COPYRIGHT © RAJIV MANI, Journalist, Patna

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गुरुवार, 29 सितंबर 2016

बिहार में विदेशी शराब एवं बीयर के निर्यात शुल्क एवं बोटलिंग में छूट

निर्णय शराबबंदी कानून के हित में : आमिर सुबहानी
 संक्षिप्त खबरें 
पटना : प्रधान सचिव उत्पाद एवं मद्य निषेध आमिर सुबहानी ने बताया कि राज्य में पूर्ण नशाबंदी लागू होने के बाद विदेशी शराब एवं बीयर की खरीद-बिक्री एवं उपभोग पर रोक है, परन्तु उसका विनिर्माण या बोटलिंग प्रतिबंधित नहीं है। राज्य में भारत निर्मित विदेशी शराब और बीयर का बोटलिंग प्रतिबंधित नहीं होने के कारण राज्य में स्थापित विदेशी शराब एवं बीयर की ईकाइयों द्वारा बोटलिंग किया जा रहा है, किन्तु राज्य में इनका व्यापार प्रतिबंधित होने के कारण इनके उत्पाद की बिक्री नहीं हो रही है। इन इकाइयों के समक्ष दूसरे राज्यों में निर्यात के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं है। 
प्राप्त सूचनानुसार भारत निर्मित विदेशी शराब और बीयर के बोटलिंग प्लांट में राष्ट्रीय/अन्तर्राष्ट्रीय कंपनियों द्वारा काफी पूंजी निवेश किया गया है। वर्तमान में बीयर बनाने वाली तीन ब्रिवरिज और बारह विदेशी शराब के बोटलिंग प्लांटस हैं, जो क्रमशः बीयर बनाती है और बोटलिंग तथा कम्पाउडिंग करती है। इन कंपनियों से प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से सैकड़ों लोगों को रोजगार भी प्राप्त हुआ है। इन कंपनियों के द्वारा उत्पादित बीयर तथा विदेशी शराब के स्टाॅक को राज्य के बाहर भेजने की आवश्यकता है, ताकि शराब का स्टाॅक राज्य में पड़ा न रहे। अतः राज्य सरकार के निर्णयानुसार विदेशी शराब एवं बीयर को राज्य से बाहर ले जाने की अनुमति तथा निर्यात शुल्क एवं बोटलिंग फी में छूट देने का निर्णय निम्नलिखित शर्तो के अधीन लिया गया है :
(क) निर्माताओं द्वारा उत्पाद जिस ट्रक से बाहर भेजा जायेगा उस पर जीपीएस और डिजिटल लाॅक अपने खर्चे पर लगाया जायेगा तथा सुरक्षा एजेंसी की सुरक्षा में माल को गंतव्य स्थान तक पहुंचाया जायेगा।
(ख) वे जो माल बाहर भेजेंगे, उसका विस्तृत ब्यौरा उत्पाद विभाग को उपलब्ध करायेंगे। अगर उसमें से कोई भी उत्पाद बिहार के क्षेत्र में कहीं भी पाया जाता है, तो उनके विरूद्ध कार्रवाई की जायेगी।
(ग) साथ ही ये शराब के पुराने स्टाक को लेबल बदलकर 3 माह में निर्यात करना सुनिश्चित करेंगे।
(घ) अगर वे पुराने स्टाॅक निकालने की गांरटी नहीं देते हैं, तो उन्हें निर्यात की अनुमति/परमिट नहीं दी जायेगी।
(ड.) निर्यातक को एक करोड़ रुपये की बैंक गारंटी प्रतिवर्ष प्रतिभूति के तौर पर रखनी होगी।
श्री सुबहानी ने जानकारी दी है कि उपर्युक्त शत्र्तों के तहत लिए गए निर्णय राज्य में पूर्ण शराबबंदी के हित में हैं तथा इससे पूर्ण शराबबंदी की नीति पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

अच्छा कार्य कर रहा बिहार राज्य अभिलेखागार : सीएम

पटना : मुख्यमत्री नीतीश कुमार ने अभिलेख भवन, पटना में बिहार राज्य अभिलेखागार द्वारा आयोजित कार्यक्रम को दीप प्रज्जवलित कर उद्घाटन करते हुये अभिलेखागार द्वारा प्रकाशित पुस्तक बिहार आन्दोलन 1974 - पांच खंडों में, किसान आन्दोलन - पांच खंडों में, शीलभद्र याजी, रामवृक्ष बेनीपुरी, रामचरित्र सिंह एवं जगलाल चैधरी के बिहार विधानमंडल के अभिभाषण एवं स्टडी आॅफ द प्रेसक्राइव लिटरेचर इन कोलोनियल बिहार (1912-1947) समेत पन्द्रह पुस्तकों एवं एक जनरल का विमोचन किया। इस अवसर पर उपस्थित विद्वतजनों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार राज्य अभिलेखागार अच्छा कार्य कर रहा है। जो अभिलेख संग्रहित है, उसे धीरे-धीरे पुस्तक के रूप में प्रकाशित करना सराहनीय कदम है। 
1974 के जन आन्दोलन के संबंध में उन्होंने कहा कि इस आन्दोलन का नेतृत्व लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने किया। छात्र आन्दोलन से इसकी शुरूआत हुई और जन आन्दोलन में यह परिवर्तित हो गया। 1974 के आन्दोलन में छात्रांे एवं युवाओं की भागीदारी जितनी बड़ी संख्या में हुई, वह सर्वविदित है। आजादी के बाद इतना बड़ा आन्दोलन नहीं हुआ था। इस आन्दोलन की गतिविधि इतनी तेज हुई कि देश में आपातकाल लागू करना पड़ा और लोकनायक जयप्रकाश नारायण को जेल जाना पड़ा। 1974 के बाद पहली बार कांग्रेस सता से अलग हुई। उन्होंने कहा कि 1974 आन्दोलन की अपनी खासियत थी। इस आन्दोलन पर ठीक ढंग से पुस्तक प्रकाशित नहीं हुई थी। संपूर्ण रूप से इस आन्दोलन के बारे में कभी नहीं लिखा गया। उन्होंने कहा कि आन्दोलन के कई साथियों ने जो दस्तावेज उपलब्ध कराए, उसके आधार पर आठ खंडों में पुस्तक प्रकाशित करने का निर्णय हुआ, जिसका पांच खंड आज विमोचित हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जेपी के नेतृत्व में जन आन्दोलन 1974 में शुरू हुआ, जिसकी परिणति 1977 में आयी।

बुधवार, 28 सितंबर 2016

आठ उपग्रहों का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण

पीएसएलवी-सी 35 ने एक ही उड़ान में दो अलग अलग कक्षाओं में किया प्रक्षेपण
 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : अपनी सैतीसवीं उड़ान (पीएसएलवी-सी 35) में इसरो के पोलर उपग्रह प्रक्षेपण यान ने सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र एसएचएआर, श्रीहरिकोटा से सात सहयात्री उपग्रहों के साथ 371 किलो के स्काटसेट-1 उपग्रह का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। यह पीएसएलवी का लगातार 36वां सफल मिशन है। पीएसएलवी-सी 35 के द्वारा ले जाए गए सभी आठ उपग्रहों का कुल वजन 675 किलोग्राम था। पीएसएलवी-सी 35 दो अलग-अलग कक्षाओं में ऑन बोर्ड ले जाए गए उपग्रहों का प्रक्षेपण करने वाला पहला पीएसएलवी मिशन है। यह मिशन आज तक आयोजित सभी पीएसएलवी मिशनों में सबसे लंबा था और लिफ्ट ऑफ के बाद इसे पूरा करने में 2 घंटे 15 मिनट और 33 सेकंड का समय लगा।
पीएसएलवी-सी 35 लिफ्ट ऑफ के बाद पहले चरण के दहन के बाद तद्वर्ती महत्वपूर्ण उड़ान घटनाओं में स्ट्रेप ऑन दहन ऑल विलगन, पहले चरण का विलगन, दूसरे चरण का दहन, पेलोड फेयरिंग विलगन, दूसरे चरण का विलगन, तीसरे चरण का दहन और विलगन, चैथे चरण का दहन और कटऑफ शामिल है, जो योजना के अनुसार हुए हैं। 16 मिनट 56 सेकंड की उड़ान के बाद, वाहन ने 724 किमी पोलरसन सिनक्रोनस कक्ष को प्राप्त किया और भूमध्य रेखा की ओर 98.1 डिग्री के कोण पर झुका, इसके 37 सेकंड के बाद प्राथमिक उपग्रह स्केटसेट-1 पीएसएलवी चैथे चरण से अलग हो गया। स्केटसेट-1 उपग्रह द्वारा भेजे गए डेटा हवा वेक्टर उत्पादों के सृजन के माध्यम के साथ-साथ चक्रवात का पता लगाने और ट्रैकिंग के साथ-साथ उपभोक्ता समुदायों को मौसम की भविष्यवाणी सेवाएं उपलब्ध कराने मदद करेंगे।
स्केटसेट-1 के सफल विलगन के बाद, पीएसएलवी-सी 35 मिशन जारी है। सात सह-यात्री उपग्रहों को ले जाते हुए पीएसएलवी का चैथा चरण दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र के ऊपर हुआ और इसके बाद यह उत्तरी गोलार्द्ध की तरफ बढ़ता हुआ चला गया। स्केटसेट-1 और पीएसएलवी-सी 35 की कक्षाओं के मध्य चैथे चरण के दौरान सुरक्षित दूरी बनाई रखी गई। लिफ्ट ऑफ के एक घंटे 22 मिनट 38 सेकंड बाद जैसे ही उतरी ध्रुवीय क्षेत्र में चैथा चरा हुआ तो पीएसएलवी चैथे चरण के दो इंजन फिर से प्रज्जवलित हुए, इसके कारण यह पृथ्वी के एक ओर 725 किमी और दूसरी ओर 670 किमी दीर्घवृत्ताकार कक्षा में प्रविष्ट हुआ।
50 मिनट बाद जैसे ही पीएसएलवी का चैथा चरण फिर से दक्षिण ध्रुव के पास पहुंचा, इसके इंजन पर 20 सेकंड के लिए फायर किया गया। इस दूसरी फायरिंग ने चैथे चरण भूमध्य रेखा की ओर 98.2 डिग्री के कोण पर झुके 669 किमी ऊंचाई के वृताकार कक्ष में प्रवेश करने में मदद की। 37 सेकंड बाद पीएसएलवी-सी 35 के चैथे चरण से सफलतापूर्वक अलग हो गया। इसके 30 सेकंड के बाद एलसेट-1 सफलतापूर्वक अलग होने वाला पहला सहयात्री उपग्रह था। उसके बाद एनएलएस -19, प्रथम, पीसेट, एलसेट-1 बी, एलसेट-2 बी, और पाथ फाइंडर-1 पीएसएलवी चैथे चरण से सफलतापूर्वक अलग हुए। पीएसएलवी-सी 35 मिशन द्वारा ले जाए गए सात सहयात्री उपग्रहों में दो प्रथम का वजन दस किलो प्रतिसेट का वजन 5.25 किलोग्राम का वजन था। शेष पांच सहयात्री उपग्रह में अलजीरिया के तीन, कनाडा का एक और अमेरिका का एक अंतरराष्ट्रीय उपभोक्ता उपग्रह थे। इस प्रक्षेपण से पीएसएलवी की दो विभिन्न कक्षाओं में सफलतापूर्वक उपग्रह प्रक्षेपण की क्षमता का प्रदर्शन हुआ है। भारतीय वर्कहार्स प्रक्षेपण वाहन पीएसएलवी द्वारा प्रक्षेपित उपग्रहों की कुल संख्या बढ़कर 121 हो गई है, जिसमें से 42 भारतीय और शेष 79 विदेशी हैं।

दिल्ली एम्स 60 वर्ष का हुआ, हीरक जंयती मनायी

नई दिल्ली : अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ने गुणवत्तायुक्त स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसने पिछले 6 दशकों के दौरान नैदानिक प्रदाता, अनुसंधान संस्थान और शिक्षण संस्थान के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दिल्ली में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के हीरक जयंती समारोह के अवसर पर केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने ये उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्ष 205-16 के दौरान एम्स, दिल्ली में 30 लाख बाह्यरोगियों, ढाई लाख अंतःरोगियों का इलाज किया गया और लगभग डेढ़ लाख शल्यचिकित्सा की गईं।
समारोह के दौरान श्री नड्डा ने कहा कि इस संस्थान ने हमेशा प्रतिभा और शिक्षा के क्षेत्र में उच्चतम मानकों को कायम रखा है। इस संस्थान ने पूरे देश से सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं को आकर्षित किया है, जो इस संस्थान में युवा छात्रों के रूप में प्रवेश करती हैं और गरीब से गरीब लोगों की सेवा करने की गहन प्रतिबद्धता के साथ पासआउट होती हैं। जेपी नड्डा ने कहा कि एम्स देश में स्थापित किए जा रहे एम्स जैसे नए संस्थानों के लिए एक पथ प्रदर्शक भी है। इस संदर्भ में एम्स नियमों और विनियमों सहित अधीनस्थ विधानों को तैयार करने और समीक्षा करने में एम्स का कार्य बहुत सराहनीय रहा है। एम्स के योगदान पर प्रकाश डालते हुए श्री नड्डा ने कहा कि इस संस्थान ने न केवल उच्च प्रतिष्ठा अर्जित की है, बल्कि शैक्षिक गुणवत्ता, छात्रों की देखभाल, बुनियादी ढांचा और नौकरियों के अवसर जुटाने में काफी योगदान दिया है। इसके अपने नौ केन्द्रों, 52 शिक्षण विभागों और आठ सौ से अधिक शिक्षकों सहित दस हजार से ज्यादा जनशक्ति के साथ एम्स, दिल्ली नर्सों और पैरामेडिकल पेशेवरों सहित अनेक संख्या में विशेषज्ञों (एमडी/एमएस), सुपर विशेषज्ञों (डीएम / एमसीएच), पीएचडी विद्वानों और संबद्ध स्वास्थ्य और बुनियादी विज्ञान विशेषज्ञों को तैयार करता है।

नौवीं से पीजी तक विभिन्न भाषाओं में होंगे कोर्सेस

नई दिल्ली : केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि शीघ्र ही लोगों को घरों में अच्छे शिक्षकों से पढ़ने का अवसर मिलेगा। ऐसा संभव होगा डीटीएच और केबल टीवी के माध्यम से। इसमें कोई भी शिक्षक यदि किसी एक विषय में अच्छा है, तो उसे भी पढ़ाने का अवसर मिलेगा। साथ ही छात्रों को भी अच्छे शिक्षकों का मार्गदर्शन मिल सकेगा। इसके लिए डीटीएच और केबल टीवी आॅपरेटर्स ने भी रुचि दिखाई है। 
जावड़ेकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी भी चाहते हैं कि देश में अच्छा अनुसंधान हो। इसके लिए हम प्रधानमंत्री स्कॉलरशिप योजना को प्रभावी बनाएंगे, जिससे देश के प्रतिभावान अनुसंधानकर्ता विदेश न जाकर यहीं पर नवीन खोजों को अंजाम दे सकें। केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री ने लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम ‘जागरण कुलपति फोरम, उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा: वर्तमान और भविष्य’ में शिरकत करते हुए विश्वविद्यालयों के उपस्थित कुलपतियों से अपील भी की कि देश की संपन्नता अच्छे रिसर्च और नवीन खोजों से ही संभव है।
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे जवान देश है और यहां के लोगों में दक्षता बहुत है। लेकिन, हम देश में मेधा को इसलिए नहीं रोक पाते कि उन्हें देश में चुनौती नहीं मिल पाती जो विदेशों में मिल जाती है। रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए हम उच्चतर अनुष्ठान और औद्योगिक इकाइयों को जोड़ेंगे। आने वाले 3 सालों में 20 हजार करोड़ रुपयों की सहायता से हाई क्लास रिसर्च इनफ्रास्ट्रक्चर देश में तैयार किए जाने की योजना है। साथ ही प्रयास है कि विदेशों में बसी भारतीय मेधा न सिर्फ भारत वापस आए, बल्कि यहां निवेश भी करे, जिससे मेक इन इंडिया के माध्यम से रिसर्च के लिए मजबूत इनफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा सके।

