COPYRIGHT © RAJIV MANI, Journalist, Patna

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सोमवार, 29 फ़रवरी 2016

इस वर्ष 100 स्टेशनों पर वाई-फाई सेवा

 संक्षिप्त खबर 
रेलमंत्री श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने संसद में वर्ष 2016-17 का रेल बजट पेश करते हुए कहा कि रेलवे स्‍टेशनों पर विशेषकर युवा और कारोबारी यात्रियों के लिए वाई-फाई सेवाएं उपलब्‍ध कराने की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। उन्‍होंने कहा कि इस वर्ष 100 स्‍टेशनों पर और अगले 2 वर्षों में 400 रेलवे स्‍टेशनों पर वाई-फाई सेवाएं उपलब्‍ध कराने का प्रस्‍ताव है। उन्‍होंने कहा कि इसके अंतर्गत गूगल के साथ साझेदारी का प्रयास किया जा रहा है। 
उन्‍होंने कहा कि इस वर्ष ट्रैक मैनेजमेंट सिस्‍टम (टीएमएस) का एप्‍लीकेशन शुरु किया गया था। इससे रेलपथ निरीक्षण, निगरानी और अनुरक्षण के कार्यकलाप एक आईटी प्‍लेटफॉर्म पर आ गए हैं और एसएमएस. और ई-मेल के रूप में ऑटोमैटिक अलर्ट जारी किए जा रहे हैं। टीएमएस के इन्‍वेंटरी प्रबंधन मॉडयूल के परिणामस्‍वरूप इन्‍वेंटरी में 27,000 एमटी की कमी आई है, जिससे 64 करोड़ रु. की बचत हुई है और 53 करोड़ रुपए मूल्‍य के समकक्ष 22,000 एमटी स्‍क्रैप की पहचान हुई है। उन्‍होंने कहा कि 2016-17 के दौरान, संपूर्ण भारतीय रेल पर यह प्रणाली कार्यान्वित हो जाएगी। 
टिकटिंग, शिकायत निवारण और अन्‍य समस्‍याओं के लिए अलग-अलग डिजिटल समाधानों के तहत दो मोबाइल ऐप होंगे। एक एप से टिकट संबंधी सभी कार्य किए जाएंगे और दूसरे से सभी सेवाओं से संबंधित शिकायतों के निवारण का प्रावधान होगा और सुझाव प्राप्‍त किए जाएंगे।

रेलवे बोर्ड के पुनर्गठन के पक्ष में है भारतीय रेलवे 

रेलमंत्री श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने संसद में रेल बजट 2016-17 पेश करते हुए रेलवे में संगठनात्मक पुनर्संरचना की घोषणा की। रेल मंत्री ने कहा कि भारतीय रेल के विभिन्न कार्यात्मक अंगों में समन्वय के अभाव और व्यावसायिक सोच की कमी के कारण यह उन ऊंचाइयों को हासिल नहीं कर सकी, जिन्हें हासिल करने में यह सक्षम है। एक साझा कॉरपोरेट लक्ष्य प्राप्त करने के लिए इस संगठन की कार्यप्रणाली को पुनः निर्धारित करना ही एकमात्र समाधान है। इस प्रयोजन के लिए रेल मंत्री ने रेलवे बोर्ड का व्‍यावसायिक तरीके से पुनर्गठन करने और इस संगठन का कुशलतापूर्वक नेतृत्व करने के लिए अध्यक्ष, रेलवे बोर्ड को समुचित अधिकार प्रदान करने का प्रस्ताव किया है। 
मंत्री महोदय ने कहा कि इस दिशा में पहले कदम के रूप में किराए से इतर राजस्व, गति बढ़ाने, चालन शक्ति और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों पर ध्यान देने के लिए रेलवे बोर्ड के भीतर क्रॉस फंक्शनल निदेशालयों की स्थापना की जाएगी। अधिकारियों की नई भर्ती के लिए भारतीय रेलवे संवर्गों के एकीकरण की संभावना का पता लगाएगी।

अगले महीने नमामि गंगे कार्यक्रम में एसपीवी 

नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत अवजल प्रशोधन संबंधी बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी पर आधारित हाईब्रिड-एन्‍युटी हेतु स्‍पेशल परपज व्‍हीकल (एसपीवी) अगले महीने के आखिर तक लगाए जाने की संभावना है। यह जानकारी जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय के सचिव श्री शशि शेखर ने दी। वे आज नई दिल्‍ली में नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत अवजल प्रशोधन संबंधी बुनियादी ढांचे के निर्माण पर सार्वजनिक-निजी भागीदारी पर आधारित हाईब्रिड-एन्‍युटी संबंधी विपणन सम्‍मेलन का उद्घाटन कर रहे थे। उन्‍होंने कहा कि यह सम्‍मेलन इसलिए बहुत महत्‍वपूर्ण है क्‍योंकि पहली बार बाजार की जरूरत को देखते हुए अवजल प्रबंधन पर बात की जा रही है। श्री शेखर ने कहा कि मार्च के आखिर तक इस संबंध में कारोबारी सलाहकार सेवा हेतु प्रस्‍तावित आग्रह (आरपीएफ) को भी अंतिम रूप दिया जाएगा। सचिव ने सम्‍मेलन को जानकारी दी कि कारोबारी सलाहकारों की नियुक्तियां जून 2016 में शुरू की जाएगी और जनवरी 2017 से छूट पाने वालों को किराये पर लेने का काम शुरू हो जाएगा। 
श्री शेखर ने बताया कि यह भी तय हुआ है कि गंगा नदी के साथ-साथ सभी एसटीपी को सिर्फ हाईब्रिड-एन्‍युटी में शामिल किया जाएगा। उन्‍होंने कहा कि वह दिन बहुत दूर नहीं है जब अवजल प्रशोधन को अनिवार्य बना दिया जाएगा। सचिव ने बताया, ‘जब अनिवार्य होगा तो इसे व्‍यापक बाजार के लिए खोला जाएगा। उन्‍होंने बताया कि सभी शुरूआती तैयारियां जारी हैं और हमें मई 2016 तक 20-30 परियोजनाओं के सामने आने की उम्‍मीद है। श्री शेखर ने बताया कि प्रशोधित अवजल की बिक्री नीलामी में बोली लगाकर नहीं की जाएगी। उन्‍होंने बताया कि इसकी बिक्री के लिए हम बाजार निर्मित कर रहे हैं। इसके बारे में रेलवे और पेट्रोलियम – ऊर्जा मंत्रालय से संपर्क किया गया है। इस संबंध में रेल मंत्रालय के साथ सहमति पत्र पर पहले ही हस्‍ताक्षर हो चुके हैं। अगर ऊर्जा संयंत्र 50 किलोमीटर के दायरे में लगे हैं तो वे ही एसटीपी से परिष्‍कृत पानी को खरीद सकते हैं। श्री शेखर ने स्‍वच्‍छ गंगा कोष के लिए हर महीने 10 रूपये का योगदान करने के लिए प्रत्‍येक भागीदार से अपील भी की। 
इससे पहले स्‍वच्‍छ गंगा पर राष्‍ट्रीय मिशन में नमामि गंगे कार्यक्रम संबंधी अतिरिक्‍त मिशन डायरेक्‍टर श्री पुष्‍कल उपाध्‍याय ने पावर पाइंट प्रजेंटेशन दिया। उन्‍होंने सम्‍मेलन में जानकारी दी कि गंगा बेसिन में 11 राज्‍य आते हैं और इसमें कुल अवजल निकासी करीब 12,000 एमएलडी (मिलियन लीटर पर डे) है और 11 राज्‍यों में गंगा के बहाव क्षेत्र में सफाई की क्षमता का अंतर करीब 6300 एमएलडी है। 
सम्‍मेलन में निजी क्षेत्र के करीब 200 भागीदारों ने हिस्‍सा लिया। सम्‍मेलन का उद्देश्‍य भविष्‍य के लिए अवजल शोधन के लिए व्‍यापक सांस्‍थानिक भागीदारी और आदर्श तौर-तरीका अपनाना है।

बिहार बजट 2016-17 : युवाओं के नाम रहा

पटना : वित्तमंत्री अब्दुलबारी सिद्दीकी ने 2016-17 का बजट पेश किया। दस सालों में राज्य के योजना आकार में 16 गुना वृद्धि हुई है। वित्तीय वर्ष 2005-06 में बिहार का योजना आकार 4379 करोड़ रुपए का था, जो 2016-17 में बढ़कर 71 हजार 501 करोड़ 84 लाख रुपए हो गया है। बिहार में न सिर्फ योजना का आकार बढ़ा है, बल्कि कुल बजट में योजना के खर्च का प्रतिशत भी बढ़ा है। यह बताता है कि राज्य में नए निर्माण कार्य पर कुल बजट का पहले से काफी अधिक खर्च किया जा रहा है।
खास बातें
राज्य का पहला बजट महागठबंधन सरकार ने पेश किया। पेश है इस बजट की खास बातें :
  • 20 से 25 वर्ष के बेरोजगार युवाओं को रोजगार तलाशने के दौरान सहायता के तौर पर 1,000 रुपए प्रतिमाह की दर से दो साल तक स्वयं सहायता भत्ता
  • ‘स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड’ के तहत 12वीं पास हर इच्छुक विद्यार्थी को 4 लाख रुपए तक शिक्षा लोन बैंकों से मिलेगा। बैंकों को सरकार गारंटी देगी।
  • युवाओं की उद्यमिता विकास एवं स्टार्ट अप कैपिटल के लिए 500 करोड़ रुपए का वेंचर कैपिटल फंड। युवाओं को उद्योग लगाने में सहायता मिलेगी।
  • अगले पांच वर्षों में चापाकल और पेयजल के अन्य साधनों पर लोगों की निर्भरता पूरी तरह से खत्म की जाएगी।
  • अगले दो वर्षों में सभी गांवों में बिजली और सरकारी पैसे से घर में कनेक्शन
  • स्वस्थ एवं स्वच्छ बिहार के लिए हर घर शौचालय की व्यवस्था
  • शिक्षण संस्थानों में वाई-फाई से इंटरनेट दिया जाएगा
  • सरकारी नौकरी में महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा
  • सभी गांव एवं शहरों में गली-नाली का निर्माण कराया जाएगा
  • किशनगंज में कृषि विवि बनाने की घोषणा
  • पांच साल में सरकारी एवं निजी क्षेत्र के कुल 23 मेडिकल कॉलेज और नौ नर्सिंग कॉलेज खोले जाएंगे
  • बिहार में हिन्दी, अंग्रेजी और कम्प्यूटर शिक्षा पर जोर
  • तकनीकी शिक्षा पर जोर ताकि लोगों को रोजगार मिलने में आसानी हो
  • जिला एवं अनुमंडल में उच्च, व्यवसायिक एवं तकनीकी शिक्षा की व्यवस्था की जाएगी
  • हर जिले में जीएनएम स्कूल, पारामेडिकल इंस्टीट्यूट, पॉलिटेक्निक, महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान एवं इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना
  • सभी मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग कॉलेज की स्थापना
  • पांच साल में 31.183 हजार किलोमीटर ग्रामीण पथ का निर्माण
  • 2.34 लाख हेक्टेयर में नई सिंचाई क्षमता का सृजन
  • 1.20 लाख हेक्टेयर में सिंचाई क्षमता का पुनस्र्थापन
  • बूढ़ी गंडक, नून, बाया और गंगा लिंक नहर
  • सकरी नदी पर बागसोती बराज
  • नाटा नदी पर बराज का निर्माण
  • कमिश्नर, डीएम, एसपी, एसडीओ, एसडीपीओ व बीडीओ को जीपीएस सेट मिलेंगे
  • लगभग 30 करोड़ पेड़ लगाने का लक्ष्य
  • समस्तीपुर, मुंगेर, गया, गोपालगंज, शेखपुरा, भोजपुर, औरंगाबाद, पश्चिम चंपारण, किशनगंज और नवादा में पॉलिटेक्निक कॉलेज।

शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2016

रेल बजट 2016-17 : यात्रिगण कृपया ध्यान दें

 खास खबर 
पटना : ये मोदी सरकार का तीसरा रेल बजट और प्रभु का दूसरा रेल बजट है। रेल मंत्री ने चार नई ट्रेनों का एलान करते हुए किसी भी तरह का किराया नहीं बढ़ाया है। सिक्युरिटी के लिए स्टेशनों, बोगियों में सीसीटीवी की बात कही। जो 4 स्पेशल फैसिलिटी वाली ट्रेनें चलेंगी, उनमें हमसफर में सिर्फ एसी थ्री कोच होंगे। अंत्योदय में अनरिजर्व्ड कोच ही होंगे। तेजस 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी। उदय केवल रात में चलेगी। यह एसी डबल डेकर ट्रेन होगी। ये कैटेगरी बेस्ड ट्रेनें किस रूट पर चलेंगी, इसके बारे में कुछ नहीं कहा गया।
  • रेल मंत्री ने तीन ट्रेनें शुरु करने की घोषणा की, जिनके नाम होंगे हमसफर, तेजस और उदय एक्सप्रेस।
  • आधुनिक साज-सज्जा वाले सवारी डिब्बों के साथ नई रेलगाड़ी महामना एक्सप्रेस शुरू की है।
  • वित्तीय वर्ष 2016-17 में पूंजीगत योजना के लिए 1.21 लाख करोड़ रुपए रखे गए हैं।
  • प्रत्येक सवारी डिब्बे में वरिष्ठ नागरिक कोटे को 50 फीसदी बढ़ा रहे हैं।
  • गूगल की साझेदारी से इस साल 100 स्टेशनों और अगले 2 साल में 400 स्टेशनों पर वाई-फाई सेवाओं का प्रस्ताव।
  • इस वित्तीय वर्ष के अंत तक ट्रेनों में 17,000 जैव शौचालय उपलब्ध कराए जाएंगे।
  • दुनिया का पहला जैव निर्वात शौचालय भारतीय रेल ने तैयार किया और डिब्रूगढ़ राजधानी एक्सप्रेस में प्रयोग हो रहा है।
  • 1780 ऑटोमैटिक टिकट वेंडिंग मशीनें और 225 कैश-क्वाइन और स्मार्ट कार्ड चालित टिकट वेंडिंग मशीनें लगाई गई।
  • इस साल 44 नई परियोजनाएं शुरू होंगी।
  • प्रति मिनट 7200 ई-टिकट देने का लक्ष्य।
  • राज्य सरकारों के साथ 6 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर हुए।
  • भारतीय जीवन बीमा निगम ने अनुकूल शर्तों पर 1.5 लाख करोड़ रुपए के निवेश की सहमति दी।
  • 2500 किमी अतिरिक्त बड़ी लाइन चालू करने के लक्ष्य से भी आगे निकल जाएंगे, जो पिछले साल से ज्यादा होगा।
  • 2020 तक स्वर्णिम चतुर्भुज पर सेमी हाईस्पीड ट्रेनें चलाने का लक्ष्य।
  • रेलवे में 1 रुपए के निवेश से पूरी अर्थव्यवस्था में 5 रुपए की वृद्धि हो।
  • पैसेंजर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाकर औसतन 80 किलोमीटर प्रति घंटा रखने का लक्ष्य।

सुरक्षा के लिए बीच बोगी में मिलेगा महिलाओं को रिजर्वेशन 

रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने गुरुवार को संसद में रेल बजट पेश किया। उन्होंने बजट पेश करते हुए संसद में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पंक्तिया दोहराईं - हम न रुकेंगे, हम न झुकेंगे, चलो मिलकर कुछ नया बनाएं। बजट में यात्री किराए में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। चार नई ट्रेनें - अंत्योदय, तेजस, हमसफर और उदय चलाने का ऐलान किया गया। 2020 तक हर यात्री को कन्फर्म टिकट देने का लक्ष्य रखा गया है और हर रिजर्व कैटेगिरी में 33 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए सुरक्षति रखने की घोषणा की गई है।
2020 तक हर यात्री को कन्फर्म टिकट 
रेल मंत्री ने ऐलान किया कि 2020 तक हर यात्री को कन्फर्म टिकट मिलेगा। उन्होंने कहा, ‘‘हमें पीएम मोदी के विजन को साकार करना है। पीएम चाहते हैं कि तेजी और कुशलता के साथ काम हो। हमने 2020 तक बड़ी लाइनों के काम को पूरा करने का लक्ष्य रखा है।’’
पैसेंजर ट्रेनों की रफ्तार 80 किलोमीटर प्रति घंटा होगी 
रेल मंत्री ने कहा कि पैसेंजर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाकर औसतन 80 किलोमीटर प्रति घंटा रखने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय स्तर पर रेलवे सुविधाएं बढ़ाएगी। पिछड़े क्षेत्रों में भी रेल रूट बनाने की योजना पर काम हो रहा है।
सोशल मीडिया रेलवे के लिए शिकायतों का प्लेटफॉर्म
प्रभु ने रेल बजट में सोशल मीडिया का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया से रोज रेलवे को एक लाख से ज्यादा शिकायतें मिलती हैं। सोशल मीडिया रेलवे के लिए शिकायतों का प्लेटफॉर्म है।
हर बड़े स्टेशन पर सीसीटीवी सर्विलांस
प्रभु ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा रेलवे की प्राथमिकता है और इसी को देखते हुए सभी बड़े स्टेशनों को चरणबद्ध तरीके से सीसीटीवी सर्विलांस में लाया जाएगा। उन्होंने बताया कि 311 स्टेशनों पर सीसीटीवी का इंतजाम किया जा चुका है।
अंत्योदय और हमसफर ट्रेन चलेगी 
प्रभु ने ऐलान किया कि आम लोगों के लिए अंत्योदय ट्रेनें चलेंगी, जिसमें सभी कोच थर्ड एसी होंगे। उन्होंने हमसफर ट्रेन चलाने का भी ऐलान किया, जो 130 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चलेंगी। इस ट्रेन में सिर्फ तीन एसी कोच होंगे।
139 पर फोन कर टिकट कैंसल होगा
प्रभु ने ऐलान किया कि यात्री 139 पर फोन करके टिकट कैंसल करा पाएंगे। उन्होंने दिल्ली में रिंग रोड की तर्ज पर रिंग रेलवे सेवा से 21 स्टेशनों को जोड़ने की भी घोषणा की।
1.21 लाख करोड़ का बजट 
रेल मंत्री ने कहा, हम संचालन अनुपात 92 फीसदी हासिल करने की कोशिश करेंगे। इस साल के आंकलन में 8,720 करोड़ रुपये की बचत की उम्मीद है। रेल बजट में 1.21 लाख करोड़ रुपये खर्च का प्रावधान है। प्रभु ने कहा कि उन्हें सरकार से 40 हजार करोड़ रुपये बजटीय सहयोग की उम्मीद है।

रिटायरिंग रूम की बुकिंग ऑनलाइन होगी 

प्रभु ने यात्रियों की सुविधाओं के लिए कई ऐलान किए। रिटायरिंग रूम की ऑनलाइन बुकिंग हो सकेगी। महिला हेल्पलाइन बनाई जाएगी, जो 24 घंटे काम करेगी। अगले साल 400 स्टेशनों पर वाई-फाई सुविधा मिलेगी। मौजूदा वित्त वर्ष की समाप्ति तक 17 हजार अतिरिक्त जैविक शौचालय चालू होंगे।
प्रभु ने बजट पेश करने से पहले कहा, ‘‘यात्री रेलवे की आत्मा हैं। हमारी प्राथमिकता में यात्रियों की सुरक्षा और सेफ्टी सबसे ऊपर है। हम सभी स्टेशनों पर वाई-फाई उपलब्ध कराएंगे।’’ रेल मंत्री के मुताबिक, मेक इन इंडिया और स्किल इंडिया रेलवे के लिए प्राथमिकता रहेगी। रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने कहा, ‘‘हमने आम आदमी की जरूरतों को ध्यान में रखकर रेल बजट बनाया है।’’ रेल मंत्री ने इस बार सबकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बजट को अंतिम रूप दिया है।

