COPYRIGHT © RAJIV MANI, Journalist, Patna

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बुधवार, 26 जुलाई 2017

राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद का प्रोफाइल

सार्वजनिक जीवन और समाज में समतावाद तथा अखण्डता के पैरोकार रहे वकील, दिग्गज राजनीतिक प्रतिनिधि श्री रामनाथ कोविंद का जन्म 01 अक्टूबर, 1945 को उत्तर प्रदेश में कानपुर के निकट परौंख में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री मैकूलाल और माता का नाम श्रीमती कलावती था।
25 जुलाई, 2017 को भारत के 14वें राष्ट्रपति का कार्यभार ग्रहण करने से पहले श्री कोविंद ने 16 अगस्त, 2015 से 20 जून, 2017 तक बिहार के 36वें राज्यपाल के रूप में अपनी सेवा दी ।
शैक्षिक योग्यता और व्यावसायिक पृष्ठभूमि : श्री कोविंद ने अपनी स्कूली शिक्षा कानपुर में ग्रहण की और कानपुर विश्वविद्यालय से बी.कॉम तथा एलएलबी की डिग्री हासिल की। 1971 में उन्होंने दिल्ली बार काउंसिल के साथ एक वकील के रूप में नामांकन किया। श्री कोविंद 1977 से लेकर 1979 तक दिल्ली उच्च न्यायालय में केन्द्र सरकार के वकील रहे तथा 1980 से 1993 तक उच्चतम न्यायालय में केन्द्र सरकार के वकील रहे। 1978 में वे उच्चतम न्यायालय के ‘एडवोकेट-ऑन-रिकार्ड’ बने। 1993 तक उन्होंने कुल 16 साल तक दिल्ली उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में वकालत की।
संसदीय और सार्वजनिक जीवन : श्री कोविंद को अप्रैल, 1994 में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा का सदस्य चुना गया। उन्होंने लगातार दो बार राज्यसभा के सदस्य के रूप में मार्च, 2006 तक कार्य किया। श्री कोविंद ने विभिन्न संसदीय समितियों जैसे अनुसूचित जाति / जनजाति कल्याण संबंधी संसदीय समिति, गृह मामलों की संसदीय समिति, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस पर संसदीय समिति, सामाजिक न्याय और अधिकारिता संबंधी संसदीय समिति और कानून और न्याय संबंधी संसदीय समितियों में सेवा की। वह राज्यसभा हाउस कमेटी के चेयरमैन भी रहे। श्री कोविंद बी.आर. अम्बेडकर विश्वविद्यालय के प्रबंधन बोर्ड के सदस्य तथा भारतीय प्रबंधन संस्थान कोलकाता के बोर्ड ऑफ गवर्नस के सदस्य भी रहे। वह संयुक्त राष्ट्र में गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य भी रहे और अक्टूबर, 2002 में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया।
इन पदों पर किया कार्य :
2015-17 : बिहार के राज्यपाल
1994-2006 : उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य
1971-75 और 1981 : महासचिव, अखिल भारतीय कोली समाज
1977-79 : दिल्ली उच्च न्यायालय में केंद्र सरकार के वकील
1982-84 : सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के अधिवक्ता।
व्यक्तिगत विवरण : श्री कोविंद का विवाह 30 मई, 1974 को श्रीमती सविता कोविंद से हुई। श्री कोविंद के पुत्र का नाम प्रशांत कुमार और पुत्री का नाम सुश्री स्वाति है। पढ़ने-लिखने के शौकिन राष्ट्रपति कोविंद को राजनीतिक और सामाजिक परिवर्तनों, कानून और इतिहास तथा धर्म संबंधी किताबें पढ़ने में गहरी दिलचस्पी है। अपने लम्बे सार्वजनिक जीवन के दौरान श्री कोविंद ने कई देशों की यात्रा की है। संसद सदस्य के रूप में उन्होंने थाईलैंड, नेपाल, पाकिस्तान, सिंगापुर, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, फ्रांस, ब्रिटेन और संयुक्त राज्य अमेरिका का दौरा भी किया है।
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22 राज्यों में चुंगी (चेक पोस्ट) समाप्त

 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) 1 जुलाई, 2017 से लागू किया गया है। इसके लागू होते ही भारत में 22 राज्यों के सभी चुंगी (चेक पोस्ट) समाप्त कर दिये गये हैं।
विवरण इस प्रकार हैं : आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, गुजरात, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, सिक्किम, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गोवा, हरियाणा, झारखंड, ओडिशा, पुडुचेरी, राजस्थान, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड।
राज्य जहां चुंगियों (चेक पोस्ट) को समाप्त करने की प्रक्रिया जारी है : असम, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, नागालैंड, पंजाब, मिजोरम, त्रिपुरा।

जेल बंदियों के लिए वेब एप्लीकेशन लांच 

नई दिल्ली : राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) को जेल में कैद बंदियों को कानूनी सहायता प्रदान करने की जिम्मेदारी दी गई है। 28 जून, 2017 को भारतीय विधि संस्थान में आयोजित सम्मेलन में एनएएलएसए ने जेल बंदियों को निःशुल्क कानूनी सेवाएं देने के लिए वेब एप्लीकेशन लांच और एनआईसी के माध्यम से विकसित कानूनी सेवा प्रबंधन प्रणाली लांच किया। वेब एप्लीकेशन के माध्यम से राज्य कानूनी सेवा प्राधिकार तथा जिला कानूनी सेवा प्राधिकार अपने / अपने क्षेत्राधिकार के जेलों में प्रत्येक बंदी के लिए डाटा भरेंगे, ताकि अदालत में वकील के जरिये उनका प्रतिनिधित्व किया जा सके। यह साफ्टवेयर अपनी रिपोर्ट में कैदियों की कुल संख्या, बिना वकील वाले कैदियों की कुल संख्या, कानूनी सेवा अधिवक्ताओं द्वारा प्रतिनिधित्व किए गए बंदियों की संख्या और अपने निजी वकीलों द्वारा प्रतिनिधित्व कैदियों की संख्या का पता लग जायेगा।
सभी सूचनाएं राज्यवार, जिलेवार, और प्रत्येक जेल के संबंध में उपलब्ध होंगी। रिपोर्ट में कैदी के बंद रहने की अवधि की जानकारी मिलेगी और इससे यह सूचना प्राप्त होगी कि अपराध प्रक्रिया संहिता के सेक्शन 436 (ए) के तहत बंदी जमानत का पात्र है या नहीं। यह वेब एप्लीकेशन कानूनी सेवा प्रणाली को और पारदर्शी बनाएगा और कहीं से भी सभी सक्षम पदाधिकारी कैदियों को दी जाने वाली कानूनी सहायता की अनुमति पर नजर रख सकेंगे, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि अदालत में पेशी के पहले दिन से सभी बंदियों का प्रतिनिधित्व प्राप्त है।
वेब एप्लीकेशन उच्चतम न्यायलय के न्यायाधीश और एनएएलएसए के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा ने लांच किया। इस अवसर पर 18 राज्यों के कानूनी सेवा प्राधिकार के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ सदस्य सचिव शामिल हुए। वेब एप्लीकेशन लांच होने के बाद एनआईसीपीटी ने ओरियेंटेशन सत्र का आयोजन किया।
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