COPYRIGHT © RAJIV MANI, Journalist, Patna

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शनिवार, 28 मई 2016

रेल मंत्री ने 5 कार्यक्रमों का उदघाटन किया

नई दिल्ली : रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने (1) हजरत निजामुद्दीन-पुणे के बीच नई एसी साप्ताहिक एक्सप्रेस ट्रेन (2) दिल्ली-हावड़ा, दिल्ली-चेन्न्ई, दिल्ली-मुंबई तथा दिल्ली-सिकंदराबाद सर्किंटों में वैकल्पिक रेल आरक्षणों योजना विकल्प का विस्तार (3) हैंड हेल्ड टर्मिनलों के माध्यम से अनारक्षित टिकटों की बिक्री की पायलट परियोजना (4) ट्रैक गैंग, कीमेन तथा पेट्रोल मेन के लिए कर्मचारी परिस्थिति विज्ञान के अनुसार री-डिजाइन किये गये तथा अनुकूल उपकरणों की लांचिंग तथा (5) मानव रहित लेवल क्रासिंग पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए पायलट परियोजना का उदघाटन किया।
सुरेश प्रभाकर प्रभु ने मुंबई में वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए इन कार्यक्रमों का उदघाटन किया। साथ-साथ समानांतर समारोह हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर हुआ, जहां केंद्रीय विज्ञान एवं टेक्नॉलोजी तथा भू-विज्ञान मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा विशेष रूप से उपस्थित थे। इस अवसर पर रेल बोर्ड के अध्यक्ष एके मित्तल, मेम्बर ट्रैफिक मोहम्मद जमशेद, मेम्बर इंजीनियरिंग वीके गुप्ता, मेम्बर मेकैनिकल हेमंत कुमार तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। हजरत निजामुद्दीन-पुणे के बीच नई ट्रेन भारतीय रेल ने 12493/12494 हजरत निजामुद्दीन-पुणे एसी एक्सप्रेस साप्ताहिक (बजट 2014-15) रेल सेवा शुरू की। रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने रिमोट झंडी दिखाकर इसे रवाना किया।

पटना, रांची व विशाखापट्टनम में वाई-फाई सेवा शुरू

नई दिल्ली : रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने रेल भवन, नई दिल्ली से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से पटना (बिहार), रांची (झारखंड) और विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश) रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों के लिए हाई स्पीड वाई-फाई सेवाओं का उद्घाटन किया। रेलवे यात्रियों को अति आधुनिक विश्व स्तरीय तथा हाई स्पीड इंटरनेट उपलब्ध कराने के लिए रेलटेल द्वारा गूगल के सहयोग से इन रेलवे स्टेशनों पर आगंतुकों और रेल उपयोगकर्ताओं के लिए वाई-फाई की सुविधा शुरू की गई है। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एके मित्तल, सदस्य इंजीनियरिंग वीके गुप्ता, रेलटेल के प्रबंध निदेशक आरके बहुगुणा और बोर्ड के अन्य सदस्य इस अवसर पर रेल भवन में उपस्थित थे। उपरोक्त तीनों रेलवे स्टेशनों पर विभिन्न गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। 
इस अवसर पर रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि भारत डिजिटलीकरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है, इसलिए इंटरनेट हर व्यक्ति की मूल जरूरत बन गया है, जिसके वे हकदार भी हैं। उन्होंने कहा कि रेलवे स्टेशनों को विश्व मानक के स्तर पर लाने और नवीनतम तकनीक के साथ तालमेल रखने के लिए, हाई स्पीड वाईफ़ाई का प्रावधान इस दिशा में पहला कदम है। उन्होंने कहा कि अब तक यह सुविधा 19 रेलवे स्टेशनों पर उपलब्ध कराई जा रही है, लेकिन एक साल में इसे 100 रेलवे स्टेशनों पर सुलभ कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी 400 स्टेशनों पर वाईफाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए इस परियोजना के पूरा होने के बाद यह विश्व में सबसे बड़ी वाईफ़ाई सेवा होगी। उन्होंने कहा कि भारतीय रेलवे उपयोगकर्ताओं को दी जाने वाली सुविधाओं में सुधार के लिए अनेक कदम उठा रहा है। आने वाले वर्षों में यात्रियों को अनेक नई सुविधाएं प्रदान की जाएंगी जिससे रेलवे यात्रियों को गर्व का अनुभव होगा। 

’आय घोषणा योजना 2016’ से संबंधित वेबसाइट

नई दिल्ली : आय घोषणा योजना, 2016 को वित्त अधिनियम 2016 के नौवें अध्याय में शामिल किया गया है, जो 1 जून, 2016 से लागू हो गया है। इस योजना का पूरा पाठ वित्त विधेयक 2016 के एक हिस्से के रूप में वित्त मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है। इस योजना का ब्यौरा और इस योजना के तहत उपलब्ध पात्रता का स्पष्टीकरण करने के लिए बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्नों की करदाता शिक्षा सीरीज (एफएक्यू) का पहला भाग अवलोकन के लिए आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट  www.incometaxindia.gov.in इसका उद्देश्य पात्रता, संपत्ति की प्रकृति, उपलब्धता अवधि और इस योजना के तहत उपलब्ध उन्मुक्तियों के प्रकार इस योजना से बाहर किये गए व्यक्तिय के संबंध में विभिन्न प्रावधानों को समझाना है। यह योजना किन परिस्थितियों में लागू नहीं होगी, इसे भी स्पष्ट कर दिया है। जिन्हें समय-समय पर फीडबैक और आगे इस बारे में प्राप्त पूछताछ के आधार पर पर अद्यतन किया जाएगा।

भारतीय सेना माउंट एवरेस्ट पर

 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : लेफ्टिनेंट कर्नल रणवीर जामवाल के नेतृत्व में भारतीय सेना का 6 सदस्यीय पर्वतारोही दल 19 मई, 2016 को तड़के माउंट एवरेस्ट चोटी (8848 मीटर) पर पहुंचा। इसके साथ-साथ मेजर नुरूद्दीन अहमद के नेतृत्व में एक दल एलहोतसे शिखर पर पहुंचने का प्रयास कर रहा है। माउंट एकहोतसे (8501 मीटर) विश्व की चौथी सबसे ऊंची चोटी है। भारतीय सेना के पर्वतारोहियों को 2 वर्षों के अंतराल के बाद सफलता मिली है, क्योंकि यह चोटी पिछले वर्ष नेपाल में आए भूकंप के कारण बंद थी। दल के पांच सदस्य 29 मई, 2016 को तेनजिंग हिलैरी एवरेस्ट मैराथन में भी भाग लेंगे।

किरण बेदी पुद्दुचेरी का उप-राज्यपाल नियुक्त

नई दिल्ली : राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने किरण बेदी को पुद्दुचेरी का उप-राज्यपाल नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति उनके पदभार ग्रहण करने की तारीख से प्रभावी हो जाएगी।

खाड़ी में चक्रवाती तूफान रोआनु 

नई दिल्ली : पश्चिम मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर आया चक्रवाती तूफान रोआनु 19 मई, 2016 को 11.30 बजे मछलीपत्तनम से लगभग 80 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण पूर्व, विशाखापत्तनम के 290 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण पश्चिम तथा काकीनाडा के 160 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण पश्चिम में अक्षांश 15.6 डिग्री एन और देशांतर 81.6 डिग्री में केंद्रित था। अगले 12 घंटों में चक्रवाती तूफान उत्तर-उत्तर पूर्व दिशा और आंध्र प्रदेश तट की ओर बढ़ सकता है। उसके बाद इसकी दिशा उत्तर पूर्व हो सकती है। उत्तर पूर्व में बढ़ते हुए यह 21 मई की रात तथा 22 मई को तड़के खेपुपारा तथा कॉक्स बाजार के बीच दक्षिण बंगलादेश तट से गुजरेगा।

देश में निर्मित अंतरिक्ष यान आरएलवी-टीडी का सफल प्रक्षेपण 

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश में निर्मित पहले अंतरिक्ष यान आरएलवी-टीडी के सफल प्रक्षेपण के अवसर पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों को बधाई दी है। प्रधानमंत्री ने कहा, “देश में निर्मित पहले अंतरिक्ष यान आरएलवी-टीडी का प्रक्षेपण हमारे वैज्ञानिकों के कर्मशील प्रयासों का परिणाम है। उनको बधाई। हमारे वैज्ञानिक और इसरो जिस ऊर्जा और समर्पण के साथ वर्षों से काम कर रहे हैं, वह असाधारण और अति-प्रेरणादायक है।”

