COPYRIGHT © RAJIV MANI, Journalist, Patna

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सोमवार, 21 अगस्त 2017

पत्रकार साहब

Poonam Tan
 कहानी / पूनम टांक 
सुधा अपने कमरे में बिस्तर पर औंधी पड़ी एक पत्रिका के पन्ने पलट रही थी। उसके बालों की एक लट लगातार उसके सुर्ख गालों से खेल रही थी। रेडियो पर पुराना गाना बज रहा था। सुधा पत्रिका देखने के साथ ही गीत भी गुनगुना रही थी ... ‘कहीं किसी रोज यूं भी होता हमारी हालत तुम्हारी होती, जो रात हमने गुजारी मरके वो रात तुमने गुजारी होती।
अचानक ही सुधा बोल उठी, वाह! आज भी विविध भारती पर कितने अच्छे गाने आते हंै, जो सीधे मन पर असर करते हैं। वास्तव में किसी की भी मनःस्थिति को समझना कितना मुश्किल है। या यों कह लें कि वर्तमान में मनुष्य सिर्फ अपने दुःख में दुखी और सुख में सुखी रहना चाहता है, उसे किसी और की दुःख परेशानियों से कोई सरोकार ही कहां है। 
सुधा मन ही मन यही सब सोचते हुये पत्रिका देख रही थी, तभी उसकी नज़र शेखर की तस्वीर पर पड़ी। शेखर को देखते ही सुधा के चेहरे पर एक ही पल में अनगिनत भाव मंडराने लगें। शेखर जो सुधा के बहुत अच्छे मित्र हैं, अब शेखर के मन की तो वही जाने, किन्तु सुधा तो हमेशा से ही उन्हें अपना मित्र हो मानती आयी है।
सुधा और शेखर की जान पहचान भी बडे़ अजीब ढंग से हुई थी। उस दिन भी जब सुधा ने अपना लैपटाॅप आॅन किया, तो उसमें कुछ नोटिफिकेशन और फे्रंडरिक्वेस्ट पड़ी थीं। सुधा ने जब चेक किया, तो उसमें एक नाम ऐसा था, जिससे वह खुद तो परिचित ना थी, लेकिन उसके कुछ घनिष्ठ लोग थें, जो उस नाम से जुड़े थे। उसने उत्सुकतावश उस व्यक्ति की प्रोफाइल चेक की। उसका नाम शेखर कपूर था, जो एक जाने-माने अखबार में सब एडिटर थे। सुधा ने रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर ली। कुछ दिनों के बाद सुधा के मैसेंजर पर पत्रकार साहब का एक संदेश आया, जो कि परिचय जानने के उद्देश्य से किया गया था। सुधा ने बिना कुछ सोच-विचार के अपना पूर्ण परिचय उन्हें दे दिया। बस यहीं से उनकी वार्तालाप शुरू हो गयी। 
शुरू में तो शेखर रोज सिर्फ गुडमार्निंग और गुड़ नाइट का मैसेज करते थे और सुधा मुस्करा कर उसका जवाब दे देती थी, परन्तु धीरे-धीरे कब शेखर उसके अन्तर्मन में प्रवेश कर गये, उसे पता ही ना चला। अब तो उसकी पूरी दुनिया ही शेखर बन गये। शेखर की व्यस्तता के बारे में सुधा बखूबी जानती थी, परन्तु फिर भी उनके मैसेज का इन्तजार करती रहती। शेखर सुधा से न तो कभी मिले थे और ना ही फोन से बात हुयी थी, बस आॅनलाइन चैटिंग ही हो जाती थी। 
एकबार तो इन्तजार इतना लम्बा हो गया कि सुधा का दिन-रात काटना मुश्किल हो गया। करीब एक महीने के बाद शेखर ने मैसेज किया ... ‘‘सुधा कैसी हो?’’
सुधा का तो सब्र का बांध टूट पड़ा, वह फूट-फूट कर रोने लगी। न जाने शेखर से यह कैसा जुड़ाव था, जिसे सुधा ना तो खुद समझ पा रही थी और न ही उन्हें समझा पा रही थी। उस दिन तो शेखर भी बहुत घबरा गये थे। सुधा ने बहुत देर बाद खुद को सम्भालते हुये कहा - ‘‘देखिये पत्रकार साहब, मुझे आपसे कुछ नहीं चाहिए, बस आप सही सलामत हैं, ये मैसेज मुझे रोज करते रहिये।’’
‘‘जैसा आप कहें मैम।’’
फिर उन्होंने माहौल को थोड़ा हल्का बनाने के लिए हंसते हुये कहा ... ‘‘अरे भाई हम पत्रकार लोगों के विषय में जानकर क्या करियेगा, हमारी अपनी तो कोई जिन्दगी होती ही नहीं, बस समाज सेवा ही हमारा मूल कर्तव्य है, आज यहां तो कल वहां, हमसे दिल लगाकर कुछ हासिल न होगा।’’
सुधा खामोश हो गयी। शेखर थोड़ी देर बार फिर बोले ... ‘‘सुधी कहीं सच में तो हमसे दिल नहीं लगा बैठी ना?’’
सुधा हंसते हुये बोली ... ‘‘पत्रकार साहब, अभी हमारे इतने भी बुरे दिन नहीं आये हैं।’’ ... और दोनों हंसने लगंे। लेकिन सच्चाई तो यही थी कि अब शेखर सुधा की आदत बन चुके थे।
एकबार अचानक ही शेखर को किसी बडे़ प्रोजेक्ट के सिलसिलें मे बाहर जाना था। उन्होनंे उस दिन पहली बार सुधा को फोन किया। फोन बहुत जल्दबाजी में किया गया था। वे हड़बड़ाते से बोले - ‘‘हेलो सुधा, मुझे कुछ दिनों के लिए बाहर जाना है, इसलिए अब बात ना हो पायेगी, और बिना सुधा की बात सुने उन्होंने फोन काट दिया।’’
बस उस दिन से सुधा इंतजार करने लगी, कब दिन महीनों में और महीने सालों में बदल गये, पता ही ना चला। सुधा की शादी अमृत से हो गयी। शेखर अब बस उसकी यादों में ही थे, जिसका वास्तविकता से दूर-दूर तक कोई लेना देना ना था।
सुधा अपने वैवाहिक जीवन में बहुत खुश थी, लेकिन उसके अन्तर्मन में कुछ दबा था, जिसे वह किसी के भी साथ सांझा न कर सकी। अचानक मिनी दौड़ती हुयी आयी और सुधा को झंझोड़ते हुये बोली - ‘‘मम्मा, आज आप मुझे स्कूल से लेने क्यूं नहीं आयीं?’’ 
तब सुधा की नींद टूटी व मिनी को बहलाते हुये हकलाकर बोली, ‘‘ओ ओ साॅरी बेटा, आज काम करते-करते देर हो गयी’’।
मिनी ने पत्रिका के खुले पन्ने पर छपी तस्वीर को देखते हुये पूछा - ‘‘मम्मा, ये अंकल कौन हैं? जिन्हें गिफ्ट मिल रहा है’’। 
‘‘बेटा ये कपूर अंकल हैं और उन्हें गिफ्ट नहीं पुरस्कार मिल रहा है’’।
पत्रकारों को बस अपने काम के अलावा कुछ याद ही कहां होता है, वे तो वहीं रूक गये, लेकिन वक्त कहां रूका, वह तो आगे बहुत आगे निकल गया। शेखर का प्रोजेक्ट तो पूरा हो गया, किन्तु सुधा के अन्दर अभी भी कुछ अधूरा-सा रह गया जो कभी पूरा नहीं हो सकता।
सुधा अपने में ही बोले जा रही थी और मिनी कब की खेलने चली गयी थी। 
पूनम टांक इलाहाबाद की रहने वाली हैं और इनकी कहानियां विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी है।
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बुधवार, 26 जुलाई 2017

राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद का प्रोफाइल

सार्वजनिक जीवन और समाज में समतावाद तथा अखण्डता के पैरोकार रहे वकील, दिग्गज राजनीतिक प्रतिनिधि श्री रामनाथ कोविंद का जन्म 01 अक्टूबर, 1945 को उत्तर प्रदेश में कानपुर के निकट परौंख में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री मैकूलाल और माता का नाम श्रीमती कलावती था।
25 जुलाई, 2017 को भारत के 14वें राष्ट्रपति का कार्यभार ग्रहण करने से पहले श्री कोविंद ने 16 अगस्त, 2015 से 20 जून, 2017 तक बिहार के 36वें राज्यपाल के रूप में अपनी सेवा दी ।
शैक्षिक योग्यता और व्यावसायिक पृष्ठभूमि : श्री कोविंद ने अपनी स्कूली शिक्षा कानपुर में ग्रहण की और कानपुर विश्वविद्यालय से बी.कॉम तथा एलएलबी की डिग्री हासिल की। 1971 में उन्होंने दिल्ली बार काउंसिल के साथ एक वकील के रूप में नामांकन किया। श्री कोविंद 1977 से लेकर 1979 तक दिल्ली उच्च न्यायालय में केन्द्र सरकार के वकील रहे तथा 1980 से 1993 तक उच्चतम न्यायालय में केन्द्र सरकार के वकील रहे। 1978 में वे उच्चतम न्यायालय के ‘एडवोकेट-ऑन-रिकार्ड’ बने। 1993 तक उन्होंने कुल 16 साल तक दिल्ली उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में वकालत की।
संसदीय और सार्वजनिक जीवन : श्री कोविंद को अप्रैल, 1994 में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा का सदस्य चुना गया। उन्होंने लगातार दो बार राज्यसभा के सदस्य के रूप में मार्च, 2006 तक कार्य किया। श्री कोविंद ने विभिन्न संसदीय समितियों जैसे अनुसूचित जाति / जनजाति कल्याण संबंधी संसदीय समिति, गृह मामलों की संसदीय समिति, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस पर संसदीय समिति, सामाजिक न्याय और अधिकारिता संबंधी संसदीय समिति और कानून और न्याय संबंधी संसदीय समितियों में सेवा की। वह राज्यसभा हाउस कमेटी के चेयरमैन भी रहे। श्री कोविंद बी.आर. अम्बेडकर विश्वविद्यालय के प्रबंधन बोर्ड के सदस्य तथा भारतीय प्रबंधन संस्थान कोलकाता के बोर्ड ऑफ गवर्नस के सदस्य भी रहे। वह संयुक्त राष्ट्र में गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य भी रहे और अक्टूबर, 2002 में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया।
इन पदों पर किया कार्य :
2015-17 : बिहार के राज्यपाल
1994-2006 : उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य
1971-75 और 1981 : महासचिव, अखिल भारतीय कोली समाज
1977-79 : दिल्ली उच्च न्यायालय में केंद्र सरकार के वकील
1982-84 : सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के अधिवक्ता।
व्यक्तिगत विवरण : श्री कोविंद का विवाह 30 मई, 1974 को श्रीमती सविता कोविंद से हुई। श्री कोविंद के पुत्र का नाम प्रशांत कुमार और पुत्री का नाम सुश्री स्वाति है। पढ़ने-लिखने के शौकिन राष्ट्रपति कोविंद को राजनीतिक और सामाजिक परिवर्तनों, कानून और इतिहास तथा धर्म संबंधी किताबें पढ़ने में गहरी दिलचस्पी है। अपने लम्बे सार्वजनिक जीवन के दौरान श्री कोविंद ने कई देशों की यात्रा की है। संसद सदस्य के रूप में उन्होंने थाईलैंड, नेपाल, पाकिस्तान, सिंगापुर, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, फ्रांस, ब्रिटेन और संयुक्त राज्य अमेरिका का दौरा भी किया है।
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22 राज्यों में चुंगी (चेक पोस्ट) समाप्त

 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) 1 जुलाई, 2017 से लागू किया गया है। इसके लागू होते ही भारत में 22 राज्यों के सभी चुंगी (चेक पोस्ट) समाप्त कर दिये गये हैं।
विवरण इस प्रकार हैं : आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, गुजरात, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, सिक्किम, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गोवा, हरियाणा, झारखंड, ओडिशा, पुडुचेरी, राजस्थान, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड।
राज्य जहां चुंगियों (चेक पोस्ट) को समाप्त करने की प्रक्रिया जारी है : असम, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, नागालैंड, पंजाब, मिजोरम, त्रिपुरा।

जेल बंदियों के लिए वेब एप्लीकेशन लांच 

नई दिल्ली : राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) को जेल में कैद बंदियों को कानूनी सहायता प्रदान करने की जिम्मेदारी दी गई है। 28 जून, 2017 को भारतीय विधि संस्थान में आयोजित सम्मेलन में एनएएलएसए ने जेल बंदियों को निःशुल्क कानूनी सेवाएं देने के लिए वेब एप्लीकेशन लांच और एनआईसी के माध्यम से विकसित कानूनी सेवा प्रबंधन प्रणाली लांच किया। वेब एप्लीकेशन के माध्यम से राज्य कानूनी सेवा प्राधिकार तथा जिला कानूनी सेवा प्राधिकार अपने / अपने क्षेत्राधिकार के जेलों में प्रत्येक बंदी के लिए डाटा भरेंगे, ताकि अदालत में वकील के जरिये उनका प्रतिनिधित्व किया जा सके। यह साफ्टवेयर अपनी रिपोर्ट में कैदियों की कुल संख्या, बिना वकील वाले कैदियों की कुल संख्या, कानूनी सेवा अधिवक्ताओं द्वारा प्रतिनिधित्व किए गए बंदियों की संख्या और अपने निजी वकीलों द्वारा प्रतिनिधित्व कैदियों की संख्या का पता लग जायेगा।
सभी सूचनाएं राज्यवार, जिलेवार, और प्रत्येक जेल के संबंध में उपलब्ध होंगी। रिपोर्ट में कैदी के बंद रहने की अवधि की जानकारी मिलेगी और इससे यह सूचना प्राप्त होगी कि अपराध प्रक्रिया संहिता के सेक्शन 436 (ए) के तहत बंदी जमानत का पात्र है या नहीं। यह वेब एप्लीकेशन कानूनी सेवा प्रणाली को और पारदर्शी बनाएगा और कहीं से भी सभी सक्षम पदाधिकारी कैदियों को दी जाने वाली कानूनी सहायता की अनुमति पर नजर रख सकेंगे, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि अदालत में पेशी के पहले दिन से सभी बंदियों का प्रतिनिधित्व प्राप्त है।
वेब एप्लीकेशन उच्चतम न्यायलय के न्यायाधीश और एनएएलएसए के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा ने लांच किया। इस अवसर पर 18 राज्यों के कानूनी सेवा प्राधिकार के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ सदस्य सचिव शामिल हुए। वेब एप्लीकेशन लांच होने के बाद एनआईसीपीटी ने ओरियेंटेशन सत्र का आयोजन किया।
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गुरुवार, 29 जून 2017

