COPYRIGHT © RAJIV MANI, Journalist, Patna

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रविवार, 23 अप्रैल 2017

नव काव्यांजलि एक निर्भीक अभिव्यक्ति

समीक्षक : बसंत कुमार राय
 पुस्तक समीक्षा 
राजीव मणि द्वारा संपादित ‘नव-काव्यांजलि’ में ‘अपनी बात’ कहते हुए संपादक की यह उक्ति अच्छी लगी कि संग्रह में मौजूद गलतियों की जवाबदेही उन पर है, लेकिन खूबियों का श्रेय कवियों को जाता है। प्रश्न उठता है कि किस प्रकार की गलतियों के लिए वे दायित्व ले रहे हैं? क्या इनमें रचनागत त्रुटियाँ भी शामिल है? यदि हाँ, तो कमियों के बचाव के लिए उनका पक्ष अनूठा है।
 किसी भी कविता में कविता इस बात पर निर्भर करती है कि कवि वस्तु को किस तरह देखता है, क्योंकि वस्तु की भौतिक सत्ता कविता में गौण हो जाती है। ऐसे में कवि अपनी अंतर्दृष्टि के सहारे उसे संरचनागत विस्तार देता है। यहीं वह प्रस्थान बिंदु भी है, जहाँ से कवि अपनी निजता का अतिक्रमण भी करता चलता है। वस्तु की सर्वस्वीकार्यता प्रस्तुत करने की यह प्रक्रिया कवि की अवलोकन क्षमता, संवेदना की गहराई, रचने के लिए शिल्प के चुनाव के विवके पर बहुत ज्यादा निर्भर करती है। यहाँ रचना के अबूझ बन जाने का खतरा रहता है, जिससे आधुनिक कविता बुरी तरह पीड़ित है, लेकिन पाठक रचना को छोड़ रचनाकार (कवि) का नाम देखकर वाह-वाह कर देते हैं।
Nav Kavyanjali
ऐसा भी होता है कि वस्तु का विन्यासगत विस्तार करते-करते कवि स्थूल विवरणों के सहारे अपने कत्र्तव्य की इतिश्री समझ लेता है। तब कविता निश्प्राण हो जाती है। यह एक बड़ी कमजोरी है, जिसको देखते हुए प्रकाशक कविता की पुस्तक छापने से घबराते हैं। यह संग्रह इस कमजोरी से मुक्त नहीं है, लेकिन संपादक कुछ अच्छी रचनाओं को सामने रखकर ‘नव काव्यांजलि’ प्रकाशित करने के लिए निश्चितरूपेण प्रशंसा के पात्र हैं। 
संग्रह की कुछ कविताओं में जीवन का मर्म, उसकी पेंददगियां, उसमें निहित प्रेम और करूणा, ईष्र्या-द्वेष, आशा-आकांक्षा, भ्रम और छल, संघर्ष, हिंसा और प्रतिहिंसा का विद्रूप खुलकर सामने आया है। दरअसल में काव्य रचना की चारित्रिक खूबियां हैं कि वह अपनी बनावट में लोकतांत्रिक हैं। राजनीतिक लोकतंत्र की अवधारणा से परे रचनागत लोकतांत्रिकता कविता की विशिष्ट पहचना है। यह तब भी कविता में थी, जब धरती पर लोकतंत्र नहीं था। कुम्भन दास की यह उक्ति-भक्तन को कहां सीकरी सो काम, स्वयं में एक पुख्ता प्रमाण है। ऐसे तो भक्ति आंदोलन का सूत्रपात ही लोकोन्मुखी प्रवृत्तियों के कारण लोकभाषाओं में हुआ। इसलिए न्यायसंगत मान्यता के तहत कविता संपूर्ण चराचर की निर्भीक अभिव्यक्ति है। मुझे खुशी हुई कि इस संग्रह में ज्यादातर कवियों की चिन्ता में आमजन सहित नदी, पेड, चिड़ियाँ, पहाड़ आदि शामिल हैं। 
सृष्टि का स्वरूप ही काव्यमय है। कोई भी कविता इस सत्य के अनुरूप ही शलाध्य हो सकती है। कहना न होगा कि मनुष्य ने काव्यमयता को बिगाड़ने की भरपूर कोशिश की है। यह कोशिश लगातार जारी है। कविता ऐसी कोशिश के खिलाफ किस तरह खड़ी है, यह उसकी सबसे बड़ी चुनौती है। संग्रहित कवियों से यह उम्मीद की जाती है कि इस आसन्न चुनौती से वे मुंह न मोड़ेंगें।
समीक्षक : बसंत कुमार राय

