COPYRIGHT © RAJIV MANI, Journalist, Patna

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बुधवार, 31 अगस्त 2016

‘फार्मा सही दाम’ मोबाइल एप्प लांच

नई दिल्ली : रसायन और ऊर्वरक तथा संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने फार्मा उद्योग, राज्य सरकारों, अन्य विभागों तथा सिविल सोसायटी से साधारण जन को उचित कीमत पर औषधि उपलब्ध कराने की अपील की है। एनपीपीए स्थापना दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए अनंत कुमार ने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में 900 दवाओं को मूल्य नियंत्रण के अधीन लाया गया है। इससे उपभोक्ताओं को 5,000 करोड़ रुपये की बचत हो रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय फार्मास्युटिकल मूल्य निर्धारण प्राधिकार (एनपीपीए) ने आवश्यक दवाओं की नई राष्ट्रीय सूची-2015 जारी होने के 6 महीने के अंदर 368 नई दवाओं को मूल्य सीमा के दायरे में ला दिया है। 
रसायन और ऊर्वरक तथा संसदीय कार्य मंत्री ने एनपीपीए द्वारा विकसित मोबाइल ऐप्प “फार्मा सही दाम“ लांच किया। यह ऐप्प एनपीपीए द्वारा निर्धारित विभिन्न अनुसूचित दवाओं का अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) दिखाता है। उन्होंने एनपीपीए का लोगो भी जारी किया। यह लोगो सभी अनुसूचित दवाओं की पैकिंग पर अंकित होगा। श्री अनंत कुमार ने कहा कि डाटा एकत्रित करने तथा एनएलईएम में शामिल दवाइयों, जिनके बारे में बाजार डाटा नहीं है, पर उचित कदम उठाने के लिए एनपीपीए को और अधिक शक्ति प्रदान करने के लिए संशोधन किया जाएगा। अनंत कुमार ने कहा कि वे फार्मास्युटिकल के लिए अलग मंत्रालय बनाने के प्रस्ताव को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि उद्योग से संबंधित सभी निर्णयों को एक छत के नीचे लिया जा सके। 
उन्होंने भारत के प्रत्येक नागरिक की स्वास्थ्य सुरक्षा के लक्ष्य को हासिल करने के लिए ‘3ए‘ दृष्टिकोण अपनाने की वकालत की। उन्होंने बल देते हुए कहा कि उपलब्धता, उचित मूल्य पर उपलब्धता और पहुंच को सुनिश्चित करके ही सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा प्रदान की जा सकती है। श्री कमार ने कहा कि सरकार फार्मास्युटिकस पार्क, चिकित्सा उपकरण पार्क, फार्मास्युटिकल क्लस्टर तथा अटल नवाचार योजना के माध्यम से नवाचार संवर्धन के जरिए फार्मा उद्योग को सहयोग दे रही है। 
अनंत कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गतिशील नेतृत्व में साधारण जन को उचित मूल्य पर दवाइयां उपलब्ध कराने के लिए दोतरफा रणनीति अपनाई जा रही है। इसके अनुसार, एक ओर एनपीपीए द्वारा मूल्यों का नियमन किया जा रहा है और दूसरी तरफ प्रधानमंत्री जन औषधि स्टोर खोले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश के सभी जिलों और तहसिलों को शामिल करते हुए एक वर्ष के अंदर 3000 प्रधानमंत्री जन औषधि स्टोर खोले जाएंगे। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री जन औषधि स्टोर में दवाएं बाजार मूल्य की तुलना में 30 से 40 प्रतिशत मूल्य की होती हैं और प्रधानमंत्री जन औषधि स्टोर में कोई भी दवा बाजार मूल्य से 50 प्रतिशत से अधिक की नहीं है। 
इस अवसर पर एनपीपीए के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह, स्वास्थ्य मंत्रालय के अपर सचिव केबी अग्रवाल, भारत के औषधि महानिदेशक डॉ. जीएन सिंह, फार्मास्युटिकल विभाग के संयुक्त सचिव सुधांशु पंत तथा फार्मास्युटिकल विभाग के संयुक्त सचिव डॉ. एम. अरीज अहमद ने भी विचार व्यक्त किए।

ई-गाड़ियों व ई-रिक्शा को परमिट की आवश्यकता नहीं

 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने ई-रिक्शा और ई-गाड़ियों को परमिट आवश्यकताओं से मुक्त करने की राजपत्रित अधिसूचना जारी कर दी है। अधिसूचना के अनुसार, मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 66 की उप-धारा (1) के प्रावधान ई-गाड़ियां और ई-रिक्शा (जैसा की उक्त अधिनियम की धारा 2 ए में परिभाषित) पर लागू नहीं होगा, जिसका इस्तेमाल व्यक्तिगत सामान या यात्रियों को लेजाने के लिए किया जाता हो। इसका मतलब यह है कि वैसे वाहन जो ई-गाड़ियां या ई-रिक्शा के रूप में पंजीकृत हैं, उसे किसी भी परमिट की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि राज्य सरकारें विशिष्ट क्षेत्रों या विशिष्ट सड़कों में इन वाहनों के चलने पर उचित यातायात कानूनों के तहत प्रतिबंध लागू कर सकते हैं।

स्वच्छ भारत मिशन पर ‘कॉमिक-बुक’ का होगा प्रकाशन

नई दिल्ली : स्वच्छ भारत मिशन पर ‘कॉमिक-बुक’ के एक विशेष संस्करण के प्रकाशन और वितरण के लिए शहरी विकास मंत्रालय और अमर चित्र कथा के बीच सहमति-पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। यह ‘कॉमिक-बुक’ 32 पन्नों की होगी, जिसमें स्वच्छ भारत मिशन के स्वच्छता और ठोस कचड़ा प्रबंधन के संबंध में संदेश शामिल होगा।
इस अवसर पर शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने स्वच्छ भारत मिशन में अमर चित्र कथा की भागीदारी की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि देश के युवा और छात्र हर प्रकार के सामाजिक बदलाव में महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। श्री नायडू ने कहा कि आशा है कि यह ‘कॉमिक-बुक’ बच्चों को अपने घरों, स्कूलों, पड़ोस और अंततः अपने शहरों को स्वच्छ बनाने के लिए प्रेरित करेगी। उन्होंने कहा कि इस कदम से स्वच्छ भारत मिशन एक जनांदोलन के रूप में उभरेगा। 
पुस्तक में मिशन, शहरों के लिए स्वच्छता रैंकिंग, पर्यावरण और व्यक्तियों तथा संगठनों के बारे में प्रेरक कहानियां दी जाएंगी, ताकि बच्चों में स्वच्छता की भावना पैदा हो। पुस्तक में ऐसे बिन्दु और उपाय भी बताए जाएंगे, जिससे बच्चों को अपने क्षेत्रों की सफाई के बारे में जानकारी मिलेगी। इसके अलावा एक खंड में यह भी बताया जाएगा कि स्वच्छता अभियान के लिए समुदायों को किस प्रकार संगठित किया जाए। अमर चित्र कथा इस ‘कॉमिक-बुक’ का विशेष संस्करण अंग्रेजी में तैयार करेगा और उसका अनुवाद हिन्दी में किया जाएगा। ‘कॉमिक-बुक’ और उसमें दी गई कहानियों को बड़े पैमाने पर प्रसारित करने के लिए शहरी विकास मंत्रालय उन्हें सीबीएससी, केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालय के जरिये वितरित करेगा।

विश्व बैंक के एलपीआई में भारत 35वें स्थान पर

नई दिल्ली : विश्व बैंक ने हाल में लॉजिस्टिक्स कुशलता सूचकांक (एलपीआई) 2016 रिपोर्ट जारी की है। इसका शीर्षक है ‘कनेक्टिंग टू कम्पलीट 2016’। विश्व बैंक प्रत्येक दूसरे वर्ष लॉजिस्टिक्स कुशलता सूचकांक प्रकाशित करता है। भारत अब 160 देशों में 35वें स्थान पर है। 2014 में भारत एलपीआई रैंकिंग में 54वें स्थान पर था। यह 19 स्थानों की छलांग है। एलपीआई के 6 मानकों - कस्टम, अवसरंचना, पोत लदान, लॉजिस्टिक्स गुणवत्ता, सक्षमता तथ ट्रेकिंग, ट्रेसिंग और समय के संदर्भ में भारत की रैंकिंग क्रमशः 38, 36, 39, 32, 33 और 42 है। 
एलपीआई एक सक्रिय मानक निर्धारण उपाय है। इसका उद्देश्य व्यापार लॉजिस्टिक्स में कुशलता प्राप्ति में आने वाली चुनौतियों तथा अवसरों को पहचानने में देशों की मदद करना है और यह बताना है कि देश अपनी कुशलता बढ़ाने के लिए क्या कर सकते हैं। एलपीआई हितधारकों के विश्वव्यापी सर्वेक्षण पर आधारित है। यह सूचकांक देशों में लॉजिस्टिक्स सहजता का फीडबैक देता है। इसमें हितधारियों के कारोबारी देशों के बारे में व्यापक जानकारी होती है और हितधारक वैश्विक लॉजिस्टिक्स वातावरण का अनुभव करते हैं। हितधारकों से प्राप्त फीडबैक को पूरक रूप कार्य देश में लॉजिस्टिक्स श्रृंखला के विभिन्न मानकों के विश्लेषण से दिया जाता है। लॉजिस्टिक्स कुशलता सूचकांक में भारत की रैंकिंग में सुधार से यह स्थापित होता है कि हम वैसे मैन्युफेक्रचरिंग तथा व्यापार में स्पर्धी हैं, जो मेक इन इंडिया कार्यक्रम के प्रेरक के रूप में भी कार्य करते हैं।

पद्म पुरस्कार 2017 के लिए नामांकन

 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : पद्म पुरस्कार, 2017 के लिए नामांकन जारी है। नामांकनों की प्राप्ति की अंतिम तिथि 15 सितंबर, 2016 है। पद्म पुरस्कारों के लिए नामांकन, सिफारिशें गृह मंत्रालय द्वारा तैयार की गई इलेक्ट्रॉनिक प्रबंधन प्रणाली पर केवल ऑनलाइन ही स्वीकार की जाएंगी। यह वेबसाइट : www.padmaawards.gov.in पर उपलब्ध है। नामांकन, सिफारिश का कोई भी अन्य तरीका स्वीकार्य नहीं होगा। 15 सितंबर, 2016 के बाद प्राप्त होने वाले नामांकनों पर विचार नहीं किया जाएगा। विस्तृत जानकारी के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय की वेबसाइट : www.mha.nic.in के ‘अवार्ड्स एंड मेडल्स’ कॉलम पर क्लिक करें। इन पुरस्कारों से संबंधित विधियां और नियम केंद्रीय गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। इसके लिए लिंक है http://mha-nic-in/sites/upload_files/mha/files/PadmaAwards2017-pdf 