बिहार लीची उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य

  • बिहार में 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल से लगभग 300 हजार मीट्रिक टन लीची का उत्पादन
  • भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र एवं राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र के वैज्ञानिकों ने लीची को उपचारित कर तथा कम तापमान पर 60 दिनों तक भंडारित कर रखने में सफलता पायी
नई दिल्ली : केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि केन्द्र सरकार का मुख्य उद्देश्य लीची के विकास एवं उत्पादन बढ़ाने के लिए शोध करके नई-नई किस्मों एवं तकनीकों का विकास करना तथा लीची संबंधी जानकारी को प्रसार विभाग को उपलब्ध कराना है। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने यह बात मुसाहारी, मुजफ्फरपुर, बिहार में लीची प्रसंस्करण संयंत्र के उद्घाटन और सह प्रशिक्षण के अवसर पर कही।
राधा मोहन सिंह ने कहा कि बिहार लीची उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य है। अभी बिहार में 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल से लगभग 300 हजार मीट्रिक टन लीची का उत्पादन हो रहा है। बिहार का देश के लीची के क्षेत्रफल एवं उत्पादन में लगभग 40 प्रतिशत का योगदान है। लीची के महत्व को देखते हुए 6 जून, 2001 को यहां राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र की स्थापना की गयी।
श्री सिंह ने कहा कि बिहार के कुल क्षेत्रफल एवं उत्पादन में मुजफ्फरपुर जिले का योगदान बहुत अच्छा है, परन्तु लीची उत्पादकता जो अभी लगभग 8.0 टन की है, उसे बढ़ाने की जरूरत है। इस दिशा में सभी सरकारी संस्थानों, सहकारी समितियों एवं किसानों को आगे आना होगा। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि यह खुशी की बात है कि भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र एवं राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र के वैज्ञानिकों ने लीची फल को उपचारित करके तथा कम तापमान पर 60 दिनों तक भंडारित करके रखने में सफलता पायी हैं। इसका एक प्रसंस्करण संयंत्र भी विकसित किया गया है। श्री सिंह ने कहा कि यह तकनीक निश्चित रूप से लीची उत्पादकों एवं व्यापारियों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी। श्री सिंह ने कहा कि इस तकनीक को प्रभावशाली बनाने के लिए उत्पादकों को अच्छी गुणवत्ता के फल का उत्पादन करना होगा, जिसके लिए राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र, मुजफ्फरपुर ने अनेक तकनीकों का विकास किया है। राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र, मुजफ्फरपुर प्रत्येक वर्ष लगभग 35-40 हजार पौधे देश के विभिन्न संस्थानों व राज्यों को उपलब्ध करा रहा है। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र, आईसीएआर के अन्य संस्थानों तथा राज्यों के कृषि विश्वविद्यालयों एवं केन्द्र तथा राज्य सरकारों के विकास प्रतिष्ठानों जैसे - राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड, एपीडा, राष्ट्रीय बागवानी मिशन आदि के साथ मिलकर कार्य कर रहा है।
श्री सिंह ने कहा कि हमारे वैज्ञानिक दिन-रात मेहनत करके उन्नत किस्मों और कृषि क्रियाओं का विकास कर रहे हैं, जिसे राज्य सरकार एवं कृषि विज्ञान केन्द्रों और अन्य संस्थाओं द्वारा आम जनता तक पहुंचाने की जरूरत है। अपने सीमित संसाधनों के माध्यम से केन्द्र ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् की फाॅरमर्स फस्र्ट परियोजना का क्रियान्वयन पूर्वी चंपारण जिले में किया है, जिसमें 8 गांव (मेहसी प्रखंड - उझिलपुर, बखरी नजिर, दामोदरपुर गांव, चकिया प्रखंड - खैरवा, रामगढ़वा, विषनुपरा ओझा टोला - वैशहा एवं चिंतमानपुर - मलाही टोला गांव) के 1,000 किसान परिवार अनेक तकनीकों का लाभ ले रहे हैं। परिषद की यह एक अनोखी पहल है, जिसमें किसानों द्वारा ही उन्नत तकनीक का परीक्षण किया जा रहा है। इसे और अधिक लोगों तक पहुंचाने की जरूरत है। ‘मेरा गांव-मेरा गौरव’ कार्यक्रम के माध्यम से भी वैज्ञानिक अपनी तकनीकों को कुछ गांवों तक पहुंचाने में सफल रहे हैं। केन्द्र ने सायल हेल्थ कार्ड की योजना भी शुरू की है, जिसके माध्यम से किसानों के बागों का परीक्षण करके उन्हें उचित सलाह दी जा रही है। बिहार ही नहीं, देश के कई क्षेत्र हैं जहां लीची की सफल बागवानी हो सकती है। अतः इन क्षेत्रों में भी शोध को बढ़ावा देने की जरूरत है। श्री सिंह ने इस अवसर पर सभी वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों को बधाई दी और उम्मीद जताई कि इस संयंत्र का भरपूर उपयोग करके बिहार एवं देश के लीची किसानों, उत्पादकों एवं व्यापारियों को आमदनी बढ़ाने में मदद की जा सकेगी।
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भारत दुग्ध उत्पादन में प्रथम

  • राष्ट्रीय गोकुल मिशन की तरह ‘गिर गाय अभ्यारण्य’ को मंजूरी
  • सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने को प्रतिबद्ध
नई दिल्ली : केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि भारत सरकार द्वारा पशुपालन के क्षेत्र में गुजरात में अनेक नई पहल की गई हैं। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत गोकुल ग्राम की तर्ज पर ‘गिर गाय अभ्यारण्य’  स्थापित करने की मंजूरी दी गई है। यह धर्मपुर, पोरबंदर में स्थापित किया जाएगा। पशुधन बीमा कवरेज में जहां पहले 2 दुधारू पशुओं को शामिल किया गया था, वहीं अब इसमें 5 दुधारू पशुओं और 50 छोटे जानवरों को शामिल किया गया है। यह योजना राज्य के सभी जिलों में लागू कर दी गई है, जबकि इससे पहले इसमें 15 जिले ही शामिल थे। वर्ष 2014-16 के दौरान राज्य में लगभग 26,000 पशुओं का बीमा किया गया। पशु-चिकित्सा शिक्षा में चिकित्सकों की कमी को पूरा करने के लिए जूनागढ़ में एक कॉलेज स्थापित किया गया है। कृषि मंत्री ने यह बात कामधेनु विश्वविद्यालय, साबरकांठा, गुजरात में पॉली-टेक्नीक के उद्घाटन के अवसर पर कही।
कृषि मंत्री ने कहा कि यह बड़े गर्व का विषय है कि देश दुग्ध उत्पादन में प्रथम स्थान पर है। वर्ष 2015-16 में दुग्ध उत्पादन की वृद्धि दर 6.28 प्रतिशत रही है, जिससे कुल उत्पादन 156 मिलियन टन तक पहुंच गया है। इससे भारत में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता औसतन 337 ग्राम प्रतिदिन हो गई है, जबकि विश्वस्तर पर यह औसतन 229 ग्राम ही है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2011-14 के मुकाबले वर्ष 2014-17 में दुग्ध उत्पादन वृद्धि 16.9 प्रतिशत हुई है।
उन्होंने कहा कि ज्यों-ज्यों शहरी एवं ग्रामीण परिवारों का जीवन स्तर बढ़ता जा रहा है, त्यों-त्यों पशुजन्य प्रोटीन की मांग भी बढ़ती जा रही है। इसलिए यह आवश्यक है कि हम पशुधन, मुर्गी एवं मछली उत्पादन की निरन्तर वृद्धि की ओर प्रयत्नशील हों, जिससे देश का प्रत्येक नागरिक सुपोषित और स्वस्थ रहे। इसलिए पशु-चिकित्सकों का यह कर्तव्य है कि वे पशुजन्य प्रोटीन की उपलब्धता को अधिकाधिक बढ़ाकर देश को स्वस्थ बनाने में योगदान दें।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसलिए किसानों की आय को दोगुना करने के भारत सरकार के संकल्प में पशु-चिकित्सा क्षेत्र की महती भूमिका है। पशु स्वस्थ रहेगा, तो उसकी उत्पादकता बढ़ेगी, जिससे स्वतः ही किसान की आय बढ़ेगी और राष्ट्र आर्थिक खुशहाली के मार्ग पर आगे बढ़ेगा।
कृषि मंत्री ने कहा कि भारत में पशुधन की संख्या विश्व में सबसे ज्यादा 512.05 मिलियन है, जिसमें 199.1 मिलियन गोपशु, 105.3 मिलियन भैंस, 71.6 मिलियन भेड़ और 140.5 मिलियन बकरी हैं। बकरियों की संख्या के मामले में भारत का विश्व में दूसरा स्थान है और भारत की पशु संख्या में इसकी लगभग 25 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। भारतीय पोल्ट्री इंडस्ट्री भी विश्व के दूसरे सबसे बड़े बाजार के रूप में उभर रही है, जिसमें 63 बिलियन अण्डा और 649 मिलियन पोल्ट्री मीट उत्पादन शामिल है। भारत की समुद्रीय एवं फिश इंडस्ट्री लगभग 7 प्रतिशत की यौगिक वार्षिक वृद्धि दर के साथ आगे बढ़ रही है। कुल मिलाकर, भारतीय पशुधन सेक्टर तेज गति से आगे बढ़ रहा है और ग्लोबल बाजार में एक प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में उभर रहा है।
कृषि मंत्री ने कहा कि भारत सरकार का विशेष जोर है कि विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों में शिक्षा की गुणवत्ता अंतर्राष्ट्रीय स्तर की हो। इस दिशा में आईसीएआर की पांचवीं डीन समिति की रिपोर्ट को अनुमोदित कर दिया गया है। स्टूडेन्ट और आर्या जैसी योजनाएं स्कॉलरशिप के साथ प्रारंभ की गई है। छात्रों की स्कॉलरशिप को भी बढ़ाया गया है। उन्होंने आखिर में कहा कि राष्ट्र की समृद्धि के लिए देश की कृषि की प्रगति और किसान को खुशहाल बनाने के लिए एकसाथ मिलकर प्रयास करने की जरूरत है। कृषि आगे बढ़ेगी, किसान खुशहाल होगा, तो निश्चित रूप से राष्ट्र आगे बढ़ेगा।
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पद्म पुरस्कार के नामांकन की आखिरी तिथि 15 सितंबर

 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : पद्म पुरस्कार 2018 के लिए नामांकन की प्रक्रिया 1 मई, 2017 से शुरू है। पद्म पुरस्कार 2018 के लिए नामांकन प्राप्त करने की अंतिम तिथि 15 सितंबर, 2017 है। पद्म पुरस्कार के लिए नामांकन / सिफारिशें केवल गृह मंत्रालय द्वारा डिजाइन किए गए पद्म पोर्टल पर, जो www.padmaawards.gov.in पर उपलब्ध हैं, ऑनलाइन ही प्राप्त की जायेंगी। पद्म पोर्टल पर सभी पिछले पुरस्कार विजेताओं का विवरण भी उपलब्ध है। 15 सितंबर, 2017 के बाद प्राप्त नामांकनों पर विचार नहीं किया जाएगा। 

स्वीडन ने स्मार्ट सिटी के विकास में रुचि दिखायी

नई दिल्ली : देश में स्मार्ट सिटी के विकास की पहल में अपनी दिलचस्पी व्यक्त करते हुए स्वीडन ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के अतिरिक्त सतत व हरित सार्वजनिक परिवहन को प्रोत्साहित करने के लिए अपनी विशेषज्ञता और तकनीक को अमल में लाने के लिए एक संयुक्त कार्य योजना का सुझाव दिया है।
स्वीडन की यूरोपीय मामले एवं व्यापार मंत्री एन लिंडे ने शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू से भेंट की और स्मार्ट सिटी के विकास संबंधी मुद्दों को लेकर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 में भारत और स्वीडन ने सतत शहरी विकास के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे और स्मार्ट सिटी अभियान ने इस समझौता ज्ञापन को एक मूर्तरूप देने के लिए एक अवसर प्रदान किया है।
नई दिल्ली में स्वीडन की मंत्री ने कहा कि अपशिष्ट प्रबंधन, शहरी परिवहन समाधान, वायु को स्वच्छ करने, स्मार्ट पार्किंग प्रणाली, वास्तविक समय सूचना प्रणाली, कमांड एवं कंट्रोल सिस्टम इत्यादि के क्षेत्र में उनका देश वैश्विक नेता है। ये क्षेत्र भारत की स्मार्ट सिटी परियोजना का अभिन्न अंग हैं। इसके बाद उन्होंने कहा कि स्वीडन की कंपनी स्कैनिया जल्द ही नागपुर में 55 इथोनॉल बसों का परिचालन शुरू करेगी।
श्री नायडू ने इस बात को रेखांकित करते हुए कि स्मार्ट सिटी अभियान से भारतीय और विदेशी दोनों कंपनियों के लिए निवेश के अत्यधिक अवसर पैदा होंगे, कहा कि चयनित स्मार्ट सिटीज के लिए स्वीडन की तकनीक से लाभान्वित होना बहुत अच्छा होगा, खासतौर पर सार्वजनिक परिवहन और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में। उन्होंने स्वीडन की मंत्री को सुझाव दिया कि वह स्वीडन की कंपनियों को संबंधित शहरों में स्मार्ट सिटी योजना के कार्यान्वयन में भागीदारी के लिए साथ आने की सलाह दें।
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केशरी नाथ बने बिहार के राज्यपाल

पटना : भारतीय स्वतंत्रता-प्राप्ति के पश्चात् बिहार के 37वें महामहिम राज्यपाल के रूप में केशरी नाथ त्रिपाठी ने शपथ ली। इसके पूर्व भी पश्चिम बंगाल राज्य के राज्यपाल श्री त्रिपाठी ने बिहार के राज्यपाल के कृत्यों के निर्वहन हेतु शपथ ली थी और इनका कार्यकाल 27 नवम्बर, 2014 से प्रारंभ होकर 15 अगस्त, 2015 तक रहा था।
राज्यपाल ने हिन्दी भाषा में शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव, बिहार विधान सभा के अध्यक्ष विजय कुमार चैधरी, बिहार विधान परिषद् के उप-सभापति हारूण रषीद, बिहार विधान परिषद् मंे नेता-प्रतिपक्ष, बिहार विधान सभा में नेता-प्रतिपक्ष, बिहार सरकार के कई मंत्रीगण, न्यायाधीषगण, बिहार विधानमंडल के कई सदस्यगण, विभिन्न आयोगांे, समितियांे, बोर्डों, निगमों, प्राधिकारों आदि के अध्यक्ष/उपाध्यक्ष, राज्य सरकार के वरीय प्रशासनिक अधिकारीगण, विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक दलों के प्रतिनिधिगण एवं अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।
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1 जुलाई से जीएसटी लागू

