COPYRIGHT © RAJIV MANI, Journalist, Patna

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सोमवार, 9 सितंबर 2013

सुबोध नंदन को राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार

Subodh Kumar Nandan
सम्मान
बिहार के युवा पत्रकार सुबोध कुमार नंद को उनकी दूसरी पुस्तक ‘बिहार के मेले’ के लिए राहुल सांकृत्यायन पर्यटन पुरस्कार योजना (2011-12) के तहत सांत्वना पुरस्कार मिला है। पुरस्कार के रूप में उन्हें 10 हजार रुपए का चेक व प्रमाण-पत्र दिया गया है। इस पुस्तक का प्रकाशन प्रभात प्रकाशन, नई दिल्ली ने किया है। यह पुरस्कार पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से दिया जाता है। लगातार दूसरे वर्ष पुरस्कार पाने वाले वह बिहार के पहले व एकमात्र लेखक हैं। इसमें उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशांक को उनकी पुस्तक ‘हिमालय का महाकुम्भ नन्दा राजजात’ को प्रथम पुरस्कार मिला। पिछले साल सुबोध को उनकी पहली पुस्तक बिहार के पर्यटन स्थल और सांस्कृतिक धरोहर को प्रथम पुरस्कार (2009-10) मिला था। इससे पूर्व पर्यटन के क्षेत्र में बढ़ावा व जागरूकता पैदा करने के लिए वर्ष 2003 में सुबोध को बिहार सरकार ने पर्यटन सम्मान प्रदान किया था। श्री नंदन पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में हैं। वर्तमान में वे हिन्दी दैनिक हिन्दुस्तान, भागलपुर में संपादकीय विभाग में कार्यरत हैं।

शादी के नाम पर रिंकी को मिला धोखा

अपराध कथा

  • सीआरपीएफ का जवान करता रहा शारीरिक शोषण 
  • छुपकर रचाई घर व मंदिर में शादी, अब पत्नी मानने से किया इन्कार 

अरवल जिले के कुर्था थानान्तर्गत निधवां गांव की रहने वाली है रिंकी कुमारी। इनके पिता का नाम है फागु दास। महादलित तबके की रिंकी ने बोधगया स्थित विवेकानंद टेक्निकल ट्रेनिंग काॅलेज, केन्दुई, से एक साल के ओटी अस्सिटेंट में डिप्लोमा कोर्स किया है। निधवां गांव में ही स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत हैं सुनील कुमार चाौधरी। सुनील कुमार चाौधरी नया टोला, राजा बाजार, जहानाबाद के मूल निवासी हैं। इनके पुत्र हैं आलोक भारती। आलोक की नौकरी 2012 में सीआरपीएफ में लगी। अभी इनका पदस्थापन गुड़गांव, हरियाणा में हुआ है। इनका बल संख्या 125300033 बताया जाता है। 
रिंकी का आरोप है कि शादी की बात कहकर आलोक भारती उसके साथ शारीरिक संबंध बनाते रहे। अपने परिवार के लोगों को अंधकार में रखकर आलोक ने 2011 से ही गया, जहानाबाद और पटना में रखकर उसका शारीरिक शोषण किया। विरोध करने पर एकबार घर में और दूसरी बार गया के बेलागंज स्थित काली मंदिर में भगवान को साक्षी मानकर 1 जनवरी, 2012 को सिंदुर डालकर शादी भी रचायी। तीसरी बार सीआरपीएफ के अफसरों से माह भर की छुट्टी लेकर रीति-रिवाज से विवाह करने का वादा तो किया, लेकिन आजतक शादी नहीं की। 
रिंकी का कहना है कि शादी का प्रलोभन देकर लगातार दुष्कर्म करने वाले आलोक अब पहचान से भी इंकार कर रहे हैं। गया में तीन माह रहकर लगातार दुष्कर्म करते रहे। साथ ही उसके साथ जहानाबाद में तीन माह और पटना में 9 माह तक मनमानी किया गया। रिंकी का कहना है कि अलग-अलग जगहों पर ले जाकर शारीरिक संबंध बनाने से वह दो बार गर्भवती भी हुई। एक बार गया और दूसरी बार पटना में उसका गर्भपात कराया गया। खुद आलोक दवा की दुकान से दवा खरीदकर लाते और खुद ही दवा दे दिया करते थे। हां, आलोक जहां जाते, मुझे पत्नी के रूप में पे किया करते थे। इसके अलावा सभी लोगों से धर्मपत्नी कहकर ही परिचय भी कराते थे। इसी क्रम में 31 दिसंबर, 2012 को मुझे सीआरपीएफ कैम्प, गुड़गांव बुलाये। वहां पहुंचकर कोर्ट मैरेज करना था। छुट्टी नहीं मिलने का बहाना बनाकर उन्होंने मुझे वापस भेज दिया। लौटने से पहले दिल्ली में रहने वाली मामी के घर में 1 से 5 जनवरी, 2013 तक रहीं। इसके बाद दिल्ली से 6 जनवरी, 2013 को पुनः गुडगांव स्थित सीआरपीएफ के कैम्प में चली गयी। यहां के अफसरों से आपबीती बयान की। अफसरों ने आलोक भारती को बुलाया। अफसरों के बुलावा पर आलोक भारती आये। उसके बाद अफसरों के सामने उन्होंने मुझे पहचानने से इंकार कर दिया। 
कुछ लोगों के समझाने पर मैंने 100 नंबर डायल कर स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दी। सूचना के बाद तत्क्षण पुलिस आ पहुंची। बदरपुर थाना की पुलिस ने आकर समझौता करा दिया। समझौता में आलोक भारती शादी करने के लिए तैयार हो गये। इसके बाद अपने पिता सुनील कुमार चैधरी से आलोक भारती ने मोबाइल पर बात किया। मेरे ससुर ने हिन्दु रीति रिवाज से शादी करने को बिहार बुलाया। इस ग्राउण्ड पर अफसरों ने एक माह की छुट्टी आलोक को मंजूर कर दी। छुट्टी लेकर किसी अन्य ट्रेन से वे बिहार लौटे। मैं अकेली बिहार आ गयी। यहां आकर वे पलट गये। अब मामला कोर्ट में है।

