COPYRIGHT © RAJIV MANI, Journalist, Patna

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बुधवार, 10 जून 2015

प्रशासन, बिजली विभाग व नगर निगम का ध्यान इस ओर नहीं जाता ?


  • अवैध कब्जे से लगी आग, बड़ा हादसा टला
  • फिर से सजने लगीं दुकानें
  • एक दबंग कब्जा करवा वसूल रहा पैसे
आग लगने से पहले
आग लगने से पहले
पटना : राजधानी में सड़कों के किनारे अवैध कब्जा का होना कोई नई बात नहीं है। सड़क किनारे दुकानदार तो कब्जा कर ही रहे हैं, साथ ही ठेला, गुमटी व फुटपाथी दुकान वाले भी सड़कों पर कब्जा जमाये बैठे हैं। ऐसे में सड़के काफी संकड़ी हो गयी हैं। हालात ऐसे बन गये हैं कि लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। ऐसे में लोग फुटपाथ के बदले सड़क पर चलने को मजबूर हैं। साथ ही, वाहन चालकों को भी काफी परेशानी हो रही है। इस अतिक्रमण के कारण ही राजधानी में अबतक काफी सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं। इससे लोगों में काफी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि प्रशासन की लापरवाही व मिलीभगत से ही ऐसा हो रहा है। पुलिस इन अतिक्रमणकारियों से पैसे वसूलती है।
इस अतिक्रमण का एक अच्छा उदाहरण पटना स्थित मुख्य छह नालों में से एक कुर्जी स्थित नाला के किनारे अवैध कब्जा को देखा जा सकता है। अभी कुछ ही दिन हुए, इस अतिक्रमण क्षेत्र में ही देर रात को भयानक अगलगी की घटना हुई थी। इसमें पूरे अतिक्रमण क्षेत्र की दुकानें जलकर राख हो गयीं। 
दरअसल कुर्जी स्थित नाला के दोनों ओर बीस फीट जमीन सरकारी है। इसे ही कब्जा करने का खेल यहां वर्षों से चल रहा है। कहीं-कहीं तो इस जमीन पर पक्के मकान तक बनवा लिए गये हैं। कहीं खटाल खुला हुआ है, कहीं झोपड़ी, तो कहीं करकट छत वाले मकान बना उसे किराये पर लगाया गया है। विडम्बना यह है कि प्रशासन व नगर निगम को यह सब मालूम है, इसके बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही है।
आग लगने के बाद
आग लगने के बाद
इसी का लाभ उठाते हुए अतिक्रमणकारियों ने एक कदम और बढ़ाते हुए अब नाला स्थित पक्के पुल के दोनों तरफ कब्जा करना शुरू कर दिया है। यहां न सिर्फ गुमटी, सब्जी, मछली की स्थायी दुकानें लगा दी गयी, बल्कि एक बड़ी लोहे की गुमटी भी लगा दी गयी है। साथ ही बिजली विभाग को नजायज पैसे देकर लाइन भी ले ली गयी है। ज्ञात हो कि बड़ी लोहे की गुमटी में सुधा दूध बेचा जाता था। इस गुमटी में एक बड़ा फ्रिज, पंखा, बल्व तक चलाया जा रहा था। 
लोगों का कहना है कि बिजली विभाग कैसे बिना मीटर के अवैध कब्जे वाले जमीन पर काॅमर्शियल लाइन दे देता है। जाहिर है, बिजली विभाग के कर्मचारी जमकर क्षेत्र में वसूली कर रहे हैं। साथ ही, लोगों को गलत रूप से बिजली देकर किसी बड़ी दुर्घटना को आमंत्रित कर रहे हैं। इसी का परिणाम हुआ कि पिछले दिनों कुर्जी स्थित नाला के किनारे देर रात आग लगी। लोग कहते हैं कि इस भयंकर अगलगी में बिजली के तार टूटकर गिर गये। साथ ही, टेलीफोन व केबल के तार भी आ गिरे। यह मात्र संयोग ही रहा कि कोई बड़ी दुर्घटना नहीं हुई। 
लोगों का यह भी आरोप है कि क्षेत्र का ही एक सरपंच यहां अतिक्रमण करवा रहा है। पहले तो उसने नाला किनारे एक झोपड़ी बना अपना कार्यालय खोला, फिर अन्य दुकानदारों को बसा उससे प्रति माह किराया वसूलने लगा। अब अगलगी की घटना के बाद भी फिर से कब्जा किया जा रहा है और दुकाने बनायी जा रही हैं। इससे क्षेत्र के लोगों में काफी आक्रोश है। लोग प्रशासन व नगर निगम के अधिकारियों से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