सोमवार, 23 मई 2016

प्रेमनगर में संकट

 मजाक डॉट कॉम 
 15 
राजीव मणि
पूरा जंगल सूखे की चपेट में था। नदियां, तालाब, झड़ने सब सूख चुके थे। घास, झाड़ियां, बेलों का कहीं नामोनिशान नहीं था। फल-फूल असमय ही झड़ चुके थे। घने वृक्षों पर अब पत्तियां ही शेष थीं। प्रेमनगर जंगल का हाल बेहाल था। चारो ओर कोहराम मचा था। कमजोर-बीमार पशु-पक्षी भूख-प्यास से तड़प-तड़प कर मर रहे थे। प्रेमनगर जंगल का राजा अपनी प्रजा की दुर्दशा देख चिंतित था। राजा को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए। 
शेर सिंह ने अपने महल में सभी मंत्रियों, दरबारियों, गुप्तचरों व अधिकारियों की एक बैठक बुलायी। शेर सिंह दहाड़ कर बोला, ‘‘आप सभी जंगल की दशा देख रहे हैं। किसी से कुछ छुपा नहीं है। लोग भूख-प्यास से मर रहे हैं। अब सभी को मिलकर इस समस्या का समाधान करना होगा। आदमजात की तरह एक-दूसरे को कोसने और बहसबाजी में समय गंवाना ठीक नहीं। अतः सभी गुप्तचरों, मंत्रियों व अधिकारियों को यह आदेश दिया जाता है कि वे अलग-अलग टोली बनाकर निकलें और बिगड़े हालात के सही कारणों का पता लगाएं। साथ ही, फिर से जंगलों में खुशहाली कैसे लौटे, यह भी बताना होगा। आपको मात्र एक सप्ताह का समय दिया जाता है। अगले सोमवार को हम यहीं इकट्ठा होंगे।’’ 
राजा का आदेश पाकर पशु-पक्षी निकल पड़ते हैं। अलग-अलग टोली बनाकर सभी अलग-अलग दिशाओं में कारण जानने जाते हैं। कुछ शहरों में प्रवेश करते हैं, कुछ गांवों में। कमजोर प्राणियों की टोली प्रेमनगर में ही रहकर कारणों का पता लगाती है। 
एक सप्ताह बाद सभी महल में जमा होते हैं। राजा शेर सिंह अपने आसन पर आकर बैठता है। ‘‘आप सभी को एकबार फिर यहां सही-सलामत देखकर मुझे खुशी हुई। आशा है आपने कारणों का पता लगा लिया होगा। अब एक-एक कर बताएं, क्या पता किया। जंबू हाथी, आप कहां गये थे ?’’ 
‘‘महाराज, मैं अपनी टोली के साथ आदमजात के गांवों में गया था। वहां विचित्र स्थिति थी। आदमजातों ने खेतों में जहरीले रसायन डाल रखे हैं। जहां गांवों में पहले लंबे-घने वृक्ष थे, अब समतल मैदान है। अब वहां भी कंक्रीट के जाल बिछते जा रहे हैं। पानी के लिए हाहाकार मचा है। लोग आत्महत्या कर रहे हैं। भूख-प्यास से आपस में ही लड़ रहे हैं।’’ जंबू हाथी ने सीधे-सीधे सब हाल कर सुनाया। 
‘‘हूं ..... आदमजात होते ही हैं ऐसे। अपनी करनी से मरते हैं और दूसरों को भी मुसीबत में डालते हैं !’’ शेर सिंह ने लंबी सांस लेते हुए कहा। फिर कुछ रूककर ...... ‘‘हां रंगा सियार, तुमने क्या पता किया ?’’ 
रंगा सियार हाथ जोड़कर खड़ा हो गया। दो कदम आगे बढ़कर बोला, ‘‘महाराज, मैं नगरों में गया था। वहां तो सिर्फ ऊंचे-ऊंचे मकान ही हैं। सड़कें, गलियां सब पक्के। न कहीं पेड़, न पानी ! एकदम गरमी, जैसे आग बरसते हों। पूरा कंक्रीट का जाल जैसे जल रहा हो।’’ 
शेर सिंह को अब समझ आ रहा था, क्यों जंगलों की यह दुर्दशा हुई है। उन्होंने गरज कर कहा, ‘‘लगता है इन्हीं करतूतों का असर यहां भी है। नहीं तो हमारे प्रेमनगर की हालत भला ऐसी क्यों होती। ..... तुम क्या पता कर लाए केतकी कौए ?’’ 
‘‘महाराज, मैं तो उड़ते-उड़ते एक ऐसी जगह पहुंच गया, जहां एक महल जैसा घर था। मैं उस महल की खिड़की पर जा बैठा। वहां कुछ आदमजात बैठ जल संकट, सूखा और पर्यावरण की बिगड़ती स्थिति पर चरचा कर रहे थे। एक ने कहा, कमेटी बना दी जाए, कमेटी चार माह में सरकार को बताएगी कि ऐसा क्यों हो रहा है। फिर इसपर विचार किया जाएगा।’’ 
केतकी कौए की बात सुनकर शेर सिंह भड़क गये, बीच में ही बोल पड़े, ‘‘मूरख आदमजात ...... सबकुछ नाश करने के बाद भी नहीं जानता कि यह स्थिति क्यों उत्पन्न हुई। अब भी कमेटी बनाने की बात करता है। चार माह पता करने में लगाएगा ! तबतक तो न जाने क्या हो !’’ फिर कुछ सोचते हुए शेर सिंह कहता है, ‘‘हम प्रेमनगर वासी समय बरबाद नहीं करते हुए कल से ही जंगलों को बचाने में जुटेंगे। सभी को यह आदेश दिया जाता है कि कोई पानी बरबाद ना करे। जो कोई आदमजात जंगल में मिल जाए, उसे उसी समय सजा दी जाए। नहीं तो ये हमारे बचे-खुचे पेड़ों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। साथ ही सभी नये-नये पौधे लगाएं। सभा समाप्त की जाती है।’’ 
सभी पशु-पक्षी अपने-अपने घर को लौट गये। अगले दिन से पूरा प्रेमनगर जंगल को बचाने में जी-जान से जुट गया। किसी तरह एक माह गुजर गया। फिर एकदिन, झमाझम बरसात हुई। नदि, तालाब पानी से भरने लगे। हरियाली लौट आयी। पूरा प्रेमनगर खुशी से झूम उठा।

मानव जिन्दा लाश बना है !

 कविता 
राजीव मणि

बादलों के छा जाने से
क्या सूरज शोक मनाता है
घना कोहरा होने पर भी
क्या चांद नित्य नहीं आता है
जरा बताओ इस धरा पर
क्या समीर कभी शरमाया है
चाहे कोई हो मौसम तो भी
क्या समुद्र आराम फरमाया है
तो फिर क्यों यह राग तना है
मानव जिन्दा लाश बना है !

भ्रष्टाचार की पाठशाला में
ईमान खो गया कहीं
टके सेर भाजी, टके सेर खाजा
टके सेर न्याय है यहीं
हत्या, बलात्कार के दर्जनों मामले
चल रहे थे, यह वही
चंद सालों में सभी आरोपों से
हो जाते हैं बरी-सही
पाप का साम्राज्य बहुत घना है
मानव जिन्दा लाश बना है !

अपनी ही धरती पर देखो
कहां से घुस गया कोई
घाटी क्यों वीरान पड़ी है
कहां सरकार है खोई-सोई
नगरों की छाती पर चढ़कर
कैसे नाच रहा है कोई
अपनी ही माटी में देखो
कैसे वीरपुत्र सना है
मानव जिन्दा लाश बना है !

