COPYRIGHT © RAJIV MANI, Journalist, Patna

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बुधवार, 31 जुलाई 2013

मामला महादलित छात्रा के साथ गैंग रेप का

न्यूज @ ई-मेल 

राजीव मणि 

यह मामला गया जिले के एक महादलित छात्रा का है। श्रीकृष्ण मांझी की पुत्री षांति कुमारी (काल्पनिक नाम) सातवीं कक्षा की छात्रा है। पिछले दिनों उसके साथ कुछ मनचलों ने गैंग रेप किया। पीडि़ता के परिजन ग्राम गंगहर, पो0 कोशिला, थाना मगध विश्वविद्यालय, बोधगया, जिला गया, बिहार के निवासी हैं। इस बस्ती के मुसहर समुदाय के लोगों की मांग है कि जिस महादलित किषोरी के संग गैंग रेप किया गया, सरकार उसे वाजिब मुआवजा दे। साथ ही आरोपितों का स्पीडी ट्रायल हो और उन्हें षीघ्र सजा मिले। 
इधर अखबारों में खबर प्रकाषित होने के बाद खलबली मचनी तय थी। बोधगया थाने की पुलिस ने दबाव बनाना षुरू कर दिया। इसका परिणाम सामने आया। नामजद टेम्पो चालक बाबा जी को पुलिस गिरफ्तार करने में सफल हो पायी। एक को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस का मनोबल बढ़ा। दूसरे फरार चल रहे नामजद को धड़ दबोचने की नीति बनायी गयी। परिणाम यह हुआ कि पप्पू कुमार नामक दूसरे आरोपित ने कोर्ट में जाकर आत्मसमर्पण कर दिया। मामला अभी कोर्ट में है।

काल के गाल में समा रहे मुसहर

नाम प्रमोद कुमार। उम्र महज 16 साल। छात्र नौवीं कक्षा का। इसकी चर्चा इसलिए कि अब नहीं रहा। किडनी की बीमारी से चल बसा। प्रमोद के मां-बाप को भी यक्ष्मा है। पिता बुद्धू मांझी और मां दुखिनी देवी बीमारी से हलकान और परेशान हैं। पिता बुद्धू मांझी पलम्बर का कार्य करता है और मां कचरे के ढेर से रद्दी कागज चुनती और बेचती है। खा-पीकर जो बचाया था, अपने पुत्र प्रमोद की बीमारी में झोंक दिया। अब घर में न खाने को कुछ है और न ही डाॅक्टर को दिखाने को एक ढेला! 
यह स्थिति किसी एक मुसहर परिवार की नहीं। राजधानी क्षेत्र में पटना नगर निगम के वार्ड नम्बर 1 में दीघा मुसहरी है। इसे शबरी कॉलोनी के नाम से भी जाना जाता है। यहां 64 घरों में महादलित मुसहर समुदाय के लोग रहते हैं। कोई 325 लोगों की जनसंख्या है। सूबे की सरकार के द्वारा महादलितों का मकान राष्ट्रीय ग्रामीण नियोजन कार्यक्रम के द्वारा बनाया गया था, जो अब जर्जर हो चुका है। पहले दीघा के चवर में जाकर मुसहर मजदूरी किया करते थे। बिहार राज्य आवास बोर्ड के द्वारा दीघा की जमीन को अधिग्रहण कर लिया गया। अब मुसहर खेत से हटकर महुआ का दारू बनाने के धंधे से जुड़ गये हैं। इससे मुसहरों को कम लाभ और हानि अधिक होने लगी। बेहिसाब महुआ का दारू पीने से मुसहर समुदाय जानलेवा यक्ष्मा बीमारी की चपेट में आ गया। साथ ही अन्य तरह की बीमारियों ने घेर लिया। परिणाम यह हुआ कि असमय काल के गाल में समाते जा रहे हैं मुसहर। कुछ दिनों के अन्तराल में उदय मांझी, अर्जुन मांझी और इंदल मांझी की भी मौत हो गयी। आज यक्ष्मा की चपेट में अधिकांश मुहसर आ चुके हैं। कई दर्जन लोगों की अबतक मौत हो चुकी है। 

गरीबों के पेट पर राजनीति! 