मंगलवार, 2 जून 2015

न्याय

 मजाक डाॅट काॅम 
 6    
राजीव मणि
पद, पैसा, पावर, पैरवी और पहुंच में बहुत ताकत है। इनमें से किसी एक के होने पर भी बौरा जाने का खतरा रहता है। यूं कह लें कि इनमें एक प्रकार का नशा होता है। चढ़ गया तो सारा नशा फेल ! लग गया तो खुद के आगे कोई नहीं दिखता। कल्पना कीजिए, यदि इनमें से पांचों किसी के पास हो, तो उसका क्या हाल होगा।
प्राचीन काल से ही इनकी ताकत दिखने लगी। साधु-संतों ने भी इन ‘पांच प’ को ‘पाप का द्वार’ समझकर इनसे दूर रहना ही ठीक समझा। बुद्ध और महावीर ने भी सबकुछ त्याग दिये। इसलिए आधुनिक समाज को यह सलाह दी जाती है कि इन ‘पांच प’ का इस्तेमाल काफी सोच-समझकर और संयम से करना चाहिए। 
लेकिन, इन्हें पाकर सभी संत बन जायें, ऐसा भी नहीं होता। प्रेमनगर जंगल का भी कुछ ऐसा ही हाल था। इन पांच शक्तियों का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता था। नटिन मोरनी के यहां आज पार्टी थी। उसे चुनचुन चूहा की हत्या के केस में दस साल की सश्रम सजा तो हुई, लेकिन कुछ ही घंटों बाद जमानत मिल गयी। इसी खुशी में जंगल के सारे रईस पार्टी में आमंत्रित थे। शेर सिंह, सयाना सियार, चंदू हाथी, कल्लू कोबरा, लंगड़ा बिलार, मस्तराम भालू और जंगल के सारे नट-नटी। इस पार्टी की खास बात यह थी कि यहां खाने-पीने के अलावा मनोरंजन की भी व्यवस्था थी। वैसे भी नटी की पार्टी में नाच-गाना ना हो, तो पार्टी अधूरी मानी जाती है। देर रात तक पार्टी चली। और इस पार्टी में वह सब हुआ, जो अमीरों की पार्टी में होता है। पार्टी खत्म होते-होते सभी मस्त। कोई किसी की बाहों में, कोई किसी के पैरों तले ! 
नटिन के प्रशंसक तो खुशी से नाच उठे थे। हालांकि इन्हें गेट के अंदर घुसने तक नहीं दिया गया। चारों ओर जश्न ही जश्न, कुछेक घरों को छोड़कर। इन्हीं में से एक घर था चंपक चूहा का। और चंपक का ही पुत्र था चुनचुन चूहा। नटिन मोरनी के घर के पीछे गरीबों की एक बस्ती थी। यहीं बरगद के पेड़ के नीचे अपनी चुहिया के साथ रहता था। 
रात काफी हो चुकी थी। चंपक चूहा अब भी जाग रहा था। चुहिया का भी यही हाल, नींद आती भी तो कैसे ? जिस न्याय के लिए दोनों पिछले दस वर्षों से भटक रहे थे, आज उन्हें निराशा हाथ लगी थी। सजा पाकर भी नटिन चैन से पार्टी मना रही थी। 
करवट बदलता हुआ चंपक बोला, ”चुहिया, अब क्या होगा। इस प्रेमनगर में हम गरीबों की सुनने वाला कोई नहीं ! सिर्फ कहने को सबके लिए बराबर कानून है। क्या कोई गरीब ऐसा करता, तो उसे आनन-फानन जमानत मिल जाती।“ 
”मैं तो कबसे कहती थी चुनचुन के बाबू, तुम ही आस लगाये बैठे थे। देखते नहीं, कैसे भगत भेडि़या पैरोल पर छूटकर सारे जंगल की सैर कर रहा है। अपनी पत्नी की बीमारी का बहाना बनाकर आया था, यहां मस्ती करता चल रहा है। गरीब तो पैरोल पर नहीं छूटते ! अपनी सरला खरगोस को नहीं देखते। बेचारी पांच साल से जेल में है। उसका बाप गुजर गया, कहां उसे घर आने दिया।“ चुहिया गुस्से में बोल रही थी। ”लेकिन, मैं कह देती हूं चुनचुन के बाबू, ईश्वर जरूर न्याय करेगा। देखना, उस नटिन को सजा मिलकर रहेगी।“ 
चंपक चूहा कुछ नहीं बोला। चुपचाप अपनी चुहिया की बात सुनता रहा। सुबह हो गयी थी। जंगल में हलचल सुनाई दे रही थी। चंपक का मन नहीं लग रहा था, बाहर निकल आया। चंपक को देखकर धीरे-धीरे उसके पड़ोसी उसे सांत्वना देने आने लगें। इतने में सगुनी कोयल वहां अखबार लिये आ पहुंची।
”गजब हो गया चंपक भाई, अखबार में तो सिर्फ नटिन मोरनी की ही चर्चा है। उसकी पूरी जीवनी छपी है। साथ ही कैसे-कैसे स्कैण्डल से उसका नाता रहा है, सबकुछ। तारीफ के भी किस्से हैं यहां। लेकिन, तुम्हारी खबर कहीं नहीं !“ सगुनी कोयल आश्चर्य के साथ चंपक को बता रही थी। 
एक-एक कर कई माह गुजर गये। गरीब पशु-पक्षी अपने पेट की आग बुझाने में लग गये। और अमीर अपनी अलग ही दुनिया में जैसे सबकुछ भूल चुके थे। 
गर्मी का दिन था। रात में भी गरम हवाएं चल रही थीं। पूरा जंगल तबाह था। गरीब पशु-पक्षी खुले आकाश के नीचे सो रहे थे। अमीर अपने-अपने महलों में नंग-धड़ंग पड़े थे। अचानक धरती कांपने लगी। पूरे जंगल में कोहराम मच गया - भूकंप .... भूकंप ! गरीब पशु-पक्षी पास ही के मैदान में आ गये। अमीर भी इसी मैदान में जान बचाकर भागे। जो जिस स्थिति में था, उसी स्थिति में ! कुछ ही देर में धरती शान्त हो गयी। 
अचानक चंपक चूहा की नजर नटिन मोरनी पर पड़ी। वह चंपक से सटकर नंगे ही बैठी थी। जान बचाकर भागने के चक्कर में उसे कपड़ों का भी ख्याल नहीं रहा। यह देखकर चंपक से रहा नहीं गया। उसने अपना गमछा नटिन के नंगे बदन पर डाल दिया और मुंह फेरकर अपने घर की ओर चल दिया। रास्ता में लोग बात कर रहे थे - ”अमीरों के अधिकांश मकान ध्वस्त हो गये हैं। नटिन मोरनी का भी कुछ नहीं बचा। घमंड के महल मिट्टी में मिल गये।“ 
”ईश्वर न्याय करता है सगुनी .... ईश्वर न्याय करता है।“ बड़बड़ाते हुए चुहिया चली जा रही थी। पीछे-पीछे सगुनी कोयल भी थी।

आपको जवां बनाता है परफेक्ट हेयर कलर

 फीचर@ई-मेल 

 महिला जगत 
शालिनी योगेन्द्र गुप्ता 
बालों को केवल जवां दिखने के लिए ही नहीं रंगा जाता। आजकल हेयर कलर एक फैशन स्टेटस बन चुका है। अब वह वक्त भी नहीं, जब बालों को सिर्फ काले रंग से ही रंगा जाता था। लोग अपने लुक्स को लेकर किसी भी तरह के एक्सपेरीमेंट से डरते नहीं हैं। लेकिन, इन सबके बीच सबसे बड़ी ऊहापोह इस बात को लेकर होती है कि आखिर आपके बालों के लिए परफेक्ट कलर कौन सा रहेगा। आइये, चुनते हैं अपना हेयर कलर  सीडब्लूसी ब्यूटी एण्ड मेकअप स्टूडियो की ब्यूटी व मेकअप एक्सपर्ट शालिनी योगेन्द्र गुप्ता के साथ : 
 त्वचा के अनुसार हेयर कलर 
  • आपकी त्वचा अगर हल्का पीलापन लिए हुए है, तो आपके बालों के लिए डार्क हेयर कलर अच्छा रहेगा। ऐसे में आपको लाइट हेयर कलर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह आपके बालों को नेचुरल लुक नहीं देता है। 
  • अगर आपकी गुलाबी त्वचा है, तो लाल व सुनहरे रंगों से बचना चाहिए। 
  • जिन लोगों की त्वचा गोरी होती है, उनपर कोई भी हेयर कलर जंचता है। इस तरह की त्वचा वाले लोग किसी भी शेड का हेयर कलर इस्तेमाल कर सकते हैं। 
  • अगर आपकी त्वचा में पीलापन ज्यादा है, तो काला या डार्क काले रंग का प्रयोग बिल्कुल ना करें, क्योंकि इससे आपकी त्वचा का पीलापन और बढ़ जाता है। 

 कपड़ों के अनुसार हेयर कलर 
  • अगर आप लाल, नारंगी, सुनहरे पीले व ऑलिव ग्रीन और ईंट में ज्यादा जंचते हैं, तो आपको गोल्डन ब्लांड, गोल्डन ब्राउन, स्ट्राबेरी ब्लांड रंगों के हेयर कलर का प्रयोग करना चाहिए। 
  • जो लोग ब्लूईश रेड, रॉयल ब्लू, ब्लैक व पाइन ग्रीन रंग के कपड़ों में ज्यादा अच्छे लगते हैं, उन्हें कुछ कूल टाइप का हेयर कलर अपनाना चाहिए। इन्हीं में से प्लैटिनम, एश ब्लांड, एश ब्राउन, बर्गडीं व जेट ब्लैक हेयर कलर आदि हैं। 
  • अगर आप लाल, बैगनी रंगों के कपड़ों में ज्यादा पसंद किए जाते हैं, तो आप उदासीन हेयर कलर जैसे सैंडी ब्लांड, बीज ब्लांड व चॉकलेट ब्राउन रंगों के हेयर कलर को अपना सकते हैं। 

