COPYRIGHT © RAJIV MANI, Journalist, Patna

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शनिवार, 16 मई 2015

सबसे खास होता है चेहरे का मेकअप

Shalini Yogendra Gupta
 फीचर@ई-मेल 
महिला जगत
आमतौर पर शादी में खूबसूरत व सबसे अलग दिखने की चाह में दुलहन के चेहरे पर मेकअप की इतनी मोटी परत चढ़ा दी जाती है कि दुलहन का चेहरा मेकअप से सफेद लगने लगता है। अतः ध्यान रहे कि ब्राइडल को ऐसा मेकअप किया जाए, जो उसके लुक को निखारे, न कि उसका लुक ही बदल दे। सीडब्लूसी ब्यूटी एन मेकअप स्टूडियो की एक्सपर्ट शालिनी योगेन्द्र गुप्ता कुछ बेहतरीन ब्राइडल मेकअप टिप्स के बारे में बता रही हैं जो आपकी त्वचा में निखार लाकर आपको आकर्षक भी बनाएगा और लोग बोल पड़ेंगे - क्या खूब दिखती हो ....। 
 चेहरे पर लगाएं प्राइमर की परत : ब्राइडल के चेहरे पर नेचुरल ग्लो के लिए जब भी मेकअप की बात होती है, प्राइमर सबसे पहले आता है। अगर आपके पास प्राइमर नहीं है, तो आप मॉइस्चराइजर या लॉसन का भी प्रयोग कर सकते हैं। चेहरे पर प्राइमर लगाने का फायदा यह है कि इससे फाइन लाइन व झुर्रियां कम होती है। स्किन चिकनी बनती है और स्किन पर मॉइस्चराइजर की परत चढ़ जाती है। कुछ लोगों को मेकअप से चिढ़ होता है, क्योंकि रात के समय मेकअप के उतरने से चेहरा भद्दा दिखाई देने लगता है। पर अगर आपके पास प्राइमर है तो आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है। आप चेहरे और गले पर इसकी परत लगा कर निश्चिंत रह सकते हैं। अगर आप मेकअप को लंबे समय तक बरकरार रखना चाहते हैं तो इसके लिए प्राइमर सबसे कारगर तरीका है। 
 बेस कोट लगाएं : यह सुनिश्चित करने के लिए कि प्राइमर आपके चेहरे के हर हिस्से में पहुंच गया है, अपनी उंगली पर फाउंडेशन की एक बूंद लें। अब धीरे-धीरे चेहरे के अलग-अलग हिस्से को छुएं और फाउंडेशन को चारों ओर फैला दें। बाजार में आपको ढेरों तरह के फाउंडेशन मिल जाएंगे। आप इनमें से कोई भी एक चुन सकते हैं। बस इस बात का ध्यान रखें कि उनमें एसपीएफ की मात्रा हो जो आपको यूवी किरणों से बचा सके। 
 कंसीलर लगाएं : आपके चेहरे से नजर आने वाली फाइन लाइन्स को प्राइमर बखूबी छिपा देगा। पर, आप मेकअप को फाइनल टच देने के लिए कंसीलर का प्रयोग करें। कंसीलर कुछ ऐसे स्पॉट को भी छिपाने में सक्षम है, जो प्राइमर नहीं छिपा सकता। मसलन आंखों के नीचे का कालापन, रेड स्पॉट, मुहांसे के निशान वगैरह कंसीलर से ही छिप पाएंगे। कंसीलर ट्यूब और स्टिक सहित कई प्रकार के होते हैं। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण है कि यह आपके अनुकूल है या नहीं। ऐसे में इसे खरीदते समय अपनी त्वचा पर टेस्ट जरूर कर लें। 
 और अंत में पाउडर लगाएं : चेहरे पर ग्लो लाने के लिए अंत में पाउडर का इस्तेमाल करें। पाउडर स्किन को स्वाभाविक स्थिति में लाता है। इसे लगाने के बाद चेहरा चमकरहित हो जाता है, जिससे यह ज्यादा से ज्यादा नेचुरल दिखता है। पाउडर लगाने के बाद कोई यह नहीं समझ पाएगा कि आपने मेकअप किया है। आप किस प्रकार का पाउडर लगा रहे हैं, यह भी महत्वपूर्ण है। यह दो तरह के होते हैं - लूज पाउडर और प्रेस्ड पाउडर। यह सुनिश्चित कर लें कि आप अपनी त्वचा के प्रकार और टेक्सचर के हिसाब से पाउडर का चयन करते हैं। 
चूंकि मेकअप के बहुत सारे फायदे हैं, इसलिए बाजार में ऐसे प्रोडक्ट के ढेरों मैन्युफैक्चरर हैं। इसलिए आप सिर्फ उन्हीं मेकअप प्रोडक्ट को खरीदें जो अलग-अलग स्किन टाइप पर टेस्ट किया गया हो और जो साइड इफैक्ट न होने की गारंटी देता हो। इसलिए समझदारी दिखाएं और खूबसूरत दिखें।
शालिनी योगेन्द्र गुप्ता
सीडब्लूसी ब्यूटी एन मेकअप स्टूडियो, कानपुर