भारतीय रेलवे से जुड़ी 10 दिलचस्प बातें

भारत की एक फीसदी आबादी रोज भारतीय रेल में सफर करती है। भारतीय रेलवे दुनिया का चैथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। जानिए भारतीय रेलवे से जुड़ी दिलचस्प और खास बातें...
1. रोज 11 हजार ट्रेनें, 60 हजार किलोमीटर लंबे नेटवर्क 
2. भारतीय रेल 15.40 लाख लोगों को रोजगार देती है। फोर्ब्स के मुताबिक, यह लोगों को रोजगार देने वाला दुनिया का सातवां सबसे बड़ा संस्थान है।
3. डिब्रूगढ़-कन्याकुमारी भारतीय रेलवे का सबसे लंबा रूट है। इसकी लंबाई 4,286 किलोमीटर है, जिसमें 56 पड़ाव हैं। इस रूट को कवर करने में 82 घंटे से ज्यादा वक्त लगता है।
4. त्रिवेंद्रम-निजामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस बिना रुके वड़ोदरा से कोटा तक का 528 किलोमीटर का सफर सिर्फ साढ़े छह घंटे में तय करती है। यह देश की सबसे लंबी नॉन-स्टॉप ट्रेन है। जबकि हावड़ा-अमृतसर एक्सप्रेस सबसे ज्यादा स्टेशनों पर रुकने वाली ट्रेन है, जिसके 115 स्टॉपेज हैं।
5. नई दिल्ली-भोपाल शताब्दी देश की सबसे तेज चलने वाली गाड़ी है, जिसकी जगह जल्द गतिमान एक्सप्रेस ले लेगी। जबकि नीलगिरी एक्सप्रेस देश की सबसे धीमी गाड़ी है, जो औसतन 10 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलती है।
6. गुवाहाटी-त्रिवेंद्रम एक्सप्रेस सबसे लेटलतीफ ट्रेन मानी जाती है, जो आमतौर पर अपने वक्त से 10-12 घंटा लेट रहती है।
7. Venkatanarasimharajuvaripeta] यह चेन्नई के पास अराकोणम-रेनिगुंटा रूट पर एक स्टेशन है, जो किसी स्टेशन का सबसे लंबा नाम है। ओडिशा में आईबी और गुजरात में ओडी स्टेशनों के सबसे छोटे नाम हैं।
8. नवापुर स्टेशन गुजरात और महाराष्ट्र दोनों में पड़ता है। दोनों राज्यों में इसका आधा-आधा हिस्सा है।
9. श्रीरामपुर और बेलापुर दो अलग-अलग स्टेशन हैं, लेकिन महाराष्ट्र के अहमदनगर में पड़ने वाले ये स्टेशन एक ही पटरी पर आमने-सामने हैं।
10. 6 जून, 1981 को बिहार में बागमती नदी में ट्रेन गिर जाने से लगभग 800 लोगों की मौत हो गई थी, जो भारतीय रेलवे के इतिहास में सबसे भयानक हादसा है।

महिलाओं के लिए ये है खास

1. महिला सुरक्षा जरूरी, हेल्पलाइन नंबर होगा 182
2. सुरक्षा के लिहाज से बोगी के बीच में होगा महिलाओं का आरक्षण
3. 311 स्टेशनों में लगाए जाएंगे सीसीटीवी कैमरे
4. हर कैटेगरी में 30 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए
5. ट्रेन में सफर कर रही महिलाओं के छोटे बच्चों के लिए अलग से खाना उपलब्ध होगा।

मंगलवार, 16 फ़रवरी 2016

झारखंड को मिला अपना पहला मेगा फूड पार्क

  • करीब 25 हजार से 30 हजार किसानों को फायदे मिलने की उम्‍मीद 

झारखंड में खाद्य प्रसंस्‍करण सेक्‍टर के विकास को गति देने के लिए मेसर्स झारखंड मेगा फूड पार्क प्राइवेट लिमिटेड की ओर से राज्‍य में पहला मेगा फूड पार्क का आज उद्घाटन किया गया। केंद्रीय खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग मंत्री श्रीमती हरसिमरत कौर बादल ने रांची जिले के गेटलसूद गांव में इस पार्क का उद्घाटन किया। 
इस अवसर पर श्रीमती बादल ने कहा कि यह मेगा फूड पार्क 51.50 एकड़ क्षेत्र में बना है और इस पर निर्माण परियोजना लागत 114.73 करोड़ रुपए आई है। इस पार्क में बहु-स्‍तरीय शीत भंडारण, शुष्‍क माल गोदाम, सब्‍जियों के डिहाइड्रेशन लाइन, आधुनिक गुणवत्‍ता नियंत्रण और परीक्षण प्रयोगशाला सहित फलों और सब्‍जियों की प्रसंस्‍करण जैसी दूसरी सुविधाएं मौजूद रहेंगी। मंत्री महोदया ने विश्‍वास व्‍यक्‍त किया कि इस मेगा फूड पार्क परियोजना में आधुनिक बुनियादी सुविधाएं मौजूद रहेंगी जिसमें बागवानी और गैर-बागवानी उत्‍पादों को सड़ने से बचाने की हर सुविधा है। इस परियोजना से किसानों को अपने उत्‍पादों की बेहतर कीमत तो मिलेगी ही, उनके उत्‍पाद कम-से-कम खराब होंगे। इसके अलावा, कृषिगत उत्‍पादों और उद्यमशीलता के व्‍यापक अवसर पैदा होने से राज्‍य के युवाओं को रोजगार मिलेगा। 
इस अवसर पर झारखंड के मुख्‍यमंत्री श्री रघुवर दास, खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग राज्‍य मंत्री साध्वी निरंजन ज्‍योति और रांची से लोकसभा सांसद श्री राम टहल चौधरी भी उपस्‍थित थे। 
इस मेगा फूड पार्क से उम्‍मीद है कि इससे करीब 6 हजार लोगों को प्रत्‍यक्ष और परोक्ष रोजगार मुहैया होगा और आसपास के करीब 25 से 30 हजार किसान भी इससे लाभांवित होंगे। प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के निर्देशन में खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग पर अच्‍छा-खासा जोर है, जिससे मेक इन इंडिया पहल को गति दी जा सके। साथ ही आधुनिक बुनियादी सुविधाएं निर्मित कर इस क्षेत्र को नई पहचान के अलावा निजी निवेश को बढ़ावा दिया जा सके। 

पिछले सप्ताह 253 गांवों में बिजली पहुंचाई गई 

दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजीजेवाई) के तहत पिछले सप्ताह ( 8 से 14 फरवरी, 2016) देश भर में 253 गांवों में बिजली पहुंचाई गई। जिन गांवों को विद्युतीकरण हुआ, उनमें 111 गांव ओडिशा, 81 गांव असम, 40 गांव झारखंड, 13 गांव राजस्थान, 4 गांव बिहार, 3 गांव मध्य प्रदेश और 1 गांव उत्तर प्रदेश के हैं।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा था कि भारत सरकार ने 1000 दिनों यानी 01 मई, 2018 तक देश के उन सभी 18,452 गांवों में बिजली पहुंचाने का फैसला किया है, जो अभी तक इससे वंचित हैं। इस परियोजना का काम मिशन मोड के तहत शुरू किया गया है और विद्युतीकरण प्रक्रिया की रणनीति के तहत लागू करने की अवधि घटा कर 12 महीने कर दी गई है। निगरानी की दृष्टि से विद्युतीकरण प्रक्रिया की समयवाधि  को 12 मील के पत्थर में विभाजित कर दिया गया है।
वर्ष 2015-16 के दौरान अब तक 5279 गांवों तक बिजली पहुंचाई जा चुकी है। बचे 13,173 गांवों में से 9228 गांवों तक ग्रिड के जरिये बिजली पहुंचाई जानी है। 3398 गांवों में बिजली बगैर ग्रिड के पहुंचाई जाएगी क्योंकि यहां भौगोलिक अड़चनों की वजह से ग्रिड सॉल्यूशन तक पहुंच नहीं है। 547 गांवों में राज्य सरकार खुद बिजली पहुंचाएगी। अप्रैल, 2015 से लेकर 14 अगस्त, 2015 तक 1654 गांवों में बिजली पहुंचाई गई। सरकार की ओर से इस काम को मिशन मोड में शुरू करने  के बाद 15 अगस्त, 2015 से लेकर 14 फरवरी तक 3625 अतिरिक्त गांवों में बिजली पहुंचाई गई। इस दिशा में रफ्तार तेज करने लिए ग्राम विद्युत अभियंता (जीवीए) के जरिये नजदीकी निगरानी की जा रही है। इसके अलावा नियमित रूप से आरपीएम मीटिंग के दौरान इस दिशा में हुई प्रगति की समीक्षा की जा रही है। साथ ही राज्य डिस्कॉम की ओर से जिन गांवों के विद्युतीकरण की प्रक्रिया चल रही है, उनकी सूची साझा की जा रही है। इसके अलावा उन गांवों की पहचान की जा रही है जहां मील के पत्थर प्रगति की रफ्तार धीमी है।

देश का सबसे स्वच्छ शहर है मैसूर, धनबाद सबसे गंदा, पटना भी गंदे शहर में शामिल

  • 10 स्वच्छ शहरों में सूरत, राजकोट, गंगटोक, विशाखापत्‍तनम शामिल
  • इलाहाबाद में सबसे अधिक सुधार हुआ 
  • एनडीएमसी, उत्‍तर और दक्षिण एमसीडी की श्रेणियों में हुआ सुधार
  • पूर्वी एमसीडी की श्रेणी में आई कमी 
  • स्वच्छ भारत अभियान ने बनाया एक सकारात्‍मक प्रभाव : एम.वैंकेया नायडू