 आंखों के अनुसार हेयर कलर 
  • वार्म टोन्स जैसे लाल, सुनहरे हेयर कलर उन लोगों के लिए ठीक होता है, जिनकी आंखों का रंग भूरा, हरा या हेजल रंग का होता है। यह हेयर कलर पीली बेस वाली आंखों के लोगों पर भी अच्छा लगता है। 
  • जिनकी आंखें नीली या ग्रे होती हैं, उनके बालों पर गोल्ड या ऐश रंग ज्यादा जंचेगा। 

शालिनी योगेन्द्र गुप्ता 
ब्यूटी एण्ड मेकअप एक्सपर्ट 
सीडब्लूसी ब्यूटी एण्ड मेकअप स्टूडियो, कानपुर

कहां गए वे भूत

Kanchan Pathak
 व्यंग्य@ई-मेल 
कंचन पाठक
एक जमाना था जब बच्चों को बदमाशियों से रोकने के लिए भूत का नाम लेकर डराया जाता था। बात-बात पर भूत की धमकी, प्रेत का धौंस ! मसलन, पीछे वाले तालाब पे मत जाना, वहां भूत रहते हैं, बच्चों को पकड़ के ले जाते हैं। सामने वाले कुएं में मत झांकना, उसमें प्रेत रहता है। दरगाह वाले आम के बगीचे की तरफ भूल के भी मत जाना, वहां जिन्न रहा करते हैं। जलेबी और इमली के पेड़ पे गलती से भी मत चढ़ना, उसपे पिशाच रहते हैं, वगैरह-वगैरह। बच्चे ही क्यूं, बड़ी लड़कियों के लिए भी सख्त हिदायत थी - मेहंदी की झाड़ी के पास कभी अकेली मत जाना, नीम के पेड़ के नीचे से मत गुजरना, बाल खोल के कभी छत पे मत जाना, रात में आईना मत देखना, भूत का साया चढ़ जायेगा। कुंवारी लड़कियों को खिड़की या झरोखे में खड़े होकर हाथ हिलाना मना था, क्यूंकि काकी के अनुसार, इसे भूत अपने लिए सकारात्मक इशारा मानकर फटाफट चले आते हैं। इस तरह की ना जाने कितनी सारी हिदायतें। भूत के डर के मारे जीना मुहाल हुआ करता था। हर जगह, हर रास्ते में, हर बात में निरंतर एक डर बना रहता था कि कहीं भूत के हत्थे ना चढ़ जाएं ! 
पर आजकल के बच्चों को देखिये, तो वे बड़े इत्मीनान के साथ ड्रेकुला, वैम्पायर और चुड़ैलों के फिल्म और सीरियल्स देखते हुए नजर आएंगे। ये बच्चे हाथ में रिमोट लेकर पूरी तन्मयता के साथ भूतों की दुनियां का लुत्फ उठाते हैं, पर क्या मजाल कि कभी कोई भूत इनके सामने भी फटकने की जुर्रत करे ! 
सवाल उठता है कि जहां पहले हर गली में, हर रास्ते पर, हर पेड़ पर, हर तालाब में, हर कुएं में भूतों का साम्राज्य हुआ करता था, वे सारे के सारे भूत एकबारगी आखिर कहां चले गए ? सोच-सोचकर दिमाग का दही हो गया, पर उलझन वैसी की वैसी बनी रही। जब और अधिक नहीं रहा गया, तब आश्रम वाले बाबाजी से प्रश्न कर लिया। 
बाबाजी ने धैर्य से मेरी उलझनों को सुना और उन्होंने जो बताया वो आप भी सुनिए - उस जमाने में वे जो सारे भूत, प्रेत, आत्माएं सब भटक रहे थे, अब वे सब के सब जन्म ले चुके हैं, मनुष्य का शरीर प्राप्त कर चुके हैं, इसलिए अब भूत नहीं दिखते। क्यूंकि उन सारे भूतों ने इन्सान का शरीर धारण कर लिया है, इसलिए अब आतंक भूत नहीं, इन्सान मचाता है ! ये खून के प्यासे दहशतगर्द आतंकी, चोर-उचक्के, तस्कर-लुटेरे, कुकर्मी-बलात्कारी, हत्यारे और नेताओं के वेश में जो खून चूसनेवाले लोग हैं, वेसब कौन हैं ? ये सारे हृदयहीन मनुष्य, जिनके अन्दर केवल खून की पिपासा है, ये सब के सब भूत, प्रेत, पिशाच, जिन्न, राक्षस ही तो हैं ! अगर मनुष्य होते, तो इनके अन्दर मनुष्यता ना होती ? 
यह सुनकर मेरा दिमाग खुल गया। भूतों के विलुप्त होने का रहस्य पूरी तरह से समझ में आ गया।

 परिचय : कंचन पाठक कवियित्री व लेखिका हैं। प्राणी विज्ञान से स्नातकोत्तर और प्रयाग संगीत समिति से हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत में प्रवीण हैं। दो संयुक्त काव्यसंग्रह ‘सिर्फ तुम’ और ‘काव्यशाला’ प्रकाशित एवं तीन अन्य प्रकाशनाधीन। आपकी रचनाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में छपती रही हैं।