वह विक्षिप्त स्त्री

Kanchan Pathak
 लघुकथा 
कंचन पाठक
तीर की तरह चुभती हुई ठंड और रह-रह कर चलती हड्डियों तक को कंपकपाती हुई बर्फीली हवा पूरे शरीर को जमाये दे रही थी। सर्दी के भयानक तेवर से बचने के लिए घर के सारे दरवाजे और खिड़कियां चुन-चुनकर बंद किये गए थे और कमरे के तापमान को ब्लोअर की गरमी से संतुलित करने की भरपूर कोशिश की गयी थी। जरा-सा कहीं का दरवाजा खुलते ही सनसनाती तेज हवा उन्मत्त दस्यु दल की भांति जबरन कमरे में घुसकर उत्पात मचा दे रही थी कि तभी बंद दरवाजे को भेदती हुई एक अजब चीखती-सी रूवांसी आवाज घर के भीतर घुस आई। दरवाजे के पल्ले को जरा-सा खोलकर मैंने बाहर झांका। नंगे पांव एक स्त्री हाथ में अल्युमिनियम का कटोरा लिए खड़ी थी। भूख से बिलबिलाती, जठराग्नि की ज्वाला से विदग्ध हुई ऐसे भयावह मौसम में ना जाने किस खोह कन्दरा से निकलकर आई थी। चिंदी-चिंदी फटी हुई एक छोटी-सी बेहद तंग ब्लाउज और बित्तेभर का एक चिथड़ा कमर पर लपेटे हुए, एक तार-तार फटे हुए शाल जो उसके शरीर को ढकने में पूरी तरह असमर्थ था, बदन पर लपेटने की कोशिश करती हुई, मैले बिखरे बाल, पथराई-सी बगैर आंसू के भी जार-जार रोती आँखें, कम से कम आठ महीने के गर्भ-भार को ढोती हुई स्त्री ... मानवता का ऐसा करुण रोदन सुन मैं सिहर उठी, विस्मित आँखों से उसकी तरफ देखती रह गयी .... 
उफ ! मेरे मुख से अनायास एक आह निकली। मुझे देखते ही उसने अपना हाथ आगे बढ़ा दिया और अजीब-सी आवाज में ना जाने क्या कहने लगी ... हे विधाता ! दुखों की मार से घायल विक्षिप्त अभागन शायद गूंगी बहरी थी। मैं दया भाव से भर गई। झट से भीतर से कुछ खाना, पैसे और शरीर ढंकने को एक पुरानी चादर ला कर दिये, रोटियां और पैसे देखते ही बुझी हुई आंखों में एक मंद-सी चमक क्षणभर के लिए आकर पुनः विलुप्त हो गयी। 
वहीं नीचे बैठ कर खाने लगी, किंचित तृप्त होने के बाद कृतज्ञ आंखों से मेरी तरफ देखा। मैंने उसके पेट की ओर इशारा कर कहा - इस तरह के भयानक मौसम में ऐसी हालत में क्यूं घर से निकली ... तेरा घरवाला कहां है ? रीती हुई आंखें क्षणभर में आंसुओं से भर गयी ... हथेली से माथे को छू फिर दोनों हाथ पेट पर रख अपनी गूंगी जबान से लटपटाती, अस्पष्ट चीखती-सी बोली में सर से पांव तक झूठी मर्यादा का चोगा पहने असभ्य, अमानुषिक, क्रूर हृदयहीन समाज का काव्य गान करने लगी। अस्पष्ट बोली में भी सबकुछ स्पष्ट सुनाई दे रहा था ... 
सारी व्यथा कथा उगलकर यंत्रवत वापस मुड़कर ठहरी ठहरी-सी चाल में जाने लगी, मैंने जोर से पीछे से आवाज दी और दौड़कर भीतर कमरे से एक शाल ले उसके पीछे गेट तक गइर्, पर इतनी देर में ही दुखियारी ना जाने कहां गायब हो गयी थी। उद्वेलित मन विचारों के झंझावात में दौड़ने लगा ... फिर किसी नर पिशाच ने अपने पौरुष का सफल प्रदर्शन उस अबला, असहाय, गूंगी, बहरी स्त्री पर किया होगा ... स्त्री पहले से ही विक्षिप्त होगी या अमानवीयता के ऐसे घृणित अट्टहास से बौखला कर पागल हो गई ...... !

 परिचय : कंचन पाठक कवियित्री व लेखिका हैं। प्राणी विज्ञान से स्नातकोत्तर और प्रयाग संगीत समिति से हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत में प्रवीण हैं। दो संयुक्त काव्यसंग्रह ‘सिर्फ तुम’ और ‘काव्यशाला’ प्रकाशित एवं तीन अन्य प्रकाशनाधीन। आपकी रचनाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में छपती रही हैं।

