COPYRIGHT © RAJIV MANI, Journalist, Patna

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बुधवार, 22 फ़रवरी 2017

आम के मंजरों की सुरक्षा से ही अच्छी फसल

पटना : दहिया कीट (मिलीबग), मृदरोमिल (पाउडरी मिल्ड्यु) और एन्थ्रेकनोज जैसी कीट/व्याधियों का आक्रमण मुख्य इस मौसम में होता है। इससे मंजरों की सुरक्षा के लिए तीन छिड़काव सही समय पर करने की अनुशंसा है, जिससे उत्पादन अच्छा होता है।
पहला छिड़काव : आम में पहला छिड़काव मंजर निकलने के पहले किसी एक अनुशंसित कीटनाशी से किया जाता है। जिसे किसान पेड़ को धोना कहते है। पहला छिड़काव इस तरह किया जाता है कि कीटनाशी पेड़ की छाल के दरारों में छुपे मधुआ कीट तक पहुंचे, क्योंकि ये वायुमंडल का तापमान बढ़ने के साथ यह अपनी सख्या वृद्धि में लग जाती है। 
दूसरा छिड़काव : मंजरों में सरसों के बराबर दाना लग जाने पर कीटनाशी के साथ-साथ किसी एक फफूंदनाशी को मिलाने की अनुशंसा है, जो मंजर को पाउडरी मिल्ड्यू एवं एन्थैकनोज रोग से सुरक्षित रखता है। साथ ही इस घोल में नैफथलीन एसेटीक एसीट (प्लानोफिक्स) हारमोन मिलाया जाता है, जो फलों को गिरने से रोकता है। 
तीसरा छिड़काव : आम के टिकोले मटर के दाने के बराबर हो जाने पर तीसरा छिड़काव किया जाना चाहिए। तीसरे छिड़काव में नैफथलीन एसेटीक एसीड के अलावा आवश्यकतानुसार एक फफूंदनाशी को मिलाकर छिड़काव किया जाना चाहिए। इसके लिए निम्न रासायनिक अनुपात का घोल कारगर हो सकता है।
मंजर के समय बूंदाबादी हो जाने पर घुलनशील सल्फर या कार्बेन्डाजिम का प्रयोग कीटनाशी के घोल के साथ अवश्य करना चाहिए। दहिया कीट नियंत्रण हेतु कीटनाशी के तैयार घोल में कोई स्टीकर अवश्य मिला दें। फल एवं मंजर को गिरने से बचाने के लिए दूसरे एवं तीसरे छिड़काव में कीटनाशक के तैयार घोल के साथ नैफथलीन एसेटिक एसीड का 4 मिली लीटर प्रति 10 लीटर की दर से उपयोग करना चाहिए। दूसरे छिड़काव में सल्फर 80 घुलनशील चूर्ण 3 ग्राम प्रति लीटर घोल की दर से मिलाकर छिड़काव करना लाभप्रद होगा। नैफथलीन एसेटीक एसीड का छिड़काव में निर्धारित मात्रा से अधिक होने पर मंजर जल जाता है। विशेष जानकारी एवं सुविधा के लिए किसानों द्वारा नजदीक के पौधा संरक्षण केन्द्र, सहायक निदेशक, पौधा सरंक्षण अथवा जिला कृषि पदाधिकारी के कार्यालय एवं कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों से संपर्क किया जा सकता है।
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6 पाठ्यक्रमों को स्नातकोत्तर डिग्री की मान्यता

  • भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान
  • निर्णय से छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का रास्ता खुला
 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : पुणे स्थित भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (एफटीआईआई) के लिए एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए भारतीय विश्वविद्यालय संघ ने संस्थान के छह स्नातकोत्तर डिप्लोमा कार्यक्रमों को स्नातकोत्तर डिग्री के समकक्ष मान्यता प्रदान कर दी है। इस कदम से एफटीआईआई शिक्षा के एक नए दायरे में पहुंच गया है, जहां छात्रों को भारत और विदेशों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
एफटीआईआई 2011 से प्रयास कर रहा था कि उसके कुछ कार्यक्रमों को स्नातकोत्तर डिग्री की मान्यता प्राप्त हो जाए। हाल में भारतीय विश्वविद्यालय संघ की एक चार सदस्यीय समिति ने एफटीआईआई का दौरा किया था, जहां उन्हें विभागाध्यक्षों और शिक्षकों द्वारा समस्त जानकारियां दी गई थी तथा एक प्रेजेंटेशन भी समिति के समक्ष पेश किया गया था। समिति ने अध्ययन और तकनीकी विभागों का भी दौरा किया तथा परिसर में छात्र प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की।
एफटीआईआई के अध्यक्ष गजेन्द्र चैहान तथा एफटीआईआई आकादमिक परिषद के सदस्य पवन मानवी और राजन वेलुकर ने एफटीआईआई के बारे में समिति को अवगत कराया। एफटीआईआई के प्रतिष्ठित पुरा छात्र विधू विनोद चोपड़ा, सतीश शाह, टॉम एल्टार, अमिताभ शुक्ला, महेश अनय, बिश्वदीप चटर्जी और सिद्धार्थ तातूसकर भी प्रेजेंटेशन के समय उपस्थित थे। उपरोक्त कार्यक्रम दो और तीन वर्षों के हैं, जिनका विवरण इस प्रकार है - 1. सिनेमाटोग्राफी 2. संपादन 3. निर्देशन एवं पटकथा लेखन 4. साउंड रिकॉर्डिंग एवं साउंड डिजाइन 5. कला निर्देशन एवं प्रोडक्शन डिजाइन 6. अभिनय।

पुस्तकों के संयुक्त प्रकाशन के लिए समझौता

नई दिल्ली : सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन प्रकाशन विभाग और सस्ता साहित्य मंडल ने एक समझौता-दस्तावेज पर हस्ताक्षर किये। समझौते के तहत दोनों संस्थान स्वतंत्रता संग्राम के महानायकों, सांस्कृतिक हस्तियों और राष्ट्र विकास में कार्य करने वाले अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तियों के बारे में संयुक्त रूप से पुस्तकों का प्रकाशन करेंगे। यह समझौता दोनों संगठनों के बीच एक संयुक्त पहल है, जिसके तहत युवा पीढ़ी को भारत की समृद्ध और विविधतापूर्ण संस्कृति तथा इतिहास की जानकारी दी जायेगी। विभिन्न विषयों पर लोगों को बेहतर साहित्य उपलब्ध कराया जायेगा। इस अवसर पर सूचना एवं प्रसारण सचिव अजय मित्तल, सस्ता साहित्य मंडल के सचिव प्रोफेसर इंद्रनाथ चैधरी, प्रकाशन विभाग की एडीजी डॉ. साधना राउत और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव मिहिर कुमार सिंह उपस्थित थे।
समझौते में 20 पुस्तकों के एक सेट का संयुक्त प्रकाशन किया जायेगा, जिनमें 10 पुस्तकों को दोनों संस्थान एक दूसरे के कैटलॉग से चुनेंगे। इसके अलावा स्वतंत्रता संग्राम, भारतीय संस्कृति और नैतिकता और आदर्शों पर 10 छोटी नई पुस्तकों के एक सेट का संयुक्त प्रकाशन भी किया जायेगा। इस समझौते से दोनों संगठनों को यह अवसर मिलेगा कि वे अपने एक-दूसरे द्वारा प्रकाशित पुस्तकों की प्रदर्शनी और ब्रिकी का आयोजन कर सकते हैं। यह समझौता हस्ताक्षर करने की तिथि से 3 वर्षों तक मान्य होगा, जिसे आपसी रजामंदी के तहत बढ़ाया जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि महात्मा गांधी ने 1925 में न्यास के रूप में सस्ता साहित्य मंडल की स्थापना की थी, जिसका उद्देश्य उच्चस्तरीय हिंदी साहित्य को प्रोत्साहित, विकसित और प्रकाशित करना तथा जनता को सस्ती कीमतों पर उपलब्ध कराना था। अपनी स्थापना के समय से अबतक सस्ता साहित्य मंडल ने भारतीय संस्कृति, विरासत, भारतीय महाकाव्यों और कहानियों की 2500 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित की हैं। संगठन ने बच्चों के लिए विशाल साहित्य का सृजन किया है, ताकि उन्हें राष्ट्र और मानवता के प्रति प्रेम और जीवन के आदर्शों की शिक्षा दी जा सके।