आजकल के नेताओं का क्या! कोई चाहे तो मात्र 5 रुपए में आपको भरपेट खिला दे, कोई 12 रुपए में। महंगाई डायन की ऐसी की तैसी। सब्जी के भाव आसमान पर हो तो रहे। दाल महंगी हो गई हो तो क्या। चावल और गेहूं के भाव से भी क्या मतलब। भारत में भूख से मर रहे बच्चों से भी इन्हें मतलब नहीं। भारत का हर चैथा व्यक्ति भूखा है तो रहे अपनी बला से। लेकिन, इन नेताओं के पास 5 या 12 रुपए में पेट भरने का नुक्षा है। विष्वास न हो तो आप इनके पास जरूर जाइए। वैसे भी चुनाव आने वाला है। ऐसे वक्त में कभी न मिलने वाले ये नेता हो सकता है आपसे मिल जाएं। और अगर मिल गये तो पांच रुपए के सिक्का में तो आपका पेट भर ही देंगे। कहां से भरेंगे, उससे आपको क्या। 
योजना आयोग के अनुसार, उसी व्यक्ति को गरीब माना जायेगा, जिसका मासिक खर्च गांव में 816 रुपए व षहर में 1000 रुपए से कम है। इसका मतलब है कि गांव में 27.20 रुपए और षहर में 33.33 रुपए रोजना खर्च करने वाला व्यक्ति बीपीएल श्रेणी में नहीं आएगा। सरकार के इस फैसले के बाद एक ही झटके से देष में 13.78 करोड़ गरीब घट गए। 2009-10 में गरीबों की संख्या 40.7 करोड़ थी, लेकिन नई गरीबी रेखा के बाद 2011-12 में यह घटकर 26.9 करोड़ रह गई। आंकड़ों की बाजीगरी से गरीबों की संख्या तो कम दिखाई जा सकती है, लेकिन इस प्रपंच और पाखंड से गरीबी मिटने वाली नहीं। बेषक योजना आयोग की इससे साख घटी है। 
लगता है सरकार और एनजीओ के सर्वे करने का ढंग लगभग एक-सा हो गया है। प्रायः यह होता है कि सर्वेयर गांव के किसी नुक्कड़ पर बैठकर सर्वे कर लेता है। उसके बाद घर में आकर घर के मुखिया से हस्ताक्षर करवा लेता है। कई बार तो फर्जी हस्ताक्षर तक कर दिये जाते हैं। उसके बाद ग्राम पंचायत के मुखिया की षरण में चला जाता है। मुखिया विरोधी खेमे के लोगों को बीपीएल श्रेणी से गायब कर देता है। इसका नतीजा गरीब बीपीएल कार्ड से महरूम हो जाता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत स्मार्ट कार्ड से वंचित रह जाता है गरीब। इन्दिरा आवाज योजना से मकान नहीं बन पाता है। कुल मिलाकर कह लीजिए गरीबी खत्म!

और अंत में 

लोकसभा चुनाव आने वाला है। या यूं कह लीजिए कि दलितों, महादलितों, गरीबों का महापर्व आने वाला है। आप अपने मताधिकार का प्रयोग अवष्य करें। अपने लिए, देष के लिए। आप जागेगें तो देष जागेगा। सोच-समझकर अपने मत का प्रयोग करें। 
साथ में आलोक कुमार