शुक्रवार, 8 मई 2015

सूत्र की तलाश

 मजाक डाॅट काॅम 
 5 
राजीव मणि
सूत्र यानी इनफाॅरमर, आजकल समाज में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सीबीआई अधिकारी, सीआईडी अधिकारी, पुलिसकर्मी, पत्रकार, फौजी, नेता, अपराधकर्मी, वकील, यहां तक कि आमलोग भी अब सूत्र यानी इनफाॅरमर रखने लगे हैं। किसी को सूत्र बनाने से पहले अच्छी तरह परख लिया जाता है, वह काम का है या नहीं। और दूसरी महत्वपूर्ण बात कि वह जो खबरें देता है, सही है या नहीं। फिर तो इसपर विश्वास किया जा सकता है। हालांकि कई बार गलत खबरें भी सूत्र दे दिया करते हैं।
खैर ! मैंने भी कुछ सूत्र बनाने का निश्चय कर लिया। आसपास के लोगों पर नजर दौड़ायी, काम लायक एकमात्र ठाकुराइन भौजी मिली। इनके पास पूरे मुहल्ले की खबर रहती है। साथ ही ये निःशुल्क घर-घर खबरें पहुंचाने का काम करती हैं। मुझे एक महिला सूत्र नजर आ गयी थी। अब मुहल्ले से बाहर भी सूत्र चाहिए थे। मन ही मन में तलाश शुरू हुई। एक राष्ट्रीय पार्टी का कार्यकर्ता नजर आया। नाम है त्रिलोकी। फिर नजर दौड़ायी, एक सामाजिक कार्यकर्ता मिला, शनिचर पासवान। इसी तरह पुलिस विभाग में एक सिपाही रामबदन और प्राइवेट काम करने वाली महिला लीला, ये मुझे सूत्र रखने लायक नजर आने लगें। अब इनसब से मिलकर मुझे अपना काम निकालना था। 
ठाकुराइन भौजी तो मुहल्ले की ही थी। एकदिन मैंने उन्हें अपने घर बुलाया। नाश्ता-चाय से खातिरदारी की। कुछ हालचाल पूछा, इधर-उधर की बातें की। हर तरह से मन टटोल कर देख लिया। अब वह मेरे काम लायक थी। मैं उनमें दिलचस्पी ले रहा था, वह मुझमें। मौका देखकर मैं सीधे अपने मतलब पर आ गया - ‘क्या भौजी, आपको तो सीआईडी आॅफिसर होना चाहिए था, सबकुछ जानती हैं आप।’
भौजी लजाते हुए बोली, ‘पढ़े-लिखे नहीं हैं न, नहीं तो ....।’ इतना बोलकर वह नजर झुका ली।
‘तो क्या हुआ, आप कोई कम हैं। इतनी जानकारी रखती हैं और हमको तो कुछ पते नहीं रहता है। कभी-कभी हमको भी कुछ बता दिया कीजिए। आपका आधार कार्ड बना या नहीं ?’
आधार कार्ड का नाम सुनते ही भौजी एकदम से बोल पड़ी, ‘कहां बना है जी, कहता है फारम नहीं है, 200 रुपया दो तो किसी तरह फारम का जुगाड़ कर बनवा देंगे। अब पैसा रहेगा तब न!’
‘अच्छा हम बनवा देंगे, एक्को पैसा नहीं लगेगा।’ यह सुनकर भौजी की आंखों में चमक आ गयी। बोल पड़ी, ‘ठीक है, जब कहिएगा तब चलेंगे।’ फिर कुछ ठहरकर बोली - ‘हमको जो भी पता रहेगा न, आपको चुपचाप बता देंगे। लेकिन, किसी के सामने मत कहिएगा कि हमीं बताये हैं। नहीं तो देखते हैं न, कितना लड़ती हैं सब।’
‘अरे, आप एकदम निश्चिन्त रहिए। किसी को भनक तक नहीं लगेगी।’
यह सुनकर भौजी मुसकरायी, अंगुली से पल्लू घुमाते हुए विदा ले गयी। मेरा एक सूत्र पक्का हो गया था। अब अन्य की बारी थी। त्रिलोकी से मिलने पार्टी कार्यालय पहुंच गया। वह चाय की दुकान पर विधानसभा चला रहा था। मुझे देखकर दौड़ा आया - ‘भैया आप, सबकुछ ठीक है ना ? आज यहां न तो कार्यक्रम है, न बैठक, न ....!’
‘नहीं भाई, आज आपसे ही मिलने आये हैं। कमेटी में आपका कुछ जुगाड़ हुआ या नहीं ?’
‘कहां कुछ हुआ है ! नेताजी कुछ ध्यान ही नहीं देते हैं।’ त्रिलोकी मायूस होकर बोला।
‘अच्छा नेताजी से मैं बात करता हूं। उम्मीद है, काम हो जायेगा। लेकिन, मुझे भी कुछ इधर-उधर का हाल बताते रहें।’
त्रिलोकी तो जैसे चहक ही उठा। मेरा हाथ पकड़ लिया और जबरन पान की दुकान पर ले गया। बोला - ‘आज तो भैयाजी को बिना पान खिलाए जाने नहीं देंगे। और हां, आपको पता है कि नहीं, प्रदेश अध्यक्ष और प्रवक्ता के बीच आज खूब उठा-पटक हुआ है। प्रदेश अध्यक्ष का कहना था कि हम बयान कुछ देते हैं और प्रवक्ता साहेब प्रेस नोट में कुछ और लिखकर अखबारों को भिजवाते हैं। शह-मात का खेला चल रहा है भईया !’
‘ठीक है, फिर मिलते हैं।’ कहकर मैं त्रिलोकी से विदा हुआ ही था कि मुझे शनिचर पासवान दिख गया। मैं ईश्वर का शुक्रिया अदा करने लगा, आज के दिन वाकई अच्छे हैं। काम बनता जा रहा है। मैंनें आवाज लगायी, ‘कहां जा रहे हैं शनिचर भाई ?’ 
शनिचर चैककर मेरी ओर देखा, ‘अरे सर आप ! कहां जा रहे हैं ?’
मेरे मुंह से निकल गया - ‘थाना।’ थाना का नाम सुनते ही वह खुश हो गया, बोला - ‘चलिए, मैं भी चलता हूं। आपके साथ जाने पर मेरी भी थोड़ी जान-पहचान हो जायेगी।’
मुझे क्या आपत्ति होती, वह साथ हो लिया। हम पैदल ही सड़क किनारे चलने लगे। बात शुरू हुई, मैंने ही पहल की, ‘आजकल एनजीओ का धंधा तो खूब फल-फूल रहा है। कोई बड़ी मछली फंसी या नहीं ?’ 
शनिचर तैश में आ गया। उबल पड़ा, ‘सर फंड तो पूरे एक करोड़ का आया है। लेकिन, काम कुछ नहीं ! सिर्फ पोस्टर-बैनर लगाना, फोटो खिंचवाना, अखबारों में खबर छपवाना और आॅफिस में बैठे-बैठे कागज काला करना काम रह गया है। मुझे दिनभर इधर-उधर दौड़ाता है। वेतन बढ़ाने की बात पर कहता है कि काम छोड़ दो।’ 
शनिचर का दर्द उसके चेहरे पर साफ दिख रहा था। मैंने सलाह दी, ‘ठीक ही है, काम छोड़ दो। मैं एक फंडिंग एजेंसी में रखवा देता हूं। फिर देखना ये लोग तुम्हारे तलबे कैसे चाटते हैं।’
हम थाना पहुंच चुके थे। बात यहीं थम गयी। थाने के बाहर रखे एक बेंच पर बैठा सिपाही रामबदन खैनी बना रहा था। मुझे देखते ही बोला, ‘कप्तान साहेब नहीं हैं।’
‘आप तो हैं न। आप से ही तो मिलने आया था। और अभी तक खैनी ....! देखिए तो, खैनी रगड़ते-रगड़ते आपके हाथ की रेखा तक मिटने लगी है। कबतक सिपाही बने रहिएगा। प्रमोशन लेना है या नहीं।’
इतना सुनकर वह भौंचक रह गया। ठीक उसी तरह जैसे कप्तान साहेब से डांट खाकर रह जाता है। मैंने उसके घाव पर मलहम लगाना चाहा, ‘आपके बारे में मैंने ऊपर बात की है। अगला प्रमोशन होने दीजिए। कल्लूआ जैसा सिपाही तो आपको सलाम करेगा।’
‘सच साहेब! आप पत्रकार लोग तो इस धरती के देवता हैं। बिना किसी स्वार्थ के सबका भला चाहते हैं। भगवान आपको ....।’ रामबदन भावुक हो गया था। उसके मुंह से और कुछ नहीं निकल पाया। मामले को देखते हुए मैंने ही रूख बदला, ‘चैक पर जो हत्या हुई थी, गिरफ्तारी हुई या नहीं ?’
‘क्या गिरफ्तारी होगी साहेब, कप्तान साहेब ने पूरे पांच लाख रुपए वसूले हैं। फरार घोषित है।’ रामबदन मुंह बिचका कर बोला।
‘अच्छा और कुछ बताते रहिएगा। फोन नंबर तो है ना मेरा ?’ मैं उसके मन को टटोलना चाहा।
रामबदन तुरन्त बोला, ‘हुजूर की बात, आपको एक-एक चीज की जानकारी मिल जायेगी।’ 
शाम हो गयी थी। मैं रामबदन को प्रमोशन की झूठी तसल्ली देकर बाहर आ गया। पीछे-पीछे शनिचर पासवान भी था। मैंने एक जरूरी काम का हवाला देकर शनिचर से भी पीछा छुड़ाया। हर खबर देते रहने को कह दिया। शनिचर गया, तो लीला की याद आई। शाम को वह अपने आॅफिस से निकलती है। जिस मोड़ से गुजरती है, वहां पहुंच गया। थोड़ी ही देर में वह आती दिखी। मैं दूसरी तरफ देखने का बहाना करने लगा। वह मुझे देख चुकी थी, हंसती हुई पास आ गयी - ‘सर, यहां किसी का इन्तजार कर रहे हैं ?’
‘नहीं’ मेरे मुंह से निकल गया। ‘बस यूं ही घुमते-घुमते आ गया था। इसी बहाने आपसे मुलाकात हो गयी। कैसा चल रहा है आजकल ?’ सामान्य होने के लिए भूमिका बांधनी पड़ी।
‘सब ठीक है। पहले वाला आॅफिस छोड़ दी हूं। बगल वाले में आ गयी हूं। यहां पांच सौ रुपए ज्यादा मिलने लगे हैं।’ उसके चेहरे पर संतोष दिखा। वैसे लीला की ‘लीला’ मैं पहले से ही जानता था। मजाक में ही कह बैठा, ‘क्या आप आॅफिस में सुबह से शाम तक काम करती हैं। आप इतनी सुन्दर, जवां और हसीन हैं, भोजपुरी फिल्मों में क्यों नहीं ....।’
उसने मेरी बातों को मजाक में लिया। हंसकर बोली, ‘कहिए, किस फिल्म में काम करूं ?’
मैं समझ गया। शकुनी का पासा फेंकना पड़ा - ‘कल ही न भोजपुरी फिल्म के डायरेक्टर शहर में आये हैं। मैं साक्षात्कार लेने गया था। अभी तीन-चार दिन यहां रहेंगे। मैं आपकी बात उनसे चलाता हूं।’
यह सुनकर लीला मुझसे और सटकर खड़ी हो गयी। मैं संकोचवश इधर-उधर देखने लगा। बात बदलनी पड़ी - ‘आजकल मेरा भी हाल बुरा है। बाजार की बहुत सारी खबरें नहीं मिल पाती हैं। कितना भागदौड़ करूं ....।’
बीच में ही वह बोल पड़ी, ‘इधर की बहुत सारी खबरें तो मैं ही दे दूंगी सर।’
‘पक्का’
‘पक्का ..... आपका नंबर तो वही है न ?’
‘हां’ मेरा काम बन गया था। सुबह से शाम तक का समय सूत्र बनाने में कब निकल गया, पता ही नहीं चला। लीला से छुटते ही सीधे घर पहुंचा। पहुंचते ही पता चला कि ठाकुराइन भौजी फिर आई थी। कोई खबर देने। मैंने फोन घुमाया - ‘क्या बात है भौजी ?’
उधर से आवाज आई - ‘रामरतिया आज अपने मरद से खूब झगड़ा की थी। उसके बाद दोपहर से ही अपने प्रेमी संग कहीं लापता है। उसके पांच बच्चे माई-माई कहकर रो रहे हैं।’
फोन काटकर मैं कुर्सी पर बैठ गया। काफी थक चुका था। कई सूत्र बना तो लिए, लेकिन कितने काम के हैं, बाद में पता चलेगा। दिनभर की घटना सोचते-सोचते मुझे नींद आने लगी। तभी फोन बज उठा। फोन उठाते ही उधर से संपादक जी की आवाज आयी, ‘दिनभर कहां थे मणि ? बिना बताये गायब हो गये। अब प्रेस को तुम्हारी जरूरत नहीं, घर बैठो।’