शनिवार, 7 सितंबर 2013

पाषाण युग की याद दिलाता बंगालगढ़

खास खबर

बांका जिले में धनुवसार प्रखंड है। यहीं एक गांव है बंगालगढ़। यह गांव महादलितों व आदिवासियों का है। आजादी के 66 साल बाद भी यहां के लोग ताड़ के पत्तों से झोपड़ी बनाकर रहने को बाध्य हैं। कहीं-कहीं तो नजारा बिलकुल पाषाण युग की तरह है। जैसे-तैसे लोगों का जीवन बस कट जा रहा है। सुविधा के नाम पर शून्य! सरकार की तरफ से यहां के लोगों के लिए क्या किया गया, यह अब कहने को नहीं रह गया। यहां रहने वाले लोग वनाधिकार कानून - 2006 के तहत परवाना हासिल करने के पात्र हैं। बावजूद इसके वन विभाग द्वारा परवाना निर्गत नहीं किया जा रहा है। 
यहां के लोग नदी-नाले का दूषित पानी पीने को बाध्य हैं। यहां चापाकल और कुआं निर्माण नहीं होने के कारण यह स्थिति है। करीब 54 परिवार के गरीब लोगों के पास रकम नहीं है कि वे चापाकल या कुआं का निर्माण कर सके। मरता क्या न करता! बंगालगढ़ के लोगों ने नदी-नाले के गंदला पानी को साफ करने का जुगाड़ निकाल लिया। नदी से पानी नाली के रूप में बहकर आगे की ओर बढ़ते चला जाता है। वहां से पानी हटने पर किनारे पर कुछ बालू रह जाता है। इसी किनारे पर लोगों ने पानी को साफ करने में अपना दिमाग लगाया। नाली के किनारे बालू को हटाकर गड्ढा बना लिया जाता है। इसे आदिवासी चुवाड़ी करके संग्रह करना कहते हैं। नाली का पानी बालू से छनकर गड्ढा में एकत्र होने लगता है। इसी गड्ढे के पानी को कटोरा से लेकर दूसरे बर्तनों में डालते हैं। इसी पानी को घरेलू और पेयजल के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इस पानी को पीकर लोग रोग के मुंह में समाते चले जा रहे हैं। सरकार पोलियो उन्मूलन के लिए करोड़ों रुपए पानी की तरह बहा रही है। परन्तु बंगालगढ़ के लोगों को शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं कर पा रही है। 
यहां के अनुसूचित जाति एवं जनजाति समुदाय के लोगों ने सूबे के मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि जिस प्रकार ग्रामीण क्षेत्र में एक अश्व शक्ति की मशीन लगाकर पेयजल की व्यवस्था की जा रही है। उसी तरह एक अश्व शक्ति वाला मोटर पंप बंगालगढ़ में भी लगवा दें। ऐसा करने से लोगों को शुद्ध पेयजल मिलने लगेगा। ज्ञात हो कि यह एक अश्व शक्ति वाली मशीन दूसरे गांवों में जहां लगी है, सोलर सिस्टम से चलायी जा रही है। 

सुशासन के सरकारी बाबू और वनाधिकार कानून!