गुरुवार, 19 मई 2016

प्रकाशक, लेखक और किताब

आजकल फेसबुक पर प्रकाशकों के बीच पैसे लेकर किताब छापने की होड़ मची है। कोई अपनी किताब में एक रचना छापने का 350 रुपए ले रहा है, तो कोई 5 पन्ने आपके नाम करने का 1,500 रुपए। कुछ प्रकाशक तो 2,000 रुपए में 6 पन्ने देने को अपने ग्राहक खोज रहे हैं। ऐसे में सवाल है कि जिसके पास पैसे हैं, वे साहित्यकार और जिसके पास नहीं हैं, वे ......... !  हां, कुछ प्रकाशक 1,500 या 2,000 रुपए में ही किताब के साथ सम्मान पत्र भी आपको बेच रहे हैं। भई, मजे की बात यह है कि अगर आप 2,000 रुपए लगाते हैं तो एक किताब में आपका 5 या 6 पन्ना सुरक्षित हो जाता है। साथ ही, आप उनके सम्मान समारोह में जाते हैं तो 2,000 रुपए अलग से खर्च ! यानी आप चार हजार खर्च कर किसी किताब में 5 या 6 पन्ना पाते हैं। तो लीजिए, आप बन गए साहित्यकार !
यही वजह है कि कुछ लेखक ही अब प्रकाशन बन रहे हैं। ऐसे कई उदाहरण हैं। कारण साफ है, एक किताब छापने में 10 से 15 हजार रुपए के बीच खर्च आते हैं। और यदी साझा संग्रह में 30 लेखकों को भी शामिल किया जाए तो 30 गुणा 2,000 यानी 60,000 रुपए। इसमें से लेखकों को किताबें भेजने का डाक खर्च और सम्मान पत्र पर 15,000 रुपए रख लें। यानी 30,000 रुपए का शुद्ध मुनाफा। सिर्फ एक किताब में !
हां, कोई बिना पैसे लिए छापने को तैयार हो जाए तो मुझे भी बताएं। मैं आपका आभारी रहूंगा।
वैसे छात्र जीवन में तो मैंने सुना था कि किताबे प्रकाशित करने पर प्रकाशक ही लेखकों को पैसे देते है। लगता है किसी ने मजाक किया था। है ना ?
बुरा मान गए भई, मैं तो मजाक कर रहा था !

गुरुवार, 12 मई 2016

'जरूरतों के हिसाब से हो स्मार्ट शहरों की परिकल्पना'

बिजली, कोयला, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पीयूष गोयल ने कहा है कि देश में स्मार्ट शहरों की परिकल्पना भारतीय जरूरतों के हिसाब से होनी चाहिए। आज दूसरे स्मार्ट सिटीज इंडिया 2016 एक्सपो में पीयूष गोयल ने कहा कि हमें स्मार्ट शहरों की परिकल्पना भारतीय जरूरतों के हिसाब से करनी होगी। यह व्यावहारिक हो और लोगों की जरूरत के हिसाब से इसका इस्तेमाल हो सके। इसे सस्ता भी होना होगा। उन्होंने कहा कि इस पर विचार-विमर्श किया जा सकता है। इसके बाद भारतीय जरूरत के हिसाब से स्मार्ट शहरों की परिकल्पनाओं को लागू किया जा सकता है। 
श्री गोयल ने कहा देश में स्मार्ट शहरों की परिकल्पना लागू करने में बड़े पैमाने पर निर्माण का अर्थशास्त्र, एक अरब से ज्यादा लोगों की आकांक्षाएं, भारतीय जरूरत के हिसाब से व्यावहारिकता, और कार्यक्रम के सस्ते होने जैसे मुद्दे बेहद अहम होंगे। हमें बड़े पैमाने पर निर्माण के अर्थशास्त्र और इस संबंध में नए विचारों को तेजी से लागू करने पर ध्यान देने की जरूरत है। ऐसे विचार जो वास्तविक में लोगों के लिए कारगर साबित हों। ये परिकल्पनाएं इस तरह लागू हों जिससे यह दिखे कि स्मार्ट शहर कैसे होंगे। 
पीयूष गोयल ने ऊर्जा सक्षमता कार्यक्रम का उदाहरण देते हुए कहा कि एलईडी बल्ब के निर्माण में 83 फीसदी लागत कटौती इसलिए हो पाई कि बड़े पैमाने पर इस कार्यक्रम को अपनाया गया। एलईडी बल्बों के इस्तेमाल से भारत के लोग हर साल 65 अरब डॉलर का बिजली बिल बचाएंगे।

रविवार, 8 मई 2016

अब फेसबुक पर मंत्रियों से सीधे करें बात

सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्द्धन सिंह राठौर ने एक लाइव फेसबुक क्यू एंड ए (प्रश्नोत्तर) में भाग लिया। कर्नल राठौर ने देश के विभिन्न हिस्सों के लोगों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर भी दिए। संपर्क बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए मंत्री महोदय ने नागरिकों से अपील की कि वे Mygov-in और नमो एप्प पर नियमित आधार पर सरकार के साथ वार्तालाप कर सकते हैं और प्रधानमंत्री के कार्यक्रम मन की बात के लिए प्रश्न और विषय भेज सकते हैं। उन्होंने लोगों से सभी मंत्रियों के सोशल मीडिया पेजों पर संपर्क बनाए रखने की भी अपील की।
विकास और संचार पर सरकार की परिकल्पना को नागरिकों के साथ बाटते हुए, कर्नल राठौर ने दोहराया कि नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व के अंतर्गत वर्तमान सरकार प्रत्येक संभव माध्मय से प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचने, सरकारी नीतियों और योजनाओं की जानकारी से उन्हें सशक्त बनाने और इन योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सरकार तक इसकी प्रतिक्रिया पहुंचाने के प्रति वचनबद्ध है।
रात्रि 9.30 बजे प्रारंभ हुए एक घंटे के वार्तालाप सत्र के दौरान कर्नल राठौर ने सूचना और प्रसारण, मीडिया, संचार, संकट, सार्वजनिक नीति, रक्षा तैयारियां, सीमा-सुरक्षा, साइबर खतरों, ओलंपिक, कौशल विकास और रोजगार सृजन के विभिन्न पक्षों पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दिए। मंत्री महोदय ने इस लाइव वार्तालाप के दौरान विभिन्न विषयों पर लोगों के बहुत से सुझाव भी प्राप्त किए।
सत्र के अंत में, मंत्री महोदय ने फेसबुक वीडियो पर लाइव उपस्थिति के माध्यम से अपने साथ वार्तालाप करने वाले सभी लोगों को धन्यवाद दिया। उन्होंने यह भी कहा कि यह लोगों से जुड़ने और उन तक पहुंचने का एक महत्वपूर्ण और रोचक माध्यम है। कर्नल राठौर ने कहा कि वह इस प्रकार के लाइव वार्तालाप के लिए सोशल मीडिया मंचों का उपयोग करने की अन्य मंत्रियों से भी अपील करेंगे।
अपने प्रथम फेसबुक क्यू एंड ए में मंत्री महोदय ने एक घंटे के इस सत्र के दौरान पूछे गए कुल 1453 प्रश्नों में से 65 प्रश्नों के उत्तर अंग्रेजी और हिन्दी में दिए। कर्नल राठौर के फेसबुक पर लाइव वीडियो को 12 हजार से ज्यादा सुझाव मिले और इस अवधि के दौरान करीब 6 हजार लोगों ने उन्हें लाइक किया।
इस क्यू एंड ए कार्यक्रम का संयुक्त रूप से आयोजन सूचना और प्रसारण मंत्रालय के पत्र सूचना कार्यालय के न्यू मीडिया सेल की सोशल मीडिया टीम और फेसबुक के द्वारा किया गया था। इस समूचे क्यू एंड ए कार्यक्रम को देखने के लिए निम्नलिखित लिंक पर जा सकते हैं : https://www-facebook-com/Rathore/posts/1783832128506184 

