COPYRIGHT © RAJIV MANI, Journalist, Patna

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रविवार, 11 दिसंबर 2011

विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं के लिए उपयोगी


युवा मंच


सबसे प्राचीन वेद है ऋगवेद
भारतीय संगीत का जनक है सामवेद
गद्य एवं पद्य वाला वेद है यर्जुवेद
तंत्र-मंत्र वाला वेद है अथर्ववेद
सबसे प्राचीन पुराण है मत्स्यपुराण
पुराणों के रचयिता थे लोमहर्ष एवं उग्रश्रवा
स्मृति ग्रंथों में सबसे प्राचीन एवं प्रमाणिक है मनुस्मृति
सिन्धु सभ्यता की लिपि थी भाव चित्रात्मक
‘इतिहास का पिता’ कहा जाता है हेरोडोट्स को
सिन्धु घाटी सभ्यता के लोगों का मुख्य व्यवसाय था कृषि 
सर्वप्रथम पालतू बनाया गया जानवर है कुत्ता
सिन्धु सभ्यता की प्रमुख विषेषता थी नगर योजना
सिन्धु सभ्यता थी आद्य ऐतिहासिक या कांस्ययुगीन
सिन्धु घाटी सभ्यता का प्रमुख बंदरगाह था लोथल, गुजरात
सिन्धु सभ्यता का सर्वमान्य काल है 2350 से 1750 ई.पू.
हड़प्पा स्थित है रावी नदी के तट पर पाकिस्तान के मोंटगोमरी जिला में
मोहनजोदड़ो स्थित है सिन्धु नदी के तट पर पाकिस्तान के लरकाना जिला में
मोहनजोदड़ो से प्राप्त प्रमुख स्मारक है वृहत् स्नानागार
हड़प्पावासी अनभिज्ञ थे लोहा से
हड़प्पा के उत्खननकर्त्ता थे रायबहादुर दयाराम सहनी 1921ई.
सिन्धु सभ्यता का प्रमुख फसल था
आर्य मूल निवासी थे मध्य एषिया के
आर्यो के सर्वाधिक प्रिय देवता थे इन्द्र
आर्यो का प्रिय पषु था घोड़ा
वैदिक सभ्यता में तांबे को कहा जाता था लोहित अयस
भरत में वन्य जीवन बोर्ड की स्थापना सन् 1952 में हुई थी
भारत का राष्ट्रीय पषु बाघ है
भारत में प्रोजेक्ट टाईगर कार्यक्रम 1 अप्रैल, 1973 से चलाया गया
भारत का राष्ट्रीय पक्षी मोर है
घना पक्षी षरणस्थल भरतपुर, राजस्थान में है
कान्हा नेषनल पार्क मध्य प्रदेष में है
बेतला पार्क झारखण्ड राज्य मंे है
भारत में राष्ट्रीय उद्यानों की संख्या लगभग 97 है
वर्तमान में 28 अभयारण्य बाघ परियोजना के अन्तर्गत हैं 
वर्तमान में भारत के 15 जैवमंडल आरक्षण क्षेत्र हैं
नीलगिरी नन्दा देवी सुन्दरबन मन्नार की खारी पचमढी सिपलीपाल नौकरैक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क यूनेस्को द्वारा मान्यता प्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्राप्त है

पेरियार षरणस्थल हाथियों के संरक्षण के लिए है 

भारत में वन्य जीवन संरक्षण अधिनियम सन् 1972 में लागू हुआ 
पक्षी मानव कहलाने का श्रेय डॉं सलीम अली को जाता है
भारत में दो सींग वाला गेंडा पूर्णतः लुप्त हो चुका है
सफेद चीता सबसे पहले रीवा, मध्य प्रदेष में पाया गया
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सुन्दर बनने के कुछ टिप्स


घर आंगन

ANNU  VERMA
सुन्दर दिखना हर कोई चाहता है। लेकिन कोई तैलीय त्वचा से परेषान है तो कोई रुखी त्वचा से। इसके अलावा झाइयां, चेचक के दाग, मंुहासे एवं बालों की समस्याएं लोगों के लिए परेषानी का कारण बनता रहा है। उफ्! आखिर सुन्दर दिखें तो कैसे। इस चक्कर में पड़कर कुछ लोग डॉंक्टर के पास दौड़ते हैं तो कुछ नीम-हकीम के चक्कर में पड़कर काफी पैसे खर्च कर बैठते हैं। जरा सोचिए, इसके बाद भी आपकी समस्या दूर न हुई तो। तो जनाव, जहां समस्याएं हैं, वहीं उसका निदान भी। बस जरूरत है थोड़ी सावधानी एवं कुछ समय देने की। घर में मौजूद चीजों का प्रयोग कर ही आप बन सकते हैं सुन्दर। फिर तो कहना ही क्या, लोग कह उठेंगे - निगाहें मिलने को जी चाहता है।