बिहार में वनाधिकार कानून-2006 के तहत राज्य सरकार संवेदनशील नहीं है। 7 साल के अंदर केवल 76 लोगों को वनाधिकार कानून के तहत लाॅलीपाॅप की तरह पर्चा थमा दिया गया है। इससे वनभूमि क्षेत्र में रहने वाले लोगों के बीच आक्रोश है। स्वंयसेवी संगठन एकता परिषद, बिहार की संचालन समिति की सदस्या मंजू  डुंगडुंग का कहना है कि जमुई जिले में वनभूमि का परवाना मांगने पर प्रशासन द्वारा फर्जी मुकदमा दर्ज कर दिया जाता है। चांदन प्रखंड की समन्वयक वीणा हेम्ब्रम का कहना है कि लोगों को जल्द से जल्द परवाना मिलनी चाहिए। लोग आज भी अपने हक के लिए विभागों का चक्कर लगाने को मजबूर हैं और उन्हें वन विभाग की प्रताड़ना झेलना पड़ रहा है।  
राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष ललित भगत कहते हैं कि केन्द्र सरकार ने वनाधिकार कानून-2006 बनाया है। इसके तहत वनभूमि पर रहने वालों को वनभूमि का पर्चा देकर मालिकाना हक देना है। अभी तक बिहार में सिर्फ 76 लोगों को पर्चा दिया गया है। इसमें दो जिले भाग्यशाली हैं। जिनको वनभूमि पर काबिज रहने का परवाना मिल सका है। फिलवक्त बांका जिले में 54 और गया जिले में 22 लोगों को पर्चा मिला है। 
बिहार में बांका, जमुई, मधेपुरा, गया, पश्चिम चम्पारण, अररिया, कटिहार आदि जिलों में वनभूमि है। इस वनभूमि क्षेत्र में 13 दिसंबर, 2005 से पूर्व रहने वाले अनुसूचित जनजाति और 3 पीढ़ी रहने वाले गैर अनुसूचित जनजाति के लोगों को वनाधिकार कानून-2006 के तहत परवाना देना है। 
वनाधिकार कानून के प्रावधान के तहत ग्राम पंचायत के मुखिया के द्वारा वनभूमि क्षेत्र में रहने वाले अनुसूचित जनजाति और गैर अनुसूचित जनजाति के लोगों का चयन किया जाता है। ग्राम पंचायत के मुखिया के द्वारा प्रस्ताव पारित कर पंचायत समिति में अग्रसारित किया जाता है। इसके बाद जिला स्तर पर अग्रसारित किया जाता है। ग्राम पंचायत के मुखिया के द्वारा अग्रसारित होने के बाद पंचायत समिति द्वारा अनुमोदित होती है और गहन रूप से जांच वन कमिटी के द्वारा होती है। आवेदन को स्वीकार अथवा अस्वीकार करना वन कमिटी के अधिकार क्षेत्र में आता है। वन कमिटी की अनुशंसा के बाद ही वनभूमि क्षेत्र में रहने वाले को वनभूमि का परवाना दिया जाता है। अभी तक कई जिलों में वन कमिटी का निर्माण नहीं किया जा सका है। 
वन अधिकार समिति के सचिव शिव कुमार दास ने बांका जिले के चांदन प्रखंड के अंचलाधिकारी महोदय के नाम से आवेदन दिया है। आजतक यहां से किसी तरह की कार्रवाई नहीं की जा सकी है। अतरी प्रखंड के नरावट पंचायत के वनवासी पहाड़ के नीचे रहते हैं। गैर अनुसूचित जनजाति श्रेणी के महादलित 4-5 पीढ़ी से यहां रहते आ रहे हैं। इनका आवेदन सीओ को दिया गया है। पर कार्रवाई नगण्य है। 

बाढ़ से बचाने में लगे बाल मजदूर! 

गंगा में पानी लबलबा रहा है। एक बार फिर पटना पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। सारे नाला-नाली जाम हैं। बाढ़ का पानी निकालने के लिए वर्षों पहले लगायी गयी मशीन जाम पड़ी है। थोड़ी सी बरसात होने पर ही कई मुहल्ले बरसात के पानी से भर जा रहे हैं। कई जगहों पर तो नाव चलाने की नौबत तक आ गयी। लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया। दो दिनों के लिए प्रभावित इलाकों के सभी स्कूल तक बंद करने पड़े। खैर! सरकार और सरकारी अधिकारियों को इससे क्या। हां, दिखाने को कुछ किया जरूर जा रहा है। 
पानी पटना में प्रवेश ना करे, इसके लिए बोरे में रेत भरकर रखने का काम शुरू हो चुका है। अभी तक सैकड़ों बोरे में रेत भरकर रखा जा चुका है। और सरकार द्वारा कराये जाने वाले इस काम में लगे हैं बाल मजदूर! अगर विश्वास न हो तो आप राजधानी स्थित गंगा टावर अपार्टमेंट के सामने आकर देख सकते हैं। 18 साल से नीचे के बच्चे यहां काम कर रहे हैं। एलसीटी घाट पर बाल मजदूर बोरों में रेत भर रहे हैं। इन दिनों गंगा और सोन नदी उफान पर है। पानी थोड़ा और बढ़ने पर तटबंध के गेट को बंद करने की आवश्यकता होगी। तब इन्हीं भरे हुए बोरों से गेट को बंद कर दिया जाएगा। बोरों में रेत भरने वालों ने बताया कि एक बोरे में रेत भरने के लिए चार रुपए मिलते हैं। इस कारण वयस्क मजदूर कार्य करना नहीं चाहते। वहीं ठेकेदार भी काम कराकर कम पैसे देते हैं।