सात निश्चय की जो भी योजनाएं हैं, वह यूनिवर्सल हैं : सीएम

Nitish Kumar
पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हर घर नल का जल एवं शौचालय निर्माण घर का सम्मान निश्चय का अधिवेशन भवन, पटना में दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज मेरे लिये बहुत ही प्रसन्नता का विषय है कि राज्य सरकार के सात निश्चय में से दो निश्चय पर कार्य प्रारंभ हो रहा है। सात निश्चय में से एक निश्चय को पहले ही कार्यान्वित किया जा चुका है। सरकारी सेवा में महिलाओं को 35 प्रतिशत का आरक्षण दिया जा चुका है। दो निश्चय पर आज कार्य प्रारंभ किया जा रहा है, हर घर नल का जल एवं शौचालय निर्माण पर कार्य। उन्होंने कहा कि हर घर नल का जल में तीन विभाग कार्य करेंगे। शहरी क्षेत्रों में नगर विकास एवं आवास विभाग तथा ग्रामीण क्षेत्रों में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग एवं ग्रामीण विकास विभाग कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि पहले ग्रामीण इलाकों में जल आपूर्ति योजना का कार्यान्वयन लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग द्वारा ही किया जाता था। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग द्वारा जल आपूर्ति के लिए कई प्रकार की योजनाएं ली गयी थी, जैसे - ओवरहेड टैंक का निर्माण, सौर ऊर्जा संचालित जल आपूर्ति योजना, मिनी जल आपूर्ति योजना। इन योजनाओं के समीक्षा के क्रम में यह बात आई कि जल आपूर्ति की जितनी योजनाएं ली गयी हैं, अगर सबको पूरी कर दी जाय, तब भी 22 से 24 प्रतिशत घरों में ही नल का जल पहुंच पायेगा। उस वक्त लगा कि हर घर का नल के लिए काम करना चाहिये। पहले की योजनाएं तो चालू रहेंगी ही, पानी के गुणवता की योजना अब भी लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग द्वारा किया जायेगा।
मुख्यमंत्री ने फ्लोराइड प्रभावित मुंगेर जिला का गांव खैरा की चर्चा की। उन्होंने कहा कि 2010 में वहां गया था और फ्लोराइड का लोगों पर प्रभाव देखा था। लोगों ने मांग किया कि इसके लिए योजना बनाइये, उसी समय योजना बनायी गयी। वन विभाग से अनुमति नहीं मिलने पर विलम्ब हुआ, लेकिन अब काम तेजी से चल रहा है। बताया गया है कि शीघ्र ही पूरा कर लिया जायेगा। उन्होंने कहा कि गंगा नदी के किनारे का क्षेत्र आर्सेनिक से प्रभावित है तथा खगड़िया एवं उतर-पूर्वी बेल्ट में आयरन की मात्रा ज्यादा पाई जाती है।
पानी की गुणवता की योजना लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग द्वारा चलाया जायेगा। उन्होंने कहा कि हर घर नल का जल निश्चय के तहत लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग द्वारा पूर्व की ली गयी योजनाएं, गुणवता प्रभावित इलाकों में ली गयी योजनाएं तथा इन क्षेत्रों में आगे कार्यान्वित की जाने वाली योजनाएं एवं जो पंचायत आंशिक रूप से गुणवता से प्रभावित हैं, वैसे पंचायतों के पूरे इलाके में जल आपूर्ति की योजना का कार्यान्वयन किया जायेगा। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्र में इस योजना का कार्यान्वयन नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा किया जायेगा तथा गैर गुणवता प्रभावित पंचायतों में पंचायती राज विभाग द्वारा पंचायती राज संस्थाओं के माध्यम से कार्य किया जायेगा। उन्होंने कहा कि वार्ड स्तर पर जल आपूर्ति योजना का कार्यान्वयन किया जायेगा। वार्ड सदस्य की अध्यक्षता में समिति होगी। पूरे पंचायत में विकेन्द्रित कर योजना लागू की जायेगी। काफी चिन्तन के बाद यह संभव हो सका। 
उन्होंने कहा कि वार्ड वाइज नल का जल की योजना होगी, तो पाइप से पानी पहुंचाना कठिन नहीं होगा। उन्होंने कहा कि योजना में तकनिकी सलाह तथा उसकी रख-रखाव एवं देखभाल लेाक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के अभियंताओं द्वारा किया जायेगा। योजना का क्रियान्वयन पंचायती राज संस्थाओं द्वारा किया जायेगा। उन्होंने कहा कि हर आदमी का सपना होता है नल का जल। शहरी क्षेत्रों में बड़ी-बड़ी योजनाएं विभाग द्वारा क्रियान्वित किये जायेंगे।
छोटी-छोटी योजनाएं भी ली जायेगी, जिसे नगर निकाय के माध्यम से कार्यान्वित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है इस योजना का क्रियान्वयन शीघ्रता से हो। जल की गुणवता से कोई समझौता नहीं किया जायेगा। हर व्यक्ति को 135 लीटर जल की उपलब्धता दी जायेगी। उन्होंने कहा कि काफी परामर्श के बाद यह योजना बनी। तीन विभागों को जिम्मेवारी दिया गया। सलाना लक्ष्य रखा गया। योजना के कार्यान्वयन पंचायती राज संस्थाओं के सहयोग से होगा। योजना के लिए पैसे का इंतजाम कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि नदी में कूदने पर ही इनसान तैरना सीखता है। आज इस योजना के क्रियान्वयन के लिए तीनों विभाग को बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि लोगांे का पहले सपना था चापाकल। जब सब जगह चापाकल लगाया गया, तो लोगों के मन में इच्छा जगी नल का जल। लोगों की इच्छा बढ़ने लगी। 
उन्होंने कहा कि चुनाव से पूर्व सात निश्चय का कार्यक्रम तय किया गया था। महागठबंधन के साझा कार्यक्रम का अंग बना सात निश्चय। अब सात निश्चय का क्रियान्वयन होगा। उन्होंने कहा कि हर घर नल का जल शुरू होने के बाद भी सभी सार्वजनिक चापाकलों की मरम्मति तथा देख-रेख पूर्ववत जारी रहेगी। आज कुआं की हालत खराब हो गयी है। सभी सार्वजनिक कुओं का जीर्णोद्धार किया जायेगा, ताकि उसका इस्तेमाल किया जा सके। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्र में लगे चापाकलों की मरम्मति एवं देख-रेख की जायेगी।
शौचालय निर्माण, घर का सम्मान निश्चय के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना पर शुरू से जोर दिया जा रहा था। शुरू में केन्द्र सरकार द्वारा सिर्फ बीपीएल परिवार के लिए शौचालय निर्माण की योजना लागू की गयी थी। उस समय हमने सर्वेक्षण कराया। सर्वेक्षण में यह तथ्य सामने आया कि 56 लाख परिवारों के पास शौचालय नहीं है।
हमने एपीएल परिवारों के लिए शौचालय निर्माण की योजना की शुरूआत की। शौचालय निर्माण के लिए लोहिया स्वच्छता अभियान की शुरूआत की गयी। केन्द्र सरकार से भी मांग किया गया, जिसे बाद में केन्द्र सरकार ने स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि स्वच्छता अभियान पर वर्ष 2015 में हमने बैठक बुलायी थी। शहरी क्षेत्र में शौचालय निर्माण के लिए लोगों को चार हजार रुपये दिये जाते थे तथा ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय निर्माण के लिए बारह हजार रुपये दिये जाते थे। राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया कि शहरी क्षेत्र में शौचालय निर्माण के लिए राज्य सरकार अपनी तरफ से आठ हजार रुपये की सहायता राशि देगी। इस योजना को हमने लागू कर दिया। नगर निकाय द्वारा किए गये सर्वेक्षण के आधार पर लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 
उन्होंने कहा कि बहुत ऐसे घर हैं, जिनके पास शौचालय के लिए जमीन नहीं है, वहां पर कलस्टर में शौचालय का निर्माण कराया जायेगा, लेकिन एक-एक शौचालय का निर्माण कराकर उसकी जिम्मेवारी एक-एक परिवार को दी जायेगी। उस परिवार का शौचालय रहेगा। उन्होंने कहा कि हमारी जो भी निश्चय की योजना है, वह यूनिवर्सल है। किसी को वंचित नहीं किया गया है, यह योजना सबके लिए है। उन्होंने कहा कि इसका प्रभाव आने वाले समय में समाज के पुनर्निर्माण में परिलक्षित होगा। उन्होंने कहा कि नब्बे प्रतिशत बीमारी खुले में शौच के कारण होती है। खुले में शौच बंद होने पर कई प्रकार के बीमारियों के शिकार नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि शौचालय नहीं होने से महिलाओं को कितना कष्ट होता है। घर-घर शौचालय का निर्माण होने पर सहुलियत होगी। शौचालय निर्माण में स्वयंसेवी संस्था काम कर रही है। जन चेतना जगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शौचालय बनाने मात्र से काम नहीं होगा, लोगों में उसका उपयोग करने के लिए जागरूकता लानी होगी। उन्होंने कहा कि अगले चार से पांच साल में पूरे बिहार में खुले में शौच से मुक्त करने का लक्ष्य है। जैसा माहौल बन रहा है, यह असंभव नहीं लगता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बहुत जल्द ही और निश्चय का कार्यान्वयन होने जा रहा है। मुझे पूरा विश्वास है कि जन सहयोग से यह काम सफल होगा। सबलोगों को मिलकर काम करना है। उन्होंने कहा कि सात निश्चय का सभी कार्य मजबूती से हो रहा है। इतने ही मजबूती से लोक शिकायत निवारण कानून का क्रियान्वयन हो रहा है, उतने ही मजबूती से शराबबंदी भी होगा। उन्होंने कहा कि शराबबंदी के बाद आज वातावरण कितना अच्छा हो गया है। शराब मुक्त समाज और शौच मुक्त वातावरण होने पर बिहार उदाहरण बनेगा। बिहार के लिए फिर स्काई इज द लिमिट होगी।
जस्टिस काटजू के बयान पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा इतिहास गौरवशाली है। यह वही पाटलिपुत्र है, जहां से इतने बड़े क्षेत्र पर शासन चलाया जाता था, जितना बड़ा आज देश का क्षेत्रफल नहीं है। भगवान बुद्ध को इसी धरती पर ज्ञान प्राप्त हुआ था। चन्द्रगुप्त मौर्य, सम्राट अशोक, चाणक्य इसी धरती के थे। आर्यभट्ट भी इसी धरती के थे, जिन्होंने दुनिया को शून्य दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे बिहार के हर इनसान के सम्मान का फिक्र है। सात निश्चय के कार्यान्वयन के बाद गांव हो या शहर, लोग जरूर स्मार्ट हो जायेंगे। उन्होंने कहा कि काफी अध्ययन के बाद इन योजनाओं को लागू किया जा रहा है। हम खुले मन से काम करते हैं। उन्होंने कहा कि इन निश्चय के क्रियान्वयन से बिहार के ग्यारह करोड़ लोगों के मन में आनंद एवं खुशी होगी।
इस अवसर पर पंचायती राज मंत्री कपिलदेव कामत, नगर विकास एवं आवास मंत्री महेश्वर हजारी, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, विकास आयुक्त शिशिर कुमार सिन्हा ने भी सभा को संबोधित किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा हर घर नल का जल निश्चय के तहत लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के 268 करोड़ रुपये की लागत की 580 ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं, नगर विकास विभाग के 519 करोड़ रुपये की योजनायें, जिससे लगभग 4.83 लाख परिवार लाभान्वित होंगे, का उद्घाटन किया गया। साथ ही शौचालय निर्माण, घर का सम्मान निश्चय के तहत नगर विकास एवं आवास विभाग के 168 करोड़ रुपये की लागत से बनी 1.40 लाख व्यक्तिगत शौचालय का शुभारंभ/उद्घाटन किया गया। इसके अलावा नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा हर घर नल का जल एवं शौचालय निर्माण, घर का सम्मान दोनों निश्चय के तहत ली जाने वाली योजनाओं के अनुश्रवण हेतु एक एमआईएस एप्लिकेशन तथा ग्रामीण विकास विभाग द्वारा लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान को समर्पित बेवसाइट तथा योजनाओं के अनुश्रवण हेतु मोबाइल एप्प का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ग्रामीण विकास विभाग, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, पंचायती राज विभाग तथा नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा लगायी गयी प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।
इस अवसर पर विकास आयुक्त शिशिर कुमार सिन्हा द्वारा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को प्रतीक चिह्न भेंट किया गया। इस अवसर पर खान एवं भूतत्व मंत्री मुनेश्वर चैधरी, महापौर पटना नगर निगम अफजल इमाम, मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, प्रधान सचिव लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण अंशुली आर्या, प्रधान सचिव नगर विकास एवं आवास चैतन्य प्रसाद, प्रधान सचिव कृषि सुधीर कुमार, प्रधान सचिव मंत्रिमण्डल समन्वय ब्रजेश मेहरोत्रा, मुख्यमंत्री के सचिव अतीश चन्द्रा, सचिव ग्रामीण विकास अरविन्द कुमार चैधरी, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा सहित जनप्रतिनिधि, गणमान्य व्यक्ति एवं अधिकारी उपस्थित थे।

शनिवार, 24 सितंबर 2016

गया में ही पिंड दान क्यों ?

पटना : विष्णु जी की नगरी गया धाम पितृ पक्ष मेले के लिए ही प्रसिद्ध माना जाता है। इस विष्णु नगरी गया में हर साल विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेले की शुरूआत होने के साथ ही पितरों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए पिंडदान शुरू होता है। हिन्दू धर्म के अनुसार, हर वर्ष भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि तक की अवधि पितृपक्ष या महालय कहलाती है। इस अवधि में पितरों को पिण्डदान और तर्पण करने की प्रथा चली आ रही है। ऐसा कहा जाता है कि इस अवधि में मृत्यु के देवता यमराज कुछ समय के लिए पितरों को मुक्त कर देते हैं, ताकि वे अपने परिजनों से श्राद्ध ग्रहण कर सकें।
पितृ पक्ष की इस अवधि में पितरों के लिए श्राद्ध किया जाता है, जिसमें मुख्य रूप से पिंडदान, जल तर्पण और ब्रह्मभोज कराया जाता है। ब्रह्मपुराण में श्राद्ध की व्याख्या करते हुए कहा गया है कि जो भी वस्तु उचित कार्य और स्थान पर विधिपूर्वक तथा श्रद्धा से ब्राहाणों को दी जाये, वह श्राद्ध कहलाता है। हिन्दू धर्म के अनुसार, श्राद्ध कर्म के माध्यम से पितरों की तृप्ति के लिए उनतक भोजन पहुंचाया जाता है, जिसमें पिंड के रूप में पितरों को भोजन कराना प्रमुख कार्य माना जाता है।
गया में पिंड दान करने की प्रथा कई युगों से चली आ रही है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान राम अपने भाई लक्ष्मण के साथ अपने पिता का श्राद्ध करने गया धाम पहुंचे, जहां पिंडदान की सामग्री लाने के लिए राम और लक्ष्मण बाहर चले गये थे और माता सीता अकेली फल्गु तट पर दोनों के लौटने का इंतजार कर रही थी। बहुत समय बीत गया, लेकिन दोनों भाई नहीं लौटे, तभी माता सीता के सामने पिता दशरथ की आत्मा प्रगट हुई और पिंड दान की मांग की। सीता ने श्रीराम के आगमन तक की प्रतीक्षा करने का अनुरोध किया, परन्तु वे व्याकुल हो गये और सीता से पिंड दान की मांग करने लगे। तब सीता ने केतकी के फूलों और गाय को साक्षी मानकर बालू के पिण्ड बनाकर राजा दशरथ के लिए पिण्डदान किया।
कुछ समय बाद जब भगवान राम लौटकर आए, तो सीता ने उन्हें पिंड दान की सारी जानकारी दे दी। लेकिन, राम ने उनकी बात पर विशवास नहीं किया। इसके बाद सीता मां ने महाराज दशरथ की आत्मा का ध्यान कर उन्हीं से गवाही देने की प्रार्थना की, जिसके बाद स्वयं महाराज दशरथ की आत्मा प्रकट हुई और उन्होंने कहा कि सीता ने उनका पिण्डदान कर दिया है। सीता मां के इस पिंड दान के कारण आज भी लोग यहां बालू, मिट्टी या रेत से पिण्डदान करते हैं।
साभार : www.india.com 

गुजरात में तीन गिनीज बुक वर्ल्ड रिकॉर्ड बने

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नई दिल्ली : पिछले दिनों गुजरात के नवसारी में आयोजित सामाजिक अधिकारिता शिविर और सहायता उपकरणों, यंत्रों की खरीद, फिटिंग के लिए दिव्यांगजनों की सहायता योजना (एआईडीपी) में तीन गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बने। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस आयोजन के विशिष्ट अतिथि थे। अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने माइक्रो-ब्लॉगिंग वेबसाइट पर ट्वीट किया, “नवसारी ने तीन रिकॉर्ड कायम किये, जिसने उसे विश्व के मानचित्र पर दर्ज कर दिया है। बधाईयां।”
पहला रिकॉर्ड : “एक ही स्थल पर सबसे अधिक दीप एकसाथ प्रज्ज्वलित” : मेगा कैम्प की पूर्व संध्या (16 सितंबर, 2016) को दीप प्रज्ज्वलित किये गये। आश्चर्यजनक रूप से 989 दिव्यांगजन एकसाथ एकत्र हुए और नया रिकॉर्ड कायम किया। यह रिकॉर्ड बनाने के लिए न्यूनतम 500 भागीदारों की आवश्यकता थी, लेकिन उस संख्या से लगभग दोगुने भागीदार उपस्थित हुए। प्रत्येक व्यक्ति के लिए यह चुनौती थी कि संकेत मिलने के 30 सेकंड के अंदर एक समय में ही दीप जलाये जाने थे।
दूसरा रिकॉर्ड : “सबसे बड़ी व्हील-चेयर का लोगो” का रिकॉर्ड 17 सितंबर, 2016 को नवसारी, गुजरात में टूट गया : एक हजार प्रतिभागियों ने व्हील-चेयर पर बैठकर तिरंगे में ‘जन्मदिवस की बधाई प्रधानमंत्री जी’ का संदेश प्रस्तुत किया। इस तरह अमेरिका स्थित मिनीसोटा के मूरलैंड में होप इनकार्पोरेटेड द्वारा 346 प्रतिभागियों का पिछला रिकॉर्ड टूट गया।
तीसरा रिकॉर्ड : ‘आठ घंटों में सर्वाधिक व्यक्तियों के श्रवण यंत्र लगाये गये’ : उसी दिन एक ही स्थल पर 600 श्रवण यंत्र लगाये गये। रिकॉर्ड प्रयास के दौरान श्रवण यंत्र वितरण किये जाने के अलावा सप्ताह भर में हजारों दिव्यांजनों को निशुल्क सहायक उपकरण किट प्रदान किये गये।
तीनों विश्व रिकॉर्डों का सृजन एआईडीपी शिविर का अंग था। शिविर का संचालन सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने किया था और आयोजन भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम ने किया था। यह उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि अबतक के सबसे बड़े 159वें मेगा एडीआईपी शिविर में 11330 दिव्यांग लाभार्थियों को लाभ पहुंचा है। एआईडीपी के तहत इस तरह के शिविर 1981 से अस्तित्व में हैं। एक अप्रैल, 2014 से इनमें सुधार करके आगे बढ़ाया जा रहा है।

शौचालय निर्माण के लिए 315 करोड़ रुपये जारी

नई दिल्ली : जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय ने पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय को 315 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की है। यह धनराशि गंगा कार्य योजना के कार्यान्वयन के लिए वर्तमान वित्त वर्ष के दौरान स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत जारी की गयी है। इस धनराशि को गंगा के किनारे शौचालयों का निर्माण करने पर खर्च किया जायेगा। ज्ञात हो कि पिछले वित्त वर्ष के दौरान भी जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय ने पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय को 263 करोड़ रुपये जारी किये थे। अबतक इस योजना के तहत 14,500 शौचालयों का निर्माण किया जा चुका है।

