COPYRIGHT © RAJIV MANI, Journalist, Patna

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रविवार, 24 अप्रैल 2016

मेरी नयी कविताएं


पर्यावरण और राजनीति

 मजाक डाॅट काॅम 
 13 
राजीव मणि
गरमी से पूरा देश बेहाल था। पारा 48 डिग्री पार कर चुका था। मकान तव रहे थे। दिन के ग्यारह बजते-बजते सड़कें, गलियां वीरान हो जाती थीं। दुकानें बंद और बाजार में सन्नाटा पसर जाता था। नदी, नहर, तालाब, कुआं, हैण्डपंप सब छुट्टियां मना रहे थे। पानी के लिए देशभर में हाहाकार मचा था। अखबार, पत्रिका, चैनल, सब हर बूंद पर खबरें बना रहे थे। कोई कहता, पहले आये चक्रवाती तूफानों के कारण यह सब हुआ। कोई कहता, पर्यावरण असंतुलन का परिणाम है यह। कोई ग्रहों की उलटी चाल बताने में लगा रहा। जितनी खोपड़ी, उतनी बातें ! लेकिन, कोई वृक्षों को बचाने और नये पौधों-वन लगाने की बात नहीं कह रहा था। 
जनता का सब्र अब टूटने को था। देश में सैकड़ों लोग लू से मर चुके थे। हजारों प्यास से। दर्जनों ऐसे थे, जो पानी के टैंकर से पानी लूटने में शहीद हो गए। मीडिया पानी की बरबादी पर सतर्क थी। और इसका नतीजा यह हुआ कि एक बूंद पानी भी कहीं जमीन पर गिरा कि टीवी पर आ गया। 
एक चैनल पर चल रहा था - सीएम के कार्यक्रम में बहा दिये हजारों गैलन पानी। दूसरे पर, मंत्री महोदय अपने कुत्ते को नहवाते हैं दस बालटा पानी से। तीसरे ने तो और मेहनत की - मंत्री ने आधा गलास पानी यूं ही फेक दिया। पानी पर सियासत होने लगी। मामला गरमाया। 
मामले को शान्त करने के लिए सरकार द्वारा एक अहम फैसला लिया गया। सरकार पर्यावरण बचाओ अभियान चलायेगी और इसकी शुरूआत दिल्ली से होगी। पत्रकारों को यह जानकारी दे दी गयी। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि दिल्ली में पर्यावरण बचाओ अभियान के लिए वे जगह की तलाश करें। साथ ही, अभियान को सफल बनाने के लिए जो भी करना हो, वे तुरंत करें। 
अधिकारी कार्यक्रम के लिए जगह की तलाश में जुट गये। काफी प्रयास के बाद उन्हें दिल्ली से बाहर एक गांव में जगह मिल गयी, जहां एकसाथ लाखों लोग कार्यक्रम को सफल बनाने को जमा हो सकते थे। आनन-फानन में मंजूरी मिल गयी। और अब काम शुरू हुआ। 
दस रोलर और मिट्टी काटने वाली भारी मशीनें उस गांव में पहुंच गयीं। किसानों के खेत रौंद डाले गये। सारे फसल मिट्टी में मिल गये। सैकड़ों घने पेड़ काट डाले गये। दो तालाब मिट्टी से भर दिये गये। पूरे खेत को बराबर करने के बाद उसे पानी से सींचा गया। पचास टैंकर पानी रात में चुपके से खपा दिये गये। सुबह-सवेरे पंडाल लगाया गया। लाखों लोगों के लिए विशेष रूप से पेयजल की व्यवस्था की गयी। इसके लिए कुल एक हजार नल लगाये गये, जिसमें ‘टपक जल निकासी’ की व्यवस्था की गयी। 
अगले दिन भव्य कार्यक्रम हुआ। लाखों लोगों की भीड़ जुटी। कई नेताओं ने अपने-अपने विचार रखें। पेयजल की समस्या और पर्यावरण असंतुलन पर लोगों से महत्वपूर्ण बातें कही गयीं। एक नेता ने तो यहां तक कह दिया - जैसा कि आप सब जानते हैं कि 70 फीसदी आबादी गांवों में रहती है। खेती कर गुजारा करती है। लेकिन, दुर्भाग्यपूर्ण है कि आप खेती-किसानी में सरकार एवं कृषि वैज्ञानिकों के बताए नियमों का पालन नहीं करते। आप एक आलू उगाने के लिए एक टैंकर पानी खर्च कर डालते हैं। इसका ही परिणाम हुआ कि आज धरती से पानी खत्म हो गया। नहर, नाले, तालाब, कुआं सब नाराज हो गए। अब आप ही बताइए, कैसे होगी खेती? लोगों को पेयजल कहां से मिलेगा? 
मीडिया में खूब चरचा हुई। कार्यक्रम सफल रहा। सरकार ने वादा कर दिया था कि एक माह में सबको पानी मिलेगा। कहीं पानी की कमी नहीं होगी। तबतक लोग कम पानी से गुजारा करें। पानी को बचाकर रखें। 
लोग मरते रहे, दिन कटता रहा ! जैसे-तैसे एक माह गुजर गया। बरसात आ गयी। खूब पानी बरसा। लोग गरमी की सारी परेशानी भूल गये। पुरानी सारी बातें भूल लोगों को नाचता-गाता देख सरकार भी खुश हो गयी। अब देश में पानी की कोई कमी नहीं थी ! 
उधर, पर्यावरण बचाओ अभियान के नाम पर किसान तबाह हो गये। सैकड़ों पेड़ काट डाले गये। पानी की बरबादी खूब हुई। और करोड़ो रुपए का खेल हो गया। सब कुछ फिर से पहले की तरह चलने लगा। जल-जंगल की बात हवा हो गयी।

मेरी नयी कविता

बुधवार, 20 अप्रैल 2016

देश में जल क्रांति का आह्वान

  • जल संसाधनों के बहु-उद्देश्यी विकास व मौजूदा चुनौतियां विषय पर संगोष्ठी आयोजित 

केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास व गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने देश में जल क्रांति का आह्वान किया है। नई दिल्ली में जल संसाधनों के बहु-उद्देश्यी विकास व मौजूदा चुनौतियां विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने देश के कुछ हिस्सों में सूखे पर चिंता व्यक्त किया। उन्होंने जल आयोग व अन्य संबंधित एजेंसियों के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वह सूखा प्रभावित क्षेत्रों के हर प्रखंड का दौरा करें और इस चुनौती से निपटने के लिए विस्तृत योजना तैयार करें। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस तरह के सूखे से निपटने के लिए देश के हर प्रखंड के लिए योजना तैयार रखनी चाहिए।
सुश्री भारती ने यह भी घोषणा किया कि अनुसूचित जाति बहुल 100 गांवों का चयन, जल संरक्षण के लिए ‘जल ग्राम योजना’ के तहत किया जाएगा। जल ग्राम, जल क्रांति अभियान के तहत एक योजना है, जिसे जल संसाधन, नदी विकास व गंगा संरक्षण मंत्रालय ने शुरू किया है। इसमें हर जिले से पानी की कमी वाले दो गांवों का चयन कर, वहां जल संरक्षण के लिए समग्र विकास किया जाएगा। मंत्री ने जल संरक्षण के क्षेत्र में बाबा साहेब के योगदान का जिक्र किया जिसे की कम ही लोग जानते हैं। उन्होंने घोषणा की कि अगले वर्ष डॉ. अंबेडकर के जन्मदिवस को जल दिवस के रूप में मनाया जाएगा।
संगोष्ठी का आयोजन केंद्रीय जल आयोग ने जल संसाधन, नदी विकास व गंगा संरक्षण मंत्रालय के अंतर्गत डॉ. भीम राव अंबेडकर की 125वीं जयंती मानने के क्रम में किया। इसमें जल क्षेत्र में अंबेडकर के योगदान पर चर्चा हुई और उनके सपनों को आगे ले जाने पर विचार किया गया।
जल संसाधन क्षेत्र के महत्वपूर्ण विशेषज्ञों जैसे कि आईसीआईडी के महासचिव श्री एसी त्यागी, आईसीएसएसआर के चेयरमैन व सीएसआरडी जेएनयू के अवकाशप्राप्त प्रो. सुखदेव थोराट, सीडब्ल्यूसी के पूर्व चेयरमैन श्री सुरेश चंद्र व जल संसाधन मंत्रालय के विशेष सचिव डॉ. अमरजीत सिंह ने संगोष्ठी को संबोधित किया।
केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य व सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री रामविलास पासवान, केंद्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री श्री थावर चंद गहलोत, केंद्रीय जल संसाधन राज्य मंत्री श्री सांवर लाल जाट, केंद्रीय रसायन व खाद राज्य मंत्री श्री हंसराज गंगराम अहीर, केंद्रीय राज्यमंत्री एमएचआरडी प्रो. (डॉ.) राम शंकर कठेरिया व संसद सदस्य तथा अखिल भारतीय एससी/एसटी महासंघ के राष्ट्रीय चेयरमैन श्री उदित राज ने भी इस अवसर पर संगोष्ठी को संबोधित किया।
डॉ. भीमराव अंबेडकर, भारतीय संविधान के मुख्य निर्माता व उत्पीड़ित तबके के नेता के रूप में विख्यात हैं। लेकिन जल संसाधन के प्रबंधन में उनके योगदान को कम ही लोग जानते हैं। वायसराय की कार्यकारिणी परिषद के सदस्य (श्रम) के रूप में अपने कार्यकाल (1942-1946) में डॉ. अंबेडकर ने देश में जल संसाधन के विकास के लिए अखिल भारतीय नीति बनाने की पहल की। इस काम को आगे बढ़ाने के क्रम में उन्होंने केंद्रीय जलमार्ग, सिंचाई व जहाजरानी आयोग का आधार रखा जो आगे चलकर आज के केंद्रीय जल आयोग के रूप में सामने आया।
डॉ. अंबेडकर ने नदियों के समग्र विकास के लिए नदी घाटी प्राधिकरण या निगम की वकालत की। उन्होंने देश में नदियों के तराई के बहु-उद्देश्यी विकास की अवधारणा दी। उनके प्रयास से ही आजादी के बाद दमोदर, महानदी व अन्य नदियों के बहुउद्देश्यी विकास के रूप में सामने आया।

पर्यावरण के अनुकूल जूट के थैलों से संबंधित पहल का शुभारंभ

  • मदर डेयरी दिल्‍ली- एनसीआर में समस्‍त मदर डेयरी/सफल बूथों पर ग्राहकों को जूट के थैले उपलब्‍ध कराएगी