 संक्षिप्त खबरें 
जम्मू कश्मीर को छोड़ सभी राज्यों व संघ शासित प्रदेशों ने राज्य जीएसटी अधिनियम को मंजूरी दी
नई दिल्ली : जम्मू कश्मीर को छोड़कर सभी राज्यों/संघ शासित प्रदेशों ने राज्य वस्तु और सेवा कर (एसजीएसटी) अधिनियम को मंजूरी दे दी है। केरल ने जीएसटी अधिनियम को मंजूरी देते हुए एक अध्यादेश जारी किया, जबकि पश्चिम बंगाल इस संबंध में 15 जून, 2017 को एक अध्यादेश जारी कर चुका है। अब केवल जम्मू कश्मीर राज्य बचा है, जिसे राज्य जीएसटी अधिनियम को पारित करना है। अतः 30 राज्यों/संघ शासित प्रदेशों सहित लगभग समूचा देश 1 जुलाई, 2017 से सुचारू तरीके से जीएसटी लागू करने के लिए तैयार है।
जीएसटी लागू होने के बाद आम आदमी के दैनिक उपयोग वाली उपभोक्ता वस्तुएं सस्ती हो जाएंगी। जीएसटी कानून के प्रभावी हो जाने के बाद निम्नलिखित वस्तुओं पर जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) शून्य दर के साथ लागू होगा। 
निम्नलिखित वस्तुएं आम आदमी को सस्ती मिलेंगी :
  • खाद्यान्न एवं आटा
  • मोटे अनाज
  • दालें
  • आटा
  • मैदा
  • बेसन

पंजीकृत ट्रेडमार्क वाली वस्तुओं को छोड़कर जिनके मामले में जीएसटी 5 फीसदी की दर से लगेगा।
  • ताजा दूध
  • ताजा सब्जियां एवं ताजे फल
  • मुरमुरा (मूरी)
  • सामान्य नमक
  • पशु चारा
  • कार्बनिक खाद
  • जलावन लकड़ी
  • कच्चा रेशम, कच्चा ऊन, जूट
  • हस्त संचालित कृषि उपकरण।

पटना सहित 30 और शहर स्मार्ट सिटी घोषित

नई दिल्ली : केन्द्र सरकार ने स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किए जाने के लिए 30 और शहरों का चयन किया है। इन्हें मिलाकर 25 जून, 2015 को घोषित स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत शहरों की कुल संख्या 90 हो गई है।
नए शहरों के नामों की घोषणा शहरी रूपांतरण के बारे में आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यशाला में आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने की। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत अभी 40 शहर और शामिल किए जाने थे, जिनके लिए 45 शहरों से प्रस्ताव प्राप्त हुए, लेकिन केवल 30 का चयन किया गया, क्योंकि इस मिशन की घोषणा करते समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने निर्देश दिया था कि नागरिकों की आकांक्षाओं के अनुरूप सुविधाएं जुटाने के लिए यह सुनिश्चित किया जायेगा कि केवल व्यवहार्य और साध्य योजनाएं इसमें शामिल की जाएं।
श्री नायडू ने बताया कि घोषित 30 शहरों की स्मार्ट सिटी योजना के लिए रु. 46,879 करोड़ के व्यय का प्रस्ताव है। उन्होंने बताया कि शेष 10 स्लॉटों के लिए 20 शहरों के बीच प्रतिस्पर्धा है। श्री नायडू ने बताया कि स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किए जाने के कार्यक्रम के अंतर्गत शहरों का चयन सही वक्त पर किया जा रहा है और शेष शहर खाली स्लॉटों के लिए शीघ्र ही अपनी संशोधित स्मार्ट सिटी योजनाएं प्रस्तुत करेंगे।

केंद्र द्वारा हिंदी थोपने का कोई विचार नहीं 

नई दिल्ली : मीडिया के एक वर्ग में यह खबर आई थी कि केंद्र सरकार हिंदी थोपने की कोशिश कर रही है। इस संबंध में गृह मंत्रालय के आधिकारिक भाषा विभाग द्वारा जारी प्रस्ताव का उल्लेख करते हुए यह दावा किया गया था कि हिंदी जानने वाले संसद सदस्यों और मंत्रियों के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे हिंदी में ही अपने भाषण और बयान जारी करें।
उल्लेखनीय है कि 1976 में आधिकारिक भाषा पर संसद समिति का गठन किया गया था और वह तभी से काम कर रही है। इस समिति ने अपनी रिपोर्ट के 9 भाग सौंप दिए हैं। समिति की रिपोर्ट के 9वें भाग को 2 जून, 2011 में राष्ट्रपति को सौंपा गया था। समिति के तत्कालीन अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ने 117 अनुमोदन किये थे। चूंकि समिति के सुझावों पर राज्य सरकारों और केंद्र सरकार के मंत्रालयों व विभागों की राय आमंत्रित की जानी थी, इसलिए राष्ट्रपति द्वारा सुझावों पर विचार करने और उन्हें स्वीकार करने के पूर्व समय लगा था।
अनुमोदन नंबर 105 इस प्रकार है - ‘माननीय राष्ट्रपति और सभी मंत्रियों सहित समस्त विशिष्टजनों, खासतौर से जो हिंदी पढ़ने और बोलने में सक्षम हैं, उनसे आग्रह किया जाता है कि वे अपने भाषण/बयान केवल हिंदी में ही दें।’
केंद्र सरकार ने उपरोक्त अनुमोदन को स्वीकार करते हुए 31 मार्च, 2017 को एक प्रस्ताव जारी किया था। समिति का अनुमोदन बिलकुल स्पष्ट है। वह आग्रह के रूप में है, न की आदेश/निर्देश के रूप में। उपरोक्त अनुमोदन आधिकारिक भाषा हिंदी के संबंध में संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप है। इसके अलावा अनुमोदन प्रोत्साहन एवं प्रेरणा के जरिये आधिकारिक भाषा के उन्नयन पर आधारित है, जो सरकार की नीति के अनुपालन में है।
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रविवार, 23 अप्रैल 2017

नव काव्यांजलि एक निर्भीक अभिव्यक्ति

समीक्षक : बसंत कुमार राय
 पुस्तक समीक्षा 
राजीव मणि द्वारा संपादित ‘नव-काव्यांजलि’ में ‘अपनी बात’ कहते हुए संपादक की यह उक्ति अच्छी लगी कि संग्रह में मौजूद गलतियों की जवाबदेही उन पर है, लेकिन खूबियों का श्रेय कवियों को जाता है। प्रश्न उठता है कि किस प्रकार की गलतियों के लिए वे दायित्व ले रहे हैं? क्या इनमें रचनागत त्रुटियाँ भी शामिल है? यदि हाँ, तो कमियों के बचाव के लिए उनका पक्ष अनूठा है।
 किसी भी कविता में कविता इस बात पर निर्भर करती है कि कवि वस्तु को किस तरह देखता है, क्योंकि वस्तु की भौतिक सत्ता कविता में गौण हो जाती है। ऐसे में कवि अपनी अंतर्दृष्टि के सहारे उसे संरचनागत विस्तार देता है। यहीं वह प्रस्थान बिंदु भी है, जहाँ से कवि अपनी निजता का अतिक्रमण भी करता चलता है। वस्तु की सर्वस्वीकार्यता प्रस्तुत करने की यह प्रक्रिया कवि की अवलोकन क्षमता, संवेदना की गहराई, रचने के लिए शिल्प के चुनाव के विवके पर बहुत ज्यादा निर्भर करती है। यहाँ रचना के अबूझ बन जाने का खतरा रहता है, जिससे आधुनिक कविता बुरी तरह पीड़ित है, लेकिन पाठक रचना को छोड़ रचनाकार (कवि) का नाम देखकर वाह-वाह कर देते हैं।
Nav Kavyanjali
ऐसा भी होता है कि वस्तु का विन्यासगत विस्तार करते-करते कवि स्थूल विवरणों के सहारे अपने कत्र्तव्य की इतिश्री समझ लेता है। तब कविता निश्प्राण हो जाती है। यह एक बड़ी कमजोरी है, जिसको देखते हुए प्रकाशक कविता की पुस्तक छापने से घबराते हैं। यह संग्रह इस कमजोरी से मुक्त नहीं है, लेकिन संपादक कुछ अच्छी रचनाओं को सामने रखकर ‘नव काव्यांजलि’ प्रकाशित करने के लिए निश्चितरूपेण प्रशंसा के पात्र हैं। 
संग्रह की कुछ कविताओं में जीवन का मर्म, उसकी पेंददगियां, उसमें निहित प्रेम और करूणा, ईष्र्या-द्वेष, आशा-आकांक्षा, भ्रम और छल, संघर्ष, हिंसा और प्रतिहिंसा का विद्रूप खुलकर सामने आया है। दरअसल में काव्य रचना की चारित्रिक खूबियां हैं कि वह अपनी बनावट में लोकतांत्रिक हैं। राजनीतिक लोकतंत्र की अवधारणा से परे रचनागत लोकतांत्रिकता कविता की विशिष्ट पहचना है। यह तब भी कविता में थी, जब धरती पर लोकतंत्र नहीं था। कुम्भन दास की यह उक्ति-भक्तन को कहां सीकरी सो काम, स्वयं में एक पुख्ता प्रमाण है। ऐसे तो भक्ति आंदोलन का सूत्रपात ही लोकोन्मुखी प्रवृत्तियों के कारण लोकभाषाओं में हुआ। इसलिए न्यायसंगत मान्यता के तहत कविता संपूर्ण चराचर की निर्भीक अभिव्यक्ति है। मुझे खुशी हुई कि इस संग्रह में ज्यादातर कवियों की चिन्ता में आमजन सहित नदी, पेड, चिड़ियाँ, पहाड़ आदि शामिल हैं। 
सृष्टि का स्वरूप ही काव्यमय है। कोई भी कविता इस सत्य के अनुरूप ही शलाध्य हो सकती है। कहना न होगा कि मनुष्य ने काव्यमयता को बिगाड़ने की भरपूर कोशिश की है। यह कोशिश लगातार जारी है। कविता ऐसी कोशिश के खिलाफ किस तरह खड़ी है, यह उसकी सबसे बड़ी चुनौती है। संग्रहित कवियों से यह उम्मीद की जाती है कि इस आसन्न चुनौती से वे मुंह न मोड़ेंगें।
समीक्षक : बसंत कुमार राय

‘कॉल ड्रॉप्स की समस्या घर के भीतर अधिक’

 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : ग्राहकों से सीधी प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए दूरसंचार विभाग ने 23 दिसंबर, 2016 को दिल्ली, मुंबई, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र और गोवा में एक इंटेग्रेटिड वॉयस रिस्पांस सिस्टम (आईवीआरएस) प्रणाली की शुरूआत की है, जिसका 12 जनवरी, 2017 को पंजाब और मणिपुर के अलावा अन्य राज्यों में विस्तार किया गया है। पंजाब और मणिपुर में आईवीआरएस प्रणाली की शुरूआत 16 मार्च, 2017 को हुई। इस प्रणाली के माध्यम से ग्राहकों को शॉर्ट कोड 1955 से आईवीआरएस कॉल प्राप्त होती हैं और कॉल ड्रॉप्स की समस्या के बारे में कुछ प्रश्न पूछे जाते हैं। ग्राहक इसी शॉर्ट कोड 1955 पर टोल फ्री एसएमएस भी भेज सकते हैं, जिसमें उनके उस शहर, नगर, गांव का नाम का उल्लेख हो, जहां वे अक्सर कॉल ड्रॉप्स की समस्या से ग्रस्त हैं।
आईवीआरएस प्रणाली की 23 दिसम्बर, 2016 को शुरूआत से लेकर 28 फरवरी, 2017 तक पूरे देश में सभी टीपीएस के ग्राहकों को 16,61,640 सफल आउटबाउंड कॉल की गई हैं। लगभग 2,20,935 ग्राहकों ने सर्वेक्षण में भाग लिया, जिनमें से लगभग 1,38,072 (62.5ः) ग्राहकों ने कॉल ड्रॉप्स की सूचना दी है। इस प्रतिक्रिया से यह पता चला है कि कॉल ड्राप्स की समस्या घर के अंदर अधिक गंभीर है। इस प्रतिक्रिया को समयबद्ध तरीके से कार्रवाई करने के लिए प्रति सप्ताह दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के साथ साझा किया जाता है। टीएसपी ने दूर संचार विभाग द्वारा भेजे गए आईवीआरएस फीडबैक डाटा का उपयोग करने के लिए एक विस्तृत तंत्र स्थापित किया है।
टीएसपी, हर पखवाड़े, दूर संचार विभाग कार्यबल को कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत कर रहा है। 15-28 फरवरी, 2017 के पखवाड़े के लिए, टीएसपी द्वारा 43,403 फीडबैक मामले जांच हेतु लिए। कॉल ड्रॉप्स समस्या के बारे में अतिरिक्त जानकारी के लिए ग्राहकों को टेलीफोन कॉल और एसएमएस करने के बाद 7,210 मामलों की समाधान हेतु पहचान की गई। इस पखवाड़े के दौरान 2467 मामलों को ऑप्टिमाइजेशन, हार्डवेयर / बिजली की समस्याओं के समाधान, क्षेत्र के दौरे आदि के माध्यम से सुलझाया गया और सकल आधार पर आईवीआरएस की शुरूआत से लेकर अभी तक इस पहल के दौरान 9328 मामलों को इस पहल के माध्यम से हल किया गया है।
इसके अलावा, 5529 मामले कॉल ड्रॉप समस्या से संबंधित नहीं थे, लेकिन वे डेटा, रोमिंग, बिलिंग, एमएनपी, मोबाइल डिवाइस आदि की समस्या से जुड़े थे। ऐसे मामलों की टीएसपी ने आवश्यक कार्रवाई करने के लिए पहचान की। टीएसपी ने आने वाले समय में लगभग 603 नई साइटें / बूस्टर लगाने की योजना बनाई गई है। दूर संचार कार्यबल आईओआरएस प्रणाली से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए एक महीने में एक बार टीएसपी के साथ बैठक कर रहा है। मंत्री महोदय का कार्यालय, आईवीआरएस प्रणाली के परिचालन के बारे में नियमित समीक्षाओं का भी आयोजन कर रहा है।

