COPYRIGHT © RAJIV MANI, Journalist, Patna

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सोमवार, 27 मार्च 2017

एशिया का पहला एयरबस प्रशिक्षण केंद्र नई दिल्ली में खुलेगा

नई दिल्ली : एयरबस नई दिल्ली स्थित एयरोसिटी में एक प्रशिक्षण केंद्र खोलेगा, ताकि एयरबस पॉयलटों और इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया जा सके। इस संबंध में नागरिक उड्डयन मंत्री पी. अशोक गजपति राजू, एयरबस के कार्यकारी अधिकारी टॉम एंडर्स और नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री की उपस्थिति में एक आयोजन किया गया।
इस अवसर पर नागरिक उड्डयन मंत्री पी. अशोक गजपति राजू ने कहा कि भारत में यात्री विमानों की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिसके लिए यह आवश्यक हो गया है कि कुशल पॉयलटों और इंजीनियरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इसके लिए एक प्रशिक्षण केंद्र की भी आवश्यकता है, ताकि कुशल श्रम शक्ति का विकास हो।
एयरबस के कार्यकारी अधिकारी टॉम एंडर्स ने कहा कि एयरबस का प्रशिक्षण केंद्र एशिया में अपनी तरह का पहला केंद्र होगा, जो इस बात का प्रतीक है कि भारत के साथ एयरबस की साझेदारी कितनी गहरी है। उल्लेखनीय है कि भारत में एयरबस के 250 से अधिक विमान संचालन में हैं और इंडियन एयरलाइन्स ने 570 से अधिक विमानों का आर्डर दिया है।
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नमामि गंगे के लिए 19 अरब रुपये मंजूर

उत्तराखंड, बिहार, झारखंड और दिल्ली में शुरू होंगी 20 परियोजनाएं 
नई दिल्ली : राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) की कार्यकारी समिति ने गंगा को स्वच्छ बनाने के अभियान में तेजी लाने के लिए करीब 19 अरब रुपये लागत वाली परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान कर दी है। कार्यकारी समिति की 02 मार्च, 2017 को हुई बैठक में मंजूर की गई 20 परियोजनाओं में से 13 उत्तराखंड से सम्बद्ध हैं, जिनमें नए मलजल उपचार संयंत्रों की स्थापना, मौजूदा सीवर उपचार संयंत्रों का उन्नयन और हरिद्वार में मलजल नेटवर्क कायम करने जैसे कार्य शामिल हैं। इन सभी पर करीब 415 करोड़ रुपये की लागत आएगी। हरिद्वार देश के सर्वाधिक पवित्र शहरों में से एक है, जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु आते हैं। अनुमोदित योजना का लक्ष्य न केवल शहर के 1.5 लाख स्थानीय निवासियों द्वारा, बल्कि विभिन्न प्रयोजनों के लिए इस पवित्र स्थान की यात्रा करने वाले लोगों द्वारा उत्सर्जित मलजल का उपचार भी करना है। इन सभी परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार द्वारा पूर्ण वित्त पोषण किया जाएगा। यहां तक कि इन परियोजनाओं के प्रचालन और रख-रखाव का खर्च भी केंद्र सरकार वहन करेगी।
उत्तराखंड में अनुमोदित अन्य परियोजनाओं में से चार परियोजनाएं अलकनंदा नदी का प्रदूषण दूर करने से संबंधित है, ताकि नीचे की तरफ नदी की धार का स्वच्छतर प्रवाह सुनिश्चित किया जा सके। इसमें गंदे पानी के नालों को नदी में जाने से रोकने के लिए उनका मार्ग बदलना, बीच मार्ग में अवरोधक संयंत्र लगाना और साथ ही चार महत्वपूर्ण स्थानों - जोशीमठ, रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग और कीर्तिनगर में नए लघु एसटीपीज लगाना शामिल है, जिन पर करीब 78 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इनके अलावा गंगा का प्रदूषण दूर करने के लिए ऋषिकेश में 158 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली एक बड़ी परियोजना का अनुमोदन किया गया है। गंगा जैसे ही पर्वत से उतरकर मैदानी भाग में प्रवेश करती है, तो वहीं ऋषिकेश से नगरीय प्रदूषक गंगा में मिलने शुरू हो जाते हैं। गंगा को इन प्रदूषकों से छुटकारा दिलाने के लिए ऋषिकेश में यह सर्व-समावेशी परियोजना शुरू करने को हरी झंडी दिखाई गयी है। इससे न केवल सभी शहरी नालों को ऋषिकेश में गंगा में जाने से रोका जा सकेगा, बल्कि उत्सर्जित जल को उपचार के जरिए फिर से इस्तेमाल योग्य भी बनाया जाएगा। ऋषिकेश संबंधी इस विशेष परियोजना में लक्कड़घाट पर 26 एमएलडी क्षमता के नये एसटीपी का निर्माण किया जाएगा, जिसके लिए ऑनलाइन निगरानी प्रणाली की भी व्यवस्था है।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 665 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से उत्कृष्ट प्रदूषक मानकों के साथ 564 एमएलडी क्षमता के अत्याधुनिक ओखला मलजल उपचार संयंत्र के निर्माण की परियोजना भी अनुमोदित की गयी है। यह संयंत्र मौजूदा एसटीपी फेज- 1, 2, 3 और 4 का स्थान लेगा। इसके अलावा पीतमपुरा और कोंडली में 100 करोड़ रुपये से अधिक अनुमानित लागत वाली नई मलजल पाइप लाइनें बिछाने की दो परियोजनाएं भी मंजूर की गयी है, ताकि रिसाव रोका जा सके।
पटना में कर्मालिचक और झारखंड में राजमहल में 335 करोड़ रुपये से अधिक लागत से मलजल निकासी संबंधी कार्यों का भी कार्य समिति की बैठक में अनुमोदन किया गया। वाराणसी में, जहां वर्ष भर लाखों तीर्थ यात्री आते हैं, गंगा के प्रदूषण की समस्या का समाधान करने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल वाली 151 करोड़ रुपये की परियोजना का भी कार्यकारिणी की बैठक में अनुमोदन किया गया।
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IIFCL ने कैंसर मरीजों के लिए 3.5 करोड़ रुपये दिये