मंगलवार, 3 सितंबर 2013

साली के प्यार की प्यास

अपराध कथा 

जमशेदपुर, बिहार का चर्चित हत्या काण्ड

11 मई को राजेश ने सुबह से ही अपनी पत्नी ममता से जिद करनी शुरू कर दी कि वह अपने रिश्ते की बहन सोनी को उसके पति गोपाल के साथ खाने पर बुलाये। ममता इसके लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी, परन्तु राजेश ने अपनी पत्नी ममता पर इतना दबाव बनाया कि ममता की राजेश के आगे एक न चली। आखिर थक हार कर ममता को पति की जिद पर गोपाल एवं सोनी को खाने पर बुला लिया। 
शाम होते-होते गोपाल अपनी पत्नी सोनी व बच्चों के साथ राजा तालाब स्थित राजेश के घर आ पहुंचा। थोड़ी देर में दोनों ने बैठकर एक दूसरे का हालचाल लिया और फिर गुपचुप करके राजेश व गोपाल घर से निकल पड़े। लगभग एक घंटे बाद जब वे दोनों लौटे तो राजेश के हाथ में एक झोला व एक पैकेट था। ममता राजेश के हाथ में झोला व पैकेट देखते ही समझ गयी कि उसमें दारू, मुर्गा व नमकीन होगी। 
GOPAL
ममता दारू की बोतल व मुर्गे को देखते ही जल भुन सी गयी। परन्तु कुछ बोली नहीं, क्योंकि जानती थी कि उसके कुछ बोलते ही घर में बवाल मच जायेगा। साथ ही राजेश उससे मारपीट चालू कर देगा। इसलिए वह चुप रही। 
राजेश के हाथ में दारू व नमकीन आते ही उसके आंखों में चमक सी आ गयी। उसने ममता से कुछ प्याज काटने को कहा और प्याज कटते ही उसे व नमकीन को लेकर एक कोने में गोपाल के साथ बैठ गया। बोतल खोल ली, साथ ही पीने पिलाने का दौर शुरू हो गया। थोड़ी देर में एक बोतल दारू खत्म हो गयी। राजेश दूसरी बोतल भी खोलने लगा, तब ममता से देखा नहीं गया। उसने जब राजेश को रोका तो राजेश ममता को भला बुरा कहने लगा, तो ममता भी गुस्से में आ गयी। उसने खाना व मुर्गा तो बना ही दिया था। उसने अपने बच्चों को साथ लिया और उसी वक्त घर से रिश्तेदार के घर निकल गयी। 
सुबह वह जब घर लौटी तो उसने अपने घर के बगल में एक गड्ढ़ा खोदा देखा तो उसको आश्चर्य हुआ कि उसके घर के समीप गड्ढ़ा किसने खोदा। उसने दरवाजा खटखटाया तो राजेश ने दरवाजा खोला। राजेश तब तक सो रहा था। ममता घर के अन्दर गयी तो उसे घर का सामान अस्त व्यस्त दिखा। साथ ही उसे एक सब्बल दिखा, जिस पर खून लगा था। वह सब्बल एक माह पूर्व राजेश ने खरीदा था। 
SONI
वह आगे बढ़ी तो उसने देखा कि अन्दर एक बोरा रखा हुआ जिसमें खून लगा था, उसमें कुछ ठूंसा हुआ सा था। उसने जब उस बोरे व सब्बल पर लगे खून के बारे में अपने पति से पूछा तो राजेश ने ममता को बताया कि दारु के नशे में उससे गोपाल का झगड़ा हो गया था, जिससे उसने सब्बल से वार किया गोपाल एक ही वार में ढेर हो गया। उसके बाद उसने गोपाल की लाश बोरे में ठूंस दिया है। साथ ही उसने ममता को धमकी देते हुए यह भी कहा कि उसने अगर यह बात किसी से बतायी तो वह उसकी भी इसी प्रकार हत्या कर देगा। साथ ही उसको धमकी देते यह भी सुझाया कि चाहे तो वह एक खून करे या दो, उसकी सजा उतनी ही मिलेगी। इसलिए वह अपना मुंह बंद रखे। राजेश द्वारा इतना सब सुनते ही ममता के पैरों के नीचे जमीन खिसक गयी और पुनः अपने रिश्तेदार के यहां उल्टे पांव लौट आयी। 
12 मई, 2013 की सुबह जमशेदपुर जिले के बागबेडा के थाना-प्रभारी महेश प्रसाद सिंह को हरहरगुट्टू के लोगों ने सूचना दी कि उनके पड़ोस के एक घर से सड़ांस की गंध सी आ रही है। उन्होंने इस सम्बन्ध में उस घर में रहने वाले किरायेदार राजेश यादव से भी कहा तो वह उन लोगों से कहने लगा कि ‘‘तुम लोगों को कोई काम नहीं है जो हमें परेशान कर रहे हो। साथ ही वह अपना घर बंद करके चलता बना। 
RAJESH
इतनी बात पता चलते ही थाना प्रभारी महेश प्रसाद सिंह को समझ में आ गया कि जरूर कुछ तो बात है, नहीं तो इस प्रकार पड़ोसी थाने में नहीं आते। उन्होंने तुरन्त अपनी जीप निकलवायी और हरहरगुट्टू क्षेत्र के राजा तालाब की ओर चल पड़े। 
थाना प्रभारी महेश प्रसाद सिंह ने वहां पहुंच कर पूछताछ की, तो पता चला कि जिस घर के कमरे से लोगों ने गंध आने की बात बतायी, उस घर का मालिक कृष्णा सिंह है, जिसे उन्होंने छत्तीसगढ़ के राजनंद गांव के मूल निवासी राजेश यादव को किराये पर दिया था। जिसमें वह अपनी बीवी-बच्चों के साथ रहता था। साथ ही जमशेदपुर में रहकर किसी ठेकेदार के यहां सुपरवाइजर का काम करता था। 