यह सर्वविदित है कि पॉलीथीन की थैलियों का बेतहाशा इस्‍तेमाल राष्‍ट्रीय राजधानी में प्रदूषण की समस्‍या में योगदान देने वाले कारकों में से एक है। राष्‍ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने अनेक अवसरों पर दिल्‍ली में प्‍लास्टिक की थैलियों पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया है। हालांकि इन प्‍लास्टिक की थैलियों का सामान्‍य तौर पर इस्‍तेमाल निरंतर जारी है।
दिल्‍ली वासियों के पास अब इस बात का विकल्‍प होगा और वे पर्यावरण के अनुकूल, स्‍वाभाविक तरीके से सड़नशील और किफायती जूट के थैलों का उपयोग करते हुए प्‍लास्टिक की थैलियों का इस्‍तेमाल बंद कर सकें। मदर डेयरी, राष्‍ट्रीय जूट बोर्ड (एनजेबी) और बर्ड्स जूट एंड एक्‍सपोर्ट्स लिमिटेड (बीजेईएल) ने दिल्‍ली- एनसीआर में हजार के लगभग मदर डेयरी/सफल दुकानों पर आकर्षक, जूट के थैले उपलब्‍ध कराने संबंधी इस हरित उद्यम के लिए हाथ मिलाया है।
इस उद्यम को एनजेबी द्वारा प्रोत्‍साहन दिया जा रहा है, थैलों का निर्माण बीजेईएल द्वारा किया जा रहा है और इन्हें मदर डेयरी को सप्‍लाई किया जा रहा है, ताकि उसके बूथ के माध्‍यम से उन्‍हें वितरित किया जा सके। इस योजना का औपचारिक शुभारम्‍भ केंद्रीय वस्‍त्र मंत्री श्री संतोष कुमार गंगवार ने किया।
इस योजना के माध्‍यम से लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरत की खान-पान की सामग्री पर्यावरण के अनुकूल, आकर्षक, किफायती जूट के थैले खरीदने के विकल्‍प सहित मदर डेयरी और सफल के विश्‍वसनीय बूथों से खरीद सकते हैं। 25 रुपये से 35 रुपये की कीमत में उपलब्‍ध ये थैले मजूबत हैं, इन्‍हें धोया जा सकता है, और इनका कई बार इस्‍तेमाल संभव है, जो इन्‍हें किफायती बनाता है।
मदर डेयरी और सफल के बूथों पर ये थैले वस्‍त्र मंत्रालय, भारत सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण वाले सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम बर्ड्स जूट एंड एक्‍सपोर्ट लिमिटेड (बीजेईएल) द्वारा उपलब्‍ध कराये जा रहे हैं।
वस्‍त्र मंत्री ने 1 सितम्‍बर 2015 को कोलकाता में सामान्‍य सुविधा केंद्र (सीएफसी) योजना का शुभारम्‍भ किया था। यह राष्‍ट्रीय जूट बोर्ड की योजना है, जिसके अंतर्गत 5 सीएफसी स्‍थापित किए जाने हैं। पांच सीएफसी में से दो सीएफसी हुगली और 24 परगना में बीजेईएल द्वारा संचालित किए जा रह हैं, जिनके अंतर्गत विविध महिला स्‍व सहायता समूह (डब्‍ल्‍यूएसएच), सूक्ष्म उद्यमी जूट के विविध उत्‍पादों का निर्माण करते हैं। मदर डेयरी पर उपलब्‍ध कराये जाने वाले जूट के थैले ऐसे डब्‍ल्‍यूएसएचजी  को नियमित बाजार और आजीविका का स्‍थायी जरिया उपलब्‍ध कराएंगे।
मदर डेयरी ने  20,000 जूट के थैलों का शुरूआती ऑर्डर दिया है, इनमें से मदर डेयरी और सफल दोनों में से प्रत्‍येक को 10,000 जूट के थैले उपलब्‍ध होंगे। दिल्‍ली/एनसीआर के वासियों की प्रतिक्रिया के आधार पर आगे भी और ऑर्डर दिए जाएंगे। बीजेईएल द्वारा ये थैले निर्माण पर आई लागत वाले मूल्‍य पर ही आपूर्ति किए जा रहे हैं, भविष्‍य में अर्जित किया जाने वाला कोई भी मुनाफा कारीगरों और डब्‍ल्‍यूएसएचजी के सदस्‍यों तक पहुंचा दिया जाएगा।
इस अवसर पर श्री गंगवार ने दिल्‍ली वासियों से जूट के थैले का चयन करके समझदारी भरा विकल्‍प चुनने का अनुरोध किया। ये थैले अब उनके नजदीकी मदर डेयरी और सफल के बूथों पर उपलब्‍ध हैं। इस पहल के शुभारम्‍भ के अवसर पर वस्‍त्र मंत्रालय में सचिव, श्रीमती रश्मि वर्मा और मदर डेयरी फल एवं सब्‍जी प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक श्री नागराजन शिवरामकृष्‍णन भी उपस्थि‍त थे।

परम्परागत औषधि और होम्‍योपैथी में सहयोग को समझौता

भारत ने मॉरिशस के साथ परम्‍परागत औषधि और होम्‍योपैथी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्‍ताक्षर किए हैं। इस समझौता ज्ञापन पर आयुष (स्‍वतंत्र प्रभार) और स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण राज्‍य मंत्री श्रीपद यस्‍सो नाइक की अभी हाल में की गई मॉरिशस यात्रा के दौरान हस्‍ताक्षर किए गए। 
इस समझौता ज्ञापन से स्‍वास्‍थ्‍य एवं औषधि की परम्‍परागत प्रणाली के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। दोनों देशों में विशिष्‍ट ऐतिहासिक और सांस्‍कृतिक संबंधों के कारण पहले से ही यह परम्‍परा साझी है। इस समझौता ज्ञापन में विशेषज्ञों के आदान-प्रदान, परम्‍परागत औ‍षधीय पदार्थों की आपूर्ति, संयुक्‍त अनुसंधान एवं विकास तथा दोनों देशों में स्‍वास्‍थ्‍य और औषधि की परम्‍परागत प्रणालियों की मान्‍यता शामिल हैं। इसका उद्देश्‍य आयुष के तहत आने वाली विभिन्‍न भारतीय परम्‍परागत प्रणालियों को बढ़ावा देना और उन्‍हें लोकप्रिय बनाना भी है। 
यह समझौता दोनों देशों की साझा सांस्‍कृतिक विरासत को देखते हुए बहुत महत्‍वपूर्ण है। आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्‍सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा रिग्‍पा और होम्‍योपैथी (आयुष) ने औषधि की भारतीय प्रणालियों का वैश्विक रूप से प्रचार करने के उद्देश्‍य से चीन, मलेशिया, त्रिनिडाड टोबेगो, हंगरी, बांग्‍लादेश और म्‍यांमार के साथ समझौता ज्ञापन किए हैं। अनुसंधान, प्रशिक्षण पाठयक्रम, बैठकें और विशेषज्ञों की प्रति नियुक्तियों के लिए आवश्‍यक वित्‍तीय संसाधनों का व्‍यय आयुष के लिए वर्तमान में आवंटित बजट और वर्तमान योजनाओं से पूरा किया जाएगा। 
भारत और मॉरिशस में सांस्‍कृतिक, ऐतिहासिक, भाषायी और साहित्‍य समानताएं हैं और चिकित्‍सकीय पौधों सहित परम्‍परागत औषधियां जैसे आशाजनक साझा क्षेत्र हैं, जिनके और अन्‍वेषण की जरूरत है, ताकि ये क्षेत्र दोनों देशों की जनता के लिए परस्‍पर रूप से लाभकारी सिद्ध हों। 
मॉरिशस सरकार का भी भारत के साथ परम्‍परागत औषधियों में एक लम्‍बा साझा इतिहास है और दोनों देशों की चिकित्‍सा की आयुर्वेदिक प्रणाली के संबंध में साझा संस्‍कृति है। इसके अलावा उष्‍णकटिबंध क्षेत्र में अनेक प्रकार के चिकित्‍सकीय पौधे विशेष रूप से पाए जाते हैं और जो समान भौगोलिक- जलवायु कारकों के कारण दोनों देशों में समान रूप से पाए जाते हैं।

सोमवार, 18 अप्रैल 2016

सामान्य से अधिक होगी मानसून में बारिश

 खास खबर 
आगामी मौसम के दौरान मॉनसून मौसम में वर्षा लम्बी अवधि औसत (एलपीए) की 106 प्रतिशत होने की संभावना है, इसमें पांच प्रतिशत की कमोबेशी मॉडल त्रुटि हो सकती है। पूरे देश में 1951-2000 अवधि के दौरान मौसमी बारिश का एलपीए 89 सेंटीमीटर है। भारत के मौसम विभाग ने 2016 के लिए दक्षिण पश्चिमी मॉनसून मौसम के लिए लम्बी दूरी के पूर्वानुमान जारी किए।
भू-विज्ञान मंत्रालय के अधीन भारतीय उष्ण कटिबंध मौसम विज्ञान पुणे, मॉनसून मिशन परियोजना के तहत भारत में गर्मी के मॉनसून में बारिश के पूर्वानुमान के लिए युग्मित मॉडल के विकास पर भारत और विदेश से विभिन्न जलवायु अनुसंधान केंद्रों के साथ समन्वय और कार्य कर रहा है। पर्यावरण पूर्वानुमान के लिए राष्ट्रीय केंद्र (एनसीईपी) अमेरिका द्वारा मूल रूप से विकसित युग्मित पूर्वानुमान प्रणाली (सीएफएस) के उच्च संकल्पित अनुसंधान संस्करण को फरवरी की प्रारंभिक स्थितियों का उपयोग करते हुए 2016 की दक्षिण पश्चिम मौसम की प्रयोगात्मक पूर्वानुमानों को प्राप्त करने के लिए उपयोग किया गया है।
यह प्रयोगात्मक पूर्वानुमान मॉनसून मिशन के साथ-साथ गत्यामक मॉडल पर आधारित है जिसमें बताया गया है कि 2016 मॉनसून मौसम के दौरान (जून से सितम्बर) पूरे देश में 111 प्रतिशत औसत रहने का अनुमान है। जिसमें लम्बी अवधि मॉडल औसत की पांच प्रतिशत कमोबेशी हो सकती है।
देश का मौसम विभाग दक्षिण पश्चिम मॉनसून मौसम के दौरान बारिश के लिए विभिन्न मासिक और मौसमी परिचालन आंकड़े जारी करता है। पहले चरण का पूर्वानुमान अप्रैल में और दूसरे चरण का पूर्वानुमान जून में जारी किया गया है। पूरे देश में जून से सितम्बर के दौरान मौसमी बारिश के लिए पांच श्रेणी की संभावनाओं के पूर्वानुमान नीचे दिए गए हैं।
मौसम विभाग जून 2016 में दूसरे चरण के पूर्वानुमान में नवीनतम पूर्वानुमान जारी करेगा। अप्रैल पूर्वानुमान के लिए मौसम विभाग निम्नलिखित पांच भविष्यवाणियों का उपयोग करता है।
अप्रैल 2015 में इक्वेटोरियल प्रशांत महासागर के ऊपर अलनीनो की स्थिति स्थापित हुई थी। जो जुलाई में मजबूत होती हुई दिसंबर 2015 में उच्च स्तर पर पहुंच गई, इसके बाद अलनीनो की स्थिति में कमजोरी आई फिर भी प्रशांत महासागर के ऊपर समुद्र तल तापमान सामान्य से अधिक बना हुआ है।
वर्तमान में तटस्थ हिंद महासागर द्विध्रुवीय की स्थितियां हिंद महासागर के ऊपर मौजूद हैं। नवीनतम मॉनसून मिशन युग्मित जलवायु मॉडल से नवीनतम पूर्वानुमान मॉनसून मौसम के मध्य के दौरान सकारात्मक आईओडी स्थितियां स्थापित होने की संभावना है जो बाद में कमजोर हो सकते हैं। मॉडल से संबंधित एक प्लॉट इस प्रकार है।
प्रशांत और हिंद महासागर के ऊपर विशेष रूप से प्रशांत महासागर के ऊपर ईएनएसओ की स्थिति भारत में गर्मी के मॉनसून पर बहुत प्रभाव डालने के लिए जानी जाती है। मौसम विभाग बहुत सावधानी से प्रशांत महासागर और हिंद महासागर के ऊपर समुद्र सतह स्थितियों की निगरानी कर रहा है।