‘कॉल ड्रॉप्स की समस्या घर के भीतर अधिक’

 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : ग्राहकों से सीधी प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए दूरसंचार विभाग ने 23 दिसंबर, 2016 को दिल्ली, मुंबई, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र और गोवा में एक इंटेग्रेटिड वॉयस रिस्पांस सिस्टम (आईवीआरएस) प्रणाली की शुरूआत की है, जिसका 12 जनवरी, 2017 को पंजाब और मणिपुर के अलावा अन्य राज्यों में विस्तार किया गया है। पंजाब और मणिपुर में आईवीआरएस प्रणाली की शुरूआत 16 मार्च, 2017 को हुई। इस प्रणाली के माध्यम से ग्राहकों को शॉर्ट कोड 1955 से आईवीआरएस कॉल प्राप्त होती हैं और कॉल ड्रॉप्स की समस्या के बारे में कुछ प्रश्न पूछे जाते हैं। ग्राहक इसी शॉर्ट कोड 1955 पर टोल फ्री एसएमएस भी भेज सकते हैं, जिसमें उनके उस शहर, नगर, गांव का नाम का उल्लेख हो, जहां वे अक्सर कॉल ड्रॉप्स की समस्या से ग्रस्त हैं।
आईवीआरएस प्रणाली की 23 दिसम्बर, 2016 को शुरूआत से लेकर 28 फरवरी, 2017 तक पूरे देश में सभी टीपीएस के ग्राहकों को 16,61,640 सफल आउटबाउंड कॉल की गई हैं। लगभग 2,20,935 ग्राहकों ने सर्वेक्षण में भाग लिया, जिनमें से लगभग 1,38,072 (62.5ः) ग्राहकों ने कॉल ड्रॉप्स की सूचना दी है। इस प्रतिक्रिया से यह पता चला है कि कॉल ड्राप्स की समस्या घर के अंदर अधिक गंभीर है। इस प्रतिक्रिया को समयबद्ध तरीके से कार्रवाई करने के लिए प्रति सप्ताह दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के साथ साझा किया जाता है। टीएसपी ने दूर संचार विभाग द्वारा भेजे गए आईवीआरएस फीडबैक डाटा का उपयोग करने के लिए एक विस्तृत तंत्र स्थापित किया है।
टीएसपी, हर पखवाड़े, दूर संचार विभाग कार्यबल को कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत कर रहा है। 15-28 फरवरी, 2017 के पखवाड़े के लिए, टीएसपी द्वारा 43,403 फीडबैक मामले जांच हेतु लिए। कॉल ड्रॉप्स समस्या के बारे में अतिरिक्त जानकारी के लिए ग्राहकों को टेलीफोन कॉल और एसएमएस करने के बाद 7,210 मामलों की समाधान हेतु पहचान की गई। इस पखवाड़े के दौरान 2467 मामलों को ऑप्टिमाइजेशन, हार्डवेयर / बिजली की समस्याओं के समाधान, क्षेत्र के दौरे आदि के माध्यम से सुलझाया गया और सकल आधार पर आईवीआरएस की शुरूआत से लेकर अभी तक इस पहल के दौरान 9328 मामलों को इस पहल के माध्यम से हल किया गया है।
इसके अलावा, 5529 मामले कॉल ड्रॉप समस्या से संबंधित नहीं थे, लेकिन वे डेटा, रोमिंग, बिलिंग, एमएनपी, मोबाइल डिवाइस आदि की समस्या से जुड़े थे। ऐसे मामलों की टीएसपी ने आवश्यक कार्रवाई करने के लिए पहचान की। टीएसपी ने आने वाले समय में लगभग 603 नई साइटें / बूस्टर लगाने की योजना बनाई गई है। दूर संचार कार्यबल आईओआरएस प्रणाली से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए एक महीने में एक बार टीएसपी के साथ बैठक कर रहा है। मंत्री महोदय का कार्यालय, आईवीआरएस प्रणाली के परिचालन के बारे में नियमित समीक्षाओं का भी आयोजन कर रहा है।