थाना प्रभारी श्री सिंह ने जब कमरे को देखा तो उसके गेट पर ताला बंद था और साथ ही समीप की एक अधखुली खिड़की से सड़ांध की गंध आ रही थी। थाना प्रभारी श्री सिंह ने अविलंब अपने डीएसपी (विधि व्यवस्था) कन्हैया उपाध्याय व जमशेदपुर के एसएसपी रिचर्ड लाकड़ा को सूचित कर दिया। फिर छानबीन में जुट गये। 
थोड़ी ही देर में डीएसपी कन्हैया उपाध्याय भी मौके पर पहुंच गये। उनके आने के पहले उस घर का श्री सिंह ने चारों ओर घूम कर निरीक्षण किया तो उनको घर के बगल में एक ताजा गड्ढ़ा भी खोदा नजर आया, जिससे उनका माथा ठनका। चूॅकि राजेश फरार हो चुका था, इसलिए उन्होंने उस कमरे का ताला तोड़ने का एक आरक्षी को आदेश दिया। आरक्षी ने जैसे ही दरवाजा खोला, पूरा वातावरण दुर्गन्धमय हो गया। आरक्षी अंदर गया और उसने बाहर आकर बताया कि अंदर प्लास्टिक के बोरे में कुछ भरा है, उसी में से सड़ांध आ रही है। 
इतना सुनते ही थाना प्रभारी श्री महेश प्रसाद सिंह ने दो-तीन और आरक्षियों को बोरे को बाहर ले आने का आदेश दिया। थोड़ी ही देर में आरक्षियों ने उस प्लास्टिक के बोरे को अंदर से बाहर लाकर रखा। उस बोरे से काला तरल पदार्थ चू रहा था। थाना प्रभारी को अनुमान लगाने में जरा सी देर नहीं लगी कि वह तरल पदार्थ फिनायल था, जिसमें सम्भवतः बोरे में से आ रही गंध को छिपाने के उद्देश्य से बोरे के ऊपर डाला गया था। 
RECHARD LAKARA, SSP
बाहर निकाल कर जब बोरे को खोला तो उसमें से एक युवक की लाश मिली, जिसे बोरे में बुरी तरह ठूंसा गया था। थाना प्रभारी ने पूछताछ की तो कुछ लोगों ने उन्हें जानकारी दी कि समीप मोहल्ले में इस घर के किरायेदार राजेश यादव की पत्नी ममता के रिश्तेदार रहते थे। थाना प्रभारी श्री महेश प्रसाद सिंह इतना पता चलते ही ममता के रिश्तेदार की खोज करने लगे और उन्हें इसमें सफलता भी मिल गयी, क्योंकि वहां पहुंचने पर उन्हें राजे की पत्नी ममता अपने बच्चों के साथ मिल गयी। 
जब थाना प्रभारी ने राजे की पत्नी ममता से पूछताछ की तो उसने रोते हुए बताया कि उसका पति राबी किस्म का था। इसके साथ ही उसकी रिष्ते की बहन सोनी के साथ राजे का अवैध सम्बन्ध था। वह सोनी के साथ कोर्ट मैरिज भी कर चुका था। सोनी के पति गोपाल को भी इसकी जानकारी थी। परन्तु सोनी गोपाल के वष में नहीं थी। ममता को भी इस जीजा-साली के अवैध रिष्ते पर आपत्ति थी, परन्तु वह विरोध करती तो उसका पति राजे उसके साथ मारपीट करता था। कभी-कभी वह इससे अजीज आकर वह अपने रिष्तेदार के यहां बच्चों को लेकर आ जाती थी। साथ ही उसने यह भी पुलिस को बता दिया कि उसके घर से जो सड़ी ला मिली है, वह गोपाल का है। उसकी हत्या राजे ने ही की है। 
थाना प्रभारी ने ममता से मृतक गोपाल का घर का पता पूछा और उसके घर पर दबिश दी तो वहां राजेश मृतक गोपाल की पत्नी के साथ रंगरेलियां मनाते मिला। थाना-प्रभारी ने राजेश और सोनी को अपनी गिरफ्त में ले लिया और पूछताछ करने के बाद बागबेड़ा थाना ले आए। 
पहले तो राजेश इस हत्या के बारे में अनजान बना रहा। परन्तु, जब पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया तो आखिर वह टूट गया, उसने अपना अपराध स्वीकार करते हुए पुलिस को बताया कि उसने गोपाल की बीबी के साथ मिलकर गोपाल की हत्या कर दी। फिर गोपाल के घर में आ छिपा। उसके कई वर्षों से गोपाल की पत्नी सोनी के साथ अवैध सम्बन्ध थे। इस बात को उसकी पत्नी ममता एवं गोपाल को भी पता था। परन्तु, वह कुछ चाहकर भी नहीं कर सकता था, क्योंकि उसके गोपाल पर काफी एहसान थे। 
पर गोपाल अपनी पत्नी सोनी से आए दिन उसको लेकर मारपीट किया करता था, जिसमें सोनी अपने पति से अजीज आ चुकी थी। वह उससे जिन्दगी भर के लिए छुटकारा चाहती थी। इसलिए सोनी ने अपने जीजा से प्रेमी बने राजेश से एक दिन कहा। 
‘‘जीजा, तुम किसी तरह से मुझे इस हैवान से छुटकारा दिलवा दो। वरना मैं अपनी जान दे दंूगी। ये रोज-रोज की मारपीट मुझसे बर्दास्त नहीं होती।’’ 
‘‘तो बताओ, क्या करना चाहिये?’’ राजेश ने पूछा। 