सरकार ने सभी वाहनों से बत्तियां हटाने का फैसला किया 

नई दिल्ली : देश में स्वस्थ लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक और ऐतिहासिक कदम उठाया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में देश में सभी श्रेणियों के वाहनों के ऊपर लगी सभी तरह की बत्तियां हटाने का फैसला किया। सरकार का स्पष्ट मानना है कि वाहनों पर लगी बत्तियां वीआईपी संस्कृति का प्रतीक मानी जाती हैं और लोकतांत्रिक देश में इसका कोई स्थान नहीं है। उनका कुछ भी औचित्य नहीं है। हालांकि आपातकालीन और राहत सेवाओं, एम्बुलेंस, अग्नि शमन सेवा आदि से संबंधित वाहनों पर बत्तियों लगाने की अनुमति होगी। इस फैसले को ध्यान में रखते हुए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय कानून में आवश्यक प्रावधान करेगा।

2100 करोड़ रुपये की सीवेज उपचार परियोजनाओं को मंजूरी

नई दिल्ली : नमामी गंगे कार्यक्रम को एक बड़े प्रोत्साहन के रूप में, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने 2154.28 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत के साथ 26 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। यह राशि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड एवं दिल्ली राज्यों में प्रति दिन 188 मिलियन लीटर (एमएलडी) (लगभग) की नई सीवेज उपचार क्षमता के सृजन, वर्तमान एसटीपी क्षमता के 596 एमएलडी का पुनर्वास, वर्तमान एसटीपी क्षमता के 30 एमएलडी का उन्नयन, अवरोधन एवं डायवर्जन कार्यों तथा 145.05 किलोमीटर सीवरेज नेटवर्क पर खर्च की जाएगी।
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विश्व होम्योपैथी दिवस पर दो दिवसीय सम्मेलन संपन्न

नई दिल्ली : विश्व होम्योपैथी दिवस पर नई दिल्ली में दो दिवसीय सम्मेलन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। समारोह में आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीपद येस्सो नाइक मुख्य अतिथि थे। समारोह की अध्यक्षता सांसद और आयुष मंत्रालय की संसदीय स्थायी समिति के सदस्य डॉ. मनोज रजोरिया ने की। विश्व होम्योपैथी दिवस होम्योपैथी के जन्मदाता जर्मन चिकित्सक डॉ. क्रिस्टियानी फ्रेडरिक सैमुएल हनिमैन की 262वीं जयंती के उपलक्ष में आयोजित किया गया। डॉ. क्रिस्टियानी फ्रेडरिक सैमुएल हनिमैन महान विद्वान, भाषाविद और प्रख्यात वैज्ञानिक थे। सम्मेलन का थीम होम्योपैथी में अनुसंधान की गुणवत्ता बढ़ाना था। 
सम्मेलन का आयोजन आयुष मंत्रालय की केन्द्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद द्वारा किया गया। इस अवसर पर आयुष मंत्री ने हनिमैन के योगदान और उनके द्वारा प्रकृति के अचूक कानून के आधार पर चिकित्सा व्यवस्था की खोज करने के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि आयुष मंत्रालय आयुष प्रणाली में और अधिक साक्ष्य लाने और अंतर्राष्ट्रीय मान्य साधनों से प्रणाली को वैध बनाने के लिए संकल्पबद्ध है। उन्होंने विश्वसनीय होम्योपैथी अनुसंधान में सीसीआरएच द्वारा लगाई गई छलांग की सराहना की। उन्होंने शिष्टमंडल को बताया कि सीसीआरएच ने क्वांटम भौतिकी जैवइंजीनियरिंग, वाइरौलॉजी, रसायन विज्ञान और वनस्पति विज्ञान जैसे क्षेत्रों में विशिष्ट कार्य के लिए प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय संस्थानों से सहयोग किया है। इस काम में न केवल होम्योपैथी को मान्यता मिली है, बल्कि संबद्ध वैज्ञानिकों का ध्यान भी इस उपचार प्रणाली की ओर गया है। हमें होम्योपैथी और नैनोविज्ञान तथा जैनोमिक विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान करने की आवश्यकता है। 
इस अवसर पर पहली बार सीसीआरएच ने होम्योपैथी अनुसंधान में योगदान करने वालों को पुरस्कार प्रदान किया। श्रीपद नाइक ने श्रेष्ठ शोध के लिए लाइफ टाइम पुरस्कार डॉ. ए. आर. खुदाबक्श, श्रेष्ठ शिक्षक के लिए प्रोफेसर चतुर्भुज नायक, श्रेष्ठ शोध पत्रों के लिए डॉ. कुसुम एस. चंद और डॉ. अर्चना नारंग, युवा वैज्ञानिकों के लिए डॉ. सी. एल. पाटिल तथा डॉ. देवदत्त नायक को पुरस्कृत किया। सम्मेलन में आयुष मंत्री ने होम्योपैथी में गुणवत्ता सम्पन्न एमडी डिसरटेशन के लिए पुरस्कार विजेताओं की घोषणा की। 
अपने संबोधन में श्री मनोज रजोरिया ने होम्योपैथी के समग्र विकास के लिए गुणवत्ता सम्पन्न शिक्षा और शोध की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि होम्योपैथी के लिए राष्ट्रीय आयोग बनाने का प्रस्ताव है। 
होम्योपैथिक अस्पतालों के एनएबीएच प्रमाणन सहित उच्च गुणवत्ता युक्त अनुसंधान माध्यमों द्वारा सार्वजनिक स्वास्थ्य और महामारियों में होम्योपैथी की भूमिका के महत्वपूर्ण कारक सहित अनुसंधान करने के लिए कॉलेज के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने तथा होम्योपैथिक अनुसंधान के प्रमुख क्षेत्रों को विचार-विमर्श के लिए पांच सत्रों में विभक्त किया गया। प्रमुख सत्रों की अध्यक्षता अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय संसाधन व्यक्तियों द्वारा की गई। इनका मुख्य उद्देश्य होम्योपैथिक अनुसंधान की जटिलताओं को समझाने के लिए सभी हितधारकों को शिक्षित करना तथा सभी प्रकार के प्रतिनिधियों को गुणवत्तायुक्त अनुसंधान माहौल के बारे में पर्याप्त जानकारी उपलब्ध कराना था। इन प्रतिनिधियों में अनुसंधानकर्ता, चिकित्सक नीति निर्माता, चिकित्सा छात्र और होम्योपैथिक उद्योग के प्रतिनिधि शामिल थे। 
आयुष मंत्रालय के संयुक्त सचिव ए. के. गनेरीवाला और संयुक्त सचिव पी. एन. रंजीत कुमार, पद्मश्री डाॅ. वी. के. गुप्त, अध्यक्ष वैज्ञानिक सलाहकार समिति, सीसीआरएच, डॉ. लेक्स रूटेन (नीदरलैंड्स), डॉ. आइजैक गोल्डन (ऑस्ट्रेलिया) और डाॅ. मार्टिअन ब्रांड्स (नीदरलैंड्स) सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस आयोजन में शामिल हुए।
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सोमवार, 27 मार्च 2017

एशिया का पहला एयरबस प्रशिक्षण केंद्र नई दिल्ली में खुलेगा

नई दिल्ली : एयरबस नई दिल्ली स्थित एयरोसिटी में एक प्रशिक्षण केंद्र खोलेगा, ताकि एयरबस पॉयलटों और इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया जा सके। इस संबंध में नागरिक उड्डयन मंत्री पी. अशोक गजपति राजू, एयरबस के कार्यकारी अधिकारी टॉम एंडर्स और नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री की उपस्थिति में एक आयोजन किया गया।
इस अवसर पर नागरिक उड्डयन मंत्री पी. अशोक गजपति राजू ने कहा कि भारत में यात्री विमानों की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिसके लिए यह आवश्यक हो गया है कि कुशल पॉयलटों और इंजीनियरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इसके लिए एक प्रशिक्षण केंद्र की भी आवश्यकता है, ताकि कुशल श्रम शक्ति का विकास हो।
एयरबस के कार्यकारी अधिकारी टॉम एंडर्स ने कहा कि एयरबस का प्रशिक्षण केंद्र एशिया में अपनी तरह का पहला केंद्र होगा, जो इस बात का प्रतीक है कि भारत के साथ एयरबस की साझेदारी कितनी गहरी है। उल्लेखनीय है कि भारत में एयरबस के 250 से अधिक विमान संचालन में हैं और इंडियन एयरलाइन्स ने 570 से अधिक विमानों का आर्डर दिया है।
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नमामि गंगे के लिए 19 अरब रुपये मंजूर

उत्तराखंड, बिहार, झारखंड और दिल्ली में शुरू होंगी 20 परियोजनाएं 
नई दिल्ली : राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) की कार्यकारी समिति ने गंगा को स्वच्छ बनाने के अभियान में तेजी लाने के लिए करीब 19 अरब रुपये लागत वाली परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान कर दी है। कार्यकारी समिति की 02 मार्च, 2017 को हुई बैठक में मंजूर की गई 20 परियोजनाओं में से 13 उत्तराखंड से सम्बद्ध हैं, जिनमें नए मलजल उपचार संयंत्रों की स्थापना, मौजूदा सीवर उपचार संयंत्रों का उन्नयन और हरिद्वार में मलजल नेटवर्क कायम करने जैसे कार्य शामिल हैं। इन सभी पर करीब 415 करोड़ रुपये की लागत आएगी। हरिद्वार देश के सर्वाधिक पवित्र शहरों में से एक है, जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु आते हैं। अनुमोदित योजना का लक्ष्य न केवल शहर के 1.5 लाख स्थानीय निवासियों द्वारा, बल्कि विभिन्न प्रयोजनों के लिए इस पवित्र स्थान की यात्रा करने वाले लोगों द्वारा उत्सर्जित मलजल का उपचार भी करना है। इन सभी परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार द्वारा पूर्ण वित्त पोषण किया जाएगा। यहां तक कि इन परियोजनाओं के प्रचालन और रख-रखाव का खर्च भी केंद्र सरकार वहन करेगी।
उत्तराखंड में अनुमोदित अन्य परियोजनाओं में से चार परियोजनाएं अलकनंदा नदी का प्रदूषण दूर करने से संबंधित है, ताकि नीचे की तरफ नदी की धार का स्वच्छतर प्रवाह सुनिश्चित किया जा सके। इसमें गंदे पानी के नालों को नदी में जाने से रोकने के लिए उनका मार्ग बदलना, बीच मार्ग में अवरोधक संयंत्र लगाना और साथ ही चार महत्वपूर्ण स्थानों - जोशीमठ, रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग और कीर्तिनगर में नए लघु एसटीपीज लगाना शामिल है, जिन पर करीब 78 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इनके अलावा गंगा का प्रदूषण दूर करने के लिए ऋषिकेश में 158 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली एक बड़ी परियोजना का अनुमोदन किया गया है। गंगा जैसे ही पर्वत से उतरकर मैदानी भाग में प्रवेश करती है, तो वहीं ऋषिकेश से नगरीय प्रदूषक गंगा में मिलने शुरू हो जाते हैं। गंगा को इन प्रदूषकों से छुटकारा दिलाने के लिए ऋषिकेश में यह सर्व-समावेशी परियोजना शुरू करने को हरी झंडी दिखाई गयी है। इससे न केवल सभी शहरी नालों को ऋषिकेश में गंगा में जाने से रोका जा सकेगा, बल्कि उत्सर्जित जल को उपचार के जरिए फिर से इस्तेमाल योग्य भी बनाया जाएगा। ऋषिकेश संबंधी इस विशेष परियोजना में लक्कड़घाट पर 26 एमएलडी क्षमता के नये एसटीपी का निर्माण किया जाएगा, जिसके लिए ऑनलाइन निगरानी प्रणाली की भी व्यवस्था है।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 665 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से उत्कृष्ट प्रदूषक मानकों के साथ 564 एमएलडी क्षमता के अत्याधुनिक ओखला मलजल उपचार संयंत्र के निर्माण की परियोजना भी अनुमोदित की गयी है। यह संयंत्र मौजूदा एसटीपी फेज- 1, 2, 3 और 4 का स्थान लेगा। इसके अलावा पीतमपुरा और कोंडली में 100 करोड़ रुपये से अधिक अनुमानित लागत वाली नई मलजल पाइप लाइनें बिछाने की दो परियोजनाएं भी मंजूर की गयी है, ताकि रिसाव रोका जा सके।
पटना में कर्मालिचक और झारखंड में राजमहल में 335 करोड़ रुपये से अधिक लागत से मलजल निकासी संबंधी कार्यों का भी कार्य समिति की बैठक में अनुमोदन किया गया। वाराणसी में, जहां वर्ष भर लाखों तीर्थ यात्री आते हैं, गंगा के प्रदूषण की समस्या का समाधान करने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल वाली 151 करोड़ रुपये की परियोजना का भी कार्यकारिणी की बैठक में अनुमोदन किया गया।
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IIFCL ने कैंसर मरीजों के लिए 3.5 करोड़ रुपये दिये

 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : स्वास्थ्य मंत्रालय के कैंसर मरीज कोष (सीएसआर) के लिए सीएसआर योजना के अंतर्गत कैंसर से पीड़ित गरीब मरीजों के उपचार के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की इकाईयों से योगदान देने का आग्रह किया गया था। इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी लिमिटेड (आईआईएफसीएल) ने इस दिशा में अगुवाई की और 2015-16 में 7.5 करोड़ रुपये राशि का योगदान दिया। 2016-17 के दौरान आईआईएफसीएल से प्राप्त सीएसआर योगदान से 385 कैंसर के मरीजों को लाभ हुआ है। आईआईएफसीएल के मुख्य प्रबंध निदेशक एस. बी. नायर ने कल 3.50 करोड़ रुपये का चेक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते को प्रदान किया। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार अरुण कुमार झा और आईआईएफसीएल के मुख्य महाप्रबंधक पी. आर. जयशंकर भी उपस्थित थे।

बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम ने 2.5 करोड़ रुपये दिये

पटना : विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय कक्ष में बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए 2.5 करोड़ रुपये का चेक सौंपा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, पुलिस महानिदेशक सह अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम अभय कुमार उपाध्याय, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम मुख्य अभियंता वशिष्ठ नारायण, बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम के सचिव आनंद प्रकाश श्रीवास्तव, बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम के मुख्य लेखा पदाधिकारी हेमंत कुमार उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने पुलिस महानिदेशक सह अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम को बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम की ओर से मुख्यमंत्री राहत कोष में 2.5 करोड़ रुपये का चेक देने के लिए धन्यवाद दिया।