सोमवार, 1 जून 2015

... जब दुल्हन बारात लेकर पहुंची

Dulhan bani Preeti Kumari
 सत्यकथा 
राजीव मणि

उस अनोखी बारात को जो भी देखता वह एकपल ठहरे बिना नहीं रहता और जबतक पूरी बारात आंखों के सामने से गुजर नहीं जाती, तबतक वह उसे अपलक देखता ही रहता। सड़क पर आ-जा रहे लोगों के लिए वह बारात किसी अजूबे से कम नहीं थी। गांव हो या शहर जो भी बारात निकलती, सभी बारात किसी न किसी सड़क, रास्ते अथवा गली से ही गुजरती है। बारात में बैंड बाजा, बाराती, रोड लाईट और एक दुल्हा जरुर होता है। सड़क पर आ-जा रहे लोगों ने अबतक अनेक बारातों को देखा था, पर दिन में निकली उस अनोखी बारात में दूल्हा नदारत था। दुल्हे की जगह सजी-संवरी, हाथों में मेंहदी, पैरों में महावर लगाये लाल साड़ी पहने सोलह श्रृंगार किये एक खास तरीके से मांग में सिंदूर भरे दुल्हन मौजूद थी। 
दुल्हे की बारात में जहां पुरुष बारातियों का बाहुल्य होता है, वहीं इस दुल्हन की बारात में महिलाओं की संख्या सर्वाधिक थी और पुरुष बराती तो नाममात्र के थे। बारात में बैंड-बाजा तो था, पर रोड लाइट नहीं थी। उसकी आवश्यकता इसलिए भी नहीं थी, क्योंकि बारात दिन में निकली थी। सड़क पर चलता हुआ जो भी राहगीर उस अनोखी बारात को देखता, एकबार ठिठक कर यह जानने का प्रयास जरूर करता कि आखिर वह बारात किसकी है और उस महिला को अपनी बारात निकालने की आवश्यकता क्यों पड़ी। कुछ राहगीर अपनी उत्सुकता व जिज्ञासा को शांत करने के लिए बारात में शामिल एकाध पुरुष बारातियों को रोककर उनसे अपनी जिज्ञासा शांत कर लेते। शुरू-शुरू में कुछ राहगीरों को लगा था कि शायद वेलेन्टाइन-डे वाले दिन कोई युवा महिला मण्डली जागरुकता अभियान हेतु जुलूस तो नहीं निकाल रही है, लेकिन जब सच्चाई का पता चला, तो उनके सारे भ्रम और जिज्ञासा समाप्त हो चुके थे। 
बिहार के बेगूसराय जिला अन्तर्गत बछवाड़ा थाना क्षेत्र के भरौला गाॅव निवासी महाकान्त ईश्वर की 22 वर्षीया बेटी प्रीति कुमारी शनिवार, 14 फरवरी, 2015 को वेलेन्टाइन-डे वाले दिन दुल्हन की तरह सज-संवर कर अपनी खुद की बारात निकाल कर जिले के ही मंसूरचक थाना अन्तर्गत मकदमपुर इलाके में रहने वाले अर्जुन ठाकुर के पुत्र धीरज कुमार ठाकुर के घर अर्थात् अपनी ससुराल हक मांगने के लिए रवाना हुई थी। प्रीति कुमारी की उस बारात में राज्य महिला आयोग की सदस्या रीना कुमारी और उनकी कुछ महिला सहयोगी के अलावा स्थानीय अक्षर आंचल संस्था की सचिव कामनी कुमारी की अगुवाई में संस्था से जुड़ी सैकड़ों महिलाएं बारात में शामिल थीं। बारात में शामिल महिलाएं बैण्ड बाजे के फिल्मी धुन पर डांस भी कर रही थी। पूरी तरह दुल्हन की वेश-भूषा में सजी-संवरी प्रीति कुमारी कुछ दूर तक तो बारात के साथ चल रही एक कार के भीतर बैठी रही, पर बाद में ससुराल के नजदीक आते ही गाड़ी से उतरकर पैदल चलने लगी। 
दुल्हन बनी प्रीति की बारात जब उसकी ससुराल मकदमपुर निवासी पति मास्टर धीरज कुमार के दरवाजे पहुंची, उस समय धीरज वहां मौजूद नहीं था। लेकिन, धीरज के परिवार के सदस्यों ने दुल्हन प्रीति को घर में घुसने नहीं दिया। उन लोगों ने प्रीति को पहचानने से ही इन्कार कर दिया। शान्ति भंग की आशंका से मंसूरचक थाने के प्रभारी सर्वजीत कुमार कुछ सिपाहियों के साथ पहले से ही बारात के साथ-साथ चल रहे थे । दरअसल बारात में शामिल राज्य महिला आयोग की सदस्या रीना कुमारी ने थाना प्रभारी सर्वजीत कुमार को पहले ही आगाह कर दिया था कि प्रीति कुमारी अपने हक के लिए खुद अपनी बारात निकालकर मकदमपुर निवासी शिक्षक नीरज कुमार, जो उसके पति हैं, के घर रवाना होगी। इसलिए शान्ति व सुरक्षा के लिहाज से यदि पुलिस मौजूद रहेगी तो उचित होगा। मंसूरचक थाना प्रभारी इस बात को समझ रहे थे कि यह पूरा मामला बेहद संवेदनशील है और कभी भी कुछ भी घट सकता है, इसलिए वह दल बल के साथ पूरी तरह से मुस्तैद बारात के साथ-साथ ही चल रहे थे। 
गाजे-बाजे के साथ नाचते-गाते सैकड़ों महिला बारातियों के संग दुल्हन प्रीति कुमारी अपनी ससुराल पहुंची, तो घर वालों ने प्रीति कुमारी को घर में घुसने नहीं दिया। रिश्ते में प्रीति के ससुर कहे जाने वाले अर्जुन ठाकुर और उनके कुछ समर्थकों ने जोर-जबरदस्ती कर प्रीति को घर के बाहर ही रोक दिया। जबकि प्रीति के साथ आयी महिलाएं प्रीति को जबरदस्ती घर के भीतर प्रवेश कराना चाहती थी, पर घरवाले धक्का-मुक्की और झगड़े पर उतारू हो गये। पुलिस की मौजूदगी में ही दोनों पक्ष एक दूसरे से भिड़ने के लिए तैयार हो गये, तब थाना प्रभारी सर्वजीत कुमार को आगे आकर दोनों पक्षों को समझाना पड़ा। 
धक्का-मुक्की व वाद विवाद होते देख दुल्हन प्रीति कुमारी ने अपने साथ आयी महिलाओं को सम्बोधित करते हुए कहा यदि उसके ससुराल वाले उसे पहचानने से इन्कार कर उसे बहू नहीं मान रहे हैं तो ना सही, लेकिन वह अपना हक लेकर रहेगी। प्रीति ने कहा कि अब कोई भी जोर-जबरदस्ती नहीं करेगा, मैं ससुराल की चैखट पर तबतक बैठी रहंूगी, जबतक ससुराल वाले खुद मुझे बहू के रूप में स्वीकार नहीं करते। इसके बाद प्रीति कुमारी के साथ आयी अक्षर आंचल संस्था से जुड़ी महिलाओं ने ससुराल के दरवाजे के पास स्थित एक पेड़ के नीचे आनन-फानन में एक फोल्डिंग चारपाई की व्यवस्था कर उस पर नयी चादर बिछाकर उसी फोल्डिंग पर प्रीति कुमारी को बिठा दिया। प्रीति के पिता महाकान्त ईश्वर ने बेटी प्रीति को ससुराल के लिये खाली हाथ विदा नहीं किया था, उसे उपहारस्वरुप गृहस्थी से जुड़े कुछ सामान भी दिये थे। बारात के साथ आयी महिलाओं ने प्रीति के मायके का सारा सामान भी वहीं पास में रख दिया। प्रीती ने मन ही मन यह निर्णय ले लिया कि जबतक उसके ससुराल वाले उसे बहू रूप में स्वीकार नहीं करते, तबतक वह इसी प्रकार ससुराल की चैखट पर ही पड़ी रहेगी। 
Dharne Deti Preeti