सुभाष चंद्र बोस संबंधी 25 गोपनीय फाइलों की 7वीं किस्त जारी 

नई दिल्ली : नेताजी सुभाष चंद्र बोस से सम्बंधित 25 गोपनीय फाइलों की सातवीं किस्त को जारी कर दिया गया। ये फाइलें www.netajipapers.gov.in पर उपलब्ध करा दी गयी हैं। इन फाइलों को संस्कृति सचिव एनके सिन्हा ने जारी किया। उक्त 25 फाइलें विदेश मंत्रालय (1951-2006) से सम्बंधित हैं।
ज्ञात हो कि नेताजी से सम्बंधित 100 गोपनीय फाइलों की पहली खेप को शुरूआती संरक्षण उपचार और उनका डिजिटलीकरण करने के बाद 23 जनवरी, 2016 को नेताजी की 119वीं वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जनता के लिए जारी किया था। उसके बाद 50 फाइलों की दूसरी खेप, 25 फाइलों की तीसरी खेप, 25 फाइलों की चैथी खेप, 25 फाइलों की पांचवीं खेप और 25 फाइलों की छठवीं खेप को क्रमशः 29 मार्च, 2016, 29 अप्रैल, 2016, 27 मई, 2016, 29 जून 2016 और 29 जुलाई 2016 को जारी किया गया था। अबतक कुल 250 फाइलों को जनता के लिए खोल दिया गया है।
जिन 25 फाइलों को जारी किया गया है, वे नेताजी से संबंधित फाइलों को जानने के लिए जनता की आकांक्षा के अनुरूप हैं। इन फाइलों से अध्येयताओं को भारत के स्वतंत्रता संग्राम के बारे में और अनुसंधान करने की सुविधा होगी। इन फाइलों की विशेष रूप से गठित समिति ने जांच की है। समिति में अभिलेखों से संबंधित विशेषज्ञों को रखा गया है। 
उल्लेखनीय है कि 1957 में राष्ट्रीय अभिलेखागार भारत को रक्षा मंत्रालय की ओर से आजाद हिन्द फौज के संबंध में 990 डी-क्लासिफाईड फाइलें प्राप्त हुई थीं। इसके बाद 2012 में खोसला आयोग से संबंधित 271 फाइलें, सामग्री तथा न्यायमूर्ति मुखर्जी जांच आयोग की 759 फाइलें, सामग्री प्राप्त हुई थीं। इस तरह गृह मंत्रालय से कुल 1030 फाइलें, सामग्री प्राप्त हुईं। ये सभी फाइलें सार्वजनिक रिकॉर्ड नियम, 1997 के तहत जनता के लिए खोल दी गई हैं।

ऑपरेशन मुस्कान-2 के तहत बच्चों को मुक्त कराया गया

नई दिल्ली : रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) द्वारा ऑपरेशन मुस्कान-2 के तहत बच्चों को मुक्त कराने का प्रयास जारी है। इस अभियान की शुरूआत 1 से 31 जुलाई, 2016 तक के लिए गृह मंत्रालय ने किया था। इसके तहत अबतक 18 तस्करीकृत बच्चों सहित कुल 1261 बच्चों को रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने रेलवे परिसर और गाड़ियों से मुक्त कराया है। 
रेल मंत्रालय ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय एवं बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय आयोग के साथ सहयोग से रेलवे के साथ बच्चों के देखभाल और सुरक्षा के लिए 5 मार्च, 2015 को स्थायी संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी किया था। अभी एसओपी 15 और रेलवे स्टेशनों पर लागू किया जा रहा है, जबकि 20 रेलवे स्टेशनों पर बाल सहायता डेस्क पहले ही स्थापित किया जा चुका है।

ज्ञान से पुनः दुनिया को रौशन करेगा नालंदा विश्वविद्यालय

पटना : नालंदा विश्वविद्यालय फिर से दुनिया को ज्ञान की नई रोशनी देगा एवं प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की गरिमा को पुनसर््थापित करेगा। यहां अध्ययन करने वाले विद्यार्थी उसी प्रकार बौद्धिक, दार्शनिक, आध्यात्मिक ऐतिहासिक ज्ञान में नवीन शिखर को प्राप्त करेंगे, जैसा प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय में होता था। उक्त बातें भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी ने नालंदा विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में राजगीर में कहीं। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में नालंदा, तक्षशिला, विक्रमशिला, वल्लभी, सोमपुरा, ओदंतपुरी जैसे विद्या के केन्द्रों ने दुनिया भर के विद्वानों को अपनी ओर आकर्षित किया। इससे भारत की बौद्धिक प्रतिभा चहुओर फैली एवं दुनिया में प्रतिष्ठा मिली। आज भी यह आवश्यक है कि हमारे विश्वविद्यालय उसी प्राचीन गरिमा को हासिल करें।
उन्होंने कहा कि ह्वेनसांग, इत्सिंग जैसे कई विदेशी यात्रियों ने नालंदा विश्वविद्यालय में ज्ञान की रोशनी पाई। इन्हीं लोगों के माध्यम से भारत की ज्ञान संपदा विदेशों भी फैली। आज भी इस नालंदा विश्वविद्यालय में 125 छात्रों में से 25 विदेशी हैं। इस विश्वविद्यालय को अध्ययन के आदर्श केन्द्र के रूप में विकसित करना है। राष्ट्रपति श्री मुखर्जी ने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय पूरे एशिया में पुनरूत्थान का प्रतीक है। आज दुनिया के सामने अनेक चुनौती खड़ी है, जिसका समाधान परस्पर सहयोग से ही संभव है। यह विश्वविद्यालय सिर्फ गुणवŸाा पूर्ण शिक्षण का ही नहीं, बल्कि वैश्विक सहायोग का उदाहरण भी बने, ऐसा प्रयास करने की जरूरत है। उन्होंने इसके विकास में राज्य सरकार के सहयोग की भी प्रशंसा की।
उन्होंने कहा कि नालंदा ज्ञान, शांति प्रेरणा एवं रचनात्मक तथा नवोन्मेष का प्रतीक है। शिक्षकों एवं छात्रों को इन मूल्यों को समाहित कर इनका जीवन में व्यवहार में लाना चाहिए। उन्होंने सभी छात्रों एवं शिक्षकों तथा इस विश्वविद्यालय से जुड़े सभी लोगों के प्रयासों की सराहना एवं प्रशंसा की।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए राज्यपाल श्री रामनाथ कोविंद ने कहा कि प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय ज्ञान का केन्द्र रहा है। उसके पुरानी प्रतिष्ठा को पाना एक चैलज है, पर नालंदा विश्वविद्यालय उस अपेक्षा को पूरा करेगा। उन्होंने इस विश्वविद्यालय के विकास में राज्य सरकार के योगदान की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह का यह क्षण सिर्फ विश्वविद्यालय के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण बिहार के लिए गौरव का क्षण है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने कहा कि यह ऐतिहासिक दिन है। नव प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय को पुर्नसज्जीवित करने की कोशिश को मूर्Ÿा रूप मिला है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2006 में इस विश्वविद्यालय को पुनस्र्थापित करने का प्रयास पूर्व राष्ट्रपति डाॅ. एपीजे अब्दुल कलाम के सलाह से शुरू हुआ था। राज्य सरकार के पहल एवं केन्द्र के सहयोग से आज यह विश्वविद्यालय इस मुकाम पर पहुंचा है। उन्होंने विदेश मंत्री रहते हुए राष्ट्रपति श्री मुखर्जी के योगदान की भी सराहना की। जार्ज यो, अमतर््य सेन, लार्ड मेधनाथ देसाई, एनके सिंह समेत अन्य सभी लोगों के सहायोग का भी उन्होंने वर्णन किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इस विश्वविद्यालय के सहयोग के लिए हमेशा तत्पर है। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय का अपना कैम्पस जितनी जल्दी बन जाए एवं यह यूनिवर्सिटी उसमें चलने लगे, वह उतना अच्छा होगा। विश्वविद्यालय में अध्ययन, अध्यापन बेहतर चले, इसके लिए इसका अपना भवन होना आवश्यक है। उन्होंने राष्ट्रपति श्री मुखर्जी से अनुरोध किया कि जब उनके स्तर पर इसकी समीक्षा हो, तो इस दिशा में आवश्यक कार्रवाई के लिए सम्बंधितों को दिशा-निर्देश दें। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि यह विश्वविद्यालय पूरी तरह आत्मनिर्भर हो। इसके लिए राज्य सरकार इस कैम्पस के अतिरिक्त अलग से 70 एकड़ जमीन विश्वविद्यालय को देगी। इस जमीन की सभी आमदनी विश्वविद्यालय की होगी।
मुख्यमंत्री श्री कुमार ने कहा कि प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय को यूनेस्कों ने वल्र्ड हेरिटेज साइट में सम्मिलित किया है। यह हमसबों के लिए गौरव की बात है। यह बिहार का दूसरा ऐतिहासिक स्थल है, जिसे यह सम्मान मिला है। उन्होंने कहा कि उन्हें यह जानकर खुशी हुई है कि इस विश्वविद्यालय का कैम्पस पूरी तरह इको-फ्रेंडली होगा। यहां का ईंट तक भी इकोफ्रेंडली एवं बिना पकाया होगा। यह बहुत ही अच्छी बात है। उन्होंने कहा कि नालंदा की तरह ही प्राचीन काल में विक्रमशीला, तेल्हाड़ा आदि भी प्रसिद्ध विद्या का केन्द्र रहा है। इनके भी विकास की जरूरत है। अगर इन स्थलों को भी विकसित किया जाए, तो इससे भारत का प्राचीन एवं गौरवपूर्ण इतिहास सामने आएगा। उन्होंने इस विश्वविद्यालय के डिग्री प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को अपनी शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम को प्रो. अमत्र्य सेन नालंदा विश्वविद्यालय के चांसलर जार्ज यो, कुलपति डागोपा सब्बरवाल ने भी सम्बोधित किया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के राजिस्ट्रार प्रो. के चन्द्रमूर्ती, लार्ड मेधनाथ देसाई, गावर्निंग बाॅडी के सदस्य विदेश सचिव, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, शिक्षा मंत्री अशोक चैधरी, मंत्री श्रवण कुमार, शैलेश कुमार, कृष्णनंदन वर्मा, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, सांसद कौशलेन्द्र कुमार, मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, डीजीपी पीके ठाकुर एवं कई देशों के राजदूत, विधायक एवं अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