 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : स्वास्थ्य मंत्रालय के कैंसर मरीज कोष (सीएसआर) के लिए सीएसआर योजना के अंतर्गत कैंसर से पीड़ित गरीब मरीजों के उपचार के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की इकाईयों से योगदान देने का आग्रह किया गया था। इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी लिमिटेड (आईआईएफसीएल) ने इस दिशा में अगुवाई की और 2015-16 में 7.5 करोड़ रुपये राशि का योगदान दिया। 2016-17 के दौरान आईआईएफसीएल से प्राप्त सीएसआर योगदान से 385 कैंसर के मरीजों को लाभ हुआ है। आईआईएफसीएल के मुख्य प्रबंध निदेशक एस. बी. नायर ने कल 3.50 करोड़ रुपये का चेक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते को प्रदान किया। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार अरुण कुमार झा और आईआईएफसीएल के मुख्य महाप्रबंधक पी. आर. जयशंकर भी उपस्थित थे।

बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम ने 2.5 करोड़ रुपये दिये

पटना : विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय कक्ष में बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए 2.5 करोड़ रुपये का चेक सौंपा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, पुलिस महानिदेशक सह अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम अभय कुमार उपाध्याय, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम मुख्य अभियंता वशिष्ठ नारायण, बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम के सचिव आनंद प्रकाश श्रीवास्तव, बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम के मुख्य लेखा पदाधिकारी हेमंत कुमार उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने पुलिस महानिदेशक सह अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम को बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम की ओर से मुख्यमंत्री राहत कोष में 2.5 करोड़ रुपये का चेक देने के लिए धन्यवाद दिया।

बिहार शहरी आधारभूत संरचना निगम लि. ने एक करोड़ दिये

पटना : विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय कक्ष में नगर विकास मंत्री महेश्वर हजारी ने बिहार शहरी आधारभूत संरचना निगम लि. की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए एक करोड़ रुपये का चेक सौंपा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, नगर विकास मंत्री महेश्वर हजारी, विकास आयुक्त शिशिर सिन्हा, प्रधान सचिव नगर विकास चैतन्य प्रसाद, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार एवं मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने नगर विकास मंत्री महेश्वर हजारी एवं प्रधान सचिव नगर विकास चैतन्य प्रसाद को बिहार शहरी आधारभूत संरचना निगम लि. की ओर से मुख्यमंत्री राहत कोष में एक करोड़ रुपये का चेक देने के लिए धन्यवाद दिया।

कम्फेड ने 3 करोड़ रुपये का चेक सौंपा

पटना : विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय कक्ष में मंत्री पशु एवं मत्स्य संसाधन अवधेश कुमार सिंह ने बिहार स्टेट मिल्क काॅपरेटिव फेडरेशन लि. (कम्फेड) की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए 3 करोड़ रुपये का चेक सौंपा। इस असवर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, मंत्री पशु एवं मत्स्य संसाधन अवधेश कुमार सिंह, जदयू नेता श्याम रजक, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा, सचिव पशु एवं मत्स्य संसाधन एन. विजया लक्ष्मी, महाप्रबंधक बिहार स्टेट मिल्क काॅपरेटिव फेडरेशन लि. सीमा त्रिपाठी उपस्थित थी। मुख्यमंत्री ने मंत्री पशु एवं मत्स्य संसाधन अवधेश कुमार सिंह को बिहार स्टेट मिल्क काॅपरेटिव फेडरेशन लि. की ओर से मुख्यमंत्री राहत कोष में 3 करोड़ रुपये का चेक देने के लिए धन्यवाद दिया।
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रविवार, 12 मार्च 2017