‘हुनर हाट’ का फेसबुक पेज लांच

नई दिल्ली : अल्पसंख्यक कार्य मामले (स्वतंत्र प्रभार) तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने अल्पसंख्यक मामले के दूसरे हुनर हाट का फेसबुक पेज लॉन्च किया। हुनर हाट का फेसबुक पेज https://www.facebook.com/hunarhaat17/ लॉन्च करते हुए श्री नकवी ने कहा कि ‘शिल्पकला और व्यंजन का संगम’ थीम पर आधारित दूसरा हुनर हाट में अबतक 15 लाख से अधिक लोग आये। यह हुनर हाट इस दृष्टि से अनूंठा है कि इसमें देश के विभिन्न भागों की शिल्पकला और पारंपरिक व्यंजनों को प्रस्तुत किया गया है। हुनर हाट में एक ‘बावर्चीखाना’ भी है, जहां लोग देश के विभिन्न हिस्सों के व्यंजनों का भी आनंद ले रहे है। श्री नकवी ने कहा कि अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय हुनर हाट को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दे रहा है। फेसबुक पेज लॉन्च करना इस प्रयास का हिस्सा है। फेसबुक पेज पर मंत्रालय द्वारा आयोजित दो हुनर हाट के बारे में जानकारी दी गई है। इसमें शिल्पकारों के राज्य, शिल्पकला का विवरण तथा खान-पान के बारे में जानकारी दी गई है। फेसबुक पेज पर हुनर हाट के चित्र और वीडियो भी उपलब्ध हैं। दूसरे हुनर हाट के 130 स्टॉलों पर सभी राज्यों और संघशासित प्रदेशों से आए 100 से अधिक शिल्पकार और 30 खानपान विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। शिल्पकारों में राज्य तथा राष्ट्रीय स्तर के अनेक पुरस्कार विजेता हैं। ये उत्तर प्रदेश, राजस्थान, जम्मू और कश्मीर, गुजरात, मणिपुर, असम, ओडिशा, केरल, तेलंगाना, बिहार आदि राज्यों से आये हैं। पहले हुनर हाट का आयोजन नवम्बर, 2016 में 14 से 27 नवम्बर तक आयोजित भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में किया गया था। श्री नकवी ने बताया कि हुनर हाट जैसे कार्यक्रमों तथा अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों को सभी राज्यों में आयोजित करने के लिए ‘हुनर हब’ स्थापित करने के बारे में अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय  काम कर रहा है। दो हुनर हाट की सफलता से उत्साहित मंत्रालय निकट भविष्य में ऐेसे आयोजन मुम्बई, कोलकाता, हैदराबाद, लखनऊ, पटना, गुवाहाटी तथा अन्य स्थानों पर करेगा।
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ई-वीजा पर भारत आने वाले पर्यटकों के लिए प्री-लोडेड सिम कार्ड की शुरुआत

 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : पर्यटन एवं संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. महेश शर्मा ने ई-वीजा पर भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों को प्री-लोडेड सिम कार्ड उपलब्ध कराने के लिए पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार की पहल की शुरुआत की। इस अवसर पर संबोधित करते हुए डॉ. शर्मा ने कहा कि इस विशिष्ट पहल से भारत में अपने आगमन के तुरंत बाद विदेशी पर्यटकों को अपने प्रियजनों के साथ बातचीत करने में सहायता मिलेगी। इससे पहले पर्यटन मंत्रालय ने 12 भारतीय भाषाओं में चैबीसों घंटे उपलब्ध होने वाली पर्यटक हेल्पलाइन 1800111363 की भी शुरुआत की थी, ताकि विदेशी पर्यटकों को उनकी अपनी भाषा में आवश्यक जानकारी मिल सके। डॉ. शर्मा ने इस सिम वाली पहली किट यात्रा और पर्यटन क्षेत्र के एक प्रतिनिधि को सौंपी। पर्यटन सचिव विनोद जुत्सी, संचार सचिव जे. एस. दीपक और वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
इस पहल की शुरुआत भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के सहयोग से की गई है, जिसमें बीएसएनएल ई-वीजा पर भारत आने वाले विदेशी यात्रियों को प्री-लोडेड सिम कार्ड बांटेगा। यह सुविधा शुरुआत में इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (टी-3 टर्मिनल) नई दिल्ली पर उपलब्ध होगी। इसे बाद में ई-वीजा सुविधा उपलब्ध होने वाले बकाया 15 अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों पर भी लागू कर दिया जायेगा।
प्री-लोडेड सिम कार्ड सुविधा प्रदान करने के लिए बीएसएनएल हवाई अड्डे पहुंचने पर विदेशी पर्यटकों से उनके ई-वीजा और पासपोर्ट के पहले पृष्ठ की कॉपी प्राप्त करेगा। ये सिम कार्ड 50 रुपये के टॉक टाइम और 50 एमबी डेटा के मूल्य से प्री-लोडेड होंगे। जिन्हें तत्काल आधार पर एक्टिवेट कर दिया जायेगा, ताकि पर्यटक इस सुविधा का तुरंत लाभ उठा सकें। इस पहल का उद्देश्य विदेशी पर्यटकों को कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपने प्रियजनों के संपर्क में रहने में सक्षम हो सकें। इसके अलावा इससे विदेशी पर्यटकों को किसी परेशानी या चिकित्सीय आपातकालीन स्थिति के दौरान किसी सहायता या मार्गदर्शन के लिए मंत्रालय की चैबीसों घंटे कार्यरत बहुभाषीय टोल फ्री हेल्पलाइन से संपर्क करने में भी मदद मिलेगी।

‘साथिया’ रिसोर्स किट एवं ‘साथिया सलाह’ मोबाइल ऐप लांच

नई दिल्ली : स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव सी के मिश्रा ने राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरकेएसके) के एक हिस्से के रुप में किशोर वय के लड़कियों एवं लड़कों के लिए ‘साथिया’ रिसोर्स किट एवं ‘साथिया सलाह’ मोबाइल ऐप लांच किया। इस कार्यक्रम के तहत एक प्रमुख कदम पीयर एजुकेटर्स (साथिया) की प्रस्तुति है, जो किशोर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मांग का सृजन करने के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में काम करता है तथा उनके समकक्ष समूहों में प्रमुख किशोर स्वास्थ्य मुद्दों पर उम्र से संबंधित उपयुक्त ज्ञान प्रदान करता है। साथियों को ऐसा करने में सुसज्जित करने एवं उन्हें इसके लिए सक्षम बनाने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने ‘साथिया’ रिसोर्स किट (‘साथिया’ सलाह मोबइल ऐप) लांच किया। 
रिसोर्स किट एवं मोबाइल ऐप को प्रस्तुत करते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव सी के मिश्रा ने कहा कि हमारे देश में 253 मिलियन किशोर वय की लड़कियां एवं लड़के हैं, जो संख्या के लिहाज से विश्व में सर्वाधिक हैं और जब दुनिया भर में आरएमएनसीएच लांच किया गया, तो भारत अर्थात आरएमएनसीएच में किशोर संघटक जोड़ने वाला पहला देश था, जिसने इसे आज का आरएमएनसीएच-। प्रोग्राम बना दिया। उन्होंने कहा कि किशोर वय की लड़कियां एवं लड़के देश की महत्वपूर्ण संपत्ति हैं, जो भविष्य में देश की अर्थव्यवस्था के सबसे बड़े लाभदायक हिस्से बन जाएंगे, इसलिए उनका स्वास्थ्य एवं तंदरुस्ती हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। देश की किशोर वय की लड़कियों एवं लड़कों की स्वास्थ्य एवं विकास आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने जनवरी, 2014 में राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरकेएसके) आरंभ किया। आरकेएसके किशोर वय के लड़कियों एवं लड़कों के लिए छह कार्यनीतिक प्राथमिकताओं - पोषाहार, यौन एवं प्रजनक स्वास्थ्य (एसआरएच), गैर-संचारी बीमारियां (एनसीडी), मादक द्रव्यों का दुरुपयोग, जख्म एवं हिंसा (जेंडर आधारित हिंसा समेत) तथा मानसिक स्वास्थ्य की पहचान करता है। 
लांच के अवसर पर उपस्थित मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा इस अवसर पर डेवलपमेंट पार्टनर्स ( यूएनएफपीए, पीएफआई) के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे, जिन्होंने रिसोर्स किट के विकास में योगदान दिया।