Mysore
देशभर में पिछले माह किए गये प्रमुख 73 शहरों के स्‍वच्‍छता सर्वेक्षण के परिदृश्‍य में कर्नाटक का मैसूर शहर सबसे स्‍वच्‍छ शहर की श्रेणी पर जबकि झारखंड का धनबाद शहर सबसे निचले पायदान पर है। शहरी विकास मंत्री श्री एम.वैंकेया नायडू के द्वारा आज एक संवाददाता सम्‍मेलन में ‘’स्‍वच्‍छ सर्वेक्षण-2016’’ के परिणाम जारी किये गये। इस सर्वेक्षण के लिए 10 लाख से ज्‍यादा की आबादी के 53 शहरों और इससे अधिक की जनसंख्‍या न रखने वाली 22 राजधानियों का चयन किया गया था। नोयडा और कोलकाता ने अगले दौर के सर्वेक्षण में शामिल होने की इच्‍छा जताई है।
स्‍वच्‍छता और स्‍वास्‍थ्‍य के संबंध में प्रमुख 10 शहरों की श्रेणी में – मैसूर, चंडीगढ़, तिरूचनापल्‍ली (तमिलनाडु), नई दिल्‍ली नगरपालिका परिषद, विशाखापत्‍तनम (आंध्र प्रदेश), गुजरात से सूरत और राजकोट, सिक्‍किम से गंगटोक, महाराष्‍ट्र से पिंपरी छिंदवाड़ और ग्रेटर मुंबई शामिल हैं।
इस वर्ष के सर्वेक्षण में 10 प्रमुख स्‍वच्‍छ शहरों में स्‍थान बनाते हुए विशाखापत्‍तनम (आंध्रप्रदेश), सूरत, राजकोट (गुजरात) और गंगटोक (सिक्‍किम) ने अपनी श्रेणियों में सुधार किया है।
Patna
निचले पायदान के 10 शहरों में कल्‍याण डोम्‍बिविली (महाराष्‍ट्र 64वीं श्रेणी), जमशेदपुर (झारखंड), जमशेदपुर (झारखंड), वाराणसी, गाजियाबाद (उत्‍तरप्रदेश), रायपुर (छत्‍तीसगढ़), मेरठ (उत्‍तर प्रदेश), पटना (बिहार), र्इंटानगर (अरूणाचल प्रदेश), आसंनसोलन (पश्‍चिम बंगाल) और धनबाद 73वीं श्रेणी पर हैं।
स्‍वच्‍छता के लिए पिछला सर्वेक्षण एक लाख और इससे अधिक की जनसंख्‍या वाले 476 शहरों में वर्ष 2014 में किया गया था। इस सर्वेक्षण को प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के पिछले वर्ष अक्‍टूबर में शुभारंभ किए गये स्‍वच्‍छ भारत अभियान से पूर्व किया गया था। इन शहरों के 2014 के सर्वेक्षण के परिणाम स्‍वच्‍छ भारत अभियान के घटकों जैसे शौचालयों का निर्माण, ठोस अपशिष्‍ट प्रबंधन अैर व्‍यक्‍तिगत निगरानी और व्‍यापक मानदंडों के संबंध में उनके प्रदर्शन पर आधारित थे। इससे स्‍वच्‍छ भारत अभियान के प्रभाव के आकलन के लिए दोनों सर्वेक्षणों के परिणामों की तुलना करने में मदद मिली।
इस वर्ष के सर्वेक्षण के परिणामों के साथ आगे भी तुलना करने के लिए 2014 में अपनी श्रेणियों में पहुँचे अंकों के आधार पर 73 शहरों के सर्वेक्षण में उनको इस बार भी श्रेणियां प्रदान की गईं। 
दो सर्वेक्षणों के अंकों और श्रेणियों की तुलना के आधार पर श्री वैकेया नायडू ने कहा कि :
  1.  स्‍वच्‍छ भारत अभियान ने स्‍वच्‍छता में सुधार, नागरिकों और स्‍थानीय शहरी निकायों के दृष्‍टिकोणों में जमीन स्‍तर पर सुधार की दिशा में बढ़ाए गये प्रयासों के संदर्भ में शहरी क्षेत्रों में सकारात्‍मक प्रभाव बनाया है।
  2.  स्‍वच्‍छता की ओर प्रगति के मामले में शहर विभिन्‍न स्‍तरों पर हैं और एक दूसरे से बेहतर बनने की होड़ में आगे निकलने के लिए एक स्‍वस्‍थ प्रतिस्‍पर्धा जारी है।
  3.  कुल मिलाकर दक्षिण और पश्‍चिम के शहरों ने बेहतर प्रदर्शन किया है लेकिन देश के अन्‍य क्षेत्रों खासतौर पर उत्‍तर में पारंपरिक प्रमुखों तक पहुँचने की शुरूआत कर रहे हैं।
  4.  पूर्व और उत्‍तर के कुछ क्षेत्रों में धीमी गति पर चल रहे चिन्‍हित शहरों के लिए प्रयासों को बढ़ाने की जरूरत है।
  5.  प्रमुखों के तौर पर शहरों की श्रेणीकरण, महत्‍वाकांक्षी प्रमुख, अपने प्रयासों को गति देने की इच्‍छा रखने वाले और धीमी गति से आगे बढ़ रहे शहरों के बीच एक स्‍वस्‍थ प्रतिस्‍पर्धा के लिए प्रोत्‍सा़हित किया जाएगा।    
  6.  सर्वेक्षण के निष्‍कर्षों को सार्वजनिक कर देने के फलस्‍वरूप शहरों के बीच स्‍वस्‍थ प्रतिस्‍पर्धा और ज्‍यादा बढ़ जाएगी, क्‍योंकि जिस चीज को भी मापा जाता है, उसे बाकायदा किया जाता है और प्रतिस्‍पर्धा किसी को भी बेहतर प्रयास करने के लिए प्रेरित करती है।
  7.  स्‍वच्‍छ सर्वेक्षण-2016 व्‍यापक, प्रोफेशनल, साक्ष्‍य आ‍धारित और सहभागितापूर्ण था।

श्री नायडू ने कहा कि जिन 73 शहरों में सर्वेक्षण किया गया, उनमें से 32 शहरों की रैंकिंग में पिछले सर्वेक्षण के मुकाबले सुधार देखने को मिला है। इनमें उत्‍तर भारत के 17 शहर, पश्चिमी भारत के 6 शहर, दक्षिण भारत के 5 शहर और पूर्वी एवं पूर्वोत्‍तर भारत के 2-2 शहर शामिल हैं। उन्‍होंने कहा कि इससे यह साबित हो जाता है कि उत्‍तर भारत के शहर अब साफ-सफाई के लिए कहीं ज्‍यादा प्रयास कर रहे हैं और शीर्ष स्‍वच्‍छ शहरों में शामिल दक्षिण एवं पश्चिमी भारत के शहरों के वर्चस्‍व को नये शहर चुनौती दे रहे हैं।
उपर्युक्‍त 32 शहरों में शामिल जिन शीर्ष 10 शहरों ने वर्ष 2016 के सर्वेक्षण में अपनी रैंकिंग में काफी ज्‍यादा सुधार किया है उनमें ये भी सम्मिलित हैं : इलाहाबाद (रैंकिंग में 45 पायदानों का सुधार), नागपुर (40 पायदानों का सुधार), विशाखापत्‍तनम (39 पायदानों का सुधार), ग्‍वालियर (34 पायदानों का सुधार), भुवनेश्‍वर (32 पायदानों का सुधार), हैदराबाद (31 पायदानों का सुधार), गुड़गांव (29 पायदानों का सुधार), विजयवाड़ा (23 पायदानों का सुधार) और लखनऊ (23 पायदानों का सुधार)।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीटी) दिल्ली में नगरपालिका निकायों के बीच नई दिल्ली नगरपालिका परिषद की रैंकिंग वर्ष 2014 के सातवें पायदान से सुधर कर वर्ष 2016 में चौथे पायदान पर पहुंच गई। इसी तरह दक्षिणी दिल्ली नगर निगम की रैंकिंग 47वें पायदान से सुधर कर 39वें पायदान पर और उत्‍तरी दिल्‍ली नगर‍निगम की रैंकिंग 47वें स्‍थान से सुधर कर 43वें स्‍थान पर आ गई है, जबकि पूर्वी दिल्‍ली नगर निगम की रैंकिंग वर्ष 2014 के 47वें पायदान से फिसल कर वर्ष 2016 में 52वें पायदान पर आ गई है।
वर्ष 2016 में जिन शीर्ष 10 शहरों की रैंकिंग काफी नीचे आई है उनमें जमशेदपुर, कोच्चि, शिलांग, चेन्‍नई, गुवाहाटी, आसनसोल, बेंगलुरू, रांची, कल्याण-डोम्बीवली और नासिक शामिल हैं। जहां एक ओर जमशेदपुर की रैंकिंग इस साल 53 पायदान नीचे आ गई है, वहीं नासिक की रैंकिंग 23 पायदान फिसल गई है।
अपनी रैंकिंग में बहुत ज्‍यादा सुधार करने वाले शीर्ष शहरों में से चार शहर उत्‍तर भारत के हैं, जबकि अपनी रैंकिंग में बेहद कमी दर्शाने वाले शीर्ष 10 शहरों में से कोई भी शहर उत्‍तर भारत का नहीं है।
साफ-सफाई की ओर अपने प्रयासों और जमीनी हालात में सुधार करने के दौरान वर्ष 2016 में कुल मिलाकर 33 शहरों की रैंकिंग पिछले सर्वेक्षण के मुकाबले घट गई है। सर्वेक्षण  में शामिल उत्‍तर भारत के 28 शहरों में से 11 शहर, दक्षिण भारत के 15 शहरों में से 8 शहर, पश्चिमी भारत के 15 शहरों में से 7 शहर, पूर्वी भारत के 7 शहरों में से 5 शहर और पूर्वोत्‍तर क्षेत्र के 8 शहरों में से 2 शहर अपनी रैंकिंग में गिरावट दर्शाने वाले इन 33 शहरों में शामिल हैं।
स्‍वच्‍छ सर्वेक्षण-2016 के लिए अपनाए गए तरीकों का उल्‍लेख करते हुए श्री नायडू ने सूचित किया कि 73 शहरों के प्रयासों के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए तय किए गए कुल 2,000 अंकों में से 60 फीसदी अंक ठोस कचरे के प्रबंधन से संबंधित पैमानों के लिए तय किए गए थे, जबकि शौचालय निर्माण के लिए 21 फीसदी अंक और शहर स्‍तरीय स्‍वच्‍छता रणनीति तथा व्यवहार परिवर्तन संबंधी संचार के लिए 5-5 फीसदी अंक तय किए गए थे।
यह सर्वेक्षण करने वाली भारतीय गुणवत्‍ता परिषद ने हर शहर में 42 स्‍थानों का दौरा करने के लिए 3-3 प्रशिक्षित सर्वेक्षकों की 25 टीमें तैनात की थीं, जिन्‍होंने प्रमुख क्षेत्रों जैसे कि रेलवे स्‍टेशनों, बस स्‍टैंडों, धार्मिक स्‍थलों, प्रमुख बाजार स्‍थलों, झुग्गियों एवं शौचालय परिसरों समेत नियोजित एवं गैर-नियोजित आवासीय क्षेत्रों को कवर किया। सर्वेक्षण में शामिल टीमों ने साक्ष्‍य के तौर पर अपने दौरे वाले स्‍थानों की भौगोलिक जानकारी संबंधी कुल 3,066 तस्‍वीरें लीं और उन्‍हें आज वेबसाइट पर अपलोड किया गया।
श्री नायडू ने कहा कि सभी 73 शहरों को अग्रिम तौर पर काफी पहले ही विस्‍तृत रूप से जानकारी दे दी गई थी, ताकि साफ-सफाई में बेहतरी के साथ-साथ सर्वेक्षण वाली टीमों द्वारा सत्यापन के लिए अपने प्रयासों के दस्तावेजी प्रमाण पेश किए जा सकें। एक लाख से भी ज्‍यादा नागरिकों ने संबंधित शहरों में साफ-सफाई पर अपने फीडबैक पेश किए, जिससे वर्ष 2016 में किया गया सर्वेक्षण साक्ष्‍य आधारित और सहभागितापूर्ण साबित हुआ है।