Happy Holi

केंद्र 61.89 करोड़ से सजावटी मछली पालन पर पायलट परियोजना लांच करेगा

सजावटी मछलीपालन की पायलट परियोजना के लिए 8 राज्य - असम, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल चिन्हित
नई दिल्ली : कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के पशुपालन, डेयरी तथा मछलीपालन विभाग सजावटी मछलीपालन की क्षमता और व्यापकता को महसूस करते हुए 61.89 करोड रुपये की लागत से पायलट आधार पर सजावटी मछलीपालन परियोजना लांच करेगा। इस पायलट परियोजना को लागू करने के काम में मछलीपालन व्यवसाय और निर्यात में लगे लोगों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए सजावटी मछलीपालन के सशक्त और समग्र विकास का वातावरण बनाना है। क्लस्टर आधारित खेती तथा प्राकृतिक संसाधन-स्वदेशी और समुद्री-की वास पुर्नस्थापना और हितधारकों में जागरूकता पैदा करके सजावटी मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष क्षेत्रों की पहचान की गयी है।
पायलट परियोजना की प्रमुख विशेषताएं हैं : (1) क्लस्टर आधार पर सजावटी मछलीपालन को प्रोत्साहित करना (2) सजावटी मछलीपालन और निर्यात से आय को सुदृढ़ बनाना (3) ग्रामीण और ग्रामीण क्षेत्र के बाहर की आबादी के लिए रोजगार अवसरों का सृजन करना (4) सजावटी मछलीपालन को फलता-फूलता व्यवसाय बनाने के लिए आधुनिक टेक्नोलॉजी और नवाचार का उपयोग।
पायलट परियोजना लागू करने के उद्देश्य से क्षमता वाले 8 राज्य - असम, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल चिन्हित किए गए हैं। पायलट परियोजना की गतिविधियों को चार प्रमुख समूहों में रखा गया है, ये हैं - (क) सजावटी मछली उत्पादन से संबधित गतिविधियां यानी घर के पीछे के हिस्से में मछलीपालन ईकाइयां स्थापित करना, मंझोले आकार की ईकाइयां बनाना, एकीकृत प्रजनन और उत्पादन इकाइयां लगाना (ख) एक्वेरियम फैब्रिकेशन, व्यापार तथा मार्केटिंग से संबंधित गतिविधियां (ग) सजावटी मछलियों के प्रोत्साहन के लिए गतिविधियां तथा (घ) कौशल विकास और क्षमता सृजन से जुड़ी गतिविधियां।
सजावटी मछलीपालन की पायलट परियोजना राष्ट्रीय मछली पालन विकास बोर्ड (एनएफडीबी) राज्यों / केन्द्र शासित प्रदेशों के मछलीपालन विभागों के माध्यम से लागू करेगा। सजावटी मछलियों की पायलट परियोजना के अंतर्गत धन वितरण व्यवस्था सीएसएस ब्लू क्रांति मछलियों के एकीकृत विकास और प्रबंधन के धन वितरण व्यवस्था के अनुरूप हैं। पायलट परियोजना लागू करने में केन्द्र सरकार के दायित्वों को पूरा करने के लिए वित्तीय संसाधन जहां तक संभव होगा, सम्मिलित रूप में भारत सरकार की अन्य योजनाओं की दी गयी निधि को तर्कसंगत बनाकर जुटाए जाएंगे। प्रस्तावित पायलट परियाजना लागू करने के लिए कम से कम 1 वर्ष की अवधि आवश्यक है।
दूसरी ओर सजावटी मछलीपालन परंपरागत मछलीपालन क्षेत्र का एक उप क्षेत्र है, जिसमें प्रजनन और सामान्य जल और समुद्री जल में पालन सुविधा होती है। यद्यपि सजावटी मछलीपालन खाद्य और पोष्टिकता सुरक्षा में प्रत्यक्ष रूप से कोई योगदान नहीं करता, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र और ग्रामीण क्षेत्र से बाहर की आबादी के लिए विशेषकर महिलाओं और बेरोजगार युवाओं को अंशकालिक गतिविधियों के लिए आजीविका और आय प्रदान करता है। भारत में सजावटी मछली पालन उद्योग आकार में छोटा है, लेकिन विकास की संभावनाओं से भरपूर है। इसके प्रमुख आकर्षणों में कम समय में कम उत्पादन लागत और अधिक प्राप्ति तथा घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में बढती मांग है। अपने देश के विभिन्न हिस्सों में समुद्री सजावटी मछलियों की लगभग 400 प्रजातियां हैं और सामान्य जल में सजावटी मछलियों की 375 प्रजातियां हैं। 
मछली पालन और जल कृषि क्षेत्र मुख्य रूप से परोसी जाने वाली मछलियों के उत्पादन पर बल देता है। परिणामस्वरूप सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में मछली के उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के लिए धन लगाया जाता है।
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यूजी-पीजी स्तरों पर चिकित्सा पाठ्यक्रमों में नामांकन को राज्य स्तर पर सामान्य परामर्श

