COPYRIGHT © RAJIV MANI, Journalist, Patna

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बुधवार, 24 अप्रैल 2013

यह लड़की 17 सालों से सिर्फ ‘पेस्ट’ खाती है


राजीव मणि

कुर्जी निवासी सोनम कुमारी पिछले 17 वर्षों से मुंह नहीं खुलने की बीमारी से जुझ रही है। सोनम के नीचे के जबड़े विकृत हो चुके हैं। दांत नहीं खुलते। किसी तरह वह गीला चावल ‘पेस्ट’ के रूप में निगल पाती है। सोनम चबा कर खा नहीं सकती। सोनम के पिता, सत्यनारायण महतो, दरबान का काम करते हैं। माता पाटलिपुत्रा औद्योगिक क्षेत्र की एक दवा फैक्ट्री में शीशी पर लेबल चिपकाने का काम करती है। दो भाई एवं दो बहनें हैं। सोनम बात कर सकती, लेकिन चबाकर खा नहीं सकती है। रोटी या अन्य दूसरी चीजों का तो वह स्वाद तक नहीं जानती। सोनम बताती है कि आर्थिक तंगी के बावजूद वह अबतक करीब 60 हजार रुपए इलाज एवं दवा में खर्च कर चुकी है। करीब तीन वर्ष की थी, तभी से उसे परेशानी होनी शुरू हो गयी। जबड़ों ने काम करना धीरे-धीरे बंद कर दिया। फिर नीचे का जबड़ा जकड़ गया और देखते ही देखते मुंह खुलना बंद हो गया। मुंह खुलना बंद होते ही वह चबाकर कुछ भी खाने से हमेशा के लिए वंचित हो गयी। वह बताती है कि बचपन में दो बार उसका आॅपरेशन भी हो चुका है। इससे कुछ भी फायदा नहीं हुआ। पिछले वर्ष ही वह पटना डेंटल कॉलेज अस्पताल एवं महावीर कैंसर संस्थान में अपना इलाज करवा चुकी है। यहां करीब 60 हजार रुपए खर्च हो गये, लेकिन फायदा नहीं हुआ। सोनम बताती है कि इलाज कर रहे डॉक्टर ने कहा कि मेरी क्लीनिक में आकर दिखाओ, वहां आॅपरेशन करना होगा।  करीब डेढ़ लाख रुपए खर्च आयेंगे। अगर आॅपरेशन सफल रहा तो तुम ठीक हो सकती हो। वह कहती है कि हमलोग गरीब हैं। पिता एवं मां किसी तरह घर का खर्च चला पा रहे हैं। कहां से डेढ़ लाख रुपए आयेंगे। आज सोनम आर्थिक तंगी के कारण अपना इलाज करा पाने में असमर्थ है। वह कहती है कि अगर कहीं से कुछ मदद मिल जाती तो मैं ठीक हो जाती। मैं भी सामान्य जीवन जीना चाहती हूं। अब थक-हार कर इलाज बंद करा चुकी हूं। पैसे भी नहीं हैं। बहरहाल सोनम को भरोसा है कि खबर छपने के बाद कोई न कोई उसकी मदद को आगे आएगा। वह किसी मसीहा के इन्तजार में है जो उसकी मदद कर सके।