मानव तस्करी रोकने को भारत व संयुक्त अरब अमीरात के बीच समझौता 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच मानव तस्करी को रोकने एवं उसका मुकाबला करने के लिए आपसी सहयोग पर समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने के लिए अपनी मंजूरी दे दी।  
यह एमओयू दोनों देशों के बीच मित्रता के रिश्ते को मजबूत बनायेगा तथा मानव तस्करी, विशेष रूप से महिलाओं एवं बच्चों की तस्करी को रोकने, बहाली, राहत एवं उनके देश-प्रत्यावर्तन के मुद्दे पर आपसी सहयोग को शीघ्रता से बढ़ायेगा।
इस एमओयू की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं :
  • सभी प्रकार की मानव तस्करी, विशेष रूप से महिलाओं एवं बच्चों की तस्करी को रोकने के लिए आपसी सहयोग को मजबूत बनाना तथा त्वरित जांच और दोनों देशों में से किसी में भी मानव तस्करों एवं संगठित अपराध का अभियोजन सुनिश्चित करना।
  • रोक संबंधी कदम उठाना, जो महिलाओं एवं बच्चों की तस्करी को खत्म करेगा एवं मानव तस्करी के पीडि़तों के अधिकारों की सुरक्षा करेगा।
  • मानव तस्करी प्रकोष्ठ एवं कार्य बल दोनों ही देशों में मानव तस्करी को रोकने के लिए कार्य करेंगे।
  • पुलिस एवं अन्य संबंधित अधिकारी एकसाथ मिलकर कार्य करेंगे एवं आपस में सूचनाओं का आदान-प्रदान करेंगे जिसका उपयोग मानव तस्करों पर पाबंदी लगाने के लिए किया जा सकता है।
  • पीडि़तों का देश-प्रत्यावर्तन जहां तक संभव है, शीघ्रतापूर्वक किया जाएगा और गृह देश पीडि़तों का सुरक्षित एवं कारगर पुर्नएकीकरण कार्य शुरु करेगा।
  • समझौता ज्ञापन के कामकाज की निगरानी के लिए दोनों देशों के प्रतिनिधियों के साथ एक संयुक्त कार्य बल का गठन किया जाएगा।

पृष्ठभूमि
मानव तस्करी के एक गंतव्य के रूप में दक्षिण एशियाई देश मुख्य रूप से घरेलू मानव तस्करी, या पड़ोसी देशों से मानव तस्करी से प्रभावित हैं। बहरहाल, दक्षिण-एशियाई प्रभावितों का भी मध्य पूर्व में अब लगातार पता चल रहा है। जहां तक संयुक्त अरब अमीरात के लिए मानव तस्करी का सवाल है, भारत एक स्रोत और पारगमन देश है, जबकि संयुक्त अरब अमीरात मुख्य रूप से दक्षिण, दक्षिण-पूर्व एवं मध्य एशिया तथा पूर्वी यूरोप के पुरूषों एवं महिलाओँ के लिए एक गंतव्य तथा पारगमन देश है, जिन्हें जबरन श्रम एवं यौन तस्करी का सामना करना पड़ता है। प्रवासी मजदूर, जो संयुक्त अरब अमीरात के निजी क्षेत्र श्रमबल के 95 प्रतिशत से अधिक हैं, की नियुक्ति मुख्य रूप से इथोपिया, इरिट्रिया, ईरान एवं पूर्वी दक्षिणी तथा दक्षिण पूर्वी एशिया से की जाती है। इनमें से कुछ श्रमिकों को संयुक्त अरब अमीरात को बेगारी का सामना करना पड़ता है। इनमें से कुछ देशों की महिलाएं स्वेच्छा से घरेलू कामवालियों, सचिवों, ब्यूटिशियन एवं होटलों में सफाई का काम करने के लिए जाती हैं। लेकिन उनमें से कुछ को अवैध तरीके से जबरन श्रम कराने, उनके पासपोर्ट को जब्त करने, आवाजाही पर प्रतिबंध लगाने, मजदूरी न दिए जाने, धमकियों और शारीरिक या यौन शोषण का शिकार बनना पड़ता है।
भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच सभी स्तरों पर मानव तस्करी विरोधी कदमों का सुदृढ़ीकरण पीडितों की सुरक्षा एवं उनके बचाव के लिए आवश्यक है। इसके लिए दोनों देशों के बीच खुफिया जानकारियों के आदान-प्रदान, संयुक्त जांच एवं मानव तस्करी की चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए एक समन्वित प्रयास के लिए आपसी सहयोग की आवश्यकता है। इस उद्देश्य के लिए संयुक्त अरब अमीरात के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने का प्रस्ताव रखा गया है। हमने बांग्लादेश के साथ मानव तस्करी को रोकने के लिए पहले ही एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर रखा है तथा बहरीन के साथ एक एमओयू पर इस महीने के दौरान हस्ताक्षर किया जाना है।

आधार कार्ड बनवाने को अवैध एजेंसियों से अपनी जानकारी साझा न करें

 खास खबर 
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने आम लोगों को ऐसी अवैध कंपनियों के झांसे में आने के खिलाफ आगाह किया है जो स्मार्ट कार्ड के नाम पर प्लास्टिक पर आधार कार्ड छापने के लिए 50 रुपये से 200 रुपये तक वसूल रहे हैं, जबकि आधार पत्र या इसका काटा गया हिस्सा या किसी सामान्य कागज पर आधार का डाउनलोड किया गया संस्करण पूरी तरह वैध है। 
कुछ कंपनियों ने आधार के डाउनलोड संस्करण के सामान्य लैमीनेशन के लिए भी सामान्य से अधिक वसूलना शुरु कर दिया है।
यूआईडीएआई के महानिदेशक एवं मिशन निदेशक डॉ. अजय भूषण पांडेय ने कहा ‘आधार पत्र या किसी सामान्य कागज पर आधार का डाउनलोड किया गया संस्करण सभी उपयोगकर्ताओं के लिए पूरी तरह वैध है। अगर किसी व्यक्ति के पास एक कागजी आधार कार्ड है तो उसे अपने आधार कार्ड को लैमीनेट कराने या पैसे देकर तथाकथित स्मार्ट कार्ड प्राप्त करने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट आधार कार्ड जैसी कोई चीज नहीं है।
अगर कोई व्यक्ति अपना आधार कार्ड खो देता है तो वह अपने आधार कार्ड को निःशुल्क https://eaadhaar-uidai-gov-in से डाउनलोड कर सकते है। डाउन किये गये आधार का प्रिंट आउट भले ही वह श्वेत या श्याम रूप में क्यों न हों, उतना ही वैध है, जितना यूआईडीएआई द्वारा भेजा गया मौलिक आधार पत्र। इसे प्लास्टिक कार्ड पर प्रिंट करने या इसे लेमिनेट करने की कोई आवश्यकता नहीं है। 
अगर कोई व्यक्ति फिर भी चाहता है कि उसका आधार कार्ड लैमीनेट किया जाए या प्लास्टिक कार्ड पर प्रिंट किया जाए, तो वह इसे केवल अधिकृत समान सेवा केन्द्रों पर या अनुशंसित दर पर जो 30 रुपए से अधिक न हो, कीमत अदा करने के द्वारा आधार स्थायी नामांकन केन्द्रों पर ऐसा कर सकते हैं। 
आम लोगों को सलाह दी जाती है कि अपनी गोपनीयता की सुरक्षा के लिए वे अपने आधार नंबर या व्यक्तिगत विवरणों को अवैध एजेंसियों के साथ इसे लैमीनेट कराने या प्लास्टिक कार्ड पर प्रिंट कराने के लिए साझा न करें। 
ई-बे, फ्लिपकार्ट, अमेजन आदि जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों को इसके द्वारा सूचित किया जाता है कि वे आम लोगों से आधार की जानकारी एकत्रित करने के लिए या ऐसी सूचना प्राप्त करने के लिए आधार कार्ड को प्रिंट करने या आधार कार्ड को अवैध रूप से छापने या किसी भी प्रकार ऐसे व्यक्तियों को सहायता करने के लिए अपने व्यापारियों को अनुमति न दें। ऐसा करना भारतीय दंड संहिता और आधार (वित्तीय एवं अन्य सब्सिडियों, लाभों एवं सेवाओं की लक्षित आपूर्ति) अधिनियम, 2016 के अध्याय-6 के तहत भी दंडनीय अपराध है।

अब डिब्बाबंद वस्तुओं पर जानकारी को अधिक प्रमुखता से प्रदर्शित करना होगा 

  • संशोधित नियम इस साल जुलाई से लागू होगा 

अब सभी डिब्बाबंद वस्तुओं को छह जरूरी जानकारियों को प्रमुखता के साथ प्रदर्शित करना होगा। ये जानकारी पैकेट के कम से कम 40 फीसदी क्षेत्र (ऊपर और नीचे के हिस्से को छोड़कर) में प्रदर्शित होनी चाहिए ताकि उपभोक्ता उसे आसानी से पढ़ सकें। इस उद्देश्य के लिए उपभोक्ता मामले, खाद्य तथा सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने डिब्बाबंद वस्तुओं के नियमों में बदलाव किया है। मसूरी में कल भारतीय मानक ब्यूरो की बैठक की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य तथा सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री रामविलास पासवान ने अपने मंत्रालय के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह जुलाई से इन संशोधित नियमों को लागू कराया जाना सुनिश्चित करें। 
संशोधन के मुताबिक, पैकेट के 40 फीसदी हिस्से पर पढ़ने लायक फॉन्ट साइज में निर्माता का नाम, पैकेजर, आयातक, उत्पाद की शुद्ध मात्रा, उत्पाद के निर्माण की तिथि, खुदरा बिक्री मूल्य और उपभोक्ता देखभाल संपर्कों को प्रदर्शित करना होगा। नए नियमों का सख्ती के साथ पालन हो, इसके लिए निगरानी विभाग भी बनाया जाएगा। 
श्री पासवान ने कहा कि उनका मंत्रालय उपभोक्ताओं की शिकायतों के निपटारे के लिए त्वरित प्रतिक्रिया पद्धति स्थापित कर रहा है। साथ ही मौजूदा राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन को भी इसके लिए तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा अब एक वरिष्ठ अधिकारी दैनिक आधार पर शिकायतों के निपटान की निगरानी करेगा। श्री पासवान ने उम्मीद जताई कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, जिसमें उपोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए कई प्रावधानों को शामिल किया गया है, बजट सत्र के दूसरे हिस्से में संसद द्वारा पास कर दिया जाएगा। 
बैठक में बीआईएस के कामकाज की समीक्षा के दौरान मंत्री ने ब्यूरो से नए बीआईएस अधिनियम को जल्दी लागू कराए जाने को सुनिश्चित करने के लिए नियम बनाने को कहा, ताकि देश में अच्छी गुणवत्ता वाली वस्तुओं व सेवाओं की प्रवृति को बढ़ावा मिले। इसके बाद उन्होंने यह भी कहा कि बीआईएस ने स्टैंडर्ड फॉर्मुलेशन के लिए लिए ‘मेक इन इंडिया’ के तहत कई पहल की हैं। इनमें अक्षय ऊर्जा, जैव ईंधन, ऑटो कंपोनेंट, इलेक्ट्रिक मशीनरी और कंस्ट्रक्शन आदि से संबंधित साजोसामान शामिल हैं। इसके अलावा बीआईएस प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन, पानी और अपशिष्ट जल आपूर्ति प्रबंधन के नए मानक बनाकर स्वच्छ भारत अभियान में भी योगदान दे रहा है।