नई दिल्ली : स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय में, देश में एकल मेडिकल प्रवेश परीक्षा शुरू करने के बाद, अब स्नातक और स्नातकोत्तर स्तरों पर चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए राज्य स्तर पर सामान्य परामर्श के लिए प्रावधान किया है। एमसीआई के प्रासंगिक नियमों में किए गए संशोधनों के अनुसार, राज्य / संघ राज्य क्षेत्र के स्तर पर निर्दिष्ट प्राधिकरण राज्य में सभी मेडिकल शिक्षा संस्थानों के लिए सामान्य परामर्श करेगा, चाहे इसकी स्थापना केंद्र सरकार, राज्य सरकार, विश्वविद्यालय, मानद विश्वविद्यालय, ट्रस्ट, सोसाइटी, कंपनी, अल्पसंख्यक संस्थाएं या निगम द्वारा की गई हो।
इस कदम से नामांकन की प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और निजी कॉलेजों द्वारा लगाए गए कैपिटेशन शुल्क के प्रचलन  को रोकने में भी मदद मिलेगी। इसके अलावा, छात्रों को एक ही राज्य में नामांकन के लिए कई एजेंसियों के पास आवेदन नहीं करना पड़ेगा।
एनईईटी यूजी 2016 के सीबीएसई द्वारा संचालित किए जाने के बाद, मंत्रालय ने राज्यों और अन्य हितधारकों के परामर्श से राज्यों को 09 अगस्त, 2016 को एक परामर्शदात्री जारी किया था कि वे 2016-17 के सत्र के लिए एमबीबीएस पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए संयुक्त परामर्श आयोजित करने को वरीयता दे सकते हैं। मंत्रालय के दृष्टांत पर, यूजीसी ने 15 सितम्बर, 2016 के पत्र के माध्यम से सभी मानद विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया था कि वे या तो राज्य सरकारों / केन्द्र सरकार द्वारा या एनआईआईटी में प्राप्त अंकों के आधार पर अपनी एजेंसियों के माध्यम से आयोजित समान पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए सामान्य परामर्श के भी हिस्सा होंगे।  
2017-18 सत्र के लिए स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में नामांकन हेतु राज्य स्तर पर आम परामर्श के लिए परामर्शदात्री 05 दिसम्बर, 2016 को दुहराई गई थी। परामर्शदात्री जारी की गई थी कि क्योंकि परामर्श को किसी नियम के तहत शामिल नहीं किया गया था और पूरी प्रवेश प्रक्रिया एक प्रशासनिक तंत्र के रूप में विकसित हुई थी। लेकिन अब स्नातक चिकित्सा शिक्षा विनियमन, 1997 और स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा विनियमन, 2000 में संशोधन संबंधी सूचनाओं के साथ सामान्य परामर्श के लिए कानूनी प्रावधानों को सक्षम बना दिया गया है।
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बुधवार, 8 मार्च 2017

पटना में गंगा में सीवेज प्रदूषण को रोकने को 1050 करोड़ रुपए की परियोजनाओं को मंजूरी

नई दिल्ली : पटना में गंगा को स्वच्छ रखने के प्रयास के तहत शहर में सक्षम सीवेज ट्रीटमेंट ढांचा तैयार करने के लिए नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत 1050 करोड़ रुपए की परियोजनाओं को मंजूरी का बड़ा फैसला लिया गया है। यह राशि दो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाने, मौजूदा एसटीपी के नवीनीकरण, दो पंपिंग स्टेशनों के निर्माण और लगभग 400 किलोमीटर तक का नया भूमिगत सीवेज नेटवर्क बिछाने पर खर्च की जाएगी।
शहर के सैदपुर क्षेत्र में जोन में 60 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी बनाने और 227 किलोमीटर के नए भूमिगत सीवेज नेटवर्क बिछाने के लिए कुल 600 करोड़ रुपए लागत का ठेका यूईएम इंडिया प्रा. लि. और ज्योति बिल्डटेक प्रा. लि. को दिया गया है। तीन अन्य फर्मों - लार्सन एंड टर्बो लि., वोल्टास लि. और जीएए जर्मनी जेवी - को शहर के बेऊर क्षेत्र में 23 एमएलडी वाले एसटीपी के निर्माण, 20 एमएलडी के मौजूदा एसटीपी के नवीनीकरण और लगभग 180 किलोमीटर का नया भूमिगत सीवेज नेटवर्क बिछाने की अलग-अलग परियोजनाओं के लिए 450 करोड़ रुपए आवंटित होंगे। इसके दायरे में सैदपुर और बेऊर क्षेत्र में क्रमशः 83 एमएलडी और 50 एमएलडी क्षमता वाले मुख्य पंपिंग स्टेशनों का निर्माण भी शामिल है। ठेकों में 10 साल की अवधि के लिए एसटीपी और सीवेज नेटवर्क के संचालन और रखरखाव की लागत भी शामिल है।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य न सिर्फ पटना की मौजूदा सीवेज व्यवस्था को सुधारना है, बल्कि अगले एक दशक तक शहर में बढ़ती आबादी की संभावना को ध्यान में रखकर सीवेज ट्रीटमेंट का लक्ष्य भी शामिल है। विश्व बैंक के एक सर्वेक्षण के अनुसार, पटना ढांचागत विकास के मामले में दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ते शहरों में से एक है। इन परियोजनाओं के समयबद्ध परिचालन के बाद इन क्षेत्रों से गंगा नदी में किसी भी प्रकार असंशोधित जल नहीं बहाया जाएगा और इससे गंगा के पवित्र जल को प्रदूषित होने से बचाने में मदद मिलेगी। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) निर्माण-कार्य की प्रगति की निगरानी करेगा।
100 वर्ग किलोमीटर से अधिक के क्षेत्र में फैले पटना शहर को छह सीवरेज क्षेत्रों - दीघा, बेऊर, सैदपुर, कंकड़बाग, पहाड़ी और करमालीचक में बांटा गया है। करमालीचक क्षेत्र में सीवेज संबंधित परियोजनाओं के लिए जल्दी ही अनुबंध किए जाने की उम्मीद है।
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‘2017-18 के लिए पीजी मेडिकल की 4,000 से अधिक सीटें बढ़ाई गई’