पूछते क्या हो, खुद ही समझ लो कि क्या करना है। बस मुझे इस आदमी से छुटकारा दिला दो। अब मैं सिर्फ तुम्हारी होकर रहना चाहती हंू। इसके लिए मुझे जो भी करना पड़ेगा करुंगी।’’ 
‘‘यह तो एक ही तरीके से संभव हो सकता है कि गोपाल की हत्या कर दी जाये।’’ 
‘‘तुम कुछ भी करो जीजा, मगर मुझे इस दलदल से बाहर निकालो।’’ 
राजेश भी समझ चुका था कि बिना गोपाल का अंत किए वह सोनी को अपना नहीं बना पाएगा। इसलिए उसने सोनी के साथ मिलकर गोपाल की हत्या की एक योजना बनायी। 
योजनानुसार राजेश ने अपनी बीवी ममता पर दबाव बनाकर सोनी व उसके पति गोपाल को अपने घर खाना खाने के बहाने 11 मई की शाम को बुला लिया और फिर योजनाबद्ध तरीके से गोपाल के साथ पीने-पिलाने का दौर चलाने लगा। राजेश गोपाल को ज्यादा पिलाता गया। जब गोपाल पूरे नशे में हो झूमने लगा, तो राजेश की पत्नी ममता ने गोपाल को इस प्रकार पिलाने का विरोध किया। इसपर राजेश ने ममता को जानबूझकर उकसाया, जिससे ममता गुस्से में आकर अपने रिश्तेदार के यहां चली गयी। 
षड़यंत्र के अनुसार सोनी तो पहले से ही राजेश से मिली थी। उसने एक माह पूर्व ही एक सब्बल राजेश को खरीदकर लाने के लिए बोल दिया था। जब गोपाल बिल्कुल नशे में धुत हो गया तो उसने राजेश को इशारा किया। राजेश ने सोनी के इशारे को भांप उसने घर में पहले से छिपाया हुआ सब्बल निकाला। गोपाल कुछ समझ पाता कि सोनी ने पीछे से अपने पति का मुंह अपनी हथेली से बंद कर दिया और राजेश ने पीछे से आकर सब्बल का एक भरपूर वार उसके सिर पर किया। गोपाल को नशे के कारण अपना बचाव करने का मौका ही नहीं मिला। उसके सिर से खून की धारा फूट पड़ी। वह एक ही वार में ढेर हो गया। 
सोनी ने राजेश का सहयोग करते कपड़े से गोपाल का फटा सिर दबाए रखा, जिससे बहुत ज्यादा खून नहीं बहा, जो बहा भी उसे सोनी ने झट कपड़े से साफ कर दिया। फिर दोनों ने मिलकर पहले से रखे एक बोरे में गोपाल की लाश को मोड़ कर ठूंस दिया। 
इस बीच सोनी ने अपने चारो बच्चों को अलग कमरे में सुला दिया था। गोपाल को ठिकाने लगाने के बाद में सोनी और राजेश गोपाल की मौत का जश्न मनाते हुए वहीं हमबिस्तर हुए। सुबह होते ही पहले सोनी अपने बच्चों के साथ राजेश के घर से निकल कर अपने घर चली गयी। सोनी के निकलने के बाद राजेश ने अपने घर के बगल में एक गड्ढा खोदा। उसकी सोच थी कि उस गड्ढे में हमेशा-हमेशा के लिए गोपाल को दफन कर देगा। 
कुछ लोगों ने उससे यह भी पूछा कि वह गड्ढा क्यों खोद रहा है, तो उसने कहा कि पर्यावरण के हित के लिए वह उसमें एक पेड़ लगाना चाहता है। लोगों ने जब यह बात सुनी तो आश्चर्य भी हुआ। राजेश की बात उन लोगों को हजम नहीं हुई। 
सुबह उसकी पत्नी ममता लौटी तो उसने भी अपने घर के बगल में एक गडड्ा देखा। फिर घर में घुसते ही बोरा व खून लगा सब्बल देखकर पूछा, तो उसने गोपाल की सब्बलमार कर हत्या करने की बात बतायी। वह अपने पति की करनी और पति की धमकी को सुनकर फिर वापस अपने रिश्तेदार के घर पहुंच गयी। 
इधर गर्मी के कारण जब लाश से सड़ांध सी फैलने लगी तो राजेश बाजार गया और एक गैलन फिनायल ले आया और उसे बोरे में उड़ेल दिया। जिससे की लाश की सड़ांध छिप जाय और वह गोपाल की लाश को मौका पाकर पहले से खोदे गड्ढे में दफना सकें। पर कहते हैं कि पाप छिपता नहीं। राजेश को मृत गोपाल की लाश को ठिकाने लगाने का मौका ही नहीं मिला और लाश से ज्यादा दुर्गंध उठने लगी तो वह अपने घर में ताला लगाकर फरार हो कर सोनी के घर जा छिपा। 
उधर थाना प्रभारी बागबेड़ा, राजेश की पत्नी ममता का पता लगाते उसकी रिश्तेदार तक पहुंच गये। ममता ने अपने पति की सब करतूत बता दी। साथ ही उनको मृतक गोपाल और सोनी के घर का पता भी बता दिया। 
तेज तर्रार थाना प्रभारी तुरन्त सक्रिय हो गये और समय रहते ही उन्होंने मृतक गोपाल के घर छापा मारकर रंगरेलियां मनाते सोनी व राजेश को गिरफ्तार कर बागबेड़ा थाना ले आया। पहले तो राजेश उनको बरगलाता रहा, परन्तु जब उन्होंने उसे बताया कि उन्हें ममता ने सारी बात बता दी है और उन्होंने उसके घर से मृत गोपाल की लाश, खून लगे सब्बल को बरामद कर लिया है, तो उसने अपराध स्वीकारोक्ति बयान में बताया कि सोनी रिश्ते में उसकी बीबी की छोटी बहन लगती थी। उसकी शादी उसके गांव में ही हुयी थी। जीजा साली के रिश्ते के कारण राजेश सोनी से उसकी शादी के पहले से मजाक करता था, ममता को भी इस के रिश्ते पर कभी आपत्ति नहीं रही। सोनी की जब शादी ममता के ससुराल के पास हो गयी, तब ममता को लगा कि उसकी बहन उसके पास ही आ गयी है, हमेशा सुख-दुख में साथ देगी। 