नमामि गंगे के लिए 2446 करोड़ रुपये की मंजूरी 

नमामि गंगे कार्यक्रम को महत्वपूर्ण गति प्रदान करते हुए राष्ट्रीय गंगा नदी घाटी प्राधिकरण की अधिकार प्राप्त संचालन समिति ने उत्तराखंड में हरिद्वार से उत्तराखंड की सीमा तक, उत्तर प्रदेश में गढ़मुक्तेश्वर, बिहार में बक्सर, हाजीपुर और सोनपुर, झारखंड में साहेबगंज, राजमहल और कन्हैया घाट में गंगा के तट पर तथा दिल्ली में यमुना पर घाटों और श्मशान स्थलों के विकास की परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इन परियोजनाओं पर 2446 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इन स्थानों पर घाटों और श्मशान स्थलों के विकास से गंगा और यमुना में प्रदूषण में कमी आयेगी। इन सभी परियोजनाओं को केंद्र सरकार की नमामि गंगे योजना के तहत कार्यान्वित किया जाएगा और इनका पूरा खर्चा केंद्र सरकार उठायेगी। 
संचालन समिति ने गंगा के किनारे वन लगाए जाने के बारे में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट की भी समीक्षा की। इस रिपोर्ट में गंगा के किनारे बड़ी मात्रा में वनों का निर्माण करके नदी में जल प्रवाह को बढ़ाने और प्रदूषण को कम करने के सुझाव दिए गए हैं। इसके अलावा इसमें गंगा के किनारे के पांच राज्यों में गंगा से संबंधित विभिन्न अध्ययनों को बढ़ावा देना और इस परियोजना की सफलता को देश की अन्य नदियों के संबंध में इस्तेमाल किया जाना शामिल है। इस परियोजना पर पांच वर्ष की अवधि के दौरान 2294 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। 
मंजूर की गई सभी परियोजनाओं की समीक्षा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों के समूह द्वारा गठित स्वतंत्र इकाईयों द्वारा की गई। गंगा के किनारे वन लगाने के उपायों की समीक्षा वन और पर्यावरण मंत्रालय के महानिदेशक की अध्यक्षता में गठित समिति ने की। 
अधिकार प्राप्त संचालन समिति की अध्यक्षता केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय के सचिव करते हैं। समिति के अन्य सदस्यों में केंद्रीय वन और पर्यावरण, वित्त, शहरी विकास और विद्युत मंत्रालय के प्रतिनिधियों के अलावा गंगा किनारे के पांच राज्यों के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। 
यहां यह उल्लेखनीय है कि केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती दैनिक आधार पर स्वयं नमामि गंगे कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा कर रही हैं, ताकि इस कार्यक्रम की सफलता मिशन मोड पर सुनिश्चित की जा सके। हाल ही में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन में नए मिशन निदेशक की नियुक्ति भी की गई है। यह पद पिछले कुछ महीनों से रिक्त था। 

आज बुध ग्रह सूर्य के नक्षत्र मंडल के ऊपर से गुजरेगा 

9 मई, 2016 (19 वैशाख, शक 1938) को बुध ग्रह सूर्य के नक्षत्र मंडल के ऊपर से गुजरेगा। यह घटना भारत में देखी जा सकती है। सूर्य के नक्षत्र मंडल के ऊपर से बुध ग्रह के गुजरने की घटना तब होती है, जब बुध ग्रह सूर्य के एक किनारे से दूसरे किनारे जाते समय अत्यंत छोटा काला धब्बा दिखता है।
इस घटना को पृथ्वी से तब देखा जाता है, जब बुध ग्रह सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुजरता है। यह तभी होता है, जब सूर्य, बुध ग्रह और पृथ्वी एक सीध में हों। सौर मंडल में बुध ग्रह एक धब्बा के रूप में दिखता है, क्योंकि सूर्य की तुलना में इसका कोणीय आकार बहुत छोटा होता है।
बुध ग्रह की यात्रा (सम्पर्क-1) उस क्षण शुरू होती है, जब बुध ग्रह सूर्य (प्रवेश बाह्य) को स्पर्श करता है। इसके बाद (सम्पर्क-2) आतंरिक रूप से बुध ग्रह सूर्य (प्रवेश आतंरिक) का स्पर्श करता है। बुध काले धब्बे के रूप में दिखेगा। कई घंटों की यात्रा के बाद बुध ग्रह तीसरे सम्पर्क में सूर्य के दूसरे छोर पहुंचेगा। यह तब होता है, जब बुध ग्रह आतंरिक रूप से सूर्य के करीब (प्रवेश आतंरिक) होता है और अंततरू यात्रा तब पूरी होती है, जब बुध ग्रह सूर्य (प्रवेश बाह्य) का स्पर्श करता है।
यह घटना अनूठी होती है और पूरी शताब्दी में 13 या 14 बार घटती है। यह अदभूत घटना मई तथा नवम्बर के महीने में होती है। एक पारगमन से दूसरे पारगमन के बीच का मध्यान्तर 7, 13 या 33 वर्ष का हो सकता है, जबकि मई से अगली मई तक की यात्रा 13 या 33 वर्षों के अंतराल पर होती है।
सूर्य के नक्षत्र मंडल के ऊपर से बुध ग्रह के गुजरने की यह घटना एशिया के अधिकतर हिस्सों (दक्षिण-पूर्वी भागों तथा जापान को छोड़कर), यूरोप, अफ्रीका, ग्रीनलैंड, दक्षिण अमरीका, उत्तर अमरीका, आर्किटिक, उत्तर अटलांटिक महासागर तथा प्रशांत महासागर के अधिकतर हिस्सों में देखी जा सकती है।
भारत में प्रवेश बाह्य (सम्पर्क-1) तथा प्रवेश आतंरिक (सम्पर्क-2) की यह घटना सभी स्थानों से दिखेगी। बुध ग्रह के गुजरने का सम्पूर्ण समय 7 घंटे 30 मिनट का होगा। भारत में पर्यवेक्षक घटना की समाप्ति नहीं देख सकेंगे, क्योंकि यह घटना सूर्यास्त के बाद जारी रहेगी।
भारत के विभिन्न भागों में सूर्यास्त के समयानुसार भारत के सुदूर-पूर्व स्थित पर्यवेक्षक इस अदभूत घटना को शुरू से एक घंटे के लिए देख सकेंगे और देश के सुदूर-पश्चिम में पर्यवेक्षक इस घटना को शुरू से दो घंटे 45 मिनट तक देख सकेंगे।
दिल्ली में यह घटना 2 घंटे 20 मिनट की होगी और यह सायं 04 बजकर 41 मिनट पर शुरू होगी। सूर्यास्त 07 बजकर 01 मिनट पर होगा। इसी तरह कोलकाता में यह घटना शाम 04 बजकर 41 मिनट पर शुरू होगी और एक घंटा 26 मिनट तक रहेगी। मुम्बई में इसकी शुरूआत शाम 04 बजकर 41 मिनट पर होगी और इसे 02 घंटा 24 मिनट तक देखा जा सकेगा। चेन्नई में यह शाम 04 बजकर 41 मिनट पर शुरू होगी और लगभग 01 घंटा 45 मिनट तक देखा जा सकेगा।