बुधवार, 24 अगस्त 2016

सुगम्य पुस्तकालय: प्रिंट विकलांग व्यक्तियों के लिए ऑनलाइन पुस्तकालय

नई दिल्ली : ‘सुगम्य पुस्तकालय’ एक ऑनलाइन मंच है, जहां प्रिंट विकलांग लोगों के लिए सुलभ सामग्री उपलब्ध करायी जाती है। इस पुस्तकालय में विविध विषयों और भाषाओं तथा कई सुलभ प्रारूपों में प्रकाशन उपलब्ध है। इसे डेजी फोरम ऑफ इंडिया संगठन के सदस्यों और टीसीएस एक्सेस के सहयोग से सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांग सशक्तिकरण विभाग द्वारा तैयार किया गया है। यहां पर दृष्टिहीन और अन्य प्रिंट विकलांग लोगों के लिए सुलभ प्रारूपों में पुस्तकें उपलब्ध हैं। विविध भाषाओं में दो लाख से अधिक किताबें हैं। देश और दुनिया भर में सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय पुस्तकालय, बुकशेयर सहित पुस्तकालयों का एकीकरण किया जा रहा है।  
अंतिम उपयोगकर्ता यानि प्रिंट विकलांग व्यक्ति के मामले में : अब अगर प्रिंट विकलांग जन किताब पढ़ना चाहता है, तो इसके लिए उसे किसी पढ़कर सुनाने वाले व्यक्ति या स्कैन और संपादन करने के लिए स्वयंसेवकों की तलाश करने के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। सुगम्य पुस्तकालय पर शीघ्र खोज के बटन को क्लिक करते ही उसे अपनी पसंद की पुस्तकें मिल जायेंगी। इसके लिए उसे डीएफआई संगठन में प्रिंट विकलांग सदस्य के रूप में पंजीकरण करवाना होगा। इसके बाद वह अपनी सदस्यता के जरिये पुस्तक डाउनलोड कर सकता है या ऑफ लाइन खरीद सकता है। वह एक बटन क्लिक कर पुस्तकालय की सभी किताबों तक पहुंच सकता है। मोबाइल फोन, टेबलेट, कम्प्यूटर, डेजी प्लेयर जैसे अपनी पसंद के किसी भी उपकरण पर ब्रेल लिपि में भी पुस्तकें पढ़ी जा सकती है। ब्रेल प्रेस वाले संगठन के सदस्य के जरिये वे ब्रेल लिपि की प्रतिलिपि भी मंगवा सकते हैं।
स्कूल, कॉलेज, पुस्तकालय के मामले में : विश्वविद्यालय, स्कूल पुस्तकालय, सार्वजनिक पुस्तकालय या इस प्रकार के अन्य संस्थान डीएफआई के सदस्य बन सकते हैं अथवा अपने प्रिंट विकलांग सदस्यों या छात्रों को सुगम्य पुस्तकालय का पूरा संग्रह उपलब्ध कराने के लिए ऑनलाइन पुस्तकालय के सदस्य बन सकते हैं। शैक्षिक संस्थान भी इस पुस्तकालय में अपने छात्रों के लिए सुलभ प्रारूप में उपलब्ध कराने के लिए तैयार की गई पुस्तकों का योगदान दे सकते हैं, ताकि अन्य संस्थानों के छात्रों को भी वही पुस्तकें उपलब्ध हो सके और कई स्थानों पर ऐसी पुस्तकों को दोबारा तैयार करने की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी।
प्रकाशक, सरकारी प्रकाशक, पाठ्य पुस्तक प्रकाशक के मामले में : ये लोग विकासशील देश में सबसे अधिक पहुंच वाले ऑनलाइन पुस्तकालय का निर्माण कर इतिहास का एक हिस्सा बन सकते हैं। प्रिंट विकलांग लोगों को शामिल कर अपने पाठक आधार को बढ़ाने के लिए वे अपने प्रकाशनों को सुलभ प्रारूपों में सुगम्य पुस्तकालय पर साझा कर सकते हैं। पुस्तकालय की पहले से ही रीडर्स डाइजेस्ट और इंडिया टूडे जैसे प्रकाशनों के साथ साझेदारी है और वह बड़ी संख्या में निजी और सरकारी प्रकाशन विभाग और प्रकाशनों के साथ नई साझेदारी करना चाहता है। पाठ्यपुस्तक प्रकाशन विभाग, राज्य पाठ्य पुस्तक बोर्ड (एससीईआरटी, एनसीईआरटी) इस मंच के जरिये प्रिंट विकलांग छात्रों के लिए अपनी सामग्री उपलब्ध कराकर  शिक्षा के अधिकार अधिनियम (2009) के अंतर्गत अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह कर सकते हैं। सुगम्य पुस्तकालय से जो सामान्य प्रिंट नहीं पढ़ पाते हैं, केवल उन्हें पुस्तकें देने से पुस्तकें संरक्षित रहेंगी।
गैर सरकारी संगठन के मामले में : वे एक सदस्य के रूप में प्रिंट विकलांग लोगों के लिए पुस्तकालय सेवा शुरू कर सकते हैं और अपने सदस्यों को सुगम्य पुस्तकालय की पूरी सामग्री उपलब्ध करा सकते हैं।
कॉरपोरेट के मामले में : उनके कर्मचारी स्वयं अपनी इच्छा से सामग्री तैयार कर करोड़ो प्रिंट विकलांग लोगों की मदद कर सकते हैं। सूचना प्रोद्योगिकी उद्योग सभी भारतीय भाषाओं में डिजिटल सामग्री के लेखन और पाठन में खामियों को दूर करने के लिए प्रोद्योगिकी विकसित कर योगदान दे सकते हैं।

मंगलवार, 23 अगस्त 2016

राष्ट्रीय खेल पुरस्कार 2016 की घोषणा

नई दिल्ली : राष्ट्रीय खेल पुरस्कार हर वर्ष खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को दिए जाते हैं। राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार चार साल की अवधि के दौरान किसी भी खेल में अत्यंत शानदार और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी को दिया जाता है। इसी तरह अर्जुन पुरस्कार चार साल के दौरान बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को दिए जाते हैं। द्रोणाचार्य पुरस्कार प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय खेलों में पदक विजेता खिलाड़ियों के प्रशिक्षकों को दिया जाता है। ध्यानचंद पुरस्कार खेलों के विकास में जीवनपर्यन्त सर्वश्रेष्ठ योगदान करने वाले व्यक्ति को दिया जाता है तथा राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार कारर्पोरेट संस्थाओं (निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्र) और व्यक्तिगत स्तर पर उन लोगों को दिया जाता है, जिन्होंने खेलों के संवर्द्धन एवं विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हो। अंतर-विश्वविद्यालीय टूर्नामेंटों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले विश्वविद्यालय को मौलाना अबुल कलाम आजाद ट्रॉफी प्रदान की जाती है।
इस वर्ष इन पुरस्कारों के लिए बड़ी संख्या में नामांकन प्राप्त हुए थे। इन पर पूर्व ओलंपियन, अर्जुन पुरस्कार प्राप्त, द्रोणाचार्य पुरस्कार प्राप्त, ध्यानचंद पुरस्कार प्राप्त, खेल पत्रकारों, विशेषज्ञों, कमेंटटरों और खेल प्रशासकों की चयन समिति ने विचार किया है। राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार और अर्जुन पुरस्कार चयन समिति की अध्यक्षता दिल्ली हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री एसके अग्रवाल ने की। द्रोणाचार्य पुरस्कारों और ध्यानचंद पुरस्कारों के लिए चयन समिति की अध्यक्षता एमसी मेरी कॉम ने की। इसी तरह राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार चयन समिति की अध्यक्षता खेल सचिव राजीव यादव ने की।
जिन खिलाड़ियों, कोचों, संगठनों को पुरस्कृत करने का निर्णय लिया गया है, उनका ब्योरा इस प्रकार है -
राजीव गांधी खेल रत्न 2016 : पीवी सिन्धु (बैडमिंटन), दीपा कर्माकर (जिम्नास्टिक्स), जीतू राय (निशानेबाजी), साक्षी मलिक (कुश्ती)।
द्रोणाचार्य पुरस्कार 2016 : नागापुरी रमेश (एथेलेटिक्स), सागर मल धायल (मुक्केबाजी), राज कुमार शर्मा (क्रिकेट), बिशेश्वर नंदी (जिम्नास्टिक्स), एस प्रदीप कुमार (तैराकी, जीवनपर्यंत), महाबीर सिंह (कुश्ती, जीवनपर्यंत)।
अर्जुन पुरस्कार 2016 : रजत चैहान (तीरंदाजी), ललिता बब्बर (एथेलेटिक्स), सौरव कोठारी (बिलियर्ड एवं स्नूकर), शिव थापा (मुक्केबाजी), अजिंक्य रहाणे (क्रिकेट), सुब्रत पॉल (फुटबॉल), रानी (हॉकी), रघुनाथ वीआर (हॉकी), गुरप्रीत सिंह (निशानेबाजी), अपूर्वी चन्देला (निशानेबाजी), सौम्यजीत घोष (टेबल टेनिस), विनेश (कुश्ती), अमित कुमार (कुश्ती), संदीप सिंह मान (पैरा-एथेलेटिक्स), वीरेन्दर सिंह (कुश्ती, बधिर)।
ध्यानचंद पुरस्कार 2015 : सत्ती गीता (एथेलेटिक्स), सिल्वानुस डुंग डुंग (हॉकी), राजेन्द्र प्रह्लाद शेलके (नौकायन)।
राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार 2016 के लिए अनुमोदित संस्थाएं -
युवा उदीयमान प्रतिभाओं की पहचान एवं प्रशिक्षण के लिए : हॉकी सिटिजन ग्रुप, दादर पारसी जोरास्ट्रियन क्रिकेट क्लब, उषा स्कूल ऑफ एथेलेटिक्स, एसटीएआईआरएस (स्टेयर्स)।
कारपोरेट सामाजिक दायित्व के जरिये खेलों को प्रोत्साहन : इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर फायनेंस कारपोरेट लिमिटेड।
खिलाड़ियो को रोजगार एवं अन्य कल्याणकारी उपाय : भारतीय रिजर्व बैंक।
विकास के लिए खेल : सुब्रतो मुखर्जी स्पोट्र्स एजुकेशन सोसायटी
मौलाना अबुल कलाम आजाद ट्रॉफी 2015-16 : पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला।
समस्त चयनित व्यक्तियों को राष्ट्रपति भवन में 29 अगस्त, 2016 को आयोजित एक विशेष समारोह में राष्ट्रपति पुरस्कार प्रदान करेंगे। पदक और प्रशस्ति-पत्र के अलावा राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित व्यक्ति को 7.5 लाख रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। अर्जुन, द्रोणाचार्य और ध्यानचंद पुरस्कार प्राप्त व्यक्तियों को प्रतिमाएं, प्रमाणपत्र और पांच-पांच लाख रुपये नकद पुरस्कार दिए जाएंगे। राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार के लिए चयनित संस्थाओं को ट्रॉफी और प्रमाण पत्र दिए जाएंगे। अंतर-विश्वविद्यालीय टूर्नामेंटों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले विश्वविद्यालय को मौलाना अबुल कलाम आजाद ट्रॉफी, 10 लाख रुपये और प्रमाणपत्र प्रदान दिया जाएगा।