मंगलवार, 30 जुलाई 2013

‘कोमा’ में है झारखंड का स्वास्थ्य

बरखा लकड़ा
झारखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के उद्देष्य से जिला, सब डिविजन, प्रखंड एवं पंचायत स्तर पर विशेष चिकित्सकों सहित अच्छे अस्पतालों का होना आवश्यक है। पर आलम यह है कि झारखंड गठन के समय यहां स्वास्थ्य सेवाओं की जो स्थिति थी, आज भी ज्यादा सुधार नहीं हुआ है। शहरी क्षेत्रों की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति ज्यादा दयनीय है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 3 करोड़ जनता महज 2000 सरकारी डॉक्टरों एवं 4000 छोटे-बड़े अस्पतालों के भरोसे है। इस हिसाब से देखें तो 3 करोड़ जनता के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी मात्र 2000 डॉक्टरों के भरोसे है। सरकार को डॉक्टर खोजे नहीं मिल रहें हैं। इसके लिए भी सरकारी नीतियां ही जिम्मेदार हैं। पिछले 11 वर्षों में एक भी कॉलेज नहीं खुला। प्रतिवर्ष सिर्फ 190 नये डॉक्टर ही यहां निकल रहे हैं। 
स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता 
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 18 हजार जनसंख्या पर मात्र 1 सरकारी डॉक्टर है, जबकि 3500 की जनसंख्या पर 1 डॉक्टर होना चाहिए। तीन करोड़ जनता महज 2000 सरकारी डॉक्टरों एवं 4000 छोटे-बड़े अस्पतालों के भरोसे है। राज्य में 227 मेडिकल ऑफिसर, 151 विशेषज्ञ मेडिकल ऑफिसर, 801 स्टाफ नर्स, 417 लैब टेक्निशियन, 335 फर्मासिस्ट कंपाउंडर एवं 7076 एएनएम उपलब्ध हैं। एनआरएचएम के मापदंड के अनुसार, राज्य में 7500 की जगह मात्र 2700 चिकित्सक कार्यरत हैं। इसी तरह 6074 की जगह 5057 एएनएम कार्यरत हैं। 974 ए ग्रेड नर्स की जगह 600 नर्स कार्यरत हैं तथा 85 नर्सिंग ट्यूटर की जगह 27 कार्यरत हैं। 
स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता 
राष्ट्रीय फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार, राज्य मृत्युदर में कमी जरूर आयी हैं। वर्ष 2000 में 20.4 प्रतिशत थी, अब घटकर 7.3 हो गई है। इसी तरह मातृ मृत्युदर प्रति लाख 371 थी, जो घटकर 312 हो गई। इसी तरह शिशु मृत्युदर 1000 की आबादी पर जहां पहले 69 था, अब 46 है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन का उद्देश्य मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को शून्य पर लाना है, लेकिन अभी यह दूर की कौड़ी नजर आती है। राज्य में संस्थागत प्रसव 43.52 प्रतिशत एवं बच्चों का टीकाकरण 80 प्रतिशत है। ‘मुख्यमंत्री जननी योजना’ के तहत माताओं को मिलने वाला लाभ उनतक नहीं पहुंच रहा है। 
आधारभूत संरचनाएं 
राज्य में 6708 प्राथमिक उप-स्वास्थ्य केन्द्रों की जगह सिर्फ 3947 सेंटर ही उपलब्ध हैं। इनमें भी सुचारू रूप से नहीं चलते हैं। इसी तरह यहां 1005 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की आवश्यकता है, जिनमें मात्र 321 ही उपलब्ध हैं। राज्य में 380 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों की जगह 194 उपलब्ध हैं। 24 जिला अस्पतालों की जगह मात्र 21 उपलब्ध हैं। नर्सिंग कॉलेज 3 की जगह 1 है। एएनएम ट्रेनिंग सेंटर 20 की जगह 10 हैं। वहीं 6 मेडिकल कॉलेजों की जगह मात्र 3 मेडिकल कॉलेज उपलब्ध हैं। 