शनिवार, 16 अप्रैल 2016

जरा बताना तो अम्मा

सुधी पाठकों, काफी समय से मेरी इच्छा मां पर एक कविता लिखने की हो रही थी। आज हिन्दी साहित्य में मां और नारी जैसे शब्द पर काफी कुछ लिखे गये हैं। परन्तु, बदले सामाजिक परिवेश में इन शब्दों के मायने भी बदले हैं, लेकिन हमारा हिन्दी साहित्य आज भी वहीं है। अगर नहीं, तो पांच बच्चों की मां अपने बच्चों को छोड़कर कैसे अपने प्रेमी संग भाग जाती है ? कैसे एक मां अपनी बेटी को जिस्म के सौदागर के हाथों बेच देती है ? कैसे कोई मां अपनी बहू या बेटी को सताती-मारती है ? आप भी मानेंगे, अखबारों में इस तरह की खबरें काफी छपती रही हैं। ऐसे में क्या इन शब्दों को नये सिरे से परिभाषित करने की जरूरत नहीं ? साहित्य तो समाज का आईना होता है। तो पेश है मेरी यह नई कविता : राजीव मणि
 कविता 
जब दरवाजे बहू तुम्हारी
डोली चढ़कर आयी थी
मेरे लाख समझाने पर भी
तुम खुश हो आंसू बहायी थी
लोगों से कहती फिरती थी
बहू हमारी लक्ष्मी है
दो ही साल में क्या हुआ जो
तुम कहती कुलक्षणी है
सुबह-शाम दो रोटी खाकर
घर-आंगन में जुतती है
फिर भी बोलो क्यों अम्मा
तुम्हारे हाथों वह कुटती है

क्या हुआ जिस बेटी को तुम
मेंहदी खूब रचायी थी 
अपने ही दामाद को तुम
खुद सीने से लगायी थी
चंद दिनों में क्या हुआ जो 
बेटी को बहला लिया
अपने ही दरवाजे से देखो
दामाद को टहला दिया
रिश्ते नाते छूट रहे क्यों
वीरान संसार बसाया है
हंसता खेलता घर को तुमने
मरघट सा सजाया है

मेरी दादी देखो कितना 
तुम्हें आंखों में बसायी थी
उसके प्यार को पचा न पायी
तुम कितना घबरायी थी
मरते-मरते कुछ न कहा 
आशीर्वाद तुम्हें दे गयी
एक तरफ तुम थी जो 
उसके ‘गहने-गुड्डे’ ले गयी

ननद तुम्हारी आयी तो थी
चंद दिनों को मिलने को 
जरा बताना तो अम्मा
क्यों कहा ओठ सिलने को
सीता की धरती पर अम्मा
यह कैसा अवतार है
तुम ही सोचो, फिर बोलो अम्मा
यह जीत है या हार है।

सपना नहीं है दमकती त्वचा पाना

 महिला जगत 
मेकअप भले ही आपको ऊपरी खूबसूरती दे, लेकिन जबतक आपकी त्वचा भीतर से स्वस्थ नहीं होगी, आप सच्ची सुन्दरता प्राप्त नहीं कर सकतीं। इसके लिए जरूरी है कि आप त्वचा की सही प्रकार से देखभाल करें और उसे जरूरी पोषण प्रदान करें। आइए जानें कुछ ऐसे ही उपाय मेकअप एक्सपर्ट शालिनी योगेन्द्र गुप्ता से, जो आपको देगी एक बेदाग, निखरी और दमकती त्वचा।
खूबसूरत त्वचा पाना बेशक आपका सपना हो, लेकिन जबतक आप अपने इस सपने को पूरा करने के लिए जरूरी श्रम नहीं करेंगी, तबतक यह महज एक सपना ही बना रहेगा।
स्किन केयर के लिए करें CTM (क्लींजिंग, टोनिंग, मायेस्चरैजिंग) 
क्लींजिंग : क्लींजिंग  एक अच्छा तरीका है स्किन को क्लीन करने का। स्टीम लेने पर त्वचा के रोमछिद्र खुल जाते है और अंदर से सफाई हो जाती है। इसके लिए होममेड क्लींजर बेस्ट आप्शन है। आप कच्चा दूध लें और उसमें थोड़ा-सा नमक और चाहें तो हल्दी भी मिला लें और काटन बाल से क्लींज करें। साथ ही, रोज वाटर भी एक अच्छा आप्शन है। काटन बाल को गुलाब जल में भिगोकर स्किन साफ करें।
टोनिंग : क्लींजिंग के बाद टोनिंग जरूर करें। टोनिंग से त्वचा के खुले रोमछिद्र बंद हो जाते हैं और स्किन टाइट हो जाती है। मिनरल वाटर भी एक अच्छा स्किन टोनर है।
मायेस्चरैजिंग : टोनिंग के बाद मायेस्चरैजिंग भी बहुत जरूरी है। मायेस्चरैजिंग से स्किन की नमी बरकरार रहती है और वह ड्राई नहीं होती। अगर स्किन आॅयली है, तब भी मायेस्चरैजिंग जरूर करें, आॅयली स्किन के लिए आॅयल फ्री मायेस्चराइजर का प्रयोग करें।
बी गार्जियस : जब भी कभी धूप में निकलें, सनस्क्रीन लगाना न भूलें, ताकि धूप की तेज किरणें स्किन को डैमेज न कर सके। दही में ककड़ी का गूदा मिलाकर चहरे पर लगाएं, इससे स्किन स्मूथ बनेगी।
स्किन ऑयल कंट्रोल : तैलीय त्वचा वालों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। तैलीय त्वचा का चिपचिपापन चेहरे की सारी खूबसूरती बिगाड़ देता है। साथ ही, यह मेकअप आदि में भी समस्या पैदा करता है। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए अपने साथ एक हर्बल फेश वॉश रखें तथा दिन में दो-तीन बार चेहरे को इस फेसवॉश से धोएं।
साथ ही, अपने साथ टिश्यू पेपर या एक छोटा साफ तौलिया रखें, जिससे आवश्यकता पड़ने पर इस्तेमाल किया जा सके। अक्सर कुछ घंटों के बाद त्वचा में ऑयल बढ़ने लगता है। इसलिए यह तौलिया आपके लिए काफी मददगार साबित हो सकता है। ऑयल की वजह से त्वचा की ऊपरी परत पर धूल-मिट्टी जमने लगती है। ऐसे में टिश्यू पेपर को त्वचा के सबसे तैलीय नजर आने वाले स्थान पर लगा कर हलके से थपथपाएं, ताकि अतिरिक्त तेल निकल जाए। त्वचा के तैलीय होने पर शहद में बेसन मिलाकर हल्के हाथों से चेहरे पर मलें और बाद में धो लें। बेसन अतिरिक्त तेल को खत्म करेगा और शहद त्वचा के ढीलेपन को खत्म करके कसाव व चमक लाएगा।
मृत त्वचा को हटाती है भाप : त्वचा को साफ-सुथरा रखने का यह सबसे अच्छा तरीका है। भाप चेहरे की मृत त्वचा को निकालने में मदद करती है। साथ ही, त्वचा के बंद रोमछिद्रों को खोलकर उसे सांस लेने में मदद करती है। चेहरे पर जितनी गंदगी और धूल-मिट्टी जमा होती है, वह पोरों के जरिए बाहर निकल जाती है। साथ ही, जब त्वचा के भीतर की तैलीय ग्रंथियां गंदगी से भर जाती हैं, तब मुंहासे होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में भाप लेना काफी लाभदायक होता है। साथ ही, चेहरे पर भाप लेने से त्वचा को तरावट मिलती है। ये चेहरे का रूखापन दूर कर देती है। यह प्रक्रिया मुंहासे के साथ-साथ झुर्रियों को भी कम करती है।
त्वचा की नमी को रखें बरकरार : शुष्क त्वचा होने पर बादाम के तेल में नींबू के रस की दो या तीन बूंद डालें और चंदन का पाउडर मिलाएं। अब इसे चेहरे पर लगाएं। पांच-सात मिनट बाद हल्के हाथों से रगड़ते हुए उतार लें और हल्के गरम पानी से चेहरा धो लें। बादाम का तेल ना हो तो मलायुक्त दूध भी काम में ले सकती हैं। इससे त्वचा की कोमलता बनी रहेगी और सांवलापन भी कम होगा।
फैस पैक भी लगा सकती हैं : सबसे अच्छा पैक लाल चंदन के पाउडर का माना जाता है। इसमें ताजा मलाई कुछ मात्रा में मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को नीचे से ऊपर की ओर गोलाई में हाथ चलाते हुए गर्दन और पूरे चेहरे पर लगाएं। पंद्रह-बीस मिनट बाद हल्के गरम पानी से धो लें। इससे त्वचा का रूखापन दूर हो जाएगा।
त्वचा पर लगाएं घरेलू व प्राकृतिक चीजें : एक केले को मसल लें, थोड़ा दूध मिलाकर पेस्ट जैसा बना लें। इस पेस्ट को चेहरे पर 20 मिनट तक लगा रहने दें। फिर ठंडे पानी से चेहरा धो लें। इसके अलावा एक अंडे की सफेदी को एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर चेहरे पर 20 मिनट लगाएं। उसके बाद पानी से चेहरा धो लें। एक चम्मच अखरोट का पाउडर, एक चम्मच शहद व एक चम्मच नींबू के रस को मिला कर चेहरे पर लगाएं। 15 मिनट बाद ठंडे पानी से चेहरा धो लें। चेहरे पर 1 टुकड़ा पका पपीता मलें। कुछ देर बाद धो लें। त्वचा की मृत कोशिकाएं हट जाएंगी और साफ सुथरी चमकदार त्वचा मिलेगी।
इन सब बातों पर ध्यान रखकर आप कुछ ही दिनों में अपनी खूबसूरती में निखार आसानी से ला सकती हैं और रोजाना तरोताजा व जवां और निखरी दिख सकती हैं।