प्रीति के इस प्रकार धरने पर बैठने के बावजूद ससुराल वालों की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ा और वह घर का मेन दरवाजा बंद कर बाहर ही डटे रहे। वहां उपस्थित राज्य महिला आयोग की सदस्या रीना कुमारी और अक्षर आंचल संस्था की सचिव कामनी कुमारी, दोनों ने अपने-अपने तरीके से प्रीति के ससुराल वालों को समझाने का पूरा प्रयास किया, पर उन्हें सफलता नहीं मिली। प्रीति के ससुराल वालों का कहना था कि धीरज की पकड़ौआ शादी थी, इसलिए इस शादी का कोई मतलब नहीं है। जबकि प्रीति और उसके परिवार जनों का कहना था कि प्रीति की शादी लगभग एक साल पूर्व 21 अप्रैल, 2014 को पूरे हिन्दू रीति-रिवाज के साथ मकदमपुर गांव निवासी धीरज कुमार के साथ हुई है। खुद प्रीति कुमारी ने कहा कि किसी भी लड़की की शादी जीवन में एक बार ही होती है। मेरी भी शादी धीरज कुमार के साथ हुई है। धीरज ने समाज के सामने मेरी मांग में सिंदूर भरा और हम दोनों ने अग्नि के सात फेरे भी लिये, इसलिए धीरज मेरा पति है। यदि उसने मुझे नहीं अपनाया, तो मैं यहीं उसके दरवाजे पर जहर खाकर अपनी जान दे दूंगी। 
रात घिरने के साथ वातावरण में ठंड बढ़ने लगी, तो अक्षर आंचल संस्था से जुड़ी कुछ महिलाओं ने एकबार फिर प्रयास किया कि प्रीति कुमारी को उसके ससुराल वाले घर के भीतर कर लें। लेकिन, जब वे लोग तैयार नहीं हुए, तब संस्था की महिलाओं ने गांव वालों से विचार-विमर्श कर ससुराल के घर के बाहर खाली पड़े बारामदे में उस फोल्डिंग को बिछाकर एक टूटी खाट को ओट कर प्रीति को खुले आसमान के नीचे से बरामदे में शिफ्ट कर दिया। प्रीति उसी बरामदे में बिछायी गयी फोल्डिंग (चारपाई) पर सारी रात बितायी। 
मंसूरचक थाना प्रभारी सर्वजीत कुमार ने राज्य महिला आयोग की सदस्या रीना कुमारी के कहने पर प्रीति कुमारी की सुरक्षा हेतु पुलिस के दो सिपाहियों को तैनात कर दिया था। प्रीति कुमारी कौन थी ? उसे इस प्रकार अपनी बारात निकालकर अपनी ही ससुराल पहुंचने की आवश्यकता क्यों पड़ी ? जैसा कि प्रीति कुमारी का कहना है कि उसकी शादी पूरे हिन्दू रीति-रिवाज के अनुसार हुई थी, तो फिर ऐसी हालत में वह ससुराल में क्यों नहीं थी। इन सारे सवालों का जवाब जानने के लिए 10 महीने पीछे जाना होगा। 
बिहार के बेगूसराय जिला के बछवाड़ा थाना क्षेत्र के भरौल गांव निवासी महाकान्त ईश्वर की तीन संतान एक बेटा, दो बेटियों में 21 वर्षीया बेटी प्रीति कुमारी की शादी उसके घर से न होकर उसी थाना क्षेत्र के धरमपुर गांव में रहने वाले प्रीति कुमारी के मौसा अशोक राय के घर से 21 अप्रैल, 2014 को हुई। प्रीति कुमारी की शादी पूरे रस्मों-रिवाज के साथ मंसूरचक थाना क्षेत्र के मकदमपुर गांव निवासी अर्जुन ठाकुर के 25 वर्षीय पुत्र प्राइमरी स्कूल के शिक्षक धीरज कुमार के साथ हुई थी। प्रीति कुमारी की मानें तो धीरज ने उसकी मांग में सिंदूर भरा और उसके साथ फेरे भी लिये। लेकिन, प्रीति के पति धीरज कुमार और उसके पिता अर्जुन ठाकुर इस शादी को सिरे से खारिज करते है। प्रीति कुमारी के पति और ससुर का कहना है कि यह शादी दो परिवारों की रजामंदी से नहीं, बल्कि जोर-जबरदस्ती के साथ की गयी पकड़ौआ शादी थी, जो पूरी तरह से गैर कानूनी है। धीरज कुमार के पिता अर्जुन ठाकुर का कहना है कि प्रीति कुमारी व उसके घर वाले जिस शादी की बात करते है, उस शादी के महज 5-6 घंटे पहले उन्हें जैसे ही पता चला कि उनके बेटे धीरज का जोर जबरदस्ती से शादी कराने के लिए अपहरण कर लिया गया है, उसी समय उन्होंने स्थानीय मंसूरचक थाने में बेटे धीरज के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। रिपोर्ट दर्ज कराने के साथ ही अर्जुन ठाकुर ने थाना प्रभारी के समक्ष अपनी शंका भी जाहिर कर दी थी। 
बिहार के कुछ क्षेत्रों में पकड़ौआ शादी का चलन रहा है। इस शादी में लड़की पक्ष के लोग शादी योग्य हो चुकी लड़की के लिए पहले अच्छे घर-वर की तलाश करते है। महीनों की भाग-दौड़ के बाद जब कोई योग्य लड़का नहीं मिलता या फिर मिलता है तो अधिक दहेज की मांग के चलते अड़चने आने लगती है, तब लड़की पक्ष के लोग जिस भी घर में लड़की के योग्य लड़का (वर) पाते हैं, उस लड़के का मौका देखकर अपहरण (अगवा) कर लेते हैं और आनन-फानन में पहले से पूरी तरह तैयार किये गये विवाह-मण्डप में ले जाकर अगवा किये गये उस लड़के की शादी करा दी जाती है। शादी के बाद दुल्हन के परिवार के लोग यथा शक्ति दान-दहेज के साथ उसे पति के साथ उसके ससुराल पहुंचा देते है। चूंकि यह शादी पूरे रस्मों-रिवाज और विधि-विधान के साथ तमाम लोगों की मौजूदगी में होती है, इसलिए इसे तुरन्त नकारा भी नहीं जाता। कुछ ऐसा ही धीरज कुमार के साथ भी हुआ था। 
Preeti ke Sasural walo se bat karti Reena
धीरज के पिता अर्जुन ठाकुर की मानें तो 21 अप्रैल, 2014 की घटना है। धीरज जिस प्राइमरी स्कूल में पढ़ाता था, वहां से दोपहर बाद साढ़े तीन बजे के लगभग जब वह स्कूल से बाहर निकल कर अपने घर वापस आ रहा था, उसी समय एक बोलेरो गाड़ी उसके पास आकर रूकी और उसमें से दो-तीन लोग उतरकर जबरदस्ती धीरज को बोलेरो में बैठाकर वहां से फरार हो गये। दिनदहाड़े इस प्रकार धीरज का अपहरण किये जाने को कई लोगों ने देखा और मुझे आकर बताया, तब मैंने तुरन्त जिले के पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार को फोन लगाकर उन्हें सारी बात बताकर उनसे मदद की गुहार की। उन्होंने मुझे मंसूरचक थाने पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए कहा और यह भी बताया कि वह इस मामले में वहां के थाना प्रभारी सर्वजीत कुमार को त्वरित कार्यवाही के लिए भी बोल दे रहे है। मैंने मंसूरचक थाने पहुंचकर थाना प्रभारी को सारी बात बताकर बेटे धीरज के इस प्रकार अगवा किये जाने की रिपोर्ट दर्ज करा दिया। 
अर्जुन ठाकुर ने पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार को यह भी बता दिया कि उन्हें पूरा अंदेशा है कि हो न हो बेटे धीरज कुमार का अपहरण पकड़ौआ शादी के लिए ही किया गया हो। इस बात की जानकारी होते ही पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार ने तत्काल मंसूरचक थाने के प्रभारी सर्वजीत कुमार के साथ-साथ बछवाड़ा और भगवान थाना के प्रभारियों को भी फोन कर आदेश दिया कि वह दिनदहाड़े अगवा किये गये शिक्षक धीरज कुमार को खोज निकाले। एक साथ तीन थाना बछवाड़ा, मंसूरचक और भगवान थाने के प्रभारी दल बल के साथ धीरज कुमार की तलाश में जुट गये। लगभग चार घंटे की मशक्कत (भाग-दौड़) के बाद मंसूरचक थाने की पुलिस धीरज कुमार को बरामद करने में कामयाब हो गयी। धीरज के पिता अर्जुन ठाकुर और पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार का अंदेशा गलत नहीं था, धीरज का अपहरण शादी के उद्देश्य से ही किया गया था। पुलिस जब धरमपुर गांव निवासी अशोक राय के आवास पर पहुंची, तो वहां पूरा शादी का माहौल था और शहनाई बज रही थी। धीरज कुमार दूल्हा बना हुआ था और प्रीति कुमारी के साथ उसकी शादी हो चुकी थी, बस प्रीति की बिदायी होनी बाकी थी। 