कैलाश-मानसरोवर यात्रा 2017 का पंजीकरण शुरू 

नई दिल्ली : विदेश मंत्रालय द्वारा आयोजित कैलाश-मानसरोवर यात्रा का पंजीकरण 01 फरवरी, 2017 से शुरू हो गया है। इस वर्ष यात्रा 12 जून से 8 सितंबर तक चलेगी और दो रास्तों से होकर गुजरेगी। 01 जनवरी, 2017 तक यात्रा के आवेदनकर्ताओं की न्यूनतम आयु 18 वर्ष से कम और 70 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। पंजीकरण की अंतिम तिथि 15 मार्च, 2017 है।
इस यात्रा के दो रास्ते हैं। पहला रास्ता उत्तराखंड के लिपूलेख दर्रे से गुजरता है। इस रास्ते से की जाने वाली यात्रा का खर्च प्रति व्यक्ति लगभग 1.6 लाख रुपए है। यह यात्रा 18 दलों में होती है और प्रत्येक दल में 60 तीर्थ यात्री होते हैं। यात्रा की अवधि 24 दिनों की है, जिनमें तीन दिन दिल्ली में लगते हैं, ताकि शुरूआती तैयारी की जा सके। प्रत्येक दल 24-24 दिनों में गंतव्य तक पहुंचता है। इस रास्ते से होने वाली यात्रा नारायण आश्रम और पाताल भुवनेश्वर जैसे प्रमुख स्थानों से गुजरती है। तीर्थ यात्री छियालेख घाटी या ‘ओम पर्वत’ के भी दर्शन कर सकते हैं।
दूसरा रास्ता सिक्किम स्थित नाथुला दर्रे से होकर गुजरता है। इस रास्ते पर वाहन चल सकते हैं और जो वरिष्ठ नागरिक पैदल नहीं जा सकते, उनके लिए यह रास्ता बहुत उपयुक्त है। गंगटोक से होता हुआ यह रास्ता प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर हंगू लेक और विशाल तिब्बती पठार से गुजरता है। यह यात्रा 21 दिनों में पूरी होती है, जिनमें शुरूआती तैयारी के लिए तीन दिन दिल्ली के भी शामिल हैं। इस यात्रा में प्रति व्यक्ति लगभग 2 लाख रुपए खर्च बैठता है। इस वर्ष 50-50 तीर्थ यात्रियों के आठ दल इस मार्ग से यात्रा करेंगे।
पिछले वर्ष की तरह इस बार भी पहली बार यात्रा पर जाने वाले आवेदनकर्ता, चिकित्सक और विवाहित दंपतियों को प्राथमिकता दी जाएगी। वरिष्ठ नागरिकों के लिए नाथुला मार्ग ज्यादा उपयुक्त है। चार व्यक्ति एकसाथ यात्रा के लिए आवेदन कर सकते हैं। यात्रीगण दोनों मार्गों का चयन कर सकते है, जिनमें एक मार्ग को प्राथमिकता देनी होगी। उनके मार्ग और दल का आवंटन कम्प्यूटर द्वारा लॉटरी से होगा।
भारत सरकार द्वारा डिजिटलीकरण को प्रोत्साहन देने के मद्देनजर यात्रा का पंजीकरण पूरी तरह ऑनलाइन किया जा रहा है, जिसके लिए वेबसाइट http://kmy.gov.in का उपयोग किया जा सकता है। यात्रियों को पासपोर्ट का फोटो वाला पेज, जिस पर व्यक्ति की पूरी जानकारी लिखी होती है और अंतिम पेज जहां पता लिखा होता है, उसे अपलोड करना होगा। उसके अलावा ताजा फोटो को भी अपलोड करना है। ऑनलाइन फॉर्म के दिशा-निर्देश हिन्दी और अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध हैं और अधूरे फॉर्म अंतिम तारीख के बाद अपने आप निरस्त हो जाएंगे।
आवेदनकर्ताओं को कम्प्यूटर द्वारा संचालित चयन प्रणाली से चुना जाएगा और इसकी सूचना ई-मेल या एसएमएस द्वारा दी जाएगी। चुने जाने के बाद आवेदकों को वेबसाइट पर दिए गए विवरण के अनुसार एक निश्चित शुल्क देना होगा। आवेदक हेल्पलाइन नंबर 011-24300655 पर भी सारी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

मंगलवार, 7 फ़रवरी 2017

मार्च, 2018 तक खुले में शौच से मुक्त होगा महाराष्ट्र

नई दिल्ली : महाराष्ट्र के मुख्य सचिव स्वाधीन क्षत्रिय ने केंद्र सरकार को अवगत कराया है कि महाराष्ट्र मार्च, 2018 तक खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) राज्य हो जायेगा। उन्होंने ये बातें पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के सचिव परमेश्वरन अय्यर के साथ मुंबई में संपन्न एक बैठक में कही और उल्लेख किया कि महाराष्ट्र इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सही दिशा में अग्रसर है।
सचिव ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार के पास ओडीएफ घोषणा के लिए त्रिस्तरीय सत्यापन प्रणाली के साथ एक मजबूत तीसरा पक्ष सत्यापन प्रणाली भी है। मुख्य सचिव ने कहा कि महाराष्ट्र का लक्ष्य न सिर्फ ओडीएफ उपलब्धि हासिल करना है, बल्कि राज्य में स्वच्छ भारत कार्यान्वयन के लिए हाथ को साफ रखना, मासिक धर्म स्वच्छता, सामुदायिक शौचालयों आदि को भी शामिल कर स्वच्छता का व्यापक लक्ष्य रखा है। कई स्तरीय साफ-सफाई अभियान - जैसे कार्यालयों को स्वच्छ रखना, जीपी को स्वच्छ रखना, स्वच्छ विद्यालय - का भी काम तेजी से चल रहा है।
इसके बदले मंत्रालयीय सचिव ने मंत्रालय की ओर से राज्य को इस काम के लिए पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है। जिला स्तरीय स्वच्छ भारत प्रेरक पहल के तहत, टाटा ट्रस्ट के साथ सहयोग से मंत्रालय के एसबीएम (जी) गतिविधियों के लिए जिला स्तरीय एक प्रेरक नियुक्त किया जायेगा। सचिव ने सार्वजनिक उद्यम विभाग के सचिव की उपस्थिति में पश्चिमी क्षेत्र के सभी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के मुख्य प्रबंध निदेशकों के सामने स्वच्छ भारत मिशन में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु प्रस्तुति दी। इस प्रस्तुति से कई सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के अधिकारी प्रभावित हुए और अपने द्वारा किए जा रहे प्रयासों जैसे विद्यालय स्वच्छता, राजमार्गों पर स्वच्छता के लिए सामुदायिक शौचालयों आदि कार्यक्रमों के बारे में विवरणी भी पेश की। सार्वजनिक उद्यम विभाग के सचिव ने इस बैठक में जोर देते हुए कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम अपने कर्मचारियों और प्रबंधन प्रशिक्षुओं को बदलाव के लिए स्वच्छता चैंपियन और प्रतिनिधि के रूप में भी प्रशिक्षित करें।

गुरुवार, 2 फ़रवरी 2017

स्वतंत्र भारत का प्रथम संयुक्त बजट पेश

  • रेल बजट भी शामिल 
  • रेलवे का कुल पूंजीगत एवं विकास व्यय 1,31,000 करोड़ रुपये
  • सरकार ‘स्वच्छ रेल’ पर अपना ध्यान केन्द्रित करेगी
  • 1 लाख करोड़ रुपये का ‘राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष’ 5 वर्षों में बनेगा
  • कैशलेस आरक्षण 58 प्रतिशत से बढ़कर 68 प्रतिशत के स्तर पर पहुंचा 

