COPYRIGHT © RAJIV MANI, Journalist, Patna

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गुरुवार, 31 अक्तूबर 2013

सामंती सोच की कहानी है ‘प्लास्टिक का भालू’

Dr.  LALJI  PRASAD  SINGH
राजीव मणि
‘प्लास्टिक का भालू’ डाॅ. लालजी प्रसाद सिंह की नई बाल कहानी है। इस बाल कहानी के माध्यम से कथाकार ने अमीर-गरीब के बीच एक मोटी दीवार खींची है। साथ ही सामाजिक व्यवस्थाओं के बीच बाल मनोविज्ञान को दर्शाने में यह कहानी काफी हद तक सफल रही है। वहीं शुरू से ही सामंती सोच हावी दिखती है।
दरअसल कहानी में ‘प्लास्टिक का भालू’ एक खिलौना है। सारे झगड़े का जड़ यही है। सुदीप बाबू और उनके यहां काम करने वाली मंगली का पति चेबरा आपस में भिड़ जाते हैं। महज एक पुराने-गंदे खिलौने के लिए। दोनों के बच्चे खिलौना पर अपना-अपना दावा कर रहे हैं। तू-तू, मैं-मैं होती है और सुदीप बाबू पुलिस को बुला चेबरा को खिलौना चोरी करने के जुर्म में पकड़वा देते हैं। 
कहानी में एक गरीब महिला के द्वंद्व को काफी अच्छी तरह दिखाया गया है। 
मंगली को झगड़े की आशंका महसूस हुई। उसने चेबरा को समझाना चाहा - ‘‘अब चुप ही रहो सो अच्छा। बात बढ़ाने से का फायदा ? ऊ सुदीप का बचवा जिदिया गया था भालू के लिए ... ।’’ 
‘‘लेकिन अपना गणेश रो रहा है सो - ? दूसरे के बच्चे के लिए तुम्हें इतनी चिन्ता है और अपने बच्चे के लिए ... ? देखो तो रोते-रोते इसकी घिग्घी बंध चली है और तू है कि ...! कैसी महतारी (मां) हो तुम!’’ 
मंगली ने हाथ चमकाते हुए कहा - ‘‘तो का कहते हो, ऊ बबुआ को भी छछना दें ? अपना गणेश तो ऐसे भी चुप हो ही जाएगा, थोड़ा बहुत रो बिसुरकर।’’ 
कहानी की भाषा सरल और बोलचाल की है। ‘बिहारी टोन’ होने के कारण बिहार के लोगों को कहानी अच्छी लगेगी। ज्यादातर संवाद इसी अंदाज में लिखे गये हैं।
मंगली जोर से चिल्लाते हुए चेबरा को बोली - ‘‘बाबू लोगों से ‘गलथेथ’ काहे करते हो ? हम ठहरे गरीब-गुरबा आदमी, बाबू लोगों से उझराना ठीक नहीं। चलो अब अन्दर आओ।’’
पूरी कहानी में पैसे वाले गरीब पर भारी पड़ते हैं। गरीब थोड़ा आन्दोलित होता भी है, लेकिन जल्द ही हार जाता है। गरीब जैसे हारने के लिए ही होता है।
बाल कहानी होने के नाते पूरी कहानी पढ़ने के बाद भी बच्चों के लिए यह समझना आसान नहीं कि कहानी क्या शिक्षा देना चाहती है। पूरी किताब में सिर्फ एक ही कहानी है। आवरण चित्र ठीक-ठाक, छपाई सुन्दर व साफ-सुथरी है।