अर्जुन ठाकुर ने बेटे धीरज के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज करायी थी, इसलिए मंसूरचक थाना प्रभारी ने मण्डप में मौजूद प्रीति कुमारी के पिता महाकान्त ईश्वर, उसके मौसा अशोक राय तथा अशोक राय के दामाद को हिरासत में ले लिया। दरअसल जैसे ही पुलिस दल-बल के साथ वहां पहुंची, कई लोग वहां से खिसक लिये। धीरज को पुलिस अभिरक्षा में लेकर उसी समय उसका बयान दर्ज कर उसे सकुशल उसके घर पहुंचा दिया गया। पुलिस के अचानक पहुंच जाने से शादी के मण्डप में व्यवधान पड़ गया। धीरज जहां शादी के मण्डप से पुलिस सुरक्षा में अपने घर पहुंच गया, वहीं प्रीति कुमारी के पिता, मौसा और मौसा के दामाद की गिरफ्तारी हो जाने के कारण प्रीति कुमारी की विदायी अधर में लटक गयी। अब उसके ससुराल जाने पर प्रश्न चिन्ह लग गया। इस घटना के बाद से ही प्रीति कुमारी अपने पिता के घर पर ही रह रही थी। 
Priti -- Aakshar Anchal Sanstha Aur
Mahila Aayog Ki Member Ke Sath Mediaperson
मंसूरचक थाना प्रभारी सर्वजीत कुमार ने अगले दिन 22 अप्रैल, 2014 को धीरज के अपहरण के आरोप में प्रीति कुमारी के पिता महाकान्त ईश्वर, प्रीति के मौसा अशोक कुमार और उनके दामाद का चालान बनाकर बेगूसराय के सक्षम न्यायालय में प्रस्तुत किया, जहां से उन तीनों को न्यायिक हिरासत में जिला कारागार भेज दिया गया। प्रीति कुमारी के पिता और मौसा के जेल चले जाने के बाद दोनों के परिवारजनों ने उनकी जमानत के लिए काफी प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हो पाये। बताते हैं कि लगभग छह महीने तक इन तीनांे को जेल की हवा खानी पड़ी। छह महीने जेल में बिताने के बाद जमानत पर बाहर आये, तो एकबार फिर से पंचायत के माध्यम से यह प्रयास किया गया कि प्रीति कुमारी को उसके ससुराल वाले बहु रूप में स्वीकार कर लें। लेकिन, तमाम प्रयासों के बावजूद धीरज के पिता अर्जुन ठाकुर तथा खुद धीरज किसी भी तरह प्रीति की विदाई कराने को तैयार नहीं हुए। प्रीति के पिता और रिश्तेदारों के तमाम प्रयासों के बावजूद जब सफलता नहीं मिली, तब प्रीति कुमारी ने खुद आगे आकर अपने हक की लड़ाई लड़ने का बीड़ा उठाया। 
दिसम्बर, 2014 को प्रीति कुमारी पटना स्थित बिहार राज्य महिला आयोग के कार्यालय जाकर वहां अपनी शिकायत दर्ज करा दी। प्रीति ने राज्य महिला आयोग को अपनी शादी के संबंध में पूरी बात बताते हुए कहा कि उसकी शादी धीरज के साथ पूरे हिन्दू रीति-रिवाज के साथ हुई। धीरज ने उसकी मांग में सिंदूर भरा और फेरे भी लिये। लेकिन उसके ससुराल वालों ने अभी तक उसे बहू के रूप में स्वीकार नहीं किया है। इस पूरे प्रकरण में वह कहां दोषी है ? प्रीति कुमारी ने राज्य महिला आयोग के अधिकारियों को यह भी बताया कि उसके परिवार के लोगों द्वारा प्रयास करके देख लिया गया, लेकिन उसके ससुराल वाले विदाई को तैयार नहीं हुए। उसकी शादी धीरज से हुई है, इसलिए उसके साथ न्याय होना चाहिए। बिहार राज्य महिला आयोग की सदस्या रीना कुमारी ने प्रीति कुमारी के मामले को गंभीरता से लिया, इसी के बाद प्रीति को न्याय दिलाने के प्रयास में तेजी आ गयी। 
राज्य महिला आयोग की सदस्या रीना कुमारी ने एकबार फिर अपने स्तर से प्रयास किया कि जो कुछ बीत गया है, उसे भूलाकर प्रीति के ससुराल वाले उसे बहू स्वीकार कर लें। लेकिन अर्जुन ठाकुर इसके लिए तैयार नहीं हुए। उनका एक रटा-रटाया जवाब था कि यह शादी धीरज का अपहरण करके जबरदस्ती करायी गयी है, जिसका कोई मतलब नहीं है। इसी बीच बछवाड़ा में कार्यरत सामाजिक संस्था अक्षर आंचल की सचिव कामनी कुमारी को प्रीति कुमारी के बारे में पता चला तो वह खुद प्रीति से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी ली और भरोसा दिलाया कि उसे उसका हक दिलाने के लिए आखिर दम तक संघर्ष करेगी। इसके बाद कामनी कुमारी ने राज्य महिला आयोग की सदस्या रीना कुमारी से मुलाकात कर वचार-विमर्ष किया कि प्रीति के लिए क्या किया जा सकता है। अंततः निर्णय लिया गया कि एकबार फिर दोनों एक साथ धीरज व उसके पिता से मिलकर उन्हें समझाने का प्रयास करेंगे और यदि वह नहीं माने, तब दूसरे विकल्प के बारे में सोचा जायेगा। रीना कुमारी और कामनी धीरज कुमार के घर पहुंची, तब पता चला कि धीरज घर पर नहीं है। उसके पिता अर्जुन ठाकुर जरूर मिले, लेकिन घंटों बातचीत के बाद भी उनका दिल नहीं पसीजा। 
अंतिम प्रयास भी असफल रहा। इसके बाद समाजसेविका कामनी कुमारी और राज्य महिला आयोग की सदस्या रीना कुमारी दोनों ने विचार-विमर्ष कर प्रीति कुमारी को उसके ससुराल में दाखिल कराने का एक दूसरा ही रास्ता चुना। इसमें खुद प्रीति कुमारी की भी पूरी तरह से सहमति रही। वह रास्ता था प्रीति कुमारी खुद अपनी बारात निकालकर ससुराल के दरवाजे पर पहुंचेगी। प्रीति के इस अभियान में अक्षर आंचल संस्था से जुड़ी सैकड़ों महिला सदस्य और राज्य महिला आयोग की सदस्या रीना कुमारी पूरा सहयोग करेगी। 
Sasural ki chaukhat par dharana