 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री ने कहा कि भारत सरकार ने शैक्षिक सत्र 2017-18 के लिए विभिन्न मेडिकल कॉलेजों तथा अस्पतालों में 4,000 पीजी मेडिकल सीटें बढ़ाने की मंजूरी दी है। सीटों की संख्या की दृष्टि से यह अब तक की सबसे बड़ी मंजूरी है और अब कुल 35117 पीजी मेडिकल सीटें उपलब्ध हैं।
श्री नड्डा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और निंरतर निर्देशन के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि इससे तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल का हमारा संकल्प सुदृढ़ होगा और देश में चिकित्सा शिक्षा में सुधार होगा। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि कुल वृद्धि में 2046 सीटें मेडिकल कॉलेजों में हैं। क्लिनिकल विषयों में पीजी की सीटें बढ़ाने की आवश्यकता को देखते हुए सरकार ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों में क्लिनिकल विषयों में शिक्षक विद्यार्थी अनुपात में संशोधन का फैसला किया था। केवल इसी कदम से 71 कॉलेजों में 1,137 अतिरिक्त सीटों का सृजन हुआ। कुल 212 सरकारी कॉलेजों में से अनेक कॉलेज अपने प्रस्ताव भेज रहे हैं, और आशा की जाती है कि मार्च, 2017 के दौरान कम से कम 1,000 और सीटें जोड़ी जाएगी।
इसमें एमडी, एमएस की समकक्ष डीएनबी की सीटें शामिल हैं। पिछले एक वर्ष में डीएनबी की सीटें 2,147 बढ़ी हैं। श्री नड्डा ने कहा कि अबतक देश में पीजी मेडिकल  की कुल 4,143 सीटें जोड़ी गई हैं और मार्च, 2017 के दौरान 1000 से अधिक और सीटे जोड़ी जाएंगी। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इस तरह बजट घोषणा में देश में 5000 पीजी मेडिकल सीटें बढ़ाने का लक्ष्य शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा।

‘युवा पीढ़ी में पढ़ने की आदत डालनी चाहिए’

नई दिल्ली : सूचना एवं प्रसारण मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने सूचना भवन में मीडिया इकाइयों एवं उनकी विभिन्न सुविधाओं का मुआयना किया, ताकि उनके कामकाज का प्रत्यक्ष अनुभव हो सके। प्रकाशन प्रभाग द्वारा हाल ही में खोली गई नई बुक गैलरी पर टिप्पणी करते हुए श्री नायडू ने लोगों से इस गैलरी में अपना आगमन सुनिश्चित करने और प्रकाशन प्रभाग द्वारा पेश किये गये पुस्तकों के बहुमूल्य संग्रह का समुचित उपयोग करने का अनुरोध किया। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं को डिजिटल ऑनलाइन लाइब्रेरी का उपयोग करना चाहिए, जहां चुनिंदा अभिलेखीय पुस्तकें उपलब्ध हैं और जिनसे बुक गैलरी के जरिये निःशुल्क लाभ उठाया जा सकता है। त्वरित संचार के इस युग में सभी आयु वर्गों के लोगों में पढ़ने की आदत डालना अत्यंत आवश्यक है। प्रकाशन प्रभाग की यह पहल इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। एम. वेंकैया नायडू के साथ सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौर, सूचना एवं प्रसारण सचिव अजय मित्तल और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारीगण भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
सूचना भवन में एक अत्याधुनिक एवं आकर्षक बुक गैलरी बनाई गई है, जो जनवरी 2017 से ही परिचालन में आ गई है। बच्चों की पुस्तकों के लिए एक अलग खण्ड बनाया गया है, ताकि रोचक शीर्षकों को पढ़ने के लिए बच्चों को प्रोत्साहित किया जा सके। गैलरी में एक पठन कक्ष भी बनाया गया है, जहां आगंतुक आराम से बैठ सकते हैं और वहां पर प्रदर्शित किसी भी पुस्तक को खरीदने से पहले उसका अवलोकन भी कर सकते हैं।
श्री नायडू ने सूचना भवन में बनाये गये डीएवीपी स्टूडियो का भी मुआयना किया, जहां उन्हें संगठन द्वारा डिजाइन किये गये रचनात्मक एवं अन्य संचार उत्पादों की रूपरेखा से अवगत कराया गया। डीएवीपी द्वारा विभिन्न ग्राहकों के लिए तैयार किये जाने वाले रचनात्मक उत्पादों हेतु उपयोग किये जाने वाले सॉफ्टवेयर के बारे में भी विशेष रूप से जानकारी दी गई। उन्होंने रंग अंशांकन (कैलीब्रेशन) तकनीकों के साथ-साथ मीडिया नियोजन एवं विज्ञापनों को ऑनलाइन ढंग से जारी किये जाने से जुड़ी बातों में भी गहरी रुचि दिखाई।
इससे पहले श्री नायडू ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के इलेक्ट्रॉनिक्स मीडिया मॉनीटरिंग सेंटर का मुआयना किया और वहां कार्यरत लोगों से बातचीत की, ताकि उनके कामकाज को समझा जा सके और इसके साथ ही उन्होंने प्रसारण क्षेत्र से जुड़ी बुनियादी ढांचागत सुविधाओं की समीक्षा की। मीडिया इकाई में कामकाज के तरीके से भी अवगत कराया गया। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सोशल मीडिया प्रकोष्ठ का भी मुआयना किया और इसके साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों की विभिन्न प्रक्रियाओं की समीक्षा की।
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100 जिले खुले में शौच मुक्त घोषित