शहरी क्षेत्रों में बेहतर स्वच्छता हेतु 15 शहर सम्मानित 

स्‍वच्‍छता के विभिन्‍न क्षेत्रों में अच्‍छे कार्यों के लिए केंद्र सरकार द्वारा आज देश भर के 15 शहरों को सम्‍मानित किया गया। शहरी विकास मंत्री श्री एम.वेंकैया नायडू ने अपने-अपने शहरों में बेहतर स्‍वच्‍छता हेतु किए गए प्रयासों के लिए ‘स्‍वच्‍छ सर्वेक्षण-2016’ के निष्‍कर्षों की घोषणा करने के बाद इन शहरों को ट्राफियां और स्मृति चिन्ह प्रदान किए।
पुरस्कार विजेताओं का ब्‍यौरा नीचे दिया गया है :
शहर                 श्रेणी
मैसूर ---- समग्र रूप से सर्वोत्‍तम प्रदर्शन करने वाला शहर
चंडीगढ़ ---- उत्‍तरी क्षेत्र में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला शहर और नागरिक फीडबैक श्रेणी में सर्वोत्‍तम
तिरुचिरापल्‍ली ---- व्यवहार परिवर्तन संबंधी संचार में सबसे अच्छा प्रदर्शन
नई दिल्ली नगरपालिका परिषद ---- स्‍मार्ट शहरों में सबसे अच्‍छा प्रदर्शन और सेवा स्तर की स्थिति में सर्वोत्‍तम
विशाखापत्‍तनम ----  दक्षिणी क्षेत्र में सबसे अच्‍छा प्रदर्शन और स्वतंत्र अवलोकन श्रेणी में सर्वोत्‍तम
सूरत  ---- पश्चिमी क्षेत्र में सबसे अच्‍छा प्रदर्शन
राजकोट ---- ठोस कचरे के डोर-टू-डोर संग्रह एवं ढुलाई और सफाई में सबसे अच्छा प्रदर्शन
गंगटोक ---- पूर्वोत्‍तर क्षेत्र में सबसे अच्छा प्रदर्शन और राजधानियों के बीच सबसे अच्छा प्रदर्शन
पिंपरी चिंदवाड़ ---- सैटेलाइट शहरों के बीच सबसे अच्छा प्रदर्शन
ग्रेटर मुंबई ---- मेगा शहरों के बीच सबसे अच्छा प्रदर्शन
इलाहाबाद ---- उत्‍तरी क्षेत्र में शीर्ष प्रदर्शन करने वाला शहर (रैंकिंग में सर्वाधिक सुधार)
नागपुर ---- पश्चिमी क्षेत्र में शीर्ष प्रदर्शन करने वाला शहर
विशाखापत्‍तनम ---- दक्षिणी क्षेत्र में शीर्ष प्रदर्शन करने वाला शहर
भुवनेश्‍वर ---- पूर्वी क्षेत्र में शीर्ष प्रदर्शन करने वाला शहर
इंफाल ---- पूर्वोत्‍तर क्षेत्र में शीर्ष प्रदर्शन करने वाला शहर
श्री वेंकैया नायडू ने घोषणा की कि एक लाख तथा उससे ज्‍यादा की आबादी वाले सभी 500 शहरों का सर्वेक्षण हर साल साफ-सफाई का जायजा लेने के लिए किया जाएगा और सबसे अच्‍छा प्रदर्शन करने वाले शहर को एक रोलिंग ट्रॉफी प्रदान की जाएगी। राज्‍यों को भी शहरों की रैंकिंग करने की सलाह दी जाएगी, ताकि संबंधित राज्‍यों में सबसे अच्‍छा प्रदर्शन करने वाले शहर को सम्‍मानित किया जा सके। इसी तरह राज्‍यों को प्रत्‍येक शहरी स्थानीय निकाय की रैंकिंग करने की सलाह दी जाएगी, ताकि इसी तरह से साफ-सफाई के मामले में सर्वोत्‍तम निकाय की पहचान की जा सके।

सोमवार, 15 फ़रवरी 2016

राशन कार्डों का शतप्रतिशत डिजिटलीकरण

नई दिल्ली : सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में सुधार में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। देश भर में राशनकार्डों का शतप्रतिशत डिजीटलीकरण हो गया है। 42 प्रतिशत से अधिक राशनकार्डों को आधारकार्ड से जोड़ दिया गया है। इतना ही नहीं 77 हज़ार से अधिक राशन की दुकानों पर प्वाइंट आफ सेल डिवाइस लगा दी गई हैं, इनसे लाभार्थियों को मिलने वाले राशन की जानकारी का रिकार्ड इलेक्ट्रानिक रूप में उपलब्ध हो सकेगा। इन सब प्रयासों से सार्वजनिक वितरण प्रणाली को और अधिक पारदर्शी लीकेज रहित बनाने में बड़ी मदद मिलेगी। आज भुवनेश्वर में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए केन्द्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री रामविलास पासवान ने कहा कि केन्द्र सरकार ने पिछले 20 महीनों में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत गरीबों को 2 रुपए प्रति किलो गेहूं और 3 रुपए प्रति किलो चावल देने वाले की संख्या पिछले वर्ष 11 से बढ़कर अब 27 हो गई है।  
श्री पासवान ने कहा कि चालू खरीफ मौसम के दौरान अधिक से अधिक किसानों को एमएसपी का लाभ पहुंचाने के  लिए धान की बड़ी मात्रा में खरीद की है। 11 फरवरी, 2016 तक सरकार की एजेंसियों ने 261.37 लाख टन धान खरीदा है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह मात्रा 215.49 लाख टन थी। उड़ीसा में भी इस अवधि में 16.07 लाख टन धान खरीद लिया गया है, जबकि पिछले साल यह मात्रा 15.06 लाख टन थी।
उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा की गई अन्य  उल्लेखनीय पहल इस प्रकार हैं:
खाद्य सुरक्षा अधिनियम का क्रियान्वयन
  • पिछले साल तक राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (एनएफएसए) लागू करने वाले राज्यों की संख्‍या 11 से बढ़कर 25 हो गई थी। इस साल अप्रैल तक सभी राज्यों में इस अधिनियम के लागू होने की आशा है।
  • लीकेज और डायवर्जन को रोकने के लिए और खाद्य सब्सिडी का लाभार्थियों को प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण करने के लिए भारत सरकार ने ‘खाद्य सब्सिडी का प्रत्यक्ष हस्तांतरण नियम, 2015’ को 21 अगस्त 2015 को एनएफएसए के तहत अधिसूचित किया है। इन नियमों के तहत डीबीटी योजना संबंधित राज्यों/संघ शासित प्रदेशों की सहमति से लागू की जाएगी। इस योजना के तहत खाद्य सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में ट्रांसफर हो जाएगी। वह बाजार में कहीं से भी खाद्यान्न खरीदने के लिए स्वतंत्र होगा। यह योजना सितंबर 2015 में चंडीगढ़ एवं पुड्डुचेरी में लागू की जा चुकी है। दादर एवं नगर हवेली भी नकद हस्तांतरण/डीबीटी योजना को लागू करने के लिए पूरी तैयारी है। 
  • केंद्र सरकार ने खाद्यान्न के रखरखाव और ढुलाई की लागत का 50 प्रतिशत (पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों के मामले में 75%) राज्यों एवं डीलरों के मार्जिन से साझा करने का फैसला किया है। इसे लाभार्थियों के ऊपर नहीं डाला जाएगा और उन्हें मोटा अनाज एक रुपये प्रति किलो, गेहूं दो रुपये प्रति किलो और चावल तीन रुपये प्रति किलो की दर से मिलता रहेगा।
  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत लाभार्थियों को उनकी हकदारी का खाद्यान्न हर हाल में मिले, इसके लिए खाद्यान्न की आपूर्ति न होने के स्थिति में लाभार्थियों को खाद्य सुरक्षा भत्ते के भुगतान के नियम को जनवरी 2015 में अधिसूचित किया गया है।
  • समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को पौष्टिक भोजन मुहैया कराने के लिए और गरीबों के लिए ‘अन्‍य कल्‍याणकारी योजनाओं’ को बेहतर ढंग से लक्षित करने के लिए उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री की अध्‍यक्षता में गठित मंत्रियों की समिति ने न सिर्फ अन्‍य कल्‍याणकारी योजनाओं के लिए अनाज का आवंटन जारी रखने, बल्कि उन्‍हें योजनाओं के अंतर्गत मिलने वाली दालों - दूध और अंडे आदि जैसी पोषण संबंधी सहायता करने की सिफारिश की है।

खाद्यान्न प्रबंधन में सुधार
  • एफसीआई के पुनर्गठन के लिए सिफारिशें तैयार करने की खातिर सांसद शांता कुमार की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया। इस समिति की सिफारिशों के आधार पर ही एफसीआई की कार्य पद्धति सुधारने और इसके संचालन में लागत कुशलता लाने की खातिर कुछ उपायों की शुरुआत की गई है।
  • निरंतर प्रयासों से ही टीपीडीएस में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिले हैं जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं :

  1. देश भर में 24 करोड़ 99 लाख 95 हजार 458 राशन कार्डों में से 24 करोड़ 17 लाख 32 हजार 202 कार्डों का डिजिटीकरण किया जा चुका है, यह 97% उपलब्धि है। शीघ्र ही इसके शत-प्रतिशत होने की उम्‍मीद है।
  2. 10.10 करोड़ से ज्यादा राशन कार्डों को आधार के साथ जोड़ा जा चुका है।
  3. 19 राज्यों/संघ शासित प्रदेशों में खाद्यान्न का ऑनलाइन आवंटन शुरू हो चुका है।
  4. ‘प्लाइंट ऑफ सेल’ डिवाइस लगाकर 61,904 एफपीएस को स्वचालित बनाया गया है। इस साल मार्च तक लगभग 2 लाख राशन की दुकानों पर यह डिवाइस लगा दी जाएगी।
  5. 32 राज्यों/संघ शासित प्रदेशों में टोल फ्री हेल्पलाइन स्थापित की गई है।
  6. 36 राज्यों/संघ शासित प्रदेशों में ऑनलाइन शिकायत निवारण सुविधा शुरू की गई है।
  7. 27 राज्यों/संघ शासित प्रदेशों में टीपीडीएस के सभी कामों को दिखाने के लिए पारदर्शिता पोर्टल लांच किया गया है।

किसानों के लिए राहत
  • इस साल अप्रत्याशित बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने गेहूं की खरीद के लिए गुणवत्ता के नियमों में ढील दी है। केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को ऐसी छूट पर मूल्य कटौती की राशि की प्रतिपूर्ति करने का फैसला भी किया, जिससे किसान भी सूखे और टूटे गेहूं और बदरंग अनाज के लिए पूर्ण न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्राप्त कर सकते हैं। किसानों के लिए इस तरह का केंद्रित कदम किसी भी केंद्र सरकार द्वारा पहली बार उठाया गया है। सरकारी एजेंसियों ने बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों से रबी वर्ष 2015-16 के दौरान 280.88 लाख टन गेहूं की खरीद की।
  • न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य (एमएसपी) की पहुंच ज्‍यादा किसानों तक बनाने के लिए और धान की खरीद में बढ़ोत्‍तरी के प्रयासों के तहत पूर्वोत्‍तर राज्‍यों में निजी फर्मों को साथ जोड़ने की नीति निरूपित की गई। असम, बिहार, पूर्वी उत्‍तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल में संबंधित राज्‍य सरकारों द्वारा चिन्हित किसानों से निजी फर्मों को अधिक मात्रा में धान खरीदने की इजाजत दी गई, जहां भारतीय खाद्य निगम की सुदृढ़ खरीद व्‍यवस्‍था नहीं होने की वजह से अक्‍सर किसानों को हताशा में बिक्री करने के लिए विवश होना पड़ता है। निजी फर्मे एफसीआई अथवा सरकार के स्‍वामित्‍व वाली एजेंसी के गादामों तक कस्‍टम मिल्‍ड राइस (सीएमआर) पहुंचाएंगे।
  • एफसीआई ने चालू खरीद मौसम में अब तक 224.80 लाख टन धान की खरीद की जबकि पिछले खरीद मौसम की इसी अवधि में यह 174.04 लाख टन थी।
  • 1.5 लाख टन दालों का बफर स्‍टॉक बनाने के लिए एफसीआई ने किसानों से बाजार मूल्‍य पर दालों की खरीद बाजार मूल्‍य या एमएसपी, जो भी अधिक हो, पर शुरू की है। खरीफ विपणन मौसम 2015-16 के दौरान 20 हजार टन अरहर और 2500 टन (कुल 22500 टन) खरीद करने का लक्ष्‍य है। इसी प्रकार रबी विपणन मौसम 2015-16 के दौरान 40 हजार टन चना और 10 हजार टन मसूर (कुल 50 हजार टन) खरीद का लक्ष्‍य है। 
  • आयातित तेलों के अंतर्राष्‍ट्रीय मूल्‍यों में कमी का घरेलू स्‍तर पर उत्‍पादित होने वाले खाद्य तेलों के दामों पर असर पड़ा है, जिसके परिणामस्‍वरूप किसानों के हित प्रभावित हुए हैं। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने आयात शुल्‍क बढ़ाने की सिफारिश की थी। तदनुसार 17.09.2015 को कच्‍चे तेलों पर आयात शुल्‍क मौजूदा 7.5 प्रतिशत से बढ़ाकर12.5 प्रतिशत कर दिया गया और रिफाइन्‍ड तेलों पर आयात शुल्‍क मौजूदा 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया।

एफसीआई में सुधार
  • एफसीआई के गोदामों की सभी गतिविधियों को ऑनलाइन करने के लिए "डिपो ऑनलाइन" प्रणाली शुरू की गई। 30 संवेदनशील डिपो में यह प्रणाली शुरू हो गई है और इस साल मई तक एफसीआई के शेष डिपुओं में और साल के आखिर तक एफसीआई द्वारा किराए पर लिए गए सभी डिपुओं में भी लागू हो जाएगी।
  • एफसीआई से 100 लाख टन भंडारण वाले आधुनिक साइलो बनाने को कहा गया है। यह पीपीपी व्‍यवस्‍था के तहत देश के विभिन्‍न राज्‍यों में बनाए जाएंगे। इनसे खाद्यान्‍नों की गुणवत्‍ता बनाए रखने, नुकसान को कम करने और अनाज की तेज ढुलाई में मदद मिलेगी। इनके निर्माण का समयबद्ध कार्यक्रम इस प्रकार है :

2015-16 तक 5 लाख क्षमता का सृजन
2016-17 तक 15 लाख क्षमता का सृजन
2017-18 तक 30 लाख क्षमता का सृजन
2018-19 तक 30 लाख क्षमता का सृजन
2019-20 तक 20 लाख क्षमता का सृजन
  • भारत सरकार ने खुला बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत वर्ष 2015-16 की पहली तिमाही में बफर मानकों से अधिक खाद्यान्‍न के विपणन की मंजूरी दी थी। दिनांक 2 जनवरी 2016 तक इस योजना के तहत 44.81 लाख टन गेहूं और 0.73 लाख टन ग्रेड-ए चावल बेचा जा चुका है।
  • वर्ष 2014 और वर्ष 2015 के दौरान खराब मानसून के बावजूद एफसीआई के मजबूत खरीद प्रबंधों के परिणामस्‍वरूप केंद्रीय पूल में पर्याप्‍त मात्रा में खाद्यान्‍न उपलब्‍ध हैं। दिनांक 1 जनवरी 2016 को केंद्रीय पूल में 237.88 लाख गेहूं और 126.89 लाख टन चावल उपलब्‍ध था।  चावल की यह मात्रा पिछले वर्ष इसी अवधि के भंडार से 50.7 लाख टन अधिक है। खाद्यान्‍न की अधिक मात्रा से भविष्‍य में मानसून खराब होने या प्राकृतिक आपदा के समय आकस्मिक आवश्यकता को पूरा करने में मदद मिलेगी।
  • विकेंद्रीकृत खरीद के तहत 12 राज्यों/संघ शासित प्रदेशों के अलावा, तेलंगाना चावल की खरीद के लिए एक नया डीसीपी राज्य बन गया। आंध्र प्रदेश और पंजाब में भी खाद्यान्न के खरीद में दक्षता और वितरण के संचालन में सुधार के लिए वर्ष 2014-15 के दौरान आंशिक रूप से इस प्रणाली को अपनाया है।
  • पूर्वोत्तर राज्यों में खाद्यान्न की पर्याप्त आपूर्ति के लिए लुमडिंग से बदरपुर तक गेज रूपांतरण के कारण रेल मार्ग में व्यवधान के बावजूद मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट का उपयोग किया गया। क्षेत्र में 20,000 मीट्रिक टन की अतिरिक्त भंडारण के लिए हर महीने 80,000 मीट्रिक टन खाद्यान्न सड़कों से ले जाया गया। बांग्लादेश से गुजरने वाली नदी के रास्‍ते से भी त्रिपुरा तक खाद्यान्न ले जाया गया।
  • 1,03,636 टन चावल नदी/तटीय रास्‍ते से पहली बार आंध्र प्रदेश से केरल ले जाया गया।
  • सरकार ने खाद्यान्न के भंडारण के बेहतर प्रबंधन के लिए जनवरी, 2015 में बफर मानदंड को संशोधित किया। 2015-16 के दौरान भंडारण और पारगमन दोनों में नुकसान कम होकर (-) 0.03% (गेहूं में ‘स्‍टोरेज गेन’ के कारण) और 0.39% रह गया है, जबकि समझौता ज्ञापन में इनके लिए निर्धारित लक्ष्‍य क्रमश: 0.15% और 0.42% था।
  • खाद्यान्न के केंद्रीय पूल स्‍टॉकों की भंडारण क्षमता में 796.08 लाख टन की वृद्धि हुई।  20 राज्यों में निजी उद्यमी गारंटी योजना (पीईजी) के तहत 10 लाख मीट्रिक टन क्षमता वाले नए गोदामों का निर्माण किया गया। इस योजना स्कीम के तहत उत्तर-पूर्व में 62,650 टन की इस भंडारण क्षमता के अलावा और 12 राज्यों में 1.78 लाख टन के सीडब्ल्यूसी के माध्यम से और जोड़ी जाएगी।
  • वर्ष 2015-16 के दौरान (18.01.2016 तक) 610.50 लाख टन खाद्यान्न सार्वजनिक वितरण प्रणाली और अन्य कल्याण योजनाओं के तहत वितरण के लिए राज्यों/संघ राज्य प्रदेशों को आवंटित किया गया था।
  • केंद्रीय भंडारण निगम (सीडब्ल्यूसी) ने भी 2014-15 में अभी तक का सबसे ज्‍यादा 1562 करोड़ रुपए का कारोबार किया।
  • भंडारण क्षेत्र को सक्रिय बनाने के लिए भण्डारण विकास और नियामक प्राधिकरण (डब्ल्यूडीआरए) के रूपांतरण की एक योजना शुरू की गई है। आईटी प्‍लेटफार्म प्रदान करने और नियमों एवं प्रक्रियाओं को सुधारने का काम शुरू किया गया है।