बिहार में रसोई गैस के लिए भटक रहे लोग

  • छोटे सिलिंडर भरने वाले दुकानदारों, होटलों व रेस्टूरेन्टों को आसानी से है उपलब्ध 
  • गैस एजेंसी व भेंडरों की मनमानी से उपभोक्ताओं में आक्रो

राजीव मणि
पटना। बिहार में रसोई गैस की किल्लत से लोग परेशान हैं। बुकिंग कराने के बाद 15 दिनों से लेकर एक माह तक का समय गैस मिलने में लग जा रहा है। वहीं उपभोक्ताओं के गैस सब्सिडी के पैसे भी कई बार बैंक खाते में नहीं आ रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं की बेचैनी बढ़ गयी है। लोग गैस एजेंसी कार्यालय में पता करने जाते तो हैं, परन्तु निराश ही लौटते हैं।
ज्ञात हो कि मार्च माह में आधे से अधिक उपभोक्ताओं की बुकिंग रद्द कर दी गयी थी। जिन उपभोक्ताओं को गैस मिली, उनका सब्सिडी का पैसा बैंक खाते में नहीं पहुंच पाया। पश्चिमी पटना के दीघा स्थित मगध गैस एजेंसी से बात करने पर बताया गया कि मार्च माह की सारी बुकिंग रद्द कर दी गयी है। लेकिन, जब एजेंसी को यह बताया गया कि मार्च माह में की गयी बुकिंग पर गैस मिल चुकी है, पर सब्सिडी का पैसा नहीं आया। इस सवाल का जवाब एजेंसी के पास नहीं था। 
लोगों का कहना है कि एजेंसी वाले ही भेंडरों के साथ मिलकर गड़बड़ी करा रहे हैं। आखिर रद्द बुकिंग पर गैस कैसे दे दी गयी, वह भी तब जब पूरे सूबे में गैस की किल्लत है। 
दूसरी तरफ आने वाले दिनों में इण्डेन कंपनी अपने उपभोक्ताओं को राहत देने की घोषणा कर चुकी है। कंपनी का कहना है कि सूबे में इण्डेन के करीब 33 लाख उपभोक्ता हैं। अपने 677 गैस एजेंसियों के माध्यम से करीब 92 हजार उपभोक्ता हर दिन गैस के लिए बुकिंग कराते हैं। उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए ही इण्डेन अपने तीनों प्लांट, बरौनी, मुजफ्फरपुर एवं पटना, की उत्पादन क्षमता बढ़ाने जा रही है। बरौनी प्लांट से अक्टूबर माह तक 18 हजार अतिरिक्त सिलिन्डरों की रीफिलिंग होने लगेगी। इस तरह यहां से प्रतिदिन 72,700 सिलिंडरों की रीफिलिंग हो सकेगी। वहीं मुजफ्फरपुर प्लांट से अगले साल तक प्रतिदिन 18 हजार अतिरिक्त रीफिलिंग यानी कुल क्षमता करीब 36,300 सिलिंडरों की हो जायेगी। दूसरी तरफ पटना प्लांट से अभी प्रतिदिन 36,700 सिलिंडरों की रीफिलिंग होती है। 
लोगों का कहना है कि सूबे में गैस की समस्या कोई नयी नहीं है। काफी पहले से यहां गैस की कालाबाजारी होती रही है। उपभोक्ताओं को जहां गैस के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है, वहीं छोटे सिलिंडर भरने वाले दुकानदारों, होटलों व रेस्टूरेन्टों को आसानी से गैस उपलब्ध हो जा रहे हैं। आखिर इन्हें कहां से गैस मिल जाती है। गैस एजेंसी एवं भेंडरों के इस रवैये से लोगों में आक्रोश है।