 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय ने स्वच्छ भारत मिशन में महिलाओं की भूमिका को रेखांकित करने और उनकी अगुवाई की भलीभांति सराहना करने के उद्देश्य से देश भर में पूरे सप्ताह चलने वाली विभिन्न गतिविधियों के कार्यक्रम ‘स्वच्छ शक्ति सप्ताह’ का शुभारंभ किया। केन्द्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने हरियाणा सरकार के साथ संयुक्त रूप से आयोजित एक कार्यक्रम के तहत हरियाणा के गुरुग्राम में राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छ शक्ति सप्ताह का शुभारंभ किया। हरियाणा में जमीनी स्तर से जुड़ी 1000 से अधिक महिला स्वच्छता चैंपियनों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। हरियाणा के 11 ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) जिलों के उपायुक्तों को इस अवसर पर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर श्री तोमर ने स्वच्छ भारत मिशन के क्रियान्वयन के तहत समस्त ग्रामीण भारत में महिलाओं द्वारा निभाई जा रही अग्रणी भूमिका की सराहना की। उन्होंने स्वच्छता को एक जन आंदोलन का स्वरूप प्रदान करने के लिए भी इनकी सराहना की। उन्होंने घोषणा की कि पूरे सप्ताह के दौरान राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम आयोजित कर महिला स्वच्छता चैंपियनों, महिला सरपंचों, ‘आशा’ से जुड़ी कार्यकर्ताओं, स्कूल शिक्षकों, युवा विद्यार्थियों और वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि गुजरात में एक विशाल कार्यक्रम के आयोजन के साथ इस सप्ताह का समापन होगा। ‘स्वच्छ शक्ति 2017’ नामक इस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 6000 महिला सरपंचों को संबोधित करेंगे और स्वच्छ भारत में उनके अहम योगदान के लिए उन्हें सम्मानित करेंगे।
मंत्री महोदय ने यह भी घोषणा की कि देश में ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) जिलों की संख्या अब 100 के पार चली गई है। इसी तरह 1.7 लाख से ज्यादा गांव अब ओडीएफ हो गये हैं। उन्होंने कहा कि आज हासिल की गई इस महत्वपूर्ण उपलब्धि ने इसे मिशन के लिए दोहरी खुशी के अवसर में तब्दील कर दिया है। उन्होंने स्वच्छ एवं खुले में शौच मुक्त भारत को एक वास्तविकता में तब्दील करने संबंधी प्रधानमंत्री के विजन में उल्लेखनीय योगदान देने के लिए स्वच्छ भारत मिशन से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति, विशेषकर इन 100 जिलों के प्रशासन की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
हरियाणा के विकास एवं पंचायत और कृषि मंत्री ओ. पी. धनखड़ भी इस अवसर पर उपस्थित थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि महिलाएं स्वच्छ भारत मिशन की स्वाभाविक नेता हैं। उन्होंने यह भी घोषणा की कि हरियाणा नवंबर, 2017 तक एक ओडीएफ राज्य बन जायेगा। केंद्र एवं राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ अन्य हितधारकों ने भी इस समारोह में भाग लिया।

आर्सेनिक के बारे में जागरूकता जरूरी : उमा भारती

नई दिल्ली : केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती ने कहा है कि गंगा बेसिन में आर्सेनिक की समस्या से करोड़ों लोग प्रभावित हो रहे हैं और इस समस्या के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए एक समग्र आंदोलन चलाए जाने की जरूरत है। नई दिल्ली में केंद्रीय भूमि जल बोर्ड की ओर से ‘गंगा बेसिन के भूजल में आर्सेनिक की समस्या एवं निराकरण’ विषय पर आयोजित कार्याशाला का उदघाटन करते हुए उन्होंने कहा कि भूजल में आर्सेनिक की समस्या से निपटने के लिए इस कार्यशाला की रिपोर्ट आने के बाद मंत्रालय एक व्यापक कार्ययोजना तैयार करेगा, जिसमें राज्य सरकारों एवं गैर सरकारी संगठनों का भी सहयोग लिया जायेगा। विकास में जनभागिदारी के महत्व पर जोर डालते हुए उन्होंने कहा कि भूजल में आर्सेनिक एवं अन्य प्रदूषण से निपटने के लिए भी जनआंदोलन खड़ा करना पड़ेगा। इसी प्रकार जल के सदुपयोग को भी जन आंदोलन बनाये जाने की जरूरत है। सुश्री भारती ने कहा कि उन्होंने भी ऐसे कई गांव देखे हैं, जहां जल संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य हुआ है।   
सुश्री भारती ने कहा कि ग्रामीण भारत को पीने के पानी की जरूरतों को पूरा करने में 85 फीसदी के आसपास योगदान भूजल का है। भारत सरकार की योजनाओं में भूजल संसाधनों की स्थिरता एक बडा एजेंडा है। क्योंकि बदलती जीवन शैली और बढ़ती जनसंख्या के साथ पानी की मांग भी बढ़ रही है, और भूजल संसाधनों का संरक्षण करने और उन्हें बचाने की अत्यन्त जरूरत है।        
सुश्री भारती ने कहा कि भूजल संसाधनों से संबंधित समस्याओं में से एक प्रमुख समस्या पानी की गुणवत्ता की है। भूजल में आर्सेनिक की मौजूदगी जहर के समान है और यह मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड और जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय द्वारा गंगा बेसिन में कृत्रिम पुनर्भरण और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे भूजल की गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद मिलेगी ।
केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री ने विश्वविद्यालयों, आईआईटी और अनुसंधान संस्थानों में काम कर रहे भूजल विशेषज्ञों से आह्वान किया कि वे भी अपने महत्वपूर्ण सुझाव दें, ताकि मंत्रालय को इस समस्या के समाधान के लिए भविष्य की रणनीति बनाने में सहायता मिल सके।
कार्यशाला के उदघाटन सत्र में केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण राज्य मंत्री संजीव बालियान ने कहा कि भूजल में आर्सेनिक की समस्या से देश की 50 फीसदी जनता जूझ रही है। उन्होंने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए सभी विभागों को एक सामूहिक सोच बनानी पडे़गी और मिलकर कार्य करना होगा। मंत्रालय के सचिव डॉ. अमरजीत सिंह ने इस अवसर पर कहा कि गंगा नदी से ही सर्वाधिक जल मिल रहा है और यही नदी आर्सेनिक से ज्यादा प्रदूषित है। इस समस्या के निजात पाने के लिए राज्यों में टास्क फोर्स बनाकर कार्य किया जायेगा। एक दिवसीय इस कार्यशाला में देशभर के विभिन्न राज्यों एवं संस्थानों से आए 300 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला के लिए 23 प्रपत्र चुने गए, जिसमें से सात प्रपत्रों पर विशेषज्ञों एवं भूजल वैज्ञानिकों के बीच विस्तृत चर्चा हुई।