गुरुवार, 22 सितंबर 2016

भूकंप संभावित क्षेत्रों का मानचित्र जारी

  • तहसील स्तर का विवरण भी शामिल 
  • जनता के लिए डिजिटल मानचित्र जारी करने के निर्देश 
नई दिल्ली : भूकंप प्रतिरोधी निर्माण को सक्षम बनाने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) और निर्माण सामग्री एवं प्रौद्योगिकी संवर्द्धन परिषद (बीएमपीटीसी) ने देश के भूकंप संभावित क्षेत्रों का एक ‘सरल’ मानचित्र जारी किया है। इसमें जिला और तहसील स्तर के विवरण भी दिए गए हैं। इन मानचित्रों को आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने जारी किया।
इन मानचित्रों को ‘कलर कोड’ के आधार पर बनाया गया है, जिनमें पांच विभिन्न क्षेत्रों को प्रदर्शित किया गया है, जहां भूकंप की संभावना सबसे अधिक है। इसका उद्देश्य आवश्यक तकनीकी सहयोग से आपदा प्रतिरोधी निर्माण की योजना बनाने में सहायता करना है। एनडीएमए की पहल पर इन मानचित्रों को बीएमपीटीसी और आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय ने तैयार किया है।
एनडीएमए और बीएमपीटीसी के संयुक्त प्रयास की प्रशंसा करते हुए नायडू ने दोनों एजेंसियों से आग्रह किया कि वे अतिशीघ्र इन मानचित्रों का डिजिटलीकरण करें, ताकि जनता इन्हें आसानी से इस्तेमाल कर सके। उन्होंने सुझाव दिया कि इन मानचित्रों का मोबाइल ऐप्प भी तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि इन मानचित्रों से वस्तुकारों, इंजीनियरों, योजनाकारों, बीमा एजेंसियों और आपदा शमन एजेंसियों इत्यादि को सहायता होगी।
बीएमपीटीसी के कार्यकारी निदेशक शैलेश अग्रवाल ने कहा कि देश के 304 मिलियन मकानों में से लगभग 95 प्रतिशत मकान किसी न किसी स्तर पर भूकंप का प्रतिरोध करने में सक्षम नहीं हैं। बीएमटीसी ने इन मानचित्रों को भारतीय सर्वेक्षण विभाग, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, भारत मौसम विज्ञान विभाग और भारत की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर बनाया है। इन मानचित्रों में आवास और जनसंख्या आंकड़े, रेलवे लाइन, एक्सप्रेस-वे, राजमार्ग, नदी, जलस्रोत, भूगर्भीय फॉल्ट लाइन आदि की जानकारी भी शामिल की गई है।

27 नये स्मार्ट शहरों में अमृतसर सबसे ऊपर

  • बिहार से एक भी नहीं
  • उज्जैन, तिरुपति, आगरा, नासिक, मदुरै, तंजावुर, अजमेर, वाराणसी जैसे तीर्थ और पर्यटन स्थल चुने गए 
  • शहरी पुनरुत्थान के लिए स्मार्ट सिटी मिशन सही दिशा में : नायडू
  • स्मार्ट सिटी मिशन का क्रियान्वयन 27 से अधिक राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों तक फैला 
  • अबतक चुने गए 60 शहरों द्वारा 1,44,742 करोड़ रुपये का स्मार्ट सिटी निवेश प्रस्तावित 
नई दिल्ली : शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू द्वारा घोषित 27 नये स्मार्ट शहरों की सूची में स्वर्ण मंदिर के शहर अमृतसर को पहला स्थान मिला है। स्मार्ट शहरों की तीसरी सूची में जिन तीर्थ और पर्यटन संबंधी 8 शहरों को स्थान मिला है, उनमें उज्जैन, तिरुपति, आगरा, नासिक, मदुरै, तंजावुर, अजमेर और वाराणसी शामिल हैं। इसके साथ ही स्मार्ट सिटी योजना के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाले शहरों की संख्या 60 हो गई है।
63 शहरों के बीच होने वाली प्रतिस्पर्धा में चुने गए शहरों की घोषणा करते हुए नायडू ने कहा कि जिस तरह प्रतिस्पर्धा के पहले दौर में भाग लेने वाले शहरों ने जो उत्साह और उत्कंठा दिखाई है, वह इस बात का सबूत है कि शहरी पुनरुत्थान सही दिशा में अग्रसर है। उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धा आधारित चयन ने शहरों को अपना मूल्यांकन करने का अवसर दिया। उन्हें यह अवसर मिला कि अपने मौजूदा बुनियादी ढांचे का समेकित मूल्यांकन कर सकें और अपने विकास की गतिविधियां शुरू कर सकें।
उन्होंने बताया कि नये 27 स्मार्ट शहरों ने स्मार्ट सिटी योजना के तहत 66,883 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव किया है, जिसमें क्षेत्र आधारित विकास के तहत 42,524 करोड़ रुपये और प्रौद्योगिकी आधारित शहरी विकास के लिए 11,379 करोड़ रुपये शामिल है। इस तरह 60 चुने हुए शहरों द्वारा कुल प्रस्तावित निवेश 1,44,742 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
‘स्मार्ट सिटी चैलेंज’ प्रतिस्पर्धा के अद्यतन दौर में चुने गए 27 शहरों के नाम उनके द्वारा अर्जित अंकों के आधार पर दिए जा रहे हैं : अमृतसर - पंजाब, कल्याण-डोम्बिवली - महाराष्ट्र, उज्जैन - मध्य प्रदेश, तिरुपति - आंध्र प्रदेश, नागपुर - महाराष्ट्र, मंगलुरु - कर्नाटक, वेलौर - तमिलनाडु, थाणे - महाराष्ट्र, ग्वालियर - मध्य प्रदेश, आगरा - उत्तर प्रदेश, नासिक - महाराष्ट्र, राउरकेला - ओडिशा, कानपुर - उत्तर प्रदेश, मुदरै - तमिलनाडु, तुमकुर - कर्नाटक, कोटा - राजस्थान, तंजावुर - तमिलनाडु, नामची - सिक्किम, जालंधर - पंजाब, शिवमोगा - कर्नाटक, समउ - तमिलनाडु, अजमो - राजस्थान, वाराणसी - उत्तर प्रदेश, कोहिमा - नगालैंड, हुबली-धारवाड - कर्नाटक, औरंगाबाद - महाराष्ट्र, वडोदरा - गुजरात।
जिन 12 राज्यों के 27 स्मार्ट शहरों की घोषणा की गई है, उनमें महाराष्ट्र से 5, तमिलनाडु से 4, कर्नाटक से 4, उत्तर प्रदेश से 3, पंजाब से 2, राजस्थान से 2 शहर शामिल हैं। नगालैंड और सिक्किम ने स्मार्ट शहरों की सूची में पहली बार स्थान प्राप्त किया है।
वेंकैया नायडू ने कहा कि घोषणा के बाद स्मार्ट सिटी योजना के कार्यान्वयन का दायरा 27 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक बढ़ गया है। कार्यान्यवन चरण में जिन 9 राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों को प्रवेश करना है, उनमें उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश, पुदुचेरी, लक्षद्वीप, दमन एवं दियु तथा दादरा, नागर एवं हवेली शामिल हैं। वेंकैया नायडू ने उल्लेख किया कि स्मार्ट सिटी मिशन तयशुदा समय से आगे चल रहा है। उन्होंने बताया कि शेष 40 चुने हुए शहरों की प्रतिस्पर्धा का अगला दौर अगले वर्ष जनवरी में शुरू होगा।

बिहार द्वारा केन्द्र से राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति के गठन की मांग

 संक्षिप्त खबरें 
पटना : गंगा नदी में हो रहे सिल्टेशन के संबंध में बिहार सरकार के पहल पर जल संसाधन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा माधव चितले की अध्यक्षता में गठित समिति की नयी दिल्ली में आयोजित बैठक में जल संसाधन विभाग, बिहार के प्रधान सचिव अरुण कुमार सिंह द्वारा पाॅवर प्वाइंट प्रस्तुतीकरण दिया गया। श्री सिंह द्वारा प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बताया गया कि फरक्का बराज के कारण गंगा नदी में हो रहे सिल्टेशन के कारण पटना, हाथीदह एवं भागलपुर में इस वर्ष गंगा नदी ने अपने जलस्तर का महत्तम रिकार्ड बनाया एवं बाढ़ से काफी तबाही हुई। अतएव फरक्का बराज, जो सभी कुप्रभावों का कारण है, को डी-कमीशन किया जाय, जिससे कि गंगा नदी में जमा गाद बहते हुए समुद्र तक पहुंच जाय एवं डेल्टा भाग का इको-सिस्टम भी दुरूस्त हो जाय। गाद की भयप्रद समस्या, जो सामाजिक एवं आर्थिक तबाही का कारण बन रहा है, के निदान हेतु एक राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति बनाने का भी अनुरोध किया गया। श्री सिंह द्वारा इस समिति में बिहार के प्रतिनिधित्व की भी मांग की गई, ताकि बिहार के पक्ष को रखा जा सके। बिहार द्वारा रखे गये तथ्यों को सचिव, जल संसाधन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा स्वीकार किया गया।
इस बैठक में जल संसाधन मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव शशि शेखर, आईआईटी, दिल्ली के प्रोफेसर एके गोसाई एवं अन्य तथा बिहार सरकार की तरफ से प्रधान सचिव, जल संसाधन विभाग अरुण कुमार सिंह के अतिरिक्त बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकारण के उपाध्यक्ष व्यास जी एवं अभियंता प्रमुख (मुख्यालय) इंदु भूषण कुमार उपस्थित थे।

बिहार के शहीद के आश्रितों को अब 11 लाख रुपए मिलंेगे

पटना : जम्मू कश्मीर के ‘उरी’ आतंकी हमले में शहीद बिहार रेजिमेंट के तीन बिहारी शहीदों के आश्रितों को अब 5 लाख रुपए की बजाय 11 लाख रुपए अनुग्रह अनुदान राशि मिलेगी। बिहार सरकार ने यह घोषणा की है। यह जानकारी प्रधान सचिव, सूचना जनसंपर्क ब्रजेश मेहरोत्रा ने दी है।
ज्ञात हो कि शहीद जवानों का जिला प्रशासन द्वारा पुलिस सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार भी किया जाएगा। ये शहीद जवान हैं - गया के नायक एसके विद्यार्थी, कैंमूर के सिपाही राकेश सिंह एवं भोजपुर के हवलदार अशोक कुमार। गया एवं कैमूर के शहीदों के अंतिम संस्कार के समय दोनो जिलों के प्रभारी मंत्री तथा भोजपुर के शहीद के अंतिम संस्कार के समय विज्ञान एवं प्रावैद्यिकी मंत्री जय कुमार सिंह उपस्थित रहेंगे।

जम्मू कश्मीर के लिए अतिरिक्त 10,000 एसपीओ को मंजूरी

नई दिल्ली : केन्द्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) ने जम्मू-कश्मीर के पुलिस विभाग में अतिरिक्त 10,000 विशेष पुलिस अधिकारियों (एसपीओ) की तैनाती को मंजूरी दी है। इस आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है और यह अतिरिक्त संख्या एसपीओ के मौजूदा बल के अलावा है। अतिरिक्त एसपीओ का उपयोग विशेषकर सुरक्षा से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करने में किया जाएगा। 10,000 एसपीओ के संदर्भ में केन्द्र द्वारा राज्य सरकार को व्यय की प्रतिपूर्ति वर्तमान स्वीकृत सुरक्षा संबंधी व्यय (एसआरई) दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही की जाएगी।

पर्यावरण भवन का नाम अब पंडित दीनदयाल अंत्योदय भवन

नई दिल्ली : नई दिल्ली के सीजीओ कम्पलेक्स में स्थित ‘पर्यावरण भवन’ का नाम बदलकर पंडित दीनदयाल अंत्योदय भवन कर दिया गया है। शहरी विकास, आवास एवं गरीबी उन्मूलन तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के साथ भवन की नाम पट्टिका का अनावरण किया। पूर्व में पर्यावरण एवं वन मंत्रालय इस इमारत में स्थित था और इसलिए इसको पर्यावरण भवन कहा जाता था। पर्यावरण एवं वन मंत्रालय 14 जून, 2014 को अपने अलग परिसर में चला गया है।
इस अवसर पर एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि इस इमारत का नाम बदलकर पंडित दीनदयाल ‘अंत्योदय भवन’ इसलिए किया गया है, ताकि पंडित दीनदयाल के अंत्योदय दर्शन को रेखांकित किया जा सके, जिन्होंने समाज के अत्यंत वंचित वर्गों और निर्धनतम लोगों के उन्यन का जीवन पर्यान्त प्रयास किया। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने ‘एकात्म मानववाद’ दर्शन का प्रतिपादन किया था, जिसमें समाजवाद और पूंजीवाद के समानांतर शरीर, मन और आत्मा का विकास सम्मिलित है। यह पंडित दीनदयाल जी का जन्मशती वर्ष है और यह प्रासंगिक है कि इस अवसर पर राष्ट्रीय राजधानी में एक महत्वपूर्ण इमारत का नाम उनके नाम पर रखा जाए। अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय एक पूर्णकालिक मंत्रालय के तौर पर अपने अलग उन स्तित्व का दशक पूरा कर रहा है।
इस इमारत में जो अन्य विभाग स्थित हैं, उनमें रक्षा, केंद्रीय पुलिस संगठन और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल शामिल हैं। ये सभी विभाग राष्ट्र की अखंडता और उसकी शक्ति के लिए काम करते हैं। नया नामकरण वंचित वर्गों के उन्नयन के संबंध में सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा की जाने वाली सेवाएं और योगदान को परिलक्षित करता है। जो व्यक्ति पर्यावरण एवं वन मंत्रालय में आना चाहते हैं, उन्हें जोरबाग स्थित मंत्रालय के नये परिसर ‘इंदिरा पर्यावरण भवन’ का दिशानिर्देश देने का व्यावहारिक उद्देश्य भी ‘अंत्योदय भवन’ से पूरा होगा। इसके पूर्व मुख्तार अब्बास नकवी ने इस अवसर पर पधारने के लिए मंत्री महोदय को धन्यवाद दिया।

मंगलवार, 20 सितंबर 2016

सोने की तस्करी का बड़ा रैकेट पकड़ाया

ढाई सालों में 7000 किलोग्राम सोने की तस्करी, कीमत 2000 करोड़ रुपये से अधिक 
नई दिल्ली : राजस्व गुप्तचर निदेशालय (डीआरआई) की दिल्ली जोनल इकाई ने सोने की तस्करी का एक बड़ा रैकेट पकड़ा है। इस रैकेट ने ढाई साल के दौरान 7000 किलोग्राम सोने की तस्करी की थी, जिसकी कीमत 2000 करोड़ रुपये से अधिक थी। यह कदाचित भारत की अबतक की सबसे बड़ी सोने की तस्करी का मामला है।
यह मामला उस समय प्रकाश में आया, जब डीआरआई की दिल्ली जोनल इकाई ने एक सितंबर, 2016 और दो सितंबर, 2016 की रात में इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के घरेलू कार्गो टर्मिनल पर 10 किलोग्राम सोना पकड़ा था। पकड़ी गयी सोने की छड़ें 24 कैरेट शुद्धता वाली थीं और भारत-म्यांमार जमीनी सीमा के जरिये भारत में तस्करी करके लायी गयी थीं। बाद में इन्हें गुवाहाटी से घरेलू उड़ान द्वारा दिल्ली लाया गया था। पकड़े गये सोने की बाजार कीमत लगभग 3.1 करोड़ रुपये है। डीआरआई वायुसेवाओं के कर्मचारियों और अन्य लोगों की लिप्तता की जांच कर रहा है।
यह रैकेट सोने की तस्करी के लिए नये तरीके से काम करता था, जिसके तहत तस्करी का माल 617 बार गुवाहाटी से दिल्ली लाया गया। इन्हें कीमती सामान बताकर एक विशेष हवाई सेवा की घरेलू उड़ानों के जरिए लाया जाता था, ताकि कस्टम की नजरों से बचा जा सके। अबतक तस्कर रेलगाड़ी और बस के जरिए तस्करी का सोना देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंचाते थे।
दो अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से पहला अभियुक्त गुवाहाटी का एक व्यापारी है और दूसरा उसका दिल्ली का सहायक है। इन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। गुवाहाटी का व्यापारी पहले भी सोने की तस्करी में लिप्त रहा है और डीआरआई ने इसके द्वारा तस्करी किया हुआ नौ करोड़ रुपये की कीमत का 37 किलोग्राम सोना पकड़ा था। पूर्व में भी इस व्यापारी को 12 किलोग्राम सोने की तस्करी के आरोप में डीआरआई की गुवाहाटी इकाई ने फरवरी, 2015 में गिरफ्तार किया था। बाद में उसे जमानत पर छोड़ दिया गया था।
खुफिया जांच में पता चला है कि भारी मात्रा में विदेशी सोने की छड़ों को म्यांमार के जरिये भारत लाया जाता रहा है। इस सोने को मणिपुर के मोरेह से भारत में लाया जाता था, जो भारत-म्यांमार सीमा से सटा इलाका है। इसी तरह मिजोरम के जोखावथार इलाके से भी सोने की तस्करी की जाती रही है। यह इलाका भी म्यांमार की सीमा से सटा है। खुफिया सूचना है कि सोने की तस्करी बेरोकटोक जारी है। भारत-म्यांमार सीमा पर सोने की तस्करी की रोकथाम बहुत चुनौतिपूर्ण काम है, क्योंकि यह दुर्गम क्षेत्र है और सीमा खुली है।
बहरहाल, डीआरआई विदेशी सोने को पकड़ने में कामयाब रहा है। इस तरह का सोना म्यांमार से भारत लाया गया था। इस कार्रवाई के तहत डीआरआई ने सिलिगुड़ी में मार्च, 2015 में 87 किलोग्राम सोना और कोलकाता में अगस्त, 2016 को 58 किलोग्राम सोना पकड़ा था। डीआरआई कोलकाता ने 12 लोगों को गिरफ्तार भी किया था। एक दूसरे मामले में डीआरआई मुम्बई ने पांच अगस्त, 2016 को 12 किलोग्राम सोना पकड़ा था। जांच से पता चला है कि पिछले 18 महीनों के दौरान इसी गिरोह ने 700 किलोग्राम सोने की तस्करी की थी, जिसकी कीमत 200 करोड़ रुपये से अधिक थी। डीआरआई की कोलकाता क्षेत्रीय इकाई ने 11 सितंबर, 2016 को सिलीगुड़ी के निकट एक ट्रक से 7.5 लाख अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा पकड़ी थी, जिसकी कीमत पांच करोड़ रुपये थी। यह ट्रक मणिपुर जा रहा था। वहां से उस विदेशी मुद्रा को सोना खरीदने के लिए म्यांमार भेजा जाना था और फिर म्यांमार मे खरीदे गये सोने को भारत में तस्करी द्वारा लाया जाना था। इसी तरह डीआरआई गुवाहाटी ने 13 सितंबर, 2016 को एक बोलेरो जीप से 27.5 किलोग्राम सोना पकड़ा था, जिसकी कीमत 8.56 करोड़ रुपये आंकी गयी थी। इस सोने को भी मोरेह सीमा के जरिए म्यांमार से तस्करी द्वारा लाया गया था।
वर्तमान वित्त वर्ष में अप्रैल से जुलाई, 2016 के दौरान सीटीएच 7108 के तहत सोने के आयात में भारी गिरावट देखी गयी। इस दौरान 107 मीट्रिक टन सोना आयात किया गया, जिसकी कीमत 24000 करोड़ रुपये थी, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के दौरान 274 मीट्रिक टन सोने का आयात हुआ, जिसकी कीमत 60,700 करोड़ रुपये थी। वर्ष 2015-16 में सोने का कुल आयात 855 मीट्रिक टन रहा, जिसकी कीमत लगभग 1,79,172 करोड़ रुपये थी। निकट अतीत में डीआरआई को महत्वपूर्ण नतीजे मिले हैं। वर्तमान वित्त वर्ष में 18 सितंबर, 2016 तक डीआरआई ने लगभग 91 करोड़ रुपये मूल्य का सोना पकड़ा है।