अन्नु वर्मा के टिप्स

अगर आपकी त्वचा तैलीय है तो बादाम के तेल में नींबू का रस मिलाकर लगाये। त्वचा के लिए यह मिश्रण उत्तम है।
लौंग, मुल्तानी मिट्टी, कपुर एवं नीम की पत्तियों को महीन पीसकर  इसके लेप को चेहरे पर लगाने से यह चेहरे पर होने वाली फोड़े-फुन्सियां खत्म कर देता है।
सोने से पहले मेकअप को उतार देना चाहिए।
हरी सब्जियां, फल एवं दही का सेवन अधिक कर मुंहासे की समस्या से बचा जा सकता है। साथ ही ज्यादा पानी पीना लाभदायक है। 
कपुर एवं मुल्तानी मिट्टी का लेप चेहरे पर लगाने से मुंहासे दूर हाते हैं।
ज्यादा धुप एवं धुल से चेहरे को बचाकर रखने से चेहरा साफ रहता है।
बर्फ के टुकड़े को साफ कपड़े में लपेटकर चेहरा पर मलने से यह गर्मी के दिनों में ताजगी देता है।
झाइयां दूर करने के लिए षहद को नमक में मिलाकर लगायें।
झाइयां दूर करने के लिए नींबू के रस में षहद मिलाकर लगायंे।
पानी में फुलाई हुई मसुर की दाल को दूध में मिलाकर पीस लें, अब इस लेप को चेहरे पर लगायें, इससे चेचक का दाग हल्का हो जाएगा।
रुसी दूर करने के लिए पानी एवं सिरका को बराबर मात्रा में बालों की जड़ में लगाकर 6-7 धंटे तक छोड़ दें, फिर बालों को साफ सादे पानी से धो लें।
पानी में फुलाई हुई मेथी को पीसकर लेप बना बालों में लगाने से बालों का सफेद होना रुक जाता है।
बालों को झड़ने से बचाने के लिए पहले दूध में मेथी डालकर दही जमा लें। अब इस दही को बालों में लगायें।
बालों को लम्बा बनाने के लिए एक बड़ा ग्लास में आधा छटाक सुहागा डालकर एक सप्ताह तक रखें और फिर इसे बाल धोने से पहले बालों में अच्छी तरह लगायें।
चेहरे पर रौनक लाने के लिए संतरे के छिलके को सुखाकर पीस लें। अब इस पाउडर को दूध अथवा पानी में घोलकर चेहरे एवं गर्दन पर लेप करें। थोरी देर बाद ठंढे पानी से अच्छी तरह धो लें।
लौकी के ताजे छिलके को चेहरे पर रगड़ने से चेहरा चमक उठता है।
दूध में चावल का आटा मिलाकर चेहरे पर लेप करने से चेहरे की खुष्की एवं झाइयां दूर होती है।
मुंहासों को दबाना या नोचना ठीक नहीं है। ऐसा करने से दाग पड़ने की संभावना रहती है। अच्छा होगा कि प्रतिदिन चेहरे को साफ पानी से दो-तीन बार धोया जाये।
छरहरी काया के लिए एक ही बार में ज्यादा भोजन लेने के बजाय थोड़ा-थोड़ा कर खाना ठीक रहता है।
खाने के तुरन्त बाद सोना ठीक नहीं है।
अधिक सोना आंखों के लिए कष्टप्रद हो सकता है। आंख के नीचे काला भी पड़ सकता है। सोने से पहले अपना हाथ-पैर धोकर ही बिछावन पर जायें और अच्छी तरह 7-8 घंटे सोयें।
आंखों के नीचे बने ‘डार्क सर्किल’ को दूर करने के लिए खीरा को काटकर घीसने से जो झाग निकले, उसे आंखों के डार्क सर्किल पर लगायें।
किसी भी प्रकार की क्रीम अथवा लोषन का प्रयोग करने से पहले थोड़ा सा लगाकर टेस्ट अवष्य कर लें।
प्रतिदिन 8-10 धुले-साफ तुलसी पत्ती चबाकर खाने से दांत एवं मसूरे साफ एवं कीटाणुरहित बनते हैं। साथ ही कुछ हद तक दुर्गन्ध भी दूर हो जाती है।
खुद से प्यार करना, इंद्रियों पर संयम रखना एवं अपनी कमियों को चेहरे पर प्रकट नहीं होने देना भी सुन्दरता के कई राजों में से एक है।
अन्नु वर्मा दिल्ली में ब्यूटी क्लीनिक चलाती हैं।