पूरी तैयारी के बाद शनिवार, 14 फरवरी, 2015 को प्रीति कुमारी अपनी बारात निकालकर ससुराल के चैखट पर पहुंची। लेकिन तमाम जद्दोजहद के बावजूद वह ससुराल में प्रवेश नहीं कर पायी। प्रीति कुमारी के साथ जो कुछ भी घटा (हुआ), वह पाठकगण कथा के आरंभ में पढ़ चुके हैं। प्रीति ससुराल के बरामदे में बिछायी गयी चारपाई पर रात बितायी। ससुराल के दरवाजे पर पहुंचने के बाद प्रीति ने अपना निर्णय वहां मौजूद सभी लोगों को बता दिया कि जबतक उसे बहू रूप में स्वीकार नहीं किया जाता, तबतक वह अन्न-जल त्यागकर बरामदे में ही अनशन करेगी। रविवार दोपहर तक भूख-प्यास से बेहाल दुल्हन प्रीति कुमारी की हालत बिगड़ने लगी, तब स्थानीय प्रशासन को होश आया और पीएचसी के चिकित्सा प्रभारी डाॅक्टर कर्पूरी प्रसाद के नेतृत्व में चिकित्सकों की एक टीम ने मकदमपुर गांव पहुंचकर प्रीति कुमारी के स्वास्थ्य की जांच की। प्रीति के भूखी प्यासी रहने पर चिकित्सकों ने चिंता जताई और प्रीति से अनुरोध किया कि वह कुछ भोजन, फल-दूध आदि ले लें, लेकिन प्रीति ने साफ इन्कार कर दिया कि उसकी जान भले चली जाय, वह अपना अनशन नहीं तोड़ेगी। प्रीति का कहना था कि किसी की शादी एक ही बार होती है। मेरी भी शादी हुई, यदि मुझे ससुराल वालों ने नहीं अपनाया तो मैं ससुराल की चैखट पर अपनी जीवन लीला समाप्त कर दूंगी। वैसे भी किसी भी विवाहिता की ससुराल से अर्थी ही बाहर निकलती है, मेरी भी अर्थी निकलेगी। मकदमपुर गांव की तमाम महिलाएं और बड़े बुजुर्गों ने प्रीति को समझाया कि वह थोड़ा बहुत फल-दूध आदि ले ले, लेकिन वह नहीं मानी। जैसे-तैसे रविवार का दिन भी बीत गया। 
सोमवार, 16 फरवरी, 2015 को मंसूरचक के वीडियो अशोक कुमार चैधरी को भी प्रीति के बारे में पता चला, तो वह भी स्थिति का जायजा लेने के लिए वहां पहुंचे और प्रीति की देखभाल के लिए वीणा देवी नाम की एक आंगनवाड़ी सेविका को प्रतिनियुक्त कर दिया। उसने भी प्रीति को फल-दूध देने का काफी प्रयास किया, लेकिन प्रीति ने कुछ भी लेने से मना कर दिया। प्रीति के पिता महाकान्त ईश्वर, चाचा रमाकान्त ईश्वर एक दर्जन ग्रामीणों के साथ वहां पहुंचे और अर्जुन ठाकुर से प्रार्थना किया कि आपस में मिल-बैठकर बातचीत के जरिये इस मामले का हल निकाले। लेकिन, अर्जुन ठाकुर का कहना रहा कि उनका बेटा धीरज कुमार एसएससी का परीक्षा देने जमुई गया है, वहां से लौटने के बाद ही कोई फैसला लिया जा सकेगा। इतना कहकर अर्जुन ठाकुर ने परिवार समेत घर से बाहर निकल कर मेन (मुख्य) दरवाजे पर ताला लगा दिया। 
मंगलवार, 17 फरवरी, 2015 को प्रीति की हालत नाजुक देखकर मकदमपुर गांव के निवासियों का धैर्य जवाब दे गया। गांव की कई महिलाएं और पुरुष एक साथ समूह में प्रीति के पास पहुंचे और अर्जुन ठाकुर के घर का ताला तोड़कर महिलाओं ने प्रीति को जबरदस्ती ससुराल में प्रवेश करा दिया। हालांकि प्रीति ग्रामीणों की इस पहल से नाराज थी। उसका कहना था कि वह ससुराल वालों की अनुपस्थिति में घर में प्रवेश नहीं करना चाहती। लेकिन भीड़ की जिद के आगे प्रीति की एक नहीं चली और वह ससुराल के बरामदे से घर के भीतर कर दी गयी। इसके बावजूद जब प्रीति से कुछ खाने-पीने के लिए कहा गया, तो उसने फिर से इन्कार कर दिया। तभी बेगूसराय की महिला हेल्पलाइन की एक टीम हेल्पलाइन की संरक्षण अधिकारी वीणा कुमारी के नेतृत्व में वहां पहुंच गयी। वीणा कुमारी ने प्रीति से बातचीत की, तब प्रीति ने उन्हें भी बताया कि 21 अप्रैल को बछवाड़ा थाना क्षेत्र के धमरपुर गांव में उसके मौसी के घर से उसकी शादी हुई। शादी अर्जुन ठाकुर के पुत्र धीरज ठाकुर के साथ हुई और उसने उसकी मांग में सिंदूर भरा। ऐसी स्थिति में मैं किसी दूसरे के साथ शादी के बारे में सोच भी नहीं सकती। वहां मौजूद महिला हेल्पलाइन की परामर्शदात्री समिति के सदस्य मणिभूषण मिश्र ने पाया कि पूरे मामले में प्रीति कहीं से भी दोषी नहीं है। यदि वह हिन्दू परम्परा के मुताबिक अपना हक पाने के लिए संघर्ष कर रही है, तो गलत नहीं है। महिला हेल्पलाइन से जुड़े मणिभूषण और वीणा कुमारी, दोनों, ने प्रीति को काफी समझाया, जिसका प्रीति पर असर हुआ। महिला हेल्पलाइन के सदस्यों ने जूस पिलाकर प्रीति का अनशन समाप्त कराया। महिला हेल्पलाइन ने प्रीति को समझाया कि अपना हक और न्याय पाने के लिए उसे संघर्ष करना होगा और संघर्ष तभी जारी रह सकता है, जब वह जीवित रहेगी। उसके इस प्रकार मौत को गले लगाने से क्या उसे उसका हक और न्याय मिल पायेगा ? 
Sasural Pachha ko samajhate Thana Prabhari
महिला हेल्पलाइन के सदस्यों ने प्रीति का अनशन समाप्त कराकर उसे समझाया कि वह अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए खाती-पीती रहे। प्रीति पर महिला हेल्पलाइन के सदस्यों के समझाने का असर हुआ और अब वह अपने ससुराल में ही अपना दिन गुजार रही है। लेकिन प्रीति के सास-वसुर और पति उस मकान में उसी दिन से नहीं रह रहे हैं, जिस दिन प्रीति को घर में प्रवेश कराया गया था। पिछले तीन महीनों से प्रीति कुमारी अपने पति धीरज कुमार के घर पर अकेली रह रही है। दिन में गांव की कुछ महिलाएं आकर उसका हालचाल ले लेती है। प्रीति के घर (मायके) वाले भी बीच-बीच में आकर उसके खाने-पीने के लिए राशन पानी का इंतजाम कर देते हैं। लेकिन इन तीन महीनों में न तो प्रीति के पति धीरज कुमार का ही दिल पसीजा और ना ही प्रीति के ससुर अर्जुन ठाकुर का ही। प्रीति के पति धीरज कुमार का कहना है कि अपहरण करके जबरदस्ती की गयी ऐसी शादी का कोई मतलब नहीं है, जहां तक सिंदूर की बात है, मैंने सिंदूर नहीं डाली। मेरे अपहरण का केस आज भी न्यायालय में लंबित है और उसका फैसला आने पर ही स्थिति साफ होगी कि यह शादी वैध है अथवा अवैध। मुझे अदालत के फैसले पर पूरा भरोसा है और मैं फैसले का इन्तजार करूंगा। 
दूसरी ओर पटना विश्वविद्यालय की प्राध्यापक व सामाजिक कार्यकर्ता डेजी नारायण के मुताबिक, मध्ययुगीन परम्परा की जड़ में दहेज प्रथा है। दहेज ही इस प्रकार की शादियों का बड़ा कारण है। ऐसी शादी में लड़की (दुल्हन) चारों तरफ से घिर जाती है। प्रीति कुमारी पढ़़ी-लिखी और समझदार है। पत्रकारों से बात करते हुए प्रीति अपने मन की बात कही, ‘‘परिस्थिति जो भी रही हो, पर उसमें वह खुद कहां दोषी है ?’’ फिलहाल कथा लिखे जाने तक प्रीति कुमारी अपनी ससुराल में अकेली ही रह रही है। उसके मायके वाले और गांव की महिलाएं आकर उसका हाल-चाल लेती रहती हैं। अब यह देखना बाकी है कि प्रीति और धीरज की इस लड़ाई में क्या होता है। 
प्रस्तुत कथा पुलिस तथ्य, घटनास्थल से प्राप्त जानकारी एवं मीडिया सूत्रों पर आधारित है।