गुरुवार, 17 अक्तूबर 2013

विरोध में अपना जननांग काट डाला

अजब गजब 
राजीव मणि 
कैसे-कैसे बाबा और कैसे-कैसे उनके प्रशंसक! बात ही कुछ ऐसी है। सेक्स स्कैण्डल में फंसे आसाराम बापू जेल में हैं। यह बात उनके एक प्रशंसक साधु को ठीक नहीं लगी। ... और उन्होंने क्षुब्ध होकर कुल्हाड़ी से अपना जननांग ही काट डाला। मामला अमेठी के गौरीगंज क्षेत्र के माधवपुर गांव के ओंकारदास आश्रम का है। जननांग काटने वाले साधु का नाम है प्रेमदास। जब लोगों को इस बात की खबर मिली, आनन-फानन में उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया। भई, साधु बाबा ने जिसके कारण अपना जननांग काट डाला, वे तो उसी अंग के कारण जेल पहुंच गये।

राजा होने का नशा

कहा जाता है कि नशा कई चीजों में होती है। कोई चीज हद से बहुत ज्यादा बढ़ जाए तो यह है नशा। अब एक नया मामला देखिए। गुजरात की घटना है। राजा-रजवाड़ खत्म हो गए, पर उनका नशा अब तक चढ़ा हुआ है। 
गुजरात के छोटा उदेपुर के पूर्व राजपरिवार के सदस्य के खिलाफ शराब पीकर पत्नी के मारपीट और खुद को राजा बताकर एक से अधिक रानियां रखने का अधिकार जताने के आरोप लगे हैं। पूर्व राजपरिवार के सदस्य भवानी प्रताप उर्फ नानुराजा और पूर्व राजमाता निर्मला कुमारी के खिलाफ उनकी बहू राजश्री ने वड़ोदरा के महिला पुलिस थाने में मामला दर्ज कराया है। 
अब राजा जी का क्या होगा! उनका तो बाजा यूं ही बज जायेगा।

पब्लिसिटी स्टंट

पब्लिसिटी के लिए लोग न जाने क्या-क्या कर गुजरते हैं। एक कहावत भी है - बदनाम होंगे तो क्या नाम न होगा! अपनी प्रत्युषा बनर्जी को ही देखिए। वही प्रत्युषा जो एक चैनल पर प्रसारित होने वाले शो बालिका वधु में आनंदी का किरदार निभा चुकी है। आजकल बिग बाॅस में है। जैसा सभी जानते हैं कि बिग बाॅस में विवादों में रहने वाले लोगों को ही प्रवेश मिलता है। यह बात प्रत्युषा बेबी को भी पता थी। उन्होंने कारण ढूंढ लिया। बिग बाॅस में जाने के लिए अपने पूर्व प्रेमी मकरंद के खिलाफ पुलिस में मारपीट की रिपोर्ट दर्ज करवा दी। फिर क्या था, ... लो हम तो हो गये प्यार में बदनाम।

निकाह से पहले फोन या फेसबुक ... ना बाबा ना

विश्व विख्यात इस्लामिक शिक्षण संस्थान दारुल उलूम ने पिछले दिनों एक फतबा जारी किया। इसके अनुसार, मंगनी का मतलब सिर्फ वायदा-ए-निकाह है। बाकायदा निकाह नहीं है। अतः मंगनी के बाद भी लड़का और लड़की दोनों एक-दूसरे के लिए अजनबी ही रहते हैं। दरअसल दारुल उलूम के आॅनलाइन फतवा विभाग पर पाकिस्तान से एक व्यक्ति ने फतवा मांगा था कि वह मंगनी के बाद लड़के और लड़की के ताल्लुकात के बारे में जानना चाहता है। फतवे के अनुसार, सगाई के बाद भी लड़के और लड़की का फोन या फेसबुक के जरिये बातचीत करना या संपर्क में रहना नाजायज है।
यह खबर उनके लिए ठीक नहीं कही जा सकती, जिनकी अभी तक मंगनी तक नहीं हुई है और फोन या फेसबुक पर दिन-रात लगे हैं। अगर गपियाना ही है तो पहले निकाह क्यों नहीं कर लेते।

और अंत में ...

पिछले दिनों अखबारों में एक खबर छपी। पढ़कर काफी निराशा हुई। रोम स्थित खाद्य व कृषि संगठन, एफएओ, के अनुसार, हर वर्ष दुनिया में 1.3 अरब टन अन्न की बर्बादी होती है। खाद्य संस्था के महानिदेशक जो ग्रेजियानो डी. सिल्वा ने कहा कि हर वर्ष धरती पर पैदा किया गया एक तिहाई अन्न बर्बाद हो रहा है। और यह ऐसी स्थिति में जब 87 करोड़ लोग प्रतिदिन भूखे रहते हैं। बर्बादी का हिसाब लगाए तो 750 अरब डालर से ज्यादा का नुकसान हर साल हो रहा है। रिपोर्ट में अन्न की बर्बादी के लिए चीन को सबसे ज्यादा जिम्मेदार बताया गया है।
ज्ञात हो कि भारत में भी अन्न की काफी बर्बादी होती है। सरकारी गोदामों में अन्न के सड़ने की खबरें अक्सर चर्चा में रही हैं। वहीं ज्यादा पैदावार और सही मूल्य न मिलने से किसाद खुद ही काफी आलू और टमाटर यहां बर्बाद कर चुके हैं। पंजाब-हरियाणा में पिछले सालों ऐसा ही हुआ था, जब लाखों टन आलू-टमाटर सड़क पर यूं ही फेंक दिये गये। और फिर विरोध स्वरूप उन्हें गाड़ी से कुचल दिया गया। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि कृषि प्रधान इस देश में आज भी लाखों लोग सिर्फ पानी पीकर ही सोने को मजबूर हैं। अनाज व सब्जी मंडियों में भी काफी बर्बादी होती है। इसपर सभी को ईमानदारी से सोचना चाहिए। कम से कम बर्बाद करने से तो अच्छा होगा कि गरीबों में ही विरोध स्वरूप बांट दिये जायें। विरोध भी हो जाएगा और मदद भी। साथ ही पूरी दुनिया में यह एक अच्छा संदेश जायेगा।

रविवार, 13 अक्तूबर 2013

भक्तों के उत्साह के आगे तूफान हारा

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बंगाल की खाड़ी में आयी तेज चक्रवाती तूफान से बिहार तक प्रभावित हो गया। इसके बावजूद भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई। दिन-रात मां की पूजा अर्चना को लोग पूजा पंडालों में कतार में खड़े दिखे। ये तस्वीरें राजधानी पटना की हैं।



शनिवार, 5 अक्तूबर 2013

आर्ट है मेंहदी लगाना

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मेंहदी महिलाओं के मुख्य श्रृंगारों में से एक मानी जाती है। शुभ कार्यों से लेकर पर्व-त्योहारों तक में इसे लगाने की एक पुरानी परंपरा रही है। साथ ही आयुर्वेद में इसके कई फायदे बताये गये हैं। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब इसे आर्ट माना जाता है। और तो और, मेंहदी लगाने की कला ब्यूटी पार्लरों में भी सिखायी जाने लगी है। त्योहारों के इस मौसम में पेश है कुछ खूबसूरत डिजाइन -









पूजा की तैयारी में लगे हैं मूर्तिकार

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आज से प्रारंभ होने वाला शारदीय नवरात्र पूरे नौ दिनों का होगा। विजयादशमी 14 अक्टूबर को मनायी जाएगी। मां का पट 10 अक्टूबर की रात खुल जाएगा। साथ ही 12 अक्टूबर की रात में महासंधि पूजा होगी। पूजा की तैयारी में पूजा समितियों से लेकर कलाकार तक लगे हैं। मूर्तिकार भी रात-दिन मां की मूर्तियां बनाने में लगे हैं। यहां मूर्तिकारों द्वारा मां की मूर्तियों को बनाने की कुछ तस्वीरें दी जा रही हैं।