बिहार शहरी आधारभूत संरचना निगम लि. ने एक करोड़ दिये

पटना : विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय कक्ष में नगर विकास मंत्री महेश्वर हजारी ने बिहार शहरी आधारभूत संरचना निगम लि. की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए एक करोड़ रुपये का चेक सौंपा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, नगर विकास मंत्री महेश्वर हजारी, विकास आयुक्त शिशिर सिन्हा, प्रधान सचिव नगर विकास चैतन्य प्रसाद, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार एवं मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने नगर विकास मंत्री महेश्वर हजारी एवं प्रधान सचिव नगर विकास चैतन्य प्रसाद को बिहार शहरी आधारभूत संरचना निगम लि. की ओर से मुख्यमंत्री राहत कोष में एक करोड़ रुपये का चेक देने के लिए धन्यवाद दिया।

कम्फेड ने 3 करोड़ रुपये का चेक सौंपा

पटना : विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय कक्ष में मंत्री पशु एवं मत्स्य संसाधन अवधेश कुमार सिंह ने बिहार स्टेट मिल्क काॅपरेटिव फेडरेशन लि. (कम्फेड) की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए 3 करोड़ रुपये का चेक सौंपा। इस असवर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, मंत्री पशु एवं मत्स्य संसाधन अवधेश कुमार सिंह, जदयू नेता श्याम रजक, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा, सचिव पशु एवं मत्स्य संसाधन एन. विजया लक्ष्मी, महाप्रबंधक बिहार स्टेट मिल्क काॅपरेटिव फेडरेशन लि. सीमा त्रिपाठी उपस्थित थी। मुख्यमंत्री ने मंत्री पशु एवं मत्स्य संसाधन अवधेश कुमार सिंह को बिहार स्टेट मिल्क काॅपरेटिव फेडरेशन लि. की ओर से मुख्यमंत्री राहत कोष में 3 करोड़ रुपये का चेक देने के लिए धन्यवाद दिया।
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रविवार, 12 मार्च 2017

Happy Holi

केंद्र 61.89 करोड़ से सजावटी मछली पालन पर पायलट परियोजना लांच करेगा

सजावटी मछलीपालन की पायलट परियोजना के लिए 8 राज्य - असम, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल चिन्हित
नई दिल्ली : कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के पशुपालन, डेयरी तथा मछलीपालन विभाग सजावटी मछलीपालन की क्षमता और व्यापकता को महसूस करते हुए 61.89 करोड रुपये की लागत से पायलट आधार पर सजावटी मछलीपालन परियोजना लांच करेगा। इस पायलट परियोजना को लागू करने के काम में मछलीपालन व्यवसाय और निर्यात में लगे लोगों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए सजावटी मछलीपालन के सशक्त और समग्र विकास का वातावरण बनाना है। क्लस्टर आधारित खेती तथा प्राकृतिक संसाधन-स्वदेशी और समुद्री-की वास पुर्नस्थापना और हितधारकों में जागरूकता पैदा करके सजावटी मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष क्षेत्रों की पहचान की गयी है।
पायलट परियोजना की प्रमुख विशेषताएं हैं : (1) क्लस्टर आधार पर सजावटी मछलीपालन को प्रोत्साहित करना (2) सजावटी मछलीपालन और निर्यात से आय को सुदृढ़ बनाना (3) ग्रामीण और ग्रामीण क्षेत्र के बाहर की आबादी के लिए रोजगार अवसरों का सृजन करना (4) सजावटी मछलीपालन को फलता-फूलता व्यवसाय बनाने के लिए आधुनिक टेक्नोलॉजी और नवाचार का उपयोग।
पायलट परियोजना लागू करने के उद्देश्य से क्षमता वाले 8 राज्य - असम, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल चिन्हित किए गए हैं। पायलट परियोजना की गतिविधियों को चार प्रमुख समूहों में रखा गया है, ये हैं - (क) सजावटी मछली उत्पादन से संबधित गतिविधियां यानी घर के पीछे के हिस्से में मछलीपालन ईकाइयां स्थापित करना, मंझोले आकार की ईकाइयां बनाना, एकीकृत प्रजनन और उत्पादन इकाइयां लगाना (ख) एक्वेरियम फैब्रिकेशन, व्यापार तथा मार्केटिंग से संबंधित गतिविधियां (ग) सजावटी मछलियों के प्रोत्साहन के लिए गतिविधियां तथा (घ) कौशल विकास और क्षमता सृजन से जुड़ी गतिविधियां।
सजावटी मछलीपालन की पायलट परियोजना राष्ट्रीय मछली पालन विकास बोर्ड (एनएफडीबी) राज्यों / केन्द्र शासित प्रदेशों के मछलीपालन विभागों के माध्यम से लागू करेगा। सजावटी मछलियों की पायलट परियोजना के अंतर्गत धन वितरण व्यवस्था सीएसएस ब्लू क्रांति मछलियों के एकीकृत विकास और प्रबंधन के धन वितरण व्यवस्था के अनुरूप हैं। पायलट परियोजना लागू करने में केन्द्र सरकार के दायित्वों को पूरा करने के लिए वित्तीय संसाधन जहां तक संभव होगा, सम्मिलित रूप में भारत सरकार की अन्य योजनाओं की दी गयी निधि को तर्कसंगत बनाकर जुटाए जाएंगे। प्रस्तावित पायलट परियाजना लागू करने के लिए कम से कम 1 वर्ष की अवधि आवश्यक है।
दूसरी ओर सजावटी मछलीपालन परंपरागत मछलीपालन क्षेत्र का एक उप क्षेत्र है, जिसमें प्रजनन और सामान्य जल और समुद्री जल में पालन सुविधा होती है। यद्यपि सजावटी मछलीपालन खाद्य और पोष्टिकता सुरक्षा में प्रत्यक्ष रूप से कोई योगदान नहीं करता, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र और ग्रामीण क्षेत्र से बाहर की आबादी के लिए विशेषकर महिलाओं और बेरोजगार युवाओं को अंशकालिक गतिविधियों के लिए आजीविका और आय प्रदान करता है। भारत में सजावटी मछली पालन उद्योग आकार में छोटा है, लेकिन विकास की संभावनाओं से भरपूर है। इसके प्रमुख आकर्षणों में कम समय में कम उत्पादन लागत और अधिक प्राप्ति तथा घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में बढती मांग है। अपने देश के विभिन्न हिस्सों में समुद्री सजावटी मछलियों की लगभग 400 प्रजातियां हैं और सामान्य जल में सजावटी मछलियों की 375 प्रजातियां हैं। 
मछली पालन और जल कृषि क्षेत्र मुख्य रूप से परोसी जाने वाली मछलियों के उत्पादन पर बल देता है। परिणामस्वरूप सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में मछली के उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के लिए धन लगाया जाता है।
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यूजी-पीजी स्तरों पर चिकित्सा पाठ्यक्रमों में नामांकन को राज्य स्तर पर सामान्य परामर्श

नई दिल्ली : स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय में, देश में एकल मेडिकल प्रवेश परीक्षा शुरू करने के बाद, अब स्नातक और स्नातकोत्तर स्तरों पर चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए राज्य स्तर पर सामान्य परामर्श के लिए प्रावधान किया है। एमसीआई के प्रासंगिक नियमों में किए गए संशोधनों के अनुसार, राज्य / संघ राज्य क्षेत्र के स्तर पर निर्दिष्ट प्राधिकरण राज्य में सभी मेडिकल शिक्षा संस्थानों के लिए सामान्य परामर्श करेगा, चाहे इसकी स्थापना केंद्र सरकार, राज्य सरकार, विश्वविद्यालय, मानद विश्वविद्यालय, ट्रस्ट, सोसाइटी, कंपनी, अल्पसंख्यक संस्थाएं या निगम द्वारा की गई हो।
इस कदम से नामांकन की प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और निजी कॉलेजों द्वारा लगाए गए कैपिटेशन शुल्क के प्रचलन  को रोकने में भी मदद मिलेगी। इसके अलावा, छात्रों को एक ही राज्य में नामांकन के लिए कई एजेंसियों के पास आवेदन नहीं करना पड़ेगा।
एनईईटी यूजी 2016 के सीबीएसई द्वारा संचालित किए जाने के बाद, मंत्रालय ने राज्यों और अन्य हितधारकों के परामर्श से राज्यों को 09 अगस्त, 2016 को एक परामर्शदात्री जारी किया था कि वे 2016-17 के सत्र के लिए एमबीबीएस पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए संयुक्त परामर्श आयोजित करने को वरीयता दे सकते हैं। मंत्रालय के दृष्टांत पर, यूजीसी ने 15 सितम्बर, 2016 के पत्र के माध्यम से सभी मानद विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया था कि वे या तो राज्य सरकारों / केन्द्र सरकार द्वारा या एनआईआईटी में प्राप्त अंकों के आधार पर अपनी एजेंसियों के माध्यम से आयोजित समान पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए सामान्य परामर्श के भी हिस्सा होंगे।  
2017-18 सत्र के लिए स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में नामांकन हेतु राज्य स्तर पर आम परामर्श के लिए परामर्शदात्री 05 दिसम्बर, 2016 को दुहराई गई थी। परामर्शदात्री जारी की गई थी कि क्योंकि परामर्श को किसी नियम के तहत शामिल नहीं किया गया था और पूरी प्रवेश प्रक्रिया एक प्रशासनिक तंत्र के रूप में विकसित हुई थी। लेकिन अब स्नातक चिकित्सा शिक्षा विनियमन, 1997 और स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा विनियमन, 2000 में संशोधन संबंधी सूचनाओं के साथ सामान्य परामर्श के लिए कानूनी प्रावधानों को सक्षम बना दिया गया है।
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बुधवार, 8 मार्च 2017

पटना में गंगा में सीवेज प्रदूषण को रोकने को 1050 करोड़ रुपए की परियोजनाओं को मंजूरी

नई दिल्ली : पटना में गंगा को स्वच्छ रखने के प्रयास के तहत शहर में सक्षम सीवेज ट्रीटमेंट ढांचा तैयार करने के लिए नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत 1050 करोड़ रुपए की परियोजनाओं को मंजूरी का बड़ा फैसला लिया गया है। यह राशि दो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाने, मौजूदा एसटीपी के नवीनीकरण, दो पंपिंग स्टेशनों के निर्माण और लगभग 400 किलोमीटर तक का नया भूमिगत सीवेज नेटवर्क बिछाने पर खर्च की जाएगी।
शहर के सैदपुर क्षेत्र में जोन में 60 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी बनाने और 227 किलोमीटर के नए भूमिगत सीवेज नेटवर्क बिछाने के लिए कुल 600 करोड़ रुपए लागत का ठेका यूईएम इंडिया प्रा. लि. और ज्योति बिल्डटेक प्रा. लि. को दिया गया है। तीन अन्य फर्मों - लार्सन एंड टर्बो लि., वोल्टास लि. और जीएए जर्मनी जेवी - को शहर के बेऊर क्षेत्र में 23 एमएलडी वाले एसटीपी के निर्माण, 20 एमएलडी के मौजूदा एसटीपी के नवीनीकरण और लगभग 180 किलोमीटर का नया भूमिगत सीवेज नेटवर्क बिछाने की अलग-अलग परियोजनाओं के लिए 450 करोड़ रुपए आवंटित होंगे। इसके दायरे में सैदपुर और बेऊर क्षेत्र में क्रमशः 83 एमएलडी और 50 एमएलडी क्षमता वाले मुख्य पंपिंग स्टेशनों का निर्माण भी शामिल है। ठेकों में 10 साल की अवधि के लिए एसटीपी और सीवेज नेटवर्क के संचालन और रखरखाव की लागत भी शामिल है।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य न सिर्फ पटना की मौजूदा सीवेज व्यवस्था को सुधारना है, बल्कि अगले एक दशक तक शहर में बढ़ती आबादी की संभावना को ध्यान में रखकर सीवेज ट्रीटमेंट का लक्ष्य भी शामिल है। विश्व बैंक के एक सर्वेक्षण के अनुसार, पटना ढांचागत विकास के मामले में दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ते शहरों में से एक है। इन परियोजनाओं के समयबद्ध परिचालन के बाद इन क्षेत्रों से गंगा नदी में किसी भी प्रकार असंशोधित जल नहीं बहाया जाएगा और इससे गंगा के पवित्र जल को प्रदूषित होने से बचाने में मदद मिलेगी। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) निर्माण-कार्य की प्रगति की निगरानी करेगा।
100 वर्ग किलोमीटर से अधिक के क्षेत्र में फैले पटना शहर को छह सीवरेज क्षेत्रों - दीघा, बेऊर, सैदपुर, कंकड़बाग, पहाड़ी और करमालीचक में बांटा गया है। करमालीचक क्षेत्र में सीवेज संबंधित परियोजनाओं के लिए जल्दी ही अनुबंध किए जाने की उम्मीद है।
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‘2017-18 के लिए पीजी मेडिकल की 4,000 से अधिक सीटें बढ़ाई गई’

 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री ने कहा कि भारत सरकार ने शैक्षिक सत्र 2017-18 के लिए विभिन्न मेडिकल कॉलेजों तथा अस्पतालों में 4,000 पीजी मेडिकल सीटें बढ़ाने की मंजूरी दी है। सीटों की संख्या की दृष्टि से यह अब तक की सबसे बड़ी मंजूरी है और अब कुल 35117 पीजी मेडिकल सीटें उपलब्ध हैं।
श्री नड्डा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और निंरतर निर्देशन के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि इससे तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल का हमारा संकल्प सुदृढ़ होगा और देश में चिकित्सा शिक्षा में सुधार होगा। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि कुल वृद्धि में 2046 सीटें मेडिकल कॉलेजों में हैं। क्लिनिकल विषयों में पीजी की सीटें बढ़ाने की आवश्यकता को देखते हुए सरकार ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों में क्लिनिकल विषयों में शिक्षक विद्यार्थी अनुपात में संशोधन का फैसला किया था। केवल इसी कदम से 71 कॉलेजों में 1,137 अतिरिक्त सीटों का सृजन हुआ। कुल 212 सरकारी कॉलेजों में से अनेक कॉलेज अपने प्रस्ताव भेज रहे हैं, और आशा की जाती है कि मार्च, 2017 के दौरान कम से कम 1,000 और सीटें जोड़ी जाएगी।
इसमें एमडी, एमएस की समकक्ष डीएनबी की सीटें शामिल हैं। पिछले एक वर्ष में डीएनबी की सीटें 2,147 बढ़ी हैं। श्री नड्डा ने कहा कि अबतक देश में पीजी मेडिकल  की कुल 4,143 सीटें जोड़ी गई हैं और मार्च, 2017 के दौरान 1000 से अधिक और सीटे जोड़ी जाएंगी। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इस तरह बजट घोषणा में देश में 5000 पीजी मेडिकल सीटें बढ़ाने का लक्ष्य शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा।