गुरुवार, 5 मई 2016

मीडिया का करप्शन कनेक्शन

 मजाक डाॅट काॅम 
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राजीव मणि
इस नश्वर संसार में मानव ही एक ऐसा सामाजिक पशु है, जिसके बीच चढ़ावे की काफी महिमा है। इसे ‘सुविधा शुल्क’ के नाम से भी जाना जाता है। जैसा नाम से ही प्रतित होता है, किसी काम को करवाने या अपना स्वार्थ साधने के लिए चढ़ाया गया शुल्क ! और इसकी कहानी भी ठीक उतनी ही पुरानी है, जितना मानव का इतिहास। प्राचीन काल से लेकर अबतक इसकी बदौलत बड़े-बड़े कार्य सिद्ध हुए हैं। इसकी कृपा से कइयों के राजपाट संवर गए। कइयों की लाइफ ही बन गयी। कहने का मतलब कि चढ़ावा या सुविधा शुल्क के जरिये कोई राजा भोज बना, कोई गंगू तेली भी। और हां, यह सुविधा शुल्क कई बार मुंह बंद रखने को भी दिये जाते हैं। 
यहां यह भी समझ लेना ठीक रहेगा कि चढ़ावे का रंग-रूप कैसा होता है। तो जनबा, यह तो आप पर निर्भर करता है कि आपकी श्रद्धा कितनी है। आप चाहें तो मिठाइयां चढ़ाएं, चाहें तो रुपए-पैसे। हां, आप कार, बंगला, टीवी, फ्रीज भी चढ़ा सकते हैं। कुछ लोग तो यहां दारू-मुरगा भी चढ़ाते हैं। कुछ चढ़ावे में पार्टी देते हैं। कुछ वेश्याएं भी। इतिहास गवाह है कि इसी धरती पर कुछेक ने अपनी पत्नी या बेटी को भी सुविधा शुल्क के रूप में चढ़ा दिया। हालांकि पत्नी या बेटी को सुविधा शुल्क के रूप में दिये जाने की घटनाएं मुगल काल में सबसे ज्यादा हुईं। लेकिन, आज के सभ्य समाज में भी चोरी-छिपे यह सब होता रहा है। इसमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए। हालांकि ऐसे चढ़ावे अब बहुत कम देखने को मिलते हैं। 
खैर, बात ताजा चढ़ावे की ही कर लेते हैं। कोहराम मचा है कि इटली के उड़नखटोले के सौदे में कई लोगों को चढ़ावे के रूप में मोटी रकम दी गयी। मोटी रकम पाने वालों में कई बड़े राजनेताओं के नाम शामिल हैं। मेरी दिलचस्पी अभी इस छोटी खबर में नहीं। वैसे नेता का नाता तो विवाद, घोटाला, रिश्वत आदि से पुराना रहा है। मेरी दिलचस्पी अभी इस बात में है कि नेताओं के साथ कुछ बड़े पत्रकारों को भी ‘मैनेज’ करने के लिए चढ़ावा चढ़ाया गया। हालांकि अभी तक उन बड़े पत्रकारों के नामों का खुलासा नहीं हुआ है। हो सकता है, अगर आगे अच्छे दिन आयेंगे, तो नामों के खुलासे भी हो जायेंगे। और तब पता चल सकेगा कि जितना शोर मचा हुआ है, उसमें कुछ सच्चाई है भी या नहीं। 
वैसे, मीडिया का करप्शन कनेक्शन कोई नयी बात नहीं। आमजन को भी यह पता है। अब तो खुलेआम लोग कहने लगे हैं कि कुछ पत्रकार तो चंद रुपए में बिक जाते हैं। मैं भी इसी बिरादरी से हूं। लेकिन, लोगों की भावनाओं को समझता हूं। ये वही लोग हैं जो यह भी कहते हैं कि अखबार या टीवी में दिया है, तो सच ही होगा। यह उनका विश्वास है, अटूट! इसी कारण मैं लोगों की बात सुनकर बुरा नहीं मानता। इसमें बुरा मानने जैसी कोई बात भी नहीं। वैसे शिकवा-शिकायत पर तो अपनों का ही अधिकार होता है। 
पिछले दिनों एक परिचित मुझे पटना में एक लोकल चैनल के दफ्तर में ले गये। वहां एक व्यक्ति से मेरा परिचय कराया। मुझे बताया गया कि ये चैनल के हेड हैं। फिर वे आपस में बातें करने लगें। उन दोनों की बात सुनकर मुझे काफी हैरानी हुई। दो घंटे के वार्तालाप में वे सिर्फ वसूली और बड़े-बड़े अधिकारियों, नेताओं से अपने कनेक्शन पर ‘बकलोली’ करते दिखे। तथाकथित चैनल हेड यह बार-बार बताते नहीं थकते थे कि कैसे उनके दफ्तर में रात दस के बाद बड़े-बड़े पुलिस अधिकारी और नेता आकर घंटों बैठते हैं। और यहीं से कैसे-कैसे ‘खेल’ हो जाते हैं। उस दिन मुझे लगा था, मेरा जीवन कितना व्यर्थ है। अपने बीस वर्षों की पत्रकारिता में मैं सिर्फ समाज, गरीब, मुसहर, न्याय जैसे शब्दों के मायाजाल में ही उलझा रहा। और तभी मुझे पता चला, इससे बाहर एक अनोखी ‘बहार की दुनिया’ भी है। यहां पैसा, शोहरत, अय्यासी का पूरा सामान है!
चैनल की बात निकली है तो कुछ और बात कर ही लेता हूं। आज चैनलों की भरमार है। और चैनल में काम करने वालों की तो पूछिए ही मत ! अब तो ऐसे-वैसे भी चैनल में आसानी से बहाल हो जाते हैं, जो ठीक से हिन्दी भी नहीं बोल पाते। आपने देखा होगा, कैसे-कैसे सवाल पूछे जाते हैं। 
पटना में ही अगलगी की घटना हुई थी। करीब दो सौ झोपड़ियां जलकर राख हो गयीं। मैं भी वहां पहुंचा था। एक लोकल चैनल के पत्रकार ने पीड़ित से पूछ लिया - ‘‘आपको कैसा लग रहा है ?’’ मैं बगल में खड़ा था। सवाल वे पूछ रहे थे, शर्म मुझे आ रही थी। आखिर इन्हीं कारणों से पूरी बिरादरी बदनाम होती है। खैर, मैं अखबार, पत्रिका से जुड़ा रहा हूं। उसी की बात करता हूं। 
तब मुझे पटना से प्रकाशित सबसे बड़े हिन्दी समाचार पत्र में काम करने का अवसर मिला था। मैं वहां लंबे समय तक रहा। मुझे पता चला कि जिलों में कार्यरत अधिकांश पत्रकारों को वेतन नहीं मिलता, प्रति खबर दस रुपए दिये जाते हैं। मैं सोच में पड़ गया, कैसे उन बेचारों का गुजारा चलता होगा। सुबह से देर रात तक वे भाग-दौड़ करते हैं। प्रतिदिन अगर पांच खबरें भी प्रकाशित हों, तो सिर्फ पचास रुपए ही बनते हैं। इससे ज्यादा का पेट्रोल तो प्रतिदिन बाइक पी जाती होगी। 
कुछ समय बाद मुझे पटना से बाहर व्यक्तिगत काम से जाना पड़ा। संयोग से एक पत्रकार मिल गये। परिचय हुआ, बातों का सिलसिला चल पड़ा। वे बताने लगे - ‘‘भैया, अब तो मीडिया-हाऊस ही अप्रत्यक्ष रूप से वसूली करने को प्रेरित करता है। समझने की बात है, अखबार के काम से दिनभर बाहर रहने वाले पत्रकार को उसके परिश्रम का पुरस्कार पचास रुपए मिले, तो क्या वह हवा पीकर रह सकता है ? सच्चाई यह है कि जिले के अधिकांश पत्रकारों का रहन-सहन किसी रईस की तरह होता है। तो फिर कहां से बरसते हैं पैसे ! और जो पत्रकार इस धारा में नहीं बहते, वे अपने घर पर भार ही होते हैं। अकाल मौत को प्राप्त होते हैं। और वही अखबार, उनकी मृत्यु की दो लाइन की खबर भी प्रकाशित नहीं करता ! 
कहा जाता है कि पत्रकारों का काम ही खुद ब खुद उनका परिचय दे देता है। लेकिन, दुखद है कि आजकल के पत्रकार खुद को काम से नहीं, जबान से बड़ा बताने में लगे हैं। ये उन गरीबों की नहीं सुनते, जो सबसे ज्यादा उनपर विश्वास करते हैं। ये उन गरीबों के पास नहीं जाते, जो आज भी उन्हें सबसे ज्यादा सम्मान देते हैं। ये लाल बत्ती के पीछे भागने वाले पत्रकार हैं। वीआईपी से सटे रहने वाले जीव हैं। जिस तरह कोई नेता वोट बैंक के हिसाब से काम करता है, उसी तरह ये पत्रकार लाभ-हानि को ध्यान में रख काम करते हैं। 
ये उन कार्यक्रमों में ज्यादा जाना पसंद करते हैं, जहां खाने-पीने की पूरी व्यवस्था हो। साथ ही, उन कार्यक्रमों को ज्यादा महत्व देते हैं, जहां गिफ्ट बांटी जाती हो। लेकिन, वैसी जगह जाना पसंद नहीं करते, जहां ना खाने-पीने की व्यवस्था हो और ना गिफ्ट मिले। ये ‘पेड न्यूज’ को खास खबर बना डालते हैं। इनमें विज्ञापन को भी खबर बना डालने का हुनर होता है। चुनाव का ये बेसब्री से इन्तजार करते हैं। बड़े नेताओं के कार्यक्रमों में जाने की आपाधापी मचाते हैं। ये दूसरों या अपने जूनियर की खबर को भी अपनी खबर बना लेते हैं। ये सच को झूठ और झूठ को सच बनाने के खिलाड़ी होते हैं। ये वैसे लोग हैं, जो अपने ऊपर लगे इल्जाम से खुद ही अपनी अदालत में अपने कुतर्कों से बरी हो जाते हैं। क्योंकि यह है मीडिया का करप्शन कनेक्शन।

मंगलवार, 3 मई 2016

‘राजमार्गों के पास हरियाली से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को फायदा’