सोमवार, 22 अगस्त 2016

पटना में बाढ़ ! क्या है सच्चाई

 अपनी बात 
राजीव मणि
पटना : इनदिनों बाढ़ को लेकर पटना में कोहराम मचा है। क्या बिहार की राजधानी 1975 की बाढ़ की तरह एकबार फिर डूबेगी? सबके मन में यही है। और इसी बात को लेकर सभी भयभीत हैं! दरअसल इसबार भय का वातावरण तैयार करने में मीडिया का अच्छा खासा योगदान रहा है। साथ ही स्थानीय कुछ नेताओं का भी। और इस भय का परिणाम कुछ इस तरह सामने आ रहा है कि कई लोग अभी से ही खाने-पीने की चीजे खरीदकर अपने-अपने घरों में स्टाक के रूप में रखने लगे हैं। वे यह मान चुके हैं कि बाढ़ का आना तय है। दूसरी ओर गंगा किनारे के सभी बड़े स्कूलों में दो दिनों की छुट्टी कर दी गयी है।
आइये, अब आपको पुराने दिनों की याद दिलाता हूं। मेरा नाता पटना और गंगा से पुराना रहा है। गंगा किनारे ही घर भी है मेरा। तब मैं छोटा था। स्कूल में पढ़ता था। गंगा पानी से सालोभर लबालब भरी रहती थी, किनारे तक। और बरसात के दिनों में, हर साल, किनारे बनाये गये बांध के गेटों को बोरे में रेत भरकर जाम किया जाता था। डर रहता था कि गंगा का पानी गेट से होता हुआ शहर में प्रवेश न कर जाये। यह हर साल का हाल था। लेकिन, गंगा बांध तक आकर फिर कुछ ही दिनों में पहले की स्थिति में लौट जाती थी। तब लोग भयभीत बहुत ज्यादा नहीं होते थे। कारण साफ था, यह हर साल की बात थी।
धीरे-धीरे कर स्थिति बदली। गंगा दूर और बहुत दूर होती चली गयी। करीब दो दशक तो हो ही गये होंगे। अब गंगा में पानी एक दर्शनीय चीज बन चुका है। साल में मुश्किल से एक माह, बरसात के दिनों में, पानी दिखता है। लोग भूलने लगे। ... और करीब-करीब भूल ही गये पुराने दिनों को। साथ ही आज के युवा को तो पुरानी बातें याद ही नहीं! और सारे भय का कारण यही है।
इस बार जब अधिकांश भारत में अच्छी बरसात हुई, गंगा अपने पुराने रूप में आ गयी। मीडिया के युवा पत्रकार, जो गंगा की पुरानी स्थिति को भूल चुके हैं और वे भी जो सबकुछ जानते हुए भी खबर बनाने के चक्कर में ऐसे दिखाने लगे, जैसे बस 4-5 घंटे में राजधानी डूबने ही वाली है! अखबार, चैनल सभी जगह यही बात! इससे सरकार और प्रशासन पर दबाव बढ़ा और देखते ही देखते राजधानी में हड़कंप मच गया।
आज ही मैं गंगा किनारे का दौरा किया हूं। कुछ तस्वीरें भी खींची हैं। डरने की कोई बात नहीं दिखती। हां, यह जरूर कहूंगा कि सतर्क रहिए। आइये, तस्वीर के माध्यम से एक-एक कर दिखाता हूं, क्या है सच्चाई।
यह पटना के सदाकत आश्रम के सामने का एक घाट है। कभी यहां सालोभर पानी रहता था और बरसात के दिनों में नजारा कुछ ऐसा ही दिखता था, जैसा अभी दिख रहा है।
बीच गंगा में कुछ झोपड़ियां दिख रही हैं। यह बिंद टोली है। अभी हाल ही में दीघा रेलपुल बनने के कारण विस्थापित हुए ये लोग यहां गंगा में ही आकर बसे हैं। प्रशासन ने ही यह जगह इन्हें उपलब्ध करायी थी। अब यह सहज ही समझा जा सकता है कि आखिर गंगा में पानी नहीं आएगा तो कहां आयेगा। आजकल इन लोगों को ही सबसे ज्यादा टीवी-अखबारों में रोते-बिलखते दिखाया जा रहा है। दरअसल यह पहले से ही ज्ञात था कि पानी बढ़ने पर ऐसी ही स्थिति उत्पन्न होगी।
गंगा की गोद में बसे बिंद टोली में जब पानी भर गया तो कुछ इस तरह यहां के लोग जान बचाकर भागे। नाव प्रशासन द्वारा ही यहां उपलब्ध कराया गया है।
बिंद टोली के कुछ लोग अब इस तरह कुर्जी मोड़ स्थित सामुदायिक भवन में रहने को मजबूर।
यहीं कुर्जी मोड़ स्थित सामुदायिक भवन से बाहर कुछ इस तरह खुले में भी रह रहे हैं।
बिंद टोली के कुछ लोग काशी विद्यापीठ में भी रह रहे हैं।
यह तस्वीर उत्तरी मैनपुरा ग्राम पंचायत के मुखिया सुधीर सिंह की है, जो अपने क्षेत्र के लोगों के बीच चूड़ा-गुड़ बांट रहे हैं। ज्ञात हो कि उत्तरी मैनपुरा ग्राम पंचायत गंगा के सबसे किनारे और बांध के अंदर ही है। इस कारण यह पंचायत हमेशा से ही बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित होती रही है।
आज ही बिंद टोली एवं बांध किनारे के प्रभावित लोगों को खिचड़ी खिलायी गयी। जबतक ये यहां रहेंगे, इसी तरह भोजन दिया जाता रहेगा।
इन्हीं सब के बीच प्रभावित लोगों के लिए एक अस्थायी स्वास्थ शिविर लगाया गया।
यह तस्वीर एलसीटी घाट मुसहरी की है। गंगा के एकदम किनारे। यहां यह कोई नयी बात नहीं। जब भी गंगा में पानी बढ़ता है, ऐसी की तस्वीर देखने को मिलती है।
इस तस्वीर में सड़क पर एकदम पानी नहीं है। लेकिन, दूसरी ओर अंडरग्राउन्ड नाला से गंगा का पानी घुस गया। अब पूरे रास्ते को बंद कर पानी को पंप से खींचकर पुनः गंगा में डाला जा रहा है। ऐसा करने से लोगों को तो परेशानी उठानी ही पड़ी, एम्बुलेंश को भी काफी झेलना पड़ा।
कुछ यूं ही बोरे में रेत भर बांध के गेटों को जाम किया जाता है, ताकि गंगा का पानी शहर में प्रवेश न कर सके। और इस तस्वीर में भी इसी की तैयारी चल रही है।
यह तस्वीर भी नाला से होकर गंगा का पानी दूसरी ओर घुसने और रोड जाम कर पंप से पानी निकालने की है।
यह एलसीटी घाट स्थित गंगा टावर अपार्टमेन्ट की तस्वीर है। आजकल सबसे ज्यादा न्यूज में छाया है। चित्र में साफ दिख रहा है कि यह सड़क से काफी नीचे है। दरअसल काफी पुराना बना हुआ है यह। और यहां भी नाला के माध्यम से ही पूरे कैम्पस में पानी भर आया है। यहां की ऐसी तस्वीर कोई नयी नहीं है। हर बरसात में जब पानी बांध तक पहुंचता है, यह कैम्पस लबालब भर जाता है। इनदिनों टीवी-अखबारों में इस चित्र को खूब दिखाया जा रहा है।
यह तस्वीर कुर्जी मोड़ स्थित काली मंदिर घाट की है। हां भाई घाट, और यहां पानी न होगा तो क्या होगा?

शनिवार, 20 अगस्त 2016

डॉ. उर्जित आर. पटेल RBI के गवर्नर नियुक्त

डॉ. उर्जित आर. पटेल
 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : डॉ. उर्जित आर. पटेल की तीन वर्ष की अवधि के लिए 04 सितंबर, 2016 से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नए गवर्नर के तौर पर नियुक्ति कर दी गई है। वह भारतीय रिजर्व बैंक के वर्तमान गर्वनर डॉ. रघुराम राजन की जगह लेंगे। डॉ. पटेल वर्तमान में भारतीय रिजर्व बैंक के उप-गवर्नर हैं और 2013 से इस कार्यभार को संभाल रहे हैं।

छात्रवृत्तियों की तिथि बढ़ाई गई

नई दिल्ली : अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित छात्रों के लिए वर्ष 2016-17 हेतु मैट्रिक पूर्व अथवा पश्चात छात्रवृत्रियों के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि को 30 सितंबर, 2016 तक बढ़ा दिया गया है। इससे पूर्व भी अल्पसंख्यक मामले मंत्रालय ने मैट्रिक पूर्व अथवा पश्चात छात्रवृत्रियों के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि को 31 अगस्त, 2016 तक बढ़ाया था।
केन्द्रीय अल्पसंख्यक मामले राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि अल्पसंख्यक मामले मंत्रालय ने अंतिम तिथि को बढ़ाने के संबंध में देशभर के लोगों से प्राप्त व्यापक अपीलों और सुझावों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है। श्री नकवी ने कहा कि यह निर्णय अल्पसंख्यक समुदायों के गरीब वर्गों के जरूरतमंद छात्रों के हित में लिया गया है। 
ज्ञात हो कि प्री-मैट्रिक स्तर पर छात्रवृत्ति का उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदायों के माता-पिताओं को अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रोत्साहन देना, विद्यालय शिक्षा पर होने वाले वित्तीय बोझ को कम करना और उनकी विद्यालय शिक्षा को पूर्ण करने के लिए बच्चों के लिए किए जा रहे प्रयासों को बनाए रखना है। पोस्ट-मैट्रिक स्तर पर छात्रवृत्ति का उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदायों के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के मेधावी छात्रों को छात्रवृत्तियां प्रदान करना है। ताकि उन्हें उच्चतर शिक्षा के लिए बेहतर अवसर मिल सके और उच्च शिक्षा की प्राप्ति दर को बढ़ाते हुए वे अपने रोजगार की क्षमता बढ़ा सके।

मंगलवार, 16 अगस्त 2016

देश के 27 करोड़ छात्र एकसाथ 23 अगस्त को गाएंगे राष्ट्रगान

  • सम्मानित किए गए चैरीचैरा आंदोलन के शहीदों के परिजन 

नई दिल्ली : आजादी के 70 साल कार्यक्रम के अंतर्गत केंद्रीय मानव संसाधन एवं विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने गोरखपुर स्थित केंद्रीय कारागार में जाकर शहीद राम प्रसाद बिस्मिल को नमन किया व श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर श्री जावडेकर ने बताया कि आगामी 23 अगस्त को जब तिरंगा यात्रा का समापन होगा, तब देश के लगभग 27 करोड़ छात्र एकसाथ राष्ट्रगान गाएंगे। कार्यक्रम का आयोजन मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय करेगा।
श्री जावडेकर ने गोरखपुर स्थित कारागार में उस स्थल का भ्रमण किया और देखा जहां राम प्रसाद बिस्मिल को बंद किया गया था और फांसी दी गई थी। केंद्रीय मंत्री ने अमर शहीद को नमन किया और कहा, 1857 से 1947 तक के आजादी के आंदोलन में बहुत से लोगों ने अपने प्राणों की आहूति दी है। युवा पीढ़ी को यह बताना बहुत जरूरी है कि यह आजादी इतनी आसानी से नहीं मिली। अंग्रेज देश से यूं ही नहीं चले गए।
श्री जावडेकर ने कहा कि बिस्मिल जैसे क्रांतिकारियों का योगदान अविस्मरणीय है। देश की नई पीढ़ी को इन देशभक्तों से और उनके बलिदान से शिक्षा लेनी चाहिए। आजादी की लड़ाई में योगदान देने वाले प्रमुख लोगों का स्मरण करते हुए श्री जावडेकर ने कहा, जिन वीर स्वतन्त्रता सेनानियों ने आजादी की लड़ाई लड़ते हुए अपने प्राणों की आहूति दी, यह आवश्यक है कि आज की पीढ़ी न सिर्फ उनके बारे में जाने, बल्कि उनके बताए रास्ते का देशहित में अनुसरण करे। श्री जावडेकर ने युवाओं से कहा कि उन्हें कभी भी महात्मा गांधी, भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद जैसे तमाम बलिदानियों का देश के लिए किया गया योगदान भूलना नहीं चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, हम तिरंगा यात्रा के लिए इसलिए निकले हैं, ताकि लोगों को आजादी के लिए कुर्बानी देने वाली विभूतियों के योगदान के प्रति आम जनता खासकर नई पीढ़ी को जागरूक किया जा सके। भारत के सभी वर्ग के लोगों ने आजादी की लड़ाई में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिसे भुलाया नहीं जा सकता।
काकोरी कांड को कभी भुलाया नहीं जा सकता। वैसे ही अमर शहीद बिस्मिल को मात्र 23 साल की उम्र में ही फांसी की सजा दी गई थी। उन्होंने ढेर सारी किताबें लिखीं जिनकी रायल्टी तक उन्हें नहीं मिली। हमसब ऐसे क्रांतिकारियों के बलिदान से प्रेरणा ले कर राष्ट्रहित में काम कर सकते हैं। 
इस मौके पर केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री ने चैरीचैरा आंदोलन में शहीद हुए लोगों के परिजनों को भी सम्मानित किया। साथ ही बताया कि आगामी 23 अगस्त को जब तिरंगा यात्रा का समापन होगा तब एकसाथ देश के लगभग 27 करोड़ छात्र एकसाथ राष्ट्रगान गाकर देशभक्ति की भावना को बुलंद करेंगे।