पैर से पसीना आता है तो NUX लें

 स्वास्थ्य 
NUX-30
रोग के लक्षण : किसी तरह का डकार, गैस का न निकलना, अपच, जी मिचलाना, बुखार, आंख में जलन, पैर से पसीना आना, बाल झड़ना, आदि।
प्रयोग : 5 गोली रात में सोते समय 3 से 4 दिन।
ARNICA-30
रोग के लक्षण : हल्का कटा-छटा, ठेस लगकर छिला जाना, हल्का बाहरी चोट, खून रोकने के लिए, आदि।
प्रयोग : 5-5 गोली सुबह-दोपहर-शाम एक सप्ताह तक लें।
SULPHUR-30
रोग के लक्षण : हल्का देह गर्म, पखाना नहीं होना, खाना का स्वाद पता नहीं चलना, भूख नहीं लगना, बुखार, आदि।
प्रयोग : 5 गोली सुबह में 2-3 दिनों तक लें।
ACONITE-3X
रोग के लक्षण : ठंड या गर्मी से सर्दी-खासी-सिर दर्द, हफनी, पंजरा मारना, सर्दी में आंख-नाक से पानी गिरना और सरदर्द करना, आदि।
प्रयोग : 5 गोली 3 दिनों तक चार बार लें।
BRYANIA-200
रोग के लक्षण : गर्मी से सर्दी-बुखार, किसी तरह का पुराना बुखार, पेट खराब होने के बाद बुखार, सरदर्द, चलने-फिरने या हिलने-डुलने पर दर्द, आदि।
प्रयोग : 5-5 गोली सुबह-दोपहर-शाम 3 दिनों तक लें।
RHUSTOX-1M
रोग के लक्षण : गैस, ज्वाइंट का दर्द, बैठने में तकलीफ बढ़ जाना, बरसात में भींगने से बुखार, सर्दी से पहले गला खसखसाना, आदि।
प्रयोग : 5-5 गोली सुबह-दोपहर-शाम 2-3 दिनों तक लें।
IPECAC-200
रोग के लक्षण : उल्टी, अपच, ठंड लगकर बुखार, डायरिया, खानपान में गड़बड़ी से पेट खराब, आदि।
प्रयोग : 5-5 गोली सुबह-शाम 2 दिनों तक लें।
PULSATILLA-200
रोग के लक्षण : तेल-डालडा खाने से पेट खराब, दूध पीने से उल्टी, महिलाओं में श्वेत प्रदर, कमर दर्द, मासिक गड़बड़ी, बच्चों को रात में पखाना ज्यादा होना, फैलेरिया या हाथी पांव, आदि। 
प्रयोग : 5-5 गोली सुबह-दोपहर-शाम 4 दिनों तक लें।
CAULOPHYLLUM-2X
रोग के लक्षण : प्रसव के लिए दर्द बढ़ाने में यह काफी काम करता है।
प्रयोग : 5-5 गोली सुबह-दोपहर-शाम 4 से 6 दिनों तक लें।
LYCOPODIUM-200
रोग के लक्षण : पुरुष नपुंसकता, जवानी में बुढ़ापा जैसा दिखना, कुबड़ा की तरह चलना, पेट गड़गड़ाना, अपच पखाना, दांत कटकटाना, नाक खोदना, आदि।
प्रयोग : 5-5 गोली सुबह-शाम 2 दिनों तक लें।
CANTHARIS-Q
रोग के लक्षण : पेशाब में जलन, बूंद-बूंद पेशाब होना, जलने पर, आदि।
प्रयोग : 5-5 गोली सुबह-दोपहर-शाम एक सप्ताह तक तथा जलने पर हर 10 से 15 मिनट पर लहर निकलने तक लें।
 नोट : दवा लेने से पहले किसी चिकित्सक से परामर्श अवश्य ले लें। होमियोपैथ में रुचि रखने वालों को डाॅ. एन. सी. घोष की पुस्तक काॅम्पैरेटिव मेटिरिया मेडिका पढ़नी चाहिए।

शनिवार, 2 मई 2015

हम जी लें

Kanchan Pathak
कंचन पाठक की दो कविताएं
कुछ इन्द्रधनुष के रंग चुनें
जीवन-सरिता से तरंग चुनें
होठों पे सजा लें नाम तेरा 
और प्रेम-सिन्धु से उर भर लें ! 

फूलों से सुरभि सुगंध चुनें
खग से लें उड़ान उमंग चुनें
ढूँढें मिलकर नभ की सीमा
कुछ तुम कह लो कुछ हम कह लें ! 

मीठे सपनों की रैन चुनें
बेचैनी वाला चैन चुनें
हाथों में ले लो हाथ मेरा 
तेरी साँस-साँस में हम बस लें ! 

तारों से सुर-संगीत चुनें
तुमको अपना मनमीत चुनें
मेरे तुम हो लो, तेरे हम हो लें
तुम्हें प्रेम करें और हम जी लें !!

भाए ना तुम बिन कोई रंग

अमित शुचित नीलाभ फलक से 
मारुत-हास में छलका भंग 
दहका लाल पलाश पुष्प-वन 
भाए ना तुम बिन कोई रंग !! 

आम्र तरु श्रृंखलित मंजरियाँ 
तीखी मद गन्ध बिखेर रही 
भ्रमर नाद से दिशा गुंजरित 
अखिल रागिनी ... तैर रही 
मन्मथ सर्जित नवल धरित्री 
कलकूजन करता नभ विहंग 
दहका लाल पलाश पुष्प-वन 
भाए ना तुम बिन कोई रंग !! 

अमलतास पीताभ मदान्वित 
याद पुरानी संग ले आई 
तापविरह अकुलाया तन-मन
पी पुकार कोकिल बौराई 
पथ में प्रिय के बिछ मनपराग
मांगे अनुरागित साथ संग 
दहका लाल पलाश पुष्प-वन 
भाए ना तुम बिन कोई रंग !! 

मादक महुआ पुहुप का नर्तन 
फाग हवाओं में उड़ता-सा
भटका मन का पथिक अकेला 
विस्मृत गलियों में मुड़ता-सा 
कब पूरी हो चित्त अभिलाषा
प्यासा-प्यासा फिरता अनंग 
दहका लाल पलाश पुष्प-वन 
भाए ना तुम बिन कोई रंग !! 