शुक्रवार, 8 अप्रैल 2016

'सुशासन' में बिहार में पूर्ण शराबबंदी

आम चुनाव में नीतीश का भाजपा विरोध स्टैंड लेना और उसके बाद नरेंद्र मोदी के भारी बहुमत से सत्ता में आ जाने के बाद ऐसा लगा था कि नीतीश कुमार की राजनीति चूक गयी है. लेकिन, नीतीश कुमार ने चुनाव जीतकर और जीतने के बाद अपनी सधी हुई नीतियों से बार-बार फिर साबित किया है कि उन्हें बिहार की राजनीति का चाणक्य यूँही नहीं कहा जाता है. जिस तरह से राज्य में शराब पर पूरी तरह पाबंदी लगाने का ऐलान किया गया है, उसने एक तीर से कई शिकार किये हैं! बिहार में शराब की खपत दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही थी और इस पिछड़े राज्य में सामाजिक ताने-बाने के लिए यह एक गंभीर चुनौती सी बन गयी थी. एक आंकड़े के अनुसार पिछले दस साल में शराब की खपत लगभग दस गुनी हो गयी थी. अब बिहार में एक अप्रैल 2016 से पूर्ण शराब बन्दी का कानून लागू हो जाए तो वहां के युवाओं के भविष्य पर इसका सकारात्मक असर पड़ना भी तय है. हालाँकि, अब तक राजस्व का बहाना बनाकर इसको जायज़ ठहराया जा रहा था, किन्तु सीएम नीतीश कुमार ने साफ़ कहा कि सरकार एजेंडा तैयार कर रही है, जिस पर अमल करते हुए राज्य को शराब से मुक्त किया जाएगा. सीएम ने ज़ोर देकर कहा कि ‘राजस्व प्राप्ति के बहाने नई पीढ़ी को बर्बाद होने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता. जाहिर है, इस फैसले को नीतीश कुमार के बढ़ते हुए आत्मविश्वास से जोड़कर देखा जायेगा.
इस साहसिक फैसले के तमाम पहलु एक-एक करके सामने आएंगे, किन्तु यह बात साफ़ है कि राज्य की जनता में नीतीश ने अपनी छवि और मजबूत कर ली है. इससे यह भी जाहिर होता है कि बिहार चुनाव में लालू प्रसाद यादव से गठबंधन के कारण नीतीश कुमार की जितनी भी आलोचना की गयी, उससे पार पाने की कोशिश में सुशासन बाबू सधी हुई कोशिश कर रहे हैं. अपने शराबबंदी के फैसले सी पहले और शपथ लेने के तुरंत बाद नीतीश कुमार ने उच्च अधिकारियों की बैठक में कानून का राज स्थापित करने को लेकर सख्त निर्देश जारी किये थे, जिसकी तारीफ़ कई हलकों में की गयी. उन्होंने वरिष्ठ प्रशासनिक तथा पुलिस अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि ‘कानून के शासन के संबंध में कोई समझौता नहीं किया जाएगा.’ कुछ ही दिन पहले, नीतीश कुमार ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये पुलिस महानिरीक्षकों, उपमहानिरीक्षकों, पुलिस अधीक्षकों और जिलाधिकारियों से बात की और उन्हें कानून का शासन कायम रखने का निर्देश दिया. मुख्यमंत्री की इस बैठक का मुख्य मकसद यही था कि ‘हर हाल में अपराध पर काबू पाना है.’ कुमार ने कहा, ‘जो कोई कानून तोड़ता है, वह अपराधी है और उसके साथ कानून के अनुसार बर्ताव करना चाहिए, भले ही उसका कद कुछ भी हो.’ इस बैठक में जो और बातें सामने निकल कर आईं, वह सांप्रदायिक हिंसा पर डीएम और एसपी की जवाबदेही से सम्बंधित थी. बिहार के पांचवी बार मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार ने आगाह किया कि सांप्रदायिक तनाव को शांत करने के लिए प्रतिक्रिया त्वरित होनी चाहिए तो दोषसिद्धि पर भी जोर होना चाहिए.
मुख्यमंत्री ने अपराध के मामलों की त्वरित जांच के लिए वैज्ञानिक रुख की जरूरत पर भी जोर दिया तो उन्होंने हर हफ्ते सर्किल अधिकारियों और थाना प्रभारियों द्वारा कैंप लगाने के चलन को जारी रखने पर भी जोर दिया, ताकि भूमि विवाद से जुड़े मामलों का हल किया जा सके. उनकी इस समस्त कवायद को देखते हुए इस बात को बल मिलता है कि आने वाले समय में कानून का राज स्थापित करने के लिए नीतीश कुमार अपना सब कुछ झोंक देंगे. हालाँकि, कुछेक घटनाएं बिहार से ऐसी आयी हैं, जो चिंता करने को मजबूर करती हैं. इस सिलसिले में ऐसी बात निकलकर आयी है कि पचरुखी रेलवे स्टेशन पर टहलने के समय अपहृत हरिशंकर सिहं उर्फ बड़े सिंह के निराश परिजन शीघ्र ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलेंगे. यह बेशक एक घटना हो, लेकिन बिहार के बड़े अपहरण उद्योग की ओर इशारा करती है, जिससे सावधान रहने की जरूरत है. इसके अलावा, गोपालपुर से जदयू विधायक नरेंद्र कुमार नीरज उर्फ गोपाल मंडल के समर्थकों ने जिला मुख्यालय में तैनात डीएसपी रामकृष्ण गुप्ता को विक्रमशिला सेतु से गंगा नदी में फेंकने की कोशिश की है, जो सत्तापक्ष के समर्थकों की मानसिकता प्रदर्शित करता है. हालाँकि, पुलिस ने दो हमलावरों को मौके से दबोच लिया है, और डीएसपी के अंगरक्षक मृत्युंजय कुमार के बयान पर दो नामजद सहित पांच लोगों के खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया है, लेकिन यह समझना कठिन नहीं है कि ‘जंगलराज’ का आरोप बिहार से क्यों जोड़ा जाता है.
इस सिलसिले में, पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के आरोपों से बिहार प्रशासन को चौकन्ना होने की जरूरत है कि एक ओर तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों को निर्भीक होकर बिना किसी हस्तक्षेप के काम करने की नसीहत देते हैं, दूसरी ओर सत्ताधारी विधायकों और उनके समर्थकों द्वारा कानून की धज्जियां उड़ाते हुए थानेदार को जान से मारने की धमकी दी जा रही है. इसके अलावा भी कुछ छिटपुट घटनाएं हुई हैं, लेकिन नीतीश कुमार की सजगता और खुद राजद प्रमुख लालू यादव की सक्रियता से उम्मीद की एक किरण जरूर दिखती है. लालू प्रसाद अपने विधायकों को लगातार सचेत कर रहे हैं तो उप मुख्यमंत्री तेजस्वी ने पत्रकारों से कहा कि महागठबंधन की सरकार काम करने के लिए बनी है, भोग लगाने के लिए नहीं और जनता ने इतना बड़ा समर्थन दिया है, तो हम उसकी अपेक्षाओं पर खरा उतरेंगे. तेजस्वी यह कहना नहीं भूले कि उनके कार्यों पर नीतीश कुमार को गौरव होगा और आम लोगों का भरोसा किसी हाल में नहीं टूटेगा! देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में बिहार के गौरव को दो ज़मीनी नेता किस प्रकार से अंजाम तक पहुंचाते हैं. अब तक जो संकेत मिले हैं, उससे राजद और जदयू के बीच न केवल बेहतर तालमेल दिख रहा है, बल्कि कई मुद्दों पर आपसी समझ भी बेहतर नज़र आ रही है. बिहार की जनता को स्थायी सरकार और सुशासन मिले तो उसका साहसिक फैसला पूरे देश को राह दिखा सकता है, इस बात में कोई दो राय नहीं है. लालू प्रसाद की पार्टी भी इस बात को बखूबी समझ रही है कि अगर नीतीश को उनके छवि जरा भी धुँधली होती दिखी तो आने वाले समय में भाजपा के साथ उनका पुनः तालमेल हो सकता है, इसलिए वह इन बातों का रिस्क नहीं लेना चाहेंगे! खैर, यह आगे की राजनीति है और अभी तक के कदमों के लिए सुशासन बाबू की तारीफ़ करनी ही होगी, शराबबंदी के फैसले के लिए और कानून व्यवस्था पर सजग दृष्टि रखने के लिए भी.
– मिथिलेश कुमार सिंह
www.mithilesh2020.com

गुरुवार, 7 अप्रैल 2016

रेलमंत्री ने सेमी हाई स्पीड ट्रेन ‘गतिमान एक्सप्रेस’ को झंडी दिखाकर रवाना किया

  • आगरा कैंट स्‍टेशन पर बेहतर यात्री सुविधाएं और एक्‍जीक्‍यूटिव लॉंज के साथ हजरत निजामुद्दीन स्‍टेशन पर मेन कॉन कोर्स चालू 
  • शुक्रवार को छोड़कर सभी दिन चलेगी गतिमान एक्‍सप्रेस 
  • ट्रेन होस्‍टेज यात्रा में आतिथ्‍य सेवा देंगी 
  • आकर्षक गाइडेड टूर पैकेज 

रेलमंत्री श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने अपने बजटीय प्रस्‍ताव को ध्‍यान में रखते हुए हजरत निजामुद्दीन स्‍टेशन पर एक समारोह में अधिकतम 160 किलो मीटर की रफ्तार से चलने वाली भारत की पहली उच्‍च गति की ट्रेन गतिमान एक्‍सप्रेस को झंडी दिखाकर रवाना किया। गतिमान एक्‍सप्रेस की सेवा शुरू होने से भारत में रेल यात्रा की इतिहास में नया अध्‍याय जुड़ा है। रेल मंत्री ने अपने बजट भाषण में सवारी तथा माल गाडि़यों की रफ्तार बढ़ाने पर बल दिया था। समारोह में दिल्‍ली के मेयर सुभाष आर्य, लोकसभा सदस्‍य श्री महेश गिरी सम्‍मानित अतिथि थे। इस अवसर पर रेल बोर्ड के अध्‍यक्ष श्री ए.के. मित्‍तल, रेल बोर्ड के सदस्‍य, उत्‍तर रेलवे के महाप्रबंधक श्री ए.के.पुठिया और उत्‍तर रेलवे के डिविजनल रेलवे प्रबंधक श्री अरुण अरोड़ा उपस्थित थे। हजरत निजामुद्दीन स्‍टेशन से रवाना हुई गतिमान एक्‍सप्रेस आज ही आगरा कैंट से दिल्‍ली लौटेगी। कल यानी 6-4-2016 से गतिमान एक्‍सप्रेस की नियमित सेवा हजरत निजामुद्दीन स्‍टेशन से शुरू होगी। 
इस अवसर पर श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने कहा कि सेमी हाई स्‍पीड गतिमान एक्‍सप्रेस चलाना भारतीय रेल की बहुत बड़ी उपलब्धि है और इससे प्रधानमंत्री का सपना पूरा हुआ है। उन्‍होंने कहा कि विभिन्‍न सेक्‍टरों पर और गतिमान एक्‍सप्रेस गाडियां चलाई जाएंगी। इससे भारत में पर्यटन को अधिक बढ़ावा मिलेगा। उन्‍होंने कहा कि सभी सवारी गाडि़यों और माल गाडि़यों की औसत गति बढ़ाना उद्देश्य है और भारतीय रेल ने मिशन ‘रफ्तार’ पर काम करना शुरू कर दिया है। यह पांच वर्ष में पूरा कर लिया जाएगा। 
550 अश्‍वशक्ति के इलेक्‍ट्रीक इं‍जन से चलने वाली इस ट्रेन में दो एक्‍जक्‍यूटिव चेयर कार तथा 8 एसी चेयरकार कोच होंगे। गतिमान एक्‍सप्रेस के कोच एलएचबी कोच हैं और इसमें आरसीएफ कपूरथला ने उन्‍नत यात्री सुविधाएं दी हैं। इसमें जैव शौचालय हैं और यह रेल गाड़ी प्रति घंटा 160 किलो मीटर की रफ्तार से चल सकती है। पूर्णत: वातानुकूलित गतिमान एक्‍सप्रेस में चेयरकार का किराया 750 रुपये और एक्‍जीक्‍यूटिव क्‍लास का किराया 1500 रुपये है। 
गतिमान एक्‍सप्रेस में खान-पान सुविधा भारतीय रेल कैटरिंग तथा टूरिज्‍म कारपोरेशन (आर्इआरसीटीसी) द्वारा दी गई हैं। आईआरसीटीसी ने ट्रेन होस्‍टेसेस की भी व्‍यवस्‍था की है। इसमें तरह-तरह के भोजन मिलेंगे और इसमें मनोरंजन की सुविधाएं भी हैं। यात्री अपने स्‍मार्ट फोन, टेबलेट तथा लेपटॉप पर बिना वाईफाई इंटरनेक्‍ट कनेक्‍शन के मनोरंजक वीडियो देख सकते हैं। गतिमान एक्‍सप्रेस की समय सारणी के अनुसार आईआरसीटीसी ने आगरा के लिए दो टूर पैकेज का भी प्रबंध किया है पहला पैकेज पूरे दिन के लिए जबकि दूसरा पैकेज दो दिनों के लिए है। पैकेज की विस्‍तृत जानकारी www.irctc.co.in. पर प्राप्‍त की जा सकती है। 
इस अवसर पर रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु ने हजरत निजामुद्दीन स्‍टेशन से रिमोट के जरिये आगरा कैंट स्‍टेशन पर आईआरसीटीसी द्वारा बनाए गए नये एक्‍जीक्‍यूटिव लॉज का उद्घाटन भी किया। यह लॉज की क्षमता 70 से 80 यात्रियों की है और यह आगरा कैंट स्‍टेशन पर प्‍लेटफॉर्म नम्‍बर 1 पर है। इसे एयरपोर्ट लॉज की तर्ज पर तैयार किया गया है। इसमें यात्रियों के लिए दो घंटों के लिए 100 रुपये का शुल्‍क होगा और अतिरिक्‍त घंटे के लिए प्रति घंटा 50 रुपये शुल्‍क होगा। इसमें वाईफाई, शौचालय, पत्र-पत्रिका सुविधा तथा चाय कॉफी व शीतल पेय उपलब्‍ध होंगे। आईआरसीटीसी की योजना इसी तरह के लॉज जयपुर, विशाखापत्‍तनम, विजयवाड़ा, हावड़ा, वाराणसी, लखनऊ , कानपुर तथा जम्‍मू में बनाने की है।