सोमवार, 19 सितंबर 2016

परम ईशान सुपर कम्प्यूटर का शुभारंभ

 संक्षिप्त खबरें 
गुवाहाटी : मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने आईआईटी, गुवाहाटी में परम-ईशान सुपर-कम्प्यूटर का शुभारंभ किया। सुपर-कम्प्यूटर के शुभारंभ के बाद उन्होंने कहा, “पूर्वोत्तर, पूर्वी और दक्षिणी क्षेत्रों में सबसे तेज और अत्यंत शक्तिशाली कम्प्यूटर का शुभारंभ करने का यह हर्ष का क्षण है।” जावड़ेकर ने कहा कि सभी भारतीय प्रौद्योगिक संस्थान (आईआईटी) विकास के आधुनिक मंदिर हैं और हम अपनी यह प्रतिबद्धता दोहराते हैं कि हम शिक्षण संस्थानों को शक्ति सम्पन्न बनाकर अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहन देंगे ताकि ये संस्थान शिक्षण तथा उन्नत अनुसंधान के उच्च केंद्र बन सकें। आज राष्ट्र की विकास क्षमता का मूल्यांकन अनुसंधान की गुणवत्ता और विकास से होता है।
आईआईटी गुवाहाटी के निदेशक प्रो. गौतम विश्वास ने कहा कि परम-ईशान की शक्ति 250 टेराफ्लॉप है और उसकी क्षमता तीन सौ टेरा-बाइट है। इससे न सिर्फ अनुसंधान में तेजी आयेगी, बल्कि सही प्रतिभाओं को आकर्षित करने के लिए ईको-प्रणाली को बनाने में भी मदद मिलेगी। इस अवसर पर उच्च शिक्षा विभाग के सचिव विनय शील ओबेरॉय, सी-डेक पुणे के महानिदेशक प्रो. रजत मूना और आईआईटी गुवाहाटी के कम्प्यूटर केंद्र के अध्यक्ष प्रो. एसवी राव भी उपस्थित थे।

झारखंड के शहीद जवानों केे परिजनों को 10-10 लाख रुपए

रांची : मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कश्मीर में आतंकवादियों द्वारा सेना के आधार शिविर (आर्मी बेस) पर आत्मघाती हमले में हुए देश के शहीद जवानों के प्रति अपनी गहरी संवेदना एवं हार्दिक शोक प्रकट किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के इन लालों ने जो अपने दायित्वों व कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी, भारत मां के ऐसे संतानों पर समस्त देशवासियों कोे गर्व है। उन्होंने कहा कि आतंकवादियों के इस कायरतापूर्ण हमले से हमारे देश के जवानों का मनोबल नहीं गिरने वाला है, बल्कि हम पूरी निडरता से मुहतोड़ जवाब देंगे।
इस आतंकी हमले में झारखण्ड राज्य के शहीदों के प्रति उन्होंने अपनी संवेदना व्यक्त की। खूंटी के जावरा मुंडा और गुमला के नेमन कुजूर की शहादत पर अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य को अपने वीर सपूतों पर गर्व है। इनकी शहादत बेकार नहीं जायेगी। उन्होंने ऐलान किया कि राज्य सरकार द्वारा शहीदों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये की सम्मानित राशि मुहैय्या करायी जायेगी। उन्हेांने कहा कि राज्य के शहीदों के शव यात्रा में कैबिनेट मंत्री शामिल होंगे। उन्होंने निर्देश दिया कि शहीद के अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जायेगा।

बिहार के शहीद जवानों के आश्रितों को 05 लाख रुपए

पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जम्मू कश्मीर के उरी आतंकी हमले में शहीद बिहार के रहने वाले बिहार रेजिमेंट के शहीद तीन जवानों के निकटतम आश्रितों को राज्य सरकार की तरफ से 05 लाख रुपये देने की घोषणा की। साथ ही शहीद जवानों का जिला प्रशासन द्वारा पुलिस सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जायेगा।
जम्मू के उरी में हुये आतंकी हमलें में बिहार के रहने वाले बिहार रेजिमेंट के तीन जवान शहीद हुये थे। हमले में गया के नायक स.के. विद्यार्थी, कैमूर के सिपाही राकेश सिंह एवं भोजपुर के हवलदार अशोक कुमार शहीद हुये थे। कैमूर, एवं गया जिला में शहीद जवानों के अंतिम संस्कार के समय राज्य सरकार की तरफ से जिले के प्रभारी मंत्री उपस्थित रहेंगे तथा भोजपुर में राज्य सरकार की तरफ से उद्योग एवं विज्ञान एवं प्रावैद्यिकी मंत्री जय कुमार सिंह उपस्थित रहेंगे।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आतंकी हमले में शहीद हुये जवानों की शहादत पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुये कहा कि सभी जवान सच्चे देशभक्त थे और उन सभी के शहादत को भारत वर्ष कभी नहीं भूल पायेगा। उनके शहादत को हमेशा याद रखा जायेगा। मुख्यमंत्री ने वीर सपूतों की शहादत पर उनके परिजनों को दुख की इस घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है। उन्होंने कहा है कि पूरा बिहार शहीदों के परिवार के साथ है।

रविवार, 18 सितंबर 2016

जम्मू-कश्मीर के लिए 500 करोड़ रुपये की परियोजना मंजूर

 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : केंद्रीय पर्यटन सचिव विनोद जुत्शी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंजूरी और निगरानी समिति (सीएसएमसी) ने प्रधानमंत्री पुनर्विकास योजना (पीएमआरपी) के अंतर्गत जम्मू और कश्मीर के पर्यटन विकास के लिए ‘स्वदेश दर्शन स्कीम’ के तहत 500 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी। नई परियोजनाओं में मनतलई - शुद्धमहादेव - पतनीटॉप 99.99 करोड़ रुपये, बारामुला - कुपवाड़ा - लेह सर्किट 99.98 करोड़ रुपये, राजौरी - बफलियाज सोपिया - पुलवामा सर्किट 99.99 करोड़ रुपये, अनन्तनाग - किश्तवार - पहलगाम - दकसुम - रंजीत सागर डैम सर्किट 99.75 करोड़ रुपये शामिल हैं। इसके अलावा, पर्यटन सुविधाओं के एकीकृत विकास के लिए बाढ़ में क्षतिग्रस्त संपत्तियों के लिए 99.99 करोड़ रुपये दिए गए।
इन परियोजनाओं से जम्मू-कश्मीर में पर्यटन के ढांचागत विकास की परिकल्पना की गई है। अन्य प्रस्तावित प्रमुख सर्किटों में अमरनाथ यात्रियों के लिए पर्यटन सुविधा/व्याख्या केन्द्र, ट्रैकिंग के लिए आधार शिविर, अन्त तक रास्तों का जुड़ाव, शालिमार बाग में ध्वनि और प्रकाश शो, ऐतिहासिक संरचनाओं में लाइटिंग, पर्यावरण अनुकूल गाड़ियां, गोल्फ कोर्स की सुविधा और पूरे राज्य में पर्यटन सुविधा को बढ़ावा देना शामिल है।

अल्का सिरोही होंगी संघ लोक सेवा आयोग की अध्यक्ष

नई दिल्ली : राष्ट्रपति ने संघ लोक सेवा आयोग की सदस्य अल्का सिरोही की संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के पद के दायित्वों का निर्वहन करने के लिए नियुक्ति की है। यह नियुक्ति 21 सितंबर, 2016 से प्रभावी होगी। यह नियुक्ति अगले आदेशों तक या 03 जनवरी, 2017 तक सदस्य के रूप में उनके कार्यकाल के पूरे होने तक, जो भी पहले हो, प्रभावी रहेगी। अध्यक्ष का पद 20 सितम्बर, 2016 को दीपक गुप्ता के 65 वर्ष की आयु पूरी होने पर पदत्याग करने के फलस्वरूप रिक्त हो जाएगा। 

रोहित व रहाणे को अर्जुन पुरस्कार प्रदान किया गया

नई दिल्ली : युवा मामलों एवं खेल राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विजय गोयल ने क्रिकेटर रोहित शर्मा और अजिंक्य रहाणे को जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित एक समारोह में अर्जुन पुरस्कार प्रदान किया। रोहित शर्मा को वर्ष 2015 और अजिंक्य रहाणे को वर्ष 2016 के लिए अर्जुन पुरस्कार दिया गया है। ज्ञात हो कि पहले दोनों खिलाड़ियों को राष्ट्रपति के कर कमलों द्वारा पुरस्कार नहीं मिल सका था, क्योंकि दोनों अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट में हिस्सा ले रहे थे।
इस अवसर पर विजय गोयल ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि भारत में क्रिकेट एक अत्यंत लोकप्रिय खेल है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार घरेलू और अन्य खेलों को प्रोत्साहन देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पैरालिम्पिक्स, 2016 में भारतीय एथलीटों ने देश को गौरवान्वित किया है।
अर्जुन पुरस्कार 1961 में शुरू किये गये थे और वे पुरस्कार देने वाले वर्ष के संदर्भ में पिछले चार वर्षों के दौरान खिलाड़ी द्वारा किये गये प्रदर्शन का आकलन करके दिये जाते हैं। जिन खिलाड़ियों ने नेतृत्व क्षमता, खेल भावना और अनुशासन के गुणों का प्रदर्शन किया है, उन्हें ये पुरस्कार दिये जाते हैं। पुरस्कार विजेताओं को एक प्रतिमा, प्रमाणपत्र, समारोह की पोशाक और पांच लाख रुपये की इनामी राशि प्रदान की जाती है।

ब्रिक्स देशों का जल और स्वच्छता प्रबंधन में ‘शून्य कचरा’ का आह्वान

  • चीन ने शेनजेन शहर का उदाहरण पेश किया, शेनजेन सिटी शहरी कचरे से 4,300 मेगावाट बिजली उत्पादन करता है
  • विशेषज्ञों ने गरीबी की चपेट में आने से रोकने के लिए ‘इक्नोमिक लॉजिक’ के आधार पर नये शहरों को प्रस्तुत करने के सुझाव दिए
  • दक्षिण अफ्रीका के मंत्री ने शहरी क्षेत्रों में रहने योग्य और सतत बसावट का आह्वान किया
नई दिल्ली : तेजी से शहरीकरण में जल और स्वच्छता प्रबन्धन को सबसे बड़ी चुनौती मानते हुए ब्रिक्स देशों ने शून्य कचरा नीति अपनाने का आहवान किया है। आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में ब्रिक्स शहरीकरण मंच में जल और स्वच्छता प्रबन्धन पर संवाद में सदस्य देशों के नीति निर्माता और विशेषज्ञों ने कचरे में कमी और कचरे का फिर से इस्तेमाल करने पर बल दिया।
चीन ने शेनजेन शहर को दिखाया है जहां केवल छह प्रतिशत शहरी कचरा खुले में फेंका जाता है। चीन के निर्माण समूह के मुख्य अभियन्ता जू हेयुन ने बताया कि प्रतिदिन 2,10,000 टन शहरी कचरे को रिसाइकिल करके 4,300 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है। उन्होंने कहा कि कचरे से ऊर्जा बनाने की कोशिश में 1988 से काफी वृद्धि हुई है। तब केवल 150 टन कचरे से बिजली बनाई जाती थी। उन्होंने बताया कि चीन के शहरों के 94 प्रतिशत कचरे को पुनः चक्रित किया जाता है।
विशेषज्ञों ने इस बात पर बल दिया कि शहरों के पास शून्य कचरा प्रयास को सुनिश्चित करने की क्षमता होनी चाहिए। तमिलनाडु के राजस्व सचिव डॉक्टर बी चन्द्रमोहन ने कहा कि चेन्नई लचीले जल प्रबन्धन का प्रमुख उदाहरण है। चेन्नई शहर में प्रतिदिन दो सौ मीलियन समुद्री जल के नमक को हटाकर उसका फिर से उपयोग करने की प्रणाली स्थापित की गई है। शहर के सभी भवनों में नागरिकों की जल आवश्यकता पूरी करने के लिए वर्षा जल संचयन सुनिश्चित किया गया है। तमिलनाडु सरकार 240 मीलियन लीटर शोधित पुनः उपयोगी जल औद्योगिक इकाईयों को सप्लाई करने का कदम उठा रही है। इस कदम से नियमित जल सप्लाई से अधिक आय होगी और राजस्व बढ़ेगा।
ब्राजील के रूथ जुरबर्ग ने कहा कि महत्वपूर्ण क्षेत्रों में लोगों की भागीदारी के अतिरिक्त कारगर जल एवं स्वच्छता प्रबन्धन सुनिश्चित करने की तारीख तय करनी चाहिए।
दक्षिण अफ्रीका की एनए बुथेलेगी ने बताया कि मानवता को केवल एक प्रतिशत तैयार उपयोगी जल उपलब्ध है, जबकि 97 प्रतिशत जल समुद्र में है और दो प्रतिशत गहरी जलवाही स्तर पर है। उन्होंने लोगों की जल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उचित तथा त्वरित उपाय व्यवस्था अपनाने को कहा। उन्होंने जल प्रबन्धन के समग्र प्रबन्धन पर बल दिया। उन्होंने बताया कि दक्षिण अफ्रीका ने जल के उचित उपयोग के बारे में लोगों को शिक्षित करने के लिए 15 हजार वाटर एम्बेस्डर सेवा में लगाए गए हैं।
फाउंडेशन फॉर फ्यूचरिस्टिक सिटीज की अध्यक्ष करूणा गोपाल ने कहा कि भारत सरकार ने विभिन्न शहरी मिशनों के अन्तर्गत उचित जल सप्लाई तथा शहरी क्षेत्रों में प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए ठोस प्रयास किए हैं।
नए शहर तथा क्षेत्रीय नियोजन विषय पर चर्चा में विशेषज्ञों ने ठोस आर्थिक बुनियाद पर नए शहर बसाने का आह्वान किया, ताकि नई जगहों के लोग गरीबी की चपेट में न आएं। उत्पादन के अन्य केन्द्रों के साथ आवश्यक संपर्कों के जरिए और सतत आधार पर रोजगार सृजन के जरिए यह जरूरत पूरी की जा सकती है। ब्राजील, चीन, भारत तथा दक्षिण अफ्रीका के विशेषज्ञों ने अनियोजित और अप्रत्याशित शहरी विस्तार पर चिंता प्रकट की। दक्षिण अफ्रीका की आवास उपमंत्री जोउ-कोटा फ्रेडेरिक्स ने शहरी क्षेत्रों में रहने योग्य और सतत बसावट सुविधा सुनिश्चित करने पर बल दिया।
शहरी विकास मंत्रालय के शहरी मामलों के राष्ट्रीय संस्थान के निदेशक डॉक्टर जगन शाह ने बताया कि शहरी स्थानीय निकायों को सशक्त बनाकर, नागरिकों की भागीदारी से, हितधारकों के क्षमता सृजन से, कारगर शहरी नियोजन और शहरों के वित्तीय संसाधनों के मजबूत स्तम्भों पर भारत का शहरी पुनर्जारण खड़ा है।

शुक्रवार, 16 सितंबर 2016

रक्षा उत्पादन विभाग की उन्नत वेबसाइट

 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के अनुपालन में रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग (डीडीपी) की उन्नत वेबसाइट का शुभारंभ किया। यह वेबसाइट अब भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप उन्नत बना दी गयी है। वेबसाइट को नेशनल इंफार्मेटिक्स सेन्टर (एनआईसी) द्वारा विकसित कंटेन्ट मैनेजमेन्ट फ्रेमवर्क के उपयोग से री-डिजाइन किया गया है। अब यह अधिक सुविधाजनक और साइबर हमलों से सुरक्षित हो गयी है। अब विभिन्न ब्राउजर्स और ऑपरेटिंग सिस्टम पर इसे देखा जा सकता है।
डीडीपी की वेबसाइट में समाचार, नीतियों, प्रक्रियाओं, प्रकाशनों, अधिकारियों से सम्बंधित डायरेक्ट्री और मीडिया सामग्री उपलब्ध होगी, जिसमें ई-बुक, फोटो-गैलरी आदि शामिल हैं। वेबसाइट को दृष्टिबाधित और दिव्यांगजनों के लिए सुगम्य बनाया गया है।
संशोधित वेबसाइट के जरिये विभिन्न शाखाओं और संगठनों की वेबसाइट तक सीधे पहुंचा जा सकता है, जिनमें मेक इन इंडिया रक्षा पोर्टल, आयुध बोर्ड, डीजीओए आदि की वेबसाइट शामिल हैं। इसके अलावा वित्त, वाणिज्य, कार्पोरेट मामलों, डीआईपीपी, डीपीई, एमएसएमई आदि के लिंक भी दिये गये हैं।

