COPYRIGHT © RAJIV MANI, Journalist, Patna

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गुरुवार, 29 जून 2017

बिहार लीची उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य

  • बिहार में 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल से लगभग 300 हजार मीट्रिक टन लीची का उत्पादन
  • भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र एवं राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र के वैज्ञानिकों ने लीची को उपचारित कर तथा कम तापमान पर 60 दिनों तक भंडारित कर रखने में सफलता पायी
नई दिल्ली : केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि केन्द्र सरकार का मुख्य उद्देश्य लीची के विकास एवं उत्पादन बढ़ाने के लिए शोध करके नई-नई किस्मों एवं तकनीकों का विकास करना तथा लीची संबंधी जानकारी को प्रसार विभाग को उपलब्ध कराना है। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने यह बात मुसाहारी, मुजफ्फरपुर, बिहार में लीची प्रसंस्करण संयंत्र के उद्घाटन और सह प्रशिक्षण के अवसर पर कही।
राधा मोहन सिंह ने कहा कि बिहार लीची उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य है। अभी बिहार में 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल से लगभग 300 हजार मीट्रिक टन लीची का उत्पादन हो रहा है। बिहार का देश के लीची के क्षेत्रफल एवं उत्पादन में लगभग 40 प्रतिशत का योगदान है। लीची के महत्व को देखते हुए 6 जून, 2001 को यहां राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र की स्थापना की गयी।
श्री सिंह ने कहा कि बिहार के कुल क्षेत्रफल एवं उत्पादन में मुजफ्फरपुर जिले का योगदान बहुत अच्छा है, परन्तु लीची उत्पादकता जो अभी लगभग 8.0 टन की है, उसे बढ़ाने की जरूरत है। इस दिशा में सभी सरकारी संस्थानों, सहकारी समितियों एवं किसानों को आगे आना होगा। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि यह खुशी की बात है कि भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र एवं राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र के वैज्ञानिकों ने लीची फल को उपचारित करके तथा कम तापमान पर 60 दिनों तक भंडारित करके रखने में सफलता पायी हैं। इसका एक प्रसंस्करण संयंत्र भी विकसित किया गया है। श्री सिंह ने कहा कि यह तकनीक निश्चित रूप से लीची उत्पादकों एवं व्यापारियों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी। श्री सिंह ने कहा कि इस तकनीक को प्रभावशाली बनाने के लिए उत्पादकों को अच्छी गुणवत्ता के फल का उत्पादन करना होगा, जिसके लिए राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र, मुजफ्फरपुर ने अनेक तकनीकों का विकास किया है। राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र, मुजफ्फरपुर प्रत्येक वर्ष लगभग 35-40 हजार पौधे देश के विभिन्न संस्थानों व राज्यों को उपलब्ध करा रहा है। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र, आईसीएआर के अन्य संस्थानों तथा राज्यों के कृषि विश्वविद्यालयों एवं केन्द्र तथा राज्य सरकारों के विकास प्रतिष्ठानों जैसे - राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड, एपीडा, राष्ट्रीय बागवानी मिशन आदि के साथ मिलकर कार्य कर रहा है।
श्री सिंह ने कहा कि हमारे वैज्ञानिक दिन-रात मेहनत करके उन्नत किस्मों और कृषि क्रियाओं का विकास कर रहे हैं, जिसे राज्य सरकार एवं कृषि विज्ञान केन्द्रों और अन्य संस्थाओं द्वारा आम जनता तक पहुंचाने की जरूरत है। अपने सीमित संसाधनों के माध्यम से केन्द्र ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् की फाॅरमर्स फस्र्ट परियोजना का क्रियान्वयन पूर्वी चंपारण जिले में किया है, जिसमें 8 गांव (मेहसी प्रखंड - उझिलपुर, बखरी नजिर, दामोदरपुर गांव, चकिया प्रखंड - खैरवा, रामगढ़वा, विषनुपरा ओझा टोला - वैशहा एवं चिंतमानपुर - मलाही टोला गांव) के 1,000 किसान परिवार अनेक तकनीकों का लाभ ले रहे हैं। परिषद की यह एक अनोखी पहल है, जिसमें किसानों द्वारा ही उन्नत तकनीक का परीक्षण किया जा रहा है। इसे और अधिक लोगों तक पहुंचाने की जरूरत है। ‘मेरा गांव-मेरा गौरव’ कार्यक्रम के माध्यम से भी वैज्ञानिक अपनी तकनीकों को कुछ गांवों तक पहुंचाने में सफल रहे हैं। केन्द्र ने सायल हेल्थ कार्ड की योजना भी शुरू की है, जिसके माध्यम से किसानों के बागों का परीक्षण करके उन्हें उचित सलाह दी जा रही है। बिहार ही नहीं, देश के कई क्षेत्र हैं जहां लीची की सफल बागवानी हो सकती है। अतः इन क्षेत्रों में भी शोध को बढ़ावा देने की जरूरत है। श्री सिंह ने इस अवसर पर सभी वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों को बधाई दी और उम्मीद जताई कि इस संयंत्र का भरपूर उपयोग करके बिहार एवं देश के लीची किसानों, उत्पादकों एवं व्यापारियों को आमदनी बढ़ाने में मदद की जा सकेगी।
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भारत दुग्ध उत्पादन में प्रथम