‘आधार’ ने छुआ 1 अरब का आंकड़ा

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने 4 अप्रैल, 2016 को 100वां करोड़ आधार जारी कर एक मील का पत्थर स्थापित किया है। पहला आधार साढ़े पांच वर्ष पहले 2010 में में जारी किया गया था।  सरकार द्वारा कुछ दिन पहले ही ऐतिहासिक कानून, आधार अधिनियम 2016 (वित्तीय और अन्य सब्सिडी, लाभ, और सेवाओं के लक्षित वितरण) को अधिसूचित करने के बाद यह उपलब्धि हासिल हुई है।
वर्तमान में आधार 18 वर्ष से अधिक की 93 फीसदी जनसंख्या को कवर चुका है। (2015 की अनुमानित जनसंख्या आंकड़े)
वर्तमान तिथि तक, 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आधार की संख्या 90 फीसदी पूर्ण हो चुकी हैं,  जबकि 13 अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह संख्या 75-90 फीसदी के बीच है।
आधार की उपलब्धियां
  • 100 करोड़ से ज्यादा लोगों के पास आधार है।
  • भारत में 73.96 करोड़ (93 फीसदी) वयस्कों के पास आधार है।
  • 5-18 वर्ष के 22.25 करोड़ (67 फीसदी) बच्चों के पास आधार है।
  • 5 वर्ष से कम आयु के 2.30 करोड़ (20 फीसदी) बच्चों के पास आधार है।
  • प्रत्येक दिन 5-7 लाख लोग आधार के लिए पंजीकरण करवा रहे हैं।
  • वर्तमान में आधार विश्व का सबसे बड़ा ऑनलाइन डिजिटल पहचान प्लेटफार्म बन गया है।

आधार के लाभ
  • डीबीटीएल (पहल) - 14,672 करोड़ रुपये की अनुमानित बचत।
  • पीडीएस - 4 राज्यों, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पुडुचेरी और दिल्ली में 2,346 करोड़ रुपये की अनुमानित बचत।
  • छात्रवृत्ति - तीन राज्यों, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और पंजाब में 276 करोड़ रुपये की अनुमानित बचत।
  • पेंशन (एनएसएपी) - 3 राज्यों, झारखंड, चंडीगढ़ और पुडुचेरी में 66 करोड़ रुपये की अनुमानित बचत।

आधार के उपयोग
  • 25.48 करोड़ बैंक खाते यूनिक आधार से जुड़ चुके हैं।
  • 12.28 करोड़ से अधिक (71%) एलपीजी कनेक्शन आधार से जुड़ चुके हैं।
  • 11.39 करोड़ (45%) राशन कार्ड आधार से जुड़ चुके हैं।
  • 5.90 करोड़ (60%) नरेगा कार्ड आधार से जुड़ चुके हैं।

आधार प्रमाणीकरण
  • यूआईडीएआई द्वारा 150.6 करोड़ से अधिक प्रमाणीकरण लेनदेन किया जा चुका है।
  • यूआईडीएआई द्वारा 8.4 करोड़ से अधिक ई-केवाईसी लेनदेन हो चुका है।
  • यूआईडीएआई प्रति दिन 40 लाख से अधिक लेन-देन को प्रमाणित करता है।

यूआईडीएआई के पास वर्तमान में प्रत्येक दिन 15 लाख से ज्यादा आधार कार्ड जारी करने और प्रेषित करने की क्षमता है। 37,304 नामांकन केंद्र देश भर में फैले हुए हैं और इसमें 3,76,543 प्रमाणित ऑपरेटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
पिछले 2 वर्षों के दौरान आधार के आवेदन पत्रों में तेजी से वृद्धि देखी गई है। 31 मार्च, 2016 तक आधार कार्ड प्रमाणीकरण के उपयोग से लेनदेन की संख्या 150.6 करोड़ तक पहुंच चुकी है, जो 31 मई, 2014 तक 8.82 करोड़ थी। ई-केवाईसी लेन-देन की संख्या  31 मई, 2014 तक 2.7 लाख थी, जो 31 मार्च, 2016 तक बढ़कर 8.4 करोड़ हो गई।
आधार पेमेंट ब्रिज (एपीबी) को विकसित किया गया है जो लाभार्थी को आधार संख्या के द्वारा उसकी बैंक विवरण को हासिल किए बिना उसके लाभ/अन्य भुगतानों को सीधे लाभार्थी के खाते तक पहुंचाता है। आधार पेमेंट ब्रिज (एपीबी) में वर्तमान में 23 करोड़ लोग अपने बैंक खातों को आधार से जोड़ चुके हैं।
भारत सरकार ने विभिन्न योजनाओं और पहलों को आधार से जोड़कर यूआईडीएआई को नई गति दी है, जिनमें प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई), मनरेगा, पेंशन, छात्रवृत्ति, डीबीटीएल, यूएएन (ईपीएफओ), पीडीएस, पासपोर्ट, सरकारी कार्यालयों में उपस्थिति प्रणाली शामिल हैं।

एक राष्ट्र, एक ग्रिड, एक मूल्य : पीयूष गोयल

बिजली, कोयला एवं नवीन तथा नवीकरणीय राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री पीयूष गोयल ने कहा है कि सरकार का मिशन एक राष्‍ट्र, एक ग्रिड, एक मूल्‍य अर्जित करना है। एक ऊर्जा सम्‍मेलन को संबोधित करते हुए श्री पीयूष गोयल ने कहा, ‘ यह एक ऐतिहासिक क्षण है। मुझे आपको यह बताने में प्रसन्‍नता हो रही है कि इस समय पूरे भारत में बिजली की एक ही दर 4.40 रुपये है।‘
श्री गोयल ने कहा कि वह देश भर में बिजली की समान दर का लक्ष्‍य अर्जित करने का प्रयास कर रहे थे। हर जगह लोगों को यह खोजने की कोशिश करनी चाहिए कि बिजली ‘विद्युत प्रवाह’ मोबाइल ऐप्‍लीकेशन के जरिये उपलब्‍ध है या नहीं। श्री गोयल ने कहा कि यह मोबाइल ऐप्‍लीकेशन उन दरों की जानकारी भी देता है जिस पर बिजली ग्रिड में उपलब्‍ध है। 
श्री पीयूष गोयल ने जोर देकर कहा कि सभी लोगों के लिए बिजली सुलभ करना सरकार के लिए केवल एक लक्ष्‍य ही नहीं, बल्कि एक अभियान और प्रतिबद्धता भी थी। उन्‍होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार का विश्‍वास है कि उसे अगली पीढ़ी के लिए ऊर्जा पर्याप्‍तता हासिल करनी चाहिए और उसे भरोसा है कि आगामी तीन वर्षों के दौरान इसमें रूपांतरकारी बदलाव आएंगे। 
ग्रामीण्‍ विद्युतीकरण कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए मंत्री महोदय ने कहा कि उनका मंत्रालय लगातार और प्रति दिन बिजली प्राप्‍त करने वाले गांवों की संख्‍या की निगरानी कर रहा है। श्री गोयल ने कहा कि बिजली को किफायती एवं गुणवत्‍ता वाली होनी चाहिए। हम वातावरण को लेकर जागरूक हैं और साथ ही इस तथ्‍य को लेकर भी सजग हैं कि भारत विश्‍व अर्थव्‍यवस्‍था में गैर प्रतिस्‍पर्धी न बने। हम इस तथ्‍य को लेकर भी सजग हैं कि गांवों के बच्‍चे जो प्रतिभाशाली हैं, को बिजली के अभाव में अवसरों से वंचित न रहना पड़े। 
पिछले वर्ष की बिजली क्षेत्र की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए मंत्री महोदय ने कहा कि 18,452 बिजलीविहीन गांवों में से 7,108 गांवों में बिजली की सुविधा सुलभ कराना, केवल ईईएसएल के जरिये ही 9 करोड़ से अधिक एलईडी बल्‍बों का वितरण और इस प्रकार 150 प्रतिशत से अधिक बढोतरी का योगदान देना, पवन ऊर्जा क्षमता में 3,200 मेगावाट की अब तक की सर्वाधिक वृद्धि आदि इस वर्ष की कुछ प्रमुख उपलब्धियां रही हैं। 
मंत्री महोदय ने जोर देकर कहा कि सरकार द्वारा शुरू की गई उदय योजना बिजली क्षेत्र के सुधारों एवं नवीनीकरण का आधार बनेगी। उन्‍होंने कहा, "2019 तक, बिजली क्षेत्र सालाना करीब 1.8 लाख करोड़ रुपये की बचत कर लेगा।"
पनबिजली के बारे में चर्चा करते हुए श्री गोयल ने कहा कि वित्‍त वर्ष 2016-17 पनबिजली को समर्पित है। इसे लगभग 30-40 वर्ष पहले प्रोत्‍साहन दिया गया था लेकिन हाल के वर्षों में स्‍थानीय प्रतिरोधों एवं जमीन अधिग्रहण मुद्वों जैसी विशाल चुनौतियों के कारण इसे नजरअंदाज कर दिया गया है।