खेल मंत्रालय द्वारा प्रतिभा पहचान पोर्टल की शुरूआत 

नई दिल्ली : युवा मामलों एवं खेल राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विजय गोयल ने खेल विभाग के तहत प्रतिभा पहचान पोर्टल शुरू करने का फैसला किया है। इस पोर्टल का उद्देश्य देश के कोने-कोने के प्रतिभाशाली बच्चों को खेलों में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए समुचित अवसर प्रदान करना है।
बच्चे के खेल-प्रदर्शन और क्षमता को रेखांकित करने वाले वीडियो और फोटोग्राफ पोर्टल पर अपलोड किये जा सकेंगे। इन्हें स्वयं बच्चे, उनके माता-पिता, अध्यापक या अन्य लोग पोर्टल पर अपलोड कर सकते हैं। पड़ताल के बाद क्षमतावान बच्चों को कई तरह की जांचों से गुजरने का अवसर मिलेगा। यह जांच प्रक्रिया अन्य स्थानों के साथ-साथ निकट के साई केंद्र में की जायेगी। जो बच्चा जांच में सफल होगा, उसे साई के प्रशिक्षण केंद्रों में प्रवेश दिया जायेगा। खेल मंत्रालय, राज्य सरकारों को ऐसे बच्चों को अपने केंद्रों में शामिल करने का आग्रह करेगा। जो प्रतिभावान बच्चे किसी कारणवश अपने घर से बाहर नहीं जा पायेंगे, उन्हें खेलों में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए छात्रवृत्ति दी जायेगी।
पोर्टल से प्रतिभावान बच्चों को अवसर मिलेगा कि वे अपने घर में ही रहकर खेल प्रशिक्षण केंद्रों में प्रवेश ले सकें और इसके लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाया जायेगा। इस कदम से खासतौर से समाज के वंचित वर्गों के बच्चों को लाभ मिलेगा। योजना के अंतर्गत आठ साल या उससे अधिक आयु के प्रतिभाशाली बच्चों को लक्ष्य बनाया गया है। कार्यक्रम में राष्ट्रीय खेल परिसंघों, काॅर्पोरेट घरानों और अन्य हितधारकों को भी शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है। पोर्टल के महीने भर के अंदर शुरू होने जाने की आशा है।

गुरुवार, 15 सितंबर 2016

हिंदी का विकास देश की उन्नति को जरूरी

हिंदी दिवस पर राष्ट्रपति ने किये पुरस्कार वितरित
नई दिल्ली : भारत सरकार, गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग द्वारा (14 सितंबर, 2016) राष्ट्रपति भवन में हिंदी दिवस समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह में माननीय राष्ट्रपति के कर कमलों से पुरस्कार विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए। गृहमंत्री राजनाथ सिंह एवं माननीय गृहराज्य मंत्री किरेन रीजीजू सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति समारोह में उपस्थित थे।
अपने उद्बोधन में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि हिंदी भाषा विविधता में एकता का प्रतीक है। हिंदी पुरातन भी है और आधुनिक भी। हिंदी भारतीयता की चेतना है। यही कारण था कि विभिन्न भाषा-भाषी लोगों ने हिंदी को ही पूरे भारतवर्ष की एकमात्र संपर्क भाषा माना और उसे ही आजादी की लड़ाई का माध्यम भी बनाया। हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के बीच अनुवाद बढ़ाए जाने की आवश्यकता है। हिंदी का विकास देश की उन्नति के लिए आवश्यक है। ज्ञान विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं उद्योग आदि में हिंदी का प्रयोग कर हम और आगे बढ़ सकते हैं।
इस मौके पर अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हिंदी दिवस आत्मावलोकन का दिवस है। यह दिन हमें अपनी प्रगति की समीक्षा एवं मूल्यांकन करने का अवसर देता है। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदी की विविधता, प्राचीनता तथा वैज्ञानिकता को पूरा विश्व स्वीकार करता है। भाषा किसी भी राष्ट्र और समाज की आत्मा होती है, जिसमें वह देश संवाद करता है, अपनी भावाभिव्यक्ति करता है। भाषा और संस्कृति किसी देश की अस्मिता की प्रतीक होती है और सच यही है कि हिंदी विभिन्न भाषा-भाषी आम भारतीयों के सुख-दुख, उनकी सोच और अभिव्यक्ति की भाषा है। हिंदी भारत की लोक संपर्क की भाषा होने के साथ-साथ संस्कृति तथा जीवन मूल्यों की भाषा भी है। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा के स्तर पर हिंदी तथा दूसरी भारतीय भाषाओं की पढ़ाई की आवश्यकता पर बल दिया। उनका कहना था कि हमें हिंदी दिवस को संकल्प दिवस के रूप में मनाना चाहिए।
कार्यक्रम में गृहराज्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि हिंदी एक सशक्त भाषा है और यह लोकतांत्रिक व्यवस्था की पूरक है। राजभाषा नीति के कार्यान्वयन में अबतक हमने जो प्रगति की है, उसे और गति देने की आवश्यकता है। हमारे देश में युवाओं की संख्या सर्वाधिक है। हमें अपनी युवा पीढ़ी को भाषाई स्वाभिमान और राष्ट्र प्रेम से जोड़कर उन्हें अपने रोजमर्रा के जीवन में हिंदी एवं भारतीय भाषाओं का प्रयोग करने के लिए प्रेरित करना होगा।
राजभाषा सचिव अनूप कुमार श्रीवास्तव ने सभी अतिथियों का धन्यवाद करते हुए विश्वास दिलाया कि राजभाषा संबंधी संवैधानिक प्रावधानों का अनुपालन कराने एवं सरकारी कामकाज में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए राजभाषा विभाग सतत प्रयासरत है और रहेगा। राजभाषा विभाग द्वारा एक वार्षिक कार्यक्रम जारी किया जाता है, जिसमें राजभाषा के कार्यान्वयन संबंधी लक्ष्य निर्धारित किए जाते हैं। वार्षिक कार्यक्रम के अनुपालन में हासिल की गई उपलब्धियां वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट के रुप में संसद के दोनों सदनों के पटल पर रखी जाती हैं।
ज्ञात हो कि 14 सितंबर, 1949 को संविधान सभा के निर्णय के अनुसार हिंदी भारत संघ की राजभाषा बनी। इस उपलक्ष्य में राजभाषा विभाग प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस समारोह का आयोजन करता है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में राजभाषा हिंदी में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इस समारोह का मुख्य उद्देश्य राजभाषा हिंदी के कार्यान्वयन को बढ़ावा देना है। समारोह में राजभाषा कीर्ति पुरस्कार योजना के अंतर्गत मंत्रालयों, विभागों, सार्वजनिक क्षेत्रों के उपक्रमों, भारत सरकार के बोर्ड, सोसायटी, ट्रस्ट, राष्ट्रीयकृत बैंक तथा नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियों को राजभाषा हिंदी में बेहतर कार्य निष्पादन हेतु पुरस्कृत किया जाता है। भाषाई दृष्टि से राजभाषा हिंदी के उपयोग को ध्यान में रखते हुए भारत को क, ख तथा ग तीन क्षेत्रों में विभाजित किया गया है।
पुरस्कार विजेताओं में राजभाषा कीर्ति पुरस्कार-वर्ष 2015-16 योजना के अंतर्गत 300 से कम स्टाफ संख्या वाले मंत्रालय / विभाग की श्रेणी में संसदीय कार्य मंत्रालय को प्रथम, आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय को द्वितीय तथा वित्तीय सेवाएं विभाग को तृतीय पुरस्कार प्राप्त हुआ। वहीं 300 से अधिक स्टाफ संख्या वाले मंत्रालय / विभाग की श्रेणी में शहरी विकास मंत्रालय को प्रथम, अंतरिक्ष विभाग को द्वितीय तथा खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग को तृतीय पुरस्कार दिया गया। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में ‘क’ क्षेत्र में पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड प्रथम, एनएचपीसी लिमिटेड द्वितीय तथा फेरो स्क्रैप निगम लिमिटेड तृतीय स्थान पर, ‘ख’ क्षेत्र में कोंकण रेलवे काॅर्पोरेशन लिमिटेड प्रथम, भारतीय कपास निगम लिमिटेड द्वितीय तथा भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम लिमिटेड तृतीय स्थान पर एवं ‘ग’ क्षेत्र में गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एण्ड इंजीनियर्स लिमिटेड प्रथम, राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड द्वितीय तथा गोवा शिपयार्ड लिमिटेड तृतीय स्थान पर रहे। भारत सरकार के बोर्ड, स्वायत्त निकाय, ट्रस्ट, सोसाइटी आदि के अंतर्गत ‘क’ क्षेत्र में तेल उद्योग विकास बोर्ड, नोएडा प्रथम भारतीय विदेश व्यापार संस्थान, दिल्ली द्वितीय, सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केन्द्र, नई दिल्ली तृतीय, ‘ख’ क्षेत्र में जवाहर लाल नेहरू पत्तन न्यास, नवी मुंबई प्रथम, भाखड़ा ब्यास प्रबंध बोर्ड, चंडीगढ़ द्वितीय तथा रा.रा.पो. केंद्रीय आयुर्वेदीय कैंसर अनुसंधान संस्थान, मुंबई तृतीय व ‘ग’ क्षेत्र में दामोदर घाटी निगम, कोलकाता प्रथम, केन्द्रीय विद्युत अनुसंधान संस्थान, बेंगलूर द्वितीय समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण, कोच्ची को तृतीय पुरस्कार दिया गया। राष्ट्रीयकृत बैंकों की श्रेणी में ‘क’ क्षेत्र में पंजाब नेशनल बैंक प्रथम, स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर द्वितीय, ‘ख’ क्षेत्र में बैंक ऑफ इंडिया प्रथम, सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया द्वितीय तथा ‘ग’ क्षेत्र में सिंडिकेट बैंक प्रथम एवं विजया बैंक द्वितीय स्थान पर रहे। 
पूरे देश में 436 नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियों में उत्कृष्ठ कार्य निष्पादन हेतु ‘क’ क्षेत्र में नराकास मथुरा प्रथम, नराकास भिलाई द्वितीय, ‘ख’ क्षेत्र में नराकास नागपुर (बैंक) प्रथम, नराकास चंडीगढ़ (कार्यालय-1) द्वितीय व ‘ग’ क्षेत्र में नराकास हैदराबाद (उपक्रम) प्रथम एवं नराकास हैदराबाद (बैंक) को द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ। राजभाषा गृह पत्रिका पुरस्कारों में ‘क’ क्षेत्र के अंतर्गत राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान की पत्रिका ‘जल चेतना’ को प्रथम, रेल मंत्रालय की ‘भारतीय रेल’ को द्वितीय, ‘ख’ क्षेत्र से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ‘प्रयास’ को प्रथम, माझगांव डॉक शिपबिल्डर्स की ‘जल तरंग’ को द्वितीय एवं ‘ग’ क्षेत्र में राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड की ‘सुगंध’ को प्रथम, तथा गार्डनरीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स की पत्रिका ‘राजभाषा जागृति’ को द्वितीय पुरस्कार प्राप्त हुआ।
राजभाषा गौरव पुरस्कार विजेताओं की एक अन्य श्रेणी में केंद्र सरकार के कार्मिकों के लिए राजभाषा गौरव मौलिक पुस्तक लेखन पुरस्कार योजना 2015 में डॉ रामनिवास मीणा, प्रो. रामकुमार सिंह को प्रथम पुरस्कार के रूप में एक लाख रुपए, डॉ अमलेश कुमार मिश्र को द्वितीय पुरस्कार के रूप में पचहत्तर हजार रुपए, दिनेश कुमार शर्मा को तृतीय पुरस्कार के रूप में साठ हजार रुपए तथा डॉ चंद्रभान सिंह, डॉ. जेपी शर्मा एवं डॉ रणवीर सिंह को प्रोत्साहन पुरस्कार के रूप में तीस हजार रुपए प्रदान किए गए। भारत के नागरिकों के लिए राजभाषा गौरव मौलिक पुस्तक लेखन पुरस्कार योजना के तहत डॉ. राजेश्वरी प्रसाद चंदोला को प्रथम पुरस्कार के रूप में दो लाख रुपए, जयश्री घोष, सुनील कांत तांगड़ी को द्वितीय पुरस्कार के रूप में एक लाख पच्चीस हजार रुपए, डॉ. दुर्गा दत्त ओझा को तृतीय पुरस्कार के रूप में पचहत्तर हजार रुपए, रश्मि अग्रवाल, सत्यवीर सिंह, सुबह सिंह यादव, ओपी यादव, डॉ. प्रेमचंद्र स्वर्णकार, डॉ. विनय कुमार शर्मा तथा सुरेश कुमार को प्रोत्साहन पुरस्कार के रूप में प्रत्येक को दस हजार रुपए पुरस्कार स्वरूप दिए गए। 
विभिन्न गृह पत्रिकाओं में 2015-16 के दौरान छपे उत्कृष्ट लेखों के लेखकों हेतु राजभाषा गौरव पुरस्कार योजना में हिंदी भाषी में डॉ. वीरेंद्र कुमार प्रथम (बीस हजार रुपए), कैलाश नाथ गुप्ता द्वितीय (अठारह हजार रुपए) तथा रामहरि शर्मा तृतीय (पंद्रह हजार रुपए) स्थान पर रहे, वहीं हिंदीतर भाषी में डॉक्टर सदा बिहारी साहू ने प्रथम (पच्चीस हजार रुपए), कृष्ण ठाकुर ने द्वितीय (बाइस हजार रुपए) तथा डॉ. सुनील पेशिन ने तृतीय (बीस हजार रुपए) पुरस्कार स्वरूप प्राप्त किए।

पत्रिका ‘जल चेतना’ को प्रथम पुरस्कार

 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, रूड़की की गृह पत्रिका ‘जल चेतना’ को राजभाषा कीर्ति पुरस्कार योजना 2015-16 के गृह पत्रिका श्रेणी में प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में पत्रिका के संपादक और संस्थान के निदेशक राजदेव सिंह को यह पुरस्कार प्रदान किया।
केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती ने इस अवसर पर राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान को बधाई दी है। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि जल चेतना के माध्यम से संस्थान और जल विज्ञान के क्षेत्र से जुड़े लोगों के बीच राजभाषा के माध्यम से महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। सुश्री भारती ने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में जल चेतना और निखर कर सामने आयेगी।

पत्रिका ‘भारतीय रेल’ को राजभाषा कीर्ति पुरस्कार 

नई दिल्ली : रेल मंत्रालय द्वारा प्रकाशित पत्रिका ‘भारतीय रेल’ को राजभाषा कीर्ति पुरस्कार योजना 2015-16 में ‘क’ क्षेत्र के अन्तर्गत “द्वितीय” पुरस्कार हेतु चुना गया। पुरस्कार वितरण समारोह 14 सितम्बर, 2016 को राष्ट्रपति भवन ऑडिटोरियम, राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में आयोजित किया गया। पुरस्कार भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के कर-कमलों के द्वारा प्रदान किया गया। सदस्य कार्मिक, रेलवे बोर्ड प्रदीप कुमार ने पुरस्कार ग्रहण किया।
रेलमंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने भारतीय रेल पत्रिका के संपादक मंडल को पुरस्कार प्राप्ति के लिए शुभकामनाएं दी। उन्होंने सम्पदाक मंडल को हिंदी के प्रयोग व प्रसार के लिए कार्य करने के हेतू बधाई दी। संचार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा तथा रेल राज्यमंत्री राजेन गोहाईं ने भी संपादक मंडल को पुरस्कार प्राप्ति के लिए शुभकामनाएं दी। निदेशक सूचना एवं प्रसार, रेलवे बोर्ड वेद प्रकाश तथा भारतीय रेल पत्रिका के संपादक रमाकांत पाण्डेय भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

वेब आधारित पेंशनर सेवा पोर्टल की शुरूआत

नई दिल्ली : केन्द्रीय वित्त एवं कॉपोरेट मामलों के मंत्री अरूण जेटली ने महालेखा नियंत्रक (सीजीए) कार्यालय द्वारा पेंशनधारकों को बेहतर सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से वेब आधारित पेंशनर सेवा पोर्टल शुरू करने की सराहना की। केन्द्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली नई दिल्ली में महालेखा नियंत्रक के नये कार्यालय के उद्घाटन के मौके पर उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे। केन्द्रीय वित्तमंत्री ने आईटी पहल जैसे पीएफएमएस (सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली) और एनटीआरपी (नॉन कर रसीद पोर्टल) की तरह सरकार के राजस्व और व्यय की बढ़ती मात्रा से निपटने में सीजीए की भूमिका की सराहना की। साथ ही उन्होंने सरकारी व्यय और राजस्व की गुणवत्ता का आकलन करने में डेटा विश्लेषण के महत्व पर भी प्रकाश डाला। इसके अलावा श्री जेटली ने आवंटित धनराशि को सही लाभार्थी तक पहुंचाने में पीएफएमएस की भूमिका की सराहना की। इस समारोह की सह-अध्यक्षता व्यय राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने की और इसमें सरकार के कई मंत्रालयों और विभागों के सचिवों तथा कई अधिकारियों ने भाग लिया। 
इस अवसर पर वित्तमंत्री अरुण जेटली ने महालेखा नियंत्रक कार्यालय द्वारा डिजिटल इंडिया के तहत वेब आधारित पेंशनर सेवा पोर्टल शुरू किया। इस पोर्टल को केंद्रीय पेंशन लेखा कार्यालय (सीपीएओ) ने विकसित किया है, जहां सभी पेशनधारकों को अपने पेंशन से संबंधित सभी जानकारी जैसे पेंशन की स्थिति, पेंशन का भुगतान और उससे संबंधित बैंकिंग व्यवस्था की एक ही जगह मिलेगी। इस सेवा से पेंशन शिकायतों के तेजी से निपटारे में मदद मिलेगी। 
भारत सरकार के मंत्रालयों और विभागों में आंतरिक लेखा परीक्षण में मजबूती लाने के उद्देश्य से बाद में महालेखा नियंत्रक कार्यालय (सीजीए) और आंतरिक लेखा परीक्षक संस्थान (आईआईए) के बीच एक ज्ञापन (एमओयू) पर भी हस्ताक्षर हुये। 