  • राष्ट्रीय गोकुल मिशन की तरह ‘गिर गाय अभ्यारण्य’ को मंजूरी
  • सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने को प्रतिबद्ध
नई दिल्ली : केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि भारत सरकार द्वारा पशुपालन के क्षेत्र में गुजरात में अनेक नई पहल की गई हैं। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत गोकुल ग्राम की तर्ज पर ‘गिर गाय अभ्यारण्य’  स्थापित करने की मंजूरी दी गई है। यह धर्मपुर, पोरबंदर में स्थापित किया जाएगा। पशुधन बीमा कवरेज में जहां पहले 2 दुधारू पशुओं को शामिल किया गया था, वहीं अब इसमें 5 दुधारू पशुओं और 50 छोटे जानवरों को शामिल किया गया है। यह योजना राज्य के सभी जिलों में लागू कर दी गई है, जबकि इससे पहले इसमें 15 जिले ही शामिल थे। वर्ष 2014-16 के दौरान राज्य में लगभग 26,000 पशुओं का बीमा किया गया। पशु-चिकित्सा शिक्षा में चिकित्सकों की कमी को पूरा करने के लिए जूनागढ़ में एक कॉलेज स्थापित किया गया है। कृषि मंत्री ने यह बात कामधेनु विश्वविद्यालय, साबरकांठा, गुजरात में पॉली-टेक्नीक के उद्घाटन के अवसर पर कही।
कृषि मंत्री ने कहा कि यह बड़े गर्व का विषय है कि देश दुग्ध उत्पादन में प्रथम स्थान पर है। वर्ष 2015-16 में दुग्ध उत्पादन की वृद्धि दर 6.28 प्रतिशत रही है, जिससे कुल उत्पादन 156 मिलियन टन तक पहुंच गया है। इससे भारत में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता औसतन 337 ग्राम प्रतिदिन हो गई है, जबकि विश्वस्तर पर यह औसतन 229 ग्राम ही है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2011-14 के मुकाबले वर्ष 2014-17 में दुग्ध उत्पादन वृद्धि 16.9 प्रतिशत हुई है।
उन्होंने कहा कि ज्यों-ज्यों शहरी एवं ग्रामीण परिवारों का जीवन स्तर बढ़ता जा रहा है, त्यों-त्यों पशुजन्य प्रोटीन की मांग भी बढ़ती जा रही है। इसलिए यह आवश्यक है कि हम पशुधन, मुर्गी एवं मछली उत्पादन की निरन्तर वृद्धि की ओर प्रयत्नशील हों, जिससे देश का प्रत्येक नागरिक सुपोषित और स्वस्थ रहे। इसलिए पशु-चिकित्सकों का यह कर्तव्य है कि वे पशुजन्य प्रोटीन की उपलब्धता को अधिकाधिक बढ़ाकर देश को स्वस्थ बनाने में योगदान दें।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसलिए किसानों की आय को दोगुना करने के भारत सरकार के संकल्प में पशु-चिकित्सा क्षेत्र की महती भूमिका है। पशु स्वस्थ रहेगा, तो उसकी उत्पादकता बढ़ेगी, जिससे स्वतः ही किसान की आय बढ़ेगी और राष्ट्र आर्थिक खुशहाली के मार्ग पर आगे बढ़ेगा।
कृषि मंत्री ने कहा कि भारत में पशुधन की संख्या विश्व में सबसे ज्यादा 512.05 मिलियन है, जिसमें 199.1 मिलियन गोपशु, 105.3 मिलियन भैंस, 71.6 मिलियन भेड़ और 140.5 मिलियन बकरी हैं। बकरियों की संख्या के मामले में भारत का विश्व में दूसरा स्थान है और भारत की पशु संख्या में इसकी लगभग 25 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। भारतीय पोल्ट्री इंडस्ट्री भी विश्व के दूसरे सबसे बड़े बाजार के रूप में उभर रही है, जिसमें 63 बिलियन अण्डा और 649 मिलियन पोल्ट्री मीट उत्पादन शामिल है। भारत की समुद्रीय एवं फिश इंडस्ट्री लगभग 7 प्रतिशत की यौगिक वार्षिक वृद्धि दर के साथ आगे बढ़ रही है। कुल मिलाकर, भारतीय पशुधन सेक्टर तेज गति से आगे बढ़ रहा है और ग्लोबल बाजार में एक प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में उभर रहा है।
कृषि मंत्री ने कहा कि भारत सरकार का विशेष जोर है कि विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों में शिक्षा की गुणवत्ता अंतर्राष्ट्रीय स्तर की हो। इस दिशा में आईसीएआर की पांचवीं डीन समिति की रिपोर्ट को अनुमोदित कर दिया गया है। स्टूडेन्ट और आर्या जैसी योजनाएं स्कॉलरशिप के साथ प्रारंभ की गई है। छात्रों की स्कॉलरशिप को भी बढ़ाया गया है। उन्होंने आखिर में कहा कि राष्ट्र की समृद्धि के लिए देश की कृषि की प्रगति और किसान को खुशहाल बनाने के लिए एकसाथ मिलकर प्रयास करने की जरूरत है। कृषि आगे बढ़ेगी, किसान खुशहाल होगा, तो निश्चित रूप से राष्ट्र आगे बढ़ेगा।
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पद्म पुरस्कार के नामांकन की आखिरी तिथि 15 सितंबर