नोट: खूंटी एवं रामगढ़ जिले का ऑंकड़ा रांची एवं हजारीबाग जिले में शामिल है। जनसंख्या जनगणना 2001 के आधार पर। 
एनआरएचएम की स्थिति 
झारखंड में केन्द्र सरकार प्रायोजित राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की स्थिति संतोषजनक नहीं है। झारखंड में 40964 स्वास्थ्य कार्यकर्ता हैं, लेकिन उनमें से 5964 कार्यकताओं के पास स्वास्थ्य किट उपलब्ध नहीं है। 2005 से 2010 तक सरकारी अस्पतालों में 19.2 लाख महिलाओं का सुरक्षित प्रसव करवाया गया, जो राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। नवसृजित राज्य उतराखंड और छत्तीसगढ़ की तुलना में झारखंड काफी पीछे है। एनआरएचएम के तहत गांवों में रहने वाले लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना है। इसका संचालन सरकारी प्राथमिक उप-स्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के माध्यक से करना है। 
एनीमिया की स्थिति 
झारखंड में एनीमिया की स्थिति भयावह है। राज्य में पांच वर्ष से कम आयु के 56.5 फीसदी बच्चे कम वजन के हैं। 70.3 फीसदी खून की कमी के शिकार हैं। इसी तरह किशोरी बालिकाओं में 78.2 फीसदी एनीमिया से ग्रसित हैं। इनमें से 64.2 फीसदी युवतियां विद्यालयों में पढ़नेवाली हैं। इसी तरह से 70 फीसदी महिलाएं खून की कमी का शिकार हैं। आदिवासी समुदाय की स्थिति तो और भी बदतर है। इस समुदाय के पांच वर्ष से कम आयु के 64.3 फीसदी बच्चे अल्प वजन के शिकार हैं एवं 80 फीसदी बच्चे खून की कमी से जूझ रहे हैं। वहीं 85 फीसदी महिलाएं खून की कमी का शिकार हैं। राज्य में कुपोषण के रोकथाम के लिए कई कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। राज्य में 48 कुपोषण उपचार केन्द्र एवं 10 कुपोषण उपचार विस्तार केन्द्र कार्यरत हैं। इसके बावजूद कुपोषण एवं एनीमिया में कमी नहीं आ रही है। 
स्वास्थ्य पर खर्च की स्थिति 
झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाने हेतु केन्द्र सरकार राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनएचआरएम) के तहत राज्य सरकार को प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये उपलब्ध करा रही है। लेकिन, राज्य सरकार इस रुपये का भी उपयोग नहीं कर पा रही है। आधारभूत सरंचनाओं की कमी एवं सरकार के पास विजन की कमी के कारण सरकार को काफी पैसा लौटाना पड़ रहा है।  
पिछले 11 वर्षों में झारखंड के स्वास्थ्य विभाग को 5 मंत्री एवं 13 स्वास्थ्य सचिवों ने संभाला। लेकिन, इसमें कोई खास बदलाव नहीं आया। बदले में एक के बाद एक घोटाले सामने आते रहे। इन घोटालों में मंत्री के साथ नौकरशाह भी जेल में बंद हैं। झारखंड में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 1000 करोड़ रुपये खर्च किये गये, लेकिन धरातल पर कुछ सुधार दिखाई नहीं देता है। स्वास्थ्य विभाग की स्थिति बिल्कुल आपाहिज की तरह हो गई है। बस इसे एक बैशाखी की जरूरत है।