सोमवार, 15 अगस्त 2016

PM ने 70वें स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र को संबोधित किया

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 70वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले के प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित किया। नरेन्द्र मोदी ने महात्मा गांधी, सरदार पटेल, पंडित जवाहरलाल नेहरू तथा असंख्य लोगों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने अपने जीवन का बलिदान दिया, ताकि स्वराज्य प्राप्त किया जा सके। 
उन्होंने कहा कि 125 करोड़ भारतीयों ने अब यह संकल्प लिया है कि वे स्वराज्य से ‘सुराज’ की यात्रा को पूरा करेंगे। उन्होंने कहा कि सुराज की प्राप्ति के लिए त्याग, कड़े परिश्रम, अनुशासन, समर्पण और साहस की आवश्यकता होती है। पंचायत से लेकर संसद तक प्रत्येक संस्था को इस लक्ष्य की दिशा में मिलजुल कर काम करना होगा। एक समय था कि जब सरकार आरोपों से आकंठ डूबी हुई थी। उन्होंने ने कहा कि यह सरकार इसकी बजाय आकांक्षाओं से घिरी हुई है। जहां उम्मीद आकांक्षाओं को बढ़ावा देती है, वहीं इससे सुराज की ओर तेजी से बढ़ने की ऊर्जा भी मिलती है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वे सरकार द्वारा किए गए कार्य पर प्रकाश नहीं डालना चाहते, अपितु सरकार के कार्य-संस्कृति का उल्लेख करना चाहेंगे। प्रधानमंत्री ने संवेदनशीलता, दायित्व, जवाबदेही, पारदर्शिता, दक्षता तथा सुशासन जैसे सुराज के विभिन्न तत्वों को परिभाषित किया। उन्होंने प्रमुख अस्तपतालों में पंजीकरण, आयकर रिफण्ड की तत्परता से वापसी, पासपोर्ट डिलीवरी प्रक्रिया में तेजी से कंपनी का पंजीकरण तथा सरकारी नौकरियों में समूह ग और समूह घ के पदों के लिए साक्षात्कार समाप्त किए जाने के केंद्र सरकार के कामकाज के उदाहरणों के माध्यम से इन प्रत्येक तत्वों को समझाने को प्रयास किया।
प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि सुशासन के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सेवा प्रदान करने की गति किस प्रकार बढ़ी है। इस संदर्भ में उन्होंने ग्रामीण सड़क निर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता निर्माण, पारेषण लाइन बिछाने तथा रसोई गैस कनेक्शनों का उदाहरण दिया। प्रधानमंत्री ने कतिपय क्षेत्रों, जैसे कि जनधन योजना के अंर्तगत थोड़े समय में 21 करोड़ बैंक खाते का खुलना, ग्रामीण क्षेत्रों में 2 करोड़ शौचालयों का निर्माण तथा बिजली की सुविधा से वंचित 10 हजार गांवों को विद्युतीकरण के काम हो जाने के बारे में बड़े पैमाने पर अपने विचार रखे।
एलईडी बल्बों के विषय पर प्रधानमंत्री ने बताया कि इनके मूल्यों में भारी कमी की गई है, ताकि अधिक से अधिक आम लोगों के बीच इसकी पहुंच बन सके। उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर एलईडी बल्बों के इस्तेमाल से बिजली की खपत में भारी बचत होगी। 
प्रधानमंत्री ने लगातार दो अकालों के बाद भी पर्याप्त फसलों का उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए सराहा। उन्होंने किसानों की सराहना की। उन्होंने बताया कि इस वर्ष दालों की बुवाई की दिशा में भारी बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कृषि के क्षेत्र की दिशा में सरकार के समन्वित दृष्टिकोण को स्पष्ट किया, जिसमें मृदा, स्वास्थ्य कार्ड, सिचाईं, सौर पंप बीजस उर्वरक तथा फसल बीमा शमिल है। 
श्री मोदी ने कहा कि सरकार का ध्यान एक राष्ट्रीय पहचान का निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य सुधार, निष्पादन, परिवर्तन है। सरकार का ध्यान प्रतीकात्मक की अपेक्षा सारभूत कार्य, विच्छिन्न विकास की अपेक्षा समेकित विकास तथा पात्रता की अपेक्षा सशक्तिकरण की ओर कहीं अधिक केंद्रित है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि किस प्रकार उनकी सरकार अटके पड़े अथवा काफी समय से लंबित परियोजनाओं को पूरा करने में जुटी है और महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी देने के लिए अपेक्षित समय में किस प्रकार कमी कर रही है। 
प्रभावी परिणाम देने के उदाहरण पेश करते हुए प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि गन्ने की बकाया राशि की मंजूरी, नए एलपीजी कनेक्शन और एयर इंडिया तथा बीएसएनएल जैसे सार्वजनिक उपक्रमों को किस प्रकार संचालन मुनाफों में लाया गया। पारदर्शिता का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि सब्सिडी राशि को किस प्रकार जरूरतमंदों को देकर इसका बेहतर प्रबंधन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सुशासन के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हुई प्रगति को अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों ने भी स्वीकार किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं कल्याण की दिशा में सरकार ने नरम और समन्वित दृष्टिकोण अपनाया है। जिसमें बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना तथा उज्जवला योजना जैसे कार्यक्रम शामिल हैं, ताकि महिलाओं की शारीरिक, शैक्षिक एवं वित्तीय बेहतरी सुनिश्चित हो सकें। इस संबंध में उन्होंने कई अन्य सरकारी पहलों का उल्लेख किया। 
सामाजिक एकता पर अपना सशक्त संदेश देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रत्येक भारतीय को रामानुजाचार्य, महात्मा गांधी और बाबा साहेब आंबेडकर सरीखे हमारे महान संतों, दार्शनिकों के शांति, एकता एवं भाईचारे के संदेश का पालन करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार की विभिन्न पहल एवं कार्यक्रम युवाओं के लिए रोजगार निर्माण में योगदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मॉडल दुकान और प्रतिष्ठान अधिनियम के चलते सप्ताह के सातों दिन दुकान खोलने में सुविधा रहेगी। 
प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार बड़े फैसले लेने में किसी प्रकार का संकोच नहीं करती। उन्होंने एक रैंक एक पेंशन, नेता जी की फाइलों का खुलासा तथा बांग्लादेश के साथ भूमि सीमा करार का इस संदर्भ में उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री ने आंतकवादियों को शहीदों के रूप में महिमा मंडित करने के प्रयासों की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि सारा विश्व भारतीय के मानवीय दृष्टिकोण को सराहेगा और सभी प्रकार की आतंकवादी गतिविधियों की एक स्वर में भर्त्सना करेगा। 
प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को आगे ले जाने की दिशा में आम संकल्प लेने का लोगों से आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने कुछ नई पहल की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों की मासिक पेंशन 25 हजार रुपये से बढ़ाकर 30 हजार रुपये कर दी गई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार देश भर में आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों को समर्पित संग्रहालयों और स्मारकों के निर्माण की दिशा में काम करेगी। सरकार निर्धन लोगों के लिए अस्पताल में ईलाज की लागत पर एक लाख रुपये तक खर्च वहन करेगी।

हंगपन दादा को मरणोपरांत अशोक चक्र

हवलदार हंगपन दादा
नई दिल्ली : स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति एवं भारतीय सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर ने राष्ट्रीय राइफल्स के असम रेजिमेंट 35वीं बटालियन के 13622536 एन हवलदार हंगपन दादा (मरणोपरांत) को वीरता के लिए शांति काल का सर्वोच्च पुरस्कार अशोक चक्र प्रदान किया। हवलदार हंगपन दादा ने जम्मू एवं कश्मीर में आतंकवादियों के एक समूह के साथ मुठभेड़ के दौरान असाधारण साहस, निःस्वार्थ समर्पण एवं अप्रतिम बहादुरी का परिचय दिया और शहादत हासिल करने से पहले तीन आतंकवादियों को मार गिराया।
26 मई, 2016 को जब आतंकवादियों ने जम्मू एवं कश्मीर के कुपवाडा जिले में नौगाम सेक्टर में घुसपैठ की, तो दिवंगत हवलदार हंगपन दादा पर उनके सेक्शन के साथ भाग रहे आतंकवादियों का पीछा करने एवं उन्हें जाल में फंसाने का दायित्व सौंपा गया। बहादुरी का परिचय देते हुए और मौके की नजाकत को भांपते हुए हवलदार हंगपन दादा ने ऊंची पहाड़ी पर दुर्गम परिस्थितियों में बेहद तेजी से आतंकवादियों के भागने के रास्ते को अवरूद्ध कर दिया और बेहद वीरता प्रदर्शित करते हुए दो आतंकवादियों को मार गिराया। गोलियों के आदान-प्रदान में वे गंभीर रूप से घायल हो गए, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने शेष आतंकवादियों का पीछा करना नहीं छोड़ा और तीसरे आतंकवादी के समक्ष आ गए, जिसे उन्होंने आमने-सामने की लड़ाई में मार गिराया और खुद भी शहीद हो गए। इस प्रकार, हवलदार हंगपन दादा ने अकेले ही इस ऑपरेशन में तीन आतंकवादियों को मार गिराया तथा अपनी कार्रवाई से चैथे आतंकवादी की मौत के भी कारण बने।

राष्ट्रपति ने विद्वानों को सम्मान-प्रमाणपत्र एवं युवा विद्वानों को महर्षि बादरायन व्यास सम्मान प्रदान किया

नई दिल्ली : महामहिम राष्ट्रपति ने संस्कृत, फारसी, अरबी, पाली तथा प्राकृत भाषाओं के निम्नलिखित विद्वानों को सम्मान-प्रमाणपत्र प्रदान किया -
संस्कृत : आर. वेंकटरमन, विश्वनाथ गोपालकृष्ण, जियालाल कम्बोज, डॉ. भवेन्द्र झा, प्रो. प्रियतमचन्द्र शास्त्री, प्रो. गुरूपाद के हेगडे, प्रो. एसटी नगराज, सनातन मिश्र, एसलपि आज्जनेय शर्मा, प्रो. लक्ष्मी शर्मा, प्रो. विश्वनाथ भट्टाचार्य, प्रो. रामनारायण दास, डॉ. रामशङ्कर अवस्थी, हृदय रंजन शर्मा, प्रो. (डाॅ.) जानकी प्रसाद द्विवेदी
संस्कृत (अंतर्राष्ट्रीय) : फरनांडो तोला
अरबी : अबदुल मुसाब्बीर भुइया, सय्यद असद रजा हुसैनी, बदर-ए-जमाल इस्लाही
फारसी : हकीम सय्यद गुलाम मेहदी राज, चैधरी वहहाज अहमद अशरफ, मौलवी एच. रहमान काबली
पाली : डाॅ. बेला भट्टाचार्य
प्राकृत : डाॅ. दमोदर शास्त्री
इसके अतिरिक्त संस्कृत, फारसी, अरबी, पाली तथा प्राकृत भाषाओं के निम्नलिखित युवा विद्वानों को महर्षि बादरायन व्यास सम्मान प्रदान किया गया -
संस्कृत : डॉ. महानन्द झा, डॉ. सुन्दर नारायण झा, डॉ. जिएसवि दत्तात्रेयमूर्ति, डॉ. विष्वनाथ धिताल, डॉ. शंकर राजारमन
अरबी : डॉ. मो. कुतबुद्दीन
फारसी : डॉ. हसीनुज्जमाँ
पाली : डॉ. उज्जवल कुमार
प्राकृत : डॉ. योगेष कुमार जैन
ज्ञात हो कि यह सम्मान प्रत्येक वर्ष संस्कृत, फारसी, अरबी, पाली तथा प्राकृत के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान हेतु स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिया जाता है।