मणिपुर के विकास को 100 करोड़ रुपये आवंटित

नई दिल्ली : केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पीएमओ में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस वित्तीय वर्ष के पहले 5 महीनों में मणिपुर के विकास हेतु कई परियोजनाओं के लिए केन्द्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय ने 100 करोड़ रुपये से भी अधिक की धनराशि आवंटित की है। उन्होंने कहा कि 28.47 करोड़ रुपये की राशि एनएलसीपीआर (समाप्त न होने वाले केंद्रीय संसाधन पूल) के तहत कई परियोजनाओं के लिए आवंटित किया गया और करीब 75 करोड़ रुपये एनईसी (पूर्वोत्तर परिषद) की कई परियोजनाओं के लिए दिया। उन्होंने यह भी कहा कि यह अन्य मंत्रालयों द्वारा दिये गये धनराशि के अलावा है।
पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय की बैठक की अध्यक्षता करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में मणिपुर को केन्द्र सरकार के सभी मंत्रालयों से ज्यादा सहयोग मिला है। इसी संबंध में उन्होंने जिरीबाम-सिलचर रेल लिंक तथा जिरीबाम से टुपुल ब्रॉड गेज रेल ट्रैक परियोजना का भी जिक्र किया।
इसी तरह डॉ जितेन्द्र सिंह ने कहा कि इम्फाल से मोरेह और सेनापट्टी से इम्फाल के बीच की सड़क को चार-लेन करने की परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि बिजली के क्षेत्र में भी पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय, राज्य सरकार और कई अन्य सहयोगी संस्थाओं के सहयोग से इम्फाल में 24 घंटे बिजली सुनिश्चित हो सका है। पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्यों के विकास से संबंधित कई योजनाओं का जिक्र करते हुए डॉ जितेन्द्र सिंह ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र के सभी 103 जिला मुख्यालयों को कम-से-कम दो लेन सड़क के माध्यम से निकटतम राजमार्ग से जोड़ने की योजना है। उन्होंने कहा कि इसी सिलसिले में इस समय कई सड़कों को चार-लेन करने की परियोजना का काम तेजी से चल रहा है।
डॉ जितेन्द्र सिंह ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र के युवाओं की एथलेटिक प्रतिभा को आगे लाने के लिए केन्द्र सरकार ने मणिपुर में एक खेल विश्वविद्यालय बनाने की घोषणा की थी, लेकिन जमीन अधिग्रहण की समस्या के कारण इस परियोजना में विलंब हो रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हालांकि पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय राज्य सरकार के साथ मिलकर इस दिशा में काम कर रहा है। पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय में सचिव नवीन वर्मा और मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस बैठक में भाग लिया।

मंगलवार, 13 सितंबर 2016

डाक संबंधी शिकायतें 24 घंटे में दूर होंगी

मनोज सिन्हा ने इंडिया पोस्ट हेल्प सेंटर तथा टोल फ्री नंबर “1924” लांच किया
नई दिल्ली : संचार मंत्रालय ने देश में डाक विभाग संबंधी शिकायतों के समाधान के लिए इंडिया पोस्ट हेल्प सेंटर तथा टोल फ्री नंबर “1924” लांच किया। हेल्प सेंटर का उद्घाटन करते हुए संचार मंत्री मनोज सिन्हा ने कहा कि इंडिया पोस्ट हेल्प सेंटर तथा टोल फ्री नम्बर-1924 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रगति समीक्षा बैठकों के परिणामस्वरूप संभव हुआ है। समीक्षा बैठक में श्री मोदी ने केंद्रीय मंत्रियों को सामान्य जन की शिकायतों के समाधान के लिए लोक शिकायत निवारण व्यवस्था को मजबूत करने का आह्वान किया था।
श्री सिन्हा ने कहा कि हेल्प सेंटर तीन भाषाओं - हिंदी, अंग्रेजी तथा मलयालय में लांच किया गया है और धीरे-धीरे संविधान की अनुसूची में शामिल सभी क्षेत्रीय भाषाओं को इसमें शामिल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि हेल्प सेंटर सुबह 8 बजे से रात्रि 8 बजे तक अवकाश के दिनों को छोड़कर सभी दिन काम करेंगे। श्री सिन्हा ने कहा कि शिकायत समाधान व्यवस्था में कुशलता लाने के लिए प्रत्येक सर्किल में एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी।
संचार मंत्री ने बल देते हुए कहा कि नीति संबंधी मामलों को छोड़कर डाक सेवा से संबंधित सभी शिकायतें 24 घंटे के अंदर दूर की जाएंगी। श्री सिन्हा ने पिछले महीने लांच की गई ट्विटर सेवा की याद दिलाते हुए बताया कि ट्विटर पर डाक संबंधी औसतन एक सौ शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि शिकायतें प्राप्त करने के मामले में डाक विभाग आठवां सबसे बड़ा विभाग, मंत्रालय है। टोल फ्री नम्बर-1924 देशभर के उपभोक्ताओं को लैंडलाइन, एयरटेल, आइडिया, वोडाफोन, टेलेनॉर, एयरसेल, एमटीएस, रिलायंस आदि सेवाप्रदाताओं के मोबाइल फोन पर उपलब्ध होगा।
टोल फ्री नम्बर 1924 पर प्राप्त शिकायतों पर डाक भवन में ऑपरेटरों द्वारा कम्प्यूटरीकृत उपभोक्ता केंद्र (सीसीसी) में दर्ज किया जाएगा और शिकायतकर्ता को 11 अंकों का टिकट नम्बर दिया जाएगा। यदि शिकायत पहले ही दर्ज ह,ै तो शिकायतकर्ता को शिकायत की स्थिति के बारे में जानकारी दी जाएगी। सीसीसी पोर्टल पर शिकायत आने के बाद संबंधित डाकघर शिकायत के समाधान के लिए त्वरित रूप से आवश्यक कार्रवाई करेगा और कार्रवाई की स्थिति को अपलोड करेगा।
सभी डाक सर्किलों में शिकायतों की निगरानी और समाधान के लिए कंट्रोल रूम होगा। प्रत्येक सर्किल के नोडल अधिकारी द्वारा प्रतिदिन सीसीसी पोर्टल खोला जाएगा और शिकायतों की जांच की जाएगी। सर्किल प्रमुख सभी संबंधित डाकघरों को यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश देंगे की डाकघरों में कार्य शुरू होते समय सीसीसी पोर्टल पर लॉगिंग किया जाए। नीति संबंधी मामलों में एक कार्य दिवस में समाधान किया जाएगा। शिकायतकर्ता को बताया जाएगा कि इसमें नीतिगत मामले शामिल हैं। सीसीसी पोर्टल पर उचित जवाब अपलोड किया जाएगा। सर्किल द्वारा ईमेल adgpg@indiapost.gov.iके जरिए ऐसे मामलों की स्थिति को प्रत्येक 24 घंटे पर अपलोड किया जाएगा। ईमेल ऐड्रेस और मोबाइल नम्बर के साथ प्रत्येक सर्कल के नोडल अधिकारी का नाम ईमेल adgpg@indiapost.gov.iपर भेजा जाना चाहिए। सीपीएमजी 1924 पर लंबित मामलों को रोजाना देखेंगे और यदि मामले निपटने में 24 घंटे से अधिक का समय लगता है, तो पूरा विवरण देंगे और निदेशालय के पीजी सेल को निर्देश देंगे। निदेशालय का पीजी सेल सुरक्षा कार्यालय (डाक) को साप्ताहिक रिपोर्ट उपलब्ध कराएगा। सर्किल टोल फ्री केंद्र से प्राप्त शिकायतों के समाधान में प्राथमिकता देगा। सभी सर्किल टोल फ्री नम्बर-1924 का प्रचार-प्रसार अपनी बजट सीमा में उचित माध्यम के जरिए अपने क्षेत्राधिकार में करेंगे।

शनिवार, 10 सितंबर 2016

भारतीय सेना विश्व में सर्वोत्तम : राष्ट्रपति

चेन्नई : राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी, चेन्नई में उनके सम्मान में आयोजित रात्रि भोज में भाग लिया। इस अवसर पर अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि चेन्नई स्थित अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी की यात्रा, जो 1963 में शुरू हुई थी, बहादुरी एवं निडरता से भरी पड़ी है। राष्ट्रपति महोदय ने अधिकारियों से कहा कि उन्हें याद रखना चाहिए कि वे जिस सेना का नेतृत्व करते हैं, वह विश्व में सर्वोत्तम है। सैन्य कार्यों में अच्छी तरह से उनका नेतृत्व करने के साथ-साथ उनके कल्याण की देखभाल करना एवं यह सुनिश्चित करना कि उन्हें जीवन का सर्वश्रेष्ठ संभव गुणवत्तापूर्ण जीवन मिले, भी उनका दायित्व है। उन्हें हमेशा अपने कार्यों द्वारा उदाहरण बनना चाहिए और उनसे वार्ता के लिए हमेशा उन्मुख रहना चाहिए। 
राष्ट्रपति महोदय ने कहा कि भारतीय सेना परिवर्तन के मध्य में है और इसे व्यापक दृष्टिकोण के विभिन्न प्रकार के कौशलों वाले स्फूर्तिमान एवं अनुकूलनीय नेताओं की आवश्यकता है। ऐसे समय में जहां उन्हें विभिन्न प्रकार के संघर्षों, जिनमें बेहद कड़े मुकाबले से लेकर शांतिकाल के कार्यों, शांति बनाए रखने के प्रयासों, मानवीय प्रयासों, आतंक एवं उग्रवाद से मुकाबलों, छोटे स्तर की झड़पों, इन सबसे बेहद तेजी से एवं एक साथ भी निपटने की आवश्यकता होगी, भारत को इस चुनौती के अनुरूप सैन्य नेताओं की आवश्यकता है। उनसे त्वरित तरीके से संचालनगत एवं अन्य कठिन परिस्थितियों में विवेकपूर्ण एवं नैतिक फैसले लिए जाने की उम्मीद की जाएगी। इस क्षमता को अर्जित करने के लिए उन्हें कठिन प्रशिक्षण करना होगा।

जिन्होंने आपमें भरोसा जताया, उनके धन की रक्षा करना आपकी पावन जिम्मेदारी

राष्ट्रपति की बैंकरों से अपील 
चेन्नई : राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने चेन्नई में करूर व्यास बैंक के शताब्दी समारोह में हिस्सा लिया। इस अवसर पर राष्ट्रपति महोदय ने बैंकों की अलाभकारी परिसंपत्तियों में बढ़ोतरी तथा मुनाफे में हो रही कमी की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया कि अनुसूचित व्यावसायिक बैंकों का सकल अग्रिमों के अलाभकारी अग्रिमों की मात्रा मार्च, 2015 के 10.90 प्रतिशत से बढ़कर मार्च, 2016 में 11.40 प्रतिशत हो गई है। सभी अनुसूचित व्यावसायिक बैंकों द्वारा किए गए प्रोविजन मार्च, 2015 के 73,887 करोड़ रुपये से बढ़कर मार्च, 2016 में समाप्त होने वाले वित्त वर्ष के दौरान 1,70,630 करोड़ रुपये तक पहुंच गए हैं। इसके फलस्वरूप व्यावसायिक बैंकों द्वारा ऋण संवितरण के लिए उपलब्ध संसाधन प्रभावित हुए हैं और यह वांछनीय स्थिति में नहीं है। भारत जैसी बढ़ रही अर्थ व्यवस्था में ऋण विस्तार की जरूरत है। कुल मिलाकर, भारतीय बैंकिंग क्षेत्र ने, विशेष रूप से आर्थिक संकट के दौरान अच्छा प्रदर्शन किया है और वह उन्हें बधाई देना चाहेंगे। बहरहाल, उन्हें एनपीए की स्थिति को लेकर विवेकपूर्ण बने रहना चाहिए। राष्ट्रपति महोदय ने बैंकरों को कहा कि उन्हें हमेशा यह याद रखना चाहिए कि वे जमाकर्ताओं के धन के ट्रस्टी हैं। यह उनकी पावन जिम्मेदारी है कि वे उनके धन की रक्षा करें, जिन्होंने उनमें भरोसा जताया है।

पीजीआईएमईआर में इंफोसिस-रेड क्रॉस सराय की आधारशिला

चंडीगढ़ : गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने संघ शासित प्रदेश चंडीगढ़ में स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान चिकित्सा शिक्षा अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर) में इंफोसिस-रेड क्रॉस सराय की आधारशिला रखी। चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों, पीजीआई प्रशासन के प्रतिनिधियों एवं इंफोसिस लिमिटेड के अधिकारियों ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया। इस अवसर पर राजनाथ सिंह ने दिव्यांग लोगों को व्हील चेयर और ट्राई साइकिल भी वितरित कीं। मुख्य अतिथि ने चंडीगढ़ प्रशासन, पीजीआई प्राधिकारियों एवं इंफोसिस लिमिटेड द्वारा इस नेक कार्य के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की। 
पीजीआई कैम्प्स में सराय भवन का निर्माण इंडियन रैड क्रॉस सोसायटी की चंडीगढ़ शाखा द्वारा किया जा रहा है, जिसके लिए आईआरसीएस चंडीगढ़ को भूमि पीजीआई द्वारा उपलब्ध करायी गई है। सराय का संचालन आईआरसीएस द्वारा किया जायेगा और इसका निर्माण 18 महीने में करीब 12 करोड़ रुपये की लागत से किया जायेगा। यह धन इंफोसिस लिमिटेड द्वारा प्रदान किया जायेगा। 
समारोह की अध्यक्षता पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक महामहिम वीपी सिंह बाडनोरे ने की। इस अवसर पर चंडीगढ से सांसद किरण खेर, प्रशासक के सलाहकार परिमल राय, आईएएस और आईआरसीएस के राष्ट्रीय मुख्यालय, नई दिल्ली के उपाध्यक्ष अविनाश राय खन्ना और चंडीगढ़ प्रशासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

शुक्रवार, 9 सितंबर 2016

जम्मू-कश्मीर व हिमाचल में हेलीकॉप्टर सेवाओं के लिए सब्सिडी मंजूर

नई दिल्ली : सरकार ने सबसे अधिक दुर्गम गंतव्यों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के 10 सेक्टरों में प्रायोगिक आधार पर हेलीकॉप्टर सेवा के परिचालन को मंजूरी दे दी है। बाद में स्थानीय आबादी की न्यायोचित आवश्यकताओं के आकलन के आधार पर इस योजना को अन्य अतिरिक्त सेक्टरों तक भी बढ़ाया जा सकता है। 
जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश की सरकारें वर्तमान न्यायोचित आवश्यकताओं के आधार पर गृह मंत्रालय के साथ विचार-विमर्श कर अपने राज्यों में सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की दोबारा पहचान व चयन कर उड़ान के घंटों को अंतिम रूप देंगे। हेलीकॉप्टर संपर्क उपलब्ध कराने का निर्णय लेते समय सड़क यात्रा और हवाई यात्रा के समय के अंतर को महत्वपूर्ण कारक के रूप में लिया जा सकता है। 
जम्मू-कश्मीर के मामले में श्रीनगर के निम्नलिखित पांच सेक्टरों द्रास-करगिल-जंसकार-लेह के लिए संयुक्त कार्य समूह की सिफारिशें स्वीकार कर ली गई है। 
श्रीनगर - करगिल - श्रीनगर
श्रीनगर - द्रास - श्रीनगर
कारगिल - पदम - लेह - पदम - कारगिल
लेह - लिंगशेड - लेह
श्रीनगर - लेह - श्रीनगर
ताजा आकलन के आधार पर जम्मू कश्मीर सरकार द्वारा गृह मंत्रालय के साथ विचार-विमर्श कर उपरोक्त पांच सेक्टरों का दोबारा सीमांकन किया जा सकता है। भारत सरकार हैलीकॉप्टर सेवा का उपयोग करने वाले पात्र यात्रियों की वास्तविक संख्या पर सब्सिडी देगी। खाली सीटों के लिए सब्सिडी नहीं दी जायेगी। राज्य के स्थानीय निवासियों को आपातकालीन और आम यात्री सेवाओं में प्राथमिकता और सब्सिडी दी जायेगी। अति महत्वपूर्ण व्यक्ति, राज्य सरकार के अधिकारी के दौरे, आयकरदाता और पर्यटक किराये में सब्सिडी के लिए योग्य नहीं होंगे। ऐसे व्यक्तियों को सीट उपलब्ध होने पर पूरा भुगतान करना होगा। सेवाओं का परिचालन करने वालों का चयन राज्य सरकार द्वारा खुली टेंडर प्रक्रिया से किया जायेगा। राज्य में हेलीकाप्टर सेवा का परिचालन मार्च, 2017 तक या अनुबंध समाप्त होने तक अथवा जो भी पहले हो, तक रहेगा।