रविवार, 21 जुलाई 2013

Profile of the month

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उभरते कलाकार

  • नाम : प्रिय राज मिश्रा

  • पता : पोस्टल पार्क, नवरतनपुर मंदिर, पटना।
  • पेषा : माॅडल, एलबम में काम।

संक्षिप्त परिचय : 

स्कूल में पढ़ाई के दौरान ही जागरण गाना एवं एलबम में काम करना षुरू किया। भिखारी ठाकुर स्कूल से कत्थक सीख चुके हैं। सुल्तान अहमद के प्रोडक्षन हाऊस ‘फैजान फिल्मस’ से जुड़कर सबसे पहला एलबम ‘होली आईल हाहाकार’ में काम किया। इसके बाद एक के बाद एक कई एलबमों में लीड रोल में आते रहे हैं। जागरण में गाने, भोजपुरी लोकगीत गाने व एलबम में काम करने के अलावा ये कोरियोग्राफी भी कर चुके हैं। अब भोजपुरी फीचर फिल्म के इन्तजार में हैं।


अबतक के प्रमुख भोजपुरी एलबम :

दु गो चांद बाटे, रूमाल वाली, वायरस के छापा, रेंजर पर डेंजर लागेली, मर्डर करवा दी 2009 में, माई के दुआरे चलऽ, माई डाॅक्टरनी माई मास्टरनी, हे माई, षाली सोनी छरईली, आवेला गरीबी, सुना हो जाई संसार, चढ़ल जवानी जहरीला बाऽ, देवरा थानेदार भइल बाटे, बड़ी फाइन लागेलू, ओठ लाली बवाल करताऽ, नंबरी लेबू की हजारी, बोलऽ ए प्राण, लागताड़े हिली इंडिया, माई लखनपुर वाली, पियूष भजन माला, जय हो मईया थावे वाली, सुन-सुन हे जे मोहनी जे, सैन्डिल से जतरा बना देम, ऐ गोरिया तोहरा कजरा, खाली हऊ एगो, मां का मंदिर अद्भुत।
A few mistakes are due to font problem.

बुधवार, 17 जुलाई 2013

‘ई हमार हऽ’ की म्यूजिक लांचिंग

फिल्मी चर्चा

पीवीआर फिल्मस के बैनर तले बनने जा रही भोजपुरी फिल्म ‘ई हमार हऽ’ की म्यूजिक की लांचिंग पिछले दिनों पटना स्थित गार्डन कोर्ट क्लब में की गई। प्रकाष ओझा कृत इस फिल्म के निर्माता पाण्डेय वरूण एवं प्रिंस राय हैं। फिल्म के निर्देषक हैं दीपक पाण्डेय। जेके ने सुन्दर व कर्णप्रिय गीतों से सबको पुराने भोजपुरी गीतों की याद दिलाने की कोषिष की है। वहीं निर्मल पाण्डेय के संगीत ने चार चांद लगाने का काम किया है। गीतों को अपनी मधुर आवाज से संवारा है विनोद राठोर, प्रमीला जैन, मो. अजीज व अविषेक लाल ने। फिल्म के डायरेक्टर ने एक मुलाकात में बताया कि सभी गानों के बोल काफी अच्छे व साफ-सुथरे हैं। लोग अपने घर पर परिवार के साथ बैठकर साफ-सुथरी व मनोरंजक फिल्म का मजा ले सकेंगे। फिल्म के कलाकार हैं प्रकाष प्रिंस, नेहा षर्मा, संजय, गौरव, उज्जवल, काजल, रूपा सिंह, सुनील मसकिया, इन्द्र उपाध्याय, विवेक ओझा, रेनू मिश्रा, षैलेष सिंह राणा। उमानाथ पाठक सहायक निर्देषक हैं। दीपक पाण्डेय ने बताया कि फिल्म पर काफी गंभीरता से काम चल रहा है। जल्द ही लोगों के सामने अच्छी पारिवारिक फिल्म होगी।

रियल लाईफ आॅफ ‘सुपर माॅडल’

सुप्रसिद्ध निर्माता रवि अहलावत, आई टेलीफिल्म प्राईवेट लि., मारुती मूवीज़ एवं पेन एंड कैमरा इन्टरनेषनल (फिल्म वितरक) के आपसी सामंजस्य व सौजन्य से बनी हिन्दी फीचर फिल्म ‘सुपर माॅडल’ का मुंबई में फस्र्ट लुक जारी किया गया। आज पूरे विष्व में फैषन का एकछत्र प्रभाव है। षहर तो षहर, गांव के अमीर-गरीब भी कैसे बच पाते। जैसे ही एक फैषन कंपनी द्वारा ‘सुपर माॅडल’ के चुनाव की खबर मिलती है, एक मध्यम परिवार की लड़की तो जैसे मचल ही जाती है। उसे लगता है कि उसके सपने साकार हो जायेंगे और वह खुष होकर आईसलैंड पहुंच जाती है। वहां उसकी मुलाकात चार हाई-फाई माॅडल से होती है। चारो माॅडल उसे नीचा दिखाने में लग जाती हैं। उसके हौसलों को तोड़ने में और लड़कियां यह कहकर उसे प्रताडि़त करती हैं कि सुपर माॅडल हम अमीर, रसुकदार लड़कियां ही बन सकती हैं। वहां कई बातों ने इस मध्यम वर्गीय लड़की को झकझोर कर रख दिया। ऐसे में क्या यह मध्यम वर्गीय परिवार की लड़की सुपर माॅडल बन पाती है? कहीं यह लड़की गलत लोगों का षिकार तो नहीं बन जाती? फैषन कंपनी के लोग इस लड़की के साथ कुछ गलत तो नहीं कर बैठते? इन सभी सवालों का जवाब तो रियल लाईफ आॅफ ‘सुपर माॅडल’ देखने के बाद ही मिलेगा। सुपर माॅडल बनने का सपना देखने वाली लड़की के किरदार को बड़े ही संवेदनषीलता, व भावनात्मक तरीके से वीणा मल्लिक ने निभाया है। वहीं जैकी श्राॅफ, अमित पटेल के बेहतरीन अदाकारी ने इस फिल्म को देखने लायक बना दिया है। इस फिल्म के निर्देषक नवीन बत्रा हैं। गीतों को लिखा है कनवार जनेजा, हरी शंकर, दिनेष रघुवंषी ने। एसोसिएट प्रोड्यूसर पे्रम गुप्ता व को-प्रोड्यूसर बसंती हैं।