कटाव निरोधक कार्य के लिए 4268.25 लाख रुपये स्वीकृत

पटना : जल संसाधन विभाग ने जानकारी दी है कि राघोपुर दियारान्तर्गत गंगा नदी के दायें धार के बायें किनारे एवं बायें धार के दायें एवं बायें किनारे स्थित विभिन्न बिन्दुओं पर कटाव निरोधक कार्य हेतु प्राक्कलित राशि 4268.25 लाख रुपये की प्रशासनिक एवं व्यय की स्वीकृति दी गई है। सूचनानुसार राशि की निकासी एवं व्ययन हेतु कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जन निस्सरण प्रमंडल, लालगंज को अधिकृत किया गया है तथा इस कार्य के लिए नियंत्री पदाधिकारी प्रधान सचिव, जल संसाधन विभाग, पटना होंगे। उक्त निर्माण कार्य की समय सीमा वित्तीय वर्ष 2016-17 एवं 2017-18 में कार्यान्वित करते हुए दिनांक 31 मई, 2017 तक पूर्ण करने की है।
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केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर के 5 शिक्षण संस्थानों की स्थापना करेगी

नई दिल्ली : केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं संसदीय कार्य राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने युद्धस्तर पर अभियान चलाया हुआ है जिससे कि अल्पसंख्यकों सहित समाज के सभी तबकों को सस्ती, सुलभ गुणवत्ता वाली शिक्षा मिल सके। नई दिल्ली में “माइनॉरिटी कम्युनिटी टीचर्स एसोसिएशन” के नेशनल सेमिनार को सम्बोधित करते हुए श्री नकवी ने कहा कि अल्पसंख्यक मंत्रालय अल्पसंख्यकों को बेहतर पारंपरिक एवं आधुनिक शिक्षा मुहैय्या कराने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के 5 शिक्षण संस्थानों की स्थापना करेगा। तकनीकी, मेडिकल, आयुर्वेद, यूनानी सहित विश्वस्तरीय कौशल विकास की शिक्षा देने वाले संस्थान देश भर में स्थापित किये जायेंगे। एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया है, जो शिक्षण संस्थानों की रुपरेखा-स्थानों आदि के बारे में चर्चा कर रही है और जल्द ही अपनी विस्तृत रिपोर्ट देगी और हमारी कोशिश होगी कि यह शिक्षण संस्थान 2018 से काम करना शुरू कर दें। इन शिक्षण संस्थानों में 40 प्रतिशत आरक्षण लड़कियों के लिए किये जाने का प्रस्ताव है। 
श्री नकवी ने कहा कि अल्पसंख्यक मंत्रालय का पूरा जोर इस बात पर है कि अल्पसंख्यकों को बेहतर शिक्षा के साथ-साथ उन्हें विभिन्न कौशल ट्रेनिंग भी दी जाये, जिससे छात्र रोजगार के योग्य हो सकें। अल्पसंख्यकों को बेहतर शिक्षा दिलाने और बेहतर रोजगारपरक ट्रेनिंग देने के लिए मंत्रालय विभिन्न योजनाएं चला रहा है। 
श्री नकवी ने कहा कि केंद्र सरकार ने इस बार अल्पसंख्यक मंत्रालय के बजट में बड़ी वृद्धि की है। 2017-18 के लिए अल्पसंख्यक मंत्रालय का बजट बढ़ाकर 4195.48 करोड़ रुपए कर दिया गया है। यह पिछले बजट के 3827.25 करोड़ रुपए के मुकाबले 368.23 करोड़ रुपए (9.6 प्रतिशत की वृद्धि) अधिक है। श्री नकवी ने कहा कि बजट में बढ़ोतरी से अल्पसंख्यकों के सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक सशक्तिकरण में मदद मिलेगी। 
श्री नकवी ने कहा कि इसबार बजट का 70 प्रतिशत से ज्यादा धन अल्पसंख्यकों के शैक्षिक सशक्तिकरण एवं कौशल विकास, रोजगारपरक ट्रेनिंग पर खर्च किया जायेगा। बजट का बड़ा भाग विभिन्न स्कालरशिप, फेलोशिप और कौशल विकास की योजनाओं जैसे ‘सीखो और कमाओ’, ‘नई मंजिल’, ‘नई रौशनी’, ‘उस्ताद’, ‘गरीब नवाज कौशल विकास केंद्र’, ‘बेगम हजरत महल स्कॉलरशिप’ पर खर्च किये जाने का प्रावधान है। इसके अलावा बहु-क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम (एमएसडीपी) के तहत भी शैक्षिक विकास की गतिविधियों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर धन खर्च किया जायेगा। 
मेरिट-कम-मीन्स स्कालरशिप पर 393.5 करोड़ रुपए, प्री-मेट्रिक स्कालरशिप पर 950 करोड़ रुपए, पोस्ट-मेट्रिक स्कालरशिप पर 550 करोड़ रुपए, ‘सीखो और कमाओ’ पर पिछले साल के मुकाबले 40 करोड़ रुपए की वृद्धि के साथ 250 करोड़ रुपए, ‘नई मंजिल’ पर 56 करोड़ रुपए की वृद्धि के साथ 176 करोड़ रुपए, मौलाना आजाद फेलोशिप स्कीम पर 100 करोड़ रुपए खर्च किये जाने का प्रावधान है। मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन के लिए 113 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। श्री नकवी ने कहा कि 2017-18 में 35 लाख से ज्यादा छात्रों को विभिन्न स्कॉलरशिप दी जाएगी। इसके अलावा 2 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार परक ट्रेनिंग दी जाएगी। 
श्री नकवी ने कहा कि 16 से ज्यादा ‘‘गुरुकुल’’ प्रकार के आवासीय स्कूलों को स्वीकृति दी गई है। साथ ही जो मदरसें मुख्यधारा की शिक्षा भी दे रहे हैं, उन्हें भी मदद दी जारी रही है। अल्पसंख्यकों के शैक्षिक सशक्तिकरण के लिए किये जा रहे केंद्र सरकार के प्रयासों में गरीब नवाज स्किल डेवलपमेंट सेंटर शुरू करना, छात्राओं के लिए बेगम हजरत महल स्कालरशिप करना एवं 500 से ज्यादा उच्च शैक्षिक मानकों से भरपूर आवासीय विद्यालय एवं रोजगार परक कौशल विकास केंद्र शामिल हैं।
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बुधवार, 1 मार्च 2017