 बजट की खबरें 
नई दिल्ली : केन्द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों के मंत्री अरुण जेटली ने संसद में आम बजट 2017-18 पेश करते हुए कहा कि यह बजट स्वतंत्र भारत का प्रथम संयुक्त बजट है, जिसमें रेलवे भी शामिल है। उन्होंने कहा कि भारत अब रेलवे, सड़कों, जलमार्गों और नागरिक उड्डयन में होने वाले निवेश में सामंजस्य बैठाने की स्थिति में आ गया है। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2017-18 में रेलवे का कुल पूंजीगत एवं विकास व्यय 1,31,000 करोड़ रुपये आंका गया है, जिसमें सरकार द्वारा मुहैया कराई गई 55,000 करोड़ रुपये की राशि भी शामिल है।
वित्त मंत्री श्री जेटली ने अपने बजट भाषण में कहा कि रेलवे चार प्रमुख क्षेत्रों अर्थात यात्री सुरक्षा, पूंजीगत एवं विकास कार्यों, स्वच्छता और वित्त एवं लेखांकन संबंधी सुधारों पर अपना ध्यान केन्द्रित करेगी। यात्री सुरक्षा के लिए अगले 5 वर्षों की अवधि के दौरान 1 लाख करोड़ रुपये का ‘राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष’ बनाया जाएगा, जिसका वित्त पोषण सरकार की ओर से प्राप्त मूल पूंजी (सीड कैपिटल), रेलवे के खुद के संसाधनों और अन्य स्रोतों से किया जाएगा। श्री जेटली ने यह भी बताया कि सरकार इस कोष से वित्त पोषित होने वाले विभिन्न सुरक्षा कार्यों को क्रियान्वित करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देशों के साथ-साथ समय सीमा भी तय करेगी। उन्होंने कहा कि बड़ी लाइनों पर अवस्थित मानवरहित रेलवे क्रॉसिंगों को वर्ष 2020 तक समाप्त कर दिया जाएगा। सुरक्षा की तैयारियों एवं रखरखाव से जुड़े कार्यों को बेहतर करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों की सहायता ली जाएगी।
अपने बजट भाषण में चिन्हित गलियारों (कॉरीडोर) के आधुनिकीकरण एवं उन्नयन के लिए प्रस्तावित कदमों का उल्लेख करते हुए श्री जेटली ने कहा कि वर्ष 2017-18 में 3,500 किलोमीटर लंबी रेल लाइनों को चालू किया जाएगा, जबकि वर्ष 2016-17 में 2800 किलोमीटर लंबी रेल लाइनों को चालू किया गया था। उन्होंने कहा कि पर्यटन एवं तीर्थाटन के लिए समर्पित रेलगाड़ियां चलाई जाएंगी। अगले 3 वर्षों के दौरान इसमें 10 फीसदी बढ़ोतरी किए जाने का प्रस्ताव है। उन्होंने यह भी कहा कि 9 राज्य सरकारों के साथ मिलकर संयुक्त उद्यमों की स्थापना की गई है और निर्माण एवं विकास के लिए 70 परियोजनाओं की पहचान की गई है।
रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास का उल्लेख करते हुए वित्त मंत्री जेटली ने यह भी कहा कि पुनर्विकास के उद्देश्य से वर्ष 2017-18 के दौरान कम से कम 25 स्टेशनों का ठेका दिए जाने की आशा है और 500 स्टेशनों पर लिफ्ट एवं एस्कलेटर लगाकर उन्हें दिव्यांगजनों के अनुकूल बनाया जाएगा।
‘स्वच्छ रेल’ पर सरकार के फोकस पर विशेष जोर देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि रेलवे में स्वच्छता का स्तर बढ़ाने के लिए अनेक कदम उठाए जाने का प्रस्ताव है, जिनमें एसएमएस आधारित ‘क्लीन माई कोच सर्विस’ भी शामिल है, जिसका शुभारम्भ पहले ही हो चुका है। अब ‘कोच मित्र’ सुविधा शुरू करने का प्रस्ताव किया गया है, जो कोच या डिब्बों से संबंधित समस्त शिकायतों एवं आवश्यकताओं को दर्ज किए जाने वाला एकल खिड़की इंटरफेस होगा। वित्त मंत्री श्री जेटली ने यह भी कहा कि वर्ष 2019 तक भारतीय रेलवे के सभी डिब्बों में जैव शौचालय लगा दिए जाएंगे।
वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में निजी क्षेत्र के वर्चस्व वाले परिवहन के अन्य साधनों के मुकाबले रेलवे को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने में मदद के लिए सरकार द्वारा उठाए जाने वाले प्रस्तावित कदमों का भी ब्योरा दिया। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं :
(1) चुनिंदा वस्तुओं के लिए पूर्ण रूप से एकीकृत ढुलाई समाधानों को उन लॉजिस्टिक कंपनियों अथवा संगठनों के साथ भागीदारी करके लागू किया जाएगा, जो इन वस्तुओं के लिए हर तरह की कनेक्टिविटी मुहैया कराएंगे। जल्द खराब होने वाली वस्तुओं, विशेषकर कृषि उत्पादों की ढुलाई के लिए रोलिंग स्टॉक एवं संबंधित तौर-तरीकों को उन्हीं के अनुसार ढाला जाएगा।
(2) प्रतिस्पर्धी टिकट बुकिंग सुविधा सभी लोगों को सुलभ कराई जाएगी। आईआरसीटीसी के जरिए बुक किए जाने वाले ई-टिकटों पर सर्विस चार्ज वापस ले लिया गया है। कैशलेस आरक्षण 58 प्रतिशत से बढ़कर 68 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गया है। 
(3) लेखांकन संबंधी सुधारों के एक हिस्से के तहत वृद्धिपरक आधारित वित्तीय वक्तव्यों को मार्च, 2019 तक सुलभ कराया जाएगा।
अपने बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री श्री जेटली ने रेलवे के परिचालन अनुपात को बेहतर करने के लिए रेलवे की ओर से निरन्तर प्रयास किए जाने पर फिर से विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि लागत, सेवा की गुणवत्ता, सामाजिक दायित्वों और परिवहन के अन्य साधनों से प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखते हुए रेलवे की ढुलाई दरें तय की जाएंगी।
मेट्रो रेल का उल्लेख करते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि क्रियान्वयन एवं वित्त पोषण के अभिनव मॉडलों के साथ-साथ हार्डवेयर एवं सॉफ्टवेयर के मानकीकरण और स्वदेशीकरण पर फोकस करते हुए एक नई मेट्रो रेल नीति की घोषणा की जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे देश के युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर सृजित होंगे। वित्त मंत्री ने कहा कि मौजूदा कानूनों को तर्कसंगत बनाकर एक नया मेट्रो रेल अधिनियम बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे निर्माण एवं परिचालन में और ज्यादा निजी भागीदारी तथा निवेश का मार्ग प्रशस्त होगा।

2.5 से 5 लाख रुपये तक की व्यक्तिगत आय पर 5 प्रतिशत टैक्स

नई दिल्ली : केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2.5 लाख रुपये और 5 लाख रुपये के बीच की आय वाले व्यक्तिगत करदाताओं के लिए कराधान की मौजूदा दर को 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया है। इसके परिणामस्वरूप 5 लाख रुपये से कम आय वाले सभी करदाताओं की कर देनदारी घटकर शून्य (छूट सहित) हो जाएगी या उनकी मौजूदा देनदारी का 50 प्रतिशत रह जाएगी।
केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री जेटली ने संसद में आम बजट 2017-18 पेश करते हुए कहा कि कराधान का वर्तमान बोझ मुख्यतः ईमानदार करदाताओं और वेतनभोगी कर्मचारियों पर है, जो अपनी आय को सही रूप में दर्शाते हैं। अतः विमुद्रीकरण के पश्चात इस वर्ग के लोगों की यह आशा जायज है कि उनके कराधान के बोझ को कम किया जाए। वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि यदि निम्न आय स्लैब के लिए टैक्स की दर को सामान्य रखा जाता है, तो बड़ी संख्या में लोग कर दायरे में आएंगे। उन्होंने भारत के सभी नागरिकों से यह अपील की कि यदि उनकी आय 2.5 लाख रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक के सबसे निचले स्लैब के अंतर्गत आती है, तो वे 5 प्रतिशत कर की छोटी सी अदायगी करते हुए राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनें।
केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि सरकार कर के दायरे में ऐसे लोगों को भी लाने का प्रयास कर रही है, जो करों की चोरी कर रहे हैं। अतः कर दायरे को बढ़ाने के लिए व्यावसायिक आय से इतर 5 लाख रुपये तक की कर योग्य आय वाले करदाताओं के लिए आयकर रिटर्न के रूप में भरे जाने हेतु सिर्फ एक पृष्ठ का फॉर्म पेश करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त इस श्रेणी के किसी भी व्यक्ति, जो प्रथम बार आयकर रिटर्न भरता है, को प्रथम वर्ष में तबतक किसी भी जांच का सामना नहीं करना पडे़गा, जबतक कि उसके उच्च मूल्य वाले लेन-देन के बारे में विभाग के पास विशिष्ट सूचना उपलब्ध न हो।
अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि लाभ की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए लाभार्थियों के इस समूह को उपलब्ध छूट के मौजूदा लाभ को घटाकर 2500 रुपये किया जा रहा है, जो 3.5 लाख रुपये तक की सालाना आय वाले करदाताओं के लिए ही उपलब्ध है। इन दोनों उपायों का संयुक्त प्रभाव यह होगा कि प्रति वर्ष 3 लाख रुपये तक की आय वाले व्यक्तियों के लिए कर देनदारी शून्य होगी और 3 लाख रुपये से लेकर 3.5 लाख रुपये तक की आय वाले व्यक्तियों के लिए कर देनदारी मात्र 2500 रुपये होगी। चूंकि 5 लाख रुपये तक की आय वाले करदाताओं की कर देनदारी घटाकर आधी की जा रही है, अतः बाद के स्लैबों में आने वाले करदाताओं की सभी अन्य श्रेणियों को भी प्रति व्यक्ति 12,500 रुपये का एक समान लाभ मिलेगा। इस उपाय के फलस्वरूप सरकार द्वारा परित्यक्त की जा रही कुल कर राशि 15,500 करोड़ रुपये बनती है।
इस राहत के कारण होने वाली राजस्व हानि के कुछ भाग की प्रतिपूर्ति के लिए उन करदाताओं पर देय कर का 10 प्रतिशत अधिभार (सरचार्ज) के रूप में लगाने का प्रस्ताव किया गया है, जिनकी वार्षिक कर योग्य आय 50 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक है। इससे सरकार को 2,700 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होने की संभावना है। वित्त मंत्री ने कहा कि रियायतों से संबंधित प्रत्यक्ष कर प्रस्तावों, इत्यादि के परिणामस्वरूप 22,700 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान होगा। हालांकि, अतिरिक्त संसाधन जुटाने वाले प्रस्ताव से 2700 करोड़ रुपये की राजस्व प्राप्ति को ध्यान में रखने पर प्रत्यक्ष कर में शुद्ध राजस्व नुकसान घटकर 20,000 करोड़ रुपये के स्तर पर आ जाएगा।