Happy Independence Day


My New Poems

 

रविवार, 14 अगस्त 2016

पटना सहित देश के 10 प्रमुख शहरों में स्मार्ट गंगा सिटी परियोजना की शुरूआत

Patna
नई दिल्ली : केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती और केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वैंकेया नायडु ने वीडियो कांफ्रेंस के जरिए देश के 10 प्रमुख शहरों में स्मार्ट गंगा सिटी परियोजना की शुरूआत की। ये शहर हैं - हरिद्वार, ऋषिकेश, मथुरा-वृंदावन, वाराणसी, कानपुर, इलाहाबाद, लखनऊ, पटना, साहिबगंज और बैरकपुर। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने सीवेज उपचार के बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए हाइब्रिड एन्यूटी आधारित सार्वजनिक एवं निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर कार्य हेतु प्रथम चरण में इन शहरों का चयन किया है। 
इस अवसर पर सुश्री भारती ने उज्जैन से समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि इस कार्यक्रम की सफलता के लिए केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय का सहयोग बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि गंगा कार्य योजना की असफलता से सबक लेकर अब हमारा मंत्रालय हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल पर जा रहा है। पहले इस काम का खर्चा केंद्र और राज्य सरकार 70ः30 के अनुपात में उठाते थे, लेकिन इस बार इस पूरे कार्यक्रम का सारा खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी। मंत्री महोदया ने कहा कि कार्यक्रम के सुचारू कार्यान्वयन पर नजर रखने के लिए जिला स्तर पर भी निगरानी समितियों का गठन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश की कई बड़ी कंपनियों के अलावा कई विदेशी कंपनियों ने भी हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल पर हमारे साथ काम करने की इच्छा जताई है। 
सुश्री भारती ने कहा कि पहले चरण में 10 शहरों को शामिल किया गया है, लेकिन धीरे-धीरे इसमें बाकी के शहर भी शामिल किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इन 10 शहरों में यह कार्यक्रम करते समय इन शहरों की नदियों की जैव विविधता और उससे जुड़ी सांस्कृतिक विरासत का पूरा ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि अगले दो महीनों में कुछ अन्य शहरों में भी यह कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। 
Lucknow
समारोह को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हैदराबाद से संबोधित करते हुए केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वैंकेया नायडु ने स्थानीय निकायों से कहा कि वे इस कार्यक्रम की सफलता के लिए अपना भरपूर सहयोग दें। उन्होंने कहा कि उनका मंत्रालय नमामि गंगे कार्यक्रम से बहुत धनिष्ठता से जुड़ा हुआ है और उन्हें उम्मीद है कि हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल पर यह कार्यक्रम तेजी से सफलता हासिल करेगा। श्री नायडु ने कहा कि इस कार्यक्रम की सफलता के लिए जन भागीदारी उतनी ही जरूरी है, जितना सरकारी प्रयास। 
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय जल संसाधन के विशेष सचिव डॉ. अमरजीत सिंह ने कहा कि गंगा में गिरने वाले 7300 एमएलडी अपशिष्ट में से 4200 एमएलडी के उपचार के बारे में कार्रवाई शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि बाकी के 3100 एमएलडी के बारे में सर्वेक्षण का काम चल रहा है। इसे अगले 10 महीनों में पूरा कर लिया जाएगा। इससे पहले राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के मिशन निदेशक डॉ. रजत भार्गव ने नमामि गंगे कार्यक्रम के बारे में एक विस्तृत पावर पाउंट प्रेजेंटेशन दिया। 
समारोह में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए भाग लेते हुए दसों शहरों के जिला अधिकारियों व महापौर ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए उसकी सफलता के लिए राज्य प्रशासन और स्थानीय निकायों के भरपूर सहयोग का आश्वासन दिया।

शुक्रवार, 12 अगस्त 2016

नेपाली जी के काव्य में प्रेम का भाव प्रबल : राज्यपाल

पटना : ‘‘गोपाल सिंह ‘नेपाली’ उत्तर छायावाद युग के प्रतिनिधि कवियों में कई दृष्टि से विशिष्ट कवि हैं। उनकी कविताओं में प्रकृति के प्रति सहज अनुराग का भाव है, देश के प्रति सच्चे स्वाभिमान का भाव है, मनुष्य के प्रति स्वाभाविक प्रेम का भाव है और सौन्दर्य के प्रति सहज आकर्षण है। उनकी कविताओं में प्रकृति, मनुष्य और देश, इन तीनों के प्रति अनुरक्ति है।’’ - उक्त विचार महामहिम राज्यपाल रामनाथ कोविन्द ने एएन सिन्हा इन्स्टीच्यूट के सभागार में कविवर गोपाल सिंह नेपाली फाऊंडेशन के तत्वावधान में आयोजित ‘गोपाल सिंह नेपाली जयन्ती समारोह’ को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किये।
राज्यपाल ने कहा कि कविवर नेपाली सौन्दर्य और मस्ती के कवि तो हैं ही, किन्तु उनकी कविताओं में राष्ट्र-प्रेम और जागरण के स्वर भी अत्यंत प्रखर हैं। चीनी आक्रमण के समय नेपाली जी की कलम तो जैसे आग ही उगल रही थी। वे जनता में घूम-घूम कर देशभक्ति की भावना जगा रहे थे।
राज्यपाल ने कहा कि नेपाली जी युगद्रष्टा कवि थे। प्रेम, प्रकृति और सौन्दर्य की कविताएं लिखते हुए भी उनकी सामाजिक चेतना की धार इतनी प्रखर थी कि वे उस जमाने भी पूरे साहस और दिलेरी के साथ जज्बाती तौर पर यह बयान कर गये, ‘‘पतित-दलित मस्तक ऊंचा कर संघर्षों की कथा कहेंगे / और मनुज के लिए मनुज के द्वार खुले के खुले रहेंगे।’’
राज्यपाल ने अपने सम्बोधन के दौरान गोपाल सिंह नेपाली सहित बिहार से आने वाले अन्य कई महत्वपूर्ण छायावादोत्तर युग के प्रमुख कवियों के प्रति साहित्येतिहास - लेखकों की उदासीनता का भी उल्लेख किया।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए राज्य के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री शिवचन्द्र राम ने कहा कि नेपाली जी की कविता में देश-प्रेम की भावना और समाज के अभिवंचित वर्गों की आवाज शामिल है। उन्होंने कला एवं संस्कृति विभाग द्वारा कार्यान्वित होने वाली योजनाओं का भी अपने भाषण में उल्लेख किया। कार्यक्रम को उषा किरण खान, प्रो. किरण घई, राज्यगीत के रचयिता कवि सत्यनारायण, कुमार अरुणोदय आदि ने भी सम्बोधित किया। कार्यक्रम में राज्यपाल द्वारा उषा किरण खान को ‘नेपाली सम्मान’ प्रदान किया गया एवं ‘मुखर-दामिनी’ पत्रिका का लोकार्पण भी किया गया। कार्यक्रम में स्वागत भाषण सविता सिंह नेपाली एवं धन्यवाद ज्ञापन राकेश राव ने किया।