सरकार ने सभी वाहनों से बत्तियां हटाने का फैसला किया 

नई दिल्ली : देश में स्वस्थ लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक और ऐतिहासिक कदम उठाया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में देश में सभी श्रेणियों के वाहनों के ऊपर लगी सभी तरह की बत्तियां हटाने का फैसला किया। सरकार का स्पष्ट मानना है कि वाहनों पर लगी बत्तियां वीआईपी संस्कृति का प्रतीक मानी जाती हैं और लोकतांत्रिक देश में इसका कोई स्थान नहीं है। उनका कुछ भी औचित्य नहीं है। हालांकि आपातकालीन और राहत सेवाओं, एम्बुलेंस, अग्नि शमन सेवा आदि से संबंधित वाहनों पर बत्तियों लगाने की अनुमति होगी। इस फैसले को ध्यान में रखते हुए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय कानून में आवश्यक प्रावधान करेगा।

2100 करोड़ रुपये की सीवेज उपचार परियोजनाओं को मंजूरी

नई दिल्ली : नमामी गंगे कार्यक्रम को एक बड़े प्रोत्साहन के रूप में, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने 2154.28 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत के साथ 26 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। यह राशि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड एवं दिल्ली राज्यों में प्रति दिन 188 मिलियन लीटर (एमएलडी) (लगभग) की नई सीवेज उपचार क्षमता के सृजन, वर्तमान एसटीपी क्षमता के 596 एमएलडी का पुनर्वास, वर्तमान एसटीपी क्षमता के 30 एमएलडी का उन्नयन, अवरोधन एवं डायवर्जन कार्यों तथा 145.05 किलोमीटर सीवरेज नेटवर्क पर खर्च की जाएगी।
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विश्व होम्योपैथी दिवस पर दो दिवसीय सम्मेलन संपन्न