रक्षा व्यय के लिए 2,74,114 करोड़ रुपये आवंटित

नई दिल्ली : केन्द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों के मंत्री अरुण जेटली ने संसद में आम बजट 2017-18 पेश करते हुए कहा कि वर्ष 2017-18 के बजट में कुल व्यय 21.47 लाख करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। व्यय के योजनागत और गैर-योजनागत वर्गीकरण को समाप्त कर दिए जाने के बाद अब राजस्व एवं पूंजीगत व्यय पर ध्यान केन्द्रित किया जा रहा है। अगले तीन वर्षों के लिए राजकोषीय घाटे के रोडमैप के साथ-साथ निजी क्षेत्र के सुस्त निवेश और वैश्विक विकास की धीमी रफ्तार को ध्यान में रखते हुए वित्त मंत्री श्री जेटली ने वित्त वर्ष 2017-18 के लिए राजकोषीय घाटे को जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का 3.2 प्रतिशत तय किया है तथा इसके बाद के वर्ष अर्थात 2018-19 के लिए इसे और भी कम करके जीडीपी के 3 प्रतिशत पर सीमित रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है।
श्री जेटली ने यह भी कहा कि सार्वजनिक निवेश की आवश्यकताओं से कोई भी समझौता किए बगैर राजकोषीय मजबूती के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने पिछले वर्ष की तुलना में पूंजीगत व्यय के लिए आवंटन में 25.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। आज संसद में वर्ष 2017-18 के लिए अपना चैथा बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि वर्ष 2017-18 में राज्यों और विधानसभा वाले केन्द्र शासित प्रदेशों को कुल मिलाकर 4.11 लाख करोड़ रुपये के संसाधन अंतरित किए जा रहे हैं, जबकि वर्ष 2016-17 के बजट अनुमान में यह राशि 3.60 लाख करोड़ रुपये थी।
श्री जेटली ने कहा कि विभिन्न बजट घोषणाओं के साथ-साथ वर्ष 2017-18 की अन्य नई योजनाओं पर अमल के लिए आर्थिक मामलों के विभाग के अधीन 3,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। पेंशन को छोड़ रक्षा व्यय के लिए उन्होंने 2,74,114 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की है, जिसमें रक्षा पूंजी के लिए 86,488 करोड़ रुपये भी शामिल हैं। वित्त मंत्री ने वैज्ञानिक मंत्रालयों के लिए आवंटन को वर्ष 2017-18 में बढ़ाकर 37.435 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंचा दिया है।
अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री ने कहा कि उन्होंने वापस खरीद (बायबैक) के बाद सरकार की शुद्ध बाजार उधारी को 3.48 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर सीमित रखने का पूरा ध्यान रखा है, जो पिछले साल के 4.25 लाख करोड़ रुपये से बहुत कम है। यही नहीं, वर्ष 2016-17 के बजट अनुमान में उल्लिखित 2.3 प्रतिशत के राजस्व घाटे को संशोधित अनुमानों में कम करके 2.1 प्रतिशत के स्तर पर ला दिया गया है। अगले वर्ष के लिए राजस्व घाटे को 1.9 प्रतिशत के स्तर पर निर्धारित किया गया है, जबकि एफआरबीएम अधिनियम में इसे 2 प्रतिशत पर रखा गया है। श्री जेटली ने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाले व्यय के साथ-साथ विमुद्रीकरण के परिणामस्वरूप बैंकों में बड़ी मात्रा में नकदी जमा किए जाने से अधिक कर राशि की प्राप्ति पर अब ज्यादा ध्यान केन्द्रित करते हुए सरकार अगले वर्ष के दौरान राजकोषीय स्थिति से जुड़े डेटा, विशेषकर राजकोषीय घाटे के आंकड़े को और भी बेहतर करेगी।

सस्ते आवास एवं रियल एस्टेट सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए उपायों की घोषणा

नई दिल्ली : सस्ती आवास योजना के प्रवर्तकों हेतु वित्तीय वर्ष 2016-17 में घोषित लाभ-संबद्ध आयकर छूट योजना को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए संसद में आम बजट प्रस्तुत करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने उक्त योजना में कई महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित किए।  
श्री जेटली ने बताया कि 30 और 60 वर्ग मीटर निर्मित क्षेत्र की बजाय अब 30 और 60 वर्ग मीटर कार्पेट क्षेत्र की गणना की जाएगी। 30 वर्ग मीटर की सीमा भी केवल 4 मेट्रो शहरों की नगरपालिका सीमाओं के मामले में लागू होगी, जबकि मेट्रो के बाह्य परिधीय क्षेत्रों सहित देश के शेष भागों के लिए 60 वर्ग मीटर की सीमा ही लागू होगी। वित्त मंत्री ने इस योजना के तहत कार्य प्रारंभ होने के बाद भवन निर्माण को पूरा करने की अवधि को मौजूदा तीन साल से बढ़ाकर 5 साल करने का भी प्रस्ताव किया।
वर्तमान में पूर्णता प्रमाणपत्र प्राप्त करने के पश्चात कब्जा न लिए गए मकान नोशनल किराया आय पर कर के अधीन हैं। जिन बिल्डरों के लिए निर्मित मकान व्यवसाय में पूंजी लगी है, श्री जेटली ने ऐसे बिल्डरों के लिए यह नियम पूर्णता प्रमाणपत्र प्राप्त होने वाले वर्ष के समाप्त होने के एक वर्ष बाद ही लागू करने का प्रस्ताव दिया ताकि उन्हें अपनी इन्वेंटरी के परिनिर्धारण हेतु कुछ समय और मिल जाए।
श्री जेटली ने भूमि और इमारत के संबंध में पूंजीगत लाभ कराधान उपबंधों में अनेक परिवर्तन करने का प्रस्ताव दिया। अचल संपत्ति से लाभ पर विचार करने हेतु धारण अवधि को मौजूदा तीन साल से घटाकर दो साल करने समेत अचल संपत्ति सहित सभी श्रेणियों के लिए सूचीकरण के लिए आधार वर्ष भी 1 अप्रैल, 1981 से बदलकर 1 अप्रैल, 2001 किए जाने का प्रस्ताव किया गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि इस कदम से पूंजीगत लाभ पर देयता काफी घटेगी, जबकि परिसंपत्तियों की गतिशीलता को प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार वित्तीय लिखतों के उस समूह का विस्तार करने की योजना बना रही है, जिसमें कर की अदायगी किए बिना पूंजीगत लाभों का निवेश किया जा सके। संपत्ति के विकास हेतु हस्ताक्षरित सहित करार के लिए परियोजना पूर्ण होने वाले वर्ष में पूंजीगत लाभ कर अदा करने की बाध्यता उत्पन्न हो जाएगी।  
बिना भूमि अधिग्रहण अधिनियम के भूमि पूलिंग व्यवस्था द्वारा विकसित की जा रही आंध्र प्रदेश की नई राजधानी के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 02 जून, 2014  तक भू-मालिकों को पूंजी लाभ कर से छूट देने का प्रस्ताव किया।