रविवार, 4 सितंबर 2016

स्वर्ग में कर्फ्यू

Dr. Lalji Prasad, Writer
 कथा सागर 
डाॅ. लालजी प्रसाद सिंह
‘वैसी खबर सुनकर कोई भी चिन्तित हो सकता - वह भी चिन्तित हो उठा, जब उसे पता चला कि उसकी पत्नी दो महीने से गर्भवती है। जबकि उसे अपनी पत्नी और विधवा मां से विदा लेकर गांव से शहर आए हुए करीब छः महीने हो चुके थे । वह हड़बड़ी में गांव के लिए रवाना हो गया...।’
इमाम नेहाल रब्बानी उर्दू में लिखी चिट्ठी से हृदय को चीर कर रख देने वाली एक-से-एक कड़वी बातें सुनाते जा रहे थे। चिट्ठी लुकमान खान ने भेजी थी कश्मीर से। सुनकर मैं अत्यंत दुःखी हो गया। आक्रोश भी मुझे कम नहीं हो रहा था - ‘काश! उसकी जिन्दगी को उजाड़ने वाले मेरे हाथ लग जाते।’ मैं छटपटा कर रह गया। भावुकता से मेरी आंखें डबडबा गईं। तब यह सोच-सोचकर कितना बेहाल हुआ जा रहा था कि कभी-कभी किस तरह फूल-सी खिली हुई मासूम जिन्दगियां उन्मत हाथी की तरह बौराये आतताइयों द्वारा मसलकर पलभर में नेस्तनाबूद कर दी जातीं। 
मुझे उस स्थिति में देखकर इमाम साहब ने टोका - ‘‘नवदीप बाबू !’’
‘‘हां।’’
‘‘आखिर मासूम खान से कैसा रिश्ता था आपका? क्योंकि वह तो मुसलमान था और आप...!’’
‘‘यही तो मैं आज तक निर्णय नहीं कर पाया। लेकिन इतनी बात जरूर समझ में आती रही कि वह ‘हिन्दू-मुसलमान’ से ऊपर की चीज था कुछ। मासूमियत की खान था वह - मासूम खान। मां-बाप ने सार्थक नाम रखा था उसका। लुकमान दोस्त है उसका। दोनों साथ में काम करते। आज बस इतना ही। मन कापफी दुःखी है। आगे फिर कभी।’’
मैं वहां से सीधे चला तो आकर अपने बरामदे पर रखी कुर्सी पर धम् से बैठ गया। गर्मी का मौसम रहने के बावजूद पंखे का स्विच आॅन करने का ख्याल नहीं रहा। मासूम के बारे में सोच-सोचकर मन विचलित हुआ जा रहा था। मेरी पत्नी को शायद मेरे आने की आहट मिल चुकी थी। उसने पंखे का स्विच आॅन करते हुए मेरी स्थिति को जानना चाहा - ‘‘कहां से आ रहे हो ?’’
‘‘मस्जिद से।’’
‘‘नमाज अदा करने गए थे क्या!’’
‘‘नहीं तो!’’
‘‘जा भी सकते तुम। मुसलमानों जैसा हुलिया जो बनाए चलते!’’
मन चिड़चिड़ा गया मेरा - ‘‘आते ही इन्टरव्यू लेने लगी। गर्मी से बेहाल हूं, पानी के लिए नहीं पूछा। ताने देने लगी - मुसलमान बनना जैसे इतना आसान हो!’’ 
वह तुरंत एक गिलास पानी लेकर आई। मैंने पानी पीकर कुछ राहत महसूस की - ‘‘बहुत बड़ी चीज है मुसलमान बनना। जो मुसल्लम ईमान से लैश हो, जो मुसल्लम ईमान का ज्ञाता हो वही मुसलमान कहला सकता। कलमा पढ़ लेना, नमाज अदा करना, ये सब मुसलमान बनने के तरीके हो सकते - साधन।’’
‘‘किन्तु दुनिया में करोड़ों-करोड़ मुसलमान जो हैं ?’’
‘‘जैसे दुनिया भर में करोड़ों हिन्दू हैं, ईसाई हैं, सिक्ख हैं, वैसे धर्म या सम्प्रदायों को मानने वाले परिवारों में जन्म लेने के कारण। और सिर्फ वैसे परिवारों में जन्म ले लेने से खुदा या भगवान की राह पर चलने के वास्तविक तरीके तो हासिल नहीं हो जाते ? दुनिया के सारे धर्म एवं सम्प्रदायों ने अबतक लोगों को मुसल्लम ईमान से परिपूर्ण इन्सान बनाया होता तो नजारा कुछ दूसरा ही होता, लेकिन वे सब मजहबी संकीर्णता से ग्रसित लोगों की फौज बनाने में ही अपनी सारी ऊर्जा झोंकते रहे। आज नतीजा सामने है। पूरी दुनिया आतंकवाद की ज्वाला में धह-धह जल रही। वैसी ही संकीर्णता से ग्रसित धर्मान्ध लोगों ने मासूम की दुनिया उजाड़ डाली।’’
‘‘कौन मासूम?’’ सुनिभा ने टोका मुझे। 
‘‘अरे वही कश्मीर वाला - जहां हमलोग होटल में ठहरे थे, और कौन!’’
‘‘ओ! क्या हुआ उसके साथ?’’
‘‘वही पता करने तो मस्जिद गया था। उसके साथी लुकमान ने उर्दू में चिट्ठी लिख भेजी है। आतताइयों ने बर्बतापूर्वक उसके परिवार को तबाह कर डाला था। खबर मिलते ही मासूम को धधकती ज्वाला के बीच भारी मन से वापस जाना पड़ा।’’
‘‘बड़ा नेक इन्सान था वह।’’ सुनिभा चिन्तित हो उठी - ‘‘मां-बहनों के साथ अत्याचार करके भला कौन-सा धर्म बनने वाला, कौन-सा देश बन सकता ?’’ 
‘‘वही तो...!’’
‘‘अभी तूने लुकमान का नाम लिया, जिसने चिट्ठी भेजी है - मतलब वही लुकुआ न?’’
‘‘हां-हां वही, जिसे मैं उसके पूरे नाम लुकमान खान के नाम से पुकारा करता। एक दिन उसने आपत्ति जताई - ‘‘मुझे लुकमान नहीं, लुकुआ ही कहिए। अच्छा लगता है।’’
‘‘मगर क्यों ?’’
‘‘क्योंकि मुझे जब लुकुआ कहकर पुकारेंगे तो लगेगा जैसे आप एक छोटे भाई को पुकार रहे।’’
मैं उसके ऐसे आत्मीय व्यवहार से भाव-विभोर हो उठता, दूर-दराज से आए हुए अपरिचित लोगों से मानवीय आधर पर जुड़ने की इनकी कोशिश कितना बड़ा संदेश देती। 
एक तरफ आतंकवादियों की गड़गड़ाती जानलेवा बन्दूकें, दूसरी तरफ मानवीय संवेदना का समंदर! अजीब विरोधाभास में जी रहा कश्मीर - अजीब विरोधाभास में जीने को अभिशप्त है कश्मीर - दो परस्पर विरोधी संस्कृतियों के द्वन्द्व में! नहीं चुप बैठते आतंकवादी तो कश्मीरी अदब के संवाहक भी कहां चुप बैठने वाले? वहां प्रकृति भी जैसे विभिन्न आघातों को सहते हुए अपनी छटा के प्रदर्शन हेतु बेकरार - वितस्ता; झेलम नदी बहती जहां कल-कल छल-छल। सहम सिहर जाती कभी बन्दूकों की गड़गड़ाहट से - लहूलुहान हो जाती कभी बेगुनाहों के रुधिर से। किन्तु जब कभी निजात पाती, अपनी रवानी में चल निकलती। नहीं छोड़ने को तैयार वह अपनी निर्दोष मुस्कराहट, कल-कल छल-छल। 
‘‘लेकिन लुकुआ आवश्यकता से ज्यादा शर्मीला ही था।’’ सुनिभा ने कुछ स्मरण करते हुए कहा - ‘‘हमेशा मासूम के साथ रहता जरूर, लेकिन लोगों के सामने आने में शरमाता। वह उसके पीछे ही रहना चाहता।’’
तब मुझे भी कुछ याद हो आया - कश्मीर पहुंचने के बाद पहली सुबह थी वह। ताजे दूध के लिए गोद में पलने वाली मेरी नन्ही-सी बेटी मैना रोने लगी थी। डब्बा वाला दूध वह पीती नहीं। और मातृत्व से लबरेज रहने के बावजूद सुनिभा को उतना दूध उतरता नहीं। उसके बड़े-बड़े स्तन उसके नारीत्व में चार चांद लगाने तक ही सीमित रह जाते। लाचार हो मैंने मासूम को आवाज दी तो उसके साथ लुकमान भी चला आया। मैंने समस्या सुनाई तो मासूम ने असमर्थता जाहिर की - ‘‘ताजा दूध दुहवाकर लाना मुश्किल है सर जी - बहुत मुश्किल।’’
तब पीछे खड़े लुकमान ने कुहनियाया था उसे - ‘‘कहो न, हो जाएगा बन्दोबस्त - कोशिश करेंगे।’’
‘‘कैसे कोशिश करोगे?’’ उसे झिड़का था मासूम ने - ‘‘कहां से करोगे बन्दोबस्त ? साहब लोगों से झूठ बोलना ठीक भी है क्या? कल शाम की घटना किसे पता नहीं - आतंकवादियों ने दर्जनों हिन्दू-सिक्खों को सरेआम गोलियों से भूनकर छलनी कर दिया? तब से गरम है शहर, कहीं हिन्दू-मुस्लिम दंगा न भड़क जाए। सुबह आठ बजे से कफ्र्यू लगने वाला। कैसे लाओगे ताजा दूध? मरवाओगे क्या?’’
मैंने मन मसोस कर रह जाना उचित समझा - ‘‘खैर, कोई बात नहीं मासूम, आखिर कितना रोएगी मैना।’’
‘‘नहीं सर जी,’’ मासूम तुरंत गम्भीर हो गया - ‘‘लुकुआ ने कह दिया है तो नहीं रोएगी मैना।’’
सचमुच, कफ्र्यू शुरू होते-होते दोनों गली-कूचे में छुपते-छुपाते कहीं से गाय का ताजा दूध प्रबंध कर लाए। उसके बाद होटल की दिनचर्या में लगने के लिए जाने लगे। अभी पीछे मुड़कर कुछ ही कदम बढ़े होंगे कि मैंने फुसफुसाते हुए सुनिभा को इशारा किया - ‘‘वैष्णव देवी के प्रसाद में से निकालकर इन्हें कुछ देती तो अच्छा रहता।’’
उसने मेरे ही अन्दाज में धीरे से कहा - ‘‘पहले पूछ तो लो, हिन्दू देवी-देवता का प्रसाद वे खाएंगे भी या नहीं ? देने के लिए तो मैं भी सोच रही थी।’’
‘‘ओ!’’ मेरे मुंह से स्वतः निकल गया। फिर मैंने उन्हें आवाज दी - ‘‘मासूम खान, जरा सुनना तो इधर।’’
‘‘क्या है सर जी ?’’
‘‘मेरी पत्नी तुम्हें वैष्णव माता का प्रसाद देना चाहती। लेने में कोई उज्र....?’’
‘‘नहीं सर जी, दिलवाइए न - कहां है प्रसाद माता का ? हमलोगों को तो माता के भक्तगण अक्सर प्रसाद लाकर देते। आप शायद नए आए हैं इसलिए...।’’
सुनिभा ने नारियल, लावा वगैरह दिया तो मासूम और लुकमान लेकर खुशी-खुशी नीचे गए ग्राउण्ड फ्लोर; भूतल के आंगन में। अन्य साथियों को जुटाया और नारियल फोड़कर खुशी-खुशी बांटने लगे - ‘‘आओ जी आओ। वैष्णव माता का प्रसाद लो।’’
जुट गए आठ-दस नौकर-चाकर। बांटकर प्रेमपूर्वक खाने लगे प्रसाद। धर्मिक सहिष्णुता का वह दृश्य देखकर मुझे सुखद आश्चर्य हो रहा था। शायद उनकी उन्हीं प्रवृत्तियों के चलते बस से उतरते समय कई लोगों ने श्रीनगर के सिल्क फैक्ट्री रोड स्थित हजुरी बाग के उस मध्यम श्रेणी के होटल में ठहरने की सलाह दी थी। हालांकि किसी हिन्दू-होटल में ठहरने की योजना बनाकर वहां पहुंचा था। लेकिन जम्मू से बस के वहां पहुंचते न पहंुचते हंगामा की स्थिति बन गई थी, करीब-करीब अफरातफरी की स्थिति। शाम के करीब आठ बज चुके थे। कोई हिन्दू-होटल खोजने के लिए न तो समय अनुकूल था और न परिस्थिति। ऊपर से कई हिन्दुओं ने एक स्वर में कहा कि यदि छुआछूत या इसी तरह की कोई अन्य संकीर्णता या कट्टरता मन में न हो तो मुसलमानों के होटल में भी ठहरने पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। वे सब भी अपने ग्राहकों की बहुत ज्यादा कद्र करते।
जब से मैं वहां पहुंचा था, कफ्र्यू ही कफ्र्यू। होटल में जहां-तहां, इधर-उधर या अपने कमरे में सोते-बैठते वक्त काटना मुश्किल हो जाता। चार-पांच दिन यों ही बीत गए। पांच-छः दिन शेष बचे थे बस। मन मसोस कर रह जाना पड़ता - पता नहीं, किस मुहूर्त में आना हुआ यहां। हो गई यात्रा! देख लिया स्वर्ग के टुकड़े को! लेकिन उस बीच मासूम बहुत काम आता। कभी वह भोजन के लिए पूछने आता, कभी चाय या नाश्ता के लिए। कह देने पर भोजन, चाय या नाश्ता वह कमरे में भी पहुंचा जाता। उस क्रम में वह मौका मुनासिब पाकर अपने होटल और शहर से संबंधित बहुत सारी बातें बतलाने की कोशिश करता। साथ में लुकमान होता तो टपक पड़ता - ‘‘यह बात बहुत छिपाता है, सर जी।’’
‘‘ना-नहीं तो।’’ मासूम अचकचा गया - ‘‘खुदा कसम! मैं भला सर जी से कोई बात क्यों छिपाउंगा ?’’
‘‘तो तूने अभी तक शेखाना भाभी के बारे में कहां बतलाया?’’
लुकमान के मुंह से अपनी पत्नी की चर्चा निकलते ही मासूम शरमा गया कुछ। मैंने लुकमान को उत्प्रेरित किया - ‘‘तो तुम्हीं बताओ। अभी कौन देर हो गई है!’’
लुकमान शुरू हो गया - ‘‘शेखाना भाभी इतनी सुन्दर और गोरी हैं कि आप तो सिर्फ देखते रह जाएंगे, सर जी। लगता है, जैसे अंधेरे घर को भी वे उजाला कर सकतीं। अभी बीस से ज्यादा की नहीं वो। आपकी मैना जितनी बच्ची है उन्हें, हू-ब-हू उन्हीं का छोटा रूप। हमेशा देखते रहने को मन करता।’’
‘‘अब बस भी करो लुकू।’’ मासूम उसे आगे बोलने से रोकता - ‘‘तुम तो सिर्फ...।’’
वे मेरे साथ घुल-मिल गए तो कमरे में चाय लाने पर मैंने अपनी तरफ से पीने का आग्रह किया। वे मुकर गए - ‘‘नहीं सर जी, प्रसाद तक तो ठीक था। जाते समय यदि खुश होकर बख्शीश देंगे, वह भी ठीक। लेकिन होटल में ठहरने वाले लोगों के साथ इस तरह भोजन या चाय-पानी करना मंजूर नहीं। आपा को बेईमानी और धेखेबाजी से सख्त नफरत।’’
‘‘ये आपा कौन?’’ मुझे उत्सुकता हुई। 
इस होटल की मालकिन और हम गरीबों की सब कुछ। उनके सहारे के बिना हमारी जिन्दगी बोझ थी, सर जी। हम लावारिस की तरह भटकते फिरते। इसलिए उनकी इजाजत या इशारे के बिना आपके साथ चाय...।’’
‘‘उनसे बात करूंगा मैं। तुम सबों से मिलकर मुझे अच्छा लगता।’’
‘‘उन्हें आपा कहिएगा तो खुश हो जाएंगी।’’ मासूम ने जानकारी दी - ‘‘बहुत समझदार महिला हैं। अपने घर में सबसे ज्यादा पढ़ी-लिखी। आपके जैसे मिलनसार व्यक्ति की बहुत ही कद्र करतीं वे।’’
उस दिन मैंने होटल की मालकिन को आदाब फरमाया - असलाम अलैकुम आपा!’’
‘‘वालैकुम असलाम! बोलिए।’’ 
‘‘मैं आपके होटल में ठहरा हूं कुछ दिनों से। कश्मीर देखने आया हूं पटना से। नवदीप नाम है मेरा। मासूम और लुकमान को छोटा भाई समझते हुए कभी-कभार साथ बैठकर उन्हें अपनी तरफ से चाय पिलाना चाहता। इसमें आपको कोई एतराज...?’’
‘‘नहीं तो? मुझे भला क्या एतराज हो सकता!’’ फिर वे मुस्करा दीं - ‘‘उनकी प्यार की ताकत से कोई बच नहीं सकता।’’
‘‘वही तो। फिर भी मैंने उनके इच्छानुसार आपसे पूछ लेना वाजिब समझा। वे दोनों आपके नौकर जो ठहरे।’’
‘‘नहीं तो - भला ऐसा क्या! वे मुझे प्यार से आपा कहकर बुलाते, फिर मैं उन्हें नौकर क्यों समझने लगी?’’