सोनी के पति की आर्थिक स्थिति ठीक न थी, इसलिए राजेश सोनी की बराबर आर्थिक सहायता करता। सोनी की सहायता करते-करते राजेश कब सोनी के समीप आ गया, उसे स्वयं भी पता न चला। सोनी राजेश से अपने दिल का हाल बता देती। राजेश जितना संभव होता, उसकी मदद करता। एक दिन सोनी ने राजेश को बताया कि उसका पति बेरोजगार है, तो राजेश ने कहा कि वह काम के सिलसिले में जमशेदपुर परिवार सहित जा रहा है। उसका मन हो तो वह भी पति को साथ लेकर जमशेदपुर चले। वह उसके पति की नौकरी वहां लगवा देगा। सोनी ने जब अपने पति गोपाल से अपने जीजा का प्रस्ताव बताया तो वह जमशेदपुर चलने को राजी हो गया। 
गोपाल ने गाढ़ाबासा में किराये का कमरा लिया और राजेश ने हरहरगुट्टू के राजा तालाब में। धीरे-धीरे समय बीतता रहा। चूंकि राजेश पढ़ा-लिखा था, इसलिए मेहनत कर कुछ समय में सुपरवाइजर बन गया। दूसरी ओर गोपाल पढ़ा लिखा न था, इसलिए उसकी कमाई भी कम थी। सो आर्थिक परेशानी बनी रहती। सोनी मदद लेते-लेते राजेश के इतनी करीब आ गयी कि राजेश जो कहता, सोनी वही करती। 
गोपाल की जानकारी में राजेश कई-कई दिन गोपाल के घर पड़ा रहता जो उसे नापसंद था। पर गोपाल राजेश के अहसान के बोझ तले इतना दबा था कि बोल भी नहीें पाता। 
एक बार जब राजेश सोनी के घर पहुंचा सोनी का चेहरा खिल उठा, पर राजेश बाहर ही खड़ा था। तो सोनी ने कहा - ‘‘क्या बात है। बाहर ही खडे़ रहोगे या अंदर भी आओगे,’’ सोनी ने मस्ती से राजेश की तरफ देखा तो उसका दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। 
सोनी भले ही चार बच्चों की मां थी, फिर भी उसके अंदर गजब का आकर्षण था। राजेश जब घर में घुसा तो सोनी ने झट से दरवाजा बंद कर लिया। 
राजेश भी तो यही चाहता था, पर उसने अंजान बनते कहा ‘‘सोनी ये क्या कर रही हो?’’ 
‘‘कैसे नादान मर्द हैं आप, ऐसा लगता है कि कुछ समझते ही नहीं।’’ 
‘‘सब समझता हूं मैं सोनी, पर सोचता था कि तुम बुरा न मान जाओ, मुझे भी तुमसे प्यार हो गया है     जीजा जी।’’ 
‘‘मुझसे प्यार करते थे और कहा भी नहीं। अब भी ज्यादा देर नहीं हुयी हैं। साली से क्या शरमाना! साली को तो आधी घरवाली इसलिए बोलते हैं।’’ 
इतना कह कर सोनी ने राजेश की कलाई पकड़ ली और राजेश के साथ अपने बिस्तर पर उससे सट कर बैठ गयी। 
राजेश भी मूड में आ चुका था। वह भी मस्ती से बोला - ‘‘आज जी करता है, तुम्हें बाहों में भर कर तुम्हारा पूरा रस चूस लूं’’ 
‘‘तो फिर चूसते क्यों नहीं। मैं भी आज सब वही चाहती हंू, जो तुम करना चाहते हो।’’ 
फिर क्या था, सोनी की पूर्ण सहमति मिलते ही राजेश ने सोनी के खूबसूरत शरीर का रसास्वादन करना शुरु किया। अगले ही पल दोनों एक दूसरी दुनिया की ओर चले गये। घंटों बाद अलग हुए। यह अवैध सम्बन्धों का सिलसिला एक बार शुरु हुआ तो बढ़ता ही चला गया। कुछ दिन बीते इसकी भनक जब गोपाल को हुयी, तो उसने जमकर सोनी की पिटाई कर दी। इसपर सोनी गोपाल पर बिफरते कहने लगी - ‘‘यदि तुम निठल्ले न होते तो ये दिन आते ही क्यों। न तो मैं जीजा से मदद लेती और न ही वे मेरे समीप आते। उस समय तो तुम्हें भी पैसे लेते बुरा न लगा।’’ 
सोनी की बात एकदम सच थी। गोपाल उसके प्रश्नों का उत्तर न दे पाया। अंततः यह अवैध सम्बन्ध बढ़ता रहा और गोपाल व सोनी में राजेश को लेकर आये दिन किचकिच बढ़ती रही। जिसका परिणाम यह हुआ कि गोपाल को सोनी व राजेश ने मिलकर ठिकाने लगा दिया। 
बागबेड़ा पुलिस ने गिरफ्तार राजेश व सोनी को 13 मइ्र्र को जमशेदपुर के सीजेएम की अदालत में प्रस्तुत किया। जहां से दोनों को 14 दिनों की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया। वहां वे दोनों अपने कर्मों की सजा भुगत रहे हैं। सोनी के बच्चें अपने दादा के पास हैं। 
कथा पुलिस सूत्रों एवं जनचर्चा पर आधारित है।