माइक्रो सोलर डोम सूर्य ज्योति बिना बिजली के ही घरों को जगमग करेगी

केंद्रीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कम लागत वाली पर्यावरण अनुकूल सौर ऊर्जा से प्रकाश देने वाले उपकरण का शुभारंभ किया। यह देश के उन शहरी और ग्रामीण परिवारों के लिए एक वरदान साबित होगा, जहां बिजली की विश्वसनीय पहुंच नहीं है। इस उपकरण को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तत्वावधान में विकसित किया गया है।
इस उपकरण की विशेषताओं को बताते हुए उन्‍होंने कहा कि इस उपकरण के संभावित उपयोगकर्ता 10 मिलियन से भी अधिक परिवार हैं। उन्‍होंने बताया कि प्राथमिक अनुमानों के अनुसर अगर इस प्रौद्योगिकी को केवल 10 मिलियन परिवार ही अपना लेते है तो इससे 1750 मिलियन यूनिट ऊर्जा की बचत हो जायेगी। इसके अलावा लगभग 12.5 मिलियन टन कार्बन डाईऑक्‍साइड का कम उत्‍सर्जन होगा। जिससे ‘स्‍वच्‍छ भारत, हरित भारत’ के मिशन को बढ़ावा मिलेगा। इसकी विनिर्माण प्रक्रिया श्रम प्रधान होने से अर्थव्‍यवस्‍था में रोजगार के बड़ी संख्‍या में अवसर पैदा होंगे।
इस उपकरण के काम करने के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि माइक्रो सोलर डोम एक पारदर्शी अर्धगोलाकार ऊपरी डोम के माध्‍यम से सूर्य के प्रकाश को ग्रहण करके एक अंधेरे कमरे में केन्द्रित करती है। प्रकाश अत्‍यधिक परावर्तित कॉटिंग की एक पतली परत के रास्‍ते से गुजरता है। इसमें एक लोअरडोम होता है। जिसकी तली में एक शटर लगा होता है जिसे दिन के समय प्रकाश की जरूरत न होने के कारण बंद किया जा सकता है। यह लीक प्रूफ होता है और लगभग 16 घंटे प्रतिदिन कार्य कर सकता है। विज्ञान, प्रौद्योगिकी राज्‍य मंत्री 
श्री वाई.एस. चौधरी ने कहा कि इस तकनीक से काफी हद तक जीवाश्‍म ईंधन की बचत होगी क्‍योंकि एक यूनिट ऊर्जा बचने का मतलब तीन यूनिट ऊर्जा का उत्‍पादन करने से है। उन्‍होंने कहा कि ऊष्‍मायन केन्‍द्रों का निर्माण स्‍टार्ट-अप इंडिया, स्‍टैंड-अप कार्यक्रम के तहत किया जा रहा है। जिससे सोलर क्षेत्र में इस व्‍यवहार्य उपकरण का व्‍यावसायिक रूप से निर्माण करने के लिए सौर क्षेत्र में उद्यमशीलता को बढ़ावा मिलेगा। इस उपकरण के चुनिंदा मापदंडों के लिए परीक्षण आईआईटी मुम्‍बई, टीईआरआई विश्‍वविद्यालय और भारतीय इंजीनियरिंग विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्‍थान कोलकाता में पूरे हो चुके है। दिल्‍ली, मुम्‍बई, कोलकाता और बंगलुरु की मलीन बस्तियों में 300 माइक्रो सोलर डोम लगाये जा रहे हैं।

"वन रैंक-वन पेंशन" का कार्यान्वयन

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में होने वाली मंत्रिमण्डल की बैठक में “वन रैंक-वन पेंशन” योजना को पूर्व-प्रभाव से कार्यान्वित करने को मंजूरी दे दी गई। इसका विवरण इस प्रकार हैः
  • प्रदत्त लाभ 01 जुलाई, 2014 से प्रभावी होंगे।
  • वर्ष 2013 में सेवानिवृत्त पेंशन धारियों को मिलने वाली न्यूनतम और अधिकतम पेंशन के औसत के अनुसार समान पद और समान सेवाकाल के आधार पर 01 जुलाई, 2014 के पूर्व के पेंशनधारियों की पेंशन दोबारा तय होगी। जो पेंशनधारी औसत से अधिक पेंशन प्राप्त कर रहे हैं, उनकी सुरक्षा की जाएगी।
  • इसके लाभ युद्ध में शहीद सैनिकों कि विधवाओं और शारीरिक रूप से अक्षम पेंशनधारियों सहित परिवार-पेंशनधारियों को भी मिलेंगे।
  • जो कर्मी सेना नियम, 1954 के नियम, 13 (3)1 (i)(बी), 13(3) 1(iv) या नियम, 16बी या नौसेना या वायुसेना के समान नियमों के तहत अपने निवेदन पर डिस्चार्ज होने का विकल्प चुनते हैं, उन्हें “वन रैंक-वन पेंशन” के लाभ नहीं मिलेंगे। ये भावी प्रभाव से लागू होंगे।
  • बकाया राशि का भुगतान 04 छमाही किस्तों में होगा। बहरहाल परिवार-पेंशनधारियों को बकाया राशि का भुगतान एक किस्त में किया जाएगा, जिनमें विशेष/उदार परिवार-पेंशन तथा शौर्य पुरस्कार विजेता शामिल हैं।
  • भविष्य में हर पांच साल में पेंशन दोबारा तय होगी।
  • 14.12.2015 को पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एल. नरसिम्हा रेड्डी की अध्यक्षता में गठित न्यायिक समिति भारत सरकार द्वारा दिए गए संदर्भों पर अपनी रिपोर्ट छः माह में सौंपेगी।

“वन रैंक-वन पेंशन” के लागू हो जाने पर रक्षा बलों के पेंशनधारियों/परिवार-पेंशनधारियों को बढ़ी हुई पेंशन मिलेगी। न्यायमूर्ति एल नरसिम्हा रेड्डी की गठित न्यायिक समिति से 07.11.2015 को होने वाले “वन रैंक-वन पेंशन” आदेश के क्रियान्वनय से उत्पन्न असंगतियों को दूर करने में मदद मिलेगी।
समय-पूर्व सेवानिवृत्त होने वाले लोगों सहित “वन रैंक-वन पेंशन” के लागू होने से बकाया राशि के भुगतान के संबंध में 10925.11 करोड़ रुपए और वार्षिक वित्तीय बोझ 7488.7 करोड़ रुपए होगा। 31 मार्च, 2016 तक 15.91 लाख पेंशनधारियों को “वन रैंक-वन पेंशन” की पहली किस्त दी गई, जिसकी कुल रकम 2,861 करोड़ रुपए है। सेवाकाल की अवधि जैसी सूचनाओं के अंतराल को समाप्त करने के बाद 1.15 लाख पेंशनधारियों के मामले पर प्राथमिकता के आधार पर प्रक्रिया शुरू करने की सूचना जमा की जा रही है।

01 अप्रैल, 2016 से किरोसीन मुक्त चंडीगढ़

नगर प्रशासन एवं तेल विपणन कंपनियों के प्रयासों से 01 अप्रैल, 2016 से चंडीगढ़ शहर को किरोसीन मुक्त घोषित किया जाएगा। अप्रैल, 2016 महीने के बाद से चंडीगढ़ में सब्सिडी प्राप्त किरोसीन का कोई वितरण नहीं किया जाएगा। 
भारत सरकार का पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय पिछले कुछ महीनों से चंडीगढ़ को एक ‘किरोसीन मुक्त नगर’ बनाने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन की मदद से काम कर रहा है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने किरोसीन तेल का उपयोग करने वाले परिवारों को एलपीजी की सुविधा प्रदान कर दी है। इस पूरी प्रक्रिया में और किरोसीन लाभार्थियों को एलपीजी कनेक्शन प्रदान करने के लिए तेल विपणन कंपनियों एवं चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं :
  • बाधा मुक्त एलपीजी कनेक्शन मुहैया कराने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन के परामर्श के साथ विभिन्न स्थानों पर शिविरों का आयोजन किया गया। 
  • बीपीएल परिवारों के लिए डिपोजिट मुक्त एलपीजी कनेक्शन मुहैया कराया गया तथा एपीएल परिवारों के लिए ब्याज मुक्त ऋण योजना की शुरूआत की गई। 
  • आम लोगों के बीच जागरूकता पैदा करने के लिए इश्तहारों के वितरण तथा रेडियो जिंग्ल्स के रूप में आईईसी अभियान चलाया गया। 
  • अभियान के दौरान बीपीएल परिवारों के लिए 1574 एलपीजी कनेक्शन समेत चंडीगढ़ नगर में कुल 15,249 एलपीजी कनेक्शन मुहैया कराए गए। 

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेंद्र प्रधान ने चंडीगढ़ के लोगों को इस अनूठी उपलब्धि के लिए बधाई दी है तथा सभी लोक प्रतिनिधियों, चंडीगढ़ प्रशासन एवं तेल विपणन कंपनियों के अधिकारियों को इस कार्य को संभव बनाने में उनके अनथक प्रयासों के लिए धन्यवाद दिया।

शनिवार, 2 अप्रैल 2016

नेताजी से संबंधित 50 और फाइलें ऑनलाइन

 खास खबर 
नेताजी सुभाष चंद्र बोस से संबंधित 50 और फाइलें संस्कृति और पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. महेश शर्मा ने वैब पोर्टल www-netajipapers-gov-in पर ऑनलाइन जारी कीं। इन 50 फाइलों में से 10 फाइलें प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ), 10 फाइलें गृह मंत्रालय और 30 फाइलें विदेश मंत्रालय की हैं। ये फाइलें 1956 से 2009 तक की अवधि की हैं।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 23 जनवरी, 2016 को नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की 119वीं जयंती के अवसर पर नेताजी से संबंधित 100 फाइलें प्रारंभिक संरक्षण उपचार और डिजिटीकरण के बाद सार्वजनिक की थीं।
जनता द्वारा निरंतर रूप से नेताजी की फाइलों तक पहुंच बनाने की मांग की जाती रही है, इन अतिरिक्त  50 फाइलों को जारी करके इस मांग को और पूरा किया जा रहा है। साथ ही इनकी बदौलत विद्वानों को स्वाधीनता संग्राम के इस नायक पर विस्तृत शोध करने में सहायता मिलेगी। इन फाइलों की समीक्षा विशेष रूप से गठित समिति ने की है। इस समिति के सदस्यों में पुरातत्व क्षेत्र से संबंधित विशेषज्ञ शामिल हैं। समिति ने निम्नलिखित पहलुओं पर गौर किया है -
  • फाइलों की हालत का पता लगाना और जहां आवश्यकता हो वहां संरक्षण इकाई के माध्यम से मरम्मत और संरक्षण करना।
  • वेब पोर्टल www-netajipapers-gov-in पर अपलोड करने के लिए डिजिटिकरण की गुणवत्ता की जांच करना।  
  • इस बात की पड़ताल करना कि कहीं इन फाइलों में किसी भी तरह का डुप्लीकेशन तो नहीं है।
  • ये फाइलें शोधकर्ताओं और आम जनता के उपयोग के लिए इंटरनेट पर जारी की जा रही हैं।

उल्लेखनीय है कि 1997 में राष्ट्रीय अभिलेखागार, भारत को रक्षा मंत्रालय से आजाद हिंद फौज से संबंधित 990 फाइलें प्राप्त हुईं, जिन्हें गोपनीयता की श्रेणी से हटा दिया गया था। इसके बाद 2012 में गृह मंत्रालय से 1030 फाइलें / वस्तुएं-खोसला आयोग से संबंधित  (271 फाइलें / वस्तुएं) और न्यायमूर्ति मुखर्जी जांच आयोग (759 फाइलें / वस्तुएं) प्राप्त हुईं। ये सभी फाइलें और वस्तुएं सार्वजनिक रिकॉर्ड नियम, 1997 के अंतर्गत जनता के लिए पहले से ही खुली हैं।