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग और शिपिंग मंत्री नितिन गडकरी ने नई दिल्ली में ‘राष्ट्रीय राजमार्गों के आसपास प्रतिरोपण’ पर एक कार्यशाला का उद्घाटन किया। अपने उद्घाटन संबोधन में श्री गडकरी ने कहा, ‘सड़कों को हरित राजमार्ग के अवसरों के रूप में देखा जाना चाहिए। पर्यावरण एवं सौन्दर्य पहलुओं के अलावा इनमें रोजगार सृजन की भी व्यापक संभावना है। अतः इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को काफी फायदा होगा। यहां तक कि इसे नरेगा योजना से भी जोड़ा जा सकता है।’ उन्होंने कहा, ‘अगर जरूरत पड़ी तो हम चयनित एजेंसी को तकनीकी एवं वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराएंगे। प्रोत्साहन के रूप में हर साल प्रत्येक राज्य के तीन विजेताओं को उल्लेखनीय कार्य के लिए पुरस्कृत किया जाएगा।’ उन्होंने कहा कि उपग्रह संबंधी प्रौद्योगिकी के जरिये परियोजनाओं पर नजर रखी जाएगी और परियोजनाओं के सफल होने के बाद ही भुगतान किया जाएगा। श्री गडकरी ने अनुसंधान संगठनों जैसे कि टेरी से पौधरोपण तकनीकों पर अपनी जानकारियों को साझा करने का आग्रह किया। मंत्री महोदय ने यह भी सुझाव दिया कि एनएचएआई राजमार्गों के आसपास स्थित क्षेत्रों में खुदाई करके विभिन्न सामग्री जैसे कि रेत एवं मिट्टी का इस्तेमाल कर सकती है और इससे गांव भी लाभान्वित होंगे, क्योंकि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं के लिए अत्यंत आवश्यक तालाबों एवं झीलों का सृजन होगा। 
राजमार्गों के आसपास हरियाली को बढ़ावा देने से होने वाले पर्यावरण संबंधी फायदों का उल्लेख करते हुए माननीय मंत्री महोदय ने परियोजना में इस्तेमाल की जाने वाली मशीनों में जैव ईंधनों और प्रतिरोपण किये जाने वाले पौधों में जैव उर्वरकों का इस्तेमाल करने का आग्रह किया। 
एनएचएआई के चेयरमैन राघव चंद्र ने कहा, ‘हमने अपनी परियोजना लागत की एक प्रतिशत राशिको प्रतिरोपण, वृक्षारोपण, सौंदर्यीकरण और रख-रखाव कार्यों के लिए अलग से रखा है। हमारे पास पर्याप्त धन है और हम एसओपी की स्थापना, क्षमता निर्माण और सर्वश्रेष्ठ वैश्विक प्रथाओं को आत्मसात करने के लिए इसका इस्तेमाल करने का इरादा रखते हैं।’ 

‘मोबाइल फोन हैंडसेट में पैनिक बटन और ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम नियम 2016’

दूरसंचार विभाग ने ‘मोबाइल फोन हैंडसेट में पैनिक बटन और ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम नियम 2016’ अधिसूचित कर दिए हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने जून, 2014 में एक पहल के रूप में मोबाइल फोन में एक पैनिक बटन लगाने का मुद्दा उठाया था। यह जरूरी समझा गया था कि गंभीर संकट में फंसी महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने के लिए यह आवश्यक है कि कोई ऐसी सटीक व्यवस्था हो जिससे कि वे अपने किसी परिजन अथवा पुलिस अधिकारियों को आपातकालीन सिग्नल भेज कर अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें। 
मंत्रालय ने अनेक हितधारकों और दूरसंचार विभाग के साथ इस मसले पर विचार-विमर्श किया था और इस बात पर विशेष जोर दिया था कि मोबाइल फोन पर एप के बजाय पैनिक बटन होना ज्यादा कारगर साबित होगा। यह दलील दी गई थी कि किसी संकट में फंसी महिला के लिए महज एक-दो सेकेंड ही अपने बचाव के लिए होते हैं, क्योंकि उस पर शारीरिक व यौन हमला करने वाला व्यक्ति अक्सर उसके मोबाइल फोन को अपने कब्जे में लेने के लिए झपटता है। विस्तृत विचार-विमर्श के बाद दूरसंचार विभाग और हितधारक आखिरकार मोबाइल फोन में यह सुविधा सुनिश्चित करने पर सहमत हो गए। 
तदनुसार, दूरसंचार विभाग ने पैनिक बटन पर नियमों को अधिसूचित कर दिया है। इसके लिए 22 अप्रैल, 2016 को जारी अधिसूचना के तहत 1 जनवरी, 2017 से सभी फीचर फोन में पैनिक बटन की सुविधा होगी, जिसके लिए इसके की-पैड के 5वें अथवा 9वें बटन को निर्धारित किया जाएगा। इसी तरह सभी स्मार्ट फोन में भी पैनिक बटन की सुविधा होगी, जिसके लिए इसके की-पैड के ऑन-ऑफ बटन को तीन बार बेहद थोड़े समय के लिए दबाना होगा। यही नहीं, 1 जनवरी, 2018 से सभी मोबाइल फोन में ऐसी विशेष सुविधा देनी होगी, जिससे उपग्रह आधारित जीपीएस के जरिये यह पता लगाया जा सकेगा कि किसी खास समय पर वह फोन किस स्थान पर था। महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका संजय गांधी ने यह ऐतिहासिक कदम उठाने पर प्रधानमंत्री को बधाई दी।

‘दिल्ली में सुभाष चंद्र बोस का स्मारक बनेगा’

  • नेताजी सुभाष चन्द्र बोस से जुड़ी 25 फाइलों को सार्वजनिक किया गया
  • वेब पोर्टल www-netajipapers-gov-in पर किया गया जारी
केन्द्रीय संस्कृति (स्वतंत्र प्रभार), पर्यटन (स्वतंत्र प्रभार) तथा नागर विमानन राज्यमंत्री डॉ. महेश शर्मा ने राष्ट्रीय अभिलेखागार, भारत में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस से जुड़ी 25 फाइलों को सार्वजनिक किया और उन्हें वेब पोर्टल www-netajipapers-gov-in पर ऑनलाइन जारी किया। यह नेताजी से जुड़ी सार्वजनिक की गईं फाइलों की तीसरी खेप है। इस अवसर पर मंत्री महोदय ने कहा कि लंबे समय से लंबित मांग को पूरा करने के लिए सरकार दिल्ली में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का स्मारक बनवाएगी।
उन्होंने कहा कि नेताजी से जुड़ी फाइलों को गोपनीयता सूची से हटाकर उन्हें सार्वजनिक करने की एक सतत प्रक्रिया है। इसे लोगों की लगातार की जा रही मांग के मद्देनजर सार्वजनिक किया जा रहा है, ताकि वह इन्हें पढ़ सकें। इसके अलावा सार्वजनिक की गई ये फाइलें स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व करने वाले सेनानियों पर आगे का शोध करने में उनकी मदद करेंगी।
सार्वजनिक की गईं इन 25 फाइलों की खेप में 05 फाइलें प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से, 05 फाइलें गृह मंत्रालय (एमएचए) से और 15 फाइलें विदेश मंत्रालय (एमईए) से हैं। ये फाइलें 1956 से 2009 की अवधि से संबंधित हैं।
नेताजी से जुड़ी 100 फाइलों की पहली खेप सबसे पहले 23 जनवरी, 2016 को नेताजी के जन्मदिन की 119वीं सालगिरह के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा वेब पोर्टल पर सार्वजनिक की गई थी। 50 फाइलों की दूसरी खेप केन्द्रीय संस्कृति (स्वतंत्र प्रभार), पर्यटन (स्वतंत्र प्रभार) तथा नागर विमानन राज्यमंत्री डॉ. महेश शर्मा द्वारा 29 मार्च, 2016 को वेब पोर्टल पर जारी की गई थी।
इन फाइल्स ने उस विशेष रूप से गठित समिति की जांच को पार कर लिया, जिसमें अभिलेखागार क्षेत्र के विशेषज्ञ होते हैं, जो इन पहलुओं पर नजर रखते हैं :
  1. संरक्षण ईकाई के जरिए फाइलों की स्थिति, आवश्यक मरम्मत करने व जहां भी जरूरत हो, संरक्षण के लिए।
  2. वेब पोर्टल पर डिजिटाइज्ड रिकोर्ड्स को अपलोड करने के लिए डिजिटलीकरण की गुणवत्ता सत्यापित करने के लिए
  3. यह जांचना कि फाइलों में कहीं दोहराव तो नहीं है।
  4. इंटरनेट पर शोधार्थियों और आम जनता के इस्तेमाल के लिए जारी किया जाना है। 
1997 में भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार ने गोपनीय सूची से हटाई गई 990 फाइलें रक्षा मंत्रालय से प्राप्त कीं, जो कि इंडियन नेशनल आर्मी (आजाद हिंद फौज) से संबंधित थीं। 2012 में गृह मंत्रालय से खोसला कमिशन (271 फाइलें व आइटम) और जस्टिस मुखर्जी कमिशन (759 फाइलें व आइटम) से जुड़ी 1030 फाइलें प्राप्त कीं। ये सभी फाइलें व आइटम पहले ही पब्लिक रिकॉर्ड्स नियम, 1997 के तहत जनता के समझ सार्वजनिक हैं।