गन्‍ना किसानों का बकाया चुकाने के लिए उठाए गए कदम
  • सरकार ने गन्‍ना किसानों की बकाया राशि मिलों द्वारा भुगतान के लिए इस क्षेत्र में नकदी प्रवाह में सुधार के लिए कई कदम उठाए हैं।
  • गन्‍ना किसानों की बकाया राशि के भुगतान में सहायता प्रदान करने के लिए चीनी उद्योग को 6000 करोड़ रुपये तक के सुलभ ऋण प्रदान करने की योजना 23 जून 2015 को अधिसूचित की गई। इस योजना के तहत 4152 करोड़ रुपये की राशि वितरित की जा चुकी है। सरकार ने सुलभ ऋण योजना के तहत पात्रता प्राप्‍त करने की अवधि भी एक वर्ष के लिए बढ़ा दी है और बढ़ी हुई अवधि के लिए 600 करोड़ रुपये की सीमा तक ब्‍याज पर वित्‍तीय सहायता लागत का वहन करने का फैसला किया है।
  • किसानों को सीधे सब्सिडी, सरकार ने 2015-16 सीजन में गन्‍ने के मूल्‍य को समायोजित करने और 2015-16 के चीनी सीजन के लिए किसानों के बकाये का समय पर भुगतान सुगम बनाने के लिए मिलों को 4.50 रुपये प्रति क्विंटल उत्‍पादन संबंधी सब्सिडी का भुगतान करने का फैसला किया है। इस संबंध में 2 दिसम्‍बर,2015 को एक अधिसूचना जारी की गई। योजना के अंतर्गत जारी होने वाली राशि सीधे किसानों के खातों में डाली जाएगी।
  • कच्‍ची चीनी पर निर्यात प्रोत्‍साहन 3200 रुपए प्रति टन से बढ़ाकर 4000 रुपए प्रति टन कर दिया गया है। पिछले वर्ष प्राप्‍त 7.5 लाख टन की तुलना में,  40 लाख टन कच्‍ची चीनी के निर्यात के लिए राशियों का आवंटन किया गया है। सितम्‍बर 2015 में सरकार ने 2015-16 में चार मिलियन टन चीनी के अनिवार्य निर्यात के लिए मिलों और सहकारी समितियों के लिए कोटे की भी घो‍षणा की है।
  • सरकार ने आयात को हतोत्‍साहित करने के लिए चीनी पर आयात शुल्‍क 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया है। उन्‍नत प्राधिकृत योजना के अंतर्गत घरेलू बाजारों में चीनी की लीकेज रोकने के लिए, निर्यात उत्‍तरदायित्‍व अवधि 18 महीने से घटाकर 6 महीने कर दी गई है।
  • इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम के अंतर्गत सम्मिश्रण लक्ष्‍य 5 प्रतिशत से  बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दिए गए हैं।
  • सम्मिश्रण के लिए आपूर्ति किए गए इथेनॉल के लिए लाभकारी मूल्‍य बढ़ाकर 49 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, पिछले वर्षों के मुकाबले यह वृद्धि काफी ज्‍यादा है। इसके परिणामस्‍वरूप, सम्मिश्रण के लिए इथेनॉल की आपूर्ति प्रतिवर्ष करीब 32 करोड़ लीटर से बढ़कर सालाना 83 करोड़ लीटर हो गयी है। इससे चीनी उद्योग अब इथनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम 6.82 करोड़ लीटर इथनॉल तेल कंपनियों को चालू चीनी मौसम के दौरान (अक्‍तूबर 2015 से) उपलब्‍ध करा चुकी है जबकि पिछले मौसम की इसी अवधि में यह मात्रा सिर्फ 1.92 करोड़ लीटर थी। इसके अलावा, इस कार्यक्रम के अंतर्गत चालू चीनी मौसम के दौरान अनुबंधित इथनॉल की मात्रा 120 करोड़ लीटर है जो अब तक की सबसे अधिक है।
  • निरंतर प्रयासों के परिणामस्‍वरूप गन्‍ने का बकाया जो चीनी सीजन 2014-15 के अप्रैल में 21,000  करोड़ रुपये था, जो कम होकर 12 जनवरी 2016 को 2700 करोड़ रुपए रह गया है।

उपभोक्ता उत्‍पादों और सेवाओं की गुणवत्‍ता बढ़ाने के लिए नए प्रावधान
  • सामान्‍य उपभोक्ता के लिए उत्‍पादों और सेवाओं की गुणवत्‍ता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने 29 साल पुराने बीआईएस अधिनियम को बदलने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो विधेयक, 2015 संसद में प्रस्‍तुत किया। लोकसभा ने इस विधेयक को पारित कर दिया है। नए विधेयक में मानकों के बेहतर अनुपालन के लिए सरल स्‍व-प्रमाणन व्‍यवस्‍था, अनिवार्य हॉलमार्किंग और उत्‍पाद को वापस लेने तथा उत्‍पाद के उत्‍तरदायित्‍व हेतु प्रावधान किए गए हैं।
  • स्‍वास्‍थ्‍य, सुरक्षा, पर्यावरण, धोखाधड़ी से संबंधित चलन से रोकथाम, रक्षा से संबंधित और ज्‍यादा मदों को अनिवार्य प्रमाणन के अंतर्गत लाया गया है। कीमती धातु से बनी वस्‍तुओं की हॉलमार्किंग अनिवार्य कर दी गई है। ‘’कारोबार करने में सुगमता प्रदान करने’’  की स्थिति को और बेहतर बनाने के लिए इंस्‍पैक्‍टरों के फैक्‍टरी में दौरा करने के लिए जाने के स्‍थान पर स्‍व-प्रमाणन और बाजार पर निगरानी जैसी सरलीकृत अनुपालन आकलन योजनाएं शुरू की गई हैं। इस प्रकार मानकों पर इंस्‍पैक्‍टर राज समाप्‍त हो गया है। 
  • प्रस्‍तावित नए प्रावधान मानकीकरण से जुड़ी गतिविधियों के सामंजस्‍यपूर्ण विकास को बढ़ावा देते हुए भारत सरकार को स्‍वास्‍थ्‍य, सुरक्षा, पर्यावरण और धोखाधड़ी से संबंधित चलन की दृष्टि से महत्‍वपूर्ण समझी जाने वाली वस्‍तुओं अथवा सेवाओं के लिए अनिवार्य प्रमाणन की व्‍यवस्‍था लाने में समर्थ बनाएंगे। कीमती धातु से बनी वस्‍तुओं की हॉलमार्किंग अनिवार्य करके, अनुपालन आकलन की संभावना बढ़ाकर और जुर्माना राशि में वृद्धि तथा कानून के प्रावधानों का महत्‍व बढ़ाकर निकृष्‍ट स्‍तर के उत्‍पादों के आयात पर रोक लगाने का प्रावधान किया गया है। नए विधेयक में ज्‍यादा प्रभावी अनुपालन और उल्‍लंघनों के लिए अपराध के समायोजन के लिए जुर्माना राशि बढ़ाने के प्रावधान भी किए गए हैं।
  • नया विधेयक संबंधित भारतीय मानकों की कसौटी पर खरे नहीं उतरने वाले उत्‍पादों के लिए उत्‍पाद उत्‍तरदायित्‍व सहित उन्‍हें वापस लेने का प्रावधान करता है।
  • आयातित घटिया उत्‍पादों से उपभोक्ताओं/उद्योगों की सुरक्षा हेतु इलैक्‍ट्रॉनिक उत्‍पादों के विनिर्माताओं के पंजीकरण का प्रावधान किया गया है।
  • स्‍वच्‍छ भारत अभियान के अंतर्गत, पेयजल, सड़क के खाने और कचरे के निपटान संबंधी मानकों को निरूपित करने/उन्‍नत बनाने के लिए कदम उठाए गए हैं।

उपभोक्ता संरक्षण को बढ़ावा
  • उपभोक्ता शिकायत निवारण प्रक्रिया को सरलीकृत और सशक्‍त बनाने वाला उपभोक्ता संरक्षण विधेयक, 2015 इस साल संसद में पेश किया गया। केंद्रीय संरक्षण प्राधिकरण की स्‍थापना, जिसे उत्‍पादों को वापस लेने और खुदरा कारोबारियों सहित दोषी कम्‍पनियों के विरुद्ध मुकदमा दायर करने के अधिकार देने का प्रस्‍ताव है। उपभोक्ता अदालतों में शिकायतों की ई-फाइलिंग और समयबद्ध स्‍वीकृति इस विधेयक में किया गया एक अन्‍य महत्‍वपूर्ण प्रावधान है।
  • सरकार ने उपभोक्ता जागरूकता और संरक्षण के लिए उद्योग के साथ  6 सूत्रीय संयुक्‍त कार्य योजना  बनाई है। इसकी मुख्‍य बातें हैं :