‘स्वयं’ प्लेटफॉर्म लांच किया जाएगा

 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : केन्द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों के मंत्री अरुण जेटली ने संसद में आम बजट 2017-18 पेश करते हुए कहा कि सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी से लाभ उठाने और कम से कम 350 ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के साथ ‘स्वयं’ प्लेटफॉर्म लांच करने का प्रस्ताव किया है। अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री ने कहा कि इससे विद्यार्थियों को सर्वोत्तम संकाय द्वारा पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रमों की कक्षाओं में आभासी ढंग से भाग लेने, उच्च गुणवत्ता वाली पठन सामग्री तक अपनी पहुंच सुनिश्चित करने, परिचर्चा फोरम में शिरकत करने, परीक्षाओं में बैठने और शैक्षणिक ग्रेड हासिल करने में मदद मिलेगी। शिक्षा को समर्पित डीटीएच चैनलों के साथ संपर्क के जरिए ‘स्वयं’ तक पहुंच का विस्तार किया जाएगा।

बुनियादी ढांचे के विकास को 3,96,135 करोड़ रुपये आवंटित 

नई दिल्ली : केन्द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों के मंत्री अरुण जेटली ने संसद में आम बजट 2017-18 पेश करते हुए कहा कि वर्ष 2017-18 में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए कुल मिलाकर 3,96,135 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। सड़क क्षेत्र में राजमार्गों के लिए बजट आवंटन को 2016-17 के बजट अनुमान के 57,976 करोड़ रुपये से बढ़ाकर वर्ष 2017-18 में 64,900 करोड़ रुपये कर दिया गया। इसके अलावा बंदरगाहों और दूर-दराज के गांवों से बेहतर कनेक्टिविटी के लिए निर्माण एवं विकास हेतु 2,000 किलोमीटर लंबी तटीय कनेक्टिविटी सड़कों की पहचान की गई है।
वित्त मंत्री ने कहा कि वर्ष 2014-15 से लेकर चालू वर्ष तक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत निर्मित सड़कों सहित कुल मिलाकर लगभग 1,40,000 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण किया गया है, जो पिछले तीन वर्षों के मुकाबले बहुत ज्यादा है। श्री जेटली ने नागरिक विमानन से जुड़े बुनियादी ढांचे का उल्लेख करते हुए कहा कि टीयर 2 शहरों में चुनिंदा हवाई अड्डों के परिचालन और रखरखाव का काम पीपीपी (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) मोड के तहत किया जाएगा।  
श्री जेटली ने टेलीकॉम क्षेत्र को बुनियादी ढांचे के परितंत्र का एक महत्वपूर्ण घटक बताया। उन्होंने कहा कि हाल ही में की गई स्पेक्ट्रम नीलामी से देश में स्पेक्ट्रम की किल्लत समाप्त होने वाली है। इससे ग्रामीण एवं दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के हित में मोबाइल ब्रॉडबैंड और डिजिटल इंडिया को काफी बढ़ावा मिलेगा।

जीएसटी के बारे में संविधान संशोधन से साझा भारतीय बाजार का निर्माण होगा

नई दिल्ली : संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17 में कहा गया है कि सुदृढ़ बृहत् आर्थिक स्थिरता की पृष्ठभूमि में वर्ष के दौरान दो प्रमुख घरेलू नीतिगत घटनाएं हुईं - संविधान संशोधन पारित होने से ऐतिहासिक वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू करने का मार्ग प्रशस्त होना और दो बड़े नोटों का विमुद्रीकरण। जीएसटी से एक साझा भारतीय बाजार का निर्माण होगा और कर अनुपालन एवं प्रशासन तथा निवेश और आर्थिक वृद्धि में सुधार होगा। जीएसटी भारत के सहकारी संघवाद के प्रबंधन में एक नया ठोस प्रयोग भी है।
आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17 में कहा गया है कि विमुद्रीकरण की लागत अल्पकालिक है और इससे दीर्घकालिक लाभ प्राप्त होंगे। सरकार ने इन लाभों को अमली जामा पहनाने के लिए अनेक अनुवर्ती उपाय किए हैं, इनमें पुनः मुद्रीकरण, करों में और सुधार आदि शामिल हैं। उम्मीद की जा रही है कि इन उपायों से 2017-18 में बढ़ोतरी की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलेगा, जिससे यह भी संभव है कि 2016-17 में आयी अस्थायी कमी के बाद अगले वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व की सबसे तेजी से विकास वाली अर्थव्यवस्था हो जायेगी।
आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि अमरीका में राजकोषीय प्रोत्साहन के कारण वैश्विक जीडीपी में बढ़ोतरी होने की संभावना है, लेकिन साथ ही यह संकेत भी दिया गया है कि इसमें बहुत जोखिम हैं।    
रिपोर्ट के अनुसार, लघु अवधि की प्रमुख बृहत-आर्थिक चुनौती विकास के प्रमुख संचालकों के रूप में निजी निवेश और निर्यात को पुनः स्थापित करना और सरकारी एवं निजी खपत पर निर्भरता कम करना है। इसमें कहा गया है कि अत्यधिक ऋण-ग्रस्त कंपनियों के दोहरे तुलनपत्रकों और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के खराब ऋणों के बढ़ते बोझ की समस्या हल करना भी अत्यन्त महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत को जनसांख्यिकीय दृष्टि से लाभ प्राप्त होने की संभावना है, चूंकि अगले तीन वर्षों में भारत की काम करने योग्य आबादी में तीन गुणा बढ़ोतरी होने जा रही है। अगले पांच वर्षों में यह जनसांख्यिकीय लाभ अपने चरम पर पहुंच जायेगा। रिपोर्ट के अनुसार, स्वच्छ भारत अभियान गंभीर नीति का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य सुरक्षित और पर्याप्त सफाई सुविधाएं, जलापूर्ति और स्वच्छता की व्यवस्था करना है।

आयकर विभाग का स्वच्छ धन अभियान 

नई दिल्ली : आयकर विभाग ने स्वच्छ धन अभियान आरंभ किया है। इस अभियान के आरंभिक चरण में 9 नवम्बर से 30 दिसम्बर, 2016 तक प्रचुर मात्रा में जमा की गई नकदी की ई-वेरिफिकेशन शामिल है। विमुद्रीकरण आंकड़ों की आयकर विभाग के डाटाबेस में उपलब्ध सूचना के साथ तुलना करने के लिए डाटा एनेलिटिक्स का प्रयोग किया गया है। पहले बैच में ऐसे लगभग 18 लाख व्यक्तियों की पहचान की गई है, जिनके मामले में नकदी का लेन-देन  करदाता के प्रोफाइल से मेल नहीं खा रहा है।
आयकर विभाग ने करदाताओं के लिए अनुपालन लागत घटाने के लिए अपने संसाधनों का श्रेष्ठ प्रयोग करते हुए इन लेन-देनों की ऑनलाइन वेरिफिकेशन को सक्षम बनाया है। इन मामलों के संबंध में सूचना https://incometaÛindiaefiling.gov.in पोर्टल पर पैन होल्डर की ई-फाइलिंग विंडो में (लॉगइन के पश्चात) उपलब्ध की जा रही है। पैन होल्डर, पोर्टल के ‘कम्प्लायंस’ सैक्शन के अंतर्गत ‘कैश ट्रांसैक्शन्स 2016’ लिंक का प्रयोग करते हुए इस सूचना को देख सकते हैं। करदाता आयकर कार्यालय जाए बिना ऑनलाइन स्पष्टीकरण दाखिल कर सकेंगे। करदाताओं को ई-फाइलिंग पोर्टल पर ऑनलाइन रिस्पॉन्स प्रस्तुत करने के लिए ई-मेल और एमएमएस भेजे जाएंगे। जिन करदाताओं ने ई-फाइलिंग पोर्टल https://incometaÛindiaefiling.gov.in पर रजिस्ट्रेशन नहीं किया है, वे ‘रजिस्टर यूअरसेल्फ’ लिंक पर क्लिक करके रजिस्टर करें। रजिस्टर्ड करदाता इलैक्ट्रॉनिक कम्यूनीकेशन प्राप्त करने के लिए ई-फाइलिंग पोर्टल पर अपना ई-मेल एड्रैस तथा मोबाइल नंबर अद्यतन करें व जांच लें।
करदाता को ऑनलाइन रिस्पॉन्स प्रस्तुत करने में सहायता देने के लिए पोर्टल पर विस्तृत यूजर गाइड तथा क्विक रैफरेंस गाइड उपलब्ध है। यदि ऑनलाइन रिस्पॉन्स प्रस्तुत करने में कोई कठिनाई हो, तो हेल्पडेस्क से 1800 4250 0025 पर संपर्क किया जा सकता है।
स्वीकृत जोखिम मानदण्ड पर आधारित मामलों को जांच के लिए चुनने हेतु डाटा एनेलेटिक्स का प्रयोग किया जाएगा। यदि मामले को जांच के लिए चुन लिया जाता है तो अतिरिक्त सूचना और उसकी प्रतिक्रिया के लिए अनुरोध भी इलैक्ट्रॉनिक रूप से संसूचित किया जाएगा। नवीन सूचना, प्रतिक्रिया और डाटा एनेलेटिक्स के प्राप्त होने पर ऑनलाइन पोर्टल पर सूचना अद्यतित होकर सक्रिय हो जाएगी।
उपलब्ध सूचना के आधार पर करदाता की प्रतिक्रिया का मूल्यांकन किया जाएगा। यदि नकद के स्रोत का स्पष्टीकरण उचित पाया जाएगा, तो आयकर कार्यालय में आने की आवश्यकता नहीं रहेगी और जांच को बंद कर दिया जाएगा। यदि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (पीएमजीकेवाई) के अंतर्गत नकद जमा की घोषणा की जाती है, तब भी जांच को बंद कर दिया जाएगा। आयकर विभाग के किसी नोटिस और आयकर अधिनियम तथा लागू अन्य नियमों के अंतर्गत कार्रवाई से बचने के लिए इस चरण में शामिल करदाताओं को अपनी प्रतिक्रिया पोर्टल पर 10 दिन के भीतर देनी होगी।