लेखक परिचय : श्री सच्चिदानंद सिंह देश के जाने-माने अपराध कथा लेखक हैं। वे पिछले 25 वर्षों से अपराध कथा लिख रहे हैं। सच्ची कहानियां, मनोहर कहानियां, नूतन कहानियां, तुलसी कहानियां, सरस सलिल, सरिता व अन्य दर्जनों राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में उनकी कहानियां, फीचर और लेख प्रकाशित हो चुके हैं। यूपी के रहने वाले सच्चिदानंद कवरेज के लिए अबतक करीब पूरे भारत का भ्रमण कर चुके हैं। अब वे अपना कीमती समय निकालकर MANIfeature के लिए भी लिखेंगे।

सोमवार, 2 सितंबर 2013

मुझे किस गलती की सजा दी गई मां!

न्यूज@ई-मेल

  • पिछले दो दशकों में लगभग एक करोड़ कन्या भ्रूण-हत्याएं हुई हैं जो दिल्ली महानगर की जनसंख्या के लगभग बराबर है
  • पढ़े-लिखे एवं धनी परिवारों में कन्या भ्रूण-हत्या की घटनाएं गरीब, अनपढ़ या कम पढ़े-लिखे परिवारों से अधिक
  • अगले कुछ वर्षों में देश में 6 लाख प्रतिवर्ष की दर से लड़कियों की कमी होती जायेगी 

लड़कियां अब लड़कों से कम नहीं। हर क्षेत्र में लड़कियां बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। कई क्षेत्रों में तो लड़कियों का प्रदर्शन लड़कों से काफी अच्छा है। खेद है, इसके बावजूद लड़कियों को हमारे समाज में न सिर्फ ‘पराया धन’ समझा जाता है, बल्कि कोख में ही मार दिया जा रहा है। मतलब जन्म से पहले ही हत्या, सिर्फ इसलिए कि लड़की जन्म लेने वाली है। यह स्थिति अनपढ़ व पिछड़े समाज में ही नहीं, सभ्य व पढ़े-लिखे समाज में भी है। इसके गंभीर परिणाम अब सामने आने लगे हैं। लिंग अनुपात में काफी अंतर आ गया है। साथ ही विवाह को लेकर भी समस्याएं गंभीर होती जा रही हैं। समाज में यह देखने को मिल रहा है कि लड़के वाले ही अपने परिवार के लोगों से विनती करते हैं कि वे किसी लड़की वाले को शादी के लिए भेजें या शादी के लिए लड़की हो तो बताएं। 
2011 जनगणना के आकड़े बताते हैं कि साक्षरता दर में वृद्धि हुई है। लेकिन, स्त्री-पुरुष लिंगानुपात के मामले में स्थिति काफी चिन्ताजनक एवं चैकाने वाले हैं। देश के कुछ राज्यों को छोड़कर अन्य राज्यों में स्त्री-पुरुष लिंग अनुपात काफी कम बना हुआ है। वहीं कुछ राज्यों में यह घट भी रहा है। बिहार में जहां 2001 के जनगणना में लिंगानुपात 1000 पर 919 लड़कियों की संख्या थी, वहीं 2011 की जनगणना में यह संख्या 1000 पर 916 हो गयी है। बिहार में 0-6 आयु वर्ग में भी लिंगानुपात 2001 में 1000 पर 942 था, वहीं 2011 में 1000 पर 933 हो गया है। आंकड़ों के अनुसार, बिहार के दरभंगा में ही ऐसे 49 गांव हैं जहां 1000 पर 700 से कम लड़कियां हैं, तो 16 गांव ऐसे हैं जहां 1000 पर मात्रा 500 के लगभग लड़कियां ही बची हैं। 
पिछले दो दशकों में लगभग एक करोड़ कन्या भ्रूण-हत्याएं हुई हैं जो दिल्ली महानगर की जनसंख्या के लगभग बराबर है। भारत में प्रतिवर्ष 120 लाख लड़कियां पैदा होती हैं। इनमें से 10 लाख जन्म के प्रथम वर्ष में ही मर जाती हैं। दो बालिकाओं में एक कुपोषण का शिकार होती है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 6 बच्चों में 1 बच्चे की हत्या सिर्फ लड़की होने के कारण होती है। पढ़े-लिखे एवं धनी परिवारों में कन्या भू्रण हत्या की घटनाएं गरीब, अनपढ़ या कम पढ़े-लिखे परिवारों से अधिक है। शहरों की स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों से ज्यादा बदतर है। यह समस्या सभी जाति, धर्म एवं सम्प्रदायों में कमोवेश समान रूप से प्रचलित है। 
अगर यह सब चलता रहा तो अगले कुछ वर्षों में देश में 6 लाख प्रतिवर्ष की दर से लड़कियों की कमी होती जायेगी। और उतने ही लोग कुंआरे भी रह जायेंगे। समाज में लड़कियों-औरतों के प्रति बलात्कार, छेड़खानी, हत्या, सेक्स, ट्रैफिकिंग जैसी घटनाएं बढ़ेंगी। हमारी पूरी सभ्यता और संस्कृति पर ही प्रश्न चिन्ह लग जायेगा। इस पर रोक लगाने के लिए प्री-नैटल डायग्नौस्टिक टेक्नीक (पीसीपीएनडीटी) एक्ट 1994 भी बनाया गया, जो पूरे देश में 1 जनवरी, 1996 से ही लागू है। इस अधिनियम के तहत गर्भ में पल रहे शिशु के लिंग जांच पर रोक लगा दी गयी है। परन्तु, पीसीपीएनडीटी कानून के तहत अभी तक कोई प्रभावकारी दंडात्मक कार्रवाई नहीं हो पायी है। यह दुखद है। 
गैर सरकारी संस्था एक्शन एड ने वर्ष 2012 में अप्रैल माह से सूबे के 5 जिलों गया, पटना, वैशाली, मुजफ्फरपुर और दरभंगा में ‘बिटिया बचाओ, मानवता बचाओ’ कार्यक्रम आरंभ किया है। इसके तहत सूबे के 37 जिलों को पांच खंडों में विभक्त कर वाहन यात्रा और जन जागरण पैदा किया जा रहा है। 10 से 18 जुलाई तक फिल्म, अभिनय एवं संभाषण कर चेतना लाने का प्रयास किया गया। गैर सरकारी संस्थाओं की मदद करने वाले एक्शन एड ने बेटियों को बचाने के लिए 38 जिलों में सिर्फ भागलपुर को छोड़कर 37 जिलों में वाहन से भ्रमण किया।