‘भारत स्वच्छ ऊर्जा में अब विश्व का नेतृत्व करेगा’

  • सीएसटी और सौर कुकर उत्कृष्टता पुरस्कार-2016 प्रदान किए गए
बिजली, कोयला और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री पीयूष गोयल ने सीएसटी और सोलर कुकर उत्कृष्टता पुरस्कार-2016 से सम्मानित 102 व्यक्तियों का अभिनंदन किया। श्री गोयल ने इस अवसर पर संकेंद्रित सौर तापीय प्रौद्योगिकी (सीएसटी) के बारे में सूचना प्रदान करने के लिए कई विशेषज्ञों द्वारा मिलान किए गए 9 ज्ञान दस्तावेज भी जारी किए। 
इस अवसर पर श्री पीयूष गोयल ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा के संबंध में भारत अब विश्व का अनुसरण नहीं, बल्कि नेतृत्व करेगा। उन्होंने कहा, “ग्रिड से कनेक्टिड 21 जीडब्ल्यू नई सौर परियोजनाओं के बाजार में उतरने के साथ ही भारत ने विश्व को संकेत दिया है कि वह अब छलांग लगाने को तैयार है।” 
श्री गोयल ने कहा कि सौर कार्यक्रम हमारे देश में सिर्फ ऊर्जा सुरक्षा को ही सुनिश्चित नहीं करेगा, बल्कि पिरामिड के सबसे निचले स्तर पर मौजूद अंतिम व्यक्ति तक बिजली पहुंचाएगा। पुरस्कार विजेताओं की सराहना करते हुए श्री गोयल ने कहा कि ऐसी परियोजनाएं समग्र सौर लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। 
श्री गोयल ने दोहराया कि भारतीय सौर लक्ष्यों की प्राप्ति संभव है। उन्होंने कहा कि पिछले साल की तुलना में इस साल हम अपने सौर लक्ष्यों को 116 प्रतिशत तक प्राप्त कर चुके हैं और 11000 मेगावॉट की परियोजनाएं पहले ही प्रदान कर चुके हैं। ये पुरस्कार राज्य नोडल एजेंसियों, प्रौद्योगिकी के विनिर्माताओं, आपूर्तिकर्ताओं तथा लाभार्थियों की व्यापक रेंज सहित विभिन्न हितधारक समूहों को इस क्षेत्र में उनके द्वारा प्राप्त की गई उपलब्धियों का अभिनंदन करने के लिए प्रदान किए गए हैं। 
उत्कृष्टता पुरस्कार समारोह ऑफ-ग्रिड और विकेंद्रीकृत सौर अनुप्रयोग के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियों को पहचान दिलाने के लिए नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा सीएसटी और सौर कुकर पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला का अंग है। 
इस समारोह में श्री उपेन्द्र त्रिपाठी, सचिव, एमएनआरई, श्री जैको सिलियर्स, कंट्री डायरेक्टर, यूएनडीपी, सुश्री अयुमी फुजिनो, यूएनआईडीओ प्रतिनिधि एवं क्षेत्रीय निदेशक तथा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। 
पृष्ठभूमि : नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) राष्ट्रीय सौर मिशन के “ऑफ-ग्रिड और विकेंद्रीकृत सौर अनुप्रयोग” कार्यक्रम के अंतर्गत संकेंद्रित सौर तापीय प्रौद्योगिकी (सीएसटी) पर कार्यक्रम का कार्यान्वयन कर रहा है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य औद्योगिक क्षेत्रों, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों और अन्य संस्थाओं में सीएसटी प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोगों को बढ़ावा देना है। सीएसटी प्रौद्योगिकियां कम्यूनिटी कुकिंग, लॉन्ड्री, स्पेस कूलिंग आदि जैसे विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए 90 से 300 डिग्री सेल्सियस तापमान की रेंज में विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए स्टीम, हॉट ऑयल, दाब जल में उपयोग में लाई जा सकती हैं।