वृंदावन में ‘एक हजार विधवाओं के आवास’ की परियोजना का शुभारम्भ

केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती मेनका संजय गांधी ने मथुरा के वृंदावन में एक हजार विधवाओं के लिए विशेष आवास के निर्माण की परियोजना का शुभारम्भ किया। श्रीमती मेनका संजय गांधी ने उत्तर प्रदेश की महिला कल्याण मंत्री श्रीमती सैयदा शादाब फातिमा भी उपस्थिति में इस आवास की आधार शिला रखी। यह आवास महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ‘स्वाधार गृह योजना’ के अंतर्गत बनाया जा रहा है। यह आवास विधवाओं के लिए सरकार द्वारा स्थापित अथवा वित्त पोषित अब तक का सबसे बड़ा आशियाना होगा। 
इस अवसर पर श्रीमती मेनका संजय गांधी ने कहा कि यह आवास इस साल अक्टूबर तक पूरी तरह से बनकर तैयार हो जायेगा। यह आवास अलग प्रकार का होगा क्योंकि यहां पर विधवाओं को सीखने और कौशल विकास करने का अवसर मिलगा ताकि वे अपने समय का सदुपयोग करने में सक्षम हो सकें।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश की महिला कल्याण मंत्री श्रीमती सैयदा शादाब फातिमा ने कहा कि वृंदावन में 4,500 विधवाएं रहती हैं और निर्माणाधीन आवास से एक ही समय में एक हजार विधवाओं को आश्रय मिल सकेगा, जो एक सराहनीय प्रयास है।

कियूल-गया रेल लाईन का दोहरीकरण

 संक्षिप्त खबर 
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने 1354.22 करोड़ रुपये की पूर्णता लागत के साथ 124 किलोमीटर की कियूल-गया रेल लाईन के दोहरीकरण को मंजूरी दे दी। इस लाईन के दोहरीकरण से इन दोनों खंडों के बीच लगातार बढ़ते माल परिवहन का बोझ कम होगा। इस परियोजना के 2019-20 तक पूर्ण हो जाने की उम्मीद है। इस परियोजना के जरिये बिहार के लक्खीसराय, शेखपुरा, नवादा एवं गया जिलों को लाभ होगा।

रांची (हटिया)-बोंडामुंडा रेल लाईन के दोहरीकरण को मंजूरी 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने 1921.94 करोड़ रुपये की पूर्णता लागत के साथ 158.5 किलोमीटर लम्बी रांची (हटिया)-बोंडामुंडा रेल लाईन के दोहरीकरण को मंजूरी दे दी। इस परियोजना के 12वीं एवं 13वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान अगले छह वर्षों में पूर्ण हो जाने की उम्मीद है।
इस लाईन के दोहरीकरण से इस खंड की लाईन क्षमता का संवर्द्धन होगा और यह बाढ़ में बन रहे सुपर थर्मल बिजली संयंत्रों एवं कटनी तथा बरौनी जैसे अन्य बिजली संयंत्रों की माल आवागमन जरूरतों की पूर्ति में सहायक होगा। दोहरे रेल लाईन का निर्माण आवागमन बाधाओं को सरल करने में सहायक होगा। 
इस परियोजना के जरिये झारखंड के रांची, गुमला एवं सिमडेगा जिलों तथा ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले को लाभ पहुंचेगा। बोकारो स्टील संयंत्र एवं राउरकेला स्टील संयंत्र के विस्तार के साथ मौजूदा लाईन क्षमता का उपयोग बढ़कर क्रमशरू 226 प्रतिशत एवं 171 प्रतिशत हो जाएगा। कच्चा मालों एवं परिष्कृत स्टील की अतिरिक्त मात्रा जिसकी इस परियोजना खंड के तहत ढुलाई होगी, 2025-26 तक बढ़कर 10 एमटीपीए के स्तर तक पहुंच जाएगी।

मधुमेह की औषधी ‘आयुष-82’ बाजार में

 संक्षिप्त खबरें 
पटना : विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग के राष्ट्रीय अनुसंधान विकास निगर (एनआरडीसी) ने मधुमेह की रोकथाम और प्रबंधन के लिए एक आयुर्वेदिक औषधी, आयुष-82 को बाजार में लाने के लिए कुडोज लेबोरेटरीज इंडिया के साथ एक लाइसेंस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस औषधी को आयुष मंत्रालय (आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथी) के अंतर्गत आयुर्वेद में अनुसंधान की सर्वोच्च संस्था आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) ने तैयार किया है।
इस अवसर पर, एनआरडीसी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डॉ. एच. पुरूषोत्तम, सीसीआरएएस के महानिदेशक प्रो. वीडी. के.एस.धीमान और एनआरडीसी और सीसीआरएएस के वरिष्ठ अधिकारी और वैज्ञानिक उपस्थित थे। प्रौफेसर धीमान ने इसको बनाने और इसके लाभों की जानकारी दी। डॉ. एच. पुरूषोत्तम ने कहा कि रोगी आयुर्वेदिक औषधियों को वरीयता दे रहे हैं क्योंकि यह देखा जा सकता है कि हाल के पिछले दिनों में एनआरडीसी ने भारत में 32 कंपनियों को सीसीआरएएस द्वारा विकसित 12 आयुर्वेदिक औषधियों के लिए लाइसेंस दिया है। अब कुडोज लेबोरेटरीज इंडिया भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के सीसीआरएएस के तहत इस उत्पाद को बाजार में उतार सकती है।

पटना उच्च न्यायालय का शताब्दी वर्ष समारोह संपन्न

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पटना उच्च न्यायालय के शताब्दी वर्ष समारोह के समापन समारोह के अवसर पर संबोधित करते हुए कहा कि पिछले 100 वर्षों के दौरान इस न्यायालय ने महान ऊंचाइयों को हासिल किया है। उन्होंने कहा कि इन सौ साल के बेहतरीन पहलुओं को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह नया संकल्प लेने का अवसर है और उन्होंने सभी हितधारकों का आने वाले वर्षों में नये मानक स्थापित करने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने प्रौद्योगिकी की महान शक्ति के बारे में कहा कि बार, बेंच और अदालत को तकनीकी का जानकार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी के सक्रिय उपयोग से बहस और निर्णयों की गुणवत्ता में सुधार आएगा।

बिहार में रेल पुल परियोजनाओं की पट्टिकाओं का अनावरण

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पटना में नवनिर्मित रेल एवं सड़क पुल का रेल भाग राष्ट्र को समर्पित किया। यह कार्यक्रम हाजीपुर में आयोजित किया गया। प्रधानमंत्री ने मुंगेर में नवनिर्मित रेल एवं सड़क पुल पर मालगाडि़यों के परिचालन की शुरूआत और मोकामा में राजेन्द्र पुल के पास अतिरिक्त पुल की आधारशिला की पट्टिकाओं का भी अनावरण किया। 
इस अवसर पर भारी और उत्साही भीड़ को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि नये समर्पित पुल से परिवहन में सुधार होगा, जिससे इस क्षेत्र के लोगों की आर्थिक स्थिति में भी बदलाव आएगा। उन्होंने याद दिलाया कि श्री अटल बिहारी वाजपेयी जब प्रधानमंत्री थे और बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री नीतिश कुमार जब रेल मंत्री थे तब इस परियोजना की आधारशिला रखी गई थी। 
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि पूरे देश के स्थायी विकास के लिए भारत के पूर्वोत्तर राज्यों का विकास बहुत आवश्यक था। भारत के विकास का प्रमुख केंद्र पूर्वी भारत में स्थित है। उन्होंने कहा अगर भारत को विकास करना है तो बिहार को विकसित करना होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि बुनियादी ढांचा विशेष रूप से सड़कें और रेलवे ही विकास के बीज के समान हैं, जिनसे प्रगति को गति प्राप्त होती है। प्रधानमंत्री ने रेलवे के संपूर्ण आधुनिकीकरण की जरूरत पर जोर दिया।

वैष्णो देवी में वाई-फाई हॉटस्पॉट शुरू

केंद्रीय दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने माता वैष्णो देवी धाम में वाई-फाई सुविधा का शुभारंभ किया। इस सुविधा से देशभर के देवी भक्त माँ वैष्णो देवी के आसपास से सुविधाएं पा सकेंगे। यह 1000वां वाई-फाई हॉटस्पॉट है। इस अवसर पर उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि बीएसएनएल को आधुनिक बनाने की सरकार की पहल के एक हिस्से के रूप में यह प्रतिस्पर्धी माहौल में प्रासंगिक है क्योंकि आज दूरसंचार क्षेत्र इसी तरह ही प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि अपना नेटवर्क उन्नत करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र ने 2000 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई है, इसमें 21000 बीटीएस की क्षमता और बढ़ाई गई है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा 13000 बीटीएस को भी शामिल किया जाएगा जिसका बीएसएनएल अपनी 3जी सेवाओं में इस्तेमाल करेगा। 
राजस्व के नए स्रोतों के दोहन के अपने अभियान के हिस्से के रूप में सरकार की आकांक्षाओं को पूरा करने में मदद के लिए इस वाई-फाई हॉटस्पॉट को लाने की योजना रही है जिसमें देशभर के सभी धार्मिक, पर्यटन और महत्वपूर्ण स्थलों को सीधे जोड़ा जाना है। समूचे देश में योजना के पहले चरण में 2500 वाई-फाई हॉटस्पॉट्स स्थापित करने का प्रस्ताव है। 
वित्तीय लाभ को तेज करने और लोकप्रियता बढ़ाने की अपनी रणनीति के हिस्से के रूप में हाल ही में बीएसएनएल ने कई पहलें की हैं। इनमें रात 9 बजे से सुबह 7 बजे के बीच बीएसएनएल की लाइनों को किसी भी दूसरी सेवाएं देने वाली प्रणाली से जोड़ने की व्यवस्था है। बीएसएनएल ने इनकमिंग कॉल्स को भी शुल्क रहित कर दिया है। यह बीएसएनएल मोबाइल के रोमिंग ग्राहकों के लिए है। शायद पहली बार किसी दूरसंचार संचालक ने इस तरह की सेवा शुरू की है। बीएसएनएल ने अपनी ब्रॉडबैंड की न्यूनतम स्पीड में भी सुधार किया है और इसे 512 केबीपीएस से 2 एमबीपीएस कर दिया है जिससे बीएसएनएल के ब्रॉडबैंड के ग्राहकों को बेहतर सर्फिंग मिलेगी। 
बीएसएनएल स्थिर टेलीफोन नेटवर्क और मोबाइल दोनों तरह की सेवाओं को उन्नत करने और उनका विस्तार करने की प्रक्रिया में है। इसी पहल के एक हिस्से के रूप में बीएसएनएल ने मौजूदा पीएसटीएन टेलीफोन को एनजीएन (नेक्स्ट जेनरेशन नेटवर्क) से जोड़ दिया है। पहले ही करीब 660 टेलीफोन एक्सचेंज को एनजीएन से उन्नत किया जा चुका है। 
श्री रविशंकर प्रसाद ने सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलिमैटिक्स (सीडॉट) द्वारा स्थानीय रूप से डिजाइन और बनाई गई एनजीएन प्रौद्योगिकी से आगे काम करने को हरी झंडी भी दी है। यह भारत सरकार के मेक इन इंडिया कार्यक्रम की पहल का एक हिस्सा है जिसमें देश भर के शहरी और ग्रामीण इलाकों में एनजीएन प्रौद्योगिकी इस्तेमाल करके बीएसएनएल के कामकाज की गति बढ़ाई जाएगी। मंत्री महोदय ने फिक्स फोन सेवा के प्रीपेड संस्करण और मोबाइल सेवा के साथ ही मल्टीमीडिया वायस कांफ्रेंसिंग और वेल्यू एडेड सेवाएं एनजीएन पर देने संबंधी कार्यक्रम का भी उद्घाटन किया। इसके अलावा फिक्स मोबाइल टेलीफोन नाम नई उन्नत सेवाएं भी शुरू की गई हैं, जिनसे कहीं भी उपलब्ध ग्राहक अपनी सेवाओं को नए तरीके से उन्नत कर सकेंगे और वे मोबाइल टेलीफोन यंत्र से कहीं भी कॉल पहुंचा और पा सकेंगे।