दुर्घटनाओं की सूचना के लिए नया प्रारूप

नई दिल्ली : सड़क दुर्घटनाओं की सूचना के लिए प्रारूप की समीक्षा के संबंध में सड़क यातायात एवं राजमार्ग मंत्रालय ने एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। समिति की अध्यक्षता यातायात अनुसंधान शाखा की वरिष्ठ सलाहकार ने की। समिति में आईआईटी दिल्ली और आईआईटी खड़गपुर और डब्ल्यूएचओ के विशेषज्ञों सहित राज्यों के पुलिस और यातायात विभाग तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। समिति ने अपने सुझाव सौंप दिए थे, जिन्हें सड़क यातायात एवं राजमार्ग मंत्रालय ने स्वीकर कर लिया है।
मीडिया से बातचीत करते हुए यातायात अनुसंधान शाखा की वरिष्ठ सलाहकार और समिति की अध्यक्ष कीर्ति सक्सेना ने बताया कि दुर्घटना स्थल से पर्याप्त आंकड़े और सूचना न प्राप्त होने के कारण पुलिस थानों में प्राथमिकी सही तौर पर दर्ज नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं की सूचना संबंधी मौजूदा प्रारूप की खामियों का जायजा लेने के लिए कई बार बैठक की गई। विभिन्न राज्यों और देश के अन्य स्थानों पर दुर्घटनाओं की सूचना के तरीकों का अध्ययन करने के बाद मंत्रालय को नया प्रारूप बनाने का सुझाव दिया गया। इसमें पुलिस की प्रमुख भूमिका होगी।  
समिति सदस्य आईआईटी दिल्ली की प्रो. गीतम तिवारी ने नए प्रारूप का विवरण दिया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में सूचना पुलिस थानों में की जाती हैं और राज्य सरकारें केंद्र को रिपोर्ट भेजती हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि नया प्रारूप खामियों को दूर करने में सफल होगा।
समिति सदस्य आईआईटी खड़गपुर की प्रो. सुदेष्णा मित्रा ने कहा कि दुर्घटना स्थल की रिकॉर्डिंग की अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि जीपीएस से दुर्घटना स्थल पर सड़क की बनावट को समझने में आसानी होगी।
व्यापक चर्चा के बाद समिति ने एक एकीकृत  दुर्घटना रिकॉर्डें प्रारूप तैयार किया है। इसे सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस लागू करेगी। दुर्घटना रिकॉर्डें प्रारूप में पांच खंड हैं, जिसमें दुर्घटना स्थल, सड़क की हालत और दुघटना में लिप्त वाहन का विवरण और दुर्घटनाग्रस्त व्यक्तियों का ब्यौरा शामिल है। पहले खंड में दुर्घटना स्थल, वाहनों की किस्म आदि, दूसरे खंड में सड़क की हालत, टूट-फूट आदि, तीसरे खंड में वाहनों का विवरण, चैथे खंड में वाहन चालकों द्वारा यातायात नियमों की कथित अवहेलना और पांचवें खंड में वाहन चालकों के अलावा अन्य व्यक्तियों का विवरण दर्ज किया जाएगा।
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