 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : पद्म पुरस्कार 2018 के लिए नामांकन की प्रक्रिया 1 मई, 2017 से शुरू है। पद्म पुरस्कार 2018 के लिए नामांकन प्राप्त करने की अंतिम तिथि 15 सितंबर, 2017 है। पद्म पुरस्कार के लिए नामांकन / सिफारिशें केवल गृह मंत्रालय द्वारा डिजाइन किए गए पद्म पोर्टल पर, जो www.padmaawards.gov.in पर उपलब्ध हैं, ऑनलाइन ही प्राप्त की जायेंगी। पद्म पोर्टल पर सभी पिछले पुरस्कार विजेताओं का विवरण भी उपलब्ध है। 15 सितंबर, 2017 के बाद प्राप्त नामांकनों पर विचार नहीं किया जाएगा। 

स्वीडन ने स्मार्ट सिटी के विकास में रुचि दिखायी

नई दिल्ली : देश में स्मार्ट सिटी के विकास की पहल में अपनी दिलचस्पी व्यक्त करते हुए स्वीडन ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के अतिरिक्त सतत व हरित सार्वजनिक परिवहन को प्रोत्साहित करने के लिए अपनी विशेषज्ञता और तकनीक को अमल में लाने के लिए एक संयुक्त कार्य योजना का सुझाव दिया है।
स्वीडन की यूरोपीय मामले एवं व्यापार मंत्री एन लिंडे ने शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू से भेंट की और स्मार्ट सिटी के विकास संबंधी मुद्दों को लेकर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 में भारत और स्वीडन ने सतत शहरी विकास के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे और स्मार्ट सिटी अभियान ने इस समझौता ज्ञापन को एक मूर्तरूप देने के लिए एक अवसर प्रदान किया है।
नई दिल्ली में स्वीडन की मंत्री ने कहा कि अपशिष्ट प्रबंधन, शहरी परिवहन समाधान, वायु को स्वच्छ करने, स्मार्ट पार्किंग प्रणाली, वास्तविक समय सूचना प्रणाली, कमांड एवं कंट्रोल सिस्टम इत्यादि के क्षेत्र में उनका देश वैश्विक नेता है। ये क्षेत्र भारत की स्मार्ट सिटी परियोजना का अभिन्न अंग हैं। इसके बाद उन्होंने कहा कि स्वीडन की कंपनी स्कैनिया जल्द ही नागपुर में 55 इथोनॉल बसों का परिचालन शुरू करेगी।
श्री नायडू ने इस बात को रेखांकित करते हुए कि स्मार्ट सिटी अभियान से भारतीय और विदेशी दोनों कंपनियों के लिए निवेश के अत्यधिक अवसर पैदा होंगे, कहा कि चयनित स्मार्ट सिटीज के लिए स्वीडन की तकनीक से लाभान्वित होना बहुत अच्छा होगा, खासतौर पर सार्वजनिक परिवहन और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में। उन्होंने स्वीडन की मंत्री को सुझाव दिया कि वह स्वीडन की कंपनियों को संबंधित शहरों में स्मार्ट सिटी योजना के कार्यान्वयन में भागीदारी के लिए साथ आने की सलाह दें।
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केशरी नाथ बने बिहार के राज्यपाल