नौजवान पागल

 हुल्लड़ मुरादाबादी की हास्य व्यंग्य कविताएं 
Hullad Muradabadi
एक नौजवान पागल
जब पागलखाने से लौटकर आया
ते उसके मां बाप ने
बहुत आनन्द मनाया
नौजवान ने महसूस किया
तेजी के साथ बढ़ती हुई
गरीबी की बीमारी
महंगाई की चक्की में
पिसते हुए नर-नारी
हर तरफ फरेब, बलात्कार
और हत्याएं
शर्मिन्दा होती हुई
कुरान की आयत
और वेदों की ऋचाएं
उसने सोचा
क्या जमाना है
इससे अच्छा तो अपना
पगलखाना है
यहां अपमान के अलावा
अपना कहने वाला कोई नहीं
भीगी-भीगी आंखें
कई रात सोई नहीं
उसकी छोटी बहन की हुई शादी
और दहेज के अभाव में
उसके पति ने
ठीक रक्षा बन्धन के दिन
उसकी चिता जला दी
उसे यह सदमा कचोट गया
और वह सूनी कलाई लिये
फिर से पागलखाने
लौट गया।

प्रोड्यूसर और जिन

एक प्रोड्यूसर की पांचवी फिल्म थी
जब सुपर फ्लाप हुई
तो उसका सर चकरा गया
आत्महत्या के लिए जुहू आ गया
समन्दर में जैसे ही छलांग लगाई
एक बोतल उसके शरीर से टकराई
उसने जैसे ही बोतल का ढक्कन खोला
उसमें से एक जिन
निकलकर बोला -
”क्या हुक्म है मेरे आका ?“
प्रोड्यूसर बोला - ”तुम्हारे जैसे कई जिन
मैंने फिल्मों में दिखाए हैं
आप वहीं चले जाइये
जहां से आए हैं।“
जिन बोला - ”मैं फिल्मी नहीं हूं
इल्मी जिन हूं, वायदा निभा दूंगा
जो भी हुक्म देंगे
करके दिखा दूंगा।“
प्रोड्यूसर बोला - ”ऐसा है तो जाओ
मेरे लिये पांच बोतल
स्काॅच लेकर आओ
और साथ में जाने जाना
कोई चुलबुली-सी बुलबुल
भी लेते आना।“
जिन ने पांच सैकिण्ड में
सब हाजिर करके
निर्माता की तरफ ताका
”अब क्या हुक्म है मेरे आका ?“
निर्माता सोचने लगा
यह जिन यहां से जाए
तो अपन बुलबुल से मन बहलाए
प्रोड्यूसर बोला - ”जाओ नाईजीरिया से
पचास फुट ऊंचा जिराफ
अफ्रीका से शेरनी का दूध
और आस्ट्रेलिया की
काली भेड़ के
सफेद बाल लेकर आओ।“
उसने सोचा, यह फाॅरन कनट्री जाएगा
तो एक हफ्ते से पहले तो
क्या ही वापिस आएगा !
प्रोड्यूसर गश खा गया
वो जिन तो सारी चीजें लेकर
पांच मिनट में ही आ गया
अचानक निर्माता के दिमाग में
आइडिया आया
उसने हुक्म सुनाया -
”पूरी दुनिया में कोई ऐसा
नेता ढूंढकर लाओ
जो राजा हरिश्चन्द्र के समान
सत्यवादी हो
जो महात्मा गांधी जैसा
ईमानदार हो
जो मदर टैरेसा के समान
गरीबों का मददगार हो
जो औरों के लिए विष पीता हो
जो अपने लिये नहीं
देश के लिए जीता हो।“
पूरे पांच साल हो गए
जनाबे जिन
वापिस नहीं आ रहे हैं
और प्रोड्यूसर साहब
अब भी बुलबुल के साथ
मजे उड़ा रहे हैं।

‘रामराज’ देखना हो तो इस कार्यालय में आइए

  • बदहाल है राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का कुर्जी स्थित कार्यालय 
  • कर्मचारी अक्सर रहते हैं गायब, दलाल सक्रिय 

राजीव मणि 
पटना : बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का एक छोटा-सा कार्यालय पश्चिमी पटना स्थित कुर्जी में है। यह कार्यालय किराये के एक छोटा-सा कमरा में चल रहा है। लेकिन, यहां के कर्मचारियों की मनमानी के कारण महीने में कुछ ही दिन कार्यालय खुलता है। लोगों का कहना है कि सिर्फ बाहर दिवाल पर लगे बोर्ड को देखकर ही पता चलता है कि यहां राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का कार्यालय है। 
बोर्ड पर अंचल : पटना सदर, कार्यालय : हल्का न. 1, राजस्व कर्मचारी का नाम: कुछ भी अंकित नहीं, हल्का अंतर्गत ग्रामों के नाम : दीघा थाना नं. 1, मैनपुरा थाना नं. 2 एवं राजापुर थाना नं. 3 तथा हल्का मुख्यालय दिवस : मंगलवार, शुक्रवार अंकित है। लोग बताते हैं कि इन क्षेत्रों के जमीन की रसीद यहीं कटती है। साथ ही, जमीन संबंधी कुछ अन्य जरूरी काम होते हैं। लेकिन, कर्मचारियों के गायब रहने के कारण एक ही काम के लिए दर्जनों बार कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है। 
लोग यह भी बताते हैं कि यहां दलाल काफी सक्रिय हैं। जिस जमीन की रसीद 24-25 रुपए सालाना के दर से कटती है, उसके एवज में लोगों से सौ रुपए से लेकर दो सौ रुपए तक वसूले जाते हैं। यही कारण है कि कुछ ऐसे लोग भी यहां सक्रिय हैं, जो सरकारी कर्मचारी नहीं हैं। साथ ही, इन दलालों के प्रतिदिन की कमाई एक-डेढ़ हजार रुपए बतायी जाती है। ज्ञात हो कि पटना सदर अंतर्गत यह पंचायत क्षेत्र है। ज्यादातर कार्यालय के बंद रहने एवं दलालों की मनमानी के कारण ही बहुत सारे लोग अपनी जमीन की रसीद वर्षों से नहीं कटवाये हैं। बार-बार हो रही परेशानी को लेकर क्षेत्र के लोगों में काफी आक्रोश है।