विमल धरामग नवल रागमय
पवन बसंती जिया जलाए 
बैरन हो गई श्यामल रतियाँ 
नींद भी पलकन द्वार न आए
नीरव नैना तपस्विनी बनी 
रह-रह उठे उर पीड़ा तरंग 
दहका लाल पलाश पुष्प-वन 
भाए ना तुम बिन कोई रंग !!

 परिचय : कंचन पाठक कवियित्री व लेखिका हैं। प्राणी विज्ञान से स्नातकोत्तर और प्रयाग संगीत समिति से हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत में प्रवीण हैं। दो संयुक्त काव्यसंग्रह ‘सिर्फ तुम’ और ‘काव्यशाला’ प्रकाशित एवं तीन अन्य प्रकाशनाधीन। आपकी रचनाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में छपती रही हैं।

दुलहन के लिए परफेक्ट ‘स्टेट गेटअप’

Shalini Yogendra Gupta
 फीचर@ई-मेल 
महिला जगत
आजकल लड़कियां अपनी शादी में ड्रेस और जूलरी से ही सुंदर नहीं दिखना चाह रही हैं, बल्कि वह सीडब्लूसी ब्यूटी एण्ड मेकअप स्टूडियो की ब्यूटी एण्ड मेकअप एक्सपर्ट शालिनी योगेन्द्र गुप्ता। 
पंजाबी, गुजराती, बंगाली, कश्मीरी, राजस्थानी दुल्हन का गेटअप भी बिंदास फॉलो कर रही हैं। शादियों में दुलहन जूलरी और ड्रेस के साथ ही अलग-अलग स्टेट की दुलहन का गेटअप भी फॉलो कर रही हैं। सच तो यह है कि वह मेहंदी, कॉकटेल, फेरे, विदाई पर यह डिफरेंट लुक कैरी कर रही है। अब ड्रेसेज और जूलरी में तो एक्सपेरिमेंट हो ही रहे हैं, मेकअप भी पीछे नहीं है। बता रही हैं
इस सीजन में एसिड ग्रीन और डीप ब्लू शेड्स हॉट है। लेकिन, इन शेड्स को लाइट ही लगाएं। नीचे की आइब्रो पर शैडो के साथ ग्लिटर लगाएं। वैसे, मेकअप हमेशा थीम बेस्ड होना चाहिए। आप कोई भी लुक कैरी करें, लेकिन ब्लड रेड और न्यूऑन ज्यादा लें। इससे ब्राइडल इफेक्ट ज्यादा आता है।
 विक्टोरियन ब्राइडल : विक्टोरियन लुक के लिए प्लास्टो शाइन मेकअप सबसे ज्यादा पॉप्युलर है। इस मेकअप को करते ही फेस शाइन करने लगता है। यही वजह है कि हर लड़की विक्टोरियन दुल्हन को पसंद करती है। आप हल्के मेकअप से भी यह लुक पा सकती हैं। इसमें पीच, पिंक जैसे कलर शेड्स हैं।
 पंजाबी ब्राइडल : पंजाबी मेकअप तड़क-भड़क लिए होता है। इसलिए मेकअप में बोल्ड और ब्राइट कलर्स ज्यादा यूज करें। ब्राइट शेड्स रूबी, रेड, गोल्ड और ब्रॉन्ज सिमर इस लुक की दुलहन पर खूब फबेंगे। वहीं, बालों पर फ्रेंच नॉट बनवाएं। आप उन्हें फ्रेश फ्लावर्स रेड रोज, ऑर्चिड और जैसमिन से सजा सकती हैं।
 कश्मीरी ब्राइडल : कश्मीरी दुलहन का मेकअप पंजाबी दुलहन की तरह ब्राइट होता है। इसलिए मेकअप में सभी ब्राइट कलर्स यूज किए जा रहे हैं। जूलरी में अठ जूलरी कैरी करें। यह सोने की लंबी चेन होती है और डेजहोर चेन के अंतिम सिरेपर गोल्ड पेंडेंट लगा होता है। बालों को कलर करके जूड़ा बनाएं और उसमें गोल्डन फ्लावर या एक्सेसरीज लगा सकती हैं। लंबी बिंदी इस लुक के लिए बेस्ट है।
 राजस्थानी ब्राइडल : राजस्थानी दुलहन का मेकअप कम, लेकिन कॉस्ट्यूम कलरफुल होता है। सच तो यह है कि मेकअप में लाइट शेड्स ज्यादा यूज किए जाते हैं। आप अपनी शादी में राजवाड़ी लुक के लिए पेस्टल कलर्स चुन सकती हैं, लेकिन जूलरी हैवी चुनें। वहीं, आप राजवाड़ी लुक के लिए ब्रॉन्ज, रस्ट और दूसरे वार्म और अर्थी टोंस के शेड्स यूज कर सकती हैं। आंखों को गोल्डन और ब्रॉन्ज से हाईलाइट करें। हां, ड्रेस का कलर पिंक बेस हो तो बेहतर रहेगा। बिंदी में बड़ी गोल बिंदी लगाएं।
 गुजराती ब्राइडल : यदि आप गुजराती दुलहन का लुक चाहती हैं, तो इसमें लिप्स के मेकअप पर फोकस किया जाता है। इसमें फुशिया पिंक सबसे ज्यादा यूज किया जाता है। वहीं, बालों को कलरफुल एक्सेसरीज से सजाया जाता है। आप चाहें तो आंखों के मेकअप में एक्सपेरिमेंट कर सकती हैं। इसमें पलकों पर ड्रेस से मैच करती एम्ब्रॉयडरी से मैच करते आईशैडो आंखों पर खूब यूज किए जा रहे हैं। शाइनिंग करते ग्लिटर आंखों को खूबसूरत लुक देते हैं।
 बंगाली ब्राइडल : बंगाली दुलहन के मेकअप में दुलहन की आंखों और बिंदी पर खास ध्यान दिया जाता है। मेकअप शाइनी ही करें। साड़ी के बेस कलर से मैच करता हुआ मेकअप आप कर सकती हैं। स्मोकी आईज पर सिल्वर स्पार्कल लगा सकती हैं। बालों का जूड़ा बना लें। फिर इसे ट्रडिशन मुकुट से कवर करें।
 महाराष्ट्रियन ब्राइडल : महाराष्ट्र में कलरफुल साड़ी सबसे ज्यादा यूज की जाती है। इसलिए मेकअप में मिक्स एण्ड मैच कर सकती हैं। डार्क कोहल और डीप कलर लिप्स लगाएं। इसमें ब्रॉन्ज और गोल्डन कलर ट्राई कर सकती हैं। बालों को गूंथकर मोंगरा फूलों से डेकोरेट करें। मराठी दुलहन की खास उसकी जूलरी होती है मंगलसूत्र। लक्ष्मी का गोल्ड पेडेंड मंगलसूत्र आपको पूरी तरह ट्रेडिशनल लुक के लिए परफेक्ट है।
शालिनी योगेन्द्र गुप्ता 
ब्यूटी एण्ड मेकअप एक्सपर्ट 
सीडब्लूसी ब्यूटी एण्ड मेकअप स्टूडियो, कानपुर