‘युवा पीढ़ी में पढ़ने की आदत डालनी चाहिए’

नई दिल्ली : सूचना एवं प्रसारण मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने सूचना भवन में मीडिया इकाइयों एवं उनकी विभिन्न सुविधाओं का मुआयना किया, ताकि उनके कामकाज का प्रत्यक्ष अनुभव हो सके। प्रकाशन प्रभाग द्वारा हाल ही में खोली गई नई बुक गैलरी पर टिप्पणी करते हुए श्री नायडू ने लोगों से इस गैलरी में अपना आगमन सुनिश्चित करने और प्रकाशन प्रभाग द्वारा पेश किये गये पुस्तकों के बहुमूल्य संग्रह का समुचित उपयोग करने का अनुरोध किया। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं को डिजिटल ऑनलाइन लाइब्रेरी का उपयोग करना चाहिए, जहां चुनिंदा अभिलेखीय पुस्तकें उपलब्ध हैं और जिनसे बुक गैलरी के जरिये निःशुल्क लाभ उठाया जा सकता है। त्वरित संचार के इस युग में सभी आयु वर्गों के लोगों में पढ़ने की आदत डालना अत्यंत आवश्यक है। प्रकाशन प्रभाग की यह पहल इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। एम. वेंकैया नायडू के साथ सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौर, सूचना एवं प्रसारण सचिव अजय मित्तल और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारीगण भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
सूचना भवन में एक अत्याधुनिक एवं आकर्षक बुक गैलरी बनाई गई है, जो जनवरी 2017 से ही परिचालन में आ गई है। बच्चों की पुस्तकों के लिए एक अलग खण्ड बनाया गया है, ताकि रोचक शीर्षकों को पढ़ने के लिए बच्चों को प्रोत्साहित किया जा सके। गैलरी में एक पठन कक्ष भी बनाया गया है, जहां आगंतुक आराम से बैठ सकते हैं और वहां पर प्रदर्शित किसी भी पुस्तक को खरीदने से पहले उसका अवलोकन भी कर सकते हैं।
श्री नायडू ने सूचना भवन में बनाये गये डीएवीपी स्टूडियो का भी मुआयना किया, जहां उन्हें संगठन द्वारा डिजाइन किये गये रचनात्मक एवं अन्य संचार उत्पादों की रूपरेखा से अवगत कराया गया। डीएवीपी द्वारा विभिन्न ग्राहकों के लिए तैयार किये जाने वाले रचनात्मक उत्पादों हेतु उपयोग किये जाने वाले सॉफ्टवेयर के बारे में भी विशेष रूप से जानकारी दी गई। उन्होंने रंग अंशांकन (कैलीब्रेशन) तकनीकों के साथ-साथ मीडिया नियोजन एवं विज्ञापनों को ऑनलाइन ढंग से जारी किये जाने से जुड़ी बातों में भी गहरी रुचि दिखाई।
इससे पहले श्री नायडू ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के इलेक्ट्रॉनिक्स मीडिया मॉनीटरिंग सेंटर का मुआयना किया और वहां कार्यरत लोगों से बातचीत की, ताकि उनके कामकाज को समझा जा सके और इसके साथ ही उन्होंने प्रसारण क्षेत्र से जुड़ी बुनियादी ढांचागत सुविधाओं की समीक्षा की। मीडिया इकाई में कामकाज के तरीके से भी अवगत कराया गया। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सोशल मीडिया प्रकोष्ठ का भी मुआयना किया और इसके साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों की विभिन्न प्रक्रियाओं की समीक्षा की।
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100 जिले खुले में शौच मुक्त घोषित

 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय ने स्वच्छ भारत मिशन में महिलाओं की भूमिका को रेखांकित करने और उनकी अगुवाई की भलीभांति सराहना करने के उद्देश्य से देश भर में पूरे सप्ताह चलने वाली विभिन्न गतिविधियों के कार्यक्रम ‘स्वच्छ शक्ति सप्ताह’ का शुभारंभ किया। केन्द्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने हरियाणा सरकार के साथ संयुक्त रूप से आयोजित एक कार्यक्रम के तहत हरियाणा के गुरुग्राम में राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छ शक्ति सप्ताह का शुभारंभ किया। हरियाणा में जमीनी स्तर से जुड़ी 1000 से अधिक महिला स्वच्छता चैंपियनों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। हरियाणा के 11 ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) जिलों के उपायुक्तों को इस अवसर पर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर श्री तोमर ने स्वच्छ भारत मिशन के क्रियान्वयन के तहत समस्त ग्रामीण भारत में महिलाओं द्वारा निभाई जा रही अग्रणी भूमिका की सराहना की। उन्होंने स्वच्छता को एक जन आंदोलन का स्वरूप प्रदान करने के लिए भी इनकी सराहना की। उन्होंने घोषणा की कि पूरे सप्ताह के दौरान राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम आयोजित कर महिला स्वच्छता चैंपियनों, महिला सरपंचों, ‘आशा’ से जुड़ी कार्यकर्ताओं, स्कूल शिक्षकों, युवा विद्यार्थियों और वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि गुजरात में एक विशाल कार्यक्रम के आयोजन के साथ इस सप्ताह का समापन होगा। ‘स्वच्छ शक्ति 2017’ नामक इस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 6000 महिला सरपंचों को संबोधित करेंगे और स्वच्छ भारत में उनके अहम योगदान के लिए उन्हें सम्मानित करेंगे।
मंत्री महोदय ने यह भी घोषणा की कि देश में ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) जिलों की संख्या अब 100 के पार चली गई है। इसी तरह 1.7 लाख से ज्यादा गांव अब ओडीएफ हो गये हैं। उन्होंने कहा कि आज हासिल की गई इस महत्वपूर्ण उपलब्धि ने इसे मिशन के लिए दोहरी खुशी के अवसर में तब्दील कर दिया है। उन्होंने स्वच्छ एवं खुले में शौच मुक्त भारत को एक वास्तविकता में तब्दील करने संबंधी प्रधानमंत्री के विजन में उल्लेखनीय योगदान देने के लिए स्वच्छ भारत मिशन से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति, विशेषकर इन 100 जिलों के प्रशासन की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
हरियाणा के विकास एवं पंचायत और कृषि मंत्री ओ. पी. धनखड़ भी इस अवसर पर उपस्थित थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि महिलाएं स्वच्छ भारत मिशन की स्वाभाविक नेता हैं। उन्होंने यह भी घोषणा की कि हरियाणा नवंबर, 2017 तक एक ओडीएफ राज्य बन जायेगा। केंद्र एवं राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ अन्य हितधारकों ने भी इस समारोह में भाग लिया।

आर्सेनिक के बारे में जागरूकता जरूरी : उमा भारती

नई दिल्ली : केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती ने कहा है कि गंगा बेसिन में आर्सेनिक की समस्या से करोड़ों लोग प्रभावित हो रहे हैं और इस समस्या के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए एक समग्र आंदोलन चलाए जाने की जरूरत है। नई दिल्ली में केंद्रीय भूमि जल बोर्ड की ओर से ‘गंगा बेसिन के भूजल में आर्सेनिक की समस्या एवं निराकरण’ विषय पर आयोजित कार्याशाला का उदघाटन करते हुए उन्होंने कहा कि भूजल में आर्सेनिक की समस्या से निपटने के लिए इस कार्यशाला की रिपोर्ट आने के बाद मंत्रालय एक व्यापक कार्ययोजना तैयार करेगा, जिसमें राज्य सरकारों एवं गैर सरकारी संगठनों का भी सहयोग लिया जायेगा। विकास में जनभागिदारी के महत्व पर जोर डालते हुए उन्होंने कहा कि भूजल में आर्सेनिक एवं अन्य प्रदूषण से निपटने के लिए भी जनआंदोलन खड़ा करना पड़ेगा। इसी प्रकार जल के सदुपयोग को भी जन आंदोलन बनाये जाने की जरूरत है। सुश्री भारती ने कहा कि उन्होंने भी ऐसे कई गांव देखे हैं, जहां जल संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य हुआ है।   
सुश्री भारती ने कहा कि ग्रामीण भारत को पीने के पानी की जरूरतों को पूरा करने में 85 फीसदी के आसपास योगदान भूजल का है। भारत सरकार की योजनाओं में भूजल संसाधनों की स्थिरता एक बडा एजेंडा है। क्योंकि बदलती जीवन शैली और बढ़ती जनसंख्या के साथ पानी की मांग भी बढ़ रही है, और भूजल संसाधनों का संरक्षण करने और उन्हें बचाने की अत्यन्त जरूरत है।        
सुश्री भारती ने कहा कि भूजल संसाधनों से संबंधित समस्याओं में से एक प्रमुख समस्या पानी की गुणवत्ता की है। भूजल में आर्सेनिक की मौजूदगी जहर के समान है और यह मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड और जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय द्वारा गंगा बेसिन में कृत्रिम पुनर्भरण और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे भूजल की गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद मिलेगी ।
केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री ने विश्वविद्यालयों, आईआईटी और अनुसंधान संस्थानों में काम कर रहे भूजल विशेषज्ञों से आह्वान किया कि वे भी अपने महत्वपूर्ण सुझाव दें, ताकि मंत्रालय को इस समस्या के समाधान के लिए भविष्य की रणनीति बनाने में सहायता मिल सके।
कार्यशाला के उदघाटन सत्र में केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण राज्य मंत्री संजीव बालियान ने कहा कि भूजल में आर्सेनिक की समस्या से देश की 50 फीसदी जनता जूझ रही है। उन्होंने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए सभी विभागों को एक सामूहिक सोच बनानी पडे़गी और मिलकर कार्य करना होगा। मंत्रालय के सचिव डॉ. अमरजीत सिंह ने इस अवसर पर कहा कि गंगा नदी से ही सर्वाधिक जल मिल रहा है और यही नदी आर्सेनिक से ज्यादा प्रदूषित है। इस समस्या के निजात पाने के लिए राज्यों में टास्क फोर्स बनाकर कार्य किया जायेगा। एक दिवसीय इस कार्यशाला में देशभर के विभिन्न राज्यों एवं संस्थानों से आए 300 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला के लिए 23 प्रपत्र चुने गए, जिसमें से सात प्रपत्रों पर विशेषज्ञों एवं भूजल वैज्ञानिकों के बीच विस्तृत चर्चा हुई।

कटाव निरोधक कार्य के लिए 4268.25 लाख रुपये स्वीकृत

पटना : जल संसाधन विभाग ने जानकारी दी है कि राघोपुर दियारान्तर्गत गंगा नदी के दायें धार के बायें किनारे एवं बायें धार के दायें एवं बायें किनारे स्थित विभिन्न बिन्दुओं पर कटाव निरोधक कार्य हेतु प्राक्कलित राशि 4268.25 लाख रुपये की प्रशासनिक एवं व्यय की स्वीकृति दी गई है। सूचनानुसार राशि की निकासी एवं व्ययन हेतु कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जन निस्सरण प्रमंडल, लालगंज को अधिकृत किया गया है तथा इस कार्य के लिए नियंत्री पदाधिकारी प्रधान सचिव, जल संसाधन विभाग, पटना होंगे। उक्त निर्माण कार्य की समय सीमा वित्तीय वर्ष 2016-17 एवं 2017-18 में कार्यान्वित करते हुए दिनांक 31 मई, 2017 तक पूर्ण करने की है।
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केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर के 5 शिक्षण संस्थानों की स्थापना करेगी

नई दिल्ली : केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं संसदीय कार्य राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने युद्धस्तर पर अभियान चलाया हुआ है जिससे कि अल्पसंख्यकों सहित समाज के सभी तबकों को सस्ती, सुलभ गुणवत्ता वाली शिक्षा मिल सके। नई दिल्ली में “माइनॉरिटी कम्युनिटी टीचर्स एसोसिएशन” के नेशनल सेमिनार को सम्बोधित करते हुए श्री नकवी ने कहा कि अल्पसंख्यक मंत्रालय अल्पसंख्यकों को बेहतर पारंपरिक एवं आधुनिक शिक्षा मुहैय्या कराने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के 5 शिक्षण संस्थानों की स्थापना करेगा। तकनीकी, मेडिकल, आयुर्वेद, यूनानी सहित विश्वस्तरीय कौशल विकास की शिक्षा देने वाले संस्थान देश भर में स्थापित किये जायेंगे। एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया है, जो शिक्षण संस्थानों की रुपरेखा-स्थानों आदि के बारे में चर्चा कर रही है और जल्द ही अपनी विस्तृत रिपोर्ट देगी और हमारी कोशिश होगी कि यह शिक्षण संस्थान 2018 से काम करना शुरू कर दें। इन शिक्षण संस्थानों में 40 प्रतिशत आरक्षण लड़कियों के लिए किये जाने का प्रस्ताव है। 
श्री नकवी ने कहा कि अल्पसंख्यक मंत्रालय का पूरा जोर इस बात पर है कि अल्पसंख्यकों को बेहतर शिक्षा के साथ-साथ उन्हें विभिन्न कौशल ट्रेनिंग भी दी जाये, जिससे छात्र रोजगार के योग्य हो सकें। अल्पसंख्यकों को बेहतर शिक्षा दिलाने और बेहतर रोजगारपरक ट्रेनिंग देने के लिए मंत्रालय विभिन्न योजनाएं चला रहा है। 
श्री नकवी ने कहा कि केंद्र सरकार ने इस बार अल्पसंख्यक मंत्रालय के बजट में बड़ी वृद्धि की है। 2017-18 के लिए अल्पसंख्यक मंत्रालय का बजट बढ़ाकर 4195.48 करोड़ रुपए कर दिया गया है। यह पिछले बजट के 3827.25 करोड़ रुपए के मुकाबले 368.23 करोड़ रुपए (9.6 प्रतिशत की वृद्धि) अधिक है। श्री नकवी ने कहा कि बजट में बढ़ोतरी से अल्पसंख्यकों के सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक सशक्तिकरण में मदद मिलेगी। 
श्री नकवी ने कहा कि इसबार बजट का 70 प्रतिशत से ज्यादा धन अल्पसंख्यकों के शैक्षिक सशक्तिकरण एवं कौशल विकास, रोजगारपरक ट्रेनिंग पर खर्च किया जायेगा। बजट का बड़ा भाग विभिन्न स्कालरशिप, फेलोशिप और कौशल विकास की योजनाओं जैसे ‘सीखो और कमाओ’, ‘नई मंजिल’, ‘नई रौशनी’, ‘उस्ताद’, ‘गरीब नवाज कौशल विकास केंद्र’, ‘बेगम हजरत महल स्कॉलरशिप’ पर खर्च किये जाने का प्रावधान है। इसके अलावा बहु-क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम (एमएसडीपी) के तहत भी शैक्षिक विकास की गतिविधियों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर धन खर्च किया जायेगा। 
मेरिट-कम-मीन्स स्कालरशिप पर 393.5 करोड़ रुपए, प्री-मेट्रिक स्कालरशिप पर 950 करोड़ रुपए, पोस्ट-मेट्रिक स्कालरशिप पर 550 करोड़ रुपए, ‘सीखो और कमाओ’ पर पिछले साल के मुकाबले 40 करोड़ रुपए की वृद्धि के साथ 250 करोड़ रुपए, ‘नई मंजिल’ पर 56 करोड़ रुपए की वृद्धि के साथ 176 करोड़ रुपए, मौलाना आजाद फेलोशिप स्कीम पर 100 करोड़ रुपए खर्च किये जाने का प्रावधान है। मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन के लिए 113 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। श्री नकवी ने कहा कि 2017-18 में 35 लाख से ज्यादा छात्रों को विभिन्न स्कॉलरशिप दी जाएगी। इसके अलावा 2 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार परक ट्रेनिंग दी जाएगी। 
श्री नकवी ने कहा कि 16 से ज्यादा ‘‘गुरुकुल’’ प्रकार के आवासीय स्कूलों को स्वीकृति दी गई है। साथ ही जो मदरसें मुख्यधारा की शिक्षा भी दे रहे हैं, उन्हें भी मदद दी जारी रही है। अल्पसंख्यकों के शैक्षिक सशक्तिकरण के लिए किये जा रहे केंद्र सरकार के प्रयासों में गरीब नवाज स्किल डेवलपमेंट सेंटर शुरू करना, छात्राओं के लिए बेगम हजरत महल स्कालरशिप करना एवं 500 से ज्यादा उच्च शैक्षिक मानकों से भरपूर आवासीय विद्यालय एवं रोजगार परक कौशल विकास केंद्र शामिल हैं।
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बुधवार, 1 मार्च 2017

