COPYRIGHT © RAJIV MANI, Journalist, Patna

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शुक्रवार, 10 जुलाई 2015

सावधान, कहीं आप फर्जी विश्वविद्यालय के छात्र तो नहीं !

नई दिल्ली : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग [यूजीसी] ने आज 21 फर्जी विश्वविद्यालयों की एक सूची जारी की। यूजीसी के मुताबिक ये विश्वविद्यालय नियमों को पूरा नहीं करते हैं और पूरी तरह से फर्जी हैं। सूची में शामिल सबसे अधिक 8 विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश में हैं, जबकि 6 दिल्ली से चलाए जा रहे हैं। तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और पश्चिम बंगाल में एक-एक फर्जी विश्वविद्यालय होने का खुलासा इस सूची में किया गया है।
 क्या है नियम 
यूजीसी एक्ट 1956 के सेक्शन 3 के मुताबिक केंद्र, राज्य, प्रोविन्शियल एक्ट या डीम्ड इंस्टीट्यूट ही मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय हो सकते हैं। इसके अलावा देश में जितने भी संस्थान खुद को एक विश्वविद्यालय बताते हैं। वह सभी फर्जी हैं।
 ये हैं फर्जी विश्वविद्यालय 
उत्तर प्रदेश
1. महिला ग्राम विद्यापीठ [इलाहाबाद]
2. गांधी हिंदी विद्यापीठ [इलाहाबाद]
3. नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ इलेक्ट्रो कॉम्पलेक्स होम्योपैथी [कानपुर]
4. नेताजी सुभाषचंद्र बोस विश्वविद्यालय [अलीगढ़]
5. उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय [कोसीकला]
6. महाराणा प्रताप शिक्षा निकेतन विद्यालय [प्रतापगढ़]
7. इंद्रप्रस्थ शिक्षा परिषद [नोएडा]
8. गुरुकुल विश्वविद्यालय [वृंदावन]।
दिल्ली
1. वाराणसेय संस्कृत विश्वविद्यालय [जगतपुरी]
2. कमर्शियल यूनिवर्सिटी लिमिटेड
3. यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी
4. वोकेशनल यूनिवर्सिटी
5. एडीआर-सेंट्रल ज्यूडिशियल यूनिवर्सिटी
6. इंडियन इंस्टीट्यूट और साइंस एंड इंजीनियरिंग।
बिहार
मैथिली विश्वविद्यालय [दरभंगा]।
कर्नाटक
बाडागानवी सरकार वल्र्ड ओपन एजुकेशनल सोसायटी [बेलगाम]
केरल
सेंट जोन्स विश्वविद्यालय [कृष्णाट्टम]।
मध्यप्रदेश
केशरवानी विद्यापीठ [जबलपुर]।
महाराष्ट्र
राजा अरेबिक विश्वविद्यालय [नागपुर]।
तमिलनाडु
डीडीबी संस्कृत विश्वविद्यालय [त्रिची]।
पश्चिम बंगाल
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ऑल्टरनेटिव मेडिसिन [कोलकाता]।
साभार : जागरण