गुरुवार, 1 दिसंबर 2011

सुषासन बाबू के नाम खुला पत्र


पड़ताल
संलग्न तस्वीरें उस राज्य की हैं जहां सुषासन है। बिहार जहां की चर्चा आज सभी जगहों पर विकास के लिए हो रही है, कभी लालू षासन में भी चरवाहा विद्यालय को लेकर हुई थी। याद कीजिए, चरवाहा विद्यालय खुला तो जापान तक में काफी तारीफ हुई। वहां पाठ्यक्रम तक में इसे षामिल कर लिया गया। आज चरवाहा विद्यालय की स्थिति क्या है! मैं मानता हूं कि लालूजी की सरकार और नीतीषजी की सरकार में काफी अंतर है। नीतीषजी ने लालू से हटकर जो किया, वह है अपराध पर काफी हद तक काबू और सड़कों का निर्माण। बिहार की जनता यही लंबे अरसे से चाहती थी। बाकी काम जो इस सरकार में हो रहे हैं, उसकी असलीयत तो तब सामने आएगी, जब किसी दूसरे की सरकार बनेगी। एक एक कर पोल खुलेंगे। जांच पर जांच, और कोर्ट का चक्कर! नीतीष की सरकार को लेकर एक बात षुरू से उठती रही है - अफसरषाही को लेकर। लोग कहते फिर रहे हैं कि अपने अफसरोें को नीतीषजी अपने अनुरूप नहीं ढाल पा रहे हैं। मनमानी, रिष्वतखोरी और लापरवाही की खबरें रोज अखबारों में स्थान पा रही हैं। 

एक ऐसा ही उदाहरण है पष्चिम पटना के कुर्जी बालूपर क्षेत्र का। विधायक कोटा तो खत्म हो गया। पिछले विधान सभा चुनाव में यहां के विधायक का क्षेत्र भी बदल गया, लेकिन जाते-जाते उन्होंने अपने बचे हुए फंड को भूगर्भ नाला निर्माण कार्य के नाम पर अपने कार्यकर्ताओं में बांट दिया। और जब फंड मिला तो कुछ काम तो करना ही था। सो पेयजल के मुख्य पाइप के ठीक ऊपर ही नाला बिछा दिया गया। आधा पाइप अब भी गली में ऊपर दिख रहा है। साथ ही स्लोपिंग जिधर होनी चाहिए थी, विपरित दिषा में हो गयी। इस संबंध में जिलाधिकारी को लिखित रूप से दिया गया। आठ माह हो गये, कार्रवाई नहीं हुई। यह है भाजपा विधायक नितिन नवीन के फंड का हाल और भाजपा के सहयोग से चल रही ‘सु-षासन’ का विकास!

एक दूसरा उदाहरण देखिए, मामला भाजपा के ही रविषंकरजी के फंड का है। रविषंकरजी सांसद हैं। उनकी पार्टी बिहार की सरकार को अपना समर्थन दे रही है। अभी जिस गली की चर्चा हुई, उससे सटी गली में ही रविषंकरजी का पीए रहता है। रविषंकरजी के फंड से यहां उसने भूगर्भ नाला एवं गली ढलाई पास करवा लिया। काम कोई दूसरा करवा रहा है। काम हो भी गया। नाला की स्लोपिंग उलटी दिषा में हो गयी। अब दूसरे के बगीचा में पूरे मुहल्ला का गंदा पानी बह रहा है। इतना ही नहीं, इस पीए महोदय के नखरे तो देखिए, इतना नखरा तो षायद कोई विधायक ही करता है। इनका कहना है कि जबतक मैं अपनी गली को चमका नहीं लूंगा, यहां रहने का सवाल नहीं उठता है। तो सुषासन बाबू, अपनी सरकार में षामिल लोगों और लोगों से जुड़े ‘बड़ा बाबू’ पर भी ध्यान दीजिए। क्या सुषासन में ऐसा होता है, मुझे नहीं मालूम। आप से ही जानना चाहता हूं।

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