दुर्घटनाओं की सूचना के लिए नया प्रारूप

नई दिल्ली : सड़क दुर्घटनाओं की सूचना के लिए प्रारूप की समीक्षा के संबंध में सड़क यातायात एवं राजमार्ग मंत्रालय ने एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। समिति की अध्यक्षता यातायात अनुसंधान शाखा की वरिष्ठ सलाहकार ने की। समिति में आईआईटी दिल्ली और आईआईटी खड़गपुर और डब्ल्यूएचओ के विशेषज्ञों सहित राज्यों के पुलिस और यातायात विभाग तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। समिति ने अपने सुझाव सौंप दिए थे, जिन्हें सड़क यातायात एवं राजमार्ग मंत्रालय ने स्वीकर कर लिया है।
मीडिया से बातचीत करते हुए यातायात अनुसंधान शाखा की वरिष्ठ सलाहकार और समिति की अध्यक्ष कीर्ति सक्सेना ने बताया कि दुर्घटना स्थल से पर्याप्त आंकड़े और सूचना न प्राप्त होने के कारण पुलिस थानों में प्राथमिकी सही तौर पर दर्ज नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं की सूचना संबंधी मौजूदा प्रारूप की खामियों का जायजा लेने के लिए कई बार बैठक की गई। विभिन्न राज्यों और देश के अन्य स्थानों पर दुर्घटनाओं की सूचना के तरीकों का अध्ययन करने के बाद मंत्रालय को नया प्रारूप बनाने का सुझाव दिया गया। इसमें पुलिस की प्रमुख भूमिका होगी।  
समिति सदस्य आईआईटी दिल्ली की प्रो. गीतम तिवारी ने नए प्रारूप का विवरण दिया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में सूचना पुलिस थानों में की जाती हैं और राज्य सरकारें केंद्र को रिपोर्ट भेजती हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि नया प्रारूप खामियों को दूर करने में सफल होगा।
समिति सदस्य आईआईटी खड़गपुर की प्रो. सुदेष्णा मित्रा ने कहा कि दुर्घटना स्थल की रिकॉर्डिंग की अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि जीपीएस से दुर्घटना स्थल पर सड़क की बनावट को समझने में आसानी होगी।
व्यापक चर्चा के बाद समिति ने एक एकीकृत  दुर्घटना रिकॉर्डें प्रारूप तैयार किया है। इसे सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस लागू करेगी। दुर्घटना रिकॉर्डें प्रारूप में पांच खंड हैं, जिसमें दुर्घटना स्थल, सड़क की हालत और दुघटना में लिप्त वाहन का विवरण और दुर्घटनाग्रस्त व्यक्तियों का ब्यौरा शामिल है। पहले खंड में दुर्घटना स्थल, वाहनों की किस्म आदि, दूसरे खंड में सड़क की हालत, टूट-फूट आदि, तीसरे खंड में वाहनों का विवरण, चैथे खंड में वाहन चालकों द्वारा यातायात नियमों की कथित अवहेलना और पांचवें खंड में वाहन चालकों के अलावा अन्य व्यक्तियों का विवरण दर्ज किया जाएगा।
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बुधवार, 22 फ़रवरी 2017

आम के मंजरों की सुरक्षा से ही अच्छी फसल

पटना : दहिया कीट (मिलीबग), मृदरोमिल (पाउडरी मिल्ड्यु) और एन्थ्रेकनोज जैसी कीट/व्याधियों का आक्रमण मुख्य इस मौसम में होता है। इससे मंजरों की सुरक्षा के लिए तीन छिड़काव सही समय पर करने की अनुशंसा है, जिससे उत्पादन अच्छा होता है।
पहला छिड़काव : आम में पहला छिड़काव मंजर निकलने के पहले किसी एक अनुशंसित कीटनाशी से किया जाता है। जिसे किसान पेड़ को धोना कहते है। पहला छिड़काव इस तरह किया जाता है कि कीटनाशी पेड़ की छाल के दरारों में छुपे मधुआ कीट तक पहुंचे, क्योंकि ये वायुमंडल का तापमान बढ़ने के साथ यह अपनी सख्या वृद्धि में लग जाती है। 
दूसरा छिड़काव : मंजरों में सरसों के बराबर दाना लग जाने पर कीटनाशी के साथ-साथ किसी एक फफूंदनाशी को मिलाने की अनुशंसा है, जो मंजर को पाउडरी मिल्ड्यू एवं एन्थैकनोज रोग से सुरक्षित रखता है। साथ ही इस घोल में नैफथलीन एसेटीक एसीट (प्लानोफिक्स) हारमोन मिलाया जाता है, जो फलों को गिरने से रोकता है। 
तीसरा छिड़काव : आम के टिकोले मटर के दाने के बराबर हो जाने पर तीसरा छिड़काव किया जाना चाहिए। तीसरे छिड़काव में नैफथलीन एसेटीक एसीड के अलावा आवश्यकतानुसार एक फफूंदनाशी को मिलाकर छिड़काव किया जाना चाहिए। इसके लिए निम्न रासायनिक अनुपात का घोल कारगर हो सकता है।
मंजर के समय बूंदाबादी हो जाने पर घुलनशील सल्फर या कार्बेन्डाजिम का प्रयोग कीटनाशी के घोल के साथ अवश्य करना चाहिए। दहिया कीट नियंत्रण हेतु कीटनाशी के तैयार घोल में कोई स्टीकर अवश्य मिला दें। फल एवं मंजर को गिरने से बचाने के लिए दूसरे एवं तीसरे छिड़काव में कीटनाशक के तैयार घोल के साथ नैफथलीन एसेटिक एसीड का 4 मिली लीटर प्रति 10 लीटर की दर से उपयोग करना चाहिए। दूसरे छिड़काव में सल्फर 80 घुलनशील चूर्ण 3 ग्राम प्रति लीटर घोल की दर से मिलाकर छिड़काव करना लाभप्रद होगा। नैफथलीन एसेटीक एसीड का छिड़काव में निर्धारित मात्रा से अधिक होने पर मंजर जल जाता है। विशेष जानकारी एवं सुविधा के लिए किसानों द्वारा नजदीक के पौधा संरक्षण केन्द्र, सहायक निदेशक, पौधा सरंक्षण अथवा जिला कृषि पदाधिकारी के कार्यालय एवं कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों से संपर्क किया जा सकता है।
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6 पाठ्यक्रमों को स्नातकोत्तर डिग्री की मान्यता

  • भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान
  • निर्णय से छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का रास्ता खुला
 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : पुणे स्थित भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (एफटीआईआई) के लिए एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए भारतीय विश्वविद्यालय संघ ने संस्थान के छह स्नातकोत्तर डिप्लोमा कार्यक्रमों को स्नातकोत्तर डिग्री के समकक्ष मान्यता प्रदान कर दी है। इस कदम से एफटीआईआई शिक्षा के एक नए दायरे में पहुंच गया है, जहां छात्रों को भारत और विदेशों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
एफटीआईआई 2011 से प्रयास कर रहा था कि उसके कुछ कार्यक्रमों को स्नातकोत्तर डिग्री की मान्यता प्राप्त हो जाए। हाल में भारतीय विश्वविद्यालय संघ की एक चार सदस्यीय समिति ने एफटीआईआई का दौरा किया था, जहां उन्हें विभागाध्यक्षों और शिक्षकों द्वारा समस्त जानकारियां दी गई थी तथा एक प्रेजेंटेशन भी समिति के समक्ष पेश किया गया था। समिति ने अध्ययन और तकनीकी विभागों का भी दौरा किया तथा परिसर में छात्र प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की।
एफटीआईआई के अध्यक्ष गजेन्द्र चैहान तथा एफटीआईआई आकादमिक परिषद के सदस्य पवन मानवी और राजन वेलुकर ने एफटीआईआई के बारे में समिति को अवगत कराया। एफटीआईआई के प्रतिष्ठित पुरा छात्र विधू विनोद चोपड़ा, सतीश शाह, टॉम एल्टार, अमिताभ शुक्ला, महेश अनय, बिश्वदीप चटर्जी और सिद्धार्थ तातूसकर भी प्रेजेंटेशन के समय उपस्थित थे। उपरोक्त कार्यक्रम दो और तीन वर्षों के हैं, जिनका विवरण इस प्रकार है - 1. सिनेमाटोग्राफी 2. संपादन 3. निर्देशन एवं पटकथा लेखन 4. साउंड रिकॉर्डिंग एवं साउंड डिजाइन 5. कला निर्देशन एवं प्रोडक्शन डिजाइन 6. अभिनय।

पुस्तकों के संयुक्त प्रकाशन के लिए समझौता

नई दिल्ली : सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन प्रकाशन विभाग और सस्ता साहित्य मंडल ने एक समझौता-दस्तावेज पर हस्ताक्षर किये। समझौते के तहत दोनों संस्थान स्वतंत्रता संग्राम के महानायकों, सांस्कृतिक हस्तियों और राष्ट्र विकास में कार्य करने वाले अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तियों के बारे में संयुक्त रूप से पुस्तकों का प्रकाशन करेंगे। यह समझौता दोनों संगठनों के बीच एक संयुक्त पहल है, जिसके तहत युवा पीढ़ी को भारत की समृद्ध और विविधतापूर्ण संस्कृति तथा इतिहास की जानकारी दी जायेगी। विभिन्न विषयों पर लोगों को बेहतर साहित्य उपलब्ध कराया जायेगा। इस अवसर पर सूचना एवं प्रसारण सचिव अजय मित्तल, सस्ता साहित्य मंडल के सचिव प्रोफेसर इंद्रनाथ चैधरी, प्रकाशन विभाग की एडीजी डॉ. साधना राउत और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव मिहिर कुमार सिंह उपस्थित थे।
समझौते में 20 पुस्तकों के एक सेट का संयुक्त प्रकाशन किया जायेगा, जिनमें 10 पुस्तकों को दोनों संस्थान एक दूसरे के कैटलॉग से चुनेंगे। इसके अलावा स्वतंत्रता संग्राम, भारतीय संस्कृति और नैतिकता और आदर्शों पर 10 छोटी नई पुस्तकों के एक सेट का संयुक्त प्रकाशन भी किया जायेगा। इस समझौते से दोनों संगठनों को यह अवसर मिलेगा कि वे अपने एक-दूसरे द्वारा प्रकाशित पुस्तकों की प्रदर्शनी और ब्रिकी का आयोजन कर सकते हैं। यह समझौता हस्ताक्षर करने की तिथि से 3 वर्षों तक मान्य होगा, जिसे आपसी रजामंदी के तहत बढ़ाया जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि महात्मा गांधी ने 1925 में न्यास के रूप में सस्ता साहित्य मंडल की स्थापना की थी, जिसका उद्देश्य उच्चस्तरीय हिंदी साहित्य को प्रोत्साहित, विकसित और प्रकाशित करना तथा जनता को सस्ती कीमतों पर उपलब्ध कराना था। अपनी स्थापना के समय से अबतक सस्ता साहित्य मंडल ने भारतीय संस्कृति, विरासत, भारतीय महाकाव्यों और कहानियों की 2500 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित की हैं। संगठन ने बच्चों के लिए विशाल साहित्य का सृजन किया है, ताकि उन्हें राष्ट्र और मानवता के प्रति प्रेम और जीवन के आदर्शों की शिक्षा दी जा सके।