सोमवार, 6 जुलाई 2015

मिक्स एण्ड मैच हेयर स्टाइल का जमाना

Shalini Yogendra Gupta
 महिला जगत 
शालिनी योगेन्द्र गुप्ता
ऑम्ब्रे कलर्स इस सीजन में ड्रेसेज पर ही नहीं, बालों पर भी खूब दिख रहे हैं। अगर आप भी अपने लुक में इंस्टेंट चेंज चाहते हैं, तो इस ट्रेंड को फॉलो कर सकते हैं। जानते हैं कि इस ट्रेंडी हेयर स्टाइल के बारे में सीडब्लूसी ब्यूटी एन मेकअप स्टूडियो की सेलिब्रिटी ब्यूटी एन मेकअप एक्सपर्ट शालिनी योगेन्द्र गुप्ता क्या कहती हैं 
ऑम्ब्रे कलर्स 
आउटफिट्स में मिक्स एण्ड मैचिंग में तो आप एक्सपर्ट होंगे, लेकिन यही मिक्सिंग हेयर कलर्स में करनी पड़े तो? बता दें कि हाई एण्ड सॉफ्ट कंट्रास्ट में हेयर कलर्स को मिक्स एण्ड मैच इन है और इस स्टाइल को ऑम्ब्रे कहते हैं। जेसिका बिल, सारा पार्कर, हिलेरी डफ और ऐशली सिंपसन हॉलिवुड स्टार इस हेयर कलरिंग को ट्राई कर चुके हैं। 
गौरतलब है कि ऑम्ब्रे कलर्स में डार्क रूट्स और लाइटर एंड्स का कॉम्बिनेशन होता है। हालांकि यह हाईलाइटिंग जैसा ही स्टाइल है, लेकिन इस ट्रेंड में बालों के रूट्स के डीपर शेड सॉफ्ट होते हैं और हेयर के एंड्स में कलर बदलता जाता है। 
क्या है मीनिंग
गौरतलब है कि फ्रेंच में ऑम्ब्रे वर्ड की मीनिंग शेडिंग है। इस टेक्नीक में हेयर डार्क से लाइट होते चले जाते हैं। यहां डार्क और लाइट कलर्स के बीच में कोई फिक्स डिवाइडिंग लाइन नहीं होती, बल्कि इसकी जगह डार्क से लाइट कलर की तरफ शेडिंग लुक को प्रेफरेंस दी जाती है। 
ट्रेंडी है, हिट है 
ऑम्ब्रे टेक्नीक चूंकि बहुत ट्रेंडी है। यही वजह है कि इसे फॉलो करने वालों में लड़के-लड़कियां दोनों हैं। शोल्डर से लंबे बालों पर यह स्टाइल खूब फबता है। दरअसल, जितनी ज्यादा लेयरिंग या स्टेप्स बालों में होंगे, ऑम्ब्रे टेक्नीक का गेटअप उतना ही अच्छा आएगा। 
सॉफ्ट कंट्रास्ट
ऑम्ब्रे लंबे बालों के लिए बेटर है। हां, इंडियन स्किन टोन के लिए डार्क एण्ड ब्लॉन्ड, लाइट येलो का हाई कंट्रास्ट सूटेबल नहीं है। इसकी जगह डार्क ब्राउन से लेकर रेडिश ब्राउन की शेडिंग बेहतर रहेगी। दरअसल, यहां डार्क ब्राउन, कॉपर और डीप रेड जैसे कलर्स के साथ सॉफ्टर कंट्रास्ट ज्यादा करवाएं जाते हैं। नेचुरल कलर्स यहां की स्किन टोन के लिए बेस्ट हैं। वैसे भी इन दिनों नेचुरल कलर्स ट्रेंड में हैं। 
टेक केयर 
कलर्ड हेयर की शाइनिंग और टेक्सचर बरकरार रखने के लिए कलर प्रोटेक्टिंग शैंपू व कंडीशनर यूज करें। और हां, कलरिंग सर्विस के बाद कोई पावर डोज ट्रीटमेंट भी लें। इससे बालों का टेक्सचर रफ नहीं होगा और वे डलनेस से भी बचेंगे। 
  • एंड्स पर मजेंटा रेड के सलेक्शन से आएगा चिक ऑम्ब्रे लुक 
  • स्किन टोन और आई कलर से मैच करते कलर भी चुन सकते हैं 
  • गॉर्जियस ऑम्ब्रे लुक्स के लिए हाईलाइट्स के टोन को ध्यान से चुनें। 

शालिनी योगेन्द्र गुप्ता 
ब्यूटी एण्ड मेकअप एक्सपर्ट 
सीडब्लूसी ब्यूटी एण्ड मेकअप स्टूडियो, कानपुर