12वीं पंचवर्षीय योजना की पूरी राशि खर्च

आधारभूत संरचना व सामाजिक प्रक्षेत्र में 21 एवं 27 गुनी वृद्धि : डाॅ. दीपक प्रसाद
पटना : 12वीं पंचवर्षीय योजना, जो वर्ष 2012-13 से वर्ष 2015-16 तक है, के लिए स्वीकृत उद्व्यय 165128.96 करोड रुपए के विरूद्ध वास्तविक व्यय की राशि 158548.23 करोड़ रुपए है, जो निर्धारित लक्ष्य का 96.01 है, अर्थात् हमने लगभग शत प्रतिशत राशि खर्च की है तथा वित्तीय वर्ष 2004-05 की तुलना में आधारभूत संरचना एवं सामाजिक प्रक्षेत्र में वित्तीय वर्ष 2016-17 के राज्य योजना उद्व्यय में क्रमेण 21 एवं 27 गुनी वृद्धि हुई है। फलतः विकास के पथ पर बिहार लगातार गतिशील है। सूचना भवन के संवाद कक्ष में आयोजित संवाददाता सम्मेलन के दौरान प्रधान सचिव, योजना एवं विकास डाॅ. दीपक प्रसाद ने उपर्युक्त बातें कहीं।
डाॅ. प्रसाद ने वित्तीय वर्ष 2015-16 में स्वीकृत उद्व्यय 57137.62 करोड़ रुपए के विरूद्ध 54658.81 करोड़ रुपए के व्यय से 95.66 प्रतिशत खर्च की बात बतायी। वर्ष 2004-05 की तुलना में वर्ष 2016-17 में 26 गुना योजना उद्व्यय में वृद्धि की जानकारी भी उन्होंने दी। आगे केन्द्र प्रायोजित योजनाओं के संबंध में उन्होंने बताया कि 13वें वित आयोग के फाॅर्मूले के आधार पर बिहार को अधिक राशि मिलती, लेकिन 14वें वित आयोग के फाॅर्मूले में ढाई हजार करोड़ की नाममात्र राशि अधिक मिली और लगभग बारह हजार करोड़ की राशि कम मिली। केन्द्र प्रायोजित योजनाओं में केन्द्रांश तथा राज्यांश के नए फाॅर्मूले से भी बिहार को काफी नुकसान की जानकारी डाॅ. प्रसाद ने दी।
बीआरजीएफ के तहत उन्होंने बताया कि 12वीं पंचवर्षीय योजना अंतर्गत भारत सरकार द्वारा राज्य के लिए पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि के तहत स्पेशल प्लान अंतर्गत 12 हजार करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए, जिसमें से 1500 करोड़ 10वीं एवं 11वीं पंचवर्षीय योजना की लंबित परियोजनाओं के मद में थी तथा 10500 करोड़ नई परियोजनाओं हेतु। तदनुसार नई परियोजनाओं में 9 परियोजनाएं कुल 9507.92 करोड़ रुपए की स्वीकृति नीति आयोग ने की है, जिसमें 8 ऊर्जा प्रक्षेत्र की तथा एक पथ प्रक्षेत्र की परियोजना है। अवशेष राशि हेतु भी 2 परियोजनाएं (902.8 करोड़ रुपए) स्वीकृति के लिए नीति आयोग के पास लम्बित हैं।
डाॅ. प्रसाद ने बताया कि योजना प्रधिकृत समिति द्वारा वर्ष 2015-16 में 384 योजनाएं (123000.53 करोड़ रुपए) तथा 2016-17 में जुलाई तक 91 योजनाएं (33771.20 करोड़ रुपए) अनुशंसित है।
डाॅ. प्रसाद ने मुख्यमंत्री के सात निश्चय कार्यक्रमों के तहत मुख्यमंत्री स्वयं सहायता भत्ता योजना के संदर्भ में जानकारी दी कि 20 से 25 वर्ष आयु वर्ग के 12वीं कक्षा उतीर्ण बेरोजगार युवक/युवतियों को रोजगार की तलाश हेतु 1000 रुपए प्रति माह की दर से अधिकतम 2 वर्षों के लिए वितीय सहायता प्रदान की जानी है। इसका शुभारंभ 2 अक्टूबर, 2016 से होना है। इसके तहत आवेदकों के निबंधन हेतु प्रत्येक जिले में जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्र भवन निर्माणाधीन है। यह भवन 24 हजार स्क्वाॅयर फीट में बनेगा, जिसमें न्यूनतम 24 काउंटर्स रहेंगे। इस परामर्श केन्द्र पर स्वयं सहायता भत्ता के अलावा स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना एवं कौशल विकास विषयक आवेदकों का भी निबंधन किया जाएगा। इसपर वित्तीय वर्ष 2016-17 में 1371.00 करोड़ रुपए का व्यय अनुमानित है।
विभाग की अन्य योजनाओं के संदर्भ में डाॅ. प्रसाद ने जानकारी दी कि राज्य में शत-प्रतिशत जन्म-मृत्यु निबंधन के लक्ष्य की दिशा में आॅनलाइन निबंधन का प्रबंध अग्रेतर है। स्वाचालित मौसम केन्द्र की स्थापाना के तहत 38 जिलों 12 अनुमंडलों में अधिष्ठापन प्रस्तावित है। षष्ठम आर्थिक गणना के आधार पर 2005 की तुलना में उद्यमियों की संख्या में 40.08 प्रतिशत तथा नियोजन में 31.93 प्रतिशत की वृद्धि मुख्यमंत्री शोध अध्ययन एवं मूल्यांकन प्रोत्साहन योजना के तहत 14 योजनाओं का अध्ययन संपन्न है तथा एक योजना का मूल्यांकन प्रगति पर है। मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना जो वर्ष 2011-12 में प्रारंभ थी, वित्तीय वर्ष 2013-14 से इस योजना के तहत प्रतिविधानमंडल सदस्य पात्रता राशि 1 करोड़ से 2 करोड़ हो गई है। उन्होंने बताया कि इसमें कई अन्यान्य नए कार्यक्रम, यथा संस्कृत विद्यालयों के भवन-छात्रावासों का निर्माण, बुकशेल्फ बनवाना, स्टेडियम में जिम सामग्री, शौचाालय निर्माण आदि भी समाविष्ट किए गए हैं। सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के तहत उन्होंने बताया कि 15वीं एवं 16वीं सांसद अनुशंसाओं के तहत अद्यतन 1324.50 करोड रुपए के व्यय से 21058 योजनाओं को पूर्ण कराया गया है। वहीं 5594 योजनाएं प्रगति पर हैं।
इसी तरह सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम में 312.27 करोड़ रुपए के व्यय से 1321 याजनाओं की पूर्णता तथा 265 की अग्रेतरता, मुख्यमंत्री नवप्रवर्तन प्रोत्साहन योजना, पंचायत सरकार भवन, ई-किसान भवन, कब्रिस्तान घेराबंदी समेत बिहार कोसी बाढ़ समुत्थान परियोजना के दो फेज में कार्यों की जानकारी उन्होंने दी। प्रथम फेज में सहरसा, सुपौल एवं मधेपुरा जिलों में 62793 गृह निर्माण, 69 पुल निर्माण, 37 सड़क निर्माण सहित जल संसाधन विभाग द्वारा 6 संरचनात्मक तथा 11 असंरचनात्मक कार्यों की जानकारी उन्होंने दी। इसके फेज-2 अर्थात् बिहार कोसी बेसिन विकास परियोजना के सन्दर्भ में उन्होंने बताया कि इसका क्रियान्वयन बिहार आपदा पुनर्वास एवं पुलनिर्माण सोसायटी के जरिए सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, पूर्णियां एवं अररिया जिलों के 57 प्रखंडों में कराया जाना है। इसके लिए 20 जनवरी, 2016 को भारत सरकार एवं विश्व बैंक के बीच संपन्न एकरारनामे के आधार पर मार्च, 2023 तक परियोजना चलेगी। इस हेतु 2259 करोड़ रुपए उपबंधित है। इसके तहत बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लि. द्वारा पुल संबंधी 41 पैकेजों, ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा सड़क निर्माण संबंधी 30 पैकेजों पर कार्य कराया जाएगा तथा जल संसाधन विभाग द्वारा संरचनात्मक तथा असंरचनात्मक कार्य कराए जाएंगे। इसके अंतर्गत कृषि एवं पशु मत्स्य संसाधन विभागों द्वारा उत्पादकता एवं प्रतिस्पद्र्धात्मक कृषि संवर्द्धन अवयव के अधीन कई बिंदुओं पर कार्य कर्णांकित हैं।

गुरुवार, 11 अगस्त 2016

वस्त्र मंत्रालय मना रहा ‘आजादी के रंग’

 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : वस्त्र मंत्रालय 70वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 9-15 अगस्त, 2016 तक देश भर में 70 स्थानों पर ‘आजादी के रंग’ महोत्सव मना रहा है, ताकि भारत के लोगों, विशेष रूप से हमारे युवाओं, में स्वतंत्रता और देशभक्ति का जोश भरा जा सके।
इसके लिए एक फ्लेक्स बनाया गया है, जिसके केंद्र में एक खादी कैनवास है। आम जनता के लिए प्रत्येक चिन्हित स्थल पर एक प्रमुख स्थान पर कैनवास के साथ फ्लेक्स बोर्ड लगाया गया है, ताकि वे 70वें स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर अपने विचार व्यक्त कर सकें। केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति जुबिन इरानी ने इस अवसर पर राष्ट्र को बधाई दी और देश के लोगों से उन स्वतंत्रता सेनानियों को याद करने एवं शुक्रिया अदा करने का आग्रह किया, जिन्होंने हमारी स्वतंत्रता के लिए लड़ाई लड़ी और हमें एक स्वतंत्र भारत दिया। 

स्वतंत्रता उत्सव पर वेब पेज लांच

नई दिल्ली : सूचना और प्रसारण मंत्री एम वेंकैया नायडू ने स्वतंत्रता उत्सव, 2016  पर प्रेस इंफॉरमेशन ब्यूरो (पीआईबी) द्वारा विकसित विशेष वेब पेज लांच किया। पीआईबी के होम पेज pib-nic-in पर यह विशेष वेब पेज प्राप्त किया जा सकता है। इसे पूरे देश में मनाए जाने वाले स्वतंत्रता उत्सव से संबंधित कार्यक्रम को दिखाने के प्लेटफाॅर्म के रूप में डिजायन किया गया है।
http://pibphoto-nic-in/documents/rlink/2016/aug/i201681013-jpg वेब पेज पर नेताओं और स्वतंत्रता से जुड़ी घटनाओं के फोटो, ऑडियो-वीडियो क्लीप, लेख तथा फीचर उपलब्ध कराए गए हैं। वेब पेज पर स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले के प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का लाइव वेबकास्ट किया जाएगा। उत्सव से संबंधित प्रधानमंत्री के संबोधन का भी लाइव वेबकास्ट किया जाएगा।  वेब पेज पर  मध्य प्रदेश के भाबरा में आयोजित उत्सव कार्यक्रम में प्रधानमंत्री का संबोधन और सूचना और प्रसारण मंत्री एम वेंकैया नायडू के नेतृत्व में मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में हुए समारोह के फोटो उपलब्ध होंगे।
वेब पेज का सोशल मीडिया सेक्शन ट्वीटर और फेसबुक के लाइव फीडों को दिखाएगा। वेब पेज के कंटेंट में अनेक संगठनों का योगदान रहा है। इनमें आकाशवाणी, दूरदर्शन, फोटो प्रभाग, फिल्म प्रभाग, रक्षा मंत्रालय का जनसंपर्क निदेशालय तथा विज्ञापन और दृश्य प्रचार निदेशालय शामिल हैं।

उमा भारती ने नमामि गंगे की सफलता को मांगा सहयोग

नई दिल्ली : केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती ने गंगा किनारे के लोकसभा सदस्यों से अनुरोध किया है कि वे नमामि गंगे कार्यक्रम की सफलता के लिए अपना सक्रिय योगदान और सहयोग दें। नई दिल्ली में इन सांसदों के साथ अपने निवास पर आयोजित एक बैठक में उन्होंने कहा कि नमामि गंगे कार्यक्रम में गंगा के सभी पहलुओं का ध्यान रखा गया है, जिनमें प्रदूषण निवारण, गंगा की अविरलता, जैव विविधता और उसके आसपास की वनस्पतियों का संरक्षण शामिल हैं। सुश्री भारती ने कहा कि विश्व बैंक ने भी हमारी इस योजना की यह कह कर प्रशंसा की है कि दुनिया में पहली बार किसी भी नदी के संरक्षण की योजना इतनी समग्रता के साथ तैयार की गई है।
सुश्री भारती ने कहा, ‘’यदि मुझे प्रधानमंत्री जी से अनुमति मिल गई, तो मेरी गंगोत्री से गंगासागर तक पदयात्रा करने की इच्छा है, ताकि मैं स्वयं प्रत्येक स्थान पर कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा कर सकूं। लोगों से हाथ जोड़कर विनती कर सकूं कि वे इस कार्यक्रम को सफल करने में अपना सहयोग दें।‘’ मंत्री महोदया ने कहा कि इस कार्यक्रम में जनता, सरकार और समाज की बराबर की भागीदारी है। उन्होंने कहा कि सरकार नदी के किनारे एसटीपी लगा देगी, घाट बना देगी, जीव-जंतुओं के एक बार संरक्षण की व्यवस्था कर देगी। सरकार का प्रयास तो एक बार होता है, लेकिन उस प्रयास की निरंतरता को बनाए रखना जनता और समाज की जिम्मेदारी है। सुश्री भारती ने कहा कि नमामि गंगे कार्यक्रम आजादी के बाद देशवासियों द्वारा गंगा में फैलाए गए प्रदूषण का प्रायश्चित है। उन्होंने कहा, ‘’मैं हमेशा बोलती हूं कि नमामि गंगे कार्यक्रम गंगा पर एहसान नहीं है, बल्कि आजादी के बाद गंगा नदी के साथ जो खिलवाड़ हुआ, गलत तरीके से औद्योगीकरण और शहरीकरण हुआ, जिससे कि गंगा मैली हुई, यह उस पाप का प्रायश्चित है जो हम करेंगे और आने वाली पीढ़ियों को एक निर्मल गंगा अमूल्य धरोहर के रूप में सौंप कर जाएंगे।‘’

आन्दोलनकारियों को चिहिन्त करने को आयोग का पुर्नगठन

रांची : झारखण्ड सरकार ने अलग राज्य के गठन हेतु चलाये गये आन्दोलन के विभिन्न श्रेणी के आन्दोलनकारियों तथा जयप्रकाश आन्दोलन के आन्दोलनकारियों को चिहिन्त करने हेतु झारखण्ड उच्च न्यायालय के सेवानिवृत माननीय न्यायाधीश विक्रमादित्य प्रसाद की अध्यक्षता में एक त्रिसदस्यीय आयोग का पुर्नगठन किया है, जो इन आन्दोलनकारियों की पहचान कर सरकार को अपनी रिर्पोट समर्पित करेगी। यह जानकारी गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा अधिसूचना जारी कर दिया गया है।
इस आयोग के अध्यक्ष सेवानिवृत माननीय न्यायाधीश विक्रमादित्य प्रसाद एवं सुनील फकीरा कच्छप तथा डाॅ. देवशरण भगत सदस्य होगें। आयोग का कार्यकाल एक वर्ष का होगा एवं इसकी अवधि आवश्यकतानुसार 6-6 महीने के लिए अधिकतम दो बार विस्तारित की जा सकेगी। यह अधिसूचना निर्गत तिथि से एक वर्ष के लिए प्रभावी होगा।