विकसित देशों द्वारा अपनाया गया राजकोषीय सक्रियतावाद भारत के लिए प्रासंगिक नहीं : आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17

भारत का आर्थिक अनुभव एफआरबीएम अधिनियम 2003 के राजकोषीय नीतिगत सिद्धांतों की बुनियादी वैधता को रेखांकित करता है
नई दिल्ली : भारत का आर्थिक अनुभव यह दर्शाता है कि विकसित देशों द्वारा अपनाया गया वह राजकोषीय सक्रियतावाद भारत के लिए प्रासंगिक नहीं है, जिसके तहत प्रति-चक्रीय नीतियों की भूमिका बढ़ाई जा रही है और ऋण पर अंकुश लगाने को कम अहमियत दी जा रही है। वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा संसद में पेश किये गये आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17 में इस ओर ध्यान दिलाया गया है। आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि भारत के राजकोषीय अनुभव ने राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) अधिनियम 2003 में उल्लेखित राजकोषीय नीति के सिद्धांतों की बुनियादी वैधता को रेखांकित किया है।
वर्ष 2008-09 में गहराए वैश्विक वित्तीय संकट (जीएफसी) के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय राजकोषीय नीति में व्यापक बदलाव देखा जा रहा है, जिसके तहत अब ऋणों के बजाय घाटे पर विशेष जोर दिया जा रहा है, प्रवाह (घाटा) के मामले में अपेक्षाकृत ज्यादा सक्रियतावाद की वकालत की जा रही है और स्टॉक (ऋण) की निरंतरता को लेकर उपजी चिंताओं को कम किया जा रहा है। हालांकि, तेजी के दौर में खर्चों पर विशेष ध्यान देने और मंदी के दौर में प्रोत्साहन संबंधी कदम उठाए जाने के मद्देनजर भारत के अनुभव से राजकोषीय घाटे को अंकुश में रखने के नियमों की जरूरत की फिर से पुष्टि हुई है। भारत के अनुभव से स्थिर विकास के बजाय त्वरित विकास पर निर्भर रहने के खतरों के बारे में भी जानकारी मिली है। संक्षिप्त में इसने एफआरबीएम में उल्लेखित राजकोषीय नीतिगत सिद्धांतों की बुनियादी वैधता को रेखांकित किया है।
वैसे तो एफआरबीएम के बुनियादी सिद्धांत अब भी वैध हैं, लेकिन वर्ष 2003 में तैयार की गई परिचालनगत रूपरेखा में आज के भारत की राजकोषीय नीतिगत दिशा को देखते हुए इसमें संशोधन करने की जरूरत है। यहां तक कि, यह कल के भारत के लिए और भी महत्वपूर्ण है। 21वीं शताब्दी के लिए एफआरबीएम के जरिए यह नया विजन तय करना एफआरबीएम समीक्षा समिति का अहम कार्य होगा।

‘इंडिया फॉर्मा 2017’ एवं ‘इंडिया मेडिकल डिवाइस 2017’ सम्मेलन

नई दिल्ली : रसायन एवं उवर्रक मंत्रालय का फॉर्मास्यूटिकल्स विभाग (डीओपी), उद्योग चैंबर फिक्की के सहयोग से बंेगलुरू में 11 से 13 फरवरी, 2017 तक ‘जिम्मेदार स्वास्थ्य देखभाल’ के विजन के साथ ‘इंडिया फॉर्मा एवं इंडिया मेडिकल डिवाइस 2017’ का आयोजन कर रहा है, जो फॉर्मास्यूटिकल एवं चिकित्सा उपकरण क्षेत्र पर द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी एवं सम्मेलन है।
बंेगलुरू में इस समारोह के पूर्वानुलोकन के दौरान मीडिया को संबोधित करते हुए केंद्रीय रसायन एवं उवर्रक तथा संसदीय मामले मंत्री अनंत कुमार ने जानकारी दी कि यह अंतर्राष्ट्रीय समारोह न केवल भारतीय फॉर्मास्यूटिकल एवं चिकित्सा उपकरण क्षेत्र हेतु वैश्विक क्षमता के दोहन के लिए एक मंच उपलब्ध कराएगा, बल्कि यह भारत को इस क्षेत्र के लिए एक आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में खुद को प्रदर्शित करने का एक अवसर उपलब्ध कराएगा एवं भारतीय विनिर्माताओं के साथ संयुक्त उद्यमों को बढ़ावा देने के द्वारा अनुसंधान एवं विकासों, नैदानिक परीक्षणों जैसे नए क्षेत्रों में विदेशी निवेश भी लाएगा। साथ ही, यह दुनिया भर से इस क्षेत्र में व्याप्त सर्वश्रेष्ठ पद्धतियों को भी देश में लाएगा।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने सूचना दी कि इस वर्ष ‘इंडिया फॉर्मा एवं इंडिया मेडिकल डिवाइस 2017’ सम्मेलन: चिकित्सा उपकरण: ‘भविष्य को आकार देना: सही चयन करना’ एवं फॉर्मा: ‘भारतीय फॉर्मा के भविष्य को आकार देना’ विषयों के इर्द-गिर्द आधारित है। यह सम्मेलन वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी बनने में भारतीय फॉर्मा एवं चिकित्सा उपकरण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए एक मंच साबित होगा। यह अंतर्राष्ट्रीय दवा नियामकों, अंतर्राष्ट्रीय क्रेताओं, निवेशकों एवं वैश्विक फॉर्मा एवं चिकित्सा उपकरण क्षेत्र के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के लिए एक मिलन बिंदु की भूमिका निभाएगा, जो भाग लेने वाले हितधारकों को नेटवर्क करने तथा आपस में ही सीखने के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराएगा। श्री कुमार ने कहा कि यह सम्मेलन एक फॉर्मा कुंभ होगा और इसकी विशेषता अंतर्राष्ट्रीय दवा नियामकों की बैठक होगी।
इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में पहलों की रूपरेखा समसामयिक नीति युक्तियों, व्यवसाय करने की सरलता, सर्वश्रेष्ठ प्रचलनों को साझा करने तथा वैश्विक नियामकीय संरचना के साथ सहयोगों को बढ़ावा देने, एवं क्षेत्रवार सुधारों पर ध्यान देने पर केंद्रित की गयी है, जो भारत को इस क्षेत्र में विनिर्माण एवं अनुसंधान तथा विकास में निवेशों के लिए वैश्विक आकर्षण का अग्रणी देश बना देगा।
अनंत कुमार ने एक्टिव फॉर्मास्यूटिकल इनग्रेडिएंट्स (एपीआई) एवं चिकित्सीय उपकरणों के स्वदेशी निर्माण पर विशेष जोर के साथ बल्कि ड्रग फॉर्मुलेशन में भारत की बड़ी हिस्सेदारी की जरूरत पर बल दिया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में अधिक शोधकर्ताओं की जरूरत है और इसलिए सरकार देश भर में राष्ट्रीय फॉर्मास्यूटिकल शिक्षा एवं अनुसंधान (एनआईपीईआर) की स्थापना के द्वारा इस दिशा में नियमित रूप से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त फॉर्मा एवं चिकित्सा उपकरण नवोन्मेष के क्षेत्र में उद्योग के साथ सहयोग बढ़ाने की भी आवश्यकता है। इस दिशा में फॉर्मास्यूटिकल विभाग विभिन्न राज्यों में फॉर्मा उद्यानों एवं कलस्टरों की स्थापना करने की एक योजना पर काम कर रहा है, जिससे उत्पादन लागत में उल्लेखनीय रूप से कमी लाने में मदद मिलेगी।
मंत्री महोदय ने फॉर्मास्यूटिकल एवं चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में निर्यात बढ़ाने के लिए लघु एवं मंझोले उपकरण (एसएमई) क्षेत्र को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कर्नाटक स्थित फॉर्मास्यूटिकल एवं चिकित्सा उपकरण विनिर्माताओं को इस समारोह में भाग लेने तथा अपने संभावित ग्राहकों के साथ सहयोग की संभावनाओं के साथ लाभ प्राप्त करने के लिए आमंत्रित किया।
अनंत कुमार ने इस बात पर प्रसन्न्ता जतायी कि फॉर्मास्यूटिकल विभाग एवं फिक्की के संयुक्त प्रयासों से आयोजित इस समारोह के दूसरे संस्करण में प्रदर्शकों की संख्या, शिष्टमंडलों एवं व्यवसाय आगन्तुकों की संख्या एवं अंतर्राष्ट्रीय शिष्टमंडल भागीदारी में 25 प्रतिशत की वृद्धि होगी।