ii.  शिकायत निवारण के लिए उद्योग स्‍वयं मानक बनाएं और उन्‍हें क्रियान्वित करें।
iii. उद्योग संघों के सभी सदस्‍यों को राष्‍ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन और राज्‍य उपभोक्ता हेल्पलाइन के साथ जोड़ना।
iv.  संयुक्‍त जागरूकता अभियान चलाना।
v.   उपभोक्ता कल्‍याण कार्यों के लिए उद्योग जगत Corporate Consumer Responsibility Fund बनाएं।
vi.  भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ Self-regulation Code बनाएं।
vii.  नकली, घटिया और जाली उत्‍पादों के विरुद्ध कार्रवाई करें।
  • उपभोक्ताओं के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए स्‍वास्‍थ्‍य, वित्‍तीय सेवाएं और अन्‍य विभागों के साथ मिलकर संयुक्‍त अभियान चलाया गया। इस वर्ष उपभोक्ता मामलों संबंधी विभाग ने जागो ग्राहक जागो के बैनर तले अपना मल्‍टी मीडिया अभियान तेज कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों, जनजातीय क्षेत्रों और पूर्वोत्‍तर पर विशेष बल देते हुए  इस अभियान ने उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों/उत्‍तरादायित्‍वों के बारे में जागरूक बनाया।
  • उपभोक्ताओं से संबंधित प्रमुख क्षेत्रों यथा- कृषि, खाद्य, स्‍वास्‍थ्‍य सेवा, आवास,वित्‍तीय सेवाएं और परिवहन के लिए एक अंतर-मंत्रालयी निगरानी समिति  का गठन किया गया, ताकि उपभोक्ताओं के संबंध में नीतिगत सामंजस्‍य  और समन्वित कार्रवाई की जा सके।
  • भ्रामक विज्ञापनों से निपटने के लिए, एक समर्पित पोर्टलwww.gama.gov शुरू किया गया। उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले विज्ञापनों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने में समर्थ बनाने के लिए छह प्रमुख क्षेत्रों यथा- खाद्य एवं कृषि, स्‍वास्‍थ्‍य, शिक्षा, रियल एस्‍टेट, परिवहन एवं वित्‍तीय सेवाओं को इस उद्देश्‍य से शामिल किया गया है। दर्ज की गई शिकायतों को संबंधित प्राधिकरणों अथवा क्षेत्र के विनियामकों के समक्ष उठाया गया है और कार्रवाई करने के बाद उपभोक्ता को सूचित किया गया है।
  • उपभोक्ता सेवाओं को एक ही जगह उपलब्‍ध कराने के लिए छह स्‍थानों – अहमदाबाद, बेंगलुरु, जयपुर, कोलकाता, पटना और दिल्‍ली में 18 मार्च 2015 को ग्राहक सुविधा केंद्र प्रारम्‍भ किए गए । ऐसे केंद्र चरणबद्ध रूप से प्रत्‍येक राज्‍य में स्‍थापित किए जाएंगे। वे उपभोक्ता कानूनों, उपभोक्ताओं के अधिकारो,उपभोक्‍त अदालतों का दरवाजा खटखटाने की प्रक्रिया और उत्‍पादों की गुणवत्‍ता का भरोसा और सुरक्षा सहित उपभोक्ताओं से जुड़े अन्‍य मामलों के बारे में उपभोक्ताओं को जानकारी उपलब्‍ध कराएंगे।

आवश्यक खाद्य वस्‍तुओं की उपलब्‍धता किफायती मूल्‍यों पर सुनिश्चित कराने के उपाय
  • आवश्यक खाद्य वस्‍तुओं की उपलब्‍धता किफायती दामों पर सुनिश्चित कराने के लिए सरकार ने निम्‍नलिखित फैसले लिए हैं :
  • आवश्यक वस्‍तुओं की उपलब्‍धता सुनिश्चित करने के लिए अग्रिम कार्य योजना तैयार की गई है,उपभोक्ता मामले विभाग के सचिव की अध्‍यक्षता में एक अंतर-मंत्रालयी समिति साप्‍ताहिक समीक्षा बैठक करती है। 
  • 1.50 लाख टन दालों का बफर स्‍टॉक बनाने का फैसला किया गया है। 10 हजार टन दाल के आयात का फैसला किया जा चुका है।
  • खरीफ की दालों में अरहर और उड़द के लिए एमएसपी बढ़ाकर 275 रुपए प्रति क्विंटल और मूंग के लिए बढ़ाकर 250 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है।
  • काबुली चना और ऑर्गेनिक दालों एवं  मसूर की दाल की 10, 000 एमटी मात्रा तक के अतिरिक्‍त सभी प्रकार की दालों के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
  • शून्‍य आयात शुल्‍क की अवधि 30 सितम्‍बर 2016 तक बढ़ायी गई।
  • अनिवार्य वस्‍तु अधिनियम, 1955 के तहत, जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए राज्‍यों/संघ शासित प्रदेशों को प्‍याज और दालों पर भंडारण की सीमा निर्धारित करने का अधिकार दिया गया।
  • 5 किलोग्राम तक के पैकेटबंद ब्रांडेड उपभोक्ता पैक में अन्‍य खाद्य तेल की बिक्री दिनांक 6 फरवरी 2015 से 900 अमेरिकी डॉलर प्रति टन के न्‍यूनतम निर्यात मूल्‍य (एमईपी) पर करने की अनुमति दी गई।

प्रधानमंत्री ने गुरूत्वाकर्षण किरणों की ऐतिहासिक खोज पर प्रसन्नता व्यक्त की

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने परियोजना में भारतीय वैज्ञानिकों की भूमिका की सराहना की है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गुरूत्वाकर्षण किरणों की ऐतिहासिक खोज पर प्रसन्नता व्यक्त की है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने परियोजना में भारतीय वैज्ञानिकों की भूमिका की सराहना भी की। प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर कहा कि “गुरूत्वाकर्षण किरणों की ऐतिहासिक खोज से ब्रह्मांड को समझने में एक नयी दिशा मिलेगी। इस चुनौतीपूर्ण खोज में भारतीय वैज्ञानिकों के महत्वपूर्ण भूमिका निभाने पर मैं अत्यधिक गर्व महसूस कर रहा हूं। देश में एक विकसित गुरूत्वाकर्षण तरंग अन्वेषक के साथ और अधिक योगदान के लिए आगे बढ़ने की उम्मीद करता हूं। 

जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट ने डिलिवरी के लिए मान्यता प्राप्त प्रोग्रामरों को दी सीधी सेवा 

जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट ने डिलिवरी सुविधा के लिए सभी मान्यता प्राप्त ग्राहक प्रोग्रामरों को सीधी सेवा शुरू की है। यह ट्रस्ट भारत का पहला कंटेनर पोर्ट है जिसे टर्मिनल परिसरों से बाहर इकट्ठा किये गए माल को आगे बढ़ाने की परिकल्पना के अंतर्गत शुरू किया गया है। यहां से माल के थोक आयात - निर्यात के कार्यक्रम संचालित होते हैं। इसके विस्तार से करीब 143 ग्राहकों को तुरंत फायदा मिलेगा। 
इस समय 10 से 14 एजेंसियां हैं जो औसतन हर महीने जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट से विस्तारित सेवा का लाभ हासिल कर रही हैं। औसतन 300 से ज्यादा टीईयू यानी ट्वेंटी फुट इक्वेलेंट यूनिट का आयात किया जा रहा है। विस्तार कार्यक्रम के शुरू होने से बंदरगाहों से ज्यादा मात्रा में माल लाने – ले - जाने में बढ़ोतरी होगी। इसकी प्रगति पर टिप्पणी करते हुए पोर्ट ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री अनिल दिगाकर ने बताया कि कारोबार को आसान बनाने की दिशा में बनायी गई नीति के संबंध में जहाजरानी मंत्रालय के निर्देशों के तहत यह फैसला किया गया है। इसके शुरू हो जाने से व्यापारिक इकाइयों की लम्बे समय से लम्बित मांगों को पूरा करने में आसानी होगी। इस सुविधा से आयातकों और सीमा शुल्क से जुड़े एजेंटों को कई तरह के फायदे होंगे क्योंकि अब समूचा माल सीधे लिखे पते पर पहुंच जाएगा जिससे तीसरे पक्ष की लागत घट जाएगी। 
श्री दिगाकर ने बताया कि सीधे बंदरगाह तक माल पहुंचाने की सुविधा के विस्तार से मान्यता प्राप्त निर्यातकों और एजेंटों को कम पैसे खर्च करने पड़ेंगे, इसका फायदा यह होगा कि 10 से 11 दिनों में हो रहा माल का निस्तारण अब तीन दिनों के भीतर संभव होगा। मौजूदा नियमावली में माल को उतारने में 72 घंटे लगते थे जो तेजी से माल को लाने- ले –जाने के उद्देश्य को पूरा नहीं करते। इस तरह नई व्यवस्था लागू होने पर कई तरह की रुकावटें समाप्त होंगी या उनके समय में कमी आयेगी। बंदरगाहों पर माल ज्यादा समय तक नहीं फंसे होंगे जिससे आने वाले नए माल को रखने की जगह मिल जाएगी। 

शनिवार, 6 फ़रवरी 2016

मेरा दूसरा काव्य संग्रह

कविता अनवरत 2’ - मेरा दूसरा साझा काव्य संग्रह है। अयन प्रकाशन ने इसे प्रकाशित किया है। सम्पादक हैं चन्द्रप्रभा सूद। मूल्य 500 रुपए है। इसी काव्य संग्रह से मैं अपनी कुछ कविताएं यहां दे रहा हूं। पूरा पढ़ने के लिए इस पते से यह किताब प्राप्त कर सकते हैं। पता : अयन प्रकाशन, 1/2, महरौली, नई दिल्ली - 110 030

मैं और समय

काश ! समय रूक जाता
पलकों में आकर छिप जाता
बड़े-बड़े वृक्ष होते
ये अम्बर को छूते
इनकी शीतल छाया होती
प्रभु की कुछ माया होती
मैं और सिर्फ समय होता
मैं हंसता, वह रोता
काश ! कुछ ऐसा होता
समय मेरे आंचल में सोता
मेरी धारा में सब बहते
मैं कहता वो करते
पतझड़ में भी फूल खिलते
कभी किसी के आंसू न गिरते
बंद पलकों में समय होता
मैं चलता, वह सोता
काश ! कुछ ऐसा होता
परन्तु न हुआ न होगा वैसा
यह नहीं कुछ ऐसा-वैसा
समय जब तेज चलता है
नहीं किसी की कुछ सुनता है।

तुम्हारी प्रतीक्षा में

तुम्हारा हर प्रेमपत्र
पत्रिका का एक संग्रहणीय अंक की तरह है
यह सोचकर
मैं इसे दिलरूपी डायरी में
नोट कर लेता था
कभी मिलो
तो मैं तुम्हें बताऊं
कि इन प्रेमपत्रों का विशेषांक
कैसे मेरे दिल के छापेखाना से 
छपकर तैयार रखा है
तुम्हारी प्रतीक्षा में
तुम्हारे ही हाथों विमोचन के लिए।

शून्य

जन्म से पहले
हम शून्य में थे
जन्म लिए शून्य में आए
लड़कपन गया
जवानी आई
पर शून्य नहीं गया
कुछ देखा, कुछ सुना
पर शून्य में ही रहकर
शून्य को समझ नहीं पाए
शून्य में ही पढ़े
काम किये
कठिनाइयों का सामना किये
और कठिनाइयों से लड़ते
हम बूढ़े हो गए
शून्य में मरकर
हम शून्य को चले गये
हमारी यात्रा शून्य से चलकर
शून्य को समाप्त हो गई
यह कोई मामूली शून्य नहीं
यह है एक विशाल शून्य
और इस शून्य की आत्मा है 
हमारे प्रभु, हमारे ईश्वर।