नई दिल्ली : विश्व होम्योपैथी दिवस पर नई दिल्ली में दो दिवसीय सम्मेलन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। समारोह में आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीपद येस्सो नाइक मुख्य अतिथि थे। समारोह की अध्यक्षता सांसद और आयुष मंत्रालय की संसदीय स्थायी समिति के सदस्य डॉ. मनोज रजोरिया ने की। विश्व होम्योपैथी दिवस होम्योपैथी के जन्मदाता जर्मन चिकित्सक डॉ. क्रिस्टियानी फ्रेडरिक सैमुएल हनिमैन की 262वीं जयंती के उपलक्ष में आयोजित किया गया। डॉ. क्रिस्टियानी फ्रेडरिक सैमुएल हनिमैन महान विद्वान, भाषाविद और प्रख्यात वैज्ञानिक थे। सम्मेलन का थीम होम्योपैथी में अनुसंधान की गुणवत्ता बढ़ाना था। 
सम्मेलन का आयोजन आयुष मंत्रालय की केन्द्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद द्वारा किया गया। इस अवसर पर आयुष मंत्री ने हनिमैन के योगदान और उनके द्वारा प्रकृति के अचूक कानून के आधार पर चिकित्सा व्यवस्था की खोज करने के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि आयुष मंत्रालय आयुष प्रणाली में और अधिक साक्ष्य लाने और अंतर्राष्ट्रीय मान्य साधनों से प्रणाली को वैध बनाने के लिए संकल्पबद्ध है। उन्होंने विश्वसनीय होम्योपैथी अनुसंधान में सीसीआरएच द्वारा लगाई गई छलांग की सराहना की। उन्होंने शिष्टमंडल को बताया कि सीसीआरएच ने क्वांटम भौतिकी जैवइंजीनियरिंग, वाइरौलॉजी, रसायन विज्ञान और वनस्पति विज्ञान जैसे क्षेत्रों में विशिष्ट कार्य के लिए प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय संस्थानों से सहयोग किया है। इस काम में न केवल होम्योपैथी को मान्यता मिली है, बल्कि संबद्ध वैज्ञानिकों का ध्यान भी इस उपचार प्रणाली की ओर गया है। हमें होम्योपैथी और नैनोविज्ञान तथा जैनोमिक विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान करने की आवश्यकता है। 
इस अवसर पर पहली बार सीसीआरएच ने होम्योपैथी अनुसंधान में योगदान करने वालों को पुरस्कार प्रदान किया। श्रीपद नाइक ने श्रेष्ठ शोध के लिए लाइफ टाइम पुरस्कार डॉ. ए. आर. खुदाबक्श, श्रेष्ठ शिक्षक के लिए प्रोफेसर चतुर्भुज नायक, श्रेष्ठ शोध पत्रों के लिए डॉ. कुसुम एस. चंद और डॉ. अर्चना नारंग, युवा वैज्ञानिकों के लिए डॉ. सी. एल. पाटिल तथा डॉ. देवदत्त नायक को पुरस्कृत किया। सम्मेलन में आयुष मंत्री ने होम्योपैथी में गुणवत्ता सम्पन्न एमडी डिसरटेशन के लिए पुरस्कार विजेताओं की घोषणा की। 
अपने संबोधन में श्री मनोज रजोरिया ने होम्योपैथी के समग्र विकास के लिए गुणवत्ता सम्पन्न शिक्षा और शोध की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि होम्योपैथी के लिए राष्ट्रीय आयोग बनाने का प्रस्ताव है। 
होम्योपैथिक अस्पतालों के एनएबीएच प्रमाणन सहित उच्च गुणवत्ता युक्त अनुसंधान माध्यमों द्वारा सार्वजनिक स्वास्थ्य और महामारियों में होम्योपैथी की भूमिका के महत्वपूर्ण कारक सहित अनुसंधान करने के लिए कॉलेज के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने तथा होम्योपैथिक अनुसंधान के प्रमुख क्षेत्रों को विचार-विमर्श के लिए पांच सत्रों में विभक्त किया गया। प्रमुख सत्रों की अध्यक्षता अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय संसाधन व्यक्तियों द्वारा की गई। इनका मुख्य उद्देश्य होम्योपैथिक अनुसंधान की जटिलताओं को समझाने के लिए सभी हितधारकों को शिक्षित करना तथा सभी प्रकार के प्रतिनिधियों को गुणवत्तायुक्त अनुसंधान माहौल के बारे में पर्याप्त जानकारी उपलब्ध कराना था। इन प्रतिनिधियों में अनुसंधानकर्ता, चिकित्सक नीति निर्माता, चिकित्सा छात्र और होम्योपैथिक उद्योग के प्रतिनिधि शामिल थे। 
आयुष मंत्रालय के संयुक्त सचिव ए. के. गनेरीवाला और संयुक्त सचिव पी. एन. रंजीत कुमार, पद्मश्री डाॅ. वी. के. गुप्त, अध्यक्ष वैज्ञानिक सलाहकार समिति, सीसीआरएच, डॉ. लेक्स रूटेन (नीदरलैंड्स), डॉ. आइजैक गोल्डन (ऑस्ट्रेलिया) और डाॅ. मार्टिअन ब्रांड्स (नीदरलैंड्स) सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस आयोजन में शामिल हुए।
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