कहीं सरस्वती की तरह विलुप्त ना हो जाए नदियां

Kanchan Pathak
 फीचर@ई-मेल 
कंचन पाठक 
दृश्य 1 
स्थान - गंगा का सुनसान तट, समय - मध्यरात्रि 
एक युवक जीवन की विषमताओं और दुखों से टूटकर आत्महत्या के इरादे से आधी रात को गंगा तट पर आता है। चांदनी रात में लहरों के धुंधले उजास में देखता है, नदी के तट पर एक स्त्री सफेद वस्त्र में घुटनों में सर छुपाये बैठी है। वह शायद रो रही थी। हिचकियों के बीच मद्धम रूदन स्वर से उसका शरीर कांप रहा था। लड़का उसे देखकर चकित और अचंभित हो जाता है। वह स्त्री के करीब पहुंचता है। इतने में स्त्री अपना सर ऊपर उठाती है। उसका चेहरा आंसुओं से भीगा हुआ था। आंखों में करुणा का असीम सागर लहरा रहा था। उसने लड़के की ओर वात्सल्य दृष्टि से देखा और पूछा - इतनी रात गए तुम यहां क्या कर रहे हो ? 
लड़का - मैं जीवन की विभीषिकाओं और विषमताओं से टूट चुका हूं। मां गंगा की मोक्षदायिनी गोद में शरण लेने आया हूं। इस संसार की विद्रूपताओं से अब यही मुझे मुक्ति दिला सकती है। किन्तु आप कौन हैं ? और इतनी रात गए यहां अकेली बैठकर क्यूं रो रही हैं ? वह कौन-सी पीड़ा है जिसने आपको इस तरह व्यथित कर दिया है ? आपके घर के लोग कहां हैं ? आप मुझे बताएं ... मैं यथासंभव आपकी मदद करूंगा। आप उठिए और मेरे साथ चलिए, मैं आपको आपके घर तक पहुंचा कर आता हूं। इतनी रात गए एक अकेली स्त्री का ऐसे सुनसान जगह पर रहना ठीक नहीं है। आइये चलिए मेरे साथ।
युवक प्रस्थान की भूमिका में तत्पर दिखता है। 
स्त्री - मैं गंगा हूं। हजारों वर्ष पूर्व भागीरथ ने कठिन तप कर स्वर्गलोक से मृत्युलोक में आने के लिए मुझे राजी किया था। तब से अब तक मैं पृथ्वी वासियों को अपने स्वर्गिक आंचल की छांव देकर असीम स्नेह, प्रेम और उर्जा लुटाती छलकाती आ रही हूं। किन्तु, बदले में इन पृथ्वी वासियों ने कल-कारखानों के वर्ज्य समेत अपने समस्त कूड़ा कर्कट मुझमें बहाकर मेरे स्वच्छ आंचल को दागदार और विवर्ण कर दिया है। आज दो करोड़ नब्बे लाख लीटर प्रदूषित कचड़ा रोजाना मुझमें गिराया जा रहा है। यही नहीं, आस्था के नाम पर ये लोग मनुष्यों और पशुओं की लाशें तक मुझमें बहा देते हैं। आह! अब तो मुझे सांस लेने में भी परेशानी होती है। मेरा दम घुट रहा है। वहीं दिल्ली के 56 फीसदी लोगों की प्यास बुझा कर जीवन देने वाली मेरी बहन यमुना का जीवन आज स्वयं ही संकट में घिरा हुआ आखिरी सांसें ले रहा है। इसी प्रकार पृथ्वी पर बढ़ते पापों से मैली होकर मेरी बहन सरस्वती, जो आज से करीब 5500 वर्ष पहले मेरी ही भांति एक विशालकाय और पूर्ण प्रवाह के साथ बहने वाली अमृतदायिनी नदी थी, विलुप्त हो गई। वह सरस्वती जिसे मात्र एक नदी तो कदापि नहीं कह सकते, पौराणिक हिन्दू ग्रंथों और वैदिक ऋचाओं में नदीतमा की उपाधि से