अगुस्ता वेस्टलैंड पर सरकार का स्पष्टीकरण

अगुस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर खरीद का मामला निर्विदाद रूप से भ्रष्टाचार का मुद्दा है और खासकर घूसखोरी का। कुछ हलकों में इसपर लगाए जा रहे अन्य तरह के अनुमान, सोच गलत हैं और इस मामले में ये सब दिगभ्रमित करने और सच्चाई को छिपाने के प्रयास हैं और खुद को बचाने की प्रेरणा से प्रेरित हैं।
जब से नई सरकार को लोगों की सेवा की जिम्मेदारी दी गई है, यह पूरी गति से देश के आम लोगों के सशक्तिकरण के उद्देश्य से काम कर रही है। सरकार निर्बाध, पारदर्शी और निर्भीक रूप से सुशासन देने में तत्पर है। हमारे सुशासन का एक मुख्य उद्देश्य भ्रष्टाचार का पता लगाकर उसको समूल रूप से खत्म करना और दोषियों को दंडित करना है।
यह सच में बेहद दुःखद है कि राजनीतिकों के एक छोटे से हलके ने इस सार्वजनिक चर्चा को इस मुद्दे से भटकाने का असफल प्रयास किया है। वे सरकारी प्रक्रिया की गति खासकर जांच पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन वे यह जानने की कोशिश नहीं कर रहे हैं कि खरीद प्रक्रिया को भ्रष्टाचारियों ने कैसे प्रभावित किया और राष्ट्र के साथ कैसे विश्वासघात किया। वे भ्रष्टाचार की बात स्वीकार न करते हुए ये कहते हुए नजर आ रहे हैं, ‘अगर हिम्मत है तो हमें पकड़ कर दिखाओ।’ मौजूदा सरकार ने इस मामले में सच्चाई को सामने लाने के लिए प्रभावी कार्रवाई की है और कहा है कि वह भ्रष्टाचारियों एवं दोषियों को सजा दिलाने में कोई कसर बाकी नहीं रखेगी।
सरकार ने निरंतर और सक्रियता से अगस्ता वेस्टलैंड इंटरनेशनल और फिनमेकानिका के खिलाफ कार्रवाई की है। यह मौजूदा सरकार ही है, जिसने अपने 3 जुलाई, 2014 के आदेश के माध्यम से सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी में नामजद मेसर्स अगस्ता वेस्ट लैंड इंटरनेशनल लिमिटेड, यूके, मेसर्स फिनमेकानिका, इटली और इस समूह की सहयोगी और इससे संबंधित कंपनियों आईडीएस, ट्यूनीशिया, मेसर्स इंफोटेक डिजायन सिस्टम(आईडीएस), मॉरिशस मेसर्स आईडीएस इंफोटेक लिमिटेड, मोहाली और एरोमैट्रिक्स इंफो सोल्युशन प्राइवेट लिमिटेड चंडीगढ़ से किसी तरह की खरीद व अधिग्रहण पर तात्कालिक रूप से रोक लगा दी।
ऐसा करते वक्त सरकार ने अपने सुरक्षा बलों की तैयारी का नुकसान नहीं होने दिया। इसी दौरान यह भी सुनिश्चित किया कि कोई भी बड़ी खरीदारी मौजूदा सरकार आपने कार्यकाल में इन कंपनियों से नहीं करेगी। 
विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड द्वारा एक संयुक्त उपक्रम में शामिल अगस्ता वेस्टलैंड को लेकर भी एक भ्रामक सूचना फैलाई जा रही है। इस प्रस्ताव की मंजूरी 2 सितंबर, 2011 को अगस्ता वेस्ट लैंड एनवी नीदरलैंड के साथ टाटा संस के साथ संयुक्त उपक्रम में शामिल इंडियन रोटोक्राफ्ट लिमिटेड के आवेदन के आधार पर दी गई थी। इसे बाद में पता चलने पर अगस्ता वेस्टलैंड एसपीए के रूप में बदल दिया गया। 7 फरवरी, 2012 को औद्योगिक नीति एवं संवर्द्धन विभाग द्वारा इंडियन रोटोक्राफ्ट लिमिटेड का हेलीकॉप्टर बनाने के लिए औद्योगिक लाइसेंस मंजूर किया गया था, लेकिन तब से इस लाइसेंस की वैधता समाप्त हो गई है।
भ्रष्टाचार से लोगों का ध्यान भटकाने के तहत चलाए जा रहे अभियान में कुछ लोगों का कहना है कि मोदी सरकार ने अगस्ता वेस्टलैंड को 100 नवल यूटिलिटी हेलीकॉप्टर के लिए अप्रैल 2015 में बोली लगाने की अनुमति दी। हकीकत यह है कि नवल यूटिलिटी हेलीकॉप्टर के लिए तकनीकी-वाणिज्यिक आग्रह (आरएफपी) का प्रस्ताव 4 अगस्त, 2012 को 4 विक्रेताओं को जारी किया गया। इस प्रस्ताव के जवाब में मेसर्स यूरोकॉप्टर, फ्रांस, मेसर्स अगस्ता वेस्टलैंड एसपीए इटली ने 4 मार्च, 2013 को तकनीकी-वाणिज्यिक प्रस्ताव पेश किया। खरीदारी के इस आरएफपी को सरकार ने 13 अक्टूबर, 2014 को वापस ले लिया।
भारतीय नौसेना ने अपनी वेबसाइट पर 100 नवल यूटिलिटी हेलीकॉप्टर की सूचना के लिए अक्टूबर 2014 को आग्रह पेश किया। प्रस्ताव के लिए किसी तरह का आग्रह जारी नहीं किया गया। ऐसे में अप्रैल, 2015 में नवल यूटिलिटी हेलीकॉप्टर के लिए बोली लगाने के लिए अगस्ता वेस्टलैंड को मंजूरी देने का सवाल ही नहीं उठता। सरकार इस बात की तलाश कर रही है कि क्या उनका निर्माण ‘मेक इन इंडिया’ के तहत चलाया जा सकता है।
भ्रष्टाचार के प्रमुख मुद्दे पर सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय ने कठोरता और बहुत ही मेहनत से कार्रवाई की है। इन एजेंसियों ने तीन विदेशियों की गिरफ्तारी और प्रत्यावर्तन सहित जांच के हर पहलू पर काम किया है।  
जहां तक सीबीआई का सवाल है उसने 100 से अधिक गवाहों की जांच की है। वर्ष सितंबर और नवंबर 2014 में कुछ आरोपियों को गिरफ्तार कर उनकी संपत्ति कुर्क कर दी गई। एक आपराधिक शिकायत भी दर्ज कर ली गई। ईडी और सीबीआई द्वारा मॉरीशस (जुलाई 2013) ट्यूनीशिया और इटली (दिसंबर 2013), ब्रिटिश वर्जिन आइसलैंड, सिंगापुर और यूके (सितंबर 2014) और स्विटजरलैंड (दिसंबर) 2014 को अनुरोध प्रत्र भेजा गया। एजेंसियां एलआर के जवाब के लिए संबंधित देशों के साथ संपर्क बनाए हुए हैं। इसके बाद भी इस दिशा में लगातार कार्यवाही करते हुए सीबीआई ने 24 सिंतंबर, 2015 को क्रिश्चयन जेम्स मिशेल के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया। इंटरपोल के जरिेये दिसंबर 2015 और जनवरी 2016 में मनी लांड्रिंग एक्ट और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत साजिश रचने और मेसर्स एडब्ल्यूआईएल को मदद करने के लिए आधिकारिक पद का दुरुपयोग करने के लिए रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया है। जेम्स क्रिश्चयन मिशेल के प्रत्यावर्तन के लिए भी आग्रह किया गया है। सीबीआई द्वारा यूके के अधिकारियों से प्रत्यावर्तन के लिए उसे तात्कालिक रूप से गिरफ्तार करने का भी आग्रह 4 जनवरी, 2016 को किया गया है।
निजी मनी लांड्रिंग और विदेशी विनिमय की गडबडि़यों को पकड़ने वाली एक और स्वायत्त संस्था प्रत्यवर्तन निदेशालय ने भी 29 फरवरी, 2016 को यूके को अलग से रेड कॉर्नर भेजकर उसकी गिरफ्तारी और प्रत्यावर्तन का आग्रह किया है।
जेम्स क्रिश्चयन मिशेल के द्वारा 08-11-2015 को सीबीआई और ईडी द्वारा भारतीय धरती पर सवाल पूछने के दिए गये कथित प्रस्ताव पर भाजपा और प्रधानमंत्री द्वारा कोई कार्रवाई न करने पर सवाल उठाकर भी कुछ लोगों ने वांछित अपराधी का ही साथ दिया है। गौरतलब है कि कानून की परिधि के बाहर किसी भी आरोपी से किसी तरह की समझ रखना व समझौता करना आपराधिक कृत्य है। जेम्स क्रिश्चयन मिशेल भारतीय कानून प्रत्यावर्तन एजेंसियों का एक वांछित अपराधी है। उसकी गिरफ्तारी और प्रत्यावर्तन कर भारत लाने के लिए सभी कानूनी साधनों का प्रयोग किया जा रहा हैं। मिशेल को तरह-तरह के बहाने तलाशने की बजाय अपने आपको भारतीय कानूनी व्यवस्था के समक्ष समर्पण कर देना चाहिए। वे हकीकत में आरोपी हैं। देश इस बात के प्रति दृढ़प्रतिज्ञ हैं कि मिशेल और उसके सहयोगियों के खिलाफ कानून अपना काम करेगा।
वे लोग जो प्रधानमंत्री को अपने उद्देश्यों में सफल होते नहीं देखना चाहते हैं, वे ही उनपर इस तरह के आरोप लगा रहे हैं। सच्चाई से परे कुछ भी नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी ने किसी भी प्रकार का कोई सौदा नहीं किया है। उनका एकमात्र लक्ष्य और प्राथमिकता, विकास और राष्ट्र को व्यापक मजबूती प्रदान करते हुए लोगों को सशक्त बनाना है।    
कुछ लोगों ने तो मौजूदा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार श्री अजित डोभाल और प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव श्री नृपेंद्र मिश्र के साथ भी एक आरोपी के तार जोड़ दिए। ये पूर्णतः झूठा दावा है, किसी तरह के कारण और तर्क से रहित हैं और इससे उनकी दुर्भावना का संकेत मिलता है। वास्तविकता में इस तरह का कोई संबंध है ही नहीं।
कुछ क्षेत्रों में इस मामले में अपनी हदों को पार करते हुए राजस्थान तथा छत्तीसगढ़ की कैग रिपोर्ट पर कहा कि अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर खरीद में कैग की आलोचना के बाद भी मोदी सरकार ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री रमन सिंह के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। इससे सरकारी खजाने को (कैग के अनुसार) 65 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
लेकिन, सरकार ने राज्य सरकार से भी जवाब लेने में सक्रियता दिखाई है। छत्तीसगढ़ की राज्य सरकार के अनुसार छत्तीसगढ़ विधानसभा की लोक लेखा समिति ने साल 2007 में की गई खरीद के संदर्भ में कैग की रिपोर्ट का संज्ञान लिया है। समिति ने राज्य के सरकारी अधिकारियों से सबूत भी लिए हैं। सबूतों के विश्लेषण करने और राज्य सरकार की रिपोर्ट के बाद लोक लेखा समिति ने इस मामले को बंद कर दिया है।
इसी तरह राजस्थान सरकार के मुताबिक, कैग की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि सार्वजनिक खजाने को कथित तौर पर हुआ घाटा खरीद प्रक्रिया में गड़बड़ी के कारण नहीं हुआ है। यह खर्च योजना बनाने में कमी, खरीद से पूर्व बुनियादी संरचना के अभाव जैसे पायलटों के प्रशिक्षण और रखरखाव के कारण हुआ है। यह खरीद भी 2005 में ही हुई थी।
सरकार देश के लोगों से अपील करती है कि वे अगस्ता वेस्टलैंड मामले में भ्रष्टाचार की प्रकृति और गहराई को समझें। जांच एजेंसियां इस मामले में भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करते हुए जनता के प्रति अपनी जबावदेही को सुनिश्चित करेंगी।