मैंने आपा; दीदी से हुई बातचीत की जानकारी मासूम और लुकमान को दी। वे खुश हो गए। उसके बाद कभी-कभार साथ चाय पीने के लिए मेरे कहने पर वे ना नहीं कह पाते। तब उनसे वहां के सामाजिक परिवेश के बारे में बहुत कुछ जानने को मिलता। कई दिनों तक कफ्र्यू के चलते सिर्फ होटल तक सिमट कर रह जाना पड़ा। उसके बाद थोड़ी-बहुत ढील मिलती तो अगल-बगल के बाजार से ज्यादा कुछ देख पाना सम्भव नहीं था। अब लगने लगा था - उसी तरह बीतता हुआ वापसी का समय आ जाएगा। वैसा कुछ सोच-सोचकर घुटन महसूस होने लगती। तब यही मन करता कि कफ्र्यू पूर्णतः हट जाए और मन मुताबिक घूमने का मौका मिल जाए। लेकिन यह क्या! वैसे ही में एक शाम पुनः दंगे के नाम पर अफरातफरी कुछ ज्यादा ही...। जहां-तहां ताजा हिंसक झड़पें हुई थीं। मामला और गरमा गया। उस होटल में करीब पचासों हिन्दू ठहरे होंगे। मासूम उन्हें जीवन-रक्षा हेतु गोलबन्द होने की सूचना देता उनके कमरों में जल्दी-जल्दी चक्कर लगा रहा था। शायद होटल की मालकिन का सुझाव था। किन्तु जब वह मेरे कमरे में आया तो सूचना सुनते ही मेरे क्रोध का पारा अचानक चढ़ गया - ‘‘तुम सबने ये सब क्या नाटक-नौटंकी लगा रखी है! हम आए हैं यहां घूमने, तोप लेकर लड़ने नहीं! आतंकवादी बेखौफ वारदातें करते जा रहे तो उन्हें शह और संरक्षण देने वाले कम दोषी नहीं। वे यहां के बाशिंदों को ख्वाब दिखाते कि आजाद करा देंगे - मानो ये गुलाम हों! कश्मीर का कुछ भाग उनके पास भी तो है ही। फिर क्यों नहीं यहां से ज्यादा वहां अमन-चैन ? आज ये बात-बात में इस्लाम की दुहाई देते - यहां से हिन्दुओं को मार-मार कर भगा रहे। कल वे ही आतंकवादी अपने घरों में संरक्षण देने वाले मुसलमानों की बहू-बेटियों का यौन-शोषण करेंगे और यह बात किसी से छिपी हुई भी नहीं रहेगी। पंजाब में उग्रवादियों ने अपने ही धर्म के लोगों और उनकी बहू-बेटियों के साथ जो कुछ शर्मनाक हादसा किया, वह किसी से छिपा हुआ तो नहीं? कश्मीर के मुसलमानों को यह कैसे पता नहीं ? भारत-पाक बंटवारा का दर्द तो उन्हें जरूर ही पता होगा। क्या ही सुरक्षा की तलाश में यहां से मुसलमानों ने पाकिस्तान के लिए पलायन किया था। आज तक मुहाजिर कहकर सताये जा रहे। मैं तो कहता कि यहां के बच्चे-बच्चे तक आतंकवादियों का बहिष्कार करो और अपने स्वर्ग-से कश्मीर को बचा लो, जहां दुनिया के कोने-कोने से लोग पर्यटन को आएं और तुम्हारे सुख-दुःख का हिस्सा बन सकें। वरना पुलिस और सेना तो हैं ही। धमाके का जवाब धमाके से देंगी और लहूलुहान होता रहेगा तुम्हारा कश्मीर। आखिर तुम लोग और कितनी बार देखना चाहते कश्मीर को लहूलुहान होते हुए ?’’
मासूम सहमकर हठी-सा दीवाल से लगकर खड़ा था। उसकी जुबान सील गई थी जैसे। मैंने उसी क्रोध में साफ-साफ कह दिया - ‘‘जो होना होगा - होगा, मैं नहीं जानेवाला तुम्हारी मीटिंग-सीटिंग में। मैं यहां हिन्दू-मुसलमान के झगड़े में पड़ने नहीं आया हुआ।’’
वह मुंह लटकाकर चला गया। सुनिभा को नागवार गुजरा - ‘‘यह तो बेचारा नौकर है। इस पर भड़ास निकालने से क्या फायदा?’’
मैं अभी भी आवेशित था - ‘‘मैं समझ रहा। लेकिन यहां तो वही वाली कहावत शुरू हो गई - आए थे हरिभजन को, ओटन लगे कपास!’’
‘‘लेकिन गलती तो मेरी है। तुम आ भी कहां रहे थे। वो तो मेरी जिद पर....।’’
‘‘खैर, छोड़ो उन बातों को। आने का मतलब यह तो नहीं कि अपने ही देश में बेगाने हो गए ?’’
उस घटना के बाद मासूम जब कभी कमरे में चाय या मैना के लिए ताजा गर्म दूध लाता, उदास-उदास रहता, चुप-चुप। मजबूरीवश सुनिभा की तरफ मुखातिब होते हुए सामानों को टेबुल पर रखते हुए सिर्फ इशारा भर कर देता - ‘‘मेमसाब!’’
सुनिभा ने उसके जाने के बाद समझाया मुझे - ‘‘नवदीप, मासूम बहुत उदास रहता। उसे तकलीफ लगी है। उसे साॅरी बोल देने में तुम्हारा क्या बिगड़ जाएगा? पता नहीं, इससे जिन्दगी में फिर भेंट हो, न हो।’’
नौकर को ‘साॅरी’ बोलने में मेरा अहं आड़े आ रहा था। लेकिन सुनिभा जायज थी। मासूम के पुनः कमरे में आने पर मैं उसे साॅरी बोला। वह भावुक हो उठा। उसकी आंखों में आंसू तैर आए - ‘‘मैं तो नौकर हूं सर जी, नौकरों से अक्सर गलती होती ही रहती। और फिर डांट-फटकार तो उनके नसीब में लिखी होती।’’
‘‘उन सब बातों को भूल जाओ मासूम। मैं समझ रहा हूं - तुम मेरे फायदे के लिए ही कर रहे थे। किन्तु मैं भी क्या करूं। तुम्हारा इलाका देखने की हसरत पाले यहां आया था और यहां पड़ा-पड़ा कई दिनों से सड़ रहा हूं - बस क्रोध भड़क गया। दोष मेरा ही था। अब छोड़ो उन बातों को, साथ में चाय पीते हैं।’’
वह सुनिभा की तरफ देखने लगा। उसने भी मेरी बात पर हामी भर दी - ‘‘हां मासूम, नवदीप ठीक कह रहे। तुम्हारे प्रति मन में कोई द्वेष नहीं। ऐसा करो, लुकमान को भी बुला लो। मैं कप में चाय ढालती हूं।’’
‘‘मेमसाब!’’ मासूम भावुक हो उठा - ‘‘नौकर को कोई इतना प्यार और इज्जत दे सकता क्या ?’’
‘‘फिर नौकर कहा!’’ मैंने उसकी भावना को सर आंखों पर बिठाते हुए कहा - ‘‘इस विपरीत परिस्थिति में मैना के लिए रोज ताजा दूध लाने वाला कोई नौकर हो ही नहीं सकता। तभी तो देखो, दूध पी-पीकर कितनी फुदक-चहक रही मैना।’’ फिर मैंने मैना की नन्ही-नन्ही उंगलियों में अपनी उंगलियों को फंसाते हुए कहा - ‘‘मैना इधर देखो - सलाम करो मासूम अंकल को।’’
मासूम गदगद हो लुकमान को चाय के लिए बुलाकर लाया।
एक-दो दिनों के अन्दर कफ्र्यू में बहुत ढील मिलने लगी। उसका लाभ उठाकर मैंने सुनिभा और मैना के साथ कई मनोवांछित जगहों की सैर की। गुलमर्ग और सोनमर्ग गया। झुले का आनन्द उठाया। सूटिंग प्लेस देखा। उसके आगे बढ़कर आड़ी-तिरछी पहाड़ियों पर बर्फ का धवल साम्राज्य देखा। अगस्त का महीना था। विभिन्न प्रकार के सेवों से लदे बगान को देखा। किसी दिन डल झील की तरफ गया तो उसमें एक छोटे-से टापू पर मनोहारी नेहरू पार्क देखा और उसमें उपस्थित एक बड़े-से टापू पर चार-चिनार को दूर से ही देखा और झील के दूसरे किनारे पर एक-से-एक आवासीय शिकारों का जमघट...। निशान्त गार्डेन एवं शालीमार गार्डेन में विविध फूलों एवं झरने का मुग्ध कर देने वाला दृश्य देखा। चश्माशाही का कलेजे को तर कर देने वाला पानी पिया और विभिन्न प्रकार के गुलाबों की बागवानी को अपनी आंखों में भर लेना चाहा। सब मिला-जुलाकर सचमुच स्वर्ग की झलक देने वाला प्राकृतिक सौंदर्य - साथ में बाग-बगीचे से सजावट का मानवीय प्रयत्न भी। उस क्रम में जब कभी लौटकर होटल आता, मासूम पूछ बैठता - ‘‘सर जी, पहलगाम नहीं जाना क्या?’’ कभी-कभी वह ज्यादा ही बेसब्र हो उठता - ‘‘सर जी, पहलगाम कब जा रहे हैं, किस रोज ?’’
‘‘सुन रहा - वह इलाका काफी उग्र हो उठा है।’’ मैं अपनी बेबसी जाहिर करता - ‘‘वहां जाना ठीक नहीं।’’
‘‘वहीं तो हीरो-हीरोइन सूटिंग करते ज्यादातर।’’ वह उत्प्रेरित करता - ‘‘देखने लायक जगह है वह। वहां चलते आप तो साथ में मैं भी हो लेता।’’
‘‘हां, सो तो है। लेकिन...।’’
‘‘वहां जाने में कोई हर्ज नहीं, सर जी।’’
उसके बार-बार आग्रह करने पर मैंने जानना चाहा कि आखिर वह वहां जाने पर क्यों इतना जोर देता ? इस पर उसके पीछे खड़े लुकमान ने खुलासा किया - ‘‘वहीं तो शेखाना भाभी हैं और उनकी गोद में आपकी मैना जितनी नन्ही-सी बिटिया। साथ में इसकी विधवा मां भी गुजारा करती। बिल्कुल घने जंगल वाली पहाड़ी के पास है इसका घर।’’
‘‘ओ! तभी कहें भला। क्यों मासूम?’’
‘‘हां सर जी, बिटिया को देखने को मन करता।’’
‘‘और शेखाना को?’’
वह मुस्कराकर रह गया। मैंने कहा - ‘‘छुट्टी लेकर घूम क्यों नहीं आते ?’’
‘‘भाड़ा लगेगा न सर जी, मैं ठहरा गरीब आदमी। आपके जैसे लोग कभी गाड़ी से जाते तो उन्हीं के साथ हो आता।’’ 
बिगड़े हालातों के चलते वहां मेरा जाना नहीं हो सका। मासूम कुछ मायूस हो गया। 
अब मेरे लौटने का वक्त था। घाटी में कहीं फिर धमाका हुआ - कई निर्दोषों को बेवजह जान गंवानी पड़ी। शाम को संचार माध्यमों से घोषणा हुई - ‘कल सुबह आठ बजे से कफ्र्यू लग जाएगा।’ मैं कुछ वक्त रहते ही उस दिन जम्मू आने के लिए बस के अग्रिम टिकट ले चुका था। 
होटल से चलने को हुआ तो मासूम की आंखें नम हो आईं। वह मेरे ब्रीफकेस और अटैची को मुख्य सड़क तक पहुंचाने आया। लेकिन सड़क तो वीरान थी बिल्कुल। 
मैंने कहा - ‘‘अभी कफ्र्यू का समय होने में करीब एक घंटा बाकी है।’’
‘‘हां सर जी, लेकिन यहां उससे कुछ देर पहले ही अपने-अपने घरों में बन्द हो जाते लोग।’’
‘‘तो फिर बस कैसे पकड़ सकूंगा मैं ?’’
थोड़ी देर में एक टेम्पू दिखलाई पड़ा। मासूम ने उससे डोगरी भाषा में बात की। तैयार हुआ वह किसी तरह। लेकिन झेलम नदी पर बने पुल के उस पार लाल चैक तक जाने पर किसी भी सूरत में तैयार नहीं हुआ। उसने साफ कह दिया - ‘‘पुलिस वाले पार होने ही नहीं देंगे। उसमें मैं क्या कर सकता?’’
आखिर हुआ वही। पुल के इस किनारे पर ही बाध्य होकर उतरना पड़ा। पुल पर यहां से वहां तक पुलिस वाले भरे हुए थे। मासूम ने सामान उठाया, हमलोग उसके पीछे-पीछे बढ़ने लगे। पुलिस के मना करने पर भी वह बढ़ना चाहा तो एक पुलिस वाले ने उसे दो डंडा जमा दिया। वह सिटपिटाकर सामान छोड़ते हुए पीछे की ओर भागा। मैं अपना सामान उठाकर उदास मन से उसके पास लौटा - ‘‘अब क्या होगा मासूम?’’
‘‘अब तो ये पुल पार करने नहीं देंगे। लेकिन एक प्रयास कीजिए। मैं साथ में नहीं रहूंगा। मुझे कश्मीरी समझकर जाने नहीं देंगे ये सब। आप दोनों साहसपूर्वक साफ-साफ उसके अफसर को बतलाइए कि आप दोनों टूरिस्ट हैं और होटल छोड़कर वापस हो रहे हैं। और हां, मेमसाब को आगे रखिए, बात ये ही करेंगी।’’ 
मासूम का फार्मूला काम आया। एक पुलिस अफसर ने हमारी परेशानी समझते हुए इजाजत दे दी - ‘‘फिर तो जल्दी जाओ, अब समय बहुत कम है।’’
मासूम को मैं वहां से घूमकर पैसा देना चाहता था। लेकिन दूर से ही उसने कहा - ‘‘कोई बात नहीं सर जी, बख्शीश फिर कभी। जिन्दगी रही तो भेंट होगी ही होगी। दौड़कर जल्दी जाइए। मुझ गरीब के लिए खुदा से दुआ कीजिएगा।’’
मैना को सुनिभा ने सम्भाला, पूरे सामानों को मैंने। पुल पर दौड़ते हुए दिल धव्फ-धव्फ कर रहा था, कहीं बस छूट न जाए। पास में अब पैसे भी तो वापसी भर ही बच पाए थे। पुल के दूसरे किनारे पर पहुंचने पर एक पुलिस वाले ने लाल चैक पहुंचने के लिए एक नजदीक एवं सुविधाजनक गली की ओर इशारा करते हुए प्रोत्साहित किया - ‘‘इधर से जल्दी पहुंच जाओगे। घबड़ाने की कोई बात नहीं। अभी समय बाकी है।’’
वहां से लौटकर आने के बाद मासूम की एक-दो चिट्ठियां आईं। उसके बाद आनी बन्द हो गईं। आज बहुत दिनों बाद उसके दोस्त लुकमान की अचानक आई चिट्ठी ने मुझे अन्दर तक हिलाकर रख दिया है। इमाम नेहाल रब्बानी ने उसकी चिट्ठी को पढ़कर आगे सुनाया - ‘‘अपनी पत्नी के गर्भवती होने की खबर पाकर जब मासूम अपने गांव गया तो वहां का नजारा जी को दहला देने वाला था। आतंकवादी जबरन उसके घर में डेरा जमा चुके थे। वे रोज उसकी मां एवं पत्नी के साथ कई बार बलात्कार किया करते। वे किसी तरह वहां से भागना चाहतीं या मरना चाहतीं। मगर निरुपाय एवं निःसहाय होकर रह जाना पड़ता। मासूम वह सब देखकर बौखला उठा। वह जान की परवाह किए बिना उन सबों से भिड़ गया। फिर क्या था? एक आतंकवादी ने क्रोध में पागल होकर उसको तथा उसके पूरे परिवार को गोलियों से भून डाला। संयोगवश उसकी नन्ही-सी बिटिया गम्भीर रूप से जख्मी होकर रह गई, जो फिलहाल सरकारी अस्पताल में जीवन-मृत्यु के बीच जूझ रही।’’
आज कई बरस बाद यह कहानी लिखने बैठा हूं मैं। मेरी मैना अब बड़ी हो रही, किन्तु उसकी मैना? यदि जिन्दा बची भी होगी तो किस हाल में होगी? जमाने की बेदर्दी के बारे में सोचकर सिहर उठता मैं। जवान बेटियों का कोई अपना न हो तो यह भरा-पूरा समाज भी भूखे भेड़ियों के खौफनाक जंगल-सा लगता। उससे करीब डेढ़ हजार किमी की दूरी पर रहते हुए मैं उसके दुःखों की कल्पना से संवेदनशील हो सकता - तड़फड़ा सकता जो कि मैं कर रहा। किन्तु यदि अति उत्साह में उसकी खोज-खबर लेने पहुंचूं तो बारूद के ढेर पर खड़े कश्मीर से जिन्दा लौट आने की कोई गारंटी नहीं। क्योंकि देशी-विदेशी पर्यटकों एवं अनजान बाहरी लोगों को तो आतंकवादी आराम से गोलियों से छलनी कर कहीं न कहीं घाटी में लावारिस की तरह सड़ने के लिए फेंक देते। खैर, मैंने लुकमान की चिट्ठी के बाद कई चिट्ठियां उसके होटल के पते पर भेजीं और उसकी चिट्ठी का इन्तजार करता रहा। समय बीतता रहा - बहुत बीत चुका। मगर उसकी वह चिट्ठी पहली और अन्तिम चिट्ठी साबित हुई। 
शायद वह मासूम की घटना के कुछ दिनों बाद वहां से हट गया होगा या हटा दिया गया होगा, शायद उसकी बेटी की उसने जिम्मेवारी ले ली होगी और अन्यत्र रहने के लिए चला गया होगा। या शायद किसी दिन आतंकवादियों के हत्थे चढ़ गया होगा। उन सबों से इतनी दूर बैठा मैं ‘शायद’ से उनकी संवेदना और दुःखों को महसूस करना चाहता। किन्तु क्या उनके जैसे नौकर-चाकरों की वहां भी किसी को परवाह होगी? मुझे क्या पता ? सुन्दर-सुन्दर बाग-बगीचों, झील-झरनों, मनमोहक जंगल-पहाड़ों से सजा हुआ जमीन का वह टुकड़ा स्वर्ग से भला कम सुन्दर कैसे ? लेकिन जहां लोगों की संवेदना इतनी तेजी से मरती जा रही, वहां प्राकृतिक सौंदर्य और मासूमियत से किसी को क्या लेना-देना! वह शहर तो अब सिर्फ गोलियों की भाषा समझता और कफ्र्यू का अनुशासन। वैसे में अक्सर मासूम खान की आकृति मेरे दिमाग में सवाल बनकर खड़ी हो जाया करती - ‘मेरी मैना का क्या हुआ सर जी?’ मैं बेचैन हो उठता। सुनिभा मेरी बेचैनी को समझती। मुझे दिलासा देती - ‘‘आज पूरी दुनिया में बेटियों के साथ क्या हो रहा - यह किसे मालूम नहीं ? तुम्हारी संवेदना तुम्हारे जिन्दा होने का सबूत है। इतना ही कम नहीं।’’
किन्तु फिर भी मेरी बेचैनी कम नहीं होती। स्वर्ग का कफ्र्यू मुझे चैन से रहने जो नहीं देता। 
 परिचय : डाॅ. लालजी प्रसाद सिंह महंत हनुमान शरण काॅलेज, मैनपुरा, पटना में राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष एवं बीआईटीएनए, पटना के प्रवक्ता हैं। आप लालजी साहित्य प्रकाशन के मालिक हैं। आपकी दर्जनों कहानी-संग्रह, कविता-संग्रह, उपन्यास, यात्रा-संस्मरण व बाल कहानी लालजी साहित्य प्रकाशन से प्रकाशित हो चुकी हैं। आप पुस्तक मेला के अलावा अपनी भी पुस्तक प्रदर्शनी गांव देहातों में लगाते रहे हैं।