युवा देश व समाज की तरक्की के लिए अपना योगदान दें : राज्यपाल

  • सुभाष इंस्टीच्यूट आॅफ टेक्नोलाॅजी, बिहटा का सत्रारंभ समारोह-2016 आयोजित

पटना : ‘‘21वीं सदी ज्ञान एवं तकनीक पर आधारित सदी है। हर एक इंसान को आज इतना ज्ञान और तकनीकी कौशल पाने का अवसर जरूर मिलना चाहिए कि वो अपने विवेक और कौशल से समाज को बेहतर बनाने में सहयोग दे सके। आज हमारे संस्थानों को महज सामान्य शिक्षा देने के बजाय, एक ऐसे ज्ञान का केन्द्र बनने की ओर अग्रसर होना चाहिए, जहां हमारे छात्र शोध-कार्याें में भी अव्वल आ सकें।’’ उक्त विचार महामहिम राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने सुभाष इंस्टीच्यूट आॅफ टेक्नोलाॅजी, अमहरा, बिहटा, पटना के सभागार में आयोजित ‘सत्रारंभ समारोह-2016’ में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए व्यक्त किये।
समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आज के सामाजिक परिवेश में हमारे युवाओं को इतना दूरदर्शी और कर्मठ बनना है कि आने वाले वक्त में परिवर्तन की धार को वे एक सकारात्मक दिशा दे सकें। हमारी युवा-शक्ति ही इस महान देश को बुलंदियो के शिखर पर ले जा सकती है। हमारा प्रयास होना चाहिए कि यह युवा-शक्ति सही राह पर चले और सच्ची निष्ठा से मेहनत करते हुए अपनी प्रगति के साथ-साथ, अपने परिवार, समाज व देश की तरक्की में भी अपना योगदान दे सके। श्री कोविंद ने कहा कि देश-काल के साथ-साथ, उच्च शिक्षा ने भी एक लंबा सफर तय किया है। वैश्विक अपेक्षाओं तथा चुनौतियों का सामना आज शिक्षा-व्यवस्था को करना पड़ रहा है। शिक्षा का उद्देश्य शारीरिक, मानसिक तथा आध्यात्मिक तीनों प्रकार की क्षमताओं का समन्वित विकास तथा राष्ट्रीय आदर्शों के अनुरूप चरित्र का निर्माण है। साथ ही उसे दुनियां की जरूरतों के अनुरूप भी खरा उतरना है और गुणवत्तापूर्ण बनना है।
कार्यक्रम में राज्यपाल ने कहा कि तकनीकी शिक्षा के प्रति लगाव रखने वाले युवा वर्ग को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने के लिए पहले बिहार से बाहर जाने की मजबूरी थी। यह खुशी की बात है कि आज एनएसआईटी जैसी संस्थाओं की बदौलत तकनीकी शिक्षा हेतु बाहर जाने वाले छात्रों की संख्या में कमी आई है। नेताजी सुभाष इंस्ट्ीच्यूट आॅफ टेक्नोलाॅजी की स्थापना से आज कुशल और मेधावी छात्र कुशल इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ बनकर देश की सेवा में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
श्री कोविंद ने कहा कि आज इस संस्थान में नये शैक्षणिक सत्र का शुभारंभ हो रहा है। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के प्रबोधन के लिए आयोजित किया गया है। उन्होंने इस अवसर पर संस्थान के सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों को बधाई और शुभकामनाएं दी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति, डाॅ॰ समरेन्द्र प्रताप सिंह के कहा कि समयबद्धता और अनुशासनशीलता विद्यार्थियों के लिए अत्यन्त आवश्यक है। कार्यक्रम में बीआईटी, मेसरा के पूर्व कुलपति, प्रो. एचसी पाण्डेय ने भी अपने विचार व्यक्त किये। स्वागत भाषण सदस्य-सचिव मदन सिंह एवं धन्यवाद-ज्ञापन शिवजी सिंह ने किया। कार्यक्रम में पूर्व आईएएस अधिकारी रामेश्वर सिंह, प्रो. एमपी त्रिपाठी आदि भी उपस्थित थे।

सोमवार, 8 अगस्त 2016

डाॅ. लालजी प्रसाद की दो कविताएं

Dr. Lalji Prasad, Writer and Poet
 Poem@E-Mail 

उड़ान भरो औरत

उड़ान भरो
रूढ़ियों के पिंजड़े में
कब तक रहोगी कैद
किसी मर्द की सम्पत्ति नहीं तुम
नहीं कोई जींस मात्र
भोग का सामान नहीं केवल तुम
नहीं कोई लेन-देन की वस्तु
अस्तित्व की अपने हो रानी तुम
तेरी ही क्यों सिर्फ चुल्हानी की दुनिया
बाहर तुम्हारा भी हक बेशक है
छू सकती तुम भी आसमानों को
माप सकती अंतरिक्ष में ग्रहों की दूरियां
कंधे से कंधा मिला सकती तुम भी
मर्दों से दम कहां तुझमें कहीं कम है
चूक जाता मर्द जहां
रुक जाता मर्द जहां
हौसला जब पस्त होता उसका
विकट उन घड़ियों में
दुर्गा या काली तो तुम हो
उड़ान भरो औरत
उड़ान भरो।
अब जन्म देना छोड़ो सिकन्दरों को
नेपोलियन-मुसोलिनी-हिटलरों को
दे सको तो दो अब
मानवता के पहरुओं को।
जन्मने से रोको आततायी-बलात्कारियों को
जन सको तो जनो भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों को
तुम्हारी ही कोंख में पलता है प्रलय
पलता है कोई कभी शांति का मसीहा भी
समय-समय पर भगवानों की माता तुम
अस्तित्व की उनके हो भाग्य विधाता तुम
नहीं कमजोर कभी, नहीं हो अबला तुम
खुद को पहचानो तो हर घड़ी सबला तुम
जब चाहे कोई रौंदना तेरी अस्मिता को
सौंदर्य को अस्त्र बना करो विनाश तुम
वजूद को पहचान अपने
हौसले को पंख बना
उड़ान भरो औरत
उड़ान भरो।

मंगरुआ पढ़ताऽ अखबार / भोजपुरी कविता

मंगरुआ
टो-टा के पढ़ताऽ अखबार
गरीबी हटी, गरीबी हटी
सुनत-सुनत
भइल अधेड़ के पार
जब-जब आइल चुनाव
देखवलन नेता सब्जबाग
जाग मंगरुआ जाग
अब होई तोर उद्धार
लगाउ कसहूं बेड़ा पार
मंगरुआ पढ़ताऽ अखबार।
गरीबी भइल ना तनिको
टस-से-मस
गरीब होखत गेइलन
दिन-प-दिन अउर बेबस
एही बीच अजूबा अइलन एगो नेता
चैड़ा सीना वाला
ललकरलन सीना ठोक के
गरीबी के कीचड़ में
हम खिलाइब जरूर फूल
जीतला प दस करोड़ फेसबुकियन के
नौकरी पक्का
अउर लाइब अरबों-अरब काला धन
विदेश से वापस
एकाउण्ट मेें हर परिवार के
डाल देबि पन्द्रह-पन्द्रह लाख
गरीबी फटाक-से फुर्र !
तब सगरे खुशी के चमत्कार
मंगरुआ पढ़ताऽ अखबार।
‘कपालभांति’ से पेट फुलावत
सधुआ हो गोइल
फटाक-से फुर्र वाला के साथ
दिन-रात सुतला-जागला
लागल बउआए
काला धन, काला धन
वापस, वापस
देश में, देश में !
फुलावल सीना अउर सधुआ प
कइलें विश्वास लोग
भइल चमत्कार समान जीत
जीतला प पूछताड़न सभे लोग
पन्द्रह-पन्द्रह लाख
अउर दस करोड़ के नौकरी ?
निर्लज्ज जइसन बोलताऽ
चैड़ा सीना वाला
नइखे कौनो मामला ई
सिरिफ चुनाव जीते के जुमला ई।
सुनिके लोगन के बथता कपार
मंगरुआ पढ़ताऽ अखबार।
सधुआ सिरे से भूल गोइल बा
काला धन
देश प मारताऽ एगो आंख दाबिके
बार-बार कनखी
अब दिन-रात सुतला-जागला
बउआत बा सिरिफ
आटा-आटा
दाल-दाल
दंतमंजन-क्रीम !
जनता के छले खातिर
कइसन घातक ई छद्मवार
मंगरुआ पढ़ताऽ अखबार।
जनता के मरले बा काठ
छल से छलनी भइल बा सीना
कि कइसे भरमवलस ‘नकली सीना’
कइसे ‘कनखी’ कइलस घात
चाल नेतवन के समुझत-समुझत
बुझाता कि बीत जाई पीढ़ी के पीढ़ी
कबहीं दूर ना होई गरीबी
टीस मारताऽ बारम्बार
मंगरुआ पढ़ताऽ अखबार।
 कवि परिचय : डाॅ. लालजी प्रसाद एक जानेमाने साहित्यकार व शिक्षाविद् हैं। अबतक सैंकड़ों कहानियां, कविताएं, लघुकथाएं प्रकाशित हो चुकी हैं। साथ ही लालजी साहित्य प्रकाशन के आप मालिक हैं और अपनी सारी किताबें इसी प्रकाशन से प्रकाशित कर चुके हैं। 

मृदुल कुमार सिंह की कविताएं

मृदुल कुमार सिंह
 Poem@E-Mail 
 1 
कभी सूखा कभी वर्षा, कभी है बाड़ का पानी
नहीं सूखा किसानो की, कभी है आंख का पानी।
चुनौती नाव कागज की, भला सागर को क्या देगी
नये घर में न आंगन है, नहीं बरसात का पानी।
चढ़ा ही जा रहा है ये, न ले डूबे कहीं सबको,
हमारे धर्म का पानी, हमारी जात का पानी।
खरीदी है जमीं उसने, गरीबो की तरीके से,
दिखा बंदूक लाठी या, पिला मधु-नाम का पानी।
कहे धनिया कहे होरी, करें क्या खेत का आखिर,
नहीं रोटी मिले सूखी, नहीं अब दाल का पानी। 
          
जहां देखो वहीं पानी, बिके हे आज बोतल मंे,
कहीं दो घूंट भी मिलता, न दानी हाथ का पानी।
जलाशय क्या नदी सूखी, गया भूजल ‘मृदुल’ नीचे,
बचेगा क्या मिला आखिर, न मंगल चांद का पानी।          
 2 
इधर रोना उधर हंसना हुआ क्या हे,
सुबह अखबार में पढ़ना हुआ क्या हे।
- - - -
गयी मां भूल सोने और चांदी को,
घरों में देह का लुटना हुआ क्या हे।
- - - -
खरा-सोना लगे मासूम को कचरा,
जरा से पेट को भरना हुआ क्या हे।
- - - -
बहिन-बेटी कहीं मां हे गयी घर से,
दिलों का आजकल मिलना हुआ क्या हे।
- - - -
सभी सपने गये हे टूट मत पूछो,
कली का फूल सा खिलना हुआ क्या हे।
- - - -
फसल चिंतित कहां उग लहलहायें वो,
शहर का गांव में बसना हुआ क्या हे।
- - - -
‘मृदुल’ सब बिक गये हें खेत घर गहने,
भला ऐसा नसा करना हुआ क्या हे।
 कवि परिचय : मृदुल कुमार सिंह (वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक, पुनःरीक्षित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम), महाराजपुर, चिलावटी, अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश) 202142
 मोबाइल : 9412820791