‘हुनर हाट’ का फेसबुक पेज लांच

नई दिल्ली : अल्पसंख्यक कार्य मामले (स्वतंत्र प्रभार) तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने अल्पसंख्यक मामले के दूसरे हुनर हाट का फेसबुक पेज लॉन्च किया। हुनर हाट का फेसबुक पेज https://www.facebook.com/hunarhaat17/ लॉन्च करते हुए श्री नकवी ने कहा कि ‘शिल्पकला और व्यंजन का संगम’ थीम पर आधारित दूसरा हुनर हाट में अबतक 15 लाख से अधिक लोग आये। यह हुनर हाट इस दृष्टि से अनूंठा है कि इसमें देश के विभिन्न भागों की शिल्पकला और पारंपरिक व्यंजनों को प्रस्तुत किया गया है। हुनर हाट में एक ‘बावर्चीखाना’ भी है, जहां लोग देश के विभिन्न हिस्सों के व्यंजनों का भी आनंद ले रहे है। श्री नकवी ने कहा कि अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय हुनर हाट को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दे रहा है। फेसबुक पेज लॉन्च करना इस प्रयास का हिस्सा है। फेसबुक पेज पर मंत्रालय द्वारा आयोजित दो हुनर हाट के बारे में जानकारी दी गई है। इसमें शिल्पकारों के राज्य, शिल्पकला का विवरण तथा खान-पान के बारे में जानकारी दी गई है। फेसबुक पेज पर हुनर हाट के चित्र और वीडियो भी उपलब्ध हैं। दूसरे हुनर हाट के 130 स्टॉलों पर सभी राज्यों और संघशासित प्रदेशों से आए 100 से अधिक शिल्पकार और 30 खानपान विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। शिल्पकारों में राज्य तथा राष्ट्रीय स्तर के अनेक पुरस्कार विजेता हैं। ये उत्तर प्रदेश, राजस्थान, जम्मू और कश्मीर, गुजरात, मणिपुर, असम, ओडिशा, केरल, तेलंगाना, बिहार आदि राज्यों से आये हैं। पहले हुनर हाट का आयोजन नवम्बर, 2016 में 14 से 27 नवम्बर तक आयोजित भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में किया गया था। श्री नकवी ने बताया कि हुनर हाट जैसे कार्यक्रमों तथा अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों को सभी राज्यों में आयोजित करने के लिए ‘हुनर हब’ स्थापित करने के बारे में अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय  काम कर रहा है। दो हुनर हाट की सफलता से उत्साहित मंत्रालय निकट भविष्य में ऐेसे आयोजन मुम्बई, कोलकाता, हैदराबाद, लखनऊ, पटना, गुवाहाटी तथा अन्य स्थानों पर करेगा।
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ई-वीजा पर भारत आने वाले पर्यटकों के लिए प्री-लोडेड सिम कार्ड की शुरुआत

 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : पर्यटन एवं संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. महेश शर्मा ने ई-वीजा पर भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों को प्री-लोडेड सिम कार्ड उपलब्ध कराने के लिए पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार की पहल की शुरुआत की। इस अवसर पर संबोधित करते हुए डॉ. शर्मा ने कहा कि इस विशिष्ट पहल से भारत में अपने आगमन के तुरंत बाद विदेशी पर्यटकों को अपने प्रियजनों के साथ बातचीत करने में सहायता मिलेगी। इससे पहले पर्यटन मंत्रालय ने 12 भारतीय भाषाओं में चैबीसों घंटे उपलब्ध होने वाली पर्यटक हेल्पलाइन 1800111363 की भी शुरुआत की थी, ताकि विदेशी पर्यटकों को उनकी अपनी भाषा में आवश्यक जानकारी मिल सके। डॉ. शर्मा ने इस सिम वाली पहली किट यात्रा और पर्यटन क्षेत्र के एक प्रतिनिधि को सौंपी। पर्यटन सचिव विनोद जुत्सी, संचार सचिव जे. एस. दीपक और वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
इस पहल की शुरुआत भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के सहयोग से की गई है, जिसमें बीएसएनएल ई-वीजा पर भारत आने वाले विदेशी यात्रियों को प्री-लोडेड सिम कार्ड बांटेगा। यह सुविधा शुरुआत में इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (टी-3 टर्मिनल) नई दिल्ली पर उपलब्ध होगी। इसे बाद में ई-वीजा सुविधा उपलब्ध होने वाले बकाया 15 अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों पर भी लागू कर दिया जायेगा।
प्री-लोडेड सिम कार्ड सुविधा प्रदान करने के लिए बीएसएनएल हवाई अड्डे पहुंचने पर विदेशी पर्यटकों से उनके ई-वीजा और पासपोर्ट के पहले पृष्ठ की कॉपी प्राप्त करेगा। ये सिम कार्ड 50 रुपये के टॉक टाइम और 50 एमबी डेटा के मूल्य से प्री-लोडेड होंगे। जिन्हें तत्काल आधार पर एक्टिवेट कर दिया जायेगा, ताकि पर्यटक इस सुविधा का तुरंत लाभ उठा सकें। इस पहल का उद्देश्य विदेशी पर्यटकों को कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपने प्रियजनों के संपर्क में रहने में सक्षम हो सकें। इसके अलावा इससे विदेशी पर्यटकों को किसी परेशानी या चिकित्सीय आपातकालीन स्थिति के दौरान किसी सहायता या मार्गदर्शन के लिए मंत्रालय की चैबीसों घंटे कार्यरत बहुभाषीय टोल फ्री हेल्पलाइन से संपर्क करने में भी मदद मिलेगी।

‘साथिया’ रिसोर्स किट एवं ‘साथिया सलाह’ मोबाइल ऐप लांच

नई दिल्ली : स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव सी के मिश्रा ने राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरकेएसके) के एक हिस्से के रुप में किशोर वय के लड़कियों एवं लड़कों के लिए ‘साथिया’ रिसोर्स किट एवं ‘साथिया सलाह’ मोबाइल ऐप लांच किया। इस कार्यक्रम के तहत एक प्रमुख कदम पीयर एजुकेटर्स (साथिया) की प्रस्तुति है, जो किशोर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मांग का सृजन करने के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में काम करता है तथा उनके समकक्ष समूहों में प्रमुख किशोर स्वास्थ्य मुद्दों पर उम्र से संबंधित उपयुक्त ज्ञान प्रदान करता है। साथियों को ऐसा करने में सुसज्जित करने एवं उन्हें इसके लिए सक्षम बनाने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने ‘साथिया’ रिसोर्स किट (‘साथिया’ सलाह मोबइल ऐप) लांच किया। 
रिसोर्स किट एवं मोबाइल ऐप को प्रस्तुत करते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव सी के मिश्रा ने कहा कि हमारे देश में 253 मिलियन किशोर वय की लड़कियां एवं लड़के हैं, जो संख्या के लिहाज से विश्व में सर्वाधिक हैं और जब दुनिया भर में आरएमएनसीएच लांच किया गया, तो भारत अर्थात आरएमएनसीएच में किशोर संघटक जोड़ने वाला पहला देश था, जिसने इसे आज का आरएमएनसीएच-। प्रोग्राम बना दिया। उन्होंने कहा कि किशोर वय की लड़कियां एवं लड़के देश की महत्वपूर्ण संपत्ति हैं, जो भविष्य में देश की अर्थव्यवस्था के सबसे बड़े लाभदायक हिस्से बन जाएंगे, इसलिए उनका स्वास्थ्य एवं तंदरुस्ती हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। देश की किशोर वय की लड़कियों एवं लड़कों की स्वास्थ्य एवं विकास आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने जनवरी, 2014 में राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरकेएसके) आरंभ किया। आरकेएसके किशोर वय के लड़कियों एवं लड़कों के लिए छह कार्यनीतिक प्राथमिकताओं - पोषाहार, यौन एवं प्रजनक स्वास्थ्य (एसआरएच), गैर-संचारी बीमारियां (एनसीडी), मादक द्रव्यों का दुरुपयोग, जख्म एवं हिंसा (जेंडर आधारित हिंसा समेत) तथा मानसिक स्वास्थ्य की पहचान करता है। 
लांच के अवसर पर उपस्थित मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा इस अवसर पर डेवलपमेंट पार्टनर्स ( यूएनएफपीए, पीएफआई) के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे, जिन्होंने रिसोर्स किट के विकास में योगदान दिया।

कैलाश-मानसरोवर यात्रा 2017 का पंजीकरण शुरू 

नई दिल्ली : विदेश मंत्रालय द्वारा आयोजित कैलाश-मानसरोवर यात्रा का पंजीकरण 01 फरवरी, 2017 से शुरू हो गया है। इस वर्ष यात्रा 12 जून से 8 सितंबर तक चलेगी और दो रास्तों से होकर गुजरेगी। 01 जनवरी, 2017 तक यात्रा के आवेदनकर्ताओं की न्यूनतम आयु 18 वर्ष से कम और 70 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। पंजीकरण की अंतिम तिथि 15 मार्च, 2017 है।
इस यात्रा के दो रास्ते हैं। पहला रास्ता उत्तराखंड के लिपूलेख दर्रे से गुजरता है। इस रास्ते से की जाने वाली यात्रा का खर्च प्रति व्यक्ति लगभग 1.6 लाख रुपए है। यह यात्रा 18 दलों में होती है और प्रत्येक दल में 60 तीर्थ यात्री होते हैं। यात्रा की अवधि 24 दिनों की है, जिनमें तीन दिन दिल्ली में लगते हैं, ताकि शुरूआती तैयारी की जा सके। प्रत्येक दल 24-24 दिनों में गंतव्य तक पहुंचता है। इस रास्ते से होने वाली यात्रा नारायण आश्रम और पाताल भुवनेश्वर जैसे प्रमुख स्थानों से गुजरती है। तीर्थ यात्री छियालेख घाटी या ‘ओम पर्वत’ के भी दर्शन कर सकते हैं।
दूसरा रास्ता सिक्किम स्थित नाथुला दर्रे से होकर गुजरता है। इस रास्ते पर वाहन चल सकते हैं और जो वरिष्ठ नागरिक पैदल नहीं जा सकते, उनके लिए यह रास्ता बहुत उपयुक्त है। गंगटोक से होता हुआ यह रास्ता प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर हंगू लेक और विशाल तिब्बती पठार से गुजरता है। यह यात्रा 21 दिनों में पूरी होती है, जिनमें शुरूआती तैयारी के लिए तीन दिन दिल्ली के भी शामिल हैं। इस यात्रा में प्रति व्यक्ति लगभग 2 लाख रुपए खर्च बैठता है। इस वर्ष 50-50 तीर्थ यात्रियों के आठ दल इस मार्ग से यात्रा करेंगे।
पिछले वर्ष की तरह इस बार भी पहली बार यात्रा पर जाने वाले आवेदनकर्ता, चिकित्सक और विवाहित दंपतियों को प्राथमिकता दी जाएगी। वरिष्ठ नागरिकों के लिए नाथुला मार्ग ज्यादा उपयुक्त है। चार व्यक्ति एकसाथ यात्रा के लिए आवेदन कर सकते हैं। यात्रीगण दोनों मार्गों का चयन कर सकते है, जिनमें एक मार्ग को प्राथमिकता देनी होगी। उनके मार्ग और दल का आवंटन कम्प्यूटर द्वारा लॉटरी से होगा।
भारत सरकार द्वारा डिजिटलीकरण को प्रोत्साहन देने के मद्देनजर यात्रा का पंजीकरण पूरी तरह ऑनलाइन किया जा रहा है, जिसके लिए वेबसाइट http://kmy.gov.in का उपयोग किया जा सकता है। यात्रियों को पासपोर्ट का फोटो वाला पेज, जिस पर व्यक्ति की पूरी जानकारी लिखी होती है और अंतिम पेज जहां पता लिखा होता है, उसे अपलोड करना होगा। उसके अलावा ताजा फोटो को भी अपलोड करना है। ऑनलाइन फॉर्म के दिशा-निर्देश हिन्दी और अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध हैं और अधूरे फॉर्म अंतिम तारीख के बाद अपने आप निरस्त हो जाएंगे।
आवेदनकर्ताओं को कम्प्यूटर द्वारा संचालित चयन प्रणाली से चुना जाएगा और इसकी सूचना ई-मेल या एसएमएस द्वारा दी जाएगी। चुने जाने के बाद आवेदकों को वेबसाइट पर दिए गए विवरण के अनुसार एक निश्चित शुल्क देना होगा। आवेदक हेल्पलाइन नंबर 011-24300655 पर भी सारी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

मंगलवार, 7 फ़रवरी 2017

मार्च, 2018 तक खुले में शौच से मुक्त होगा महाराष्ट्र

नई दिल्ली : महाराष्ट्र के मुख्य सचिव स्वाधीन क्षत्रिय ने केंद्र सरकार को अवगत कराया है कि महाराष्ट्र मार्च, 2018 तक खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) राज्य हो जायेगा। उन्होंने ये बातें पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के सचिव परमेश्वरन अय्यर के साथ मुंबई में संपन्न एक बैठक में कही और उल्लेख किया कि महाराष्ट्र इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सही दिशा में अग्रसर है।
सचिव ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार के पास ओडीएफ घोषणा के लिए त्रिस्तरीय सत्यापन प्रणाली के साथ एक मजबूत तीसरा पक्ष सत्यापन प्रणाली भी है। मुख्य सचिव ने कहा कि महाराष्ट्र का लक्ष्य न सिर्फ ओडीएफ उपलब्धि हासिल करना है, बल्कि राज्य में स्वच्छ भारत कार्यान्वयन के लिए हाथ को साफ रखना, मासिक धर्म स्वच्छता, सामुदायिक शौचालयों आदि को भी शामिल कर स्वच्छता का व्यापक लक्ष्य रखा है। कई स्तरीय साफ-सफाई अभियान - जैसे कार्यालयों को स्वच्छ रखना, जीपी को स्वच्छ रखना, स्वच्छ विद्यालय - का भी काम तेजी से चल रहा है।
इसके बदले मंत्रालयीय सचिव ने मंत्रालय की ओर से राज्य को इस काम के लिए पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है। जिला स्तरीय स्वच्छ भारत प्रेरक पहल के तहत, टाटा ट्रस्ट के साथ सहयोग से मंत्रालय के एसबीएम (जी) गतिविधियों के लिए जिला स्तरीय एक प्रेरक नियुक्त किया जायेगा। सचिव ने सार्वजनिक उद्यम विभाग के सचिव की उपस्थिति में पश्चिमी क्षेत्र के सभी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के मुख्य प्रबंध निदेशकों के सामने स्वच्छ भारत मिशन में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु प्रस्तुति दी। इस प्रस्तुति से कई सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के अधिकारी प्रभावित हुए और अपने द्वारा किए जा रहे प्रयासों जैसे विद्यालय स्वच्छता, राजमार्गों पर स्वच्छता के लिए सामुदायिक शौचालयों आदि कार्यक्रमों के बारे में विवरणी भी पेश की। सार्वजनिक उद्यम विभाग के सचिव ने इस बैठक में जोर देते हुए कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम अपने कर्मचारियों और प्रबंधन प्रशिक्षुओं को बदलाव के लिए स्वच्छता चैंपियन और प्रतिनिधि के रूप में भी प्रशिक्षित करें।