महात्मा गांधी की समाधि को नया रूप

  • राजघाट में पहली बार राष्ट्रपिता के जीवन का विवरण
  • 30 अमृत वचन उनकी स्माधि के पास अंकित किये जायेंगे
  • सोलर पावर प्रोजेक्ट्स, एलईडी लाइटों के साथ सजाए गए 104 खंभे
  • सीसीटीवी कंट्रोल रूम का उद्घाटन
  • चंपारण सत्याग्रह की 100वीं वर्षगांठ के बारे में राजघाट समाधि पत्रिका के विशेषांक का विमोचन
नई दिल्ली : दस हजार से अधिक देशी और विदेशी पर्यटक हर रोज महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित के लिए राष्ट्रीय राजधानी स्थित उनकी समाधि पर आते हैं। पर्यटकों को गांधीजी के जीवन और कार्यों के बारे में जानकारी देने के लिए समाधि के निकट लगे काले पत्थर के अलावा और कोई स्रोत समाधि पर उपलब्ध नहीं है। इस कमी को पूरा करने के लिए और पर्यटकों का आकर्षण बढ़ाने के लिए शहरी विकास मंत्रालय के अंतर्गत राजघाट समाधि समिति ने पिछले दो वर्षों में अनेक उपाय किए हैं, जिनका उद्घाटन कल राष्ट्रपिता की 69वीं पुण्यतिथि के अवसर पर किया जायेगा। इससे पहले 15 वर्ष पूर्व राजघाट पर सुधार कार्य संचालित किए गए थे।  
पहली बार 157 शब्दों में राष्ट्रपिता के जीवन का विवरण और 131 शब्दों में गांधी समाधि का विवरण हिन्दी और अंग्रेजी, दोनों भाषाओं में राजघाट के तीनों द्वारों पर प्रदर्शित किया गया है। संगमरमर पर 30 अमृत वचन उत्कीर्ण कराए गए हैं, जिन्हें ग्रेनाइट के पत्थर की पीठिकाओं पर समाधि परिसर में प्रदर्शित किया जायेगा। राजघाट परिसर में सभी मौजूदा परम्परागत लाइटों के स्थान पर ऊर्जा सक्षम और पर्यावरण अनुकूल एलईडी लाइटें लगायी गयी हैं। पुराने खंभों के स्थान पर सुरुचिपूर्ण ढंग से सजाए गए 104 नए पोल लगाए गए हैं। एलईडी लाइटों के लगने से हर वर्ष 60 हजार से अधिक ऊर्जा की बचत होगी। सुरक्षा बढ़ाने और पर्यटकों की बेहतर निगरानी के लिए 27 सीसीटीवी कैमरों के साथ एक सेंट्रल कंट्रोल रूम बनाया गया है। इन सभी उपायों का उदघाटन करने के अलावा 30 जनवरी को शहरी विकास मंत्री एम वैंकैया नायडू राजघाट ने समाधि पत्रिका के विशेषांक का विमोचन भी किया, जो गांधीजी द्वारा चलाए गए चंपारण सत्याग्रह की 100वीं वर्षगांठ से संबद्ध है।

डिजिटल रेडियो गोलमेज सम्मेलन का उद्घाटन

नई दिल्ली : केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने कहा है कि डिजिटल रेडियो ने देश में डिजिटल एवं कनेक्टिविटी क्रांति अर्जित करने के प्रधानमंत्री के विजन को आगे बढ़ाने के लिए सरकारी एवं निजी प्रसारकों समेत सभी हितधारकों के लिए एक अनूठा अवसर उपलब्ध कराया है। डिजिटल रेडियो प्रौद्योगिकी श्रोताओं को किफायती मूल्य पर उल्लेखनीय रूप से बेहतर श्रव्य गुणवत्ता एवं सेवा विश्वसनीयता उपलब्ध करायेगी। उन्होंने ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग कंसलटेंट्स इंडिया लिमिटेड (बीईसीआईएल) के साथ डिजिटल इंडिया मोंडीएल (डीआरएम) द्वारा आयोजित एक डिजिटल रेडियो गोलमेज सम्मेलन को संबोधित करने के दौरान इसका जिक्र किया।
इसे और अधिक स्पष्ट करते हुए श्री नायडू ने कहा कि ऑटोमोटिव विनिर्माताओं एवं खुदरा विक्रेताओं के लिए वाहनों में डिजिटल रेडियो प्रणाली समाविष्ट करने का यह एक उपयुक्त समय है, जो उपभोक्ताओं को किफायती मूल्य पर उल्लेखनीय रूप से बेहतर श्रव्य गुणवत्ता एवं सेवा विश्वसनीयता प्रदान करेगा। यह इस नई डिजिटल प्रौद्योगिकी को आगे बढ़ाने और इसे अंगीकार करने में सक्षम बनायेगा। डिजिटल रेडियो श्रोताओं, विनिर्माताओं, प्रसारकों एवं नियामकों समेत सभी हितधारकों को लाभ प्रदान करता है।
नायडू ने डिजिटल रेडियो प्रौद्योगिकी अपनाने में आकाशवाणी की उपलब्धियों के बारे में जिक्र किया कि आकाशवाणी ने रेडियो प्रसारण के डिजिटाइजेशन, जो कि आज विश्व में एक अद्वितीय परियोजना है, के पहले चरण में 37 शक्तिशाली ट्रांसमीटरों के तकनीकी स्थापन एवं उन्नयन का काम पहले ही पूरा कर लिया है। यह डिजिटल ट्रांसमिशनों के लिए बिजली उपभोग में कमी सुनिश्चित करेगा तथा भविष्य में आकाशवाणी तथा करदाताओं की ट्रांसमिशन लागत में उल्लेखनीय रूप से बचत करेगा। उन्होंने कहा कि आकाशवाणी ने अंतर्राष्ट्रीय आईटीयू मानक डिजिटल रेडियो मोंडीएल (डीआरएम) पर आधारित अपने डिजिटल ट्रांसमीटरों के जरिये खुद को फिर से गढ़ा है।
राष्ट्रीय राजमार्गों पर ट्रैफिक परामर्शदात्री सेवाओं की जरूरत पर जोर देते हुए श्री नायडू ने कहा कि आकाशवाणी एफएम ट्रांसमीटरों के जरिये इस सेवा के अगले चरण को आईटीयू मानकों के आधार पर डिजिटाइज करने की जरूरत है, जिससे कि इसकी पूर्ण क्षमता का दोहन किया जा सके। यह सेवा विविध रेडियो कार्यक्रम, विस्तृत एवं मांग के अनुसार विविध भाषाओं में ट्रैफिक एवं यात्रा की सूचना तथा आपातकालीन चेतावनी सेवाएं प्रस्तुत करेगी।
श्रोताओं के लिहाज से डिजिटल ट्रांसमिशन एक बेहद सुस्पष्ट और एफएम ध्वनि गुणवत्ता से बेहतर सेवा उपलब्ध करायेगी। इसमें संवर्दि्धत कार्यक्रम विकल्प, एक साथ कई भाषाओं में इंटरनेट से खबर, खेल, यात्रा एवं मौसम संबंधी जानकारियों तक निःशुल्क पहुंच की सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी तथा यह किसी आपदा की स्थिति में लोगों को तत्काल आपातकालीन चेतावनी का प्रसारण करने में सक्षम होगी।
वाणिज्यिक दृष्टिकोण से यह प्रणाली श्रोताओं को किफायती मूल्य पर सेवा प्रदान करेगी तथा तकनीकी दृष्टिकोण से डीआरएम की प्रमुख और क्रांतिकारी विशेषता ट्रांसमिशन मोड्स के एक रेंज से चयन करने की इसकी क्षमता होगी।