भी उन्हीं का अनुसरण करते हैं।

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