पटना : भारतीय स्वतंत्रता-प्राप्ति के पश्चात् बिहार के 37वें महामहिम राज्यपाल के रूप में केशरी नाथ त्रिपाठी ने शपथ ली। इसके पूर्व भी पश्चिम बंगाल राज्य के राज्यपाल श्री त्रिपाठी ने बिहार के राज्यपाल के कृत्यों के निर्वहन हेतु शपथ ली थी और इनका कार्यकाल 27 नवम्बर, 2014 से प्रारंभ होकर 15 अगस्त, 2015 तक रहा था।
राज्यपाल ने हिन्दी भाषा में शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव, बिहार विधान सभा के अध्यक्ष विजय कुमार चैधरी, बिहार विधान परिषद् के उप-सभापति हारूण रषीद, बिहार विधान परिषद् मंे नेता-प्रतिपक्ष, बिहार विधान सभा में नेता-प्रतिपक्ष, बिहार सरकार के कई मंत्रीगण, न्यायाधीषगण, बिहार विधानमंडल के कई सदस्यगण, विभिन्न आयोगांे, समितियांे, बोर्डों, निगमों, प्राधिकारों आदि के अध्यक्ष/उपाध्यक्ष, राज्य सरकार के वरीय प्रशासनिक अधिकारीगण, विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक दलों के प्रतिनिधिगण एवं अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।
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1 जुलाई से जीएसटी लागू

 संक्षिप्त खबरें 
जम्मू कश्मीर को छोड़ सभी राज्यों व संघ शासित प्रदेशों ने राज्य जीएसटी अधिनियम को मंजूरी दी
नई दिल्ली : जम्मू कश्मीर को छोड़कर सभी राज्यों/संघ शासित प्रदेशों ने राज्य वस्तु और सेवा कर (एसजीएसटी) अधिनियम को मंजूरी दे दी है। केरल ने जीएसटी अधिनियम को मंजूरी देते हुए एक अध्यादेश जारी किया, जबकि पश्चिम बंगाल इस संबंध में 15 जून, 2017 को एक अध्यादेश जारी कर चुका है। अब केवल जम्मू कश्मीर राज्य बचा है, जिसे राज्य जीएसटी अधिनियम को पारित करना है। अतः 30 राज्यों/संघ शासित प्रदेशों सहित लगभग समूचा देश 1 जुलाई, 2017 से सुचारू तरीके से जीएसटी लागू करने के लिए तैयार है।
जीएसटी लागू होने के बाद आम आदमी के दैनिक उपयोग वाली उपभोक्ता वस्तुएं सस्ती हो जाएंगी। जीएसटी कानून के प्रभावी हो जाने के बाद निम्नलिखित वस्तुओं पर जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) शून्य दर के साथ लागू होगा। 
निम्नलिखित वस्तुएं आम आदमी को सस्ती मिलेंगी :
  • खाद्यान्न एवं आटा
  • मोटे अनाज
  • दालें
  • आटा
  • मैदा
  • बेसन