भोजपुरी के बाद गुजराती

सुप्रसिद्ध बाॅलीवुड स्टार व गोविन्दा के भांजे विनय आनंद ने गुजराती फिल्म ‘मंगल फेरा’ में जमकर धमाल मचाया। ज्ञात हो कि ‘मंगल फेरा’ भोजपुरी, नेपाली और गुजराती में बनी थी। यह भोजपुरी में पहले ही रिलीज़ होकर सफलता का परचम लहरा चुकी है। अब गुजराती में रिलीज हुई है। नेपाली में अभी रिलीज होनी है। भोजपुरी में विनय आनंद की आने वाली फिल्मों में मुख्यतः ‘हम बानी बिहारी रिक्षावाला’, ‘तुलसी बिन सुना अंगनवा’, ‘हम बानी बिहारी टाईगर’ प्रमुख हैं।

‘जीना तेरी गली में’ चिंटू

प्रदीप पांडेय उर्फ चिंटू की ‘जीना तेरी गली में’ रिलीज हो चुकी है। चिंटू को अभिनय विरासत में मिला है। इस कम उम्र के हीरो ने अपने अभिनय का परिचय तो बाल कलाकार की हैसियत से दिवाना, सात सहेलियां, देवरा बड़ा सतावेला, मैं नागीत तू नगीना, सौगन्ध गंगा मईया की आदि फिल्मों से ही देना षुरू कर दिया था। निर्देषक पिता के होने की वजह से चिंटू को अवसर मिलता गया। लेकिन अवसर को बनाये रखकर चिंटू ने भी खुद को सिद्ध कर दिया।

मुखिया जी के लव स्टोरी

फ्रेन्ड्स कम्बाईन क्रियेशन के बैनर तले बनने जा रही भोजपुरी फिल्म मुखिया जी के लव स्टोरी के सभी गानों की रिकार्डिंग पिछले दिनों मुंबई के अंधेरी स्थित कुमार शानू के सना स्टूडियो में की गई। गीतकार मुन्ना दुबे के गीतों को इन्दु सोनाली एवं कुमार षानू ने अपनी आवाज दी है। संगीतकार हैं कल्याण सिन्हा। इस अवसर पर फिल्म जगत के कई नामी-गिरामी कलाकारों ने निर्माता-निर्देशक जितेंन्द्र कुमार गुप्ता को बधाई दी। इस फिल्म के माध्यम से नवोदित अभिनेता विजय सिंह को बडे़ पर्दे पर लांच किया जा रहा है। निर्माता-निर्देशक-लेखक जितेन्द्र कुमार सुमन, गीतकार नीतू पाण्डेय, मुन्ना दूबे, कल्याण सिन्हा, संगीतकार कल्याण सिन्हा, छायांकन आरआर प्रिंस, नृत्य राजीव दिनकर, फाईट सिंग इज किंग एवं पीआरओ संजय भूषण ‘पटियाला’ हैं। मुख्य कलाकार हैं, कुणाल सिंह, कल्पना शाह, विजय सिंह, कैलाश गौड़, शिव गुप्ता, सीपी भट्ट, गोपाल राय, एवं अलिशा खान।