अटी पड़ी ये नदी निर्विवाद रूप से प्राचीनतम भारतीय सभ्यता की उद्गम स्थली भी थी। मानवता को कलंकित करते हुए महाभारत में जो खून की नदियां बही, उन छींटों के दर्द का कलंक लिए आकुल व्याकुल होकर मेरी बहन इस धरती से विदा हो गई। उस समय भी ऋषि वशिष्ठ ने सरस्वती में प्रवाह छोड़ने वाली सतलुज के जल में कूदकर आत्महत्या का प्रयास किया था, जिसकी पीड़ा से व्याकुल होकर नदी की धारा 100 खण्ड धाराओं में टूट गई थी। आज तुम भी तो वही करने आए थे। अब शायद मुझे भी अपनी बहनों की तरह इस भारत भूमि का त्याग कर देना चाहिए। 
युवक ध्यान से गंगा की व्यथा को सुनता है। भाव-विह्वलता की अवस्था में उसकी आंखों से आंसुओं की धारा बह निकलती है। 
युवक अपने दोनों हाथ जोड़कर नदी से कहता है - क्षमा माते। मैं समस्त पृथ्वी वासियों की तरफ से आपसे क्षमा मांगता हूं। और युवक उसी वक्त से नदी की सफाई में जुट जाता है। 
दृश्य 2 
समय - सुबह के 7 बजे, स्थान - गंगातट 
सुबह हो जाती है। अपने काम में मशगूल युवक को पता नहीं चलता। वह मग्न होकर नदी की सफाई में लीन है। उसके साथियों का फोन आता है। युवक की विचार तन्द्रा भंग हो जाती है। उसके मित्र उसे ढूंढते हुए वहां पहुंचते हैं। युवक से घर चलने को कहते हैं। वह अपने साथियों को सब बताता है। 
युवक - आज से मेरे जीवन का एक ही लक्ष्य है। मैं अपने भारत भूमि की इस मोक्षदायिनी नदी को सरस्वती की भांति रूठकर नहीं जाने दूंगा। मैं प्रतिदिन कुछ घंटे अपनी प्यारी मां गंगा के आंचल से धब्बों को साफ करने में बिताऊंगा। 
सभी साथी एक स्वर में - तुम इस काम में अकेले नहीं हो मेरे दोस्त। हमसब तुम्हारे साथ हैं। यह केवल एक नदी नहीं, हमसब पृथ्वी वासियों की आत्माओं की आस्था भी है। 
इस तरह सभी अपने-अपने कामों से कुछ वक्त निकालकर नदी को स्वच्छ करने में समर्पित करते हैं। 
अंतिम दृश्य 
नदियों का इतिहास केवल स्वयं उनका इतिहास नहीं होता, बल्कि यह अनगिनत सभ्यताओं का इतिहास होता है। सो नदियों का संरक्षण हर मनुष्य का परम उत्तरदायित्व होता है। हमसब जानते हैं, नदियों का पानी जहां-जहां से गुजरता है, वहां की मिट्टी को उर्वरा बना जाता है। परन्तु, आज जब नदियां स्वयं ही प्रदूषण के प्रहार से ग्रस्त हैं, तो जमीन बंजर ही बनेगी ना! सो अगर मानव जाति के अस्तित्व की जमीन को बचाना चाहते हैं, तो आइये हमसब मिलकर अपनी नदियों को बचाएं। 
 परिचय : कंचन पाठक कवियित्री व लेखिका हैं। प्राणी विज्ञान से स्नातकोत्तर और प्रयाग संगीत समिति से हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत में प्रवीण हैं। दो संयुक्त काव्यसंग्रह ‘सिर्फ तुम’ और ‘काव्यशाला’ प्रकाशित एवं तीन अन्य प्रकाशनाधीन। आपकी रचनाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में छपती रही हैं।