पंजीकृत ट्रेडमार्क वाली वस्तुओं को छोड़कर जिनके मामले में जीएसटी 5 फीसदी की दर से लगेगा।
  • ताजा दूध
  • ताजा सब्जियां एवं ताजे फल
  • मुरमुरा (मूरी)
  • सामान्य नमक
  • पशु चारा
  • कार्बनिक खाद
  • जलावन लकड़ी
  • कच्चा रेशम, कच्चा ऊन, जूट
  • हस्त संचालित कृषि उपकरण।

पटना सहित 30 और शहर स्मार्ट सिटी घोषित

नई दिल्ली : केन्द्र सरकार ने स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किए जाने के लिए 30 और शहरों का चयन किया है। इन्हें मिलाकर 25 जून, 2015 को घोषित स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत शहरों की कुल संख्या 90 हो गई है।
नए शहरों के नामों की घोषणा शहरी रूपांतरण के बारे में आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यशाला में आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने की। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत अभी 40 शहर और शामिल किए जाने थे, जिनके लिए 45 शहरों से प्रस्ताव प्राप्त हुए, लेकिन केवल 30 का चयन किया गया, क्योंकि इस मिशन की घोषणा करते समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने निर्देश दिया था कि नागरिकों की आकांक्षाओं के अनुरूप सुविधाएं जुटाने के लिए यह सुनिश्चित किया जायेगा कि केवल व्यवहार्य और साध्य योजनाएं इसमें शामिल की जाएं।
श्री नायडू ने बताया कि घोषित 30 शहरों की स्मार्ट सिटी योजना के लिए रु. 46,879 करोड़ के व्यय का प्रस्ताव है। उन्होंने बताया कि शेष 10 स्लॉटों के लिए 20 शहरों के बीच प्रतिस्पर्धा है। श्री नायडू ने बताया कि स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किए जाने के कार्यक्रम के अंतर्गत शहरों का चयन सही वक्त पर किया जा रहा है और शेष शहर खाली स्लॉटों के लिए शीघ्र ही अपनी संशोधित स्मार्ट सिटी योजनाएं प्रस्तुत करेंगे।

केंद्र द्वारा हिंदी थोपने का कोई विचार नहीं 

नई दिल्ली : मीडिया के एक वर्ग में यह खबर आई थी कि केंद्र सरकार हिंदी थोपने की कोशिश कर रही है। इस संबंध में गृह मंत्रालय के आधिकारिक भाषा विभाग द्वारा जारी प्रस्ताव का उल्लेख करते हुए यह दावा किया गया था कि हिंदी जानने वाले संसद सदस्यों और मंत्रियों के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे हिंदी में ही अपने भाषण और बयान जारी करें।
उल्लेखनीय है कि 1976 में आधिकारिक भाषा पर संसद समिति का गठन किया गया था और वह तभी से काम कर रही है। इस समिति ने अपनी रिपोर्ट के 9 भाग सौंप दिए हैं। समिति की रिपोर्ट के 9वें भाग को 2 जून, 2011 में राष्ट्रपति को सौंपा गया था। समिति के तत्कालीन अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ने 117 अनुमोदन किये थे। चूंकि समिति के सुझावों पर राज्य सरकारों और केंद्र सरकार के मंत्रालयों व विभागों की राय आमंत्रित की जानी थी, इसलिए राष्ट्रपति द्वारा सुझावों पर विचार करने और उन्हें स्वीकार करने के पूर्व समय लगा था।
अनुमोदन नंबर 105 इस प्रकार है - ‘माननीय राष्ट्रपति और सभी मंत्रियों सहित समस्त विशिष्टजनों, खासतौर से जो हिंदी पढ़ने और बोलने में सक्षम हैं, उनसे आग्रह किया जाता है कि वे अपने भाषण/बयान केवल हिंदी में ही दें।’
केंद्र सरकार ने उपरोक्त अनुमोदन को स्वीकार करते हुए 31 मार्च, 2017 को एक प्रस्ताव जारी किया था। समिति का अनुमोदन बिलकुल स्पष्ट है। वह आग्रह के रूप में है, न की आदेश/निर्देश के रूप में। उपरोक्त अनुमोदन आधिकारिक भाषा हिंदी के संबंध में संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप है। इसके अलावा अनुमोदन प्रोत्साहन एवं प्रेरणा के जरिये आधिकारिक भाषा के उन्नयन पर आधारित है, जो सरकार की नीति के अनुपालन में है।
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