शुक्रवार, 1 मई 2015

भूकंप से क्या हम सबक लेंगे

NEPAL
 खास बात 
राजीव मणि 
वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर बिहार में आठ की तीव्रता वाला भूकंप आया, तो 75 फीसदी मकान ध्वस्त हो जायेंगे। साथ ही काफी बड़ी आबादी काल के गाल में समा जायेगी। अब वक्त आ गया है, अपनी गलती सुधारने का। भवन निर्माण व हरों को बसाने में की गयी लापरवाही कहीं एक बड़ी भूल न साबित हो जाये। 
NEPAL
पटना : हिमालय की गोद में बसे नेपाल के लिए पिछला सप्ताह भारी तबाही वाला रहा। एक के बाद एक कर आये कई भूकंप के झटकों ने न सिर्फ नेपाल को बुरी तरह प्रभावित किया, बल्कि उत्तर भारत, पाकिस्तान, भूटान, बांग्लादेश को भी हिला कर रख दिया। शनिवार, 25 अप्रैल, 2015 काला दिन के रूप में इतिहास में दर्ज हो गया। हालांकि सुबह-सबेरे हर दिन की तरह ही शांत और सामान्य था। लेकिन, किसी को क्या मालूम था कि यह शान्ति इतिहास के पन्नों पर खून से कुछ अलग ही काला अध्याय जोड़ने वाली है। 
सुबह 11 बजकर 41 मिनट पर 7.9 की तीव्रता वाला पहला झटका आया। इसका केन्द्र नेपाल के पोखरा से 73 किलोमीटर पूर्व स्थित लामजुंग में था। अभी घंटा भर भी नहीं गुजरा था कि 12 बजकर 15 मिनट पर एक और झटका आ गया। फिर हर घंटे के अंदर छोटे-छोटे झटके आते रहे। दोपहर तक आधा नेपाल ध्वस्त हो चुका था। अनगिनत लोग लाशों में तब्दील हो चुके थे। हर तरफ मातम ही मातम ! 
BIHAR
ज्ञात हो कि वर्ष 1934 में 8.4 की तीव्रता वाला भूकंप आया था। इसमें भारत, खासकर बिहार, सहित आसपास के देशों में भारी जान-माल का नुकसान हुआ था। अब बताया जा रहा है कि इसबार का भूकंप पिछले 81 वर्षों में आए भूकंपों में सबसे शक्तिशाली था। अभी तक नेपाल में 6000 से ऊपर मरने वालों की संख्या पहुंच चुकी है। आशंका व्यक्त की जा रही है कि जैसे-जैसे मलवे हटाये जायेंगे, मरने वालों की संख्या बढ़कर दस हजार से भी ज्यादा हो सकती है। घायलों की संख्या अभी करीब दस हजार पहुंच चुकी है। वहीं करीब 50 हजार बच्चे अनाथ हो चुके हैं। दूसरी तरफ बिहार में 150 के मरने और करीब 300 के घायल होने की खबर है।
हर जगह लोग गहरे सदमे में हैं। अभी तक नेपाल और सीमाई क्षेत्रों के लोग बाहर ही रात गुजार रहे हैं। हालांकि भारत सरकार की ओर से नेपाल में चलाये जा रहे बचाव व राहत कार्य की हर तरफ तारीफ हो रही है। बिहार के लोग अब धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। लेकिन, बच्चों के अंदर बैठा डर अभी तक नहीं निकल पाया है। 
BIHAR
दूसरी तरफ बिहार में एकबार फिर यह चर्चा होने लगी है कि सात से ज्यादा की तीव्रता से आने वाले भूकंप से निबटने को बिहार तैयार नहीं है। भूकंपरोधी मकानों को लेकर बहस हो रही है। लोग सरकार व सरकारी तंत्र को घेर रहे हैं। वहीं लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है। पुराने और जर्जर सरकारी व गैर सरकारी मकानों की पहचान हो रही है। अब देखना यह है कि इतना सब कुछ हो जाने के बाद भी बिहार सरकार और यहां के लोग सबक लेते हैं या नहीं, या फिर हर बार की तरह मात्र एक हादसा मानकर भूल जाते हैं। 
वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर बिहार में आठ की तीव्रता वाला भूकंप आया, तो 75 फीसदी मकान ध्वस्त हो जायेंगे। साथ ही काफी बड़ी आबादी काल के गाल में समा जायेगी। अब वक्त आ गया है, अपनी गलती सुधारने का। भवन निर्माण व शहरों को बसाने में की गयी लापरवाही कहीं एक बड़ी भूल न साबित हो जाये।

शताब्दी समारोह मना रहा पटना उच्च न्यायालय

राजीव मणि 
पटना : इनदिनों पटना उच्च न्यायालय अपना शताब्दी समारोह मना रहा है। 02 फरवरी, 2015 को इसके भवन के 99 साल पूरे हो गये। और अब, 03 फरवरी, 2015 से यह अपने 100वें साल में प्रवेश कर चुका है। इसी उपलक्ष्य में यहां समारोह मनाया जा रहा है। समारोह का उद्घाटन पिछले दिनों राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने किया। समापन 2016 में प्रधानमंत्री की मौजूदगी में होगा। 
ज्ञात हो कि 22 मार्च, 1912 में पटना उच्च न्यायालय की स्थापना की घोषणा हुई थी। 01 दिसम्बर, 1913 में इसके भवन की आधारशिला रखी गई। 03 फरवरी, 1916 को तत्कालीन वायसराय ने इस भवन का उद्घाटन किया था। और फिर, मार्च 1916 से यहां मुकदमों की सुनवाई शुरू हो गई। 
काफी गौरवशाली इतिहास रहा है इसका। इंग्लैंड की गोसिक और भारत की सर्सनिक स्थापत्य कला का बेजोड़ संगम है यह इमारत। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वास्तुकार रहे लिकमे ने इसे डिजाइन किया था। इंग्लैंड के सीराईट की देखरेख में इसका निर्माण मार्टिन एण्ड बन्र्स नामक कंपनी ने किया। बाद में इस इमारत में कई परिवर्तन कर इसे और भी आकर्षक बनाया गया है। आस्ट्रेलिया से मंगायी गई मखमली घास, तरह-तरह के पेड़-पौधे, आकर्षक रंग-रोगन, फव्वारे, स्मृति चिन्ह और मन को मोह लेने वाला प्रकाश ! 
शुरूआती दिनों में यहां सुरक्षा के लिए सिक्योरिटी की व्यवस्था नहीं थी। लेकिन, बाद में एक घटना के बाद यहां सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था है। साथ ही, पहले यहां महिलाओं को वकालत की इजाजत नहीं थी। बाद में चलकर पटना उच्च न्यायालय के तत्कालीन न्यायाधीश ज्वाला प्रसाद के सुझाव के बाद भारत सरकार ने महिलाओं को भी प्रैक्टिस करने की इजाजत दे दी। वर्तमान में यहां करीब 10 हजार वकीलों में 05 फीसदी महिला अधिवक्ता हैं। वहीं तीन महिला न्यायाधीश कार्यरत हैं। इनके नाम हैं, न्यायमूर्ति अंजना प्रकाश, न्यायमूर्ति अंजना मिश्र और न्यायमूर्ति नीलू अग्रवाल। पुरुष सहकर्मियों की संख्या 30 है। इस तरह यहां अभी 33 न्यायाधीश कार्यरत हैं। कभी मात्र 07 न्यायाधीशों से यहां शुरू हुई थी कार्यवाही, आज 43 न्यायाधीशों की दरकार है। यहां के प्रथम न्यायाधीश एडवर्ड मेयर्ड चेमीनयर और वर्तमान मुख्य न्यायाधीश एल नरसिम्हा रेड्डी हैं।
डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद, डाॅ. सच्चिदानंद सिन्हा, मौलाना मजहरूल हक, सर सैयद फजल अली, पीआर दास, पंडित लक्ष्मीकांत झा जैसे नाम पटना उच्च न्यायालय से वकालत में जुड़े रहे हैं। अभी तक यहां 38 मुख्य न्यायाधीश नियुक्त हो चुके है। इनमें न्यायमूर्ति रेखा मनहर लाल दोषी एकमात्र महिला थीं। साथ ही, 03 न्यायाधीश बाद में सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश बने। इनके नाम हैं न्यायमूर्ति बीपी सिन्हा, न्यायमूर्ति ललित मोहन शर्मा और न्यायमूर्ति आरएम लोढ़ा। दूसरी तरफ 06 न्यायाधीश पटना उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालयों में मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किये जा चुके हैं। 
1911 में दिल्ली दरबार में जार्ज पंचम ने बंगाल से अलग कर बिहार-उड़ीसा संयुक्त प्रांत के गठन को मंजूरी दे दी। साथ ही, पटना में उच्च न्यायालय के गठन का आदेश भी दिया गया। यह पहला मौका था जब जार्ज पंचम ने किसी उच्च न्यायालय के गठन का आदेश दिया था। ज्ञात हो कि उस वक्त भारत-पाकिस्तान का बंटवारा नहीं हुआ था। 22 मार्च, 1912 को बिहार-उड़ीसा प्रांत के गठन के साथ ही पटना में उच्च न्यायालय खुल गया। 1916 से यहां कामकाज भी शुरू हो गया। तब कलकत्ता उच्च न्यायालय से इन दोनों प्रदेशों के 2800 मामले यहां स्थानांतरित किए गए। 1936 में उड़ीसा से बिहार अलग हो गया और 2000 में झारखंड अस्तित्व में आया। इस तरह शुरूआती दिनों में इस उच्च न्यायालय में बिहार, उड़ीसा और झारखंड का संयुक्त उच्च न्यायालय हुआ करता था। और तब से अबतक यहां करीब एक लाख मामलों की सुनवाई हो चुकी है। इनमें कई मामले राष्ट्रीय स्तर पर काफी चर्चित रहे।

मन की सुन्दरता

 लघु कथा 
राजीव मणि
किसी आश्रम में गोपी और राजू नाम के दो युवक रहा करते थे। दोनों में सुन्दरता के सवाल पर अक्सर बहस होती। कारण था, राजू देखने में सुन्दर और गोरी चमड़ी वाला था और गोपी काफी बदसूरत। इसी वजह से राजू अक्सर गोपी पर अपना प्रभाव जमाना चाहता था। 
राजू को आज फिर मौका मिल गया था, ‘‘सिर्फ तन की सुन्दरता ही आज के युग में मायने रखती है। अगर कोई देखने में कौवे की तरह लगे, तो उसे कौन पूछता है।‘‘ राजू ने अपना पक्ष रखते हुए गोपी पर प्रहार किया। 
‘‘मन की सुन्दरता तुम क्या जानो। तुम तो खुद ही अपने को सर्वश्रेष्ठ एवं सुन्दर मान बैठे हो। तुमसे तो बहस करना ही बेकार है।‘‘ गोपी ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। 
दोनों में इस तरह की बहस अक्सर होती थी। इनके रोज-रोज की बहस से आश्रम के गुरु परेशान थे। इस बहस को हमेशा खत्म कर देने के लिए गुरु ने एक योजना बनायी। 
एक दिन दोनों शिष्यों को गुरु ने बुलाया और कहा कि पड़ोस के गांव में एक सुन्दर महिला रहती है। इस आश्रम को आज उसकी मदद चाहिए, जाकर बुला लाओ। 
दोनों अलग-अलग समय में निकले। पहले वहां सुन्दरता का पुजारी राजू पहुंचा। राजू महिला की सुन्दरता से इतना आकर्षित हो गया कि वह अंजाने ही गलत हरकत कर बैठा। उसकी हरकत से महिला नाराज हो गयी और राजू की पिटाई कर दी। 
अगले दिन गोपी उसी महिला के पास पहुंचा। गोपी ने अपने गुरु की बात बताते हुए सादर वहां आने का प्रायोजन बताया। महिला गोपी के साथ आश्रम आ गई। 
फिर गुरु अपने दोनों शिष्यों को बुलाये और कहा कि अब तो मिल गया तुम्हारे प्रश्नों का उत्तर। तन की सुन्दरता तो ईश्वर का बनाया हुआ है। लेकिन, मन की सुन्दरता सिर्फ तुम्हारे हाथों में है। तुम जैसा सोचते हो, उसी अनुरूप ढल जाते हो। 
गुरु की बात सुनकर राजू लज्जित हुआ